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भुइयांडीह ह्यूम पाइप चौक के पास एल्युमिनियम शीट से लदा टाटा प्राइमा ट्रक पलटा, यातायात रहा प्रभावित

भुइयांडीह ह्यूम पाइप चौक के पास एल्युमिनियम शीट से लदा टाटा प्राइमा ट्रक पलटा, यातायात रहा प्रभावित

जमशेदपुर | शहर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र अंतर्गत भुइयांडीह ह्यूम पाइप चौक के पास गुरुवार देर रात एल्युमिनियम शीट से लदा एक टाटा प्राइमा ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे के बाद ट्रक में लदी एल्युमिनियम शीट सड़क पर दूर-दूर तक बिखर गई, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

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घटना की सूचना मिलते ही सीतारामडेरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सड़क पर बिखरी एल्युमिनियम शीट को हटाने का अभियान शुरू कराया, ताकि यातायात को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।

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गनीमत रही कि इस दुर्घटना में किसी के घायल होने या किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा, जिसके कारण ट्रक पलट गया। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

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फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और दुर्घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। समय पर शुरू किए गए राहत एवं बचाव कार्य के कारण सड़क से मलबा हटाकर यातायात व्यवस्था को शीघ्र सामान्य कर दिया गया।

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उपायुक्त ने FCI गोदाम पाताहातु का किया निरीक्षण, खाद्यान्न भंडारण व परिवहन व्यवस्था की समीक्षा

उपायुक्त ने FCI गोदाम पाताहातु का किया निरीक्षण, खाद्यान्न भंडारण व परिवहन व्यवस्था की समीक्षा

चाईबासा | जिला उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने बुधवार को एफसीआई (FCI) गोदाम, पाताहातु का निरीक्षण कर गोदाम के संचालन, खाद्यान्न भंडारण, रखरखाव एवं परिवहन व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने गोदाम में उपलब्ध खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण, गुणवत्ता तथा संचालन संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने गोदाम में उपलब्ध गेहूं, चावल सहित अन्य खाद्यान्न के स्टॉक की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अनाज के बोरों का निरीक्षण कर उनके सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से भंडारण की व्यवस्था का अवलोकन किया तथा अधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप खाद्यान्न का भंडारण सुनिश्चित करने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए।

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उपायुक्त ने खाद्यान्न के परिवहन तंत्र की भी समीक्षा की। उन्होंने खाद्यान्न के आवागमन, लोडिंग-अनलोडिंग की प्रक्रिया तथा समयबद्ध आपूर्ति व्यवस्था की जानकारी ली। साथ ही गोदाम परिसर में स्थापित धर्मकांटा (वेट ब्रिज) का निरीक्षण कर उसकी कार्यप्रणाली, माप-तौल की शुद्धता एवं नियमित संचालन की भी जांच की।

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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए खाद्यान्न का भंडारण एवं परिवहन पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए, ताकि लाभुकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके।

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उन्होंने गोदाम परिसर की स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था तथा अभिलेखों के नियमित संधारण पर भी विशेष बल देते हुए कहा कि खाद्यान्न प्रबंधन से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं का प्रभावी एवं व्यवस्थित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

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झारखंड में टाटा स्टील का ₹10,000 करोड़ निवेश, 2028 तक 2,000 रोजगार सृजन का लक्ष्य

झारखंड में टाटा स्टील का ₹10,000 करोड़ निवेश, 2028 तक 2,000 रोजगार सृजन का लक्ष्य

रांची | झारखंड के औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में टाटा स्टील ने बड़ा निवेश करने की योजना बनाई है। कंपनी वर्ष 2028 तक राज्य में लगभग ₹10,000 करोड़ का निवेश करेगी। इस निवेश का उद्देश्य स्टील उत्पादन क्षमता का विस्तार, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। कंपनी के अनुसार, इस परियोजना से करीब 2,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

