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जिला स्तरीय खेलो झारखंड प्रतियोगिता का चाईबासा में शुभारंभ, खिलाड़ियों ने दिखाया उत्साह

जिला स्तरीय खेलो झारखंड प्रतियोगिता का चाईबासा में शुभारंभ, खिलाड़ियों ने दिखाया उत्साह

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और विद्यालय स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित जिला स्तरीय “खेलो झारखंड” प्रतियोगिता 2026-27 का सोमवार को पुलिस केंद्र, चाईबासा में उत्साहपूर्ण माहौल में शुभारंभ हुआ। प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में जिले के विभिन्न प्रखंडों से चयनित बालक-बालिकाओं ने पूरे जोश और उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

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समारोह का उद्घाटन उपायुक्त मनीष कुमार, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, चाईबासा नगर परिषद अध्यक्ष नितिन प्रकाश, गोपनीय प्रभारी कुमार हर्ष, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार एवं जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों का बैज लगाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।

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उद्घाटन के बाद अतिथियों ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और उनके उत्साह एवं खेल भावना की सराहना की। इसके बाद हरी झंडी दिखाकर एथलेटिक्स प्रतियोगिता का विधिवत शुभारंभ किया गया। प्रतियोगिता शुरू होते ही खिलाड़ियों ने पूरे आत्मविश्वास और उत्साह के साथ अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मैदान में मौजूद शिक्षक-प्रशिक्षकों और अन्य खिलाड़ियों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
प्रखंड स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी ले रहे हिस्सा
जिला स्तरीय प्रतियोगिता में अंडर-17 आयु वर्ग के स्कूली बालक एवं बालिकाएं हिस्सा ले रहे हैं। जिले के विभिन्न प्रखंडों में आयोजित प्रखंड स्तरीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता एवं चयनित खिलाड़ियों को जिला स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला है।

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प्रतियोगिता के तहत एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, फुटबॉल और हॉकी सहित विभिन्न खेल विधाओं में खिलाड़ी अपनी प्रतिभा एवं कौशल का प्रदर्शन करेंगे। जिला स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
“खेल और खिलाड़ी देश की जरूरत हैं” : उपायुक्त
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि “खेल और खिलाड़ी देश की जरूरत हैं।” खेल केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और निरंतर मेहनत की प्रवृत्ति विकसित होती है।

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उन्होंने खिलाड़ियों से पढ़ाई के साथ-साथ खेल को भी पूरी गंभीरता और लगन के साथ अपनाने की अपील की। उपायुक्त ने कहा कि ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत है कि इन प्रतिभाओं को उचित मंच, प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि वे अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन करें और मेहनत के बल पर पश्चिमी सिंहभूम जिले एवं झारखंड का नाम रोशन करें। साथ ही, जीत-हार से ऊपर उठकर खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने और अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर बनाने पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि आज प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाला प्रत्येक खिलाड़ी भविष्य में जिले, राज्य और देश का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

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डीडीसी ने भी खिलाड़ियों का बढ़ाया उत्साह
उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेलों में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास, अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास जरूरी है। उन्होंने खिलाड़ियों से प्रतियोगिता के दौरान पूरी खेल भावना एवं अनुशासन के साथ प्रदर्शन करने तथा अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर आयोजित ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे निखारने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

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खेल प्रतिभाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर
चाईबासा नगर परिषद अध्यक्ष नितिन प्रकाश ने भी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिले में खेल प्रतिभाओं की समृद्ध परंपरा रही है। जिले के युवाओं में विभिन्न खेल विधाओं के प्रति विशेष प्रतिभा और रुचि है। ऐसे आयोजन इन प्रतिभाओं को उचित मंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से पूरी मेहनत और उत्साह के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों एवं अतिथियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। विभिन्न प्रखंडों से आए प्रतिभागियों में भी प्रतियोगिता को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
जिला स्तरीय “खेलो झारखंड” प्रतियोगिता 2026-27 विद्यालयी विद्यार्थियों को अपनी खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ जिले में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रतियोगिता के माध्यम से उभरती खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें राज्य एवं उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।

