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प्राकृतिक खेती से बदली बलेमा सामड की जिंदगी, ₹12 हजार की लागत में कमाया ₹53 हजार का शुद्ध मुनाफा

प्राकृतिक खेती से बदली बलेमा सामड की जिंदगी, ₹12 हजार की लागत में कमाया ₹53 हजार का शुद्ध मुनाफा

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत बिंडासोर्जोम गांव की महिला किसान बलेमा सामड ने प्राकृतिक खेती अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में प्राकृतिक खेती का मॉडल अपनाया। सीमित कृषि भूमि और खेती की बढ़ती लागत के बीच उन्होंने स्थानीय संसाधनों के उपयोग तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से खेती की लागत को नियंत्रित करते हुए बेहतर आमदनी अर्जित की है। उनकी यह सफलता ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिला किसानों और छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

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रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती को अपनाया

प्राकृतिक खेती अपनाने से पहले बलेमा सामड को खेती के लिए बाजार से रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक खरीदने पड़ते थे। इससे प्रत्येक फसल चक्र में खेती की लागत बढ़ जाती थी और सीमित भूमि से होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्सा कृषि कार्यों पर खर्च हो जाता था। ऐसे में बचत करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और खेत में ही प्राकृतिक जैव-आदान तैयार करने की तकनीकों का प्रशिक्षण मिला। इसके बाद उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में प्राकृतिक खेती का मॉडल लागू किया और बाजार से खरीदे जाने वाले रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक सामग्रियों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी।

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स्थानीय संसाधनों से तैयार किए प्राकृतिक जैव-आदान

प्राकृतिक खेती के तहत बलेमा सामड ने बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, अग्निअस्त्र, सुपर कम्पोस्ट और अंडा टॉनिक जैसी सामग्रियों का उपयोग किया। बीजामृत का इस्तेमाल बीज उपचार के लिए, जबकि जीवामृत और घनजीवामृत का उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया।

वहीं, सुपर कम्पोस्ट के माध्यम से मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने तथा नीमास्त्र और अग्निअस्त्र जैसे प्राकृतिक घोलों से कीट नियंत्रण के प्रयास किए गए। अंडा टॉनिक का उपयोग पौधों की वृद्धि और फलों की गुणवत्ता बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया। इन उपायों से खेती में बाजार से खरीदे जाने वाले रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का अवसर मिला।

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फसल विविधीकरण से उत्पादन और आमदनी में बढ़ोतरी

बलेमा सामड ने एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपने खेत में करेला, बरबटी, झींगा, नेनुआ और मक्का जैसी विभिन्न फसलों की खेती की। उन्होंने जून 2026 में फसलों की बुवाई की। नियमित देखभाल, प्राकृतिक जैव-आदानों के उपयोग और समय पर तुड़ाई के जरिए सब्जियों की कुल 18 बार व्यावसायिक तुड़ाई की गई।

अलग-अलग फसलों की खेती से खेत का बेहतर उपयोग हुआ और बाजार में विभिन्न प्रकार की उपज बेचकर आमदनी अर्जित करने का अवसर मिला। फसल विविधीकरण से एक ही फसल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिली। इस प्रकार प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण के समन्वय से उन्होंने सीमित कृषि भूमि से बेहतर आर्थिक परिणाम हासिल किए।

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₹12 हजार की लागत में ₹65 हजार की सकल आय

बलेमा सामड की सफलता का प्रमुख पहलू खेती की लागत पर नियंत्रण और उससे प्राप्त आय का संतुलन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक एकड़ खेत में प्राकृतिक खेती से उन्हें लगभग 1,800 किलोग्राम कुल उत्पादन प्राप्त हुआ। खेती पर कुल ₹12,000 की लागत आई।

मुख्य फसलों से ₹55,000 और सह-फसलों से ₹10,000 की आय हुई। इस तरह उनकी कुल सकल आय ₹65,000 रही। खेती की कुल लागत घटाने के बाद उन्हें ₹53,000 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