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ग्रीन स्टील तकनीक पर रहेगा विशेष जोर
प्रस्तावित निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा आधुनिक और कम-कार्बन उत्सर्जन वाली स्टील निर्माण तकनीकों के विकास पर खर्च किया जाएगा। कंपनी लगभग ₹7,000 करोड़ की लागत से HIsarna और EASyMelt (Easy Melting) जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने की तैयारी कर रही है। इन तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्टील उत्पादन को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े प्रोजेक्ट
निवेश योजना के तहत टाटा स्टील अपने टिनप्लेट डिवीजन के विस्तार पर ₹2,600 करोड़ खर्च करेगी। इसके अलावा ₹1,500 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक कॉम्बी मिल (Combi Mill) परियोजना विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कंपनी की कुल स्टील उत्पादन क्षमता 2.73 करोड़ टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 4 करोड़ टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य है।

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स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
कंपनी का कहना है कि प्रस्तावित परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 2,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा परिवहन, इंजीनियरिंग, निर्माण, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा।

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जमशेदपुर की औद्योगिक पहचान होगी और मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रीन स्टील तकनीक और आधुनिक उत्पादन इकाइयों के विकास से जमशेदपुर देश के प्रमुख पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक शहरों में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है। इससे भविष्य में नए निवेश और सहायक उद्योगों के आने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

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झारखंड की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
यदि यह निवेश योजना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी होती है, तो झारखंड को औद्योगिक निवेश, आधुनिक तकनीक, रोजगार सृजन और उत्पादन क्षमता विस्तार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ मिलने की संभावना है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और देश के औद्योगिक मानचित्र पर झारखंड की भूमिका और अधिक प्रभावशाली हो सकती है।

25 लाख के इनामी शीर्ष नक्सली की पत्नी ने किया आत्मसमर्पण, संगठन में शोषण और हिंसा का लगाया आरोप

25 लाख के इनामी शीर्ष नक्सली की पत्नी ने किया आत्मसमर्पण, संगठन में शोषण और हिंसा का लगाया आरोप

गिरिडीह | झारखंड के गिरिडीह जिले में नक्सल विरोधी अभियान के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। 25 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली की पत्नी ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए गिरिडीह पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के बाद उसने संगठन के भीतर शोषण, भय और हिंसा के माहौल का आरोप लगाते हुए कहा कि इन परिस्थितियों के कारण उसका संगठन से पूरी तरह मोहभंग हो गया।

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाली महिला लंबे समय से प्रतिबंधित नक्सली संगठन से जुड़ी हुई थी और विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही थी। पूछताछ के दौरान उसने संगठन की कार्यप्रणाली, जंगलों में संचालित गतिविधियों तथा नक्सली नेटवर्क से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की हैं।

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महिला ने बताया कि संगठन में महिलाओं के साथ भेदभाव, मानसिक एवं शारीरिक शोषण जैसी घटनाएं आम थीं। लगातार हिंसा और निर्दोष लोगों की जान जाने की घटनाओं से वह मानसिक रूप से व्यथित हो गई थी। इसी कारण उसने संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

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गिरिडीह पुलिस ने बताया कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत महिला को नियमानुसार सभी आवश्यक सुविधाएं और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पुलिस का मानना है कि इस आत्मसमर्पण से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे अभियान को और मजबूती मिलेगी तथा अन्य उग्रवादियों को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

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पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति, विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखें। साथ ही, नक्सली संगठन से जुड़े लोगों से राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सामान्य जीवन की ओर लौटने का आग्रह किया गया है।

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चाईबासा ट्रेजरी घोटाला: राष्ट्रीय फुटबॉलर गोराचंद मांडी जांच के दायरे में

चाईबासा ट्रेजरी घोटाला: राष्ट्रीय फुटबॉलर गोराचंद मांडी जांच के दायरे में

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा ट्रेजरी से सरकारी खजाने से 26 लाख रुपये से अधिक की कथित अवैध निकासी के मामले में जांच के दौरान एक नया खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के दौरान राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर गोराचंद मांडी का नाम भी जांच के दायरे में लिया है।