लाको बोदरा जयंती पर साहित्य संगोष्ठी आयोजित, विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए गीत, कविता और सांस्कृतिक कार्यक्रम

लाको बोदरा जयंती पर साहित्य संगोष्ठी आयोजित, विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए गीत, कविता और सांस्कृतिक कार्यक्रम

चाईबासा | कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के हो विभाग की ओर से शनिवार को विश्वविद्यालय सभागार में महान हो भाषा एवं साहित्यकार ओत गुरु लाको बोदरा की जयंती सह साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लाको बोदरा के भाषा, साहित्य एवं सांस्कृतिक योगदान को स्मरण करना तथा युवा पीढ़ी को उनके कार्यों और विचारों से परिचित कराना था।

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कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं लाको बोदरा के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। विभाग की ओर से डॉ. बसंत चाकी ने अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र एवं पौधा भेंट कर किया।
समारोह में हो साहित्यकार एवं समाजसेवी सोनू हेस्सा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि आदिवासी हो समाज महासभा के उपाध्यक्ष नरेश देवगम विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में मानविकी संकाय के संकायाध्यक्ष सह जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार पीयूष, ओड़िया विभागाध्यक्ष डॉ. विधु भूषण भुईया, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. निवारण महथा, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज कैवर्त, गणित विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता, वनस्पति विभागाध्यक्ष डॉ. दारा सिंह सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

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विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए गीत, कविता और सांस्कृतिक कार्यक्रम
साहित्य संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों ने लाको बोदरा के जीवन, भाषा एवं साहित्यिक योगदान पर अपने विचार और भाषण प्रस्तुत किए। इसके बाद हो गीत, संगीत, कविता तथा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से हो समाज की समृद्ध भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं की झलक देखने को मिली।
मुख्य अतिथि सोनू हेस्सा ने विद्यार्थियों को गीत, कविता एवं कहानी के माध्यम से साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने साहित्य सृजन के महत्व पर विशेष जोर दिया।

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विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार पीयूष ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए अपनी कला एवं संस्कृति से जुड़े रहना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्हें अपनी पढ़ाई पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि नरेश देवगम ने हो भाषा के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने लाको बोदरा को ‘ओत गुरु’ की उपाधि दिए जाने से जुड़ी जानकारी साझा की तथा हो व्याकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

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डॉ. बसंत चाकी ने कहा कि लाको बोदरा का जीवन हो समाज के उत्थान तथा भाषा-संस्कृति के विकास के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में वैज्ञानिक सोच और तकनीक के माध्यम से समाज के विकास की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

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डॉ. सुभाष चंद्र महतो ने लाको बोदरा के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हो भाषा और उसकी पहचान को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। वहीं दानगी सोरेन ने कहा कि लाको बोदरा जयंती केवल उनके स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य से जोड़ने का माध्यम भी है।

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कार्यक्रम के अंत में डॉ. बसंत चाकी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह में शिक्षण सहायक मादे कोड़ा, गोरंगो मुर्मू, बाल किशोर महतो, पूर्व शिक्षण सहायक गोनो अल्डा, रामदेव बोयपाई, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन अतिथियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करने के बाद सामूहिक राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

दुर्गम क्षेत्रों में SSB का नागरिक कल्याण कार्यक्रम, 20 महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण और 16 टीमों की हॉकी प्रतियोगिता शुरू

दुर्गम क्षेत्रों में SSB का नागरिक कल्याण कार्यक्रम, 20 महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण और 16 टीमों की हॉकी प्रतियोगिता शुरू

कुचाई | सरायकेला-खरसावां जिले के अति दुर्गम क्षेत्रों में ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने, महिलाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल से प्रशिक्षित करने तथा युवाओं को खेल और सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 26वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB), रांची की ओर से नागरिक कल्याण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कुचाई प्रखंड अंतर्गत रोलाहातु पंचायत के ए-समवाय जोम्बरो में आयोजित हुआ।