यह उपलब्धि दर्शाती है कि उचित कृषि प्रबंधन, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और फसल विविधीकरण के माध्यम से छोटे एवं सीमांत किसान भी अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

प्राकृतिक खेती का लाभ केवल आमदनी बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इस पद्धति में स्थानीय संसाधनों से तैयार जैव-आदानों का उपयोग कर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाता है। जीवामृत, घनजीवामृत और सुपर कम्पोस्ट जैसी सामग्रियों का उचित उपयोग मिट्टी की जैविक गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकता है। वहीं, प्राकृतिक कीट नियंत्रण के उपाय रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को कम करने में मदद कर सकते हैं।

बलेमा सामड की पहल आजीविका को मजबूत बनाने, मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर रखने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके खेत में उत्पादित विभिन्न प्रकार की सब्जियां परिवार के भोजन में विविधता लाने में भी सहायक हैं।

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत जिला प्रशासन : मनीष कुमार

पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की लागत कम करने, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और आमदनी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बलेमा सामड जैसी महिला किसानों की सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरणादायक है।उन्होंने कहा कि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण अपनाकर किसान अपनी आजीविका को और मजबूत बना सकते हैं।

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कम खर्च में बेहतर खेती करने की मिली नई राह : बलेमा सामड

महिला किसान बलेमा सामड ने बताया कि पहले खेती में खाद और कीटनाशक खरीदने पर काफी खर्च करना पड़ता था। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्होंने अपने खेत में प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से प्राकृतिक खाद तैयार की और कीट नियंत्रण के उपायों का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग सब्जियों की खेती और कई बार तुड़ाई से अच्छी आमदनी अर्जित करने का अवसर मिला है। प्राकृतिक खेती ने उन्हें कम खर्च में बेहतर ढंग से खेती करने की नई राह दिखाई है। उन्होंने अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती की तकनीकों को सीखने और अपनाने की अपील की।

अन्य किसानों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

बलेमा सामड की सफलता यह संदेश देती है कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए केवल अधिक भूमि या महंगे कृषि संसाधनों की आवश्यकता नहीं है। उचित प्रशिक्षण, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, फसल विविधीकरण और नियमित देखभाल के जरिए छोटे एवं सीमांत किसान भी अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्राप्त प्रशिक्षण को अपने खेत में लागू कर बलेमा सामड ने खेती की लागत नियंत्रित करने और आमदनी बढ़ाने का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

मनोहरपुर में 11 किसानों को 90% अनुदान पर मिले सोलर पंप सेट, सांसद जोबा माझी ने किया वितरण

मनोहरपुर में 11 किसानों को 90% अनुदान पर मिले सोलर पंप सेट, सांसद जोबा माझी ने किया वितरण

मनोहरपुर | किसान समृद्धि योजना के तहत शनिवार को मनोहरपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में 11 किसानों के बीच सोलर पंप सेट का वितरण किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंहभूम की सांसद जोबा माझी उपस्थित रहीं। उन्होंने लाभुक किसानों को सोलर पंप सेट प्रदान करते हुए कृषि कार्यों को बढ़ावा देने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की अपील की।

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इस दौरान सुगड़ सलीम चेरवा, नादो चेरवा, अजीत चेरवा, विश्राम चेरवा, प्रतिमा महतो, गंगाराम तिर्की, छगन लाल महतो, सोनाराम तिर्की, राजेश महतो, मोहन कुम्हार और मेजरीन सिंदरी को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप सेट दिए गए।

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मौके पर सांसद जोबा माझी ने कहा कि मनोहरपुर क्षेत्र के किसान मेहनती हैं और यहां कृषि की अपार संभावनाएं हैं। सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध होने से खेती को और अधिक उन्नत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सोलर पंप सेट किसानों के लिए उपयोगी साबित होंगे और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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सांसद ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को सोलर पंप वितरण का लक्ष्य बढ़ाने और योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने ग्रामीणों से कृषि कार्यों से जुड़ने और खेती को आजीविका का मजबूत साधन बनाने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं संचालित कर रही है। किसानों को इन योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाना चाहिए, ताकि कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सके।