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सीआईडी जांच के अनुसार, यह कथित घोटाला चाईबासा स्थित पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के डीडीओ (DDO) कोड के दुरुपयोग के माध्यम से अंजाम दिया गया। मामले के मुख्य आरोपी देव नारायण मुर्मू, जो एसपी कार्यालय के लेखा शाखा में पदस्थापित एक आरक्षी हैं, पर सरकारी अभिलेखों और कंप्यूटर डेटा में कथित हेरफेर कर फर्जी निकासी करने का आरोप है।
जांच में आरोप है कि देव नारायण मुर्मू ने सरकारी राशि को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर कुल ₹26,21,717 का गबन किया।

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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि देव नारायण मुर्मू के बैंक खाते से ₹1.67 लाख गोराचंद मांडी के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह लेनदेन वित्तीय जांच का हिस्सा है और इसी आधार पर गोराचंद मांडी का नाम जांच के दायरे में आया है। हालांकि, सिर्फ नाम सामने आने से उनके खिलाफ किसी आपराधिक जिम्मेदारी या दोष सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

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जांच में चिन्हित बैंक खाते
जांच एजेंसियों ने वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई बैंक खातों की पहचान की है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
एसबीआई पोटका शाखा (पूर्वी सिंहभूम)
एसबीआई डंगराटोली शाखा (रांची)
एसबीआई चाईबासा शाखा (पश्चिमी सिंहभूम)
एसबीआई बहलदा शाखा (मयूरभंज, ओडिशा)
इन खातों में हुए लेनदेन और संबंधित खाताधारकों की भूमिका की जांच जारी है।

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कौन हैं गोराचंद मांडी?
ओडिशा के मयूरभंज जिले के निवासी गोराचंद मांडी राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर हैं। उन्होंने झारखंड की ओर से संतोष ट्रॉफी में प्रतिनिधित्व किया है और जमशेदपुर फुटबॉल लीग में भी खेल चुके हैं। वे पहले टाटा स्टील और टाटा मोटर्स की टीमों से भी जुड़े रहे हैं। स्थानीय फुटबॉल जगत में वे अपने विशिष्ट हेयर स्टाइल के लिए भी जाने जाते हैं।

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फिलहाल, चाईबासा ट्रेजरी घोटाले की जांच जारी है। जांच एजेंसियां इस मामले से जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। अब तक गोराचंद मांडी के खिलाफ किसी भी प्रकार की आपराधिक संलिप्तता सिद्ध नहीं हुई है और न ही जांच एजेंसियों ने उनके विरुद्ध कोई अंतिम निष्कर्ष जारी किया है।

पश्चिमी सिंहभूम में ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा, प्रशासन व ‘प्रदान’ के बीच समन्वय पर जोर

पश्चिमी सिंहभूम में ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा, प्रशासन व ‘प्रदान’ के बीच समन्वय पर जोर

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में बुधवार को जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में गैर-सरकारी संस्था प्रदान (PRADAN) के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशिक्षु आईएएस सुश्री ईरा जोरवाल, पीएमयू के सदस्य तथा प्रदान संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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बैठक के दौरान प्रदान संस्था के प्रतिनिधियों ने जिले में संचालित आजीविका संवर्धन से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। संस्था ने बताया कि वर्तमान में सदर चाईबासा, हाटगम्हरिया, टोंटो, चक्रधरपुर, सोनुआ एवं बंदगांव प्रखंडों में लिफ्ट सिंचाई, मछली पालन, हल्दी प्रसंस्करण, कृषि आधारित गतिविधियों तथा अन्य आजीविका कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदान संस्था और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (JSLPS) के बीच बेहतर समन्वय एवं तालमेल आवश्यक है।

