स्वास्थ्य

डेंगू की रोकथाम को लेकर उपायुक्त ने दिए सघन निगरानी और स्वच्छता के निर्देश, 11 सितंबर को छह स्थानों पर होगा रक्तदान शिविर

डेंगू की रोकथाम को लेकर उपायुक्त ने दिए सघन निगरानी और स्वच्छता के निर्देश, 11 सितंबर को छह स्थानों पर होगा रक्तदान शिविर

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय के सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डेंगू संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण तथा आगामी 11 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल सहित सिविल सर्जन, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, चिकित्सा पदाधिकारी एवं क्षेत्रीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

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डेंगू की रोकथाम के लिए स्वच्छता पर जोर
बैठक में उपायुक्त ने डेंगू के संभावित संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए जिले में सघन निगरानी, मच्छर नियंत्रण, स्रोत नियंत्रण, जांच एवं उपचार के साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डेंगू की रोकथाम में आम नागरिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समय रहते समाप्त कर डेंगू के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने का निर्देश देते हुए कहा कि डेंगू फैलाने वाला मच्छर ठहरे हुए साफ पानी में भी पनप सकता है। इसलिए घर, कार्यालय, विद्यालय एवं आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा नहीं होने देना जरूरी है।

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उन्होंने कूलर, गमले, पानी की टंकी, बाल्टी, ड्रम, पुराने टायर, टूटे बर्तन, नारियल के खोल सहित ऐसे सभी पात्रों की नियमित सफाई और उनमें जमा पानी की निकासी सुनिश्चित करने को कहा। पानी की टंकियों एवं अन्य जलपात्रों को ढककर रखने तथा सप्ताह में कम से कम एक बार पानी खाली कर पात्रों की अच्छी तरह सफाई करने की अपील की गई।
मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील
उपायुक्त ने जिलेवासियों से पूरी बांह के कपड़े पहनने, मच्छरदानी का उपयोग करने तथा मच्छरों से बचाव के सुरक्षित उपाय अपनाने की अपील की। साथ ही जलजमाव वाले स्थानों की तत्काल सूचना संबंधित स्वास्थ्य एवं स्थानीय निकाय के कर्मियों को देने को कहा।

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क्षेत्रीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को घर-घर संपर्क कर लोगों को डेंगू के लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी देने तथा संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया।
डेंगू के लक्षणों को लेकर रहें सतर्क
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डेंगू संक्रमण में सामान्यतः तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, अत्यधिक कमजोरी तथा त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण सामने आने पर लापरवाही न बरतते हुए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की गई।

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तेज बुखार के साथ लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, नाक या मसूड़ों से रक्तस्राव, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी अथवा असामान्य रक्तस्राव जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा लेने की सलाह दी गई।
उपायुक्त ने चिकित्सा पदाधिकारियों को संदिग्ध डेंगू मरीजों की समय पर जांच, आवश्यक उपचार एवं निगरानी सुनिश्चित करने तथा जिले में संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डेंगू की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सामूहिक प्रयास से ही इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
11 सितंबर को छह स्थानों पर होगा रक्तदान शिविर
बैठक के दूसरे चरण में 11 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले स्वैच्छिक रक्तदान शिविर की तैयारियों की समीक्षा की गई। जिले में एक साथ छह स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे।

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रक्तदान शिविर के आयोजन स्थल:
सदर अस्पताल, चाईबासा
अनुमंडल अस्पताल, चक्रधरपुर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बंदगांव
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गोईलकेरा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, झींकपानी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तांतनगर
उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को शिविर स्थलों पर रक्तदाताओं के पंजीकरण, चिकित्सकीय जांच, रक्त संग्रह, आवश्यक चिकित्सा उपकरण एवं अन्य सभी व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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उन्होंने कहा कि रक्तदान एक महत्वपूर्ण मानवीय सेवा है। आपात स्थिति, दुर्घटना, प्रसव, गंभीर बीमारी एवं अन्य चिकित्सा आवश्यकताओं के दौरान रक्त की उपलब्धता मरीज के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है। उन्होंने स्वस्थ एवं पात्र नागरिकों, युवाओं, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न संस्थाओं से 11 सितंबर को अपने नजदीकी निर्धारित केंद्र पर पहुंचकर स्वैच्छिक रक्तदान में भाग लेने की अपील की।
उपायुक्त ने कहा कि डेंगू की रोकथाम के लिए स्वच्छता और सतर्कता तथा रक्तदान के लिए जनभागीदारी, दोनों ही स्वस्थ एवं सुरक्षित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जिलेवासियों से स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन के प्रयासों में सक्रिय सहयोग करने की अपील की।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर सदर अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर किया जागरूक

