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दिसंबर 2026 तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल बनाने का लक्ष्य, स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा बैठक में निर्देश

दिसंबर 2026 तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल बनाने का लक्ष्य, स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा बैठक में निर्देश

चाईबासा | स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने, खुले में शौच से मुक्ति की स्थिति बनाए रखने तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय के सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। निदेशक, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), रांची श्रीमती रंजीता हेम्ब्रम की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार एवं उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार उपस्थित रहे।

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बैठक में सिंहभूम (कोल्हान) प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले पांच पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों—चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला, जमशेदपुर एवं आदित्यपुर में संचालित योजनाओं और कार्यों की घटकवार समीक्षा की गई। इस दौरान निर्धारित लक्ष्यों के विरुद्ध अब तक हुई प्रगति का आकलन करते हुए संबंधित अभियंताओं एवं कर्मियों को कार्यों में तेजी लाने, लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने तथा निर्धारित समय-सीमा में योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

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बैठक में दिसंबर 2026 तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में तेजी लाने का निर्देश

व्यक्तिगत घरेलू शौचालय निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। इसके लिए जलसहियाओं को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप जिम्मेदारी सौंपने और पात्र लाभुकों तक योजना का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।

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साथ ही, शौचालय निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने, निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने तथा लक्ष्य प्राप्ति में आ रही बाधाओं का समयबद्ध समाधान करने का निर्देश दिया गया, ताकि ग्रामीण परिवारों को स्वच्छता संबंधी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

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ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान निर्मित सेग्रीगेशन शेड को क्रियाशील बनाने तथा कचरा संग्रहण और परिवहन के लिए उपलब्ध वाहनों का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

संबंधित अभियंताओं को गांवों में कचरे के व्यवस्थित संग्रहण, पृथक्करण एवं परिवहन की व्यवस्था सक्रिय रखने को कहा गया। साथ ही, उपलब्ध आधारभूत संरचनाओं का समुचित उपयोग करने और उनके संचालन की नियमित निगरानी करने पर जोर दिया गया।

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बैठक में स्पष्ट किया गया कि केवल आधारभूत संरचनाओं का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित संचालन और प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं की सतत निगरानी करने का निर्देश दिया गया।

समय-सीमा में लक्ष्य पूरा करने पर विशेष जोर

समीक्षा बैठक में सभी पांचों पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित कार्यों की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। दिसंबर 2026 तक सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए लंबित कार्यों को पूरा करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने तथा क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।

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संबंधित अभियंताओं को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और स्वच्छ व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला, जमशेदपुर एवं आदित्यपुर पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला एवं प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों के पदाधिकारी-कर्मी तथा यूनिसेफ समर्थित टीम के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

कोल्हान विश्वविद्यालय में स्नातक नामांकन के लिए 24 अक्टूबर से खुलेगा चांसलर पोर्टल, 28 तक करें आवेदन

कोल्हान विश्वविद्यालय में स्नातक नामांकन के लिए 24 अक्टूबर से खुलेगा चांसलर पोर्टल, 28 तक करें आवेदन

चाईबासा | कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के अंतर्गत स्नातक चार वर्षीय पाठ्यक्रम (FYUGP), सत्र 2026–30 तथा स्नातक वोकेशनल कार्यक्रम, सत्र 2026–29 में नामांकन के लिए चांसलर पोर्टल 24 अक्टूबर 2026 से खोला जाएगा। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 28 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय के डीन, अकादमिक अफेयर्स डॉ. संजय यादव द्वारा जारी सूचना के अनुसार, झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) के इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम तथा महाविद्यालयों से प्राप्त आवेदनों के आलोक में नामांकन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

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कंपार्टमेंटल परीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों को भी मिलेगा मौका

कोल्हान विश्वविद्यालय ने इंटरमीडिएट कंपार्टमेंटल परीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों को भी स्नातक में नामांकन के लिए विशेष अवसर प्रदान किया है। ऐसे विद्यार्थी भी निर्धारित समय सीमा के भीतर चांसलर पोर्टल के माध्यम से FYUGP सत्र 2026–30 एवं स्नातक वोकेशनल कार्यक्रम सत्र 2026–29 में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे नामांकन प्रक्रिया को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर सही एवं पूर्ण जानकारी के साथ आवेदन करें। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि, योग्यता और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर विषय एवं महाविद्यालय का चयन करने की सलाह दी।

कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों को आवेदन से पहले APAAR ID, ABC ID तथा आरक्षित श्रेणी से संबंधित प्रमाण पत्रों सहित सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को सुचारु, पारदर्शी और अवसरपरक नामांकन प्रक्रिया उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