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उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों, विशेषकर किसानों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को आजीविका आधारित योजनाओं से जोड़कर उन्हें योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों एवं कृषि संभावनाओं का बेहतर उपयोग करते हुए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रसार, मत्स्य पालन, हल्दी प्रसंस्करण तथा कृषि एवं वनोपज आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन और प्रभावी बाजारीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे ग्रामीणों की आय में स्थायी वृद्धि होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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बैठक में जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों एवं प्रदान संस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान आजीविका संवर्धन, लिफ्ट एवं टपक सिंचाई, मोबाइल सिंचाई व्यवस्था, मत्स्य पालन, हल्दी प्रोसेसिंग तथा कृषि एवं खाद्य उत्पादों के प्रभावी विपणन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अधिक से अधिक लाभुकों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार करने पर भी बल दिया गया।

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उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम को “सशक्त सिंहभूम” बनाने के लिए सभी विभागों, संस्थाओं एवं विकास सहयोगियों का सामूहिक प्रयास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिले का समग्र विकास तभी संभव है, जब ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और प्रत्येक ग्रामीण परिवार की आय में सतत वृद्धि होगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं संस्था के प्रतिनिधियों से समन्वित प्रयासों के माध्यम से ग्रामीण विकास एवं आजीविका संवर्धन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल करने का आह्वान किया।

आधुनिक केज कल्चर से बदली ग्रामीण की तस्वीर, मत्स्य पालन बना आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम

आधुनिक केज कल्चर से बदली ग्रामीण की तस्वीर, मत्स्य पालन बना आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग द्वारा संचालित आधुनिक मत्स्य पालन कार्यक्रम ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। सदर प्रखंड के छोटा जयपुर गांव निवासी रामसिंह मुन्दुईया इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन करने वाले रामसिंह ने आधुनिक केज कल्चर (Cage Culture) तकनीक अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि आसपास के ग्रामीणों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

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पहले रामसिंह पारंपरिक खेती और छोटे-मोटे कार्यों के सहारे अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान उन्हें मत्स्य विभाग की केज कल्चर आधारित योजना की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने इस तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया और आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

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योजना के तहत उन्हें 2.70 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज का चयन, संतुलित आहार प्रबंधन, जल गुणवत्ता बनाए रखने तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने संबंधी तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया। विभागीय विशेषज्ञों के सतत मार्गदर्शन में उन्होंने जलाशय में आधुनिक केज स्थापित कर पंगास एवं तिलापिया प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया।

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वर्तमान में रामसिंह प्रतिवर्ष लगभग 5 से 6 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें 3.5 से 4.5 लाख रुपये तक की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यकताओं तथा भविष्य की योजनाओं को अधिक आत्मविश्वास के साथ पूरा कर पा रहे हैं।
रामसिंह की सफलता का प्रभाव केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर गांव एवं आसपास के क्षेत्रों के अनेक किसान और युवा भी आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

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उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि पात्र लाभुकों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि रामसिंह मुन्दुईया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और प्रशासनिक सहयोग के समन्वय से ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं। उन्होंने जिले के युवाओं एवं किसानों से विभागीय योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

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जिला मत्स्य पदाधिकारी श्री नवीन कुमार ने कहा कि आधुनिक केज कल्चर पद्धति कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली प्रभावी तकनीक है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक इच्छुक मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण, तकनीकी परामर्श और विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए, ताकि जिले में मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ ग्रामीणों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो सके। उन्होंने बताया कि विभाग लाभुकों को प्रत्येक चरण में आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रहा है।
अपने अनुभव साझा करते हुए लाभुक रामसिंह मुन्दुईया ने कहा, “पहले सीमित आय के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था, लेकिन मत्स्य विभाग से मिले प्रशिक्षण और सहयोग ने मेरी जिंदगी बदल दी। आज मैं सम्मानजनक आय अर्जित कर रहा हूं और भविष्य को लेकर आश्वस्त हूं। मैं सभी ग्रामीण भाइयों-बहनों से अपील करता हूं कि वे सरकारी योजनाओं पर विश्वास करें, प्रशिक्षण प्राप्त करें और आधुनिक मत्स्य पालन अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं।”

