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मंडल कारा चाईबासा में बंदियों के लिए व्यवसायिक बागवानी प्रशिक्षण शुरू, हुनर के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने की पहल

मंडल कारा चाईबासा में बंदियों के लिए व्यवसायिक बागवानी प्रशिक्षण शुरू, हुनर के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने की पहल

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन-हुनर से पहचान’ के तहत मंडल कारा, चाईबासा में बंदियों के कौशल विकास और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से व्यवसायिक बागवानी प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया गया। उपायुक्त मनीष कुमार ने दीप प्रज्वलित कर छह दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक सुनील कुमार सहित बैंक ऑफ इंडिया-आरसेटी के प्रशिक्षक मौजूद रहे।

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40 बंदियों को फल-सब्जी उत्पादन और जैविक खाद का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण शिविर 4 से 9 सितंबर 2026 तक संचालित होगा। इसमें मंडल कारा के 40 बंदियों को फल एवं सब्जी उत्पादन तथा जैविक खाद निर्माण से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को रोजगारपरक कौशल से जोड़कर भविष्य में स्वरोजगार और सम्मानजनक आजीविका के लिए तैयार करना है।

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मंडल कारा में प्रोजेक्ट परिवर्तन का तीसरा प्रशिक्षण शिविर
जिला प्रशासन के अनुसार, ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन-हुनर से पहचान’ के तहत मंडल कारा में यह तीसरा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। इसके माध्यम से बंदियों को विभिन्न रोजगारपरक गतिविधियों और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि सजा पूरी करने के बाद वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें।
व्यवसायिक बागवानी प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फल एवं सब्जी उत्पादन के साथ जैविक खाद तैयार करने की तकनीक और इसके व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। इससे उन्हें भविष्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर तलाशने में मदद मिलेगी।

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उपायुक्त ने बंदियों को नई शुरुआत के लिए किया प्रेरित
प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन’ का उद्देश्य बंदियों को ऐसे उपयोगी और रोजगारपरक कौशल से जोड़ना है, जिससे वे कारा से बाहर निकलने के बाद सम्मानपूर्वक अपना जीवनयापन कर सकें। उन्होंने बंदियों से जीवन में हुई गलतियों से सीख लेने और भविष्य में उन्हें दोहराने से बचने की अपील की।
उपायुक्त ने प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा यहां प्राप्त ज्ञान और कौशल का बेहतर उपयोग कर अपने भविष्य को नई दिशा देने के लिए भी प्रेरित किया।
सिलाई एवं कपड़ा निर्माण केंद्र का किया अवलोकन
प्रशिक्षण सत्र में शामिल होने के बाद उपायुक्त ने मंडल कारा परिसर में संचालित सिलाई केंद्र एवं कपड़ा निर्माण केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां संचालित गतिविधियों की जानकारी ली और बंदियों को दिए जा रहे कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था का जायजा लिया।

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सीसीटीवी कंट्रोल रूम का किया निरीक्षण
मंडल कारा के भ्रमण के दौरान उपायुक्त ने सीसीटीवी कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कारा परिसर की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी लेते हुए संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
कौशल विकास के जरिए पुनर्वास पर जोर
‘प्रोजेक्ट परिवर्तन-हुनर से पहचान’ के माध्यम से जिला प्रशासन बंदियों के कौशल विकास और सकारात्मक पुनर्वास की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। व्यवसायिक बागवानी प्रशिक्षण शिविर इसी पहल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य बंदियों को उपयोगी हुनर प्रदान कर उन्हें भविष्य में रोजगार या स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है, ताकि वे सजा पूरी करने के बाद समाज में सम्मानजनक और सकारात्मक जीवन की नई शुरुआत कर सकें।

वैज्ञानिक प्रशिक्षण और सहकारिता से लाह उत्पादन को मिली नई दिशा, किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि