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कार्यक्रम के दौरान संबंधित एजेंसी के प्रतिनिधियों ने लाभुक किसानों को सोलर पंप सेट के संचालन और उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।

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इस अवसर पर बीडीओ शक्ति कुंज, सीओ प्रदीप कुमार, उप प्रमुख दीपक एक्का, मुखिया पूजा कुजूर, अशोक बांदा, बीटीएम बंदना उरांव, चंचल रवानी, विक्रम सिंह, अजहर अली, मोहम्मद उमर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, लाभुक किसान और ग्रामीण उपस्थित थे।

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सरायकेला में कौशल विकास एवं रोजगार योजनाओं की समीक्षा, युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

सरायकेला में कौशल विकास एवं रोजगार योजनाओं की समीक्षा, युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

सरायकेला | समाहरणालय सभागार में गुरुवार को उप विकास आयुक्त रीना हांसदा की अध्यक्षता में कौशल विकास, आजीविका, रोजगार सृजन एवं नाबार्ड से संबंधित योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में संचालित योजनाओं की प्रगति, प्रशिक्षण कार्यों तथा अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई।

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बैठक में उप विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के युवाओं को उनकी रुचि, योग्यता तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण दिया जाए। प्रशिक्षण के बाद युवाओं को स्थानीय औद्योगिक प्रतिष्ठानों, संस्थानों एवं अन्य रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए विभागीय स्तर पर समन्वित प्रयास करने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाकर युवाओं और किसानों के पलायन को कम किया जा सकता है। इसके लिए पलायन करने वाले युवाओं को चिह्नित कर उन्हें उद्योगों में रोजगार के साथ-साथ कृषि, पशुपालन, बागवानी एवं अन्य संबद्ध क्षेत्रों में उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया।

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प्रशिक्षित युवाओं को ऋण एवं स्वरोजगार से जोड़ने का निर्देश
उप विकास आयुक्त ने आरसेटी एवं कौशल विकास केंद्रों से प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों का नियमित फॉलोअप करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार के लिए मार्गदर्शन, बैंक ऋण एवं सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा।

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बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की भी समीक्षा की गई। अधिक से अधिक आवेदन प्राप्त करने, लंबित आवेदनों का शीघ्र निष्पादन कराने तथा अस्वीकृत आवेदनों के कारणों की समीक्षा कर पात्र लाभुकों को योजना से जोड़ने का निर्देश दिया गया।

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नियमित रोजगार मेला एवं भर्ती कैंप आयोजित करने पर जोर
श्रम एवं नियोजन विभाग को निर्धारित रोस्टर के अनुसार नियमित रूप से रोजगार मेला एवं भर्ती कैंप आयोजित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, इनकी जानकारी का स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा स्थानीय भाषाओं में भी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि अधिक से अधिक युवा रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें।

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बैठक में श्रम एवं नियोजन, उद्योग, आरसेटी, जेएसएलपीएस सहित संबंधित विभागों की योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर भी चर्चा की गई। पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर पात्र लाभुकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का निर्देश दिया गया।

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उप विकास आयुक्त ने कहा कि कौशल विकास का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ना होना चाहिए। इसके लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार से जुड़ाव एवं नियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए परिणाम आधारित कार्ययोजना के तहत काम करने की आवश्यकता है।
बैठक में श्रम अधीक्षक अविनाश ठाकुर, नियोजन पदाधिकारी, आदित्यपुर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक जेएसएलपीएस सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

पश्चिमी सिंहभूम में 18 कृषि उपकरण बैंक होंगे स्थापित, 238 किसानों को कृषि यंत्र देने का लक्ष्य

