मनोहरपुर CHC में बंद अल्ट्रासाउंड मशीन और ऑक्सीजन प्लांट चालू कराने की कार्रवाई शुरू

मनोहरपुर CHC में बंद अल्ट्रासाउंड मशीन और ऑक्सीजन प्लांट चालू कराने की कार्रवाई शुरू

मनोहरपुर | सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मनोहरपुर में लंबे समय से बंद पड़े अल्ट्रासाउंड मशीन और ऑक्सीजन प्लांट को चालू कराने की दिशा में जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जिलाध्यक्ष सुशील बारला द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, मनोहरपुर को दोनों सुविधाओं को शुरू कराने के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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जानकारी के अनुसार, जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने 24 अगस्त 2026 को पत्रांक BAP/JHD-34/2026 के माध्यम से उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम को ज्ञापन सौंपकर मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति से अवगत कराया था। ज्ञापन में लंबे समय से बंद पड़े अल्ट्रासाउंड मशीन और ऑक्सीजन प्लांट को जल्द चालू कराने की मांग की गई थी।

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मामले पर संज्ञान लेते हुए असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (CS), पश्चिमी सिंहभूम ने ज्ञापांक 1447/चाईबासा के माध्यम से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, मनोहरपुर को निर्देश जारी किया है। विभागीय पत्र में बंद पड़े अल्ट्रासाउंड मशीन एवं ऑक्सीजन प्लांट को चालू कराने के लिए अविलंब आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्रवाई करने तथा इसकी अद्यतन रिपोर्ट कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है।

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इस संबंध में सुशील बारला ने कहा कि मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनोहरपुर, आनंदपुर और गुदड़ी जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्रों के हजारों ग्रामीणों एवं गरीब मरीजों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है। ऐसे में अस्पताल में उपलब्ध महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाओं का लंबे समय तक बंद रहना चिंता का विषय है।

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उन्होंने कहा कि अल्ट्रासाउंड मशीन और ऑक्सीजन प्लांट के बंद रहने के कारण मरीजों को जांच एवं उपचार के लिए जिला मुख्यालय चाईबासा अथवा निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इससे गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

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सुशील बारला ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि विभागीय निर्देश के अनुरूप दोनों सुविधाओं को जल्द से जल्द चालू कराया जाए, ताकि मनोहरपुर सहित आसपास के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

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विभागीय निर्देश जारी होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों एवं मरीजों में स्वास्थ्य सुविधाओं के बहाल होने की उम्मीद जगी है। अल्ट्रासाउंड मशीन और ऑक्सीजन प्लांट के नियमित संचालन से क्षेत्र के मरीजों को जांच एवं उपचार के लिए दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

पर्व-त्योहारों को लेकर चाईबासा के टुंगरी में विशेष सफाई अभियान, नगर परिषद ने स्वच्छता के प्रति किया जागरूक

पर्व-त्योहारों को लेकर चाईबासा के टुंगरी में विशेष सफाई अभियान, नगर परिषद ने स्वच्छता के प्रति किया जागरूक

चाईबासा  | आगामी पर्व-त्योहारों के मद्देनजर पश्चिमी सिंहभूम जिला उपायुक्त के मार्गदर्शन में चाईबासा नगर परिषद क्षेत्र के टुंगरी में शुक्रवार को विशेष सफाई अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान नगर परिषद की टीम ने क्षेत्र के प्रमुख मार्गों और आसपास के सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई करते हुए जमा कचरे का उठाव कर उसका उचित निस्तारण किया।

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विशेष सफाई अभियान का उद्देश्य पर्व-त्योहारों के दौरान शहर में स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना तथा लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। इस दौरान नगर परिषद के सफाई कर्मियों ने सड़क किनारे पड़े कूड़े-कचरे को हटाया। साथ ही अधिक आवागमन वाले स्थानों और ऐसे क्षेत्रों की भी विशेष रूप से सफाई की गई, जहां नियमित रूप से लोगों की आवाजाही रहती है।

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स्वच्छता केवल अभियान नहीं, सामूहिक जिम्मेदारी
नगर परिषद ने आम नागरिकों से शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि घरों और दुकानों से निकलने वाले कचरे को सड़क, नाली, खाली भूखंड अथवा सार्वजनिक स्थानों पर न फेंकें। कचरे को निर्धारित स्थान पर ही दें और गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखने की आदत विकसित करें।

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वर्ष 2026 के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण महत्वपूर्ण है। इसमें गीले, सूखे, स्वच्छता संबंधी तथा विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग-अलग रखने पर जोर दिया गया है।

