स्वास्थ्य

दिसंबर 2026 तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल बनाने का लक्ष्य, स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा बैठक में निर्देश

दिसंबर 2026 तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल बनाने का लक्ष्य, स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा बैठक में निर्देश

चाईबासा | स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने, खुले में शौच से मुक्ति की स्थिति बनाए रखने तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय के सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। निदेशक, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), रांची श्रीमती रंजीता हेम्ब्रम की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार एवं उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार उपस्थित रहे।

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बैठक में सिंहभूम (कोल्हान) प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले पांच पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों—चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला, जमशेदपुर एवं आदित्यपुर में संचालित योजनाओं और कार्यों की घटकवार समीक्षा की गई। इस दौरान निर्धारित लक्ष्यों के विरुद्ध अब तक हुई प्रगति का आकलन करते हुए संबंधित अभियंताओं एवं कर्मियों को कार्यों में तेजी लाने, लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने तथा निर्धारित समय-सीमा में योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

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बैठक में दिसंबर 2026 तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में तेजी लाने का निर्देश

व्यक्तिगत घरेलू शौचालय निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। इसके लिए जलसहियाओं को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप जिम्मेदारी सौंपने और पात्र लाभुकों तक योजना का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।

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साथ ही, शौचालय निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने, निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने तथा लक्ष्य प्राप्ति में आ रही बाधाओं का समयबद्ध समाधान करने का निर्देश दिया गया, ताकि ग्रामीण परिवारों को स्वच्छता संबंधी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

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ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान निर्मित सेग्रीगेशन शेड को क्रियाशील बनाने तथा कचरा संग्रहण और परिवहन के लिए उपलब्ध वाहनों का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

संबंधित अभियंताओं को गांवों में कचरे के व्यवस्थित संग्रहण, पृथक्करण एवं परिवहन की व्यवस्था सक्रिय रखने को कहा गया। साथ ही, उपलब्ध आधारभूत संरचनाओं का समुचित उपयोग करने और उनके संचालन की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया गया।

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बैठक में स्पष्ट किया गया कि केवल आधारभूत संरचनाओं का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित संचालन और प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं की सतत निगरानी करने का निर्देश दिया गया।

समय-सीमा में लक्ष्य पूरा करने पर विशेष जोर

समीक्षा बैठक में सभी पांचों पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित कार्यों की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। दिसंबर 2026 तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए लंबित कार्यों को पूरा करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने तथा क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।

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संबंधित अभियंताओं को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और स्वच्छ व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला, जमशेदपुर एवं आदित्यपुर पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला एवं प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों के पदाधिकारी-कर्मी तथा यूनिसेफ समर्थित टीम के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

टीबी उन्मूलन को लेकर पश्चिमी सिंहभूम में जागरूकता अभियान तेज, डीसी मनीष कुमार ने रथ को दिखाई हरी झंडी

टीबी उन्मूलन को लेकर पश्चिमी सिंहभूम में जागरूकता अभियान तेज, डीसी मनीष कुमार ने रथ को दिखाई हरी झंडी

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने और क्षय रोग के प्रति आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट जागृति के तहत जनजागरूकता अभियान को गति दी जा रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को जिला समाहरणालय परिसर, चाईबासा से उपायुक्त मनीष कुमार ने JOSH टीम के टीबी जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर टीबी उन्मूलन के प्रति लोगों, विशेषकर युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सेल्फी स्टैंड एवं हस्ताक्षर अभियान का भी शुभारंभ किया गया।

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इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाना, रोग के लक्षणों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा लोगों को समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित करना है। साथ ही, टीबी से जुड़े सामाजिक भेदभाव और भ्रांतियों को दूर करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

अभियान के माध्यम से युवाओं को टीबी उन्मूलन के प्रयासों से जोड़कर समाज में जागरूकता के वाहक के रूप में तैयार करने की पहल की गई है। “टीबी उन्मूलन के लिए युवा हैं तैयार!” और “हम हैं JOSH Team! करना है, करके दिखाएंगे!” जैसे प्रेरक संदेशों के जरिए युवाओं को इस जनहितकारी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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जिले के सभी 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचेगा जागरूकता रथ