वैज्ञानिक प्रशिक्षण और सहकारिता से लाह उत्पादन को मिली नई दिशा, किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के वन क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को आजीविका और आय का मजबूत आधार बनाने की दिशा में सहकारिता विभाग की पहल सकारात्मक परिणाम दे रही है। जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति लिमिटेड, चाईबासा से जुड़े किसानों ने वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाकर लाह उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस पहल ने पारंपरिक वन उत्पाद आधारित आजीविका को संगठित, वैज्ञानिक और बाजारोन्मुख स्वरूप प्रदान करते हुए किसानों को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया है।
वैज्ञानिक प्रशिक्षण से बदली उत्पादन की तस्वीर
जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति लिमिटेड, चाईबासा से जुड़े 50 किसानों को लाह उत्पादन का विशेष वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया। सहकारिता विभाग के सहयोग से रांची स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कीट विज्ञान अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा चक्रधरपुर के सभागार कक्ष में यह प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

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प्रशिक्षण के दौरान किसानों को लाह उत्पादक एवं पोषक वृक्षों के वैज्ञानिक चयन, लाह कीट पालन, रख-रखाव, उत्पादन प्रक्रिया तथा लाह की कटाई से संबंधित महत्वपूर्ण व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के उपरांत प्रत्येक किसान को 5 किलोग्राम लाह बीज के साथ आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
उत्पादन में लगभग पांच गुना वृद्धि, बिक्री मूल्य भी बढ़ा
वैज्ञानिक प्रशिक्षण का सीधा और सकारात्मक प्रभाव किसानों के उत्पादन पर देखने को मिला। प्रशिक्षण प्राप्त सभी 50 किसानों ने वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया, जिसके परिणामस्वरूप लाह उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उत्पादन लगभग पांच गुना तक बढ़ गया।
इस सफलता से किसानों में लाह उत्पादन के प्रति रुचि और विश्वास बढ़ा है तथा वन आधारित आजीविका को एक मजबूत आधार मिला है। समिति के अध्यक्ष श्री जगदीश सुंडी एवं अन्य सदस्यों के अनुसार, प्रशिक्षण से पहले किसान लगभग 450 से 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से लाह बेचते थे, जबकि वर्तमान में लाह लगभग 900 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है। इससे किसानों की आय में स्पष्ट वृद्धि हुई है।

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समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, ग्राम करकट्टा, पंचायत नरसंडा, प्रखंड चाईबासा निवासी समिति अध्यक्ष श्री जगदीश सुंडी ने वर्ष 2026 में अब तक लगभग 10 लाख रुपये मूल्य की लाह की बिक्री की है।
लाभुक की सफलता बनी अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
समिति के सदस्य श्री प्रेमगान सुंडी, ग्राम लातर गजरा, पोस्ट बड़ालागिया ने बताया कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के बाद लाह उत्पादन उनके लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। उन्होंने पिछले छह महीनों में लगभग 1.20 लाख रुपये मूल्य की लाह की बिक्री की है।
उन्होंने बताया कि पहले लाह उत्पादन पारंपरिक तरीके से किया जाता था। प्रशिक्षण के बाद उन्हें लाह कीट पालन, पोषक वृक्षों की देखभाल और वैज्ञानिक तरीके से लाह की कटाई की जानकारी मिली। इसका परिणाम उत्पादन में वृद्धि और बेहतर आर्थिक प्रतिफल के रूप में सामने आया है।

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श्री प्रेमगान सुंडी ने कहा कि अब वे लाह उत्पादन को अपने परिवार की आय मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य में आजीविका का एक स्थायी आधार बनाने के रूप में देख रहे हैं।
सहकारिता से संगठित उत्पादन और बेहतर बाजार की राह
जिला सहकारिता पदाधिकारी श्रीमती अमिता कुमारी ने कहा कि जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति लिमिटेड के माध्यम से किसानों को एकजुट कर उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और उत्पादन से जुड़ी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना सहकारिता विभाग की महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि लाह जैसे पारंपरिक वन उत्पाद को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है। किसानों द्वारा प्राप्त परिणाम यह दर्शाते हैं कि प्रशिक्षण, सामूहिक प्रयास और बेहतर विपणन व्यवस्था के माध्यम से वन उत्पादक परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