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खुले में कचरा फेंकना स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा
नगर परिषद ने लोगों को आगाह किया है कि सड़क किनारे अथवा खुले स्थानों पर कचरा जमा होने से केवल शहर की सुंदरता प्रभावित नहीं होती, बल्कि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। खुले में पड़ा जैविक कचरा मक्खियों, मच्छरों और चूहों जैसे रोगवाहक जीवों के पनपने का माध्यम बन सकता है, जिससे विभिन्न संक्रामक एवं वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

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कचरा नालियों में जाने से जल निकासी बाधित होने और जलस्रोतों के प्रदूषित होने की आशंका रहती है। वहीं, प्लास्टिक एवं अन्य कचरे को खुले में जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। ठोस कचरे के अनुचित प्रबंधन से भूमि, जल और वायु की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ नागरिकों के स्वास्थ्य एवं जीवन-पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पर्व-त्योहारों के दौरान विशेष सावधानी की अपील
नगर परिषद ने पर्व-त्योहारों के दौरान पूजा-पंडालों, बाजारों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरा नहीं फैलाने की अपील की है। लोगों से पूजा सामग्री, प्लास्टिक, भोजन के अवशेष, कागज और अन्य अपशिष्ट को निर्धारित कूड़ेदान में ही डालने को कहा गया है।

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नगर परिषद की ओर से कहा गया कि शहर को स्वच्छ रखने के लिए सफाई कर्मी लगातार कार्य कर रहे हैं, लेकिन इन प्रयासों का स्थायी परिणाम तभी संभव है, जब आम नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी समझें, कचरा इधर-उधर न फैलाएं और निर्धारित व्यवस्था के तहत ही कचरे का निस्तारण करें।

दुर्गम क्षेत्रों में SSB का नागरिक कल्याण कार्यक्रम, 20 महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण और 16 टीमों की हॉकी प्रतियोगिता शुरू

दुर्गम क्षेत्रों में SSB का नागरिक कल्याण कार्यक्रम, 20 महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण और 16 टीमों की हॉकी प्रतियोगिता शुरू

कुचाई | सरायकेला-खरसावां जिले के अति दुर्गम क्षेत्रों में ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने, महिलाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल से प्रशिक्षित करने तथा युवाओं को खेल और सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 26वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB), रांची की ओर से नागरिक कल्याण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कुचाई प्रखंड अंतर्गत रोलाहातु पंचायत के ए-समवाय जोम्बरो में आयोजित हुआ।

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कार्यक्रम के दौरान सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही परमवीर चक्र विजेता शहीद अल्बर्ट एक्का की वीरता और बलिदान को समर्पित अंतर-ग्रामीण हॉकी प्रतियोगिता का उद्घाटन किया गया। वहीं, ‘सुरक्षा वीर निर्माण कार्यक्रम’ के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के बीच प्रमाण-पत्रों का वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम में सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त नितिश कुमार, विशेष अभियान क्षेत्रीय मुख्यालय गयाजी के उपमहानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी, संजीवनी सेवा समिति के सचिव, 26वीं वाहिनी SSB के अधिकारी एवं जवान, स्थानीय जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी, प्रशिक्षणार्थी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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दीप प्रज्वलन और SSB गीत से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, दीप प्रज्वलन और SSB गीत के साथ हुआ। इसके बाद 26वीं वाहिनी SSB के कमांडेंट शाश्वत कुमार, IPS ने स्वागत संबोधन दिया। उन्होंने सुरक्षा दायित्वों के निर्वहन के साथ नक्सल विरोधी अभियान, दुर्गम क्षेत्रों में नागरिक कल्याण, महिला कौशल विकास, खेलकूद और युवा सशक्तीकरण के लिए SSB द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की भूमिका केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। स्थानीय समुदाय के साथ समन्वय स्थापित कर जनकल्याण और विकास से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना भी सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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20 महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इसमें रोलाहातु पंचायत की 20 महिलाएं प्रतिभागी के रूप में शामिल हुईं। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई जैसे उपयोगी और रोजगारोन्मुखी कौशल से प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।
16 ग्रामीण टीमों के बीच हॉकी प्रतियोगिता शुरू
इस अवसर पर परमवीर चक्र विजेता शहीद अल्बर्ट एक्का की वीरता और बलिदान को समर्पित अंतर-ग्रामीण हॉकी प्रतियोगिता का उद्घाटन किया गया। प्रतियोगिता में कुल 16 ग्रामीण टीमें हिस्सा ले रही हैं।