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29 अक्टूबर से जारी होगी मेधा सूची

विश्वविद्यालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन 24 से 28 अक्टूबर तक किए जा सकेंगे। मेधा सूची का प्रकाशन 29 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक संबंधित महाविद्यालयों की वेबसाइट एवं नोटिस बोर्ड पर किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों का नामांकन भी इसी अवधि में होगा।

विद्यार्थियों को चांसलर पोर्टल “www.universities.jharkhand.gov.in” (https://www.universities.jharkhand.gov.in) के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन शुल्क 25 रुपये प्रति विषय निर्धारित किया गया है। विद्यार्थी एक से अधिक महाविद्यालयों में आवेदन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने सलाह दी है कि विद्यार्थी अपने पसंदीदा विषय के साथ अन्य उपलब्ध विषयों में भी आवेदन करें, ताकि सीटों की सीमित उपलब्धता की स्थिति में उनके पास वैकल्पिक अवसर रहें।

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CUET अनिवार्य नहीं, 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी कर सकते हैं आवेदन

नामांकन के लिए इंटरमीडिएट (10+2) उत्तीर्ण विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए CUET परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य नहीं है। वर्तमान सत्र में सभी महाविद्यालयों में विषयवार सीटें निर्धारित की गई हैं। इसलिए नामांकन उपलब्ध सीटों और निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत विद्यार्थियों को अपनी रुचि और योग्यता के अनुरूप विषय चुनने की सलाह दी गई है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस सत्र में Botany और Zoology के स्थान पर Life Science विषय उपलब्ध कराया गया है। ऐसे विद्यार्थी, जो Botany या Zoology में नामांकन लेना चाहते हैं, उन्हें चांसलर पोर्टल पर Life Science विषय का चयन करना होगा।

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APAAR ID और ABC ID रखना जरूरी

विश्वविद्यालय के निर्देश के अनुसार, विद्यार्थियों को आवेदन एवं पंजीकरण के दौरान APAAR ID (Automated Permanent Academic Account Registry) और ABC ID (Academic Bank of Credits) का विवरण उपलब्ध कराना होगा। जिन विद्यार्थियों ने अब तक ये आईडी नहीं बनवाई हैं, वे DigiLocker के माध्यम से इन्हें बनवा सकते हैं। ABC ID से संबंधित जानकारी “www.abc.gov.in” (https://www.abc.gov.in) पर भी उपलब्ध है। नामांकन प्रक्रिया में APAAR ID अनिवार्य होगी।

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आरक्षित श्रेणी के विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देना होगा

SC, ST, BC-I, BC-II और EWS श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ लेने वाले विद्यार्थियों को झारखंड सरकार के सक्षम पदाधिकारी द्वारा जारी संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। विद्यार्थियों को आवेदन में अपनी आरक्षण श्रेणी की सही जानकारी भरने और आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने का निर्देश दिया गया है।

विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को आगाह किया है कि आवेदन में दर्ज सभी जानकारियां प्रमाणित दस्तावेजों के अनुरूप होनी चाहिए। दस्तावेज सत्यापन के दौरान किसी प्रकार की गलत जानकारी मिलने पर संबंधित विद्यार्थी के नामांकन पर विचार नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, महाविद्यालयों को झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित विषयवार सीटों और नामांकन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

टीबी उन्मूलन को लेकर पश्चिमी सिंहभूम में जागरूकता अभियान तेज, डीसी मनीष कुमार ने रथ को दिखाई हरी झंडी

टीबी उन्मूलन को लेकर पश्चिमी सिंहभूम में जागरूकता अभियान तेज, डीसी मनीष कुमार ने रथ को दिखाई हरी झंडी

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने और क्षय रोग के प्रति आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट जागृति के तहत जनजागरूकता अभियान को गति दी जा रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को जिला समाहरणालय परिसर, चाईबासा से उपायुक्त मनीष कुमार ने JOSH टीम के टीबी जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर टीबी उन्मूलन के प्रति लोगों, विशेषकर युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सेल्फी स्टैंड एवं हस्ताक्षर अभियान का भी शुभारंभ किया गया।

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इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाना, रोग के लक्षणों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा लोगों को समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित करना है। साथ ही, टीबी से जुड़े सामाजिक भेदभाव और भ्रांतियों को दूर करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

अभियान के माध्यम से युवाओं को टीबी उन्मूलन के प्रयासों से जोड़कर समाज में जागरूकता के वाहक के रूप में तैयार करने की पहल की गई है। “टीबी उन्मूलन के लिए युवा हैं तैयार!” और “हम हैं JOSH Team! करना है, करके दिखाएंगे!” जैसे प्रेरक संदेशों के जरिए युवाओं को इस जनहितकारी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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जिले के सभी 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचेगा जागरूकता रथ