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उन्होंने बताया कि विभाग का उद्देश्य किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें संगठित उत्पादन, मूल्यवर्धन और बेहतर बाजार से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
लाह उत्पादन में वृद्धि से किसानों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी तकनीकी क्षमता में वृद्धि हुई है तथा उन्हें सामूहिक रूप से उत्पादन एवं विपणन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
इस प्रकार जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और वन आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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उपायुक्त का संदेश—“सहकारिता से समृद्धि”
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि, “सहकारिता केवल किसानों को एक मंच पर संगठित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि स्थानीय संसाधनों को आर्थिक समृद्धि में बदलने का एक प्रभावी साधन है। पश्चिमी सिंहभूम जैसे वन बहुल जिले में लाह सहित अन्य वन उत्पादों से जुड़े परिवारों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बेहतर बाजार उपलब्ध कराकर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है।”
उन्होंने कहा कि जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति की सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक और सहकारिता की सामूहिक शक्ति से जोड़ा जाता है, तो आजीविका के नए अवसर सृजित होते हैं।
उपायुक्त ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि जिले के वन उत्पादक किसान संगठित होकर अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करें और ‘सहकारिता से समृद्धि’ के संकल्प के साथ आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनें।”
जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि उचित प्रशिक्षण, वैज्ञानिक तकनीक और सहकारिता के सामूहिक प्रयास से पारंपरिक वन उत्पादों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बनाया जा सकता है। 50 किसानों को दिए गए प्रशिक्षण के बाद लाह उत्पादन में लगभग पांच गुना वृद्धि और बिक्री मूल्य में उल्लेखनीय सुधार ने पश्चिमी सिंहभूम में वन आधारित आजीविका को एक नई दिशा दी है।

अवैध अफीम खेती और खनन पर कसेगा शिकंजा, संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन से होगी निगरानी

अवैध अफीम खेती और खनन पर कसेगा शिकंजा, संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन से होगी निगरानी

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन (एनसीओआरडी) समिति एवं जिला माइनिंग टास्क फोर्स की संयुक्त समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी अनुमंडल पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए, जबकि सामान्य शाखा उपसमाहर्ता, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, थाना प्रभारी सहित विभिन्न संबंधित विभागों के पदाधिकारी भौतिक रूप से उपस्थित रहे।

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बैठक में उपायुक्त ने मादक पदार्थों की अवैध खेती एवं कारोबार के साथ-साथ अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध प्रभावी, सतत एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन एवं पुलिस के साथ-साथ संबंधित विभागों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता भी आवश्यक है।
चिन्हित क्षेत्रों में अभी से शुरू होगा सर्च अभियान, ड्रोन से होगी निगरानी
एनसीओआरडी के तहत जिले में पूर्व में अफीम की खेती के लिए चिन्हित क्षेत्रों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संभावित क्षेत्रों में अभी से सर्च अभियान प्रारंभ करने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित अनुमंडल एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी करने तथा किसी भी प्रकार की अवैध खेती की सूचना मिलने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

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उपायुक्त ने चिन्हित क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखने का भी निर्देश दिया, ताकि दुर्गम एवं विस्तृत क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती को शुरुआती स्तर पर ही रोकने के लिए प्रशासनिक एवं पुलिस तंत्र को लगातार सक्रिय रहना होगा।
पंचायत एवं अनुमंडल स्तर पर जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से चलेगा जागरूकता अभियान
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि अफीम की खेती के लिए चिन्हित क्षेत्रों में अनुमंडल एवं पंचायत स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से बैठकें आयोजित की जाएं। इन बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों को मादक पदार्थों की खेती एवं सेवन के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें अवैध गतिविधियों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

