प्रोजेक्ट जागृति के तहत सदर अस्पताल में रक्तदान शिविर आयोजित, 91 टीबी मरीजों को मिला पोषण सहायता पैकेट

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की जनकल्याणकारी पहल “प्रोजेक्ट जागृति” के अंतर्गत बुधवार को सदर अस्पताल, चाईबासा परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान, जनस्वास्थ्य जागरूकता एवं सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद शाकिर, उपायुक्त मनीष कुमार तथा पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने संयुक्त रूप से भाग लेकर रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया और रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डाला।

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इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी, डालसा सचिव रवि चौधरी, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राजलक्ष्मी, सदर चाईबासा अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी टोनी प्रेमराज टोप्पो सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि, युवा एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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शिविर में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दिया। शिविर में संग्रहित रक्त इकाइयों का उपयोग भविष्य में दुर्घटना, प्रसव, गंभीर बीमारियों, थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया तथा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों के उपचार के लिए किया जाएगा। अधिकारियों ने रक्तदाताओं को समाज का वास्तविक नायक बताते हुए कहा कि उनका योगदान अनेक लोगों के जीवन की रक्षा में सहायक बनेगा।

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रक्तदान करने वाले सभी “रक्तवीरों” को उनके मानवीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र, टी-शर्ट एवं कॉफी मग प्रदान कर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने रक्तदाताओं को बधाई देते हुए युवाओं और आम नागरिकों से नियमित अंतराल पर स्वैच्छिक रक्तदान करने तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद शाकिर ने कहा कि रक्तदान केवल चिकित्सीय आवश्यकता की पूर्ति नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान कई परिवारों के जीवन में आशा और खुशियां ला सकता है। उन्होंने रक्तदान को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि किसी भी मरीज को रक्त के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े।

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उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट जागृति का उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाना तथा जनसहभागिता को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि रक्तदान ऐसा महादान है, जिसका लाभ सीधे किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन की रक्षा के रूप में सामने आता है। उन्होंने बताया कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक अभियानों को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने कहा कि रक्तदान समाज के प्रति हमारी संवेदनशीलता, कर्तव्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से नियमित रूप से रक्तदान करने, नशामुक्त जीवन अपनाने तथा समाजहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

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91 टीबी मरीजों को मिला पोषण सहायता पैकेट
कार्यक्रम के दौरान निक्षय मित्र अभियान के तहत गोद लिए गए 91 टीबी मरीजों के बीच दूसरे माह का पोषाहार पैकेट वितरित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि टीबी उन्मूलन राष्ट्रीय प्राथमिकता है और उपचार के साथ पौष्टिक आहार भी मरीजों के स्वास्थ्य लाभ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसी क्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी टोनी प्रेमराज टोप्पो ने पांच नए टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके बीच पोषण सामग्री का वितरण किया। उन्होंने समाज के सक्षम एवं जागरूक नागरिकों से निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की सहायता के लिए आगे आने की अपील की, ताकि वर्ष 2027 तक टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल किया जा सके। उल्लेखनीय है कि निक्षय मित्र द्वारा गोद लिए गए टीबी मरीजों को छह माह तक पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है।
महिला वार्ड का निरीक्षण, मरीज यूनिफॉर्म व्यवस्था की शुरुआत
कार्यक्रम के उपरांत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक एवं अन्य अधिकारियों ने सदर अस्पताल के महिला वार्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं, मरीजों को उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं एवं स्वच्छता व्यवस्था का जायजा लिया गया। अधिकारियों ने भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से संवाद कर सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यक सुझाव दिए।

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निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रशासन द्वारा भर्ती मरीजों को मरीज यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की नई व्यवस्था का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य मरीजों की पहचान को सुव्यवस्थित करना, संक्रमण नियंत्रण को बेहतर बनाना, स्वच्छता मानकों को मजबूत करना तथा सभी मरीजों को गरिमापूर्ण और समान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। अधिकारियों ने इसे मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया।
इसके अलावा तीन नवजात शिशुओं के परिवारों को जन्म प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने, रक्तदान को बढ़ावा देने, टीबी उन्मूलन अभियान को गति देने तथा जनसहभागिता बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी साझा की गई। अंत में पश्चिमी सिंहभूम को नशामुक्त जिला बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

By maskal.news

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