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प्रतियोगिता का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं और खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है। खेलों के माध्यम से युवाओं में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रतियोगिता को लेकर स्थानीय खिलाड़ियों और ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा गया।
‘सुरक्षा वीर निर्माण’ प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र
कार्यक्रम में 26वीं वाहिनी SSB द्वारा संचालित ‘सुरक्षा वीर निर्माण कार्यक्रम’ के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण एवं स्थानीय युवाओं में अनुशासन, शारीरिक दक्षता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

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कार्यक्रम के माध्यम से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, पुलिस बलों और सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन तथा आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रमाण-पत्र वितरण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, नियमित अभ्यास करने तथा अनुशासन और परिश्रम के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
सुरक्षा बल और ग्रामीणों के बीच मजबूत हुआ समन्वय
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने 26वीं वाहिनी SSB द्वारा सुरक्षा दायित्वों के साथ-साथ नागरिक कल्याण, महिला कौशल विकास, खेलकूद और युवा सशक्तीकरण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल, जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय एवं सहयोग से दुर्गम क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण की गतिविधियों को और गति दी जा सकती है।

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इस अवसर पर ग्रामीणों, महिलाओं, खिलाड़ियों और युवाओं ने SSB द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए आभार जताया। कार्यक्रम के माध्यम से सुरक्षा बल और स्थानीय समुदाय के बीच आपसी विश्वास, सहयोग और बंधुत्व की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
26वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, रांची ने “सेवा, सुरक्षा और बंधुत्व” की भावना के अनुरूप स्थानीय समुदाय के साथ निरंतर संवाद और सहयोग बनाए रखते हुए नागरिक कल्याण, कौशल विकास, खेलकूद, युवा सशक्तीकरण और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम भविष्य में भी जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम बचाओ उलगुलान का ऐलान, 18 सितंबर को सरायकेला में निकलेगी एक दिवसीय रैली

वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम बचाओ उलगुलान का ऐलान, 18 सितंबर को सरायकेला में निकलेगी एक दिवसीय रैली

सरायकेला | सरायकेला स्थित सिद्धू-कान्हू पार्क में रविवार को श्री मान सिंह मुंडा की अध्यक्षता में आदिवासी-मूलवासी समाज एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में धरती आबा वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम में झारखंड आंदोलनकारी एवं पद्मभूषण दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर उत्पन्न विवाद पर विस्तार से चर्चा की गई।

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बैठक में उपस्थित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से “वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम बचाओ उलगुलान” के नाम से जनआंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया। आंदोलन के तहत आगामी 18 सितंबर 2026 को सरायकेला में एक दिवसीय रैली आयोजित की जाएगी। रैली के माध्यम से जिला प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखी जाएगी और सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा जाएगा। जिले के सभी प्रखंडों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनिधिमंडल का गठन भी किया गया है।

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बैठक में आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा के विरोध में नहीं है। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के सम्मानित नेता हैं और उनके सम्मान के प्रति किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है। विरोध केवल प्रतिमा स्थापना के लिए चुने गए स्थान को लेकर है।

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सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि धरती आबा वीर बिरसा मुंडा के नाम पर स्थापित स्टेडियम केवल एक खेल मैदान नहीं, बल्कि वीर बिरसा मुंडा की स्मृति, संघर्ष और आदिवासी अस्मिता से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। ऐसे में प्रतिमा स्थापित करने के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन किया जाना चाहिए।

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बैठक में सभी सामाजिक संगठनों, आदिवासी-मूलवासी समाज एवं आम नागरिकों से 18 सितंबर की रैली में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर “वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम बचाओ उलगुलान” को मजबूत करने का आह्वान किया गया।

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बैठक में एमपी सिंह सरदार, दिवाकर सरदार, विष्णु बनरा, झारखंड बोदरा, गणेश गागराई, सावन सोय, धनपति सरदार, संतोषी महतो, उषा सिंह मुंडा, साधु हो, जगदीश सरदार, रंजीत सरदार, विष्णु सरदार, कार्तिक सरदार, सावित्री कुदादा, डबुआ सोय, हरिचरण पाड़ेया, लखनदार पूर्ति, महेश मिंज, रामलाल हेंब्रम, सुखराम सोय, शिवा कुरली, लखन पूर्ति, सोनाराम सोरेन, राजकिशोर लोहार, राजेश मुंडरी, लक्ष्मण हेंब्रम, विवेकानंद हेंब्रम, मुकेश कुमार मुंडा, वाइरक टाटा, उपेंद्र सरदार, रामो सरदार, विमल सरदार, रामचंद्र मुंडा, मंगल भूमिज, गणेश, वीर सिंह सिजुई सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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बैठक में आदिवासी हो समाज, सरायकेला-खरसावां; आदिवासी भूमिज मुंडा समाज, सिनी; भूमिज समाज, कोल्हान; आदिवासी भूमिज मुंडा युवा संगठन, चांडिल; आदिवासी एकता मंच, कुचाई; आदिवासी हो समाज महासभा; आदिवासी युवा समन्वय समिति; राष्ट्रीय कोल सेना; मानकी-मुंडा संघ, 39 मौजा खुंटकटी; छात्र संगठन; हो समाज मरसल गुटी; अपना अधिकार संगठन; झारखंड आंदोलनकारी; आदिवासी मुंडा समाज, रांची सहित अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