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कार्यक्रम के दौरान सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही परमवीर चक्र विजेता शहीद अल्बर्ट एक्का की वीरता और बलिदान को समर्पित अंतर-ग्रामीण हॉकी प्रतियोगिता का उद्घाटन किया गया। वहीं, ‘सुरक्षा वीर निर्माण कार्यक्रम’ के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के बीच प्रमाण-पत्रों का वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम में सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त नितिश कुमार, विशेष अभियान क्षेत्रीय मुख्यालय गयाजी के उपमहानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी, संजीवनी सेवा समिति के सचिव, 26वीं वाहिनी SSB के अधिकारी एवं जवान, स्थानीय जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी, प्रशिक्षणार्थी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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दीप प्रज्वलन और SSB गीत से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, दीप प्रज्वलन और SSB गीत के साथ हुआ। इसके बाद 26वीं वाहिनी SSB के कमांडेंट शाश्वत कुमार, IPS ने स्वागत संबोधन दिया। उन्होंने सुरक्षा दायित्वों के निर्वहन के साथ नक्सल विरोधी अभियान, दुर्गम क्षेत्रों में नागरिक कल्याण, महिला कौशल विकास, खेलकूद और युवा सशक्तीकरण के लिए SSB द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की भूमिका केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। स्थानीय समुदाय के साथ समन्वय स्थापित कर जनकल्याण और विकास से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना भी सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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20 महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इसमें रोलाहातु पंचायत की 20 महिलाएं प्रतिभागी के रूप में शामिल हुईं। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई जैसे उपयोगी और रोजगारोन्मुखी कौशल से प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।
16 ग्रामीण टीमों के बीच हॉकी प्रतियोगिता शुरू
इस अवसर पर परमवीर चक्र विजेता शहीद अल्बर्ट एक्का की वीरता और बलिदान को समर्पित अंतर-ग्रामीण हॉकी प्रतियोगिता का उद्घाटन किया गया। प्रतियोगिता में कुल 16 ग्रामीण टीमें हिस्सा ले रही हैं।

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प्रतियोगिता का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं और खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है। खेलों के माध्यम से युवाओं में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रतियोगिता को लेकर स्थानीय खिलाड़ियों और ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा गया।
‘सुरक्षा वीर निर्माण’ प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र
कार्यक्रम में 26वीं वाहिनी SSB द्वारा संचालित ‘सुरक्षा वीर निर्माण कार्यक्रम’ के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण एवं स्थानीय युवाओं में अनुशासन, शारीरिक दक्षता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

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कार्यक्रम के माध्यम से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, पुलिस बलों और सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन तथा आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रमाण-पत्र वितरण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, नियमित अभ्यास करने तथा अनुशासन और परिश्रम के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
सुरक्षा बल और ग्रामीणों के बीच मजबूत हुआ समन्वय
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने 26वीं वाहिनी SSB द्वारा सुरक्षा दायित्वों के साथ-साथ नागरिक कल्याण, महिला कौशल विकास, खेलकूद और युवा सशक्तीकरण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल, जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय एवं सहयोग से दुर्गम क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण की गतिविधियों को और गति दी जा सकती है।

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इस अवसर पर ग्रामीणों, महिलाओं, खिलाड़ियों और युवाओं ने SSB द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए आभार जताया। कार्यक्रम के माध्यम से सुरक्षा बल और स्थानीय समुदाय के बीच आपसी विश्वास, सहयोग और बंधुत्व की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
26वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, रांची ने “सेवा, सुरक्षा और बंधुत्व” की भावना के अनुरूप स्थानीय समुदाय के साथ निरंतर संवाद और सहयोग बनाए रखते हुए नागरिक कल्याण, कौशल विकास, खेलकूद, युवा सशक्तीकरण और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम भविष्य में भी जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

शिक्षक दिवस पर सीएम उत्कृष्ट प्लस टू जिला हाई स्कूल में भव्य समारोह, उपायुक्त मनीष कुमार ने शिक्षकों के योगदान को सराहा

शिक्षक दिवस पर सीएम उत्कृष्ट प्लस टू जिला हाई स्कूल में भव्य समारोह, उपायुक्त मनीष कुमार ने शिक्षकों के योगदान को सराहा

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के सीएम उत्कृष्ट प्लस टू जिला हाई स्कूल के सभागार में शिक्षक दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार शामिल हुए। इस अवसर पर सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों के पारंपरिक रीति-रिवाज से आत्मीय स्वागत के साथ हुई। इसके बाद उपायुक्त मनीष कुमार एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। छात्र-छात्राओं ने गीत, संगीत एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षक दिवस के महत्व और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।