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बैठक में कृषि, उद्यान, वन एवं पशुपालन विभाग सहित विभिन्न संबंधित विभागों के स्थानीय कर्मियों की सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि चिन्हित क्षेत्रों के लोगों को कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़कर वैकल्पिक एवं टिकाऊ आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे अवैध खेती के स्थान पर लाभकारी एवं वैध रोजगार से जुड़ सकें।
दवा दुकानों की नियमित जांच और कोटपा अधिनियम के तहत लगातार छापेमारी के निर्देश
उपायुक्त ने ड्रग इंस्पेक्टर को जिले में संचालित सभी दवा दुकानों की नियमित जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने दवाओं की बिक्री एवं भंडारण से संबंधित नियमों के अनुपालन की जांच करते हुए अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

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इसके अलावा जिले के सभी क्षेत्रों में कोटपा अधिनियम के तहत नियमित जांच एवं छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। सार्वजनिक स्थलों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में तंबाकू उत्पादों से संबंधित नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
खनन कार्यालय ने अब तक ₹18.44 करोड़ से अधिक राजस्व किया संग्रहित, अगस्त में 10 वाहन जब्त
जिला माइनिंग टास्क फोर्स की समीक्षा के दौरान जिला खनन कार्यालय द्वारा किए गए राजस्व संग्रहण एवं अवैध खनन के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि जिला खनन कार्यालय द्वारा अब तक ₹18,44,82,520 का राजस्व संग्रहण किया गया है।
वहीं अगस्त माह में अब तक अवैध खनिज सामग्री का परिवहन करते हुए 10 वाहनों को जब्त किया गया है तथा कार्रवाई के क्रम में ₹5,70,000 का जुर्माना वसूला गया है। उपायुक्त ने अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध जांच और छापेमारी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया।
दो बालू घाटों की नीलामी पूर्ण, शेष की प्रक्रिया जारी
बैठक में जिले में बालू घाटों की नीलामी की स्थिति की भी समीक्षा की गई। संबंधित पदाधिकारी ने बताया कि जिले में दो बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, जबकि शेष बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया जारी है। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को नियमानुसार शेष प्रक्रिया को आगे बढ़ाने तथा बालू के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी निगरानी रखने का निर्देश दिया।
चालू क्रशरों की नियमित जांच के साथ बंद खदानों पर भी कड़ी निगरानी
उपायुक्त ने जिले में संचालित सभी पत्थर क्रशरों की नियमित जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि क्रशर संचालन के दौरान निर्धारित नियमों एवं शर्तों का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा किसी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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उन्होंने विशेष रूप से ऐसे खदानों एवं क्रशरों की भी नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया, जिनकी लीज समाप्त हो चुकी है अथवा जो वर्तमान में बंद हैं। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में बंद अथवा लीज समाप्त खदानों से अवैध खनन एवं खनिज सामग्री का परिवहन नहीं होना चाहिए। ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मंझगांव, जगन्नाथपुर और मनोहरपुर सहित संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी
उपायुक्त ने जिले के सभी क्षेत्रों में अवैध खनन, अवैध परिवहन एवं खनिजों के अवैध भंडारण के विरुद्ध प्रभावी छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया। विशेष रूप से मंझगांव, जगन्नाथपुर, मनोहरपुर, तांतनगर, आनंदपुर एवं गोईलकेरा सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी एवं जांच अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
उन्होंने संबंधित अनुमंडल एवं अंचल प्रशासन, पुलिस तथा खनन विभाग को आपसी समन्वय स्थापित कर क्षेत्रवार निगरानी एवं कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी : उपायुक्त
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिले में मादक पदार्थों की अवैध खेती एवं कारोबार तथा अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन, पुलिस, खनन, वन, कृषि, उद्यान, पशुपालन, स्वास्थ्य एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को नियमित क्षेत्र भ्रमण करने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने, लगातार निगरानी रखने तथा प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि अवैध खनन एवं मादक पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सरकारी योजनाओं एवं वैकल्पिक आजीविका से जोड़कर सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी प्रशासन की प्राथमिकता है।
बैठक में संबंधित विभागों द्वारा अब तक की गई कार्रवाई एवं प्रगति की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों को अपने-अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन करते हुए जिले में अवैध गतिविधियों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य करने का निर्देश दिया।

