राजनीति

साप्ताहिक जनता दरबार में उपायुक्त ने सुनीं जनसमस्याएं, कई मामलों का मौके पर हुआ निष्पादन

साप्ताहिक जनता दरबार में उपायुक्त ने सुनीं जनसमस्याएं, कई मामलों का मौके पर हुआ निष्पादन

सरायकेला-खरसावां | समाहरणालय स्थित उपायुक्त कार्यालय कक्ष में मंगलवार को उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में साप्ताहिक जनता दरबार का आयोजन किया गया। जनता दरबार में जिले के विभिन्न प्रखंडों, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने अपनी समस्याएं एवं शिकायतें उपायुक्त के समक्ष रखीं।


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जनता दरबार के दौरान उपायुक्त ने सभी आवेदकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। कई मामलों का मौके पर ही निष्पादन किया गया, जबकि शेष मामलों के त्वरित समाधान के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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जनता दरबार में भ्रष्टाचार, सड़क मरम्मत, गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली, आंगनबाड़ी सेविका चयन में कथित अनियमितता, भूमि विवाद, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड, प्रदूषण तथा जनजातीय अधिकारों से संबंधित विभिन्न आवेदन प्राप्त हुए।
प्रमुख शिकायतों में कुकड़ू प्रखंड में 15वें वित्त आयोग के कार्य की एमबी (मेजरमेंट बुक) निर्गत करने के लिए पंचायत सचिव द्वारा कथित रूप से रिश्वत मांगने का मामला शामिल रहा। इसके अलावा चांडिल क्षेत्र के कंदरबेडा दोमुहानी चौक चौड़ीकरण से जुड़ी समस्याएं, राजनगर प्रखंड के छोटा कुनाबेड़ा टोला शोकाडकोचा की जर्जर सड़क की मरम्मत तथा तिरुलडीह स्थित गैस एजेंसी द्वारा कथित रूप से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें भी प्रमुख रूप से उठाई गईं।

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उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राप्त आवेदनों की निष्पक्ष जांच कर निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए जिला प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य कर रहा है।
उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन आमजनों की समस्याओं के त्वरित समाधान तथा अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी विभागीय पदाधिकारियों को जनशिकायतों के प्रति संवेदनशील रहते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

सरायकेला: विकास योजनाओं की प्रगति पर जिला परिषद सदस्य पिंकी मंडल ने डीडीसी से की चर्चा

सरायकेला: विकास योजनाओं की प्रगति पर जिला परिषद सदस्य पिंकी मंडल ने डीडीसी से की चर्चा

सरायकेला | जिला परिषद सदस्य पिंकी मंडल ने जिला उप विकास आयुक्त (डीडीसी) रीना हसदा से शिष्टाचार भेंट कर क्षेत्र में संचालित विकास योजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

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भेंट के दौरान पिंकी मंडल ने डीडीसी से आग्रह किया कि धरातल पर संचालित विकास कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण कराया जाए, ताकि आम जनता को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। उन्होंने कहा कि कई स्थानों से विकास कार्यों में अनियमितता एवं गुणवत्ता संबंधी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

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जिला परिषद सदस्य ने संबंधित संवेदकों को सख्त निर्देश जारी करने की मांग करते हुए कहा कि सभी कार्य पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप किए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि किसी संवेदक द्वारा कार्य में लापरवाही या अनियमितता बरती जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस रद्द करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

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पिंकी मंडल ने विकास योजनाओं की नियमित निगरानी और गुणवत्ता जांच पर जोर देते हुए कहा कि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्यों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस पर उप विकास आयुक्त रीना हसदा ने उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

अपना हिस्सा बचाना है तो संघर्ष और एकजुटता ही एकमात्र रास्ता:- रामहरि गोप

अपना हिस्सा बचाना है तो संघर्ष और एकजुटता ही एकमात्र रास्ता:- रामहरि गोप

चाईबासा | गोप गौड़ आरक्षण आंदोलन समिति के केंद्रीय अध्यक्ष रामहरि गोप ने कहा कि झारखंड के पिछड़ा वर्ग समाज से परिसीमन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक हिस्सेदारी के प्रश्न पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आज समय का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि समाज की जनसंख्या कितनी है, बल्कि यह है कि उसकी राजनीतिक भागीदारी और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उसकी हिस्सेदारी कितनी है।