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समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि शिक्षक केवल वह व्यक्ति नहीं है, जो विद्यालय में हमें पाठ पढ़ाता है, बल्कि जीवन में जिस किसी व्यक्ति से हमें सीख, अनुभव, मार्गदर्शन या प्रेरणा मिलती है, वह भी किसी न किसी रूप में हमारे लिए शिक्षक के समान है। उन्होंने कहा कि जीवन निरंतर सीखने की प्रक्रिया है और प्रत्येक अनुभव हमें कुछ नया सिखाता है।

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उपायुक्त ने कहा कि शिक्षक समाज का ऐसा महत्वपूर्ण वर्ग है, जो निरंतर ज्ञान, संस्कार, मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करता है। शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को निखारने के साथ-साथ उनमें भविष्य के प्रति विश्वास और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं। वे अपने ज्ञान और अनुभव को समाज के साथ साझा करते हैं और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए समाज का दायित्व है कि वह शिक्षकों के योगदान को समझे और उन्हें उचित सम्मान प्रदान करे।

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उन्होंने कहा कि आज हम सभी जिस मुकाम पर हैं, उसमें हमारे माता-पिता, गुरुजनों और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उन सभी गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने हमारे जीवन को दिशा दी है।
इस अवसर पर उपायुक्त ने भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन का जीवन शिक्षा, ज्ञान और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, विचार और व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त आधार माना।

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उपायुक्त ने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे अपने शिक्षकों से प्राप्त ज्ञान और मार्गदर्शन का सदुपयोग करें। जीवन में सफलता केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक अच्छा, जिम्मेदार और संवेदनशील इंसान बनना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने, निरंतर सीखने, अनुशासन एवं संस्कार को जीवन का हिस्सा बनाने तथा अपने शिक्षकों का सदैव सम्मान करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव केवल विद्यार्थी के जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके माध्यम से पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। इसलिए शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव हैं।

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कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके समर्पण, धैर्य एवं निरंतर प्रयासों का सम्मान किया जाना चाहिए।
समारोह में छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अतिथियों एवं शिक्षकों ने सराहना की। कार्यक्रम का समापन शिक्षक समुदाय के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।

सरायकेला छऊ कला केंद्र के समग्र विकास और संरक्षण को लेकर बैठक आयोजित

सरायकेला छऊ कला केंद्र के समग्र विकास और संरक्षण को लेकर बैठक आयोजित

सरायकेला | उपायुक्त सरायकेला-खरसावाँ नीतिश कुमार सिंह की अध्यक्षता एवं खरसावाँ विधायक दशरथ गागराई की उपस्थिति में सरायकेला छऊ कला केंद्र के समग्र विकास, संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश, जिला खेल पदाधिकारी अमित कुमार सहित कोर कमेटी एवं स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे।

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बैठक के दौरान छऊ कला केंद्र की आधारभूत संरचना, उपलब्ध सुविधाओं एवं इंफ्रास्ट्रक्चर गैप, मानव संसाधन, नियुक्ति, प्रशिक्षण व्यवस्था तथा केंद्र के प्रभावी संचालन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही कोर कमेटी एवं स्टीयरिंग कमेटी की संरचना और सदस्यों की संख्या को लेकर भी उपस्थित सदस्यों से सुझाव लिए गए।

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उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह ने संबंधित अधिकारियों एवं समिति के सदस्यों को आपसी समन्वय के साथ अनुमंडल स्तर पर बैठक आयोजित कर सभी आवश्यक बिंदुओं पर विचार-विमर्श करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। इसके बाद प्रस्ताव को जिला स्तर पर समेकित कर नियमानुसार संस्कृति, कला एवं खेल विभाग, झारखंड सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया।

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उपायुक्त ने कहा कि सरायकेला छऊ, खरसावाँ छऊ एवं मानभूम छऊ की समृद्ध कला परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने नई पीढ़ी को छऊ कला से जोड़ने, प्रशिक्षण के अवसरों का विस्तार करने तथा स्थानीय कलाकारों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