पश्चिमी सिंहभूम में 18 कृषि उपकरण बैंक होंगे स्थापित, 238 किसानों को कृषि यंत्र देने का लक्ष्य

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को भूमि संरक्षण विभाग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सबमिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन उपयोजना से संबंधित जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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बैठक में कृषि उपकरण बैंक की स्थापना, लाभुक समूहों के चयन तथा व्यक्तिगत अनुदान के माध्यम से कृषि यंत्र उपलब्ध कराने सहित योजना के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले में कुल 18 कृषि उपकरण बैंक स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र आसानी से उपलब्ध कराने और कृषि कार्यों में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

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कृषि उपकरण बैंकों के माध्यम से विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों को सामूहिक रूप से कृषि यंत्र उपलब्ध होंगे। इससे खेती की लागत और श्रम में कमी लाने के साथ कृषि कार्यों को अधिक सुगम बनाने में सहायता मिलेगी।
महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा लाभ
बैठक में महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कृषि उपकरण बैंक स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। योजना के तहत जिले के विभिन्न प्रखंडों के 18 महिला स्वयं सहायता समूहों का कृषि उपकरण बैंक की स्थापना के लिए चयन किया गया है।

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238 कृषि यंत्रों के वितरण का लक्ष्य
व्यक्तिगत अनुदान के तहत कृषि यंत्रों के वितरण पर भी बैठक में चर्चा की गई। योजना के तहत अनुसूचित जनजाति श्रेणी के लिए 117 और अन्य श्रेणी के लिए 121, यानी कुल 238 लाभुकों को कृषि यंत्र उपलब्ध कराने का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिला स्तरीय समिति ने 61 लाभुकों को व्यक्तिगत अनुदान पर कृषि यंत्र क्रय करने की स्वीकृति प्रदान की।

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योजना के तहत पावर टिलर, पावर वीडर, पंप सेट, रोटावेटर, धान रोपण मशीन, मिनी राइस मिल और चारा मशीन सहित विभिन्न कृषि यंत्र किसानों तक पहुंचाए जाएंगे। इससे कृषि कार्यों में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों को समय और श्रम की बचत का लाभ मिलेगा।

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उपायुक्त मनीष कुमार ने संबंधित पदाधिकारियों को योजना का लाभ पात्र किसानों और समूहों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने तथा कृषि उपकरण बैंकों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिले में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देकर किसानों की कार्यक्षमता बढ़ाने और खेती को अधिक सुविधाजनक एवं उत्पादक बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जाना आवश्यक है।

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आनंदपुर में डीसी मनीष कुमार ने बाजार, पुल और छठ घाट का किया निरीक्षण, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

आनंदपुर में डीसी मनीष कुमार ने बाजार, पुल और छठ घाट का किया निरीक्षण, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

आनंदपुर | पश्चिमी सिंहभूम के जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार ने आनंदपुर प्रखंड क्षेत्र के भ्रमण के दौरान आनंदपुर साप्ताहिक बाजार, मुख्य बाजार क्षेत्र, छठ घाट, निर्माणाधीन पुल एवं उसके डायवर्सन का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नागरिक सुविधाओं और विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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साप्ताहिक बाजार के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने वहां उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का अवलोकन किया। जर्जर शेड की स्थिति को देखते हुए उन्होंने उसके स्थान पर नया शेड निर्माण कराने के लिए संबंधित कार्यपालक अभियंता को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बाजार में आने वाले दुकानदारों और आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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इसके बाद उपायुक्त ने आनंदपुर मुख्य बाजार के समीप निर्माणाधीन पुल और उसके लिए बनाए गए डायवर्सन का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति और वर्तमान व्यवस्था की जानकारी लेते हुए संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं संवेदक को कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया।

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उपायुक्त ने कहा कि निकट भविष्य में छठ महापर्व आयोजित होना है। ऐसे में निर्माणाधीन पुल और डायवर्सन के कारण श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने छठ घाट तक श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया।

