संस्कृति

शिक्षक दिवस पर सीएम उत्कृष्ट प्लस टू जिला हाई स्कूल में भव्य समारोह, उपायुक्त मनीष कुमार ने शिक्षकों के योगदान को सराहा

शिक्षक दिवस पर सीएम उत्कृष्ट प्लस टू जिला हाई स्कूल में भव्य समारोह, उपायुक्त मनीष कुमार ने शिक्षकों के योगदान को सराहा

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के सीएम उत्कृष्ट प्लस टू जिला हाई स्कूल के सभागार में शिक्षक दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार शामिल हुए। इस अवसर पर सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों के पारंपरिक रीति-रिवाज से आत्मीय स्वागत के साथ हुई। इसके बाद उपायुक्त मनीष कुमार एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। छात्र-छात्राओं ने गीत, संगीत एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षक दिवस के महत्व और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।

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समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि शिक्षक केवल वह व्यक्ति नहीं है, जो विद्यालय में हमें पाठ पढ़ाता है, बल्कि जीवन में जिस किसी व्यक्ति से हमें सीख, अनुभव, मार्गदर्शन या प्रेरणा मिलती है, वह भी किसी न किसी रूप में हमारे लिए शिक्षक के समान है। उन्होंने कहा कि जीवन निरंतर सीखने की प्रक्रिया है और प्रत्येक अनुभव हमें कुछ नया सिखाता है।

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उपायुक्त ने कहा कि शिक्षक समाज का ऐसा महत्वपूर्ण वर्ग है, जो निरंतर ज्ञान, संस्कार, मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करता है। शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को निखारने के साथ-साथ उनमें भविष्य के प्रति विश्वास और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं। वे अपने ज्ञान और अनुभव को समाज के साथ साझा करते हैं और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए समाज का दायित्व है कि वह शिक्षकों के योगदान को समझे और उन्हें उचित सम्मान प्रदान करे।

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उन्होंने कहा कि आज हम सभी जिस मुकाम पर हैं, उसमें हमारे माता-पिता, गुरुजनों और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उन सभी गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने हमारे जीवन को दिशा दी है।
इस अवसर पर उपायुक्त ने भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन का जीवन शिक्षा, ज्ञान और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, विचार और व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त आधार माना।

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उपायुक्त ने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे अपने शिक्षकों से प्राप्त ज्ञान और मार्गदर्शन का सदुपयोग करें। जीवन में सफलता केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक अच्छा, जिम्मेदार और संवेदनशील इंसान बनना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने, निरंतर सीखने, अनुशासन एवं संस्कार को जीवन का हिस्सा बनाने तथा अपने शिक्षकों का सदैव सम्मान करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव केवल विद्यार्थी के जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके माध्यम से पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। इसलिए शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव हैं।

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कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके समर्पण, धैर्य एवं निरंतर प्रयासों का सम्मान किया जाना चाहिए।
समारोह में छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अतिथियों एवं शिक्षकों ने सराहना की। कार्यक्रम का समापन शिक्षक समुदाय के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।

गुरु कोल लको बोदरा जयंती समारोह की तैयारियों पर बैठक, ‘हो’ भाषा और ब्हारङ्ग क्षिति लिपि के संरक्षण पर जोर

गुरु कोल लको बोदरा जयंती समारोह की तैयारियों पर बैठक, ‘हो’ भाषा और ब्हारङ्ग क्षिति लिपि के संरक्षण पर जोर

गोईलकेरा | आगामी ओत् गुरु कोल लको बोदरा जयंती समारोह–2026 की तैयारियों को लेकर रविवार को कार्यक्रम स्थल लको बोदरा चौक, कायदा में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आदिवासी ‘हो’ समाज महासभा, गोईलकेरा प्रखंड के अध्यक्ष पातोर जोंको ने की।
बैठक में गुरु कोल लको बोदरा जयंती समारोह को भव्य एवं सफल बनाने के साथ-साथ गुरु कोल लको बोदरा की प्रतिमा के छत निर्माण कार्य के शुभारंभ को लेकर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।