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वहीं विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि सरायकेला-खरसावाँ क्षेत्र अपनी समृद्ध छऊ कला एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए विशेष पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि छऊ कला केंद्र को केवल एक प्रशिक्षण केंद्र तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे छऊ कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी को इस परंपरा से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

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विश्व आदिवासी दिवस-2026 की तैयारियों में जुटा जिला प्रशासन, उपायुक्त ने दिए सफल आयोजन के निर्देश

विश्व आदिवासी दिवस-2026 की तैयारियों में जुटा जिला प्रशासन, उपायुक्त ने दिए सफल आयोजन के निर्देश

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में आगामी 9 एवं 10 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले विश्व आदिवासी दिवस (आदिवासी महोत्सव-2026) की तैयारियों को लेकर बुधवार को समाहरणालय सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम की तैयारियों, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों तथा समन्वयात्मक कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस जिले की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपरा और विरासत को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यक्रम का आयोजन गरिमामय, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सके।

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बैठक में निर्णय लिया गया कि महोत्सव के दौरान जनजातीय कला, संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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इसके तहत पारंपरिक नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुतियां, हस्तशिल्प प्रदर्शनी, स्थानीय व्यंजनों की प्रदर्शनी तथा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, जिले के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आकर्षक सेल्फी प्वाइंट स्थापित किए जाएंगे तथा राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लाइव प्रसारण के लिए आवश्यकता अनुसार एलईडी वैन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

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समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त, प्रोजेक्ट डायरेक्टर आईटीडीए, अपर उपायुक्त, जिला परिवहन पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर), जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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श्रावणी मेला की तैयारियों का एसडीओ ने लिया जायजा, महादेवसाल मंदिर परिसर का किया निरीक्षण

श्रावणी मेला की तैयारियों का एसडीओ ने लिया जायजा, महादेवसाल मंदिर परिसर का किया निरीक्षण

चक्रधरपुर | आगामी श्रावणी मेला के सफल, सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर गुरुवार को पोड़ाहाट अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), चक्रधरपुर तथा गोईलकेरा प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) ने महादेवसाल मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने मेले की तैयारियों, विधि-व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत जायजा लिया।

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निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मंदिर परिसर, श्रद्धालुओं के आवागमन मार्ग, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की।

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उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं।

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अधिकारियों ने कहा कि श्रावणी मेला के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के महादेवसाल मंदिर पहुंचने की संभावना है। ऐसे में सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि मेले का आयोजन शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सके।

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निरीक्षण के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

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रथयात्रा महोत्सव के अंतिम दिन मत्स्य-कूर्म वेश में हुए महाप्रभु के दुर्लभ दर्शन

रथयात्रा महोत्सव के अंतिम दिन मत्स्य-कूर्म वेश में हुए महाप्रभु के दुर्लभ दर्शन

सरायकेला | ऐतिहासिक गुंडिचा मंदिर में आयोजित रथयात्रा महोत्सव के अंतिम दिन गुरुवार को श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर महाप्रभु श्री जगन्नाथ ने भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य का, जबकि उनके बड़े भाई श्री बलभद्र ने कूर्म (कच्छप) अवतार का दिव्य स्वरूप धारण किया।

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देवी सुभद्रा के साथ विराजमान इस दुर्लभ वेश के दर्शन के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। “जय जगन्नाथ” के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालुओं ने प्रभु के दुर्लभ दर्शन कर स्वयं को धन्य माना।

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सरायकेला की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की जीवंत पहचान भी है। महोत्सव के दौरान महाप्रभु के विभिन्न दुर्लभ वेशों का श्रृंगार किया जाता है, जिनमें अंतिम दिन का मत्स्य-कूर्म वेश विशेष महत्व रखता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस प्रकार का दिव्य स्वरूप सरायकेला की विशिष्ट परंपरा है और देश के अन्य रथयात्रा आयोजनों में ऐसा दर्शन देखने को नहीं मिलता।

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सनातन धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार उनका प्रथम अवतार माना जाता है। मान्यता है कि महाप्रलय के समय उन्होंने वेदों की रक्षा करते हुए राजा मनु और सप्तऋषियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया तथा नई सृष्टि की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। इसी कारण मत्स्य अवतार को ज्ञान, संरक्षण और नवसृजन का प्रतीक माना जाता है।

