सरायकेला । सरायकेला व्यवहार न्यायालय को वर्तमान स्थान से अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की प्रस्तावित प्रक्रिया के खिलाफ सरायकेला जिला बार एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया है। इस संबंध में अधिवक्ताओं ने केंद्रीय मंत्री संजय सेठ, खुंटी सांसद कालीचरण मुंडा, सिंहभूम सांसद जोबा माझी तथा खरसावां विधायक दशरथ गागराई को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
ज्ञापन में अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट कहा कि न्यायालय को वर्तमान स्थान से हटाने की प्रक्रिया मनमानी, अव्यावहारिक और जनभावनाओं के विपरीत है। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान न्यायालय परिसर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, इसके बावजूद स्थानांतरण की योजना बनाना न केवल समझ से परे है, बल्कि यह आम जनता और अधिवक्ताओं के हितों की अनदेखी भी है।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि न्यायालय को शहर से दूर स्थानांतरित किया गया, तो खासकर गरीब एवं ग्रामीण वादकारियों को न्याय तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इससे उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा और न्याय प्रक्रिया भी प्रभावित होगी, जो न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।
बार एसोसिएशन ने जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि प्रस्तावित शिफ्टिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए और वर्तमान स्थल पर ही एक आधुनिक एवं सुसज्जित न्यायालय भवन का निर्माण कराया जाए।
अधिवक्ताओं ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई, तो अधिवक्ता समुदाय लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा।
इस मौके पर जिला बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष केदार नाथ अग्रवाल, सहसचिव जलेश कवि, वरिष्ठ अधिवक्ता आशित कुमार सारंगी, निर्मल आचार्य, कोषाध्यक्ष लखविंदर नायक, अरविन्द तिवारी, कुणाल रथ, सुदीप सारंगी सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।

