वैज्ञानिक धान खेती से बदली महिला किसान की तस्वीर, आय और उत्पादन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि

वैज्ञानिक धान खेती से बदली महिला किसान की तस्वीर, आय और उत्पादन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि

चाईबासा |  पश्चिमी सिंहभूम जिले में कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के तहत किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के प्रयास सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के किसान कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर रहे हैं। इसका प्रेरक उदाहरण सदर प्रखंड की तुईबीर पंचायत के पम्पड़ा गांव की महिला किसान श्रीमती बेलमती देवगम हैं, जिन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से धान की खेती कर न केवल अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।

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बेलमती देवगम एक साधारण कृषक परिवार से हैं। चार सदस्यीय परिवार की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। उनके पास कुल चार एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें दो एकड़ सिंचित और दो एकड़ असिंचित भूमि शामिल है। पहले वे परंपरागत तरीके से लगभग तीन एकड़ में धान तथा शेष भूमि पर मौसमी सब्जियों की खेती करती थीं। सीमित उत्पादन और बढ़ती लागत के कारण खेती से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था।

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इसी दौरान गांव के किसान मित्र के माध्यम से उन्हें कृषि विभाग के प्रखंड स्तरीय खरीफ प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी मिली। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग लिया, जहां कृषि विशेषज्ञों ने धान उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों, बीज उपचार, नर्सरी प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, खरपतवार नियंत्रण, जल संरक्षण तथा पौधों की उचित दूरी पर रोपाई सहित आधुनिक कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रमाणित धान बीज भी उपलब्ध कराया गया।

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प्रशिक्षण से प्रेरित होकर बेलमती देवगम ने पहली बार वैज्ञानिक पद्धति से धान की खेती की। उन्होंने 25×25 सेंटीमीटर की दूरी पर एक-एक पौधे की रोपाई की, खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर कोनो वीडर का उपयोग किया तथा कृषि विभाग के सभी तकनीकी सुझावों का पालन किया। इसका परिणाम यह हुआ कि पौधों की वृद्धि बेहतर हुई, अधिक संख्या में कल्ले निकले और धान की गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

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वैज्ञानिक खेती अपनाने से उन्हें पहले की तुलना में लगभग दोगुना उत्पादन प्राप्त हुआ। इससे परिवार के लिए वर्षभर पर्याप्त धान उपलब्ध होने के साथ अतिरिक्त उपज बेचकर अच्छी आय भी हुई। बढ़ी हुई आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा बच्चों की शिक्षा, पोषण और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना आसान हो गया। आज बेलमती आत्मविश्वास के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ आसपास के किसानों को भी वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं।
बेलमती देवगम ने बताया कि कृषि विभाग से मिले प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी खेती करने की सोच बदल दी है। अब वे प्रत्येक मौसम में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती करना चाहती हैं और विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेने का संकल्प लिया है।
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक लाभकारी बनाने तथा वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। बेलमती देवगम की सफलता इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है।

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जिला कृषि पदाधिकारी अमरजीत हुजूर ने कहा कि विभाग का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक एवं उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ना है। इसके लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण शिविर, कृषक गोष्ठी और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक धान खेती की तकनीक अपनाने से कम बीज, कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है।
जिला प्रशासन ने किसानों से कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी मार्गदर्शन का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि वैज्ञानिक खेती अपनाकर न केवल उत्पादन और आय में वृद्धि की जा सकती है, बल्कि खेती को टिकाऊ, लाभकारी और आत्मनिर्भर आजीविका का सशक्त माध्यम भी बनाया जा सकता है।

सरायकेला-खरसावां में झारखंड आंदोलनकारियों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी, कफन ओढ़कर जताया विरोध

सरायकेला-खरसावां में झारखंड आंदोलनकारियों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी, कफन ओढ़कर जताया विरोध