टीबी जागरूकता रथ पश्चिमी सिंहभूम जिले के सभी 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचेगा। इसके माध्यम से विभिन्न प्रखंडों में युवाओं और आम नागरिकों को टीबी के प्रमुख लक्षणों, समय पर चिकित्सकीय जांच, नियमित दवा सेवन और उपचार का निर्धारित कोर्स पूरा करने के महत्व की जानकारी दी जाएगी।

अभियान के दौरान लोगों को बताया जाएगा कि लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना और भूख में कमी जैसे लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क कर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। संभावित लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच कराने से रोग की पहचान और उपचार में मदद मिलती है।

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जागरूकता रथ के माध्यम से यह संदेश भी दिया जाएगा कि टीबी एक उपचार योग्य बीमारी है। समय पर पहचान, नियमित रूप से दवा का सेवन और स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह के अनुसार उपचार पूरा करने से रोग से स्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है।

JOSH टीम के माध्यम से युवाओं की सामूहिक भागीदारी

टीबी उन्मूलन अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए प्रखंड एवं वार्ड स्तर पर JOSH टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में MY Bharat के पांच स्वयंसेवक, राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के पांच कैडेट और एक नोडल प्रथम श्रेणी पदाधिकारी को शामिल किया गया है।

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इस पहल के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता को प्रशासनिक समन्वय के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। टीम के सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को टीबी के लक्षणों, जांच और उपचार के प्रति जागरूक करेंगे तथा जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ने में सहयोग प्रदान करेंगे।

युवाओं की भागीदारी से विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों, वार्डों और स्थानीय समुदायों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, टीबी से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा।

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सेल्फी स्टैंड और हस्ताक्षर अभियान से लिया जाएगा टीबी मुक्त समाज का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान शुरू किए गए सेल्फी स्टैंड एवं हस्ताक्षर अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों और युवाओं को टीबी उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करने के लिए प्रेरित करना है। इन गतिविधियों के माध्यम से लोग टीबी मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लेकर जागरूकता अभियान से जुड़ सकेंगे।

हस्ताक्षर अभियान के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। वहीं, सेल्फी स्टैंड के माध्यम से अभियान के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और युवाओं को जागरूकता गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

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इस दौरान टीबी से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करने, रोग से प्रभावित व्यक्तियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने और उन्हें समय पर उपचार के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

जिला प्रशासन ने लोगों से की जांच और उपचार कराने की अपील

जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि टीबी के संभावित लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार शुरू करें। उपचार के दौरान नियमित रूप से दवा लें तथा निर्धारित अवधि तक उपचार पूरा करें।

इसके साथ ही, टीबी से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करने और उन्हें परिवार एवं समाज की ओर से सहयोग, सम्मान तथा प्रोत्साहन देने की अपील की गई। प्रशासन ने लोगों से अपने आसपास के नागरिकों को टीबी के लक्षणों, जांच और उपचार की उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी देकर जागरूकता अभियान को मजबूत बनाने का भी आग्रह किया।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. आलोक कुमार महतो, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. जगन्नाथ हेम्ब्रम, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिव चरण हांसदा सहित जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के सदस्य एवं संबंधित स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मांगीलाल रूंगटा विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मांगीलाल रूंगटा विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सोमवार को मांगीलाल रूंगटा +2 उच्च विद्यालय, चाईबासा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूक करना, मानसिक तनाव एवं भावनात्मक समस्याओं को समझने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इस दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और संतुलित डिजिटल जीवनशैली के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने की जानकारी दी गई।

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कार्यक्रम में प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल, सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल पदाधिकारी डॉ. मीनू कुमार, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिव चरण हसदा, मनोचिकित्सक डॉ. दीपमाला, नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. भाग्यश्री कर, विद्यालय के प्राचार्य, जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यालय के कर्मी, एएनएम नर्सिंग स्कूल की छात्राएं एवं प्रशिक्षु, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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बच्चों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल ने कहा कि बच्चों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण है, मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही आवश्यक है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने से बच्चों की एकाग्रता बढ़ती है, सीखने की क्षमता में सुधार होता है और वे अपनी भावनाओं को समझने के साथ जीवन की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की भावनाओं, समस्याओं और दैनिक गतिविधियों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर सहयोग दिया जा सके।