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बैठक में निर्णय लिया गया कि समारोह की तैयारियों को और अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने के लिए 1 सितंबर 2026 को गोईलकेरा ग्राम पंचायत सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में पूर्व में चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम को सौंपे गए ज्ञापन के संबंध में पुनः स्मरण पत्र देने तथा आवश्यक पहल के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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इसी क्रम में जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर जिले के प्रत्येक गांव में ‘हो’ भाषा की ब्हारङ्ग क्षिति लिपि में मौजा की पहचान से संबंधित साइन बोर्ड स्थापित कराने की मांग पर भी चर्चा की गई। प्रस्तावित साइन बोर्ड में संबंधित मौजा का नाम, मौजा के मुंडा का नाम तथा पीड़ एवं इलाका मानकी का नाम अंकित करने का प्रस्ताव रखा गया।


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बैठक में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि यह पहल पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, स्थानीय पहचान तथा ‘हो’ भाषा और ब्हारङ्ग क्षिति लिपि के संरक्षण एवं सार्वजनिक पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

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सदस्यों ने कहा कि गुरु कोल लको बोदरा की जयंती केवल उनके स्मरण का अवसर नहीं है, बल्कि अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति और सामाजिक पहचान के संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लेने का भी अवसर है। समारोह को सफल बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता और सहयोग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

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बैठक में मुख्य रूप से आदिवासी ‘हो’ समाज महासभा, मनोहरपुर प्रखंड अध्यक्ष मनोज चाम्पिया, सचिव नीमा लुगुन, गोईलकेरा प्रखंड कोषाध्यक्ष रमेश सुरिन, मलकेन्द्र अंगरिया, लक्ष्मण पुरती, जमदार चाम्पिया, मरकस हसा, रामचन्द्र कायदा, सोमवारी बाहन्दा (मुखिया), महेंद्र जमुदा, प्रेमसिंह सुरिन, दांसर कुदादा, बामिया सुरिन, सुमेर हेम्ब्रोम, रमेश बोदरा, बलराम सुरिन, बुधलाल सुरिन और अनुकरण चेरोवा सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

सरायकेला छऊ कला केंद्र के समग्र विकास और संरक्षण को लेकर बैठक आयोजित

सरायकेला छऊ कला केंद्र के समग्र विकास और संरक्षण को लेकर बैठक आयोजित

सरायकेला | उपायुक्त सरायकेला-खरसावाँ नीतिश कुमार सिंह की अध्यक्षता एवं खरसावाँ विधायक दशरथ गागराई की उपस्थिति में सरायकेला छऊ कला केंद्र के समग्र विकास, संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश, जिला खेल पदाधिकारी अमित कुमार सहित कोर कमेटी एवं स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे।

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बैठक के दौरान छऊ कला केंद्र की आधारभूत संरचना, उपलब्ध सुविधाओं एवं इंफ्रास्ट्रक्चर गैप, मानव संसाधन, नियुक्ति, प्रशिक्षण व्यवस्था तथा केंद्र के प्रभावी संचालन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही कोर कमेटी एवं स्टीयरिंग कमेटी की संरचना और सदस्यों की संख्या को लेकर भी उपस्थित सदस्यों से सुझाव लिए गए।

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उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह ने संबंधित अधिकारियों एवं समिति के सदस्यों को आपसी समन्वय के साथ अनुमंडल स्तर पर बैठक आयोजित कर सभी आवश्यक बिंदुओं पर विचार-विमर्श करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। इसके बाद प्रस्ताव को जिला स्तर पर समेकित कर नियमानुसार संस्कृति, कला एवं खेल विभाग, झारखंड सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया।

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उपायुक्त ने कहा कि सरायकेला छऊ, खरसावाँ छऊ एवं मानभूम छऊ की समृद्ध कला परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने नई पीढ़ी को छऊ कला से जोड़ने, प्रशिक्षण के अवसरों का विस्तार करने तथा स्थानीय कलाकारों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

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वहीं विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि सरायकेला-खरसावाँ क्षेत्र अपनी समृद्ध छऊ कला एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए विशेष पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि छऊ कला केंद्र को केवल एक प्रशिक्षण केंद्र तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे छऊ कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी को इस परंपरा से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

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पश्चिमी सिंहभूम में जेएसएलपीएस दीदियों के राखी स्टॉलों पर बढ़ी भीड़, अब तक 51 हजार रुपये की बिक्री