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 उन्होंने कहा कि झारखंड का पिछड़ा वर्ग वर्षों से अपनी संख्या के अनुपात में अधिकार, सम्मान और प्रतिनिधित्व से वंचित रहा है। चुनाव के समय समाज की संख्या को वोट बैंक के रूप में याद किया जाता है, लेकिन सत्ता और नीतिगत निर्णयों में उसकी भागीदारी सीमित कर दी जाती है। यह स्थिति लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की मूल भावना के विपरीत है।
    रामहरि गोप ने कहा कि आने वाला परिसीमन केवल नक्शे पर लकीरें खींचने का कार्य नहीं है, बल्कि यह आने वाले कई दशकों तक राजनीतिक शक्ति संतुलन तय करेगा। यदि पिछड़ा वर्ग समाज आज भी चुप बैठा रहा, तो कल उसके हिस्से की आवाज, उसका प्रतिनिधित्व और उसके अधिकार और अधिक कमजोर हो सकते हैं।
    उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जो समाज अपने अधिकारों के लिए संगठित नहीं होता, उसके अधिकार धीरे-धीरे उससे छीन लिए जाते हैं। अधिकार किसी की कृपा से नहीं मिलते, बल्कि जागरूकता, संघर्ष और एकजुटता से प्राप्त होते हैं।

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  रामहरि गोप ने जोर देकर कहा कि अपना हिस्सा पाने और बचाने के लिए आंदोलन ही सबसे प्रभावी विकल्प है तथा एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत है। सत्ता हमेशा संगठित लोगों की आवाज सुनती है, बिखरे हुए समाज की नहीं। जब तक पिछड़ा वर्ग समाज अपनी सामूहिक शक्ति को नहीं पहचानेगा, तब तक उसकी वास्तविक हिस्सेदारी का सपना अधूरा रहेगा।
    उन्होंने आगे कहा कि आज आवश्यकता है कि पिछड़ा वर्ग समाज जातीय उपविभाजनों, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और राजनीतिक भ्रमों से ऊपर उठकर एक साझा मंच पर आए। समाज को यह समझना होगा कि यदि आज अधिकारों और प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर आवाज नहीं उठाई गई, तो आने वाली पीढ़ियां पूछेंगी कि जब उनके भविष्य का निर्णय हो रहा था, तब समाज मौन क्यों था।

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   उन्होंने झारखंड के युवाओं, छात्रों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सभी पिछड़ा वर्ग संगठनों से अपील की कि वे गांव-गांव, पंचायत-पंचायत और शहर-शहर जनजागरण अभियान चलाएं तथा समाज को उसके संवैधानिक अधिकारों, राजनीतिक हिस्सेदारी और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जागरूक करें।
    रामहरि गोप ने कहा कि संख्या में बड़ा होने के बावजूद यदि कोई समाज निर्णय लेने की प्रक्रिया में कमजोर है, तो उसे अपनी ताकत को संगठित करने की आवश्यकता है। समय आ गया है कि पिछड़ा वर्ग समाज जागे, संगठित हो और अपने अधिकारों की लड़ाई को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से मजबूत करे। क्योंकि जो समाज अपने हिस्से के लिए संघर्ष नहीं करता, उसके हिस्से का निर्णय दूसरे लोग कर देते हैं।

खनिज संपदा से मालामाल क्षेत्र, फिर भी स्थानीय युवा रोजगार से बेहाल-गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू और सारंडा के आदिवासी-ग्रामीणों के साथ हो रहा अन्याय :- रामहरि गोप

खनिज संपदा से मालामाल क्षेत्र, फिर भी स्थानीय युवा रोजगार से बेहाल-गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू और सारंडा के आदिवासी-ग्रामीणों के साथ हो रहा अन्याय :- रामहरि गोप

