चाईबासा | स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने, खुले में शौच से मुक्ति की स्थिति बनाए रखने तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय के सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। निदेशक, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), रांची श्रीमती रंजीता हेम्ब्रम की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार एवं उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार उपस्थित रहे।

बैठक में सिंहभूम (कोल्हान) प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले पांच पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों—चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला, जमशेदपुर एवं आदित्यपुर में संचालित योजनाओं और कार्यों की घटकवार समीक्षा की गई। इस दौरान निर्धारित लक्ष्यों के विरुद्ध अब तक हुई प्रगति का आकलन करते हुए संबंधित अभियंताओं एवं कर्मियों को कार्यों में तेजी लाने, लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने तथा निर्धारित समय-सीमा में योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में दिसंबर 2026 तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।
व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में तेजी लाने का निर्देश
व्यक्तिगत घरेलू शौचालय निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। इसके लिए जलसहियाओं को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप जिम्मेदारी सौंपने और पात्र लाभुकों तक योजना का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।

साथ ही, शौचालय निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने, निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने तथा लक्ष्य प्राप्ति में आ रही बाधाओं का समयबद्ध समाधान करने का निर्देश दिया गया, ताकि ग्रामीण परिवारों को स्वच्छता संबंधी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान निर्मित सेग्रीगेशन शेड को क्रियाशील बनाने तथा कचरा संग्रहण और परिवहन के लिए उपलब्ध वाहनों का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
संबंधित अभियंताओं को गांवों में कचरे के व्यवस्थित संग्रहण, पृथक्करण एवं परिवहन की व्यवस्था सक्रिय रखने को कहा गया। साथ ही, उपलब्ध आधारभूत संरचनाओं का समुचित उपयोग करने और उनके संचालन की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया गया।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि केवल आधारभूत संरचनाओं का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित संचालन और प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं की सतत निगरानी करने का निर्देश दिया गया।
समय-सीमा में लक्ष्य पूरा करने पर विशेष जोर
समीक्षा बैठक में सभी पांचों पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित कार्यों की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। दिसंबर 2026 तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए लंबित कार्यों को पूरा करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने तथा क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।

संबंधित अभियंताओं को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और स्वच्छ व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला, जमशेदपुर एवं आदित्यपुर पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला एवं प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों के पदाधिकारी-कर्मी तथा यूनिसेफ समर्थित टीम के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।























