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर सदर अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर किया जागरूक

सरायकेला | विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर गुरुवार को सदर अस्पताल, सरायकेला में जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह ने की।

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इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम “आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना” और आह्वान “बातचीत शुरू करें” रखा गया है। कार्यक्रम के दौरान मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक तनाव के लक्षणों की पहचान, तनाव प्रबंधन तथा संकट की स्थिति में समय पर सहायता लेने के संबंध में लोगों को जागरूक किया गया। इस दौरान मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों को परिवार, मित्र, शिक्षक या स्वास्थ्यकर्मी से खुलकर बातचीत करने की अपील की गई।

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विद्यालय-महाविद्यालयों में चलेगा जागरूकता अभियान
जिले में 10 से 30 सितंबर तक विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों एवं युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक सहयोग, आत्महत्या के चेतावनी संकेतों की पहचान तथा समय पर सहायता प्राप्त करने के प्रति जागरूक किया जाएगा।

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मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सहायता के लिए राष्ट्रीय टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 एवं 1800-891-4416 पर निःशुल्क और 24 घंटे संपर्क किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान आत्महत्या की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को शपथ भी दिलाई गई।

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कार्यक्रम में जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी, डॉ. शालिनी कुमारी, डॉ. अनिर्बान महतो, डॉ. श्वेता कुमारी, पुष्कर भूषण (जिला कार्यक्रम सहायक, जिला गैर-संचारी रोग कोषांग) एवं अशोक यादव (परामर्शदाता, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, जिला गैर-संचारी रोग कोषांग) सहित अन्य पदाधिकारी, कर्मचारी एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

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राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, पोषण रथ को उपायुक्त ने दिखाई हरी झंडी

राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, पोषण रथ को उपायुक्त ने दिखाई हरी झंडी

चाईबासा | राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले में बुधवार को “हमारी आंगनबाड़ी–हमारी जिम्मेदारी” थीम के साथ जिला स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा।

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इस अवसर पर जिला समाहरणालय परिसर से उपायुक्त मनीष कुमार, जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरीन, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार एवं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्वेता भारती ने संयुक्त रूप से पोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पोषण रथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर पोषण, संतुलित आहार एवं स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार करेगा।

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कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को पोषण संबंधी शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों को पोषण के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में बैलून उड़ाकर पोषण माह के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने तथा पोषण के प्रति समाज में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।

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राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान आगामी एक माह तक जिले में पांच प्रमुख विषयों पर विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्रियों के माध्यम से आहार विविधता एवं पर्याप्त प्रोटीन के प्रति समुदाय को जागरूक करना, आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं गर्म पका हुआ भोजन, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, बाल विकास के लिए पोषण एवं प्रारंभिक उद्दीपन तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य के लिए नकद अंतरण जैसे विषय शामिल हैं।

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कार्यक्रम का उद्देश्य पोषण संबंधी व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना, बच्चों एवं महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य और समुचित विकास के लिए समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना तथा आंगनबाड़ी केंद्रों को पोषण एवं बाल विकास से जुड़ी गतिविधियों के प्रभावी केंद्र के रूप में सुदृढ़ करना है।

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इस अवसर पर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, महिला पर्यवेक्षिकाएं, आंगनबाड़ी सेविकाएं सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

एमजीएम अस्पताल में जटिल एयरवे केस की सफल सर्जरी, 62 वर्षीय महिला को मिला नया जीवन

