चाईबासा | सुमिता होता फाउंडेशन द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में कन्हाई सिंह ने अपने जीवन का पहला रक्तदान कर मानवता की सेवा का प्रेरणादायक संदेश दिया। शिविर के दौरान उन्होंने स्वेच्छा से रक्तदान करते हुए अन्य लोगों से भी इस पुण्य कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
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रक्तदान के पश्चात अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कन्हाई सिंह ने कहा कि पहली बार रक्तदान करने के बाद उन्हें गर्व और आत्मिक संतुष्टि का अनुभव हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि रक्तदान एक ऐसा नेक कार्य है, जिसके माध्यम से किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने सभी स्वस्थ लोगों से नियमित अंतराल पर रक्तदान करने का आग्रह किया।
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फाउंडेशन के सदस्यों ने कन्हाई सिंह के इस सराहनीय कदम की प्रशंसा करते हुए कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने कहा कि समाज में रक्तदान को जनआंदोलन का रूप देने के लिए युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चाईबासा | विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा एवं झारखंड भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व सांसद श्रीमती गीता कोड़ा ने अपने आवासीय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इस दौरान दोनों नेताओं ने आम जनता से प्रकृति को बचाने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की।
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“आज की पूँजी, कल का भविष्य”: मधु कोड़ा आवासीय परिसर में लगे आम के पेड़ों के बीच संदेश देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि जिन पेड़ों को उन्होंने पहले लगाया था, वे आज फल दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज की पूँजी ही कल का भविष्य है। पर्यावरण को स्वच्छ और संतुलित बनाए रखने के लिए सभी को पौधरोपण करना चाहिए।”
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उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को हर वर्ष ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधा अवश्य लगाना चाहिए, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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“पर्यावरण बचेगा तभी मानव जीवन बचेगा”: गीता कोड़ा पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने भी देश और प्रदेशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने बगीचे की झलक साझा करते हुए बताया कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने अपने आवासीय परिसर में आम, आँवला, रुद्राक्ष, कल्पतरु, सखुआ और जामुन जैसे अनेक फलदार एवं छायादार वृक्ष लगाए हैं, जो अब पूरी तरह विकसित हो चुके हैं।
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उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “पर्यावरण बचेगा, तभी हम सब बचेंगे। यदि पर्यावरण नहीं रहेगा तो मानव जीवन का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।” उन्होंने प्रधानमंत्री के संदेश को आगे बढ़ाते हुए सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुवा प्रखंड अंतर्गत धोलाबनी गांव में 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्राम मुंडा जगन्नाथ महली के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में थाना प्रभारी शशिबाला भेंगरा सहित प्रशासनिक टीम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रही।
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इस अवसर पर ग्रामीणों द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत जागरूकता रैली निकाली गई तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। रैली में गांव के महिला-पुरुष, युवा एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने अधिक से अधिक पेड़ लगाने, पर्यावरण को स्वच्छ रखने तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी शशिबाला भेंगरा ने सभी ग्रामवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण केवल पेड़-पौधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और स्वस्थ जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो समाज भी स्वस्थ और सुरक्षित रहेगा। उन्होंने पूर्वजों द्वारा लगाए गए वृक्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज हमें जो छाया, फल और शुद्ध हवा मिल रही है, वह उन्हीं का परिणाम है। इसलिए हमें भी आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए।
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वहीं ग्राम मुंडा जगन्नाथ महली ने अपने संबोधन में कहा कि कोल्हान क्षेत्र सदियों से जंगल, पहाड़, नदी और प्राकृतिक संपदाओं से समृद्ध रहा है। आदिवासी समाज ने हमेशा प्रकृति को अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवन का अभिन्न हिस्सा माना है। जल, जंगल और जमीन हमारी पहचान हैं और इनकी रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार पेड़ों की कटाई, बढ़ते प्रदूषण, प्लास्टिक के अंधाधुंध उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है, जिसका प्रभाव मौसम चक्र, वर्षा, जल स्रोतों और प्राकृतिक संतुलन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि आज हम पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में आम नागरिकों को आवश्यक दवाओं की निर्बाध एवं समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा नशा युक्त दवाओं की अवैध बिक्री एवं दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से समाहरणालय सभागार में उपायुक्त श्री मनीष कुमार एवं पुलिस अधीक्षक श्री अमित रेणु की संयुक्त अध्यक्षता में जिले के केमिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