पीएम आवास योजना की धीमी प्रगति पर सख्ती, 16 लाभुकों ने पहली किस्त मिलने के बाद भी शुरू नहीं किया निर्माण

पीएम आवास योजना की धीमी प्रगति पर सख्ती, 16 लाभुकों ने पहली किस्त मिलने के बाद भी शुरू नहीं किया निर्माण

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के कार्यों में तेजी लाने और योजनाओं की जमीनी स्थिति की समीक्षा के उद्देश्य से जिला समन्वयक पीएमएवाई-जी मौ. सरफराज ने टोंटो प्रखंड की कोंदवा पंचायत का सघन क्षेत्र भ्रमण एवं निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि योजना के तहत प्रथम किस्त की राशि प्राप्त होने के बावजूद 16 लाभुकों ने अब तक आवास निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया है। क्षेत्र भ्रमण के क्रम में जिला समन्वयक जब चिन्हित लाभुकों के घर पहुंचे तो अधिकांश आवासों में ताला बंद मिला। इस कारण संबंधित लाभुकों से प्रत्यक्ष रूप से बातचीत नहीं हो सकी। वहीं, मौके पर उपस्थित अन्य लाभुकों से संवाद कर आवास निर्माण में आ रही व्यावहारिक समस्याओं की जानकारी ली गई।

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जिला समन्वयक ने मौके पर मौजूद पंचायत सचिव विपिन कुम्हार और प्रखंड समन्वयक जीत सिंह जोजो को निर्देश दिया कि लाभुकों की समस्याओं का समाधान करते हुए उन्हें आवास निर्माण के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजना के तहत राशि प्राप्त होने के बाद आवास निर्माण में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

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निरीक्षण के दौरान ऐसे लाभुकों को भी शीघ्र आवास निर्माण पूरा करने की कड़ी हिदायत दी गई, जिन्होंने द्वितीय किस्त की राशि प्राप्त करने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा छोड़ रखा है।
इसके अलावा जिला समन्वयक ने स्थानीय मुखिया एवं मुंडा से मुलाकात कर योजना के सफल क्रियान्वयन में सहयोग की अपील की। उन्होंने प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि अगले एक-दो दिनों के भीतर विशेष ग्राम सभा का आयोजन कर चिन्हित लाभुकों को आवास निर्माण के लिए प्रेरित किया जाए।

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जिला समन्वयक ने कहा कि समय पर आवास निर्माण पूरा होने से न केवल संबंधित परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध होगा, बल्कि गांव और समाज के विकास को भी गति मिलेगी। साथ ही, योजना के तहत वर्तमान आवासों के समय पर पूर्ण होने से भविष्य में गांव के अन्य जरूरतमंद ग्रामीणों के लिए नए आवास स्वीकृत कराने में भी सुविधा होगी।

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विधायक सोनाराम सिंकु की अनुशंसा पर तीन महत्वपूर्ण जर्जर सड़कों का सर्वे

विधायक सोनाराम सिंकु की अनुशंसा पर तीन महत्वपूर्ण जर्जर सड़कों का सर्वे

जगन्नाथपुर | जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सह पश्चिमी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं झारखंड सरकार के उपमुख्य सचेतक सोनाराम सिंकु की अनुशंसा पर विधानसभा क्षेत्र की तीन महत्वपूर्ण जर्जर सड़कों के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण की दिशा में पहल तेज हो गई है। शुक्रवार को पथ निर्माण विभाग की टीम ने नोवामुंडी एवं जगन्नाथपुर प्रखंड क्षेत्र की इन सड़कों का स्थल निरीक्षण कर सर्वे किया।