टीबी जागरूकता रथ पश्चिमी सिंहभूम जिले के सभी 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचेगा। इसके माध्यम से विभिन्न प्रखंडों में युवाओं और आम नागरिकों को टीबी के प्रमुख लक्षणों, समय पर चिकित्सकीय जांच, नियमित दवा सेवन और उपचार का निर्धारित कोर्स पूरा करने के महत्व की जानकारी दी जाएगी।

अभियान के दौरान लोगों को बताया जाएगा कि लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना और भूख में कमी जैसे लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क कर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। संभावित लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच कराने से रोग की पहचान और उपचार में मदद मिलती है।

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जागरूकता रथ के माध्यम से यह संदेश भी दिया जाएगा कि टीबी एक उपचार योग्य बीमारी है। समय पर पहचान, नियमित रूप से दवा का सेवन और स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह के अनुसार उपचार पूरा करने से रोग से स्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है।

JOSH टीम के माध्यम से युवाओं की सामूहिक भागीदारी

टीबी उन्मूलन अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए प्रखंड एवं वार्ड स्तर पर JOSH टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में MY Bharat के पांच स्वयंसेवक, राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के पांच कैडेट और एक नोडल प्रथम श्रेणी पदाधिकारी को शामिल किया गया है।

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इस पहल के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता को प्रशासनिक समन्वय के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। टीम के सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को टीबी के लक्षणों, जांच और उपचार के प्रति जागरूक करेंगे तथा जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ने में सहयोग प्रदान करेंगे।

युवाओं की भागीदारी से विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों, वार्डों और स्थानीय समुदायों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, टीबी से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा।

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सेल्फी स्टैंड और हस्ताक्षर अभियान से लिया जाएगा टीबी मुक्त समाज का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान शुरू किए गए सेल्फी स्टैंड एवं हस्ताक्षर अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों और युवाओं को टीबी उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करने के लिए प्रेरित करना है। इन गतिविधियों के माध्यम से लोग टीबी मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लेकर जागरूकता अभियान से जुड़ सकेंगे।

हस्ताक्षर अभियान के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। वहीं, सेल्फी स्टैंड के माध्यम से अभियान के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और युवाओं को जागरूकता गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

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इस दौरान टीबी से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करने, रोग से प्रभावित व्यक्तियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने और उन्हें समय पर उपचार के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

जिला प्रशासन ने लोगों से की जांच और उपचार कराने की अपील

जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि टीबी के संभावित लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार शुरू करें। उपचार के दौरान नियमित रूप से दवा लें तथा निर्धारित अवधि तक उपचार पूरा करें।

इसके साथ ही, टीबी से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करने और उन्हें परिवार एवं समाज की ओर से सहयोग, सम्मान तथा प्रोत्साहन देने की अपील की गई। प्रशासन ने लोगों से अपने आसपास के नागरिकों को टीबी के लक्षणों, जांच और उपचार की उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी देकर जागरूकता अभियान को मजबूत बनाने का भी आग्रह किया।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. आलोक कुमार महतो, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. जगन्नाथ हेम्ब्रम, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिव चरण हांसदा सहित जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के सदस्य एवं संबंधित स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

जल जीवन मिशन की धीमी प्रगति पर DC नितिश कुमार सिंह नाराज, लापरवाह संवेदकों पर कार्रवाई के निर्देश

जल जीवन मिशन की धीमी प्रगति पर DC नितिश कुमार सिंह नाराज, लापरवाह संवेदकों पर कार्रवाई के निर्देश

सरायकेला | सरायकेला-खरसावां जिले में जल जीवन मिशन के तहत संचालित ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजनाओं की धीमी प्रगति पर उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने नाराजगी जताई है। समाहरणालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने, पूर्ण हो चुकी योजनाओं को शीघ्र चालू कराने तथा कार्य में लापरवाही बरतने वाले संवेदकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

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बैठक में जल उपचार संयंत्र, पाइपलाइन निर्माण, बहु-ग्रामीण जलापूर्ति योजना (एमवीएस), एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजना (एसवीएस), इंटरवेल निर्माण, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और हर घर जल योजना की प्रगति की योजनावार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों और संवेदकों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा।

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लापरवाह संवेदकों पर होगी कार्रवाई

उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं के कार्यों में अनावश्यक देरी हो रही है या निर्धारित मानकों के अनुरूप काम नहीं किया जा रहा है, उनके जिम्मेदार संवेदकों के खिलाफ संविदा की शर्तों और प्रचलित नियमों के तहत कार्रवाई की जाए। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित संवेदकों को काली सूची में डालने की अनुशंसा भी भेजी जाए।