सरायकेला-खरसावां | झारखंड आंदोलनकारियों का अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को चौथे दिन भी जारी रहा। धरना पर बैठे आंदोलनकारियों ने कफन ओढ़कर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार व प्रशासन के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की।

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आंदोलनकारी धनपति सरदार ने कहा कि कफन ओढ़कर विरोध करना कोई सामान्य प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह उनकी मांगों के प्रति अंतिम प्रतिबद्धता और गहरे असंतोष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी अब ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं, जहां उन्हें अपने जीवन की भी परवाह नहीं रह गई है।

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धनपति सरदार ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन झारखंड आंदोलनकारियों की समस्याओं तथा मांगों के साथ लगातार उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के साथ हो रहे इस व्यवहार को सहने से बेहतर वे मौत को गले लगाना समझते हैं। यह उनका आक्रोश और पीड़ा की चरम स्थिति है।

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उन्होंने कहा कि चिन्हित झारखंड आंदोलनकारियों का यह कदम शासन-प्रशासन की नीतियों के प्रति उनके गहरे अविश्वास को दर्शाता है। आंदोलनकारियों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर उन्हें उचित सम्मान, अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

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आंदोलनकारियों ने कहा कि सरायकेला-खरसावां क्षेत्र झारखंड आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां के आंदोलनकारियों ने अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया और बलिदान दिए। कफन ओढ़कर प्रदर्शन के माध्यम से वे सत्ता को यह याद दिलाना चाहते हैं कि झारखंड राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान की नींव पर खड़ा है।

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धरना में राजेश मुंदरी, योगेश्वर बेसरा, तारापाड़ा महतो, जन्मजय मंडल, शीला मालती टुडू, बिजली, शमशान सिंह मुंडा, भगत बेसरा, लखन मुड़िया, दीपक प्रधान, दादीकुई, विजय, वीरेंद्र, लखन, लाभों महतो, बया सरदार, सोनाराम सोरेन, गोपाल, कृष्ण, सिलाई, पंचा सरदार और हरिचरण पांडेया सहित अन्य आंदोलनकारी शामिल रहे।

चाईबासा में अवैध चुलाई शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, तीन भट्ठियां ध्वस्त

चाईबासा में अवैध चुलाई शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, तीन भट्ठियां ध्वस्त

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में अवैध चुलाई शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ उत्पाद विभाग का विशेष अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में गुरुवार को उत्पाद विभाग की टीम ने मुफ्फसिल और झींकपानी थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर तीन अवैध चुलाई शराब भट्ठियों को ध्वस्त कर दिया।

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अभियान के दौरान मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के करकट्टा गांव में संचालित एक अवैध शराब भट्ठी को पूरी तरह नष्ट किया गया। वहीं, झींकपानी थाना क्षेत्र के गुड़ा गांव में चल रही दो अन्य अवैध शराब भट्ठियों पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें ध्वस्त कर दिया गया।

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छापेमारी के दौरान करीब 40 लीटर अवैध चुलाई शराब और शराब निर्माण के लिए रखा गया लगभग 1,200 किलोग्राम जावा-महुआ बरामद किया गया। उत्पाद विभाग की टीम ने बरामद जावा-महुआ को नियमानुसार मौके पर ही नष्ट कर दिया।

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इस मामले में अवैध शराब भट्ठियों के संचालन से जुड़े तीन आरोपियों के खिलाफ झारखंड उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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इसके अतिरिक्त, उत्पाद विभाग ने जिले में लाइसेंसी शराब दुकानों के नियमित निरीक्षण अभियान के तहत टुंगरी स्थित कंपोजिट शराब दुकान और मेडिकल क्षेत्र, चाईबासा स्थित कंपोजिट शराब दुकान का भी औचक निरीक्षण किया।

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निरीक्षण के दौरान दुकान संचालकों को अनुज्ञप्ति की शर्तों के अनुरूप दुकान संचालन, निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर ही शराब बिक्री तथा सभी वैधानिक नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।