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खनिज संपदा से मालामाल क्षेत्र, फिर भी स्थानीय युवा रोजगार से बेहाल-गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू और सारंडा के आदिवासी-ग्रामीणों के साथ हो रहा अन्याय :- रामहरि गोप

खनिज संपदा से मालामाल क्षेत्र, फिर भी स्थानीय युवा रोजगार से बेहाल-गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू और सारंडा के आदिवासी-ग्रामीणों के साथ हो रहा अन्याय :- रामहरि गोप

चाईबासा | एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष रामहरि गोप ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू एवं सारंडा क्षेत्र के स्थानीय लोगों की रोजगार एवं आजीविका संबंधी समस्याओं की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा ठोस कार्रवाई की मांग की है।
रामहरि गोप ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिला देश के सबसे समृद्ध खनिज क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये मूल्य के लौह अयस्क एवं अन्य खनिज संसाधनों का दोहन किया जाता है। खनन कंपनियां और सरकार इस क्षेत्र से भारी राजस्व अर्जित करती हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इसी क्षेत्र के मूल निवासी, आदिवासी एवं ग्रामीण परिवार आज भी रोजगार और सम्मानजनक आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
   उन्होंने बताया कि दिनांक 31 मई 2026 को चाईबासा रेलवे स्टेशन परिसर में गुआ क्षेत्र से आए कई ग्रामीणों से बातचीत के दौरान अत्यंत चिंताजनक तथ्य सामने आए। ग्रामीणों ने बताया कि उनके क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण वे लगभग 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर लकड़ी, दातून, पत्ता एवं अन्य वन उत्पाद बेचने के लिए चाईबासा आते हैं।

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 ग्रामीणों के अनुसार वे टाटा-गुआ पैसेंजर ट्रेन से दोपहर में गुआ से प्रस्थान कर शाम को चाईबासा पहुंचते हैं। आर्थिक तंगी के कारण वे किसी होटल या किराए के स्थान पर ठहरने में सक्षम नहीं होते और पूरी रात रेलवे स्टेशन परिसर में ही गुजारते हैं। अगले दिन सुबह लगभग चार बजे उठकर अपने सामान के साथ बाजारों में निकल जाते हैं और दिनभर मेहनत कर सामान बेचने के बाद पुनः रेलवे स्टेशन पहुंचकर ट्रेन से अपने गांव लौटते हैं।
   रामहरि गोप ने कहा कि यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने वाला है। जिस धरती की गोद से देश की उद्योग व्यवस्था चलाने वाले खनिज निकाले जा रहे हैं, उसी धरती के लोग रोजगार और सम्मानजनक जीवन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। यह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, विकास और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।

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 उन्होंने कहा कि यदि खनन परियोजनाओं, औद्योगिक गतिविधियों और विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा है, तो यह पूरे विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। खनिज संपदा से प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
   एंटी करप्शन ऑफ इंडिया ने प्रशासन से मांग की है कि गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू एवं सारंडा क्षेत्र में स्थानीय लोगों की रोजगार एवं आजीविका की वर्तमान स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए। खनन प्रभावित युवाओं के लिए विशेष रोजगार अभियान चलाया जाए तथा वन आधारित आजीविका, लघु उद्योग, स्वरोजगार एवं कौशल विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। साथ ही खनन कंपनियों द्वारा स्थानीय रोजगार, पुनर्वास एवं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की जाए।

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उन्होंने मांग की कि खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व और विकास योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों तक पहुंचाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए तथा प्रभावित क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाए जाएं।
   रामहरि गोप ने कहा कि यदि खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र के लोगों को ही रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन का अधिकार नहीं मिल रहा है, तो यह विकास नहीं बल्कि स्थानीय समुदायों के साथ अन्याय है। प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीण परिवारों को अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक रोजगार और बेहतर भविष्य मिल सके।