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बैठक में शहरी क्षेत्रों में आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान भी 24×7 आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा की गई। इस क्रम में केमिस्ट एसोसिएशन को संगठन स्तर पर रोस्टर प्रणाली तैयार करने का निर्देश दिया गया, जिसके तहत निर्धारित समयावधि के अनुसार विभिन्न दवा दुकानों का संचालन किया जा सकेगा। इससे रात्रि समय अथवा आकस्मिक स्वास्थ्य परिस्थितियों में आम नागरिकों को दवाओं की उपलब्धता में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।
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उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी व्यवस्थाएं सीधे तौर पर आम जनता की मूल आवश्यकताओं से संबंधित हैं, इसलिए दवा दुकानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने दवा विक्रेताओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर बल देते हुए कहा कि आवश्यक दवाओं की उपलब्धता के साथ-साथ नियमों का पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में नशा युक्त अथवा प्रतिबंधित दवाओं की अनियमित एवं अवैध बिक्री नहीं होनी चाहिए। सभी दवा विक्रेता लाइसेंस शर्तों एवं दवा नियंत्रण संबंधी प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ दवाओं का दुरुपयोग नशे के उद्देश्य से किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिस पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।
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पुलिस अधीक्षक श्री अमित रेणु ने बैठक में दवा दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने सभी दवा प्रतिष्ठानों में दुकान के अंदर एवं बाहर कार्यशील सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा उनके फुटेज को निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इससे संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई में सहायता मिलेगी। साथ ही उन्होंने दवा विक्रेताओं से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा असामान्य मात्रा में दवाओं की खरीद की जाती है या कोई गतिविधि संदिग्ध प्रतीत होती है, तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन या पुलिस को दी जाए।
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बैठक में उप विकास आयुक्त श्री उत्कर्ष कुमार, सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी, पोड़ाहाट–चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी सुश्री श्रुति राजलक्ष्मी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, औषधि नियंत्रण विभाग के प्रतिनिधि तथा जिले के केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित रहे। अंत में प्रशासन की ओर से सभी संबंधित पक्षों से जनहित को प्राथमिकता देते हुए समन्वित रूप से कार्य करने की अपील की गई।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में पल्स पोलियो अभियान एवं राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी सहित विभिन्न जिला एवं क्षेत्रीय स्तरीय पदाधिकारी भौतिक रूप से उपस्थित रहे, जबकि अन्य संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
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बैठक में जिले में आगामी पल्स पोलियो अभियान (28 जून) तथा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (15 जून) के सफल संचालन को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान दोनों स्वास्थ्य कार्यक्रमों के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने कहा कि पल्स पोलियो अभियान और राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस दोनों ही कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षित भविष्य से सीधे जुड़े हुए हैं। इसलिए इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय, सुदृढ़ कार्ययोजना तथा जमीनी स्तर पर सतत निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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बैठक में पल्स पोलियो अभियान के तहत शून्य से पांच वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाने के लिए बूथवार तैयारी, माइक्रोप्लान, दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच, मोबाइल टीमों की तैनाती, स्वास्थ्य कर्मियों एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं की सहभागिता तथा शत-प्रतिशत बच्चों को कवर करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ सुदूरवर्ती एवं विशेष क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक बच्चे तक अभियान की पहुंच सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।
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वहीं, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत बच्चों एवं किशोरों को कृमि संक्रमण से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं अन्य निर्धारित संस्थानों के माध्यम से दवा वितरण और सेवन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों को सुरक्षित रूप से दवा उपलब्ध कराने, अनुपस्थित बच्चों के लिए मॉप-अप गतिविधियां संचालित करने तथा स्वास्थ्य विभाग, विद्यालय शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