पश्चिमी सिंहभूम में जेएसएलपीएस दीदियों के राखी स्टॉलों पर बढ़ी भीड़, अब तक 51 हजार रुपये की बिक्री

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार एवं आय के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट बदलाव के तहत जेएसएलपीएस दीदियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए राखी स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रक्षाबंधन पर्व को लेकर इन स्टॉलों पर ग्राहकों, विशेषकर बच्चियों और महिलाओं की भीड़ देखी जा रही है। जिलेभर में लगाए गए राखी स्टॉलों से अब तक करीब 51 हजार रुपये की राखियों की बिक्री हो चुकी है।

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जेएसएलपीएस दीदियों द्वारा तैयार की गई राखियों में स्थानीय हस्तकला, आकर्षक डिजाइन और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का विशेष ध्यान रखा गया है। राखियों के साथ पूजा सामग्री और मिठाई को शामिल करते हुए आकर्षक पैकेज भी तैयार किए गए हैं, ताकि लोगों को रक्षाबंधन से संबंधित आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके।

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किफायती दरों पर उपलब्ध हैं राखी पैकेज
राखी स्टॉलों पर अलग-अलग जरूरत और बजट के अनुसार तीन प्रकार के पैकेज उपलब्ध कराए गए हैं। पैकेज-1 की कीमत 60 रुपये है, जिसमें दो राखी, कुमकुम और अरवा चावल शामिल हैं। पैकेज-2 की कीमत 120 रुपये है, जिसमें चार राखी, कुमकुम, अरवा चावल और चार लड्डू दिए जा रहे हैं। वहीं पैकेज-3 की कीमत 150 रुपये है, जिसमें पांच राखी, कुमकुम, अरवा चावल, चार लड्डू और गिफ्ट हैंपर शामिल है। किफायती कीमतों के कारण लोग अपनी आवश्यकता और बजट के अनुसार इन पैकेजों की खरीदारी कर रहे हैं।

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स्थानीय महिलाओं के उत्पादों को मिल रहा बाजार
इन राखी स्टॉलों के माध्यम से जिले के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को सीधे बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं को अपने हुनर का प्रदर्शन करने के साथ-साथ उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। जिला प्रशासन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत करना है।

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स्थानीय राखी खरीदने की जिला प्रशासन ने की अपील
जिला प्रशासन ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि उन्होंने अब तक रक्षाबंधन के लिए राखी की खरीदारी नहीं की है, तो अपने क्षेत्र में लगाए गए जेएसएलपीएस दीदियों के राखी स्टॉल पर पहुंचकर राखी और अन्य उपलब्ध सामग्री की खरीदारी करें। स्थानीय महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की खरीदारी कर लोग न केवल रक्षाबंधन की खुशियों को साझा कर सकते हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।

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जिला प्रशासन ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीदारी से ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों को मजबूती मिलती है। आमजनों की सहभागिता से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए नए बाजार और आजीविका के अवसर सृजित होंगे तथा जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में चल रहे प्रयासों को और गति मिलेगी।

आदिवासी महोत्सव 2026 का कल से होगा भव्य आगाज, मोरहाबादी मैदान में जुटेंगे 600 से अधिक कलाकार

आदिवासी महोत्सव 2026 का कल से होगा भव्य आगाज, मोरहाबादी मैदान में जुटेंगे 600 से अधिक कलाकार

रांची | झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत को समर्पित दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ 9 अगस्त से रांची के मोरहाबादी मैदान में होगा। महोत्सव के सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग वंदना दादेल ने शुक्रवार को आयोजन स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया।

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निरीक्षण के दौरान उन्होंने महोत्सव स्थल पर चल रहे निर्माण कार्यों और विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी तैयारियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी की जाएं और कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही, महोत्सव के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसे सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 9 अगस्त को दोपहर एक बजे मोरहाबादी मैदान में आयोजित इस महोत्सव का रंगारंग उद्घाटन करेंगे।

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सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की तैयारियों का लिया जायजा
अपर मुख्य सचिव ने वीवीआईपी आवागमन, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि महोत्सव में बड़ी संख्या में आगंतुकों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी मूलभूत सुविधाएं सुदृढ़ रूप से उपलब्ध कराई जाएं।