चाईबासा एसीसी प्लांट पर त्रिपक्षीय वार्ता बेनतीजा, काम बंद रहने तक सामान की आवाजाही पर रोक: उपायुक्त

चाईबासा एसीसी प्लांट पर त्रिपक्षीय वार्ता बेनतीजा, काम बंद रहने तक सामान की आवाजाही पर रोक: उपायुक्त

चाईबासा | चाईबासा स्थित एसीसी सीमेंट प्लांट को बंद होने से बचाने के लिए रविवार को जिला समाहरणालय में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता झारखंड के भू-राजस्व एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने की। हालांकि कई घंटों तक चली इस वार्ता का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका और बातचीत बेनतीजा रही।
बैठक में प्लांट प्रबंधन, मजदूर प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। वार्ता विफल रहने के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि जब तक प्लांट में कामकाज बंद रहेगा, तब तक न तो प्लांट से कोई सामान बाहर भेजा जाएगा और न ही किसी प्रकार की सामग्री अंदर लाई जाएगी।

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उपायुक्त ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में धारा 144 लागू करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही एसीसी प्रबंधन को अपने उच्च प्रबंधन, विशेष रूप से अहमदाबाद बोर्ड से वार्ता कर जल्द समाधान निकालने को कहा गया है। प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया कि मजदूरों के बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने तक कर्मचारियों को अन्य कार्यों में नहीं लगाया जाए।

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ग्रामीणों और मजदूरों में बढ़ी चिंता
ग्रामीणों और मजदूर प्रतिनिधियों ने बैठक में आशंका जताई कि 30 अप्रैल से ‘शटडाउन’ के नाम पर स्थानीय मजदूरों की छंटनी की जा रही है और प्लांट का उत्पादन एवं डिस्पैच पूरी तरह बंद है। उनका कहना है कि बिना किसी स्पष्ट नीति के काम बंद होने से उनकी आजीविका पर संकट गहरा गया है।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि प्लांट से कोयला, स्टील और क्लिंकर जैसी सामग्री को गुप्त तरीके से अन्य स्थानों पर भेजे जाने की कोशिश की जा रही है, जिससे यह आशंका बढ़ रही है कि फैक्ट्री को स्थायी रूप से बंद करने की तैयारी चल रही है।
पहले भी हुआ था विरोध प्रदर्शन

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इस मुद्दे को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों ने 29 मई को एसीसी प्रबंधन के खिलाफ पदयात्रा निकालने और उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की थी। हालांकि मंत्री दीपक बिरुआ के हस्तक्षेप और त्रिपक्षीय वार्ता के आश्वासन के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि चाईबासा का यह ऐतिहासिक प्लांट केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। यदि फैक्ट्री पूरी तरह बंद हो जाती है, तो हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
बैठक में पुलिस अधीक्षक, जनप्रतिनिधि, मजदूर संगठनों के सदस्य, संघर्ष समिति के पदाधिकारी और एसीसी प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

दिल्ली समेत कई शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा, घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत स्थिर

दिल्ली समेत कई शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा, घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत स्थिर

नई दिल्ली | देश में एक बार फिर कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की वृद्धि हुई है। इसके बाद इसकी नई कीमत 3,113.50 रुपये हो गई है।

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वहीं, कोलकाता में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 53.50 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही 5 किलोग्राम वाले LPG सिलेंडर की कीमत में भी 11 रुपये का इजाफा किया गया है, जिसके बाद इसकी नई कीमत 821.50 रुपये हो गई है।

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हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का असर होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसायों पर पड़ सकता है, जहां इन सिलेंडरों का व्यापक उपयोग होता है।

खनिज संपदा के बावजूद रोजगार संकट, लोग लकड़ी-दातून बेचने को मजबूर : धी रामहरि पेरियार

खनिज संपदा के बावजूद रोजगार संकट, लोग लकड़ी-दातून बेचने को मजबूर : धी रामहरि पेरियार