समीक्षा के दौरान व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि अधिक से अधिक अभिभावकों तक कार्यक्रमों की जानकारी पहुंचाने और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों, सहिया, आंगनबाड़ी सेविकाओं, स्वास्थ्यकर्मियों एवं अन्य स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए। बैठक के अंत में जिला प्रशासन ने आमजनों से अपील की कि वे अपने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए इन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा निर्धारित तिथियों पर बच्चों को संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अवश्य दिलाएं।
चाईबासा | विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण और हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लोगों को जागरूक किया गया तथा अधिक से अधिक पौधे लगाने एवं उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया गया।
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इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल हमारी जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की आधारशिला भी है। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वच्छ, सुंदर और हरित वातावरण के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
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उपायुक्त ने कहा कि वृक्षारोपण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का प्रभावी माध्यम है। इससे न केवल जैव विविधता का संरक्षण होता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। उन्होंने लोगों से कम से कम एक पौधा लगाने के साथ-साथ उसकी देखभाल का भी संकल्प लेने का आग्रह किया।
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कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं स्थानीय लोगों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने का संदेश भी दिया गया।
चक्रधरपुर | विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को नगर परिषद चक्रधरपुर द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुदलीबाड़ी श्मशान घाट के समीप वृक्षारोपण कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
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कार्यक्रम में नगर परिषद के उपाध्यक्ष विजय साव, अंचलाधिकारी सुरेश चंद्र सिन्हा, कार्यपालक पदाधिकारी विजय हांसदा, नगर प्रबंधक अभिषेक राहुल, राहुल कुमार सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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इस अवसर पर उपाध्यक्ष विजय साव ने कहा कि इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवनकाल में कम से कम 10 पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।
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वहीं, कार्यपालक पदाधिकारी विजय हांसदा ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण तथा सतत विकास के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
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कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने तथा स्वच्छ वातावरण के निर्माण हेतु सामूहिक रूप से संकल्प भी लिया।
मंझारी | विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मंझारी मंडल की ओर से उत्क्रमित मध्य विद्यालय भरभरिया परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व अभियान संयोजक गुरुचरण बानकीरा ने किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री बड़कुवर गागराई ने कहा कि पौधारोपण एक पुण्य कार्य है और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आगे आना चाहिए। उन्होंने लोगों से वर्ष में कम से कम पांच पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
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पूर्व मंत्री ने कहा कि वर्तमान में यह अभियान सांकेतिक रूप से चलाया जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में भाजपा कार्यकर्ता इसे बूथ स्तर तक ले जाकर व्यापक पौधारोपण अभियान संचालित करेंगे। उन्होंने आम लोगों से भी पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
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कार्यक्रम में मंडल प्रभारी प्रताप कटियार, महतो बबलू बिरूवा, हरिश्चंद्र केसरी, रामचंद्र गोप, सोनाराम बिरूवा, मिथिलेश कुमार नंद, कमलेश्वर बेहरा सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस अवसर पर सभी ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत टाटा कॉलेज, चाईबासा परिसर स्थित बहुउद्देशीय सभागार में जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में रसोईया एवं संयोजिकाओं के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार एवं जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार भी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं पौष्टिक मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराना, उनके पोषण स्तर में सुधार लाना तथा विद्यालय आधारित स्वास्थ्य एवं स्वच्छता गतिविधियों को सुदृढ़ करना था। कार्यशाला में मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता मानक, पोषण प्रबंधन, विद्यालयों