चाईबासा | एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष रामहरि गोप ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू एवं सारंडा क्षेत्र के स्थानीय लोगों की रोजगार एवं आजीविका संबंधी समस्याओं की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा ठोस कार्रवाई की मांग की है।
रामहरि गोप ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिला देश के सबसे समृद्ध खनिज क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये मूल्य के लौह अयस्क एवं अन्य खनिज संसाधनों का दोहन किया जाता है। खनन कंपनियां और सरकार इस क्षेत्र से भारी राजस्व अर्जित करती हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इसी क्षेत्र के मूल निवासी, आदिवासी एवं ग्रामीण परिवार आज भी रोजगार और सम्मानजनक आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
   उन्होंने बताया कि दिनांक 31 मई 2026 को चाईबासा रेलवे स्टेशन परिसर में गुआ क्षेत्र से आए कई ग्रामीणों से बातचीत के दौरान अत्यंत चिंताजनक तथ्य सामने आए। ग्रामीणों ने बताया कि उनके क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण वे लगभग 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर लकड़ी, दातून, पत्ता एवं अन्य वन उत्पाद बेचने के लिए चाईबासा आते हैं।

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 ग्रामीणों के अनुसार वे टाटा-गुआ पैसेंजर ट्रेन से दोपहर में गुआ से प्रस्थान कर शाम को चाईबासा पहुंचते हैं। आर्थिक तंगी के कारण वे किसी होटल या किराए के स्थान पर ठहरने में सक्षम नहीं होते और पूरी रात रेलवे स्टेशन परिसर में ही गुजारते हैं। अगले दिन सुबह लगभग चार बजे उठकर अपने सामान के साथ बाजारों में निकल जाते हैं और दिनभर मेहनत कर सामान बेचने के बाद पुनः रेलवे स्टेशन पहुंचकर ट्रेन से अपने गांव लौटते हैं।
   रामहरि गोप ने कहा कि यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने वाला है। जिस धरती की गोद से देश की उद्योग व्यवस्था चलाने वाले खनिज निकाले जा रहे हैं, उसी धरती के लोग रोजगार और सम्मानजनक जीवन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। यह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, विकास और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।

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 उन्होंने कहा कि यदि खनन परियोजनाओं, औद्योगिक गतिविधियों और विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा है, तो यह पूरे विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। खनिज संपदा से प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
   एंटी करप्शन ऑफ इंडिया ने प्रशासन से मांग की है कि गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू एवं सारंडा क्षेत्र में स्थानीय लोगों की रोजगार एवं आजीविका की वर्तमान स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए। खनन प्रभावित युवाओं के लिए विशेष रोजगार अभियान चलाया जाए तथा वन आधारित आजीविका, लघु उद्योग, स्वरोजगार एवं कौशल विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। साथ ही खनन कंपनियों द्वारा स्थानीय रोजगार, पुनर्वास एवं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की जाए।

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उन्होंने मांग की कि खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व और विकास योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों तक पहुंचाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए तथा प्रभावित क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाए जाएं।
   रामहरि गोप ने कहा कि यदि खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र के लोगों को ही रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन का अधिकार नहीं मिल रहा है, तो यह विकास नहीं बल्कि स्थानीय समुदायों के साथ अन्याय है। प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीण परिवारों को अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक रोजगार और बेहतर भविष्य मिल सके।

प्रोजेक्ट समावेश के तहत बीएलओ का प्रशिक्षण-सह-उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित, उत्कृष्ट कार्य करने वाले 83 बीएलओ-सुपरवाइजर सम्मानित

प्रोजेक्ट समावेश के तहत बीएलओ का प्रशिक्षण-सह-उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित, उत्कृष्ट कार्य करने वाले 83 बीएलओ-सुपरवाइजर सम्मानित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा “प्रोजेक्ट समावेश” के तहत टाटा कॉलेज, चाईबासा स्थित बहुउद्देशीय सभागार में बूथ लेवल ऑफिसरों (बीएलओ) के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला उपायुक्त मनीष कुमार ने की। इस अवसर पर अपर उपायुक्त, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, उप निर्वाचन पदाधिकारी तथा पोड़ाहाट-चक्रधरपुर एवं सदर चाईबासा के अनुमंडल पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