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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने आनंदपुर मुख्य बाजार की सड़क के सुदृढ़ीकरण और जल निकासी की समस्या के समाधान को लेकर भी संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाजार क्षेत्र में जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के साथ सड़क एवं नाली व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए, ताकि आम नागरिकों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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उपायुक्त ने विद्यालय का किया निरीक्षण, विद्यार्थियों को पढ़ाया गणित का पाठ

उपायुक्त ने विद्यालय का किया निरीक्षण, विद्यार्थियों को पढ़ाया गणित का पाठ

मनोहरपुर | पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने गुरुवार को मनोहरपुर प्रखंड क्षेत्र के भ्रमण के दौरान एसएसआईपी प्लस टू उच्च विद्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों, आधारभूत संरचना और विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। मौके पर मनोहरपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी शक्ति कुंज भी उपस्थित रहे।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने विभिन्न कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, विषयों की समझ और विद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उपायुक्त का शिक्षक के रूप में एक अलग अंदाज देखने को मिला। उन्होंने विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर गणित का पाठ पढ़ाया और उनसे विभिन्न प्रश्न पूछकर उनकी विषयगत समझ को परखा।

उपायुक्त ने कठिन गणितीय विषयों को सरल तरीके से समझाते हुए विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन और अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद उपायुक्त ने विद्यालय परिसर में डीएमएफटी मद से निर्माणाधीन छह कमरों वाले भवन के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी लेते हुए गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया।

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विद्यालय में विद्यार्थियों की सुविधा और परिसर के बेहतर विकास को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त ने उपलब्ध विकास मद से साइकिल स्टैंड का निर्माण कराने का निर्देश दिया। इसके अलावा विद्यालय परिसर में हैंडवॉश यूनिट, पेवर ब्लॉक और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उपायुक्त ने विद्यालय प्रबंधन को विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार के साथ-साथ परिसर की स्वच्छता, पेयजल, स्वच्छता सुविधाओं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। इसलिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण तैयार करना सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

पोल्ट्री व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनीं सरस्वती कुजूर, 35 हजार रुपये के निवेश से कमा रहीं 15-20 हजार रुपये मासिक

पोल्ट्री व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनीं सरस्वती कुजूर, 35 हजार रुपये के निवेश से कमा रहीं 15-20 हजार रुपये मासिक

आनंदपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के आनंदपुर प्रखंड के बदिया गांव की सरस्वती कुजूर ग्रामीण महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं। कभी पति की अनियमित आय और हड़िया बिक्री पर निर्भर परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने वाली सरस्वती आज पोल्ट्री और पिगरी व्यवसाय के माध्यम से नियमित आमदनी अर्जित कर रही हैं।

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परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था। इसी दौरान सरस्वती झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, वित्तीय सहयोग, आजीविका संबंधी प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। इस सहयोग ने उन्हें पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़कर अपना व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास दिया।

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35 हजार रुपये के निवेश से शुरू किया पोल्ट्री व्यवसाय
सरस्वती ने करीब 35 हजार रुपये के प्रारंभिक निवेश से लगभग 200 चूजों के साथ पोल्ट्री पालन शुरू किया। शुरुआत में चूजों की देखभाल, आहार, टीकाकरण, बीमारी से बचाव और बाजार में बिक्री जैसी कई चुनौतियां सामने आईं। जेएसएलपीएस और स्वयं सहायता समूह से मिले प्रशिक्षण के माध्यम से उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से पोल्ट्री पालन करना सीखा और व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।

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पोल्ट्री व्यवसाय से होने वाली आमदनी ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में उन्होंने घर के स्तर पर सुअर पालन भी शुरू किया। इस तरह उन्होंने परिवार के लिए आय के एक से अधिक साधन विकसित किए।
नियमित आमदनी से मजबूत हो रही परिवार की आर्थिक स्थिति
वर्तमान में सरस्वती पोल्ट्री व्यवसाय से करीब 500 रुपये प्रतिदिन की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनकी अनुमानित मासिक आय 15 से 20 हजार रुपये तक पहुंच गई है। नियमित आमदनी से अब वह परिवार की दैनिक जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