एमजीएम अस्पताल में जटिल एयरवे केस की सफल सर्जरी, 62 वर्षीय महिला को मिला नया जीवन

जमशेदपुर | महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चिकित्सकों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक का इस्तेमाल कर एक जटिल एयरवे केस में 62 वर्षीय महिला की सफल सर्जरी की। कठिन श्वासनली के कारण यह मामला एनेस्थीसिया टीम के लिए चुनौतीपूर्ण था।

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जुगसलाई के मिल्लतनगर निवासी फिरोजा खातून को पित्ताशय में पथरी और सूजन की शिकायत के बाद अस्पताल के सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया था। मरीज का वजन अधिक होने के साथ-साथ गर्दन छोटी थी और उनकी श्वासनली को डिफिकल्ट एयरवे की श्रेणी में रखा गया था। ऐसे में एनेस्थीसिया देना और श्वासनली में ट्यूब डालना काफी चुनौतीपूर्ण था।

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स्थिति को देखते हुए एनेस्थीसिया टीम ने आधुनिक ‘फाइबर ऑप्टिक ब्रोंकोस्कोपिक इंटुबेशन’ तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक की मदद से मरीज को सुरक्षित तरीके से एनेस्थीसिया दिया गया और श्वासनली में सफलतापूर्वक ट्यूब डालकर एयरवे को नियंत्रित किया गया।

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इसके बाद मुख्य सर्जन डॉ. एसपी गुप्ता और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन पूरा किया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति बेहतर बताई जा रही है और वह चिकित्सकों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं।

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इस पूरी प्रक्रिया में एनेस्थीसिया प्रभारी डॉ. संजीव कुमार के नेतृत्व में डॉ. नयन, डॉ. शुभदीप और डॉ. सिमरन सहित अन्य चिकित्सकों तथा नर्सिंग और ओटी स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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एमजीएम अस्पताल में जटिल एयरवे केस का सफल प्रबंधन और सर्जरी आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल तथा चिकित्सकीय टीम की दक्षता को दर्शाता है।

बालजोड़ी में युवक की संदिग्ध मौत, ग्रामीणों ने जताई हत्या की आशंका

बालजोड़ी में युवक की संदिग्ध मौत, ग्रामीणों ने जताई हत्या की आशंका

सोनुआ | सोनुआ थाना क्षेत्र के बालजोड़ी गांव में शुक्रवार को पुरमी पूर्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में ग्रामीणों ने हत्या की आशंका जताई है। ग्रामीणों ने सोनुआ पुलिस से मामले की गहराई से जांच कर सच्चाई सामने लाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

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मंगलवार को मुखिया गुणवंत नायक के नेतृत्व में 50 से अधिक ग्रामीण सोनुआ थाना पहुंचे और पुलिस को शिकायत पत्र सौंपा। शिकायत पत्र में युवक की मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई गई है। ग्रामीणों ने कहा कि नदी में डूबने से मौत की बात उन्हें स्वीकार्य नहीं है।

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उनका दावा है कि शव को देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि युवक की धारदार हथियार से हत्या करने के बाद शव को नदी में फेंका गया है।
ग्रामीणों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की।

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गांव में लगातार चोरी की घटनाओं से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने शिकायत पत्र में गांव में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पूर्व में युवक की स्कूटी, ट्रैक्टर की बैटरी, सोलर जलमीनार से सोलर पंप और स्टार्टर के अलावा कई घरों में चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं।

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ग्रामीणों का आरोप है कि इन घटनाओं को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। सोमवार रात भी कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा घरों के दरवाजे पीटने की घटना सामने आई, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।

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ग्रामीणों ने पुलिस से युवक की संदिग्ध मौत की जांच के साथ-साथ चोरी की घटनाओं पर भी शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की है।

सीलफोड़ी गांव में डीएलएसए का विधिक जागरूकता शिविर, ग्रामीणों को निःशुल्क कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी

सीलफोड़ी गांव में डीएलएसए का विधिक जागरूकता शिविर, ग्रामीणों को निःशुल्क कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी