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कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के सफल, पारदर्शी और त्रुटिरहित संचालन के लिए बीएलओ को निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों, तकनीकी प्रक्रियाओं और क्षेत्रीय दायित्वों की विस्तृत जानकारी प्रदान करना था, ताकि मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, अद्यतन और समावेशी बनाया जा सके।
प्रशिक्षण के दौरान बीएलओ को नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत अथवा स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने, मतदाता सूची में त्रुटियों के संशोधन, पते में बदलाव और फोटो अद्यतन सहित अन्य आवश्यक सुधार प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। साथ ही नए मतदाता पंजीकरण, नाम विलोपन, संशोधन एवं स्थानांतरण से संबंधित निर्धारित प्रपत्रों के सही उपयोग और समयबद्ध निष्पादन पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

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इसके अतिरिक्त ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों के सत्यापन, डिजिटलीकरण प्रक्रिया तथा संबंधित पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन के उपयोग को लेकर बीएलओ को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में घर-घर जाकर मतदाता सूची का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करने, 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके सभी पात्र नागरिकों का नाम सूची में शामिल कराने तथा युवाओं, महिलाओं और दिव्यांगजनों को मतदान के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही मृत, स्थानांतरित और दोहराव वाले मतदाताओं की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
इस अवसर पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता सटीक और अद्यतन मतदाता सूची पर आधारित होती है तथा इस पूरी प्रक्रिया में बीएलओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशिक्षित बीएलओ यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।

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कार्यक्रम के दौरान जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता मैपिंग कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 83 बीएलओ और सुपरवाइजरों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इन कर्मियों ने मतदाता मैपिंग अभियान के तहत 90 से 95 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग सुनिश्चित कर उल्लेखनीय कार्य किया है।
कार्यक्रम के अंत में उपायुक्त ने सभी बीएलओ को मतदाता सूची विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के प्रति जागरूकता एवं जिम्मेदारी की शपथ दिलाई तथा बेहतर कार्य के लिए प्रेरित किया। इस दौरान हस्ताक्षर अभियान और सेल्फी कॉर्नर जैसी जनजागरूकता गतिविधियों का भी आयोजन किया गया।

रांची: छऊ कला और नाट्य परंपरा पर विशेष व्याख्यान-प्रदर्शन आयोजित, गुरु तपन कुमार पटनायक ने साझा की कला की विरासत

रांची: छऊ कला और नाट्य परंपरा पर विशेष व्याख्यान-प्रदर्शन आयोजित, गुरु तपन कुमार पटनायक ने साझा की कला की विरासत

रांची | संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा आयोजित “प्रातः स्मरण” कार्यक्रम के तहत रविवार को रांची स्थित ऑडिटोरियम सभागार में छऊ कला एवं नाट्य परंपरा पर विशेष व्याख्यान-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग, झारखंड के सहयोग से आयोजित किया गया।

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कार्यक्रम में छऊ कला के वरिष्ठ गुरु एवं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार गुरु तपन कुमार पटनायक ने छऊ नृत्य की परंपरा, इतिहास, तकनीक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से छऊ नृत्य की विशिष्ट शारीरिक मुद्राओं, मुखौटों के महत्व और इसकी कलात्मक बारीकियों को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया।

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अपने संबोधन में गुरु पटनायक ने कहा कि छऊ केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि लोक जीवन, प्रकृति, आध्यात्मिकता और सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम है। उन्होंने महिषासुर वध, रामायण, महाभारत, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण तथा जन-जागरूकता जैसे विषयों पर आधारित छऊ प्रस्तुतियों का उल्लेख करते हुए इसकी सामाजिक प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

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कार्यक्रम में नाटक और लोक कला क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन पर बल देते हुए नई पीढ़ी को लोक कलाओं से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
गुरु तपन कुमार पटनायक सरायकेला छऊ शैली के प्रमुख हस्ताक्षरों में गिने जाते हैं। छऊ कला के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वे विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं और योजनाओं के माध्यम से लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम में कलाकारों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और कला प्रेमियों की बड़ी संख्या मौजूद रही। आयोजन का उद्देश्य भारतीय लोक एवं पारंपरिक कलाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहित करना था।

सरायकेला में तंबाकू विरोधी जनजागरूकता अभियान की शुरुआत, उपायुक्त ने जागरूकता रथ को किया रवाना