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मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बचें विद्यार्थी

जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार ने विद्यार्थियों को मोबाइल पर वीडियो देखने, गेम खेलने और सोशल मीडिया के इस्तेमाल में अत्यधिक समय व्यतीत करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलकूद, पुस्तक-पठन, संगीत, चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी रुचि विकसित करनी चाहिए। नियमित दिनचर्या अपनाने तथा पढ़ाई, मनोरंजन और शारीरिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी उन्होंने जोर दिया।

मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज न करें, विशेषज्ञों की लें मदद

सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसे शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व देना आवश्यक है। बच्चों में मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी के संकेत दिखाई देने पर उन्हें डांटने अथवा उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी बात समझने और सहयोग देने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों और शिक्षकों को बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिसमें वे बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। जरूरत पड़ने पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील

जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल पदाधिकारी डॉ. मीनू कुमार ने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। तनाव से बचने, पर्याप्त नींद लेने, नियमित व्यायाम करने और परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

उन्होंने मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय उनके बारे में खुलकर बात करने तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सलाह दी।

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डिजिटल जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना जरूरी

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिव चरण हसदा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखना जरूरी है, उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखना भी आवश्यक है। वर्तमान डिजिटल युग में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। विशेषकर किशोरों और युवाओं में इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और अन्य छोटे वीडियो देखने का चलन बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मनोरंजन के लिए सीमित समय तक वीडियो देखना सामान्य है, लेकिन लगातार कई घंटों तक मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने से पढ़ाई, कामकाज और पारिवारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल करने से नींद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे अगले दिन की कार्यक्षमता और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है।

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सकारात्मक गतिविधियों से बेहतर होता है मानसिक स्वास्थ्य

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपनी भावनाओं को समझना, समस्याओं को साझा करना, सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेना मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

साथ ही, अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों के प्रति सजग रहने तथा उन्हें सहयोगपूर्ण और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की अपील की गई।

गुदड़ी और टोंटो में दिव्यांगजनों व वरिष्ठ नागरिकों के लिए आकलन शिविर संपन्न, 1,100 लोगों ने लिया भाग

गुदड़ी और टोंटो में दिव्यांगजनों व वरिष्ठ नागरिकों के लिए आकलन शिविर संपन्न, 1,100 लोगों ने लिया भाग

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के आकांक्षी प्रखंड गुदड़ी और टोंटो में दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एएलआईएमसीओ) के सहयोग से आयोजित आकलन शिविरों का सफलतापूर्वक समापन हो गया। दोनों प्रखंडों में आयोजित इन शिविरों में लगभग 1,100 दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया। शिविरों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की शारीरिक स्थिति और दैनिक जीवन की आवश्यकताओं का आकलन किया गया, ताकि उन्हें उनकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा सकें।

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आकांक्षी प्रखंड गुदड़ी में 5 एवं 6 अक्टूबर 2026 को आयोजित शिविर में लगभग 600 दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया। वहीं, टोंटो प्रखंड में 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को आयोजित शिविर में लगभग 500 लोगों की सहभागिता रही।

इसी क्रम में उपायुक्त मनीष कुमार एवं उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल तथा जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्वेता भारती की उपस्थिति में टोंटो प्रखंड में संचालित आकलन शिविर का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने शिविर की गतिविधियों का जायजा लिया और उपस्थित दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक, सुगम और आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। एएलआईएमसीओ के सहयोग से आयोजित ये शिविर जरूरतमंद लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं की पहचान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। आकलन के बाद पात्र लाभुकों को उनकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे दैनिक गतिविधियों में सुविधा मिलने के साथ उनकी गतिशीलता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

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उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से आकांक्षी प्रखंडों में इस तरह के शिविर आयोजित कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि कोई भी पात्र दिव्यांगजन या वरिष्ठ नागरिक आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।
उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने कहा कि दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराना उनके जीवन को अधिक सहज, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम है। एएलआईएमसीओ के तकनीकी सहयोग से शिविरों में लाभुकों की आवश्यकताओं का आकलन किया गया है। इसके आधार पर पात्र व्यक्तियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