झींकपानी में जेएसएलपीएस सखी समूह की महिलाओं की राखियों को मिला प्रोत्साहन

झींकपानी में जेएसएलपीएस सखी समूह की महिलाओं की राखियों को मिला प्रोत्साहन

चाईबासा | रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिले में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के सखी मंडल एवं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार की गई राखियों की बिक्री को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में सहायक समाहर्ता-सह-प्रशिक्षु आईएएस सुश्री ईरा जोरवाल ने झींकपानी प्रखंड में जेएसएलपीएस सखी समूह द्वारा संचालित राखी बिक्री स्टॉल का निरीक्षण किया।

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निरीक्षण के दौरान सहायक समाहर्ता ने स्टॉल पर उपलब्ध विभिन्न प्रकार की राखियों का अवलोकन किया तथा सखी समूह की महिलाओं से राखियों के निर्माण, बिक्री एवं विपणन के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने राखियों की गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग और बिक्री व्यवस्था के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।

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सखी समूह की महिलाओं ने बताया कि वे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री और अपने हुनर का उपयोग कर आकर्षक एवं पारंपरिक राखियों का निर्माण कर रही हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।

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सहायक समाहर्ता सुश्री ईरा जोरवाल ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं। स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध होने से महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ उनके हुनर को भी नई पहचान मिलती है। उन्होंने महिलाओं को बेहतर गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और ग्राहकों की पसंद के अनुरूप राखियां तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि रक्षाबंधन के अवसर पर अधिक से अधिक लोग जेएसएलपीएस के स्वयं सहायता समूहों एवं सखी मंडलों की महिलाओं द्वारा मेहनत और लगन से तैयार की गई राखियां खरीदें। स्थानीय महिला समूहों द्वारा निर्मित राखियों की खरीदारी से न केवल पर्व की खुशी बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण को भी मजबूती मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न प्रखंडों में जेएसएलपीएस के सखी मंडलों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा राखी बिक्री स्टॉल लगाए गए हैं। इन स्टॉलों के माध्यम से समूह की महिलाओं को अपने हस्तनिर्मित उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। राखी बिक्री से महिलाओं को आय अर्जित करने का अवसर मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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जिला प्रशासन एवं जेएसएलपीएस ने आमजनों से अपील की है कि इस रक्षाबंधन स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को प्राथमिकता दें और उनके हुनर, स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में सहभागी बनें।

पश्चिमी सिंहभूम में जेएसएलपीएस दीदियों के राखी स्टॉलों पर बढ़ी भीड़, अब तक 51 हजार रुपये की बिक्री

पश्चिमी सिंहभूम में जेएसएलपीएस दीदियों के राखी स्टॉलों पर बढ़ी भीड़, अब तक 51 हजार रुपये की बिक्री

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार एवं आय के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट बदलाव के तहत जेएसएलपीएस दीदियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए राखी स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रक्षाबंधन पर्व को लेकर इन स्टॉलों पर ग्राहकों, विशेषकर बच्चियों और महिलाओं की भीड़ देखी जा रही है। जिलेभर में लगाए गए राखी स्टॉलों से अब तक करीब 51 हजार रुपये की राखियों की बिक्री हो चुकी है।

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जेएसएलपीएस दीदियों द्वारा तैयार की गई राखियों में स्थानीय हस्तकला, आकर्षक डिजाइन और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का विशेष ध्यान रखा गया है। राखियों के साथ पूजा सामग्री और मिठाई को शामिल करते हुए आकर्षक पैकेज भी तैयार किए गए हैं, ताकि लोगों को रक्षाबंधन से संबंधित आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके।

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किफायती दरों पर उपलब्ध हैं राखी पैकेज
राखी स्टॉलों पर अलग-अलग जरूरत और बजट के अनुसार तीन प्रकार के पैकेज उपलब्ध कराए गए हैं। पैकेज-1 की कीमत 60 रुपये है, जिसमें दो राखी, कुमकुम और अरवा चावल शामिल हैं। पैकेज-2 की कीमत 120 रुपये है, जिसमें चार राखी, कुमकुम, अरवा चावल और चार लड्डू दिए जा रहे हैं। वहीं पैकेज-3 की कीमत 150 रुपये है, जिसमें पांच राखी, कुमकुम, अरवा चावल, चार लड्डू और गिफ्ट हैंपर शामिल है। किफायती कीमतों के कारण लोग अपनी आवश्यकता और बजट के अनुसार इन पैकेजों की खरीदारी कर रहे हैं।