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सरस्वती की सफलता बताती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया व्यवसाय भी उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत के माध्यम से स्थायी आजीविका का साधन बन सकता है। उनकी सफलता गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
उपायुक्त ने सरस्वती की सफलता को बताया प्रेरणादायक
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने सरस्वती कुजूर की सफलता को ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का प्रेरणादायक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और आजीविका के अवसरों से जोड़ने का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

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उपायुक्त ने कहा कि सरस्वती की सफलता दर्शाती है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं छोटे उद्यमों को सफल व्यवसाय में बदल सकती हैं। महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता से न केवल परिवार की आय मजबूत होती है, बल्कि पूरे समुदाय में भी सकारात्मक बदलाव आता है।
उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं से उपलब्ध प्रशिक्षण और आजीविका योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

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हड़िया बिक्री और परिवार की अनियमित आय से शुरू हुआ सरस्वती कुजूर का सफर आज पोल्ट्री और पिगरी उद्यम के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। करीब 35 हजार रुपये के निवेश से शुरू हुआ उनका पोल्ट्री व्यवसाय और 15 से 20 हजार रुपये तक की मासिक आय यह दर्शाती है कि अवसर, प्रशिक्षण और मेहनत के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं।

प्रोजेक्ट आहार के तहत पीडीएस दुकान का निरीक्षण, लाभुकों से लिया राशन वितरण का फीडबैक

प्रोजेक्ट आहार के तहत पीडीएस दुकान का निरीक्षण, लाभुकों से लिया राशन वितरण का फीडबैक

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन वितरण व्यवस्था की जमीनी निगरानी तेज कर दी गई है। इसी क्रम में प्रोजेक्ट आहार के तहत पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी सुश्री श्रुति राजलक्ष्मी एवं सहायक समाहर्ता सुश्री ईरा जोरवाल ने चक्रधरपुर प्रखंड की जामिद पंचायत अंतर्गत सिकिदिकि गांव स्थित पीडीएस दुकान का निरीक्षण किया।

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निरीक्षण के दौरान पदाधिकारियों ने मौके पर राशन वितरण की प्रक्रिया का जायजा लिया और राशन लेने पहुंचे कार्डधारियों से सीधे बातचीत कर व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने लाभुकों से निर्धारित मात्रा में राशन मिलने, वितरण की नियमितता तथा राशन लेने में होने वाली किसी भी परेशानी के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

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लाभुकों से मिले फीडबैक के आधार पर पदाधिकारियों ने वितरण प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। इस दौरान राशन वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने और पात्र लाभुकों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

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स्टॉक रजिस्टर से खाद्यान्न का किया मिलान
निरीक्षण के दौरान पीडीएस दुकान में उपलब्ध खाद्यान्न के भंडारण की भी जांच की गई। पदाधिकारियों ने दुकान में रखे खाद्यान्न की स्थिति का जायजा लेते हुए उपलब्ध स्टॉक का संबंधित अभिलेखों से मिलान किया। साथ ही स्टॉक रजिस्टर एवं राशन वितरण से जुड़े अन्य रिकॉर्ड की भी जांच की गई, ताकि दर्ज मात्रा और वास्तविक उपलब्ध खाद्यान्न की स्थिति स्पष्ट हो सके।

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पदाधिकारियों ने दुकान संचालक को खाद्यान्न का व्यवस्थित एवं सुरक्षित भंडारण करने तथा सभी आवश्यक अभिलेखों को अद्यतन रखने का निर्देश दिया। इसके अलावा लाभुकों को राशन लेने में अनावश्यक परेशानी नहीं हो, इसका ध्यान रखते हुए निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप पारदर्शी तरीके से वितरण सुनिश्चित करने को कहा।