चाईबासा | एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी रामहरि पेरियार ने झारखंड, विशेषकर पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा-कोल्हान क्षेत्र में विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध गुआ, किरीबुरु, मेघाहातुबुरु और आसपास के क्षेत्रों के लोग आज भी रोजगार और आजीविका के अभाव में 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर चाईबासा पहुंचकर लकड़ी, दातून और जंगल से प्राप्त अन्य उत्पाद बेचने को मजबूर हैं।

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धी रामहरि पेरियार ने बताया कि चाईबासा रेलवे स्टेशन परिसर में उनकी मुलाकात ऐसे कई लोगों से हुई, जिन्होंने क्षेत्र में रोजगार के सीमित अवसरों की समस्या साझा की। लोगों ने बताया कि परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्हें जंगलों से लकड़ी, दातून और पत्ते लाकर बाजारों में बेचना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उस क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर पेश करती है, जहां से हर वर्ष करोड़ों-अरबों रुपये मूल्य के लौह अयस्क और अन्य खनिजों का दोहन किया जाता है।

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उन्होंने कहा कि यदि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र के मूल निवासी ही रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो विकास के दावों की गंभीर समीक्षा आवश्यक है। उनके अनुसार विकास का अर्थ केवल खदानों का विस्तार, राजस्व संग्रह या बड़ी परियोजनाओं की स्थापना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार के रूप में दिखाई देना चाहिए।
धी रामहरि पेरियार ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से गुआ एवं आसपास के क्षेत्रों में रोजगार सृजन, स्वरोजगार, लघु उद्योग, वनाधारित आजीविका, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी प्रभावी योजनाएं लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाएं लागू होने से लोगों को आजीविका के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी से राहत मिल सकेगी।

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उन्होंने कहा कि विकास के आंकड़ों से आगे बढ़कर जमीनी सच्चाई को देखने की आवश्यकता है। जब खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र का आम नागरिक लकड़ी और दातून बेचकर जीवन यापन करने को मजबूर हो, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि विकास का लाभ आखिर किसे मिल रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर उन्होंने राज्य सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नीति-निर्माताओं से गंभीरता से विचार कर ठोस कदम उठाने की अपील की है।

सीमित संसाधनों से आत्मनिर्भरता तक: रूदमा नायक बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

सीमित संसाधनों से आत्मनिर्भरता तक: रूदमा नायक बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

चक्रधरपुर | संकल्प, मेहनत और सही मार्गदर्शन किसी भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इसका प्रेरक उदाहरण चक्रधरपुर प्रखंड के पदमपुर पंचायत अंतर्गत चेलाबेड़ा गांव की निवासी श्रीमती रूदमा नायक हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपने प्रयासों तथा उद्यान विभाग और जेएसएलपीएस के सहयोग से आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बनाई है।
रूदमा नायक का जीवन पहले आर्थिक कठिनाइयों से घिरा हुआ था। परिवार की आजीविका सीमित आय पर निर्भर थी, जिससे दैनिक जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता था। पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था।

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उनके जीवन में बदलाव वर्ष 2023 में आया, जब वे झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (जेएसएलपीएस) से जुड़ीं। स्वयं सहायता समूह और ग्राम स्तरीय संगठनों के माध्यम से उन्होंने न केवल सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई, बल्कि विभिन्न प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों का भी लाभ उठाया।
रूदमा नायक ने स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और संकुल स्तरीय संघ से जुड़कर अपनी अलग पहचान बनाई। इन संस्थागत मंचों के माध्यम से उन्हें तकनीकी सहायता, आवश्यक जानकारी और आर्थिक अवसर प्राप्त हुए। साथ ही, उद्यान एवं आजीविका संवर्धन गतिविधियों से संबंधित प्रशिक्षण और सहयोग भी मिला।