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उन्होंने अभियंताओं को नियमित रूप से कार्यस्थलों का निरीक्षण करने और योजनाओं की अद्यतन प्रगति से जिला मुख्यालय को अवगत कराने का निर्देश दिया। साथ ही, जिन योजनाओं में संरचनात्मक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, उनमें पाइपलाइन बिछाने सहित शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा।

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उपायुक्त ने कहा कि निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद बंद पड़ी योजनाओं को जल्द चालू किया जाए, ताकि ग्रामीण परिवारों को नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध हो सके। इसके अलावा, पूर्ण हो चुकी योजनाओं के हस्तांतरण की प्रक्रिया भी निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया।

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हर पात्र ग्रामीण परिवार तक पहुंचेगा नल से जल

उपायुक्त ने जिले के छूटे हुए टोलों, गांवों और घरों को चिह्नित कर उन्हें नल-जल योजना से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने हर घर जल योजना के तहत लंबित प्रमाणन और अन्य औपचारिकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने तथा योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सत्यापन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी संबंधित पदाधिकारी और कार्यदायी एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करें।

बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता सहित संबंधित संवेदक उपस्थित थे।

दुर्गा पूजा को लेकर चक्रधरपुर में सुरक्षा व्यवस्था का DC मनीष कुमार ने लिया जायजा, दिए आवश्यक निर्देश

दुर्गा पूजा को लेकर चक्रधरपुर में सुरक्षा व्यवस्था का DC मनीष कुमार ने लिया जायजा, दिए आवश्यक निर्देश

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले में दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार ने चक्रधरपुर शहर का भ्रमण कर विभिन्न पूजा पंडालों, प्रमुख चौक-चौराहों और विसर्जन घाटों पर की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा प्रबंधों, श्रद्धालुओं के आवागमन, भीड़ नियंत्रण और प्रतिमा विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। साथ ही संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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निरीक्षण के दौरान पोड़ाहाट-चक्रधरपुर की अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राजलक्ष्मी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी, चक्रधरपुर नगर परिषद के अध्यक्ष सन्नी उरांव, उपाध्यक्ष विजय कुमार साव, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।

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विभिन्न पूजा पंडालों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा

उपायुक्त मनीष कुमार ने नगर परिषद कार्यालय परिसर स्थित पूजा पंडाल, पुरानी बस्ती के आदि शक्ति पूजा पंडाल, शीतला मंदिर पूजा पंडाल और भगत सिंह चौक स्थित पूजा पंडाल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

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उन्होंने पंडालों में प्रवेश और निकास द्वार, संभावित भीड़ को नियंत्रित करने की योजना, सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा उपायों की समीक्षा की। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी पूजा पंडालों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रवेश और निकास की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे भीड़ का अनावश्यक जमाव न हो और आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

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उन्होंने पूजा समितियों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को समय पर दुरुस्त करने तथा पूरे त्योहार के दौरान सतत निगरानी बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम आवागमन और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।

पवन चौक से भगत सिंह चौक तक पैदल भ्रमण

पूजा पंडालों के निरीक्षण के बाद उपायुक्त ने शहर के प्रमुख स्थल पवन चौक का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने पवन चौक से पुराना रांची रोड होते हुए भगत सिंह चौक तक पैदल भ्रमण किया और मार्ग की स्थिति तथा पूजा के दौरान संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

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इस दौरान प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों पर श्रद्धालुओं के आवागमन एवं भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि त्योहार के दौरान आम नागरिकों और श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो। इसके लिए आवश्यकतानुसार उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए।

विसर्जन घाटों का निरीक्षण, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश

शहर के प्रमुख पूजा पंडालों और मार्गों के निरीक्षण के बाद उपायुक्त मनीष कुमार ने प्रतिमा विसर्जन के मद्देनजर थाना चौक घाट और बलिया घाट का भी जायजा लिया। उन्होंने घाटों पर उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी ली और संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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उपायुक्त ने निर्देश दिया कि दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विसर्जन स्थलों पर भीड़ का सुव्यवस्थित प्रबंधन, सुरक्षित आवागमन और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं, ताकि विसर्जन कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

नवोदय विद्यालय झींकपानी में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित, उपायुक्त ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित

नवोदय विद्यालय झींकपानी में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित, उपायुक्त ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी प्रखंड स्थित पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में विद्यालय प्रबंध समिति की वार्षिक बैठक के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मनीष कुमार ने विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें अनुशासन, सकारात्मक सोच, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और निरंतर सीखने की प्रेरणा दी। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद संबंधी उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेना भी जरूरी है।