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उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। गुदड़ी और टोंटो जैसे आकांक्षी प्रखंडों में इस प्रकार के शिविर आयोजित होने से जरूरतमंद लोगों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलती है और उन्हें अपनी आवश्यकताओं का आकलन कराने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने की परेशानी से राहत मिलती है।

एडीआईपी और राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत मिलेंगे उपकरण

आकलन के बाद पात्र दिव्यांगजनों को दिव्यांगजनों के सहायक उपकरण खरीदने एवं उपलब्ध कराने संबंधी सहायता योजना (एडीआईपी) तथा पात्र वरिष्ठ नागरिकों को राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई) के तहत उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

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इन उपकरणों में व्हीलचेयर, बैसाखी, वॉकर, चलने की छड़ी, दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए सफेद छड़ी, श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग, कैलिपर्स तथा अन्य सहायक उपकरण शामिल हो सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को भी पात्रता एवं आवश्यकता के अनुसार छड़ी, वॉकर, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, चश्मा और अन्य निर्धारित उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

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उपकरणों का अंतिम चयन लाभुक की शारीरिक स्थिति, व्यक्तिगत जरूरत, आकलन के निष्कर्ष और संबंधित योजना के पात्रता मानदंडों के आधार पर किया जाएगा।

सरायकेला में कौशल विकास एवं रोजगार योजनाओं की समीक्षा, युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

सरायकेला में कौशल विकास एवं रोजगार योजनाओं की समीक्षा, युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

सरायकेला | समाहरणालय सभागार में गुरुवार को उप विकास आयुक्त रीना हांसदा की अध्यक्षता में कौशल विकास, आजीविका, रोजगार सृजन एवं नाबार्ड से संबंधित योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में संचालित योजनाओं की प्रगति, प्रशिक्षण कार्यों तथा अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई।

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बैठक में उप विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के युवाओं को उनकी रुचि, योग्यता तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण दिया जाए। प्रशिक्षण के बाद युवाओं को स्थानीय औद्योगिक प्रतिष्ठानों, संस्थानों एवं अन्य रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए विभागीय स्तर पर समन्वित प्रयास करने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाकर युवाओं और किसानों के पलायन को कम किया जा सकता है। इसके लिए पलायन करने वाले युवाओं को चिह्नित कर उन्हें उद्योगों में रोजगार के साथ-साथ कृषि, पशुपालन, बागवानी एवं अन्य संबद्ध क्षेत्रों में उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया।

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प्रशिक्षित युवाओं को ऋण एवं स्वरोजगार से जोड़ने का निर्देश
उप विकास आयुक्त ने आरसेटी एवं कौशल विकास केंद्रों से प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों का नियमित फॉलोअप करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार के लिए मार्गदर्शन, बैंक ऋण एवं सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा।

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बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की भी समीक्षा की गई। अधिक से अधिक आवेदन प्राप्त करने, लंबित आवेदनों का शीघ्र निष्पादन कराने तथा अस्वीकृत आवेदनों के कारणों की समीक्षा कर पात्र लाभुकों को योजना से जोड़ने का निर्देश दिया गया।

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नियमित रोजगार मेला एवं भर्ती कैंप आयोजित करने पर जोर
श्रम एवं नियोजन विभाग को निर्धारित रोस्टर के अनुसार नियमित रूप से रोजगार मेला एवं भर्ती कैंप आयोजित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, इनकी जानकारी का स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा स्थानीय भाषाओं में भी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि अधिक से अधिक युवा रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें।

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बैठक में श्रम एवं नियोजन, उद्योग, आरसेटी, जेएसएलपीएस सहित संबंधित विभागों की योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर भी चर्चा की गई। पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर पात्र लाभुकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का निर्देश दिया गया।

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उप विकास आयुक्त ने कहा कि कौशल विकास का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ना होना चाहिए। इसके लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार से जुड़ाव एवं नियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए परिणाम आधारित कार्ययोजना के तहत काम करने की आवश्यकता है।
बैठक में श्रम अधीक्षक अविनाश ठाकुर, नियोजन पदाधिकारी, आदित्यपुर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक जेएसएलपीएस सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.50 लाख तक कैशलेस उपचार, पीएम राहत योजना का लाभ दिलाने पर जोर

सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.50 लाख तक कैशलेस उपचार, पीएम राहत योजना का लाभ दिलाने पर जोर

चाईबासा | सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को दुर्घटना के बाद के स्वर्णिम समय में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा आर्थिक कारणों से उपचार में किसी प्रकार की देरी रोकने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री–सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार योजना (पीएम राहत) लागू की गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को कम करना और पात्र दुर्घटना पीड़ितों को समय पर जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

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पश्चिमी सिंहभूम के जिला परिवहन पदाधिकारी श्री गौतम कुमार ने बताया कि पीएम राहत योजना के तहत किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहन के कारण हुई दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से अधिकतम सात दिनों तक प्रति पीड़ित ₹1.50 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके लिए दुर्घटना पीड़ित या उसके परिजनों को उपचार के लिए तत्काल राशि की व्यवस्था करने की आवश्यकता नहीं होगी।

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उन्होंने बताया कि योजना में दुर्घटना के बाद के शुरुआती समय को विशेष महत्व दिया गया है। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल स्थिरीकरण उपचार उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है, ताकि उपचार में देरी के कारण किसी व्यक्ति की जान न जाए। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस, अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग एवं परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

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जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि सड़क दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित पुलिस पदाधिकारी द्वारा इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना प्रतिवेदन (ई-डार) पर दुर्घटना एवं पीड़ित से संबंधित आवश्यक विवरण समयबद्ध तरीके से दर्ज किया जाना है। ई-डार व्यवस्था के माध्यम से दुर्घटना की सूचना, पीड़ित की पहचान, पुलिस प्रमाणीकरण तथा अस्पताल में उपचार की प्रक्रिया को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है।

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उन्होंने कहा कि स्वर्णिम समय में उपचार उपलब्ध कराना योजना की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा घायल व्यक्ति के जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में किसी भी सड़क दुर्घटना की स्थिति में आम लोगों को घायल व्यक्ति की सहायता करने और उसे यथाशीघ्र नजदीकी सक्षम अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करना चाहिए।
श्री गौतम कुमार ने जिले के संबंधित पदाधिकारियों एवं अस्पताल प्रबंधन से अपील की कि पीएम राहत योजना के प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को बिना अनावश्यक विलंब के योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों से ई-डार पर दुर्घटना की सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित करने को कहा, ताकि पीड़ित के उपचार की प्रक्रिया निर्बाध रूप से आगे बढ़ सके।

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उन्होंने आमजनों से भी अपील की कि सड़क दुर्घटना की स्थिति में घायल व्यक्ति को अकेला न छोड़ें और तत्काल 112 आपातकालीन सेवा से संपर्क करें। साथ ही, उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से घायल को निकटतम सक्षम अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करें। समय पर मिली चिकित्सा सहायता दुर्घटना पीड़ित के लिए जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक अंतर साबित हो सकती है।

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जिला परिवहन पदाधिकारी ने कहा कि पीएम राहत योजना केवल उपचार की व्यवस्था नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित को समय पर जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण मानवीय पहल है। इसका प्रभावी क्रियान्वयन प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य संस्थानों और आम नागरिकों के सामूहिक सहयोग से ही सुनिश्चित किया जा सकता है।

चाईबासा में 120 प्रशिक्षु छात्राओं का लैंप लाइटिंग एवं कैपिंग समारोह आयोजित

चाईबासा में 120 प्रशिक्षु छात्राओं का लैंप लाइटिंग एवं कैपिंग समारोह आयोजित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल परिसर, चाईबासा स्थित झारखंड सरकार के कल्याण विभाग के अंतर्गत प्रेजा फाउंडेशन द्वारा संचालित नर्सिंग कौशल कॉलेज में छठे बैच (सत्र 2024-26) की 120 प्रशिक्षु छात्राओं का लैंप लाइटिंग एवं कैपिंग समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त मनीष कुमार ने की।

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कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त मनीष कुमार ने उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार सहित अन्य अतिथियों की मौजूदगी में दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद विधिवत रूप से लैंप लाइटिंग एवं कैपिंग समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान प्रशिक्षु छात्राओं ने नर्सिंग सेवा के प्रति समर्पण, सेवा भावना, अनुशासन तथा अपने दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन करने का संकल्प लिया।