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उन्होंने अपने समूह से ऋण लेकर जेआईसीए के सहयोग से एमडीआई मशीन प्राप्त की और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए खेती को व्यवस्थित एवं लाभकारी बनाया। उद्यान विभाग से प्राप्त बीजों की मदद से उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से खेती शुरू की। वर्तमान में उनके खेत में मिर्च की खेती की जा रही है।
आज रूदमा नायक एक सफल ग्रामीण उद्यमी के रूप में पहचान बना चुकी हैं। उनकी अनुमानित मासिक आय लगभग ₹16,800 है। इस आर्थिक प्रगति का सकारात्मक प्रभाव उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बच्चों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों की पूर्ति और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है। परिवार अब पहले की तुलना में अधिक सशक्त और आत्मविश्वासी महसूस कर रहा है।

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जिला उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिले में उद्यान विभाग और जेएसएलपीएस के माध्यम से संचालित आजीविका कार्यक्रम ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूदमा नायक जैसी महिलाएं अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और जिला प्रशासन का उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।
जिला उद्यान पदाधिकारी विश्वजित सिन्हा ने कहा कि उद्यान आधारित गतिविधियां ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं। तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन के जरिए लाभुकों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि रूदमा नायक की सफलता यह साबित करती है कि सही दिशा और मेहनत से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
वहीं, रूदमा नायक ने कहा कि उद्यान विभाग और जेएसएलपीएस से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। उन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने का अवसर मिला, जिससे वे आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर पा रही हैं। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी इन योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने और अपने सपनों को साकार करने की अपील की।
रूदमा नायक की सफलता की कहानी केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

चक्रधरपुर: बालू की कमी से प्रभावित हो रहीं विकास योजनाएं, भाजपा नेता ने डीसी से की शीघ्र समाधान की मांग

चक्रधरपुर: बालू की कमी से प्रभावित हो रहीं विकास योजनाएं, भाजपा नेता ने डीसी से की शीघ्र समाधान की मांग

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले में बालू की उपलब्धता नहीं होने से विभिन्न विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इस संबंध में भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडेय ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त (डीसी) को पत्र लिखकर समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की है।

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अपने पत्र में पांडेय ने कहा है कि जिले के बालू घाटों की अब तक निविदा नहीं निकाले जाने के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना, अबुआ आवास योजना, पुल निर्माण कार्य, नगर परिषद के पीसीसी पथ एवं नाली निर्माण जैसी महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं ठप पड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि कई संवेदकों को कार्यों की निविदा मिल चुकी है, लेकिन बालू की अनुपलब्धता के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
पांडेय ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के नियमों के तहत 10 जून से खनन कार्य बंद हो जाएगा। ऐसे में यदि उससे पहले बालू की व्यवस्था नहीं की गई, तो जिले में चल रहे विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

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उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों से बालू की आपूर्ति होने के बावजूद उसे अवैध बताकर जब्त किया जा रहा है, जिससे बाजार में बालू की कमी और बढ़ गई है। इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है।
उपायुक्त से मांग करते हुए पांडेय ने कहा कि जनहित और विकास कार्यों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकाले, ताकि निर्माण कार्य बाधित न हों और आम लोगों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। उन्होंने बताया कि पत्र की प्रति अनुमंडल पदाधिकारी, पोड़ाहाट चक्रधरपुर को भी भेजी गई है।

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पवन शंकर पांडेय ने कहा कि विकास कार्यों की गति बनाए रखने के लिए प्रशासन को अविलंब बालू उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि आवास एवं आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाएं प्रभावित न हों।

तेल संकट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल-डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती

तेल संकट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल-डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती

नई दिल्ली | वैश्विक स्तर पर बढ़ते तेल संकट के बीच भारत सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती करने की घोषणा की है।

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सरकार की ओर से शनिवार को जारी जानकारी के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और ATF पर संशोधित एक्सपोर्ट ड्यूटी दरें 1 जून से प्रभावी होंगी। इस फैसले का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों और घरेलू आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना माना जा रहा है।

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सरकार के इस कदम से पेट्रोलियम निर्यात क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि ऊर्जा क्षेत्र पर इसके प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।