चाईबासा | 60 दिवसीय मेगा जागरूकता अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) की ओर से सीलफोड़ी गांव में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएलएसए के सचिव रवि चौधरी ने की। शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सहायता, वीर परिवार सहायता योजना, ई-श्रम कार्ड तथा वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों एवं वंचित वर्गों के लिए संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

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इस अवसर पर डीएलएसए सचिव रवि चौधरी ने कहा कि जरूरतमंद व्यक्ति निःशुल्क अधिवक्ता एवं कानूनी सलाह प्राप्त करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा कानूनी सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

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शिविर में मिशन वात्सल्य के तहत संचालित स्पॉन्सरशिप योजना की जानकारी देते हुए बताया गया कि पात्र बच्चों को शिक्षा, पोषण एवं देखभाल के लिए 4,000 रुपये प्रतिमाह तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा सकती है। वहीं, सड़क दुर्घटना में मृत्यु अथवा गंभीर चोट के मामलों में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के माध्यम से मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में भी ग्रामीणों को विस्तार से जानकारी दी गई।

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कार्यक्रम के दौरान पीएलवी टीम ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मानव तस्करी, बाल विवाह एवं नशा मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर जागरूकता का संदेश दिया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को इन सामाजिक कुरीतियों से बचने तथा जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों एवं विधिक सेवा प्राधिकार से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।

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ग्रामीणों ने डीएलएसए के इस जागरूकता कार्यक्रम की सराहना की। मौके पर मुखिया मेलानी बोदरा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं एवं वृद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में अधिकार मित्रों ने महत्वपूर्ण सहयोग किया।

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गम्हरिया सीएचसी का डीडीसी रीना हांसदा ने किया औचक निरीक्षण, डायलिसिस केंद्र जल्द शुरू कराने का निर्देश

गम्हरिया सीएचसी का डीडीसी रीना हांसदा ने किया औचक निरीक्षण, डायलिसिस केंद्र जल्द शुरू कराने का निर्देश

सरायकेला | उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा ने शनिवार को गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों की सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था तथा अस्पताल की आधारभूत संरचना का जायजा लिया।

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निरीक्षण के क्रम में उप विकास आयुक्त ने महिला एवं पुरुष वार्ड, भंडार कक्ष, शल्य चिकित्सा कक्ष, प्रयोगशाला तथा निर्माणाधीन डायलिसिस केंद्र का निरीक्षण किया। महिला वार्ड में भर्ती गर्भवती महिलाओं से बातचीत कर उन्होंने उपचार, दवाओं और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को मरीजों को निर्धारित समय पर गुणवत्तापूर्ण भोजन, आवश्यक दवाएं और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

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निर्माणाधीन डायलिसिस केंद्र का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा पाया गया। उप विकास आयुक्त ने शेष निर्माण कार्य को एक सप्ताह के भीतर पूरा कर केंद्र को जल्द से जल्द चालू कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डायलिसिस केंद्र के शुरू होने से मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही आवश्यक उपचार की सुविधा मिल सकेगी।

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उन्होंने चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को निर्धारित ड्यूटी के अनुसार समय पर उपस्थित रहने तथा मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग की भवन मरम्मत एवं जीर्णोद्धार से संबंधित सूची के आधार पर विभिन्न स्थलों का भी जायजा लिया गया। चिह्नित कमियों के लिए आवश्यक प्राक्कलन तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य कराने का निर्देश दिया गया।

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इस अवसर पर प्रभारी जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. सुजीत मुर्मू सहित गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

सिलफोड़ी गांव में चला कानूनी जागरूकता अभियान, ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और निःशुल्क विधिक सेवाओं की दी जानकारी

सिलफोड़ी गांव में चला कानूनी जागरूकता अभियान, ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और निःशुल्क विधिक सेवाओं की दी जानकारी

चक्रधरपुर | राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA), नई दिल्ली एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA), रांची के निर्देश पर संचालित 60 दिवसीय मेगा अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), चाईबासा की ओर से चक्रधरपुर प्रखंड के सिलफोड़ी गांव में जागरूकता एवं कानूनी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, DLSA चाईबासा मोहम्मद शाकिर एवं सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में किया गया। अभियान के दौरान अधिकार मित्रों एवं पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLV) ने घर-घर जाकर ग्रामीणों से संपर्क किया और उन्हें NALSA की विभिन्न योजनाओं के साथ-साथ केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।