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स्थानीय महिलाओं के उत्पादों को मिल रहा बाजार
इन राखी स्टॉलों के माध्यम से जिले के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को सीधे बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं को अपने हुनर का प्रदर्शन करने के साथ-साथ उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। जिला प्रशासन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत करना है।

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स्थानीय राखी खरीदने की जिला प्रशासन ने की अपील
जिला प्रशासन ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि उन्होंने अब तक रक्षाबंधन के लिए राखी की खरीदारी नहीं की है, तो अपने क्षेत्र में लगाए गए जेएसएलपीएस दीदियों के राखी स्टॉल पर पहुंचकर राखी और अन्य उपलब्ध सामग्री की खरीदारी करें। स्थानीय महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की खरीदारी कर लोग न केवल रक्षाबंधन की खुशियों को साझा कर सकते हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।

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जिला प्रशासन ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीदारी से ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों को मजबूती मिलती है। आमजनों की सहभागिता से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए नए बाजार और आजीविका के अवसर सृजित होंगे तथा जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में चल रहे प्रयासों को और गति मिलेगी।

रक्षाबंधन पर महिला स्वयं सहायता समूहों को मिला बाजार, नोआमुंडी में राखी बिक्री केंद्र का उद्घाटन

रक्षाबंधन पर महिला स्वयं सहायता समूहों को मिला बाजार, नोआमुंडी में राखी बिक्री केंद्र का उद्घाटन

नोआमुंडी | रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिले की महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके द्वारा तैयार स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन एवं झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की ओर से पहल की जा रही है। इसी क्रम में जिला उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने नोआमुंडी बाजार में जेएसएलपीएस सखी समूह की दीदियों द्वारा स्थापित राखी बिक्री केंद्र का उद्घाटन किया।

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इस अवसर पर जगन्नाथपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्री अरुण उरांव, नोआमुंडी प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री पप्पू रजक सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। उपायुक्त ने विधिवत बिक्री केंद्र का उद्घाटन करने के बाद वहां उपलब्ध राखियों का अवलोकन किया। उन्होंने स्वयं सहायता समूह की दीदियों से राखियों के निर्माण, डिजाइन, लागत, बिक्री एवं बाजार से जुड़ी जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार राखियों की सराहना करते हुए उनके हुनर और मेहनत को प्रोत्साहित किया।

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महिला सशक्तिकरण को आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ना प्राथमिकता
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि महिला सशक्तिकरण तभी सार्थक होगा, जब महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के पर्याप्त अवसर मिलें। जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने के साथ-साथ उनके कौशल विकास, स्वरोजगार, उत्पाद निर्माण और उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि जिले की ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के उपयोगी एवं आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों को स्थानीय बाजार में बेहतर मंच मिलने से महिलाओं की आय में वृद्धि होगी और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है तथा महिलाओं को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
स्थानीय एवं हस्तनिर्मित उत्पादों की खरीदारी की अपील
उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि रक्षाबंधन जैसे पर्व के अवसर पर स्थानीय एवं हस्तनिर्मित उत्पादों की खरीदारी को प्राथमिकता दें। स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा तैयार राखियों की खरीदारी से उनके हुनर को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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राखी बिक्री केंद्र से दीदियों को मिला बेहतर बाजार
नोआमुंडी बाजार में स्थापित राखी बिक्री केंद्र के माध्यम से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर मंच मिला है। रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए दीदियों द्वारा विभिन्न डिजाइन और आकर्षक स्वरूप वाली राखियां तैयार की गई हैं।
बिक्री केंद्र के माध्यम से महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रत्यक्ष विपणन का अवसर मिल रहा है। जेएसएलपीएस के माध्यम से संचालित सखी समूह ग्रामीण महिलाओं को सामूहिक रूप से आजीविका गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे बिक्री केंद्र महिलाओं को आय का साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनमें उद्यमिता, आत्मविश्वास और बाजार से जुड़ने की क्षमता भी विकसित करते हैं।