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चाईबासा: एफपीओ की व्यावसायिक गतिविधियों की समीक्षा, 10 दिनों में ‘मास्टर प्रोडक्ट’ चिन्हित करने का निर्देश

चाईबासा: एफपीओ की व्यावसायिक गतिविधियों की समीक्षा, 10 दिनों में ‘मास्टर प्रोडक्ट’ चिन्हित करने का निर्देश

चाईबासा | जिला समाहरणालय सभागार में शनिवार को उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिले के पांचों किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के निदेशक मंडल (BoD) सदस्यों तथा जेएसएलपीएस के जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एफपीओ की वित्तीय एवं व्यावसायिक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

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बैठक के दौरान उपायुक्त ने एफपीओ के शेयर कैपिटल, ग्रांट, परिचालन व्यय, टर्नओवर तथा इनपुट-आउटपुट उत्पादों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी 10 दिनों के भीतर प्रत्येक एफपीओ का एक “मास्टर प्रोडक्ट” चिन्हित कर उसकी व्यावसायिक कार्ययोजना तैयार की जाए।
उपायुक्त ने एफपीओ की अलग पहचान स्थापित करने के उद्देश्य से समान ड्रेस कोड, जैकेट एवं छाता उपलब्ध कराने तथा प्रत्येक एफपीओ द्वारा “बर्तन बैंक” विकसित करने पर भी बल दिया।

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स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उपायुक्त ने खूंटपानी नोटबुक निर्माण केंद्र में तैयार नोटबुकों के उपयोग एवं खरीद को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इससे महिला स्वयं सहायता समूहों को आय के नए अवसर मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में महिला निदेशकों एवं सदस्यों से संवाद करते हुए उपायुक्त ने 1 से 10 जून तक चलने वाले “मिशन उदय” अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सहियाएं घर-घर जाकर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एकत्र करेंगी। उन्होंने महिलाओं से नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाने तथा आवश्यकता पड़ने पर परिवार के अन्य सदस्यों को भी स्वास्थ्य जांच और उपचार के लिए वहां ले जाने का आग्रह किया।

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मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए उपायुक्त ने स्वच्छ एवं उबला हुआ पानी पीने, मच्छरदानी का उपयोग करने, जमीन पर नहीं सोने तथा पूरे बाजू के कपड़े पहनने की सलाह दी। साथ ही आवारा कुत्तों से सतर्क रहने और कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र जाकर उपचार एवं टीकाकरण कराने की अपील की। उन्होंने पात्र लाभुकों से प्रत्येक माह की 6 तारीख तक पीडीएस के माध्यम से राशन प्राप्त करना सुनिश्चित करने को भी कहा।
बैठक के अंत में सभी अधिकारियों, एफपीओ निदेशकों एवं दीदियों ने “चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो” की शपथ ली। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राजलक्ष्मी सहित जेएसएलपीएस के जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी तथा जिले के पांचों एफपीओ के निदेशक मंडल सदस्य उपस्थित थे।

चंपुआ में बालू के अवैध खनन से ‘वसुधा’ पेयजल योजना ठप, ग्रामीणों में आक्रोश

चंपुआ में बालू के अवैध खनन से ‘वसुधा’ पेयजल योजना ठप, ग्रामीणों में आक्रोश

जैतगढ़/चंपुआ (ओडिशा) | बड़बिल थाना क्षेत्र के ओंडोकली पंचायत में बालू के अवैध खनन और माफियाओं की गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने इस मामले की लिखित शिकायत चंपुआ उपजिलाधिकारी (डीसी) से करते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि ओंडोकली पंचायत के मालिपसी और ज्योतिपुर रेत घाटों पर सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए मशीनों से अवैध खनन किया जा रहा है। माफिया बैतरणी नदी के तल से अत्यधिक गहराई तक बालू निकाल रहे हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन के कारण गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने वाली करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी ‘वसुधा’ पेयजल योजना पूरी तरह प्रभावित हो गई है। योजना ठप होने से ग्रामीणों को एक से दो किलोमीटर दूर जाकर पीने का पानी लाना पड़ रहा है।