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लाभुकों से सीधे संवाद कर जानी जमीनी स्थिति
निरीक्षण के दौरान पदाधिकारियों ने अभिलेखों और स्टॉक की जांच के साथ-साथ राशन कार्डधारियों से सीधे संवाद किया। इससे पीडीएस व्यवस्था की जमीनी स्थिति और लाभुकों के अनुभवों को समझने का अवसर मिला।
पदाधिकारियों ने लाभुकों को आश्वस्त किया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक नियमित और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

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प्रोजेक्ट आहार के तहत किए जा रहे ऐसे स्थलीय निरीक्षणों का उद्देश्य पीडीएस दुकानों में राशन वितरण की वास्तविक स्थिति के साथ-साथ खाद्यान्न के स्टॉक, भंडारण, अभिलेख संधारण और लाभुकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा करना है। जिला प्रशासन द्वारा जन वितरण प्रणाली को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और लाभुकों के लिए सुगम बनाने की दिशा में क्षेत्रीय स्तर पर नियमित निगरानी की जा रही है।

टीएसयूआईएसएल में ट्रेड अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित, 22 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन

टीएसयूआईएसएल में ट्रेड अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित, 22 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन

जमशेदपुर | टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड (टीएसयूआईएसएल) में ट्रेड अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग 2026 के लिए पात्र अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। कंपनी प्रबंधन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार इच्छुक अभ्यर्थी 22 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। चयनित अभ्यर्थियों को एसएनटीआई में दो वर्ष का अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

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टाटा स्टील से जुड़े परिवारों के लिए अवसर
अधिसूचना के अनुसार वर्तमान या पूर्व कर्मचारियों के बेटा-बेटी इस अप्रेंटिसशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं, बेटा नहीं होने की स्थिति में निर्धारित शर्तों के तहत कर्मचारी के दामाद अथवा पति-पत्नी को भी आवेदन का अवसर दिया गया है। प्रायोजक कर्मचारी की सेवा अवधि को लेकर भी कंपनी की ओर से पात्रता की शर्तें निर्धारित की गई हैं।

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मैट्रिक में अंग्रेजी, विज्ञान और गणित में उत्तीर्ण होना अनिवार्य
अभ्यर्थी का मैट्रिक या समकक्ष परीक्षा अंग्रेजी, विज्ञान और गणित विषयों के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इन तीनों विषयों में उत्तीर्ण अंक प्राप्त करना भी जरूरी है। कर्मचारी वार्ड के लिए अभ्यर्थी की जन्मतिथि 1 सितंबर 2004 से 1 सितंबर 2008 के बीच होनी चाहिए। वहीं, एससी-एसटी कर्मचारी वार्ड के लिए जन्मतिथि 1 सितंबर 2002 से 1 सितंबर 2008 के बीच निर्धारित की गई है।

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दो वर्ष का प्रशिक्षण, स्टाइपेंड भी मिलेगा
चयनित अभ्यर्थियों को एसएनटीआई में दो वर्ष का अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि के दौरान अभ्यर्थियों को स्टाइपेंड भी मिलेगा। ट्रेड एवं प्रशिक्षण अवधि का आवंटन इंटरव्यू में प्रदर्शन और मैट्रिक में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा।

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आंखों की रोशनी और कलर विजन की शर्त
अप्रेंटिसशिप के लिए अभ्यर्थी की दोनों आंखों की दृष्टि चश्मे के साथ 6/6 होनी चाहिए। चश्मे का पावर अधिकतम ±4.0 तक मान्य होगा। इसके अलावा अभ्यर्थी का कलर विजन सामान्य होना भी अनिवार्य है।