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रथयात्रा महोत्सव के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा परिवार और समाज की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा।

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झारखंड में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट की स्थापना का रास्ता साफ, JFDC और SRFTI के बीच हुआ MoU

झारखंड में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट की स्थापना का रास्ता साफ, JFDC और SRFTI के बीच हुआ MoU

रांची | झारखंड के रचनात्मक भविष्य को नई दिशा देने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गरिमामयी उपस्थिति में झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JFDC) और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता के बीच झारखंड फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

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इस अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता केवल एक संस्थान की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक नई शुरुआत है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल के सकारात्मक परिणाम निकट भविष्य में देखने को मिलेंगे।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रामदयाल मुंडा की सोच के अनुरूप झारखंड का हर व्यक्ति अपने भीतर एक कलाकार समेटे हुए है। यदि उन्हें सही मंच, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिले तो राज्य की प्रतिभाएं नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने राज्य के कलाकारों, निर्देशकों और युवा रचनाकारों को शुभकामनाएं देते हुए इस अवसर का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि एक समय डॉक्टर और इंजीनियर बनना ही सबसे बड़ा सपना माना जाता था, लेकिन आज हर क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इसी सोच के साथ यह मंच तैयार किया गया है, ताकि राज्य के युवा अपनी रचनात्मक प्रतिभा को निखार सकें, नई पहचान बना सकें और अनुभवी संस्थानों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ सकें।

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मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक प्रकाश झा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड में हुई और आज वे देश के प्रतिष्ठित फिल्मकारों में गिने जाते हैं। यह झारखंड की प्रतिभा और संभावनाओं का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान राज्य के युवाओं के लिए नए अवसरों और रचनात्मक भविष्य के द्वार खोलेगा।

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उन्होंने कहा कि झारखंड प्रतिभाओं की धरती है। संथाली फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना राज्य की सांस्कृतिक और रचनात्मक क्षमता का प्रमाण है। यदि प्रतिभाओं को उचित मंच और प्रोत्साहन मिले तो राज्य से कई और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी, दिल बेचारा और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी चर्चित फिल्मों की शूटिंग भी झारखंड में हो चुकी है, जो राज्य की फिल्म निर्माण क्षमता को दर्शाती है।

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झारखंड फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के शुभारंभ के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रतिभाशाली निर्देशकों, कलाकारों एवं युवा रचनाकारों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान झारखंड की रचनात्मक प्रतिभा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नया मंच प्रदान करेगा तथा राज्य को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

रथ परब पर होयोहातु में भव्य छौ मेला, कलाकारों की प्रस्तुति ने मोहा मन

रथ परब पर होयोहातु में भव्य छौ मेला, कलाकारों की प्रस्तुति ने मोहा मन

चक्रधरपुर | चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत होयोहातु के प्राथमिक विद्यालय परिसर में रथ परब के शुभ अवसर पर भव्य छौ मेला एवं छौ नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक आयोजन में क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पारंपरिक छौ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत कर दिया।

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कार्यक्रम के दौरान छौ कलाकारों ने पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों के जीवंत अभिनय और प्रभावशाली नृत्य शैली ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर प्रस्तुति के बाद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। पूरा आयोजन सौहार्द, भाईचारे और सांस्कृतिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।

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क्षेत्रीय विधायक सुखराम उरांव की अनुपस्थिति में पीरू हेम्ब्रम मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। वहीं, विशिष्ट अतिथियों के रूप में चक्रधरपुर जिला परिषद भाग-3 की सदस्य मीना जोंको, बाईपी पंचायत की मुखिया सह झामुमो नेत्री पिंकी जोंको, झामुमो नेता प्रदीप महतो, पूर्व मुखिया निराकार केराई, पूर्व मुखिया सह झामुमो नेता जगन हासदा तथा दोड़ाय हासदा उपस्थित रहे।

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इस अवसर पर अतिथियों ने छौ नृत्य को झारखंड की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस लोककला को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की मांग है।

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अतिथियों ने आयोजन समिति और छौ कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन सामाजिक एकता, पारंपरिक विरासत के संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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