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ग्रामीणों को वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, श्रम कार्ड, आधार कार्ड, शिक्षा, आयुष्मान भारत योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही DLSA की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सेवाओं के संबंध में भी जागरूक किया गया।
अभियान के दौरान PLV पिंकी बोदरा, कर्ण कुंभकार एवं अनीता बोदरा ने कई परिवारों से संपर्क कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा संबंधित प्रतिवेदन तैयार किया।

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ग्रामीणों को विवादों का समाधान आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से कराने के लिए भी प्रेरित किया गया। उन्हें बताया गया कि लोक अदालत एवं मध्यस्थता के माध्यम से कई प्रकार के विवादों का त्वरित, सरल और आपसी सहमति से समाधान संभव है।

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कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से NALSA की ‘वीर परिवार सहायता योजना-2025’ के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि यह योजना सुरक्षा बलों के सेवारत एवं पूर्व सैनिकों, शहीदों के परिवारों (वीर नारियों) तथा उनके आश्रितों के लिए शुरू की गई है। योजना के तहत संपत्ति, जमीन-जायदाद, पारिवारिक विवाद एवं सेवा से संबंधित मामलों में निःशुल्क कानूनी सलाह और अधिवक्ता उपलब्ध कराने का प्रावधान है। आवश्यकता के अनुसार पैनल अधिवक्ताओं एवं अन्य माध्यमों से भी कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

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अभियान का उद्देश्य ग्रामीण एवं जरूरतमंद लोगों को उनके कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं तथा निःशुल्क विधिक सहायता के प्रति जागरूक करना और उन्हें समय पर न्यायिक सहायता उपलब्ध कराना है।

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मानव-वन्यजीव संघर्ष और सर्पदंश से बचाव को लेकर छात्राओं को किया जागरूक

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सरायकेला-खरसावां | राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के निर्देश पर तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला-खरसावां रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित लोगों को न्याय एवं विधिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम ईचागढ़ प्रखंड के टीकर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में आयोजित हुआ।

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कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को मानव-वन्यजीव संघर्ष से उत्पन्न परिस्थितियों, पीड़ितों के अधिकारों तथा उपलब्ध कानूनी सहायता के संबंध में जानकारी दी गई। जिले में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए सर्पदंश से बचाव, आवश्यक सावधानियों तथा सर्पदंश की स्थिति में उठाए जाने वाले तत्काल कदमों पर विशेष जोर दिया गया।

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जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तौसीफ मेराज ने कहा कि बारिश के मौसम में सांप अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच सकते हैं। ऐसे में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं को बताया कि सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय पीड़ित को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए। उन्होंने घरेलू उपचार, झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण इलाज में देरी नहीं करने की अपील की।
उन्होंने छात्राओं से कार्यक्रम में मिली महत्वपूर्ण जानकारियों को अपने परिवार, पड़ोसियों और आसपास के लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया, ताकि सर्पदंश की स्थिति में पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।

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तौसीफ मेराज ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित जरूरतमंद लोगों को विधिक सहायता और उनके अधिकारों की जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क किया जा सकता है। पीड़ितों और उनके परिवारों तक न्याय एवं आवश्यक सहायता पहुंचाना विधिक सेवा प्राधिकार का प्रमुख उद्देश्य है।

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कार्यक्रम में मुख्य विधिक सहायता बचाव अधिवक्ता दिलीप कुमार शॉ, विद्यालय की प्रधानाचार्या सुनीता महतो, शिक्षकगण तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार से जुड़े विधिक स्वयंसेवक उपस्थित रहे। छात्राओं को स्वयं जागरूक रहने के साथ-साथ अपने परिवार एवं समुदाय के लोगों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।

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कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि सही जानकारी, समय पर चिकित्सा सहायता और विधिक जागरूकता मानव-वन्यजीव संघर्ष एवं सर्पदंश जैसी परिस्थितियों में जीवन और अधिकारों की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है।