पदाधिकारियों को दीदियों ने बांधी राखी
बिक्री केंद्र के उद्घाटन के बाद स्वयं सहायता समूह की दीदियों ने उपस्थित पदाधिकारियों को राखी बांधी। इस अवसर पर उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने दीदियों के स्नेह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी को रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, स्नेह और आपसी सहयोग का प्रतीक पर्व है। इसे समाज में आपसी सौहार्द एवं भाईचारे की भावना के साथ मनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्वयं सहायता समूह की दीदियों को उनके प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की बदलती भूमिका और बढ़ती उद्यमशीलता का भी उदाहरण हैं।

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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास
जिला प्रशासन एवं जेएसएलपीएस द्वारा महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। राखी बिक्री केंद्र जैसी पहल इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसके माध्यम से महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बाजार, ग्राहकों तक सीधी पहुंच और आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्वयं सहायता समूहों की दीदियों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक प्रोत्साहन मिले और उन्हें बाजार की बेहतर संभावनाएं उपलब्ध हों। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ जिले में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों ने स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा लगाए गए राखी बिक्री केंद्र की सराहना की तथा जिलेवासियों से स्थानीय महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की खरीदारी कर उन्हें प्रोत्साहित करने की अपील की।

पश्चिमी सिंहभूम में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज, रक्षाबंधन को लेकर विशेष सतर्कता के निर्देश

पश्चिमी सिंहभूम में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज, रक्षाबंधन को लेकर विशेष सतर्कता के निर्देश

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा आमजनों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी अनुमंडल पदाधिकारी, चिकित्सा पदाधिकारी एवं खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी शामिल हुए।

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बैठक के दौरान उपायुक्त ने जिले में मिलावटी खाद्य पदार्थों के विरुद्ध अब तक चलाए गए अभियान की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए मिठाइयों एवं अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में मिलावट की आशंका को देखते हुए संबंधित पदाधिकारी विशेष सतर्कता बरतते हुए जांच एवं छापेमारी अभियान संचालित करें।

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उपायुक्त ने जिले के सभी क्षेत्रों में संचालित मिठाई दुकानों, खाद्य प्रतिष्ठानों एवं अन्य संबंधित दुकानों का गहन निरीक्षण करने का निर्देश दिया। उन्होंने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करने तथा मिलावट की आशंका वाले खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर नियमानुसार जांच सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही नियमित निगरानी रखते हुए प्रभावी छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया।

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उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि खाद्य पदार्थों में किसी भी प्रकार की मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच के दौरान मिलावटी अथवा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री की पुष्टि होने पर संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ अभियान को प्रभावी बनाने का निर्देश दिया।

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श्री मनीष कुमार ने कहा कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकता है। पर्व-त्योहार के दौरान बढ़ती मांग का अनुचित लाभ उठाकर किसी भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान द्वारा खाद्य पदार्थों में मिलावट कर आमजनों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। जिला प्रशासन ऐसे मामलों को लेकर गंभीर है और मिलावट के विरुद्ध जांच एवं कार्रवाई लगातार जारी रखी जाएगी।

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उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं शुद्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आमजनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

पश्चिमी सिंहभूम में जेएसएलपीएस की दीदियों ने लगाए राखी स्टॉल, महिला सशक्तिकरण को मिली नई मजबूती

पश्चिमी सिंहभूम में जेएसएलपीएस की दीदियों ने लगाए राखी स्टॉल, महिला सशक्तिकरण को मिली नई मजबूती