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कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त मनीष कुमार, सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा पदाधिकारी और छात्राओं ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद स्वागत नृत्य के माध्यम से अतिथियों का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में असम से आई छात्राओं ने पारंपरिक बिहू नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जबकि छात्रा ऋषिका गौर ने कथक नृत्य के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मकता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।

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विद्यार्थियों को अनुशासन और निरंतर प्रयास का दिया संदेश

उपायुक्त मनीष कुमार ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने, नियमित अध्ययन करने और प्रत्येक कार्य को जिम्मेदारी के साथ पूरा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान विकसित की गई अच्छी आदतें, अनुशासन और सीखने की ललक भविष्य में सफलता की मजबूत नींव तैयार करती हैं।

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उन्होंने कहा कि सफलता केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान को व्यवहार में उतारना, समस्याओं का समाधान खोजना, दूसरों के प्रति संवेदनशील रहना और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर निरंतर अभ्यास के माध्यम से उनमें सुधार करना चाहिए।

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उपायुक्त ने विद्यार्थियों को असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ने, अपनी गलतियों को स्वीकार करने और उनमें सुधार करने की आदत विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने पढ़ाई के साथ खेलकूद, संगीत, नृत्य, चित्रकला, विज्ञान और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भाग लेने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, ऐसी गतिविधियों से आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।

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मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक अभिव्यक्ति पर जोर

सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं और विचारों को सकारात्मक एवं प्रभावी तरीके से व्यक्त करना चाहिए। पढ़ाई के दौरान आने वाली चुनौतियों का धैर्यपूर्वक सामना करना, आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद करना तथा अपनी रुचियों के लिए समय निकालना व्यक्तित्व विकास में सहायक होता है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने भी विद्यार्थियों को पूरे मनोयोग से पढ़ाई करने, विषयों को समझकर अध्ययन करने और नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखते हुए निरंतर सीखने और बेहतर प्रदर्शन करने का संदेश दिया।

विज्ञान एवं कला मॉडलों का किया अवलोकन

उपायुक्त मनीष कुमार ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विज्ञान एवं कला से संबंधित विभिन्न मॉडलों का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों से मॉडलों की अवधारणा, उपयोगिता और कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी ली तथा उनकी रचनात्मक सोच और विषयों को व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करने की क्षमता की सराहना की।

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उन्होंने कहा कि विज्ञान और कला के माध्यम से नए विचारों को अभिव्यक्त करने तथा दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान खोजने के अवसर मिलते हैं। विद्यार्थियों को जिज्ञासु बने रहना चाहिए और पुस्तकीय ज्ञान के साथ प्रयोग एवं अनुभव के माध्यम से भी सीखने का प्रयास करना चाहिए।

शिवालिक सदन को मिला ओवरऑल चैंपियन का खिताब

विद्यालय में आयोजित वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सदनों को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में शिवालिक सदन ने ओवरऑल चैंपियन का खिताब हासिल किया। उदयगिरि सदन को द्वितीय और अरावली सदन को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

शैक्षणिक क्षेत्र में अर्धवार्षिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। कक्षा छह से आठ के कनीय वर्ग में अभिनव आनंद तथा कक्षा नौ से 12 के वरीय वर्ग में शुभम मंडल को पुरस्कार प्रदान किया गया।

नवोदय विद्यालय समिति द्वारा आयोजित कला उत्सव में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। समूह वाद्ययंत्र प्रतियोगिता में गौरव, हरि, सोम और करण को, एकल गायन प्रतियोगिता में प्रीतम को तथा चित्रकला प्रतियोगिता में दीपांशु को पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कार वितरण के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों, खेल प्रतिभा और सांस्कृतिक अभिरुचि को प्रोत्साहित किया गया।

शिक्षक-शिक्षिकाओं के सहयोग से हुआ कार्यक्रम का आयोजन

कार्यक्रम का सफल आयोजन प्रभारी प्राचार्य पंकज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और अन्य सदस्यों के सहयोग से संपन्न हुआ। समारोह ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, उपलब्धियों के लिए सम्मान प्राप्त करने और जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों को समझने का अवसर प्रदान किया।

अंत में वरीय शिक्षक सुशांत दास ने उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके बहुमूल्य समय, मार्गदर्शन और सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मांगीलाल रूंगटा विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मांगीलाल रूंगटा विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सोमवार को मांगीलाल रूंगटा +2 उच्च विद्यालय, चाईबासा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूक करना, मानसिक तनाव एवं भावनात्मक समस्याओं को समझने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इस दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और संतुलित डिजिटल जीवनशैली के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने की जानकारी दी गई।