पश्चिमी सिंहभूम में स्वाइन फ्लू को लेकर जागरूकता अभियान, जनप्रतिनिधियों ने प्रचार वाहन को दिखाई हरी झंडी

पश्चिमी सिंहभूम में स्वाइन फ्लू को लेकर जागरूकता अभियान, जनप्रतिनिधियों ने प्रचार वाहन को दिखाई हरी झंडी

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्वाइन फ्लू (H1N1) के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से जागरूकता प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। सूबे के माननीय मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार तथा परिवहन विभाग, श्री दीपक बिरुआ, सिंहभूम सांसद श्रीमती जोबा माझी, मंझगांव विधायक श्री निरल पुरती, चक्रधरपुर विधायक श्री सुखराम उरांव, जगन्नाथपुर विधायक श्री सोनाराम सिंकु तथा मनोहरपुर विधायक श्री जगत माझी ने उपायुक्त श्री मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री अमित रेनू एवं उप विकास आयुक्त श्री उत्कर्ष कुमार की मौजूदगी में प्रचार वाहन को रवाना किया।
यह प्रचार वाहन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को स्वाइन फ्लू के संक्रमण, इसके लक्षणों, बचाव के उपायों तथा संक्रमण की स्थिति में बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूक करेगा।

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इस अवसर पर कहा गया कि संक्रामक रोगों से बचाव के लिए जागरूकता और समय पर सावधानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रचार वाहन के माध्यम से लोगों तक सरल एवं स्पष्ट भाषा में यह संदेश पहुंचाया जाएगा कि स्वाइन फ्लू के लक्षणों की पहचान कैसे की जाए और संक्रमण से बचाव के लिए किन सावधानियों को अपनाना आवश्यक है।
स्वाइन फ्लू क्या है?
स्वाइन फ्लू अर्थात H1N1, इन्फ्लुएंजा ए वायरस का एक प्रकार है, जो संक्रामक श्वसन संक्रमण का कारण बनता है। यह संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने, खांसने या छींकने के दौरान निकलने वाली बूंदों के माध्यम से फैल सकता है। संक्रमित सतहों को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण फैलने की संभावना रहती है।

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संक्रमण की पहचान कैसे करें?
प्रचार वाहन के माध्यम से आमजन को बताया जाएगा कि तेज बुखार या ठंड लगना, लगातार खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर एवं मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान, भूख कम लगना, मतली या उल्टी जैसे लक्षण स्वाइन फ्लू के संकेत हो सकते हैं।
सांस लेने में कठिनाई या सांस फूलना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।

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स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए क्या करें?
आमजन को खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकने, नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोने, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करने तथा पौष्टिक एवं स्वस्थ भोजन लेने की सलाह दी जाएगी।
अस्वस्थ महसूस होने पर घर पर रहकर पर्याप्त आराम करने और लक्षण बने रहने या गंभीर होने पर चिकित्सक से परामर्श लेने की अपील की जाएगी।
क्या न करें?

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स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचाव के लिए संक्रमित अथवा अस्वस्थ व्यक्तियों के निकट संपर्क से बचने, अनावश्यक रूप से हाथ मिलाने से परहेज करने तथा सार्वजनिक स्थानों पर नहीं थूकने की सलाह दी जाएगी। बिना हाथ साफ किए आंख, नाक और मुंह को छूने से भी बचने का संदेश दिया जाएगा।
इसके अलावा इस्तेमाल किए गए टिश्यू का दोबारा उपयोग नहीं करने, भीड़भाड़ वाले स्थानों से यथासंभव बचने तथा चिकित्सक की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन नहीं करने के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।

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इन लोगों को विशेष सावधानी की आवश्यकता
गर्भवती महिलाओं, शिशुओं एवं छोटे बच्चों, 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों तथा पुरानी बीमारियों या कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। समय पर लक्षणों की पहचान और चिकित्सकीय परामर्श से बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा H1N1 से संबंधित संभावित स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। आमजन से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर घबराएं नहीं, बल्कि समय पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से परामर्श लें तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।