चाईबासा | रक्षा बंधन के पावन पर्व के अवसर पर महिला सशक्तिकरण एवं ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की पहल को नई मजबूती मिली। जिला समाहरणालय परिसर के सामने तथा सदर चाईबासा अनुमंडल कार्यालय के समीप जेएसएलपीएस समूह की दीदियों द्वारा लगाए गए राखी स्टॉल का उद्घाटन उपायुक्त मनीष कुमार, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार एवं चाईबासा नगर परिषद के अध्यक्ष नितिन प्रकाश ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।


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इस अवसर पर उपायुक्त, उप विकास आयुक्त एवं नगर परिषद अध्यक्ष ने स्टॉल से राखियों, मिठाइयों एवं अन्य सामग्री की खरीदारी कर समूह की दीदियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने स्टॉल पर उपलब्ध उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार एवं बिक्री किए जा रहे उत्पाद स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का साधन बनने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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राखी स्टॉल का संचालन जेएसएलपीएस समूह की दीदियों द्वारा किया जा रहा है। पर्व-त्योहारों के अवसर पर इस प्रकार के स्टॉल के माध्यम से महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध हो रहा है। इससे उनके कौशल, श्रम एवं उद्यमशीलता को पहचान मिल रही है। ऐसे प्रयास ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उन्हें आर्थिक निर्णयों में अधिक सक्षम बनाने में सहायक साबित हो रहे हैं।

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जिला प्रशासन द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न गतिविधियों से जोड़ने, उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने तथा स्थानीय स्तर पर विपणन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। राखी स्टॉल इसी प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जहां त्योहार की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ स्थानीय महिला समूहों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री का अवसर भी मिल रहा है।

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मौके पर चाईबासा नगर परिषद की प्रशासक संतोषणी मुर्मू, जेएसएलपीएस की डीपीएम आशियानी मारकी सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

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नीमडीह में अवैध शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग की छापेमारी, तीन चुलाई भट्ठियां ध्वस्त

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नीमडीह | सरायकेला-खरसावां जिले में अवैध शराब के निर्माण और कारोबार के खिलाफ उत्पाद विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। उपायुक्त के निर्देश पर उत्पाद अधीक्षक क्षितिज विजय मिंज के नेतृत्व में 24 अगस्त को उत्पाद विभाग एवं पश्चिम बंगाल उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने नीमडीह थाना क्षेत्र के पश्चिम बंगाल सीमावर्ती गांव लाकड़ी एवं चतरमा में छापेमारी की।

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आसूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई के दौरान टीम ने तीन अवैध महुआ चुलाई भट्ठियों को ध्वस्त किया। छापेमारी के दौरान मौके से करीब 1,500 किलोग्राम जावा महुआ तथा 50 लीटर अवैध महुआ चुलाई शराब बरामद की गई। बरामद सामग्री को नियमानुसार जब्त कर लिया गया है।

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उत्पाद विभाग द्वारा संबंधित अवैध चुलाई अड्डा संचालकों के खिलाफ झारखंड उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत अभियोग दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।

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उत्पाद अधीक्षक क्षितिज विजय मिंज ने कहा कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन एवं बिक्री के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि अवैध शराब से संबंधित किसी भी गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन या उत्पाद विभाग को दें, ताकि इस अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

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बंदगांव में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

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बंदगांव | कराईकेला पंचायत परिसर में शनिवार को बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 को लेकर जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों एवं ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।

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कार्यक्रम के दौरान बीसीओ प्रशांत एक्का एवं आत्मा के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक अश्विनी होरो ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सूखा, बाढ़, प्राकृतिक आपदा एवं कीट प्रकोप जैसी परिस्थितियों में फसल को नुकसान होने पर किसान किस प्रकार बीमा योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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अधिकारियों ने किसानों को योजना के तहत पंजीकरण की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज एवं बीमा का लाभ प्राप्त करने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। साथ ही किसानों से योजना का लाभ उठाने के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर पंजीकरण कराने की अपील की गई।

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कार्यक्रम में पंचायत समिति सदस्य कराईकेला तीरथ जामुदा, बीरू त्रिपाठी, पूर्व मुखिया दुंबी सुरीन, राजेश मंडल, सूरज कालिंदी एवं सदानंद होता समेत बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

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