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कार्यक्रम में प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल, सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल पदाधिकारी डॉ. मीनू कुमार, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिव चरण हसदा, मनोचिकित्सक डॉ. दीपमाला, नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. भाग्यश्री कर, विद्यालय के प्राचार्य, जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यालय के कर्मी, एएनएम नर्सिंग स्कूल की छात्राएं एवं प्रशिक्षु, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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बच्चों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल ने कहा कि बच्चों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण है, मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही आवश्यक है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने से बच्चों की एकाग्रता बढ़ती है, सीखने की क्षमता में सुधार होता है और वे अपनी भावनाओं को समझने के साथ जीवन की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की भावनाओं, समस्याओं और दैनिक गतिविधियों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर सहयोग दिया जा सके।

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मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बचें विद्यार्थी

जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार ने विद्यार्थियों को मोबाइल पर वीडियो देखने, गेम खेलने और सोशल मीडिया के इस्तेमाल में अत्यधिक समय व्यतीत करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलकूद, पुस्तक-पठन, संगीत, चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी रुचि विकसित करनी चाहिए। नियमित दिनचर्या अपनाने तथा पढ़ाई, मनोरंजन और शारीरिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी उन्होंने जोर दिया।

मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज न करें, विशेषज्ञों की लें मदद

सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसे शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व देना आवश्यक है। बच्चों में मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी के संकेत दिखाई देने पर उन्हें डांटने अथवा उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी बात समझने और सहयोग देने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों और शिक्षकों को बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिसमें वे बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। जरूरत पड़ने पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील

जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल पदाधिकारी डॉ. मीनू कुमार ने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। तनाव से बचने, पर्याप्त नींद लेने, नियमित व्यायाम करने और परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

उन्होंने मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय उनके बारे में खुलकर बात करने तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सलाह दी।

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डिजिटल जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना जरूरी

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिव चरण हसदा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखना जरूरी है, उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखना भी आवश्यक है। वर्तमान डिजिटल युग में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। विशेषकर किशोरों और युवाओं में इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और अन्य छोटे वीडियो देखने का चलन बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मनोरंजन के लिए सीमित समय तक वीडियो देखना सामान्य है, लेकिन लगातार कई घंटों तक मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने से पढ़ाई, कामकाज और पारिवारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल करने से नींद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे अगले दिन की कार्यक्षमता और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है।

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सकारात्मक गतिविधियों से बेहतर होता है मानसिक स्वास्थ्य

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपनी भावनाओं को समझना, समस्याओं को साझा करना, सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेना मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

साथ ही, अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों के प्रति सजग रहने तथा उन्हें सहयोगपूर्ण और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की अपील की गई।

जमशेदपुर में खेलो इंडिया अस्मिता रग्बी सिटी लीग का आयोजन, 160 बालिका खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा

जमशेदपुर में खेलो इंडिया अस्मिता रग्बी सिटी लीग का आयोजन, 160 बालिका खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा

जमशेदपुर | ईस्ट सिंहभूम रग्बी फुटबॉल एसोसिएशन (ESRFA) के तत्वावधान में रविवार को नामदा बस्ती स्थित टिनप्लेट फुटबॉल ग्राउंड में खेलो इंडिया अस्मिता रग्बी सिटी लीग का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में अंडर-15 और अंडर-18 आयु वर्ग की कुल 16 टीमों की 160 बालिका खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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यह आयोजन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया। प्रतियोगिता के आयोजन में रग्बी इंडिया और झारखंड रग्बी फुटबॉल एसोसिएशन (JARFA) का मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ।

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प्रतियोगिता के दौरान बालिका खिलाड़ियों ने अपने शानदार खेल कौशल, अनुशासन, टीम भावना और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिला खिलाड़ियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना, जमीनी स्तर पर रग्बी को बढ़ावा देना और जिले की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना था।

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अंडर-18 वर्ग में तिरिलडीह रग्बी क्वीन प्रथम

अंडर-18 आयु वर्ग में तिरिलडीह रग्बी क्वीन ने प्रथम स्थान हासिल किया। सिधू-कान्हू हाई स्कूल, केडो की टीम दूसरे स्थान पर रही, जबकि थंडर रग्बी क्वींस ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

अंडर-15 वर्ग में गितिलता हाई स्कूल विजेता

अंडर-15 आयु वर्ग में गितिलता हाई स्कूल की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। सिम्बायोसिस स्कूल की टीम दूसरे स्थान पर रही, जबकि जीएचएस रग्बी टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