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अप्रेंटिसशिप के बाद नौकरी की गारंटी नहीं
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण का अर्थ रोजगार की गारंटी नहीं है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने और ऑल इंडिया ट्रेड टेस्ट (एआईटीटी) उत्तीर्ण कर नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद कंपनी में आवश्यकता होने पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है।

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ऐसे में पात्र अभ्यर्थियों के लिए 22 सितंबर 2026 आवेदन की अंतिम तिथि है। इच्छुक उम्मीदवार कंपनी की ओर से जारी अधिसूचना में दी गई पात्रता, जन्मतिथि, शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य निर्धारित शर्तों की जांच कर समय सीमा के भीतर आवेदन करें।

खरसावां में 73 किसानों को वैज्ञानिक तसर उत्पादन का प्रशिक्षण

खरसावां में 73 किसानों को वैज्ञानिक तसर उत्पादन का प्रशिक्षण

खरसावां | खरसावां पथ निरीक्षण भवन परिसर स्थित केंद्रीय रेशम बोर्ड के बुनियादी बीज संवर्धन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CSB-BSMTC) के पायलट प्रोजेक्ट सेंटर (PPC), खरसावां में राष्ट्रीय अभियान “मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0” के तहत रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान अंतर्गत जागरूकता सह किसान संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में खरसावां क्षेत्र के 73 रेशम किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों को वैज्ञानिक तरीके से तसर कीटपालन करने और उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई।

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कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित वैज्ञानिक तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुंचाना, तसर कोकून की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि करना तथा रेशम किसानों की आजीविका को मजबूत बनाना रहा। विशेषज्ञों ने किसानों को तसर कीटपालन, बीज उत्पादन, स्वच्छता, रोग नियंत्रण तथा कोकून के बेहतर विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।

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कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बीटीएसएसओ, बिलासपुर की निदेशक डॉ. जी. पुनितावती ने झारखंड में तसर रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि की रणनीति पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि सहायक उद्योग निदेशक (रेशम), चाईबासा रविशंकर प्रसाद ने किसानों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, प्रशासनिक प्राथमिकताओं तथा उपलब्ध वित्तीय सहायता की जानकारी दी।

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पीपीओ, हाटगमहरिया प्रदीप कुमार महतो ने वैज्ञानिक तरीके से तसर कीटपालन और उत्पादन बढ़ाने के उपाय बताए। पीपीओ, खरसावां नितिश कुमार ने किसान स्तर पर ग्रेनेज (बीज उत्पादन) प्रबंधन के महत्व को समझाया। वैज्ञानिक-बी प्रदीप गुलाबराव डुकरे ने कीटपालन क्षेत्र में स्वच्छता और नियमित कीटाणुशोधन को बेहद जरूरी बताते हुए रोग नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। वहीं रॉ मटेरियल बैंक के सहायक सचिव राममोहन प्रमाणिक ने कोकून के विपणन, मूल्य निर्धारण तथा किसानों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी साझा की।

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माइक्रोस्कोप से पेब्रिन रोग की पहचान का प्रशिक्षण
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण किसानों के लिए आयोजित हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण रहा। वैज्ञानिक-बी प्रदीप गुलाबराव डुकरे ने माइक्रोस्कोप के माध्यम से पेब्रिन रोग की पहचान करने की प्रक्रिया किसानों को प्रत्यक्ष रूप से समझाई। इस दौरान किसानों को रोग की समय पर पहचान, नियंत्रण तथा रोगमुक्त बीज के उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया।

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कार्यक्रम के समापन से पहले आयोजित किसान संवाद में किसानों ने तसर उत्पादन से जुड़ी अपनी क्षेत्रीय समस्याएं और सवाल विशेषज्ञों के समक्ष रखे। अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं का समाधान बताते हुए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने और आधुनिक पद्धतियों के माध्यम से तसर उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।

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अंत में रेशम कीटपालन के दौरान धूप और बारिश से बचाव के लिए किसानों के बीच छतरियों का वितरण किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक तसर उत्पादन की तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी आय और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।