सरायकेला में तंबाकू विरोधी जनजागरूकता अभियान की शुरुआत, उपायुक्त ने जागरूकता रथ को किया रवाना

सरायकेला | जिले में तंबाकू निषेध एवं नियंत्रण संबंधी जनजागरूकता अभियान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से सोमवार को उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने समाहरणालय परिसर से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित यह जागरूकता रथ आगामी एक माह तक जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों एवं शहरी क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों तथा इससे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करेगा।

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इस अवसर पर उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। इसके कारण कैंसर, हृदय रोग, श्वसन संबंधी बीमारियों सहित कई गंभीर और जानलेवा रोग उत्पन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए तंबाकू मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
उपायुक्त ने बताया कि अभियान के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंवाद, जागरूकता कार्यक्रम, प्रचार-प्रसार गतिविधियां तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को तंबाकू सेवन के कारण व्यक्ति, परिवार और समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी जाएगी।

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उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि सामाजिक प्रभाव, साथियों के दबाव और जिज्ञासा के कारण कई युवा तंबाकू सेवन की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने युवाओं से नशामुक्त और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा सकारात्मक गतिविधियों से जुड़कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनने का आह्वान किया।

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उपायुक्त ने सभी नागरिकों से तंबाकू एवं तंबाकू उत्पादों के सेवन से दूर रहने, तंबाकू नियंत्रण संबंधी प्रावधानों का पालन करने तथा अपने परिवार और समाज को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि तंबाकू मुक्त परिवार, तंबाकू मुक्त समाज और तंबाकू मुक्त राज्य के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के पदाधिकारी एवं कर्मी, एनडीसी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

खरसावां विधानसभा क्षेत्र में विशेष शिविर आयोजित, मतदाता सूची में शत-प्रतिशत मैपिंग पर जोर

खरसावां विधानसभा क्षेत्र में विशेष शिविर आयोजित, मतदाता सूची में शत-प्रतिशत मैपिंग पर जोर

खरसावां | भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची में मतदाताओं के नामों की शत-प्रतिशत मैपिंग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रविवार, 1 जून को 57-खरसावां (अजजा) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र अंतर्गत 50 प्रतिशत से कम मैपिंग वाले मतदान केंद्र संख्या-219, दक्षिण रेलवे इंटर कॉलेज, सीनी में विशेष शिविर का आयोजन किया गया।

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शिविर के दौरान अब तक मैपिंग से वंचित मतदाताओं के नामों का सत्यापन एवं मैपिंग का कार्य किया गया। इस कार्यक्रम में संबंधित बीएलओ, बीएलओ सुपरवाइजर, कंप्यूटर ऑपरेटर, राजस्व कर्मचारी सहित निर्वाचन कार्य से जुड़े अन्य कर्मी उपस्थित रहे।

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इस अवसर पर निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी, 57-खरसावां (अजजा) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र-सह-अपर उपायुक्त जयबर्धन कुमार ने शिविर का निरीक्षण किया तथा संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को निर्धारित समयावधि के भीतर शत-प्रतिशत मैपिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता एवं अद्यतनता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी पात्र मतदाताओं से अपील की कि जिनका नाम अभी तक मतदाता सूची से मैप नहीं हुआ है, वे शीघ्र अपना नाम मैप कराएं, ताकि भविष्य में निर्वाचन संबंधी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी ने बीएलओ एवं संबंधित कर्मियों को भी घर-घर संपर्क अभियान चलाकर छूटे हुए मतदाताओं की मैपिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

खुंटपानी के पुरुनियाँ गांव में नशा मुक्ति को लेकर अहम बैठक, महिलाओं और बच्चों ने लिया नशामुक्त गांव का संकल्प

खुंटपानी के पुरुनियाँ गांव में नशा मुक्ति को लेकर अहम बैठक, महिलाओं और बच्चों ने लिया नशामुक्त गांव का संकल्प

खुंटपानी/पश्चिमी सिंहभूम | पश्चिमी सिंहभूम जिले के खुंटपानी प्रखंड अंतर्गत पुरुनियाँ गांव में महिला समितियों के निर्देशानुसार नशा मुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गांव में बढ़ते नशे के प्रचलन और उससे समाज व परिवार पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर गंभीर चर्चा की गई।