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नर्सिंग सेवा में तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदना भी आवश्यक : उपायुक्त
समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि नर्सिंग का क्षेत्र सीधे तौर पर मानव सेवा से जुड़ा हुआ है। नर्सिंग कर्मी स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे मरीजों के उपचार में सहयोग करने के साथ-साथ उनके मानसिक संबल और आत्मविश्वास को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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उन्होंने कहा कि एक कुशल नर्स बनने के लिए केवल तकनीकी ज्ञान और प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, धैर्य, अनुशासन, विनम्र व्यवहार और सेवा भावना भी आवश्यक है। उन्होंने प्रशिक्षु छात्राओं से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और कौशल को पूरी निष्ठा के साथ आत्मसात करने की अपील की।

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उपायुक्त ने कहा कि छात्राएं भविष्य में अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करते हुए समाज एवं जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि यह समारोह प्रशिक्षु छात्राओं के व्यावसायिक जीवन की महत्वपूर्ण शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने सभी छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने कार्य एवं आचरण से नर्सिंग पेशे की गरिमा को और ऊंचा करें।

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सेवा, समर्पण और अनुशासन को बनाएं कार्यशैली का हिस्सा : डीडीसी
उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए सेवा भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। नर्सिंग एक ऐसा पेशा है, जिसमें मरीजों के साथ निरंतर संपर्क और देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे में धैर्य, संवेदनशीलता और अनुशासन नर्सिंग कर्मियों के प्रमुख गुण होने चाहिए।
उन्होंने प्रशिक्षु छात्राओं से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का निरंतर अभ्यास करने और अपने कौशल को विकसित करते रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। छात्राएं भविष्य में जहां भी कार्य करें, वहां पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ मरीजों एवं आमजनों की सेवा को प्राथमिकता दें।

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समारोह के दौरान लैंप लाइटिंग एवं कैपिंग की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। इस अवसर पर प्रशिक्षु छात्राओं में विशेष उत्साह और उमंग देखने को मिला। समारोह ने छात्राओं को नर्सिंग सेवा के मूल्यों, दायित्वों और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराने के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल, सिविल सर्जन मीना कालंडिया, उपाधीक्षक शिवचरण हांसदा, प्रेजा फाउंडेशन के ऑपरेशन लीड रवि कुमार, उप निदेशक नैंसी राजेल, प्राचार्या सहित नर्सिंग कौशल कॉलेज के सभी कर्मी उपस्थित रहे। समारोह में सातवें एवं आठवें बैच की प्रशिक्षु छात्राएं भी शामिल हुईं।

विश्व रेबीज दिवस पर सदर अस्पताल में जागरूकता रैली, पशु के काटने पर तत्काल उपचार लेने की अपील

विश्व रेबीज दिवस पर सदर अस्पताल में जागरूकता रैली, पशु के काटने पर तत्काल उपचार लेने की अपील

चाईबासा | विश्व रेबीज दिवस-2026 के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिले में रेबीज की रोकथाम, पशुजनित रोगों से बचाव तथा पशु के काटने की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय उपचार के प्रति आमजनों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सदर अस्पताल, चाईबासा में जागरूकता रैली का आयोजन किया गया।

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रैली को सिविल सर्जन डॉ. मीणा कलुंडिया, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिवचरण हांसदा, जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. मीनू कुमारी तथा जिला मलेरिया पदाधिकारी-सह-राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी डॉ. जगन्नाथ हेम्ब्रम ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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रैली के माध्यम से आमजनों को रेबीज संक्रमण के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया। लोगों को बताया गया कि कुत्ते अथवा किसी अन्य संक्रमित पशु के काटने या खरोंच लगने की स्थिति में घाव को तत्काल साबुन और स्वच्छ बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना किसी विलंब के निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार लेना चाहिए।

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कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों एवं प्रतिभागियों ने रेबीज जागरूकता की शपथ भी ली। शपथ के माध्यम से प्रतिभागियों ने रेबीज की रोकथाम के संबंध में समुदाय को जागरूक करने, पशु के काटने की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्राथमिक उपचार प्रक्रिया की जानकारी देने, हानिकारक पारंपरिक उपचार पद्धतियों से बचने तथा समय पर चिकित्सकीय उपचार लेने के लिए लोगों को प्रेरित करने का संकल्प लिया।