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दोनों आयु वर्गों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली टीमों को सम्मानित किया गया। वहीं, प्रतियोगिता में भाग लेने वाली अन्य टीमों की खिलाड़ियों को भी उनके प्रयासों और उत्साहपूर्ण सहभागिता के लिए प्रोत्साहित किया गया।

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ईस्ट सिंहभूम रग्बी फुटबॉल एसोसिएशन ने प्रतियोगिता को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, रेफरी, अधिकारियों, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। एसोसिएशन ने जिले के स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों में रग्बी खेल का विस्तार करने तथा अधिक से अधिक बालिकाओं को इस खेल से जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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दुर्गा पूजा को लेकर प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश

दुर्गा पूजा को लेकर प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश

सरायकेला | दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने को लेकर सोमवार, 12 अक्टूबर को समाहरणालय सभागार में कोल्हान प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त रवि रंजन कुमार विक्रम की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त नितिश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मनोज सर्वांगियारी, उप विकास आयुक्त रीना हांसदा, अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश, नगर आयुक्त एजाज अनवर और अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार समेत विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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बैठक में प्रमंडलीय आयुक्त ने पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी सुनिश्चित करने, महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने और यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें, ताकि श्रद्धालुओं को पूजा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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आयुक्त ने पूजा पंडालों के प्रवेश द्वारों और प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा अनुमंडल स्तर पर नियंत्रण कक्ष के माध्यम से लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया। आदित्यपुर और गम्हरिया जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था करने, महिला पुलिसकर्मियों और दंडाधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करने तथा चिकित्सा दलों को तैयार रखने पर जोर दिया गया। इसके अलावा अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई करने और आवश्यकता के अनुसार बड़े वाहनों के मार्ग में बदलाव की योजना पहले से तैयार रखने का निर्देश दिया गया।

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अवैध शराब और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की होगी जांच

दुर्गा पूजा के दौरान अवैध एवं नकली शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए उत्पाद विभाग और पुलिस को नियमित जांच एवं औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया। वहीं, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम खाद्य प्रतिष्ठानों एवं बसों की जांच करेगी। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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सभी पूजा पंडालों का होगा सुरक्षा ऑडिट

प्रमंडलीय आयुक्त ने सभी पूजा पंडालों का सुरक्षा ऑडिट कराने के साथ अग्नि सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी और साफ-सफाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य सेवाओं को भी पूरी तरह तैयार रखने को कहा गया।

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डीजे और सोशल मीडिया पर भी रहेगी नजर

बैठक में डीजे एवं ध्वनि विस्तारक यंत्रों का निर्धारित मानकों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करने तथा आपत्तिजनक गीतों पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भ्रामक और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली सामग्री की निगरानी करने को कहा गया।

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आयुक्त ने पुलिस पदाधिकारियों और दंडाधिकारियों को अपने-अपने प्रतिनियुक्ति स्थलों पर मुस्तैद रहने, आवश्यकता के अनुसार फ्लैग मार्च करने तथा आम लोगों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करते हुए दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने की अपील की।

प्राकृतिक खेती से बदली बलेमा सामड की जिंदगी, ₹12 हजार की लागत में कमाया ₹53 हजार का शुद्ध मुनाफा

प्राकृतिक खेती से बदली बलेमा सामड की जिंदगी, ₹12 हजार की लागत में कमाया ₹53 हजार का शुद्ध मुनाफा

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत बिंडासोर्जोम गांव की महिला किसान बलेमा सामड ने प्राकृतिक खेती अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में प्राकृतिक खेती का मॉडल अपनाया। सीमित कृषि भूमि और खेती की बढ़ती लागत के बीच उन्होंने स्थानीय संसाधनों के उपयोग तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से खेती की लागत को नियंत्रित करते हुए बेहतर आमदनी अर्जित की है। उनकी यह सफलता ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिला किसानों और छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

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रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती को अपनाया

प्राकृतिक खेती अपनाने से पहले बलेमा सामड को खेती के लिए बाजार से रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक खरीदने पड़ते थे। इससे प्रत्येक फसल चक्र में खेती की लागत बढ़ जाती थी और सीमित भूमि से होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्सा कृषि कार्यों पर खर्च हो जाता था। ऐसे में बचत करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और खेत में ही प्राकृतिक जैव-आदान तैयार करने की तकनीकों का प्रशिक्षण मिला। इसके बाद उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में प्राकृतिक खेती का मॉडल लागू किया और बाजार से खरीदे जाने वाले रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक सामग्रियों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी।

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स्थानीय संसाधनों से तैयार किए प्राकृतिक जैव-आदान