में पोषण वाटिका निर्माण, स्वास्थ्य जागरूकता एवं विभिन्न जनकल्याणकारी अभियानों से संबंधित विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास में शिक्षा और पोषण दोनों की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक स्वस्थ एवं पोषित बच्चा ही बेहतर तरीके से शिक्षा ग्रहण कर सकता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास का भी महत्वपूर्ण मंच है। उपायुक्त ने कहा कि रसोईया एवं संयोजिकाएं बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य निर्माण से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यालयों में तैयार होने वाले मध्यान्ह भोजन में पौष्टिकता, गुणवत्ता एवं स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि भोजन तैयार करने के दौरान निर्धारित मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा खाद्य सामग्री के चयन से लेकर भोजन परोसने तक की पूरी प्रक्रिया में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए।
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उन्होंने कहा कि भोजन केवल बच्चों की भूख मिटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास से भी सीधे जुड़ा हुआ है। कार्यशाला के दौरान उपायुक्त ने विद्यालयों में पोषण वाटिका विकसित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यालय परिसर में पोषण वाटिका तैयार की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर हरी सब्जियां, फल एवं अन्य पोषक खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि पोषण वाटिका बच्चों में पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी। विद्यालय परिसरों में उपलब्ध भूमि का उपयोग करते हुए मौसमी सब्जियां, फलदार एवं औषधीय पौधे लगाने के निर्देश भी दिए गए।
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उपायुक्त ने कहा कि विद्यालयों में कार्यरत रसोईया एवं संयोजिकाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है, ताकि वे खाद्य सुरक्षा, पोषण संतुलन, स्वच्छता मानकों तथा सुरक्षित खाद्य प्रबंधन से संबंधित अद्यतन जानकारी प्राप्त कर सकें। कार्यशाला में प्रतिभागियों को संतुलित भोजन तैयार करने, बच्चों की पोषण आवश्यकताओं को समझने, स्वच्छ रसोई संचालन, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन परोसने से संबंधित व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। रसोईघरों की आधारभूत व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी विद्यालयों के रसोईघर स्वच्छ, यथासंभव धुआं एवं प्रदूषण मुक्त तथा पर्याप्त प्रकाश एवं वेंटिलेशन युक्त हों। सुरक्षित एवं स्वास्थ्यकर वातावरण में भोजन तैयार किए जाने को सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण एवं आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए।
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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उपायुक्त ने विद्यालयों में पौधारोपण अभियान संचालित करने का निर्देश देते हुए कहा कि सभी विद्यालय निर्धारित तिथि पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित करें तथा बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक दायित्व है। कार्यशाला के दौरान मलेरिया जागरूकता माह, “चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो” अभियान तथा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता एवं सामाजिक जागरूकता से संबंधित विषयों पर शपथ ग्रहण कर समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रत्येक माह की 20 तारीख को विद्यालयों में आयोजित होने वाले तिथि भोजन कार्यक्रम के सफल संचालन में उत्कृष्ट योगदान देने वाली लगभग 36 रसोईया एवं संयोजिकाओं को प्रशस्ति पत्र एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के एपीओ, बीआरपी, सीआरपी सहित लगभग 1500 रसोईया एवं संयोजिकाओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
सरायकेला | विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह ने साहिबगंज स्थित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के साथ वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त रीना हांसदा एवं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर भी उपस्थित रहीं।
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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने वृद्धाश्रम में उपलब्ध आवासीय, स्वास्थ्य एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने वृद्धजनों से संवाद कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। साथ ही, बढ़ती गर्मी को देखते हुए कूलर, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
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उपायुक्त ने वृद्धाश्रम परिसर में वरिष्ठ नागरिकों द्वारा की जा रही फल एवं सब्जी की खेती का भी अवलोकन किया और उनके आत्मनिर्भरता के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारी को नियमित रूप से वृद्धाश्रम का भ्रमण कर आवश्यक बीज, कृषि सामग्री एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने तथा कृषि गतिविधियों को और प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया।
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इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक, सुरक्षित और स्वस्थ जीवन उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को भी मजबूत बनाते हैं।