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उन्होंने मुख्य मंच, विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के स्टॉल, पार्किंग क्षेत्र सहित आयोजन स्थल की समस्त व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। संबंधित विभागों को महोत्सव शुरू होने से पहले सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित होगी झारखंड की संस्कृति
वंदना दादेल ने कहा कि आदिवासी महोत्सव झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय और गंभीरता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का निर्देश दिया।

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निरीक्षण के दौरान कल्याण आयुक्त कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग राजीव लोचन बक्शी, संयुक्त निदेशक आनंद, निदेशक, टीआरआई आलोक एस. कच्छप सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और एजेंसी प्रतिनिधि उपस्थित थे।
आदिवासी महोत्सव के प्रमुख आकर्षण
जेल मोड़ से मोरहाबादी मैदान तक जतरा का आयोजन किया जाएगा।

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झारखंड के 600 से अधिक कलाकार महोत्सव में हिस्सा लेंगे।
मुंडारी, कुड़ुख, संथाली, हो और खड़िया जनजातीय समुदायों के कलाकार प्रमुख रूप से अपनी कला और संस्कृति की प्रस्तुति देंगे।
पंचपरगनिया, कुरमाली, नागपुरी और खोरठा भाषाओं में नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुतियां होंगी।
महोत्सव के माध्यम से झारखंड की आदिवासी कला, संस्कृति, परंपरा और भाषाई विविधता को व्यापक मंच प्रदान किया जाएगा।

विश्व आदिवासी दिवस-2026 की तैयारियों में जुटा जिला प्रशासन, उपायुक्त ने दिए सफल आयोजन के निर्देश

विश्व आदिवासी दिवस-2026 की तैयारियों में जुटा जिला प्रशासन, उपायुक्त ने दिए सफल आयोजन के निर्देश

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में आगामी 9 एवं 10 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले विश्व आदिवासी दिवस (आदिवासी महोत्सव-2026) की तैयारियों को लेकर बुधवार को समाहरणालय सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम की तैयारियों, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों तथा समन्वयात्मक कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस जिले की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपरा और विरासत को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यक्रम का आयोजन गरिमामय, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सके।

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बैठक में निर्णय लिया गया कि महोत्सव के दौरान जनजातीय कला, संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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इसके तहत पारंपरिक नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुतियां, हस्तशिल्प प्रदर्शनी, स्थानीय व्यंजनों की प्रदर्शनी तथा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, जिले के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आकर्षक सेल्फी प्वाइंट स्थापित किए जाएंगे तथा राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लाइव प्रसारण के लिए आवश्यकता अनुसार एलईडी वैन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

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समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त, प्रोजेक्ट डायरेक्टर आईटीडीए, अपर उपायुक्त, जिला परिवहन पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर), जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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श्रावणी मेला की तैयारियों का एसडीओ ने लिया जायजा, महादेवसाल मंदिर परिसर का किया निरीक्षण

श्रावणी मेला की तैयारियों का एसडीओ ने लिया जायजा, महादेवसाल मंदिर परिसर का किया निरीक्षण

चक्रधरपुर | आगामी श्रावणी मेला के सफल, सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर गुरुवार को पोड़ाहाट अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), चक्रधरपुर तथा गोईलकेरा प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) ने महादेवसाल मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने मेले की तैयारियों, विधि-व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत जायजा लिया।

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निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मंदिर परिसर, श्रद्धालुओं के आवागमन मार्ग, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की।

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उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं।

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अधिकारियों ने कहा कि श्रावणी मेला के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के महादेवसाल मंदिर पहुंचने की संभावना है। ऐसे में सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि मेले का आयोजन शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सके।

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निरीक्षण के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

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रथयात्रा महोत्सव के अंतिम दिन मत्स्य-कूर्म वेश में हुए महाप्रभु के दुर्लभ दर्शन

रथयात्रा महोत्सव के अंतिम दिन मत्स्य-कूर्म वेश में हुए महाप्रभु के दुर्लभ दर्शन

सरायकेला | ऐतिहासिक गुंडिचा मंदिर में आयोजित रथयात्रा महोत्सव के अंतिम दिन गुरुवार को श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर महाप्रभु श्री जगन्नाथ ने भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य का, जबकि उनके बड़े भाई श्री बलभद्र ने कूर्म (कच्छप) अवतार का दिव्य स्वरूप धारण किया।