प्राकृतिक खेती के तहत बलेमा सामड ने बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, अग्निअस्त्र, सुपर कम्पोस्ट और अंडा टॉनिक जैसी सामग्रियों का उपयोग किया। बीजामृत का इस्तेमाल बीज उपचार के लिए, जबकि जीवामृत और घनजीवामृत का उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया।

वहीं, सुपर कम्पोस्ट के माध्यम से मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने तथा नीमास्त्र और अग्निअस्त्र जैसे प्राकृतिक घोलों से कीट नियंत्रण के प्रयास किए गए। अंडा टॉनिक का उपयोग पौधों की वृद्धि और फलों की गुणवत्ता बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया। इन उपायों से खेती में बाजार से खरीदे जाने वाले रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का अवसर मिला।

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फसल विविधीकरण से उत्पादन और आमदनी में बढ़ोतरी

बलेमा सामड ने एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपने खेत में करेला, बरबटी, झींगा, नेनुआ और मक्का जैसी विभिन्न फसलों की खेती की। उन्होंने जून 2026 में फसलों की बुवाई की। नियमित देखभाल, प्राकृतिक जैव-आदानों के उपयोग और समय पर तुड़ाई के जरिए सब्जियों की कुल 18 बार व्यावसायिक तुड़ाई की गई।

अलग-अलग फसलों की खेती से खेत का बेहतर उपयोग हुआ और बाजार में विभिन्न प्रकार की उपज बेचकर आमदनी अर्जित करने का अवसर मिला। फसल विविधीकरण से एक ही फसल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिली। इस प्रकार प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण के समन्वय से उन्होंने सीमित कृषि भूमि से बेहतर आर्थिक परिणाम हासिल किए।

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₹12 हजार की लागत में ₹65 हजार की सकल आय

बलेमा सामड की सफलता का प्रमुख पहलू खेती की लागत पर नियंत्रण और उससे प्राप्त आय का संतुलन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक एकड़ खेत में प्राकृतिक खेती से उन्हें लगभग 1,800 किलोग्राम कुल उत्पादन प्राप्त हुआ। खेती पर कुल ₹12,000 की लागत आई।

मुख्य फसलों से ₹55,000 और सह-फसलों से ₹10,000 की आय हुई। इस तरह उनकी कुल सकल आय ₹65,000 रही। खेती की कुल लागत घटाने के बाद उन्हें ₹53,000 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

यह उपलब्धि दर्शाती है कि उचित कृषि प्रबंधन, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और फसल विविधीकरण के माध्यम से छोटे एवं सीमांत किसान भी अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

प्राकृतिक खेती का लाभ केवल आमदनी बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इस पद्धति में स्थानीय संसाधनों से तैयार जैव-आदानों का उपयोग कर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाता है। जीवामृत, घनजीवामृत और सुपर कम्पोस्ट जैसी सामग्रियों का उचित उपयोग मिट्टी की जैविक गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकता है। वहीं, प्राकृतिक कीट नियंत्रण के उपाय रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को कम करने में मदद कर सकते हैं।

बलेमा सामड की पहल आजीविका को मजबूत बनाने, मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर रखने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके खेत में उत्पादित विभिन्न प्रकार की सब्जियां परिवार के भोजन में विविधता लाने में भी सहायक हैं।

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत जिला प्रशासन : मनीष कुमार

पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की लागत कम करने, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और आमदनी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बलेमा सामड जैसी महिला किसानों की सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरणादायक है।उन्होंने कहा कि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण अपनाकर किसान अपनी आजीविका को और मजबूत बना सकते हैं।

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कम खर्च में बेहतर खेती करने की मिली नई राह : बलेमा सामड

महिला किसान बलेमा सामड ने बताया कि पहले खेती में खाद और कीटनाशक खरीदने पर काफी खर्च करना पड़ता था। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्होंने अपने खेत में प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से प्राकृतिक खाद तैयार की और कीट नियंत्रण के उपायों का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग सब्जियों की खेती और कई बार तुड़ाई से अच्छी आमदनी अर्जित करने का अवसर मिला है। प्राकृतिक खेती ने उन्हें कम खर्च में बेहतर ढंग से खेती करने की नई राह दिखाई है। उन्होंने अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती की तकनीकों को सीखने और अपनाने की अपील की।

अन्य किसानों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

बलेमा सामड की सफलता यह संदेश देती है कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए केवल अधिक भूमि या महंगे कृषि संसाधनों की आवश्यकता नहीं है। उचित प्रशिक्षण, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, फसल विविधीकरण और नियमित देखभाल के जरिए छोटे एवं सीमांत किसान भी अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्राप्त प्रशिक्षण को अपने खेत में लागू कर बलेमा सामड ने खेती की लागत नियंत्रित करने और आमदनी बढ़ाने का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।