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सर्वे के दौरान पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार चौधरी, एसडीओ सुनील कुमार श्रीवास्तव, कनीय अभियंता मोनू कुमार पांडेय एवं सर्वेयर प्रिंस पटेल मौजूद रहे।
नोवामुंडी प्रखंड क्षेत्र में जेटेया मोड़ से जेटेया बाजार चौक तथा जेटेया बाजार चौक से कोठगढ़ बस स्टैंड चौक तक करीब 20 किलोमीटर लंबी जर्जर सड़क का सर्वे किया गया। इस सड़क से करीब 40 से 50 गांव जुड़े हुए हैं और लगभग 50 से 60 हजार लोगों के आवागमन के लिए यह महत्वपूर्ण मार्ग है। सड़क की स्थिति लंबे समय से जर्जर होने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

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वहीं, जगन्नाथपुर प्रखंड के जगन्नाथपुर-जैतगढ़ मुख्य सड़क से ग्राम जिन्तुगाड़ा के टोला बुरूसाई होते हुए तोंडागहातु स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्य सड़क तक सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए भी स्थल सर्वे किया गया। इस मार्ग के निर्माण से क्षेत्र के ग्रामीणों को प्रखंड एवं अनुमंडल मुख्यालय के साथ-साथ मालुका रेलवे स्टेशन और पीडब्ल्यूडी मुख्य सड़क तक बेहतर संपर्क सुविधा मिलने की उम्मीद है।

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बताया गया कि ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए विधायक सोनाराम सिंकु ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र की इन महत्वपूर्ण सड़कों के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण की मांग की थी। इसके बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए पथ निर्माण विभाग की टीम ने स्थल निरीक्षण एवं सर्वे का कार्य पूरा किया है।

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विधायक सोनाराम सिंकु ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में नोवामुंडी एवं जगन्नाथपुर प्रखंड की निम्नलिखित सड़कों के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण की मांग की थी—
नोवामुंडी प्रखंड: हाटगम्हरिया-नोवामुंडी एनएच-320 मुख्य सड़क के जेटेया मोड़ से जेटेया बाजार चौक तक सड़क निर्माण।
नोवामुंडी प्रखंड: एनएच-320 स्थित कोठगढ़ बस स्टैंड चौक से जेटेया बाजार चौक तक सड़क निर्माण।
जगन्नाथपुर प्रखंड: ग्राम जिन्तुगाड़ा के टोला बुरूसाई से ग्राम तोंडागहातु स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्य सड़क तक सड़क का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण।

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विधायक की ओर से मुख्यमंत्री को दिए गए पत्र में कहा गया था कि उक्त सड़कें कई गांवों को जोड़ती हैं और ग्रामीणों के लिए लाइफलाइन के रूप में काम करती हैं। इन मार्गों से एनएच-320, प्रखंड एवं अनुमंडल मुख्यालय, मालुका रेलवे स्टेशन सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक संपर्क स्थापित होता है। सड़कों की जर्जर स्थिति के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है।

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इधर, तीनों सड़कों के सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद क्षेत्र के लोगों में सड़क निर्माण को लेकर उम्मीद जगी है। पथ निर्माण विभाग द्वारा सर्वे के आधार पर नया डीपीआर (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) तैयार कर विभाग को सौंपे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। सड़क का निर्माण होने से ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलने के साथ ही स्थानीय बाजार, व्यापार, शिक्षा और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

टीएसयूआईएसएल में ट्रेड अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित, 22 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन

टीएसयूआईएसएल में ट्रेड अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित, 22 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन

जमशेदपुर | टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज लिमिटेड (टीएसयूआईएसएल) में ट्रेड अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग 2026 के लिए पात्र अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। कंपनी प्रबंधन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार इच्छुक अभ्यर्थी 22 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। चयनित अभ्यर्थियों को एसएनटीआई में दो वर्ष का अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

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टाटा स्टील से जुड़े परिवारों के लिए अवसर
अधिसूचना के अनुसार वर्तमान या पूर्व कर्मचारियों के बेटा-बेटी इस अप्रेंटिसशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं, बेटा नहीं होने की स्थिति में निर्धारित शर्तों के तहत कर्मचारी के दामाद अथवा पति-पत्नी को भी आवेदन का अवसर दिया गया है। प्रायोजक कर्मचारी की सेवा अवधि को लेकर भी कंपनी की ओर से पात्रता की शर्तें निर्धारित की गई हैं।

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मैट्रिक में अंग्रेजी, विज्ञान और गणित में उत्तीर्ण होना अनिवार्य
अभ्यर्थी का मैट्रिक या समकक्ष परीक्षा अंग्रेजी, विज्ञान और गणित विषयों के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इन तीनों विषयों में उत्तीर्ण अंक प्राप्त करना भी जरूरी है। कर्मचारी वार्ड के लिए अभ्यर्थी की जन्मतिथि 1 सितंबर