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इसके अलावा, नियमों को ताक पर रखकर पुलों और सिंचाई परियोजनाओं के निकट भी बालू खनन किया जा रहा है। माफियाओं द्वारा जंगलों में पेड़ काटकर तथा किसानों के खेतों के बीच से अवैध रास्ते बनाए गए हैं, जिससे ग्रामीणों और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध खनन में लगे भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और उड़ती धूल से प्रदूषण फैल रहा है। विरोध करने पर ग्रामीणों को धमकियां मिलने की भी बात सामने आई है।

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ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

मंगला हाट बाजार का नप अध्यक्ष नितिन प्रकाश ने किया निरीक्षण, सफाई और सड़क मरम्मत के दिए निर्देश

मंगला हाट बाजार का नप अध्यक्ष नितिन प्रकाश ने किया निरीक्षण, सफाई और सड़क मरम्मत के दिए निर्देश

चाईबासा | मंगला हाट बाजार क्षेत्र की सफाई, जल निकासी और सड़क व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से नगर परिषद (नप) अध्यक्ष नितिन प्रकाश ने शुक्रवार को बाजार क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, नालियों की स्थिति तथा आम नागरिकों और दुकानदारों की सुविधाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं का जायजा लिया।

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निरीक्षण के दौरान नप अध्यक्ष ने पूर्व में दिए गए सफाई संबंधी निर्देशों की समीक्षा की और संबंधित संवेदक (ठेकेदार) को फटकार लगाते हुए सफाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी, नियमित और सुव्यवस्थित बनाने का निर्देश दिया।
बाजार क्षेत्र को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाना प्राथमिकता: नितिन प्रकाश
नप अध्यक्ष नितिन प्रकाश ने कहा कि मंगला हाट शहर की ऐतिहासिक और प्रमुख व्यापारिक पहचान है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बाजार क्षेत्र को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और सुगम बनाए रखना नगर परिषद की प्राथमिकता है।

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उन्होंने बताया कि मछली बाजार के लिए पहले से अलग स्थान निर्धारित किया जा चुका है। अब दुर्गा एवं मटन दुकानों को भी व्यवस्थित रूप से अलग स्थान पर स्थानांतरित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा, ताकि बाजार में स्वच्छता बनी रहे और लोगों को बेहतर वातावरण मिल सके।
दुकानदार तय स्थानों पर ही डालें कचरा
निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि कई दुकानदार दुकानों के बाहर सामान फैलाकर रखते हैं, जिससे आम लोगों की आवाजाही बाधित होती है। इस पर नप अध्यक्ष ने सभी दुकानदारों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि दुकान का सामान निर्धारित सीमा के भीतर ही रखें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सड़क पर सामान रखकर आवागमन बाधित किया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नितिन प्रकाश ने दुकानदारों और आम नागरिकों से अपील की कि कचरा खुले में न फेंकें और केवल निर्धारित स्थानों पर ही डालें। उन्होंने कहा कि डस्टबिन का नियमित उपयोग करें और शहर को स्वच्छ बनाने में नगर परिषद के साथ सक्रिय सहयोग दें।

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नालियों की सफाई और क्षतिग्रस्त सड़कों की होगी मरम्मत
बाजार क्षेत्र में जलजमाव की समस्या को दूर करने के लिए नप अध्यक्ष ने अधिकारियों को नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने और जहां आवश्यकता हो वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही बाजार क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़कों और नालियों की मरम्मत कार्य शीघ्र शुरू कराने की बात कही, ताकि दुकानदारों और ग्राहकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
निरीक्षण के दौरान वार्ड पार्षद अनुराधा कुमारी, सिटी मैनेजर, कनीय अभियंता, नगर परिषद की टीम, पूर्व वार्ड पार्षद तथा बड़ी संख्या में दुकानदार मौजूद रहे।