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बैठक में ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण कई परिवार टूट रहे हैं और युवा तथा बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। बताया गया कि छोटे-छोटे बच्चे बीड़ी, सिगरेट, गांजा और खैनी जैसी नशीली वस्तुओं के सेवन के आदी बनते जा रहे हैं, जिससे समाज और परिवार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

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इस दौरान गांव की महिला समितियों और बच्चों ने पुरुनियाँ गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में खुंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा और थाना प्रभारी मेघनाथ मंडल भी पहुंचे। दोनों ने ग्रामीणों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए इसे त्यागने की अपील की।

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प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा एक सामाजिक बुराई है, जो घर-परिवार और बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर देती है। उन्होंने कहा कि नशे के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती हैं और आर्थिक समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। उन्होंने ग्रामीणों से नशा छोड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने तथा बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देकर उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहयोग करने की अपील की।
बैठक में ग्राम कल्याण प्रगति समिति के अध्यक्ष बागुन होनहागा, सुमन होनहागा, बलराम केसरी, जीवन होनहागा, लक्ष्मी होनहागा, बसंती होनहागा सहित गांव के कई सम्मानित सदस्य उपस्थित रहे।

चाईबासा एसीसी प्लांट पर त्रिपक्षीय वार्ता बेनतीजा, काम बंद रहने तक सामान की आवाजाही पर रोक: उपायुक्त

चाईबासा एसीसी प्लांट पर त्रिपक्षीय वार्ता बेनतीजा, काम बंद रहने तक सामान की आवाजाही पर रोक: उपायुक्त

चाईबासा | चाईबासा स्थित एसीसी सीमेंट प्लांट को बंद होने से बचाने के लिए रविवार को जिला समाहरणालय में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता झारखंड के भू-राजस्व एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने की। हालांकि कई घंटों तक चली इस वार्ता का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका और बातचीत बेनतीजा रही।
बैठक में प्लांट प्रबंधन, मजदूर प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। वार्ता विफल रहने के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि जब तक प्लांट में कामकाज बंद रहेगा, तब तक न तो प्लांट से कोई सामान बाहर भेजा जाएगा और न ही किसी प्रकार की सामग्री अंदर लाई जाएगी।

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उपायुक्त ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में धारा 144 लागू करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही एसीसी प्रबंधन को अपने उच्च प्रबंधन, विशेष रूप से अहमदाबाद बोर्ड से वार्ता कर जल्द समाधान निकालने को कहा गया है। प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया कि मजदूरों के बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने तक कर्मचारियों को अन्य कार्यों में नहीं लगाया जाए।

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ग्रामीणों और मजदूरों में बढ़ी चिंता
ग्रामीणों और मजदूर प्रतिनिधियों ने बैठक में आशंका जताई कि 30 अप्रैल से ‘शटडाउन’ के नाम पर स्थानीय मजदूरों की छंटनी की जा रही है और प्लांट का उत्पादन एवं डिस्पैच पूरी तरह बंद है। उनका कहना है कि बिना किसी स्पष्ट नीति के काम बंद होने से उनकी आजीविका पर संकट गहरा गया है।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि प्लांट से कोयला, स्टील और क्लिंकर जैसी सामग्री को गुप्त तरीके से अन्य स्थानों पर भेजे जाने की कोशिश की जा रही है, जिससे यह आशंका बढ़ रही है कि फैक्ट्री को स्थायी रूप से बंद करने की तैयारी चल रही है।
पहले भी हुआ था विरोध प्रदर्शन

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इस मुद्दे को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों ने 29 मई को एसीसी प्रबंधन के खिलाफ पदयात्रा निकालने और उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की थी। हालांकि मंत्री दीपक बिरुआ के हस्तक्षेप और त्रिपक्षीय वार्ता के आश्वासन के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि चाईबासा का यह ऐतिहासिक प्लांट केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। यदि फैक्ट्री पूरी तरह बंद हो जाती है, तो हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
बैठक में पुलिस अधीक्षक, जनप्रतिनिधि, मजदूर संगठनों के सदस्य, संघर्ष समिति के पदाधिकारी और एसीसी प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।