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कार्यक्रम में बताया गया कि रेबीज एक गंभीर, लेकिन पूरी तरह रोकथाम योग्य रोग है। पशु के काटने अथवा खरोंच लगने के बाद किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। तत्काल प्राथमिक उपचार और चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। समय पर उचित उपचार और टीकाकरण से रेबीज के गंभीर परिणामों से बचाव संभव है।

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जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने आमजनों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी रेबीज की रोकथाम, पशु के काटने के बाद तत्काल उपचार और टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूक करें। साथ ही, पशुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए पशुजनित रोगों की रोकथाम में सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करें।

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मनोहरपुर में जिला स्तरीय सखी संवाद कार्यक्रम आयोजित, महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन पर जोर

मनोहरपुर में जिला स्तरीय सखी संवाद कार्यक्रम आयोजित, महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन पर जोर

मनोहरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड कार्यालय सभागार में शुक्रवार को जिला स्तरीय ‘सखी संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मनीष कुमार ने महिला सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन, स्वास्थ्य, स्वच्छता, नशामुक्ति और वित्तीय समावेशन से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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कार्यक्रम में मनोहरपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी शक्ति कुंज, झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (JSLPS) की जिला कार्यक्रम प्रबंधक एशियानी मरकी, जिला एवं प्रखंड स्तरीय टीम के पदाधिकारी-कर्मी तथा भौतिक एवं वर्चुअल माध्यम से बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी दीदियां शामिल हुईं।
आजीविका गतिविधियों को बाजार से जोड़ने पर जोर
उपायुक्त ने दीदी कैफे, पलाश मार्ट सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों को और सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दीदियों को प्रशिक्षण देने के साथ उनके द्वारा तैयार उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि महिलाओं की आय में वृद्धि हो और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

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बैठक में बताया गया कि ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से दीदियों को विभिन्न कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आगामी दीपावली को देखते हुए मिठाई एवं अन्य उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि दीपावली के अवसर पर लगाए जाने वाले आजीविका समूहों के बिक्री केंद्रों के माध्यम से इन उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, मनोहरपुर स्थित दीदी कैफे को रेलवे कर्मियों एवं अन्य संस्थागत ग्राहकों से जोड़ने की दिशा में पहल करने को कहा।


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नशीली फसलों के स्थान पर वैकल्पिक आजीविका को बढ़ावा
नशामुक्ति अभियान को आजीविका से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने गांव स्तर पर अफीम जैसी नशीली फसलों की खेती को रोकने के साथ इससे जुड़े परिवारों को मछली पालन, मशरूम उत्पादन तथा अन्य कृषि एवं गैर-कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़ने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि नशीली फसलों की खेती छोड़ने वाले परिवारों के लिए आय के स्थायी विकल्प उपलब्ध कराना आवश्यक है। इससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के साथ नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा सकेगा।

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बर्तन बैंक के बेहतर उपयोग का निर्देश
उपायुक्त ने गांवों में संचालित बर्तन बैंकों का विवाह, जन्मदिन, सामाजिक एवं अन्य सामुदायिक आयोजनों में अधिकाधिक उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने इनके सामुदायिक स्तर पर व्यवस्थित संचालन पर भी जोर दिया। साथ ही, आकस्मिक एवं स्वच्छता निधि में अधिकतम 30 लाख रुपये तक राशि संग्रह करने तथा सभी सामुदायिक आजीविका संघों में अब तक जमा राशि की समीक्षा करने का निर्देश दिया।
स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए उपायुक्त ने लोगों को उबला अथवा गर्म पानी पीने, नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने तथा सुरक्षित तरीके से चारपाई अथवा बिस्तर पर सोने के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया।