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देवी सुभद्रा के साथ विराजमान इस दुर्लभ वेश के दर्शन के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। “जय जगन्नाथ” के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालुओं ने प्रभु के दुर्लभ दर्शन कर स्वयं को धन्य माना।

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सरायकेला की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की जीवंत पहचान भी है। महोत्सव के दौरान महाप्रभु के विभिन्न दुर्लभ वेशों का श्रृंगार किया जाता है, जिनमें अंतिम दिन का मत्स्य-कूर्म वेश विशेष महत्व रखता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस प्रकार का दिव्य स्वरूप सरायकेला की विशिष्ट परंपरा है और देश के अन्य रथयात्रा आयोजनों में ऐसा दर्शन देखने को नहीं मिलता।

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सनातन धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार उनका प्रथम अवतार माना जाता है। मान्यता है कि महाप्रलय के समय उन्होंने वेदों की रक्षा करते हुए राजा मनु और सप्तऋषियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया तथा नई सृष्टि की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। इसी कारण मत्स्य अवतार को ज्ञान, संरक्षण और नवसृजन का प्रतीक माना जाता है।

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रथयात्रा महोत्सव के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा परिवार और समाज की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा।

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रथ परब पर होयोहातु में भव्य छौ मेला, कलाकारों की प्रस्तुति ने मोहा मन

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चक्रधरपुर | चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत होयोहातु के प्राथमिक विद्यालय परिसर में रथ परब के शुभ अवसर पर भव्य छौ मेला एवं छौ नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक आयोजन में क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पारंपरिक छौ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत कर दिया।

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कार्यक्रम के दौरान छौ कलाकारों ने पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों के जीवंत अभिनय और प्रभावशाली नृत्य शैली ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर प्रस्तुति के बाद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। पूरा आयोजन सौहार्द, भाईचारे और सांस्कृतिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।

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क्षेत्रीय विधायक सुखराम उरांव की अनुपस्थिति में पीरू हेम्ब्रम मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। वहीं, विशिष्ट अतिथियों के रूप में चक्रधरपुर जिला परिषद भाग-3 की सदस्य मीना जोंको, बाईपी पंचायत की मुखिया सह झामुमो नेत्री पिंकी जोंको, झामुमो नेता प्रदीप महतो, पूर्व मुखिया निराकार केराई, पूर्व मुखिया सह झामुमो नेता जगन हासदा तथा दोड़ाय हासदा उपस्थित रहे।

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इस अवसर पर अतिथियों ने छौ नृत्य को झारखंड की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस लोककला को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की मांग है।

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अतिथियों ने आयोजन समिति और छौ कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन सामाजिक एकता, पारंपरिक विरासत के संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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विपद तारिणी पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न, सरायकेला रथ मेला बना आस्था और संस्कृति का केंद्र

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सरायकेला | सरायकेला स्थित गुंडिचा मंदिर परिसर में आयोजित विपद तारिणी पूजा मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर हजारों महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने मां विपद तारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की। मंदिर परिसर पूरे दिन भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा, जहां श्रद्धालुओं ने व्रत एवं पूजा-अनुष्ठान संपन्न किए।

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विपद तारिणी पूजा एवं श्री जगन्नाथ रथ मेला के सफल आयोजन में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, श्री जगन्नाथ मेला समिति, सेवायतगण, पुजारियों, स्वयंसेवकों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात एवं भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए, जिससे हजारों श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से दर्शन एवं पूजा का लाभ उठाया।

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श्री जगन्नाथ मेला समिति के अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला का ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथ मेला अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का विराट महोत्सव बन चुका है। उन्होंने कहा कि रांची के बाद सरायकेला का रथ मेला झारखंड के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। यहां की रथयात्रा एवं अधिकांश धार्मिक अनुष्ठान श्रीजगन्नाथ पुरी की परंपरा के अनुरूप संपन्न होते हैं, जो इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता है।

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उन्होंने बताया कि कोल्हान, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, श्रीबलभद्र एवं देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए सरायकेला पहुंच रहे हैं। महाप्रभु के दिव्य दर्शन तथा भव्य रथ मेला श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं से सराबोर यह ऐतिहासिक मेला क्षेत्रीय एकता, सामाजिक सौहार्द और सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक बनकर उभर रहा है।