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उन्होंने अधिक से अधिक टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार, पोषण और आवश्यक सहयोग में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया। स्वच्छता के क्षेत्र में ‘हर घर बोरा’ अभियान को प्रभावी बनाने, प्रत्येक घर में कचरा संग्रह के लिए बोरा उपलब्ध कराने तथा कचरे का नियमित और उचित निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
इसके अलावा हरित बिंदु चुनौती, जलजमाव वाले स्थानों की सफाई तथा प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
1 अक्टूबर को 100 यूनिट रक्तदान का लक्ष्य
आगामी 1 अक्टूबर को आयोजित होने वाले रक्तदान कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने JSLPS से जुड़े सभी सदस्यों एवं संबंधित टीमों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कार्यक्रम के माध्यम से 100 यूनिट रक्तदान का लक्ष्य हासिल करने के लिए आवश्यक तैयारी करने को कहा।
जिले में 1,500 सक्रिय दीदियों की होगी पहचान
महिला नेतृत्व एवं सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिले में 1,500 सक्रिय दीदियों की पहचान की जाएगी। इसके तहत आंगनबाड़ी सेविका, सहिया, जलसहिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को चिन्हित किया जाएगा।

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इसी प्रकार बेहतर कार्य करने वाले सामुदायिक कार्यकर्ताओं को भी चिन्हित कर उन्हें नीले ब्लेजर के माध्यम से विशिष्ट पहचान एवं सम्मान देने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
सखी दिवस और सखी संवाद को प्रभावी मंच बनाने पर जोर
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि प्रत्येक माह की 10 तारीख को सखी दिवस और 25 तारीख को सखी संवाद को महिला नेतृत्व, अनुभवों के आदान-प्रदान और सामुदायिक समस्याओं के समाधान के प्रभावी मंच के रूप में विकसित किया जाए।
उन्होंने कहा कि इन आयोजनों में दीदियों की उपलब्धियों, नवाचारों और विशेष प्रयासों को साझा किया जाए, ताकि अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ सकें। सामुदायिक जुड़ाव मजबूत करने के लिए विशेष अवसरों पर सामूहिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया।
स्वास्थ्य एवं सामाजिक दायित्व की दिलाई गई शपथ
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों, कर्मियों एवं दीदियों को स्वास्थ्य एवं सामाजिक दायित्व से संबंधित शपथ दिलाई गई। सभी ने समाज के प्रति जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सहयोग की भावना के साथ कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में उपस्थित जिला एवं प्रखंड स्तरीय आजीविका संवर्धन दल तथा मनोहरपुर की दीदियों ने महिला सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन, स्वास्थ्य, स्वच्छता और नशामुक्ति से संबंधित निर्देशों को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने तथा अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई।

उपायुक्त मनीष कुमार ने आंगनबाड़ी केंद्र मणीपुर का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार के दिए निर्देश

उपायुक्त मनीष कुमार ने आंगनबाड़ी केंद्र मणीपुर का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार के दिए निर्देश

मनोहरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मनीष कुमार ने मनोहरपुर प्रखंड क्षेत्र के भ्रमण के क्रम में आंगनबाड़ी केंद्र मणीपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र में संचालित गतिविधियों, बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं तथा पोषण व्यवस्था का जायजा लिया।

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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने आंगनबाड़ी केंद्र में उपस्थित बच्चों से स्नेहपूर्ण संवाद किया और उनकी पढ़ाई, खेलकूद एवं दैनिक गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से प्रारंभिक स्तर से जुड़े सरल प्रश्न पूछकर उनकी सीखने की क्षमता एवं गतिविधियों का भी अवलोकन किया।

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उपायुक्त ने बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन एवं पोषण आहार की जानकारी लेते हुए निर्देश दिया कि निर्धारित मानकों के अनुरूप बच्चों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही भोजन की गुणवत्ता एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने को कहा।

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इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र की आधारभूत सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। केंद्र परिसर में पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जल मीनार स्थापित करने का निर्देश दिया। वहीं, बच्चों में स्वच्छता की आदत विकसित करने और नियमित रूप से हाथ धोने की व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए हैंडवॉश यूनिट के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।

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उपायुक्त ने आंगनबाड़ी केंद्र भवन की स्थिति का भी अवलोकन किया और आवश्यक मरम्मती एवं सुधार कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण के साथ-साथ उनके प्रारंभिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं व्यवहार निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। ऐसे में केंद्रों पर बच्चों की सुविधाओं, स्वच्छता, पोषण और आधारभूत संरचना से संबंधित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं बेहतर रहनी चाहिए।

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उन्होंने उपस्थित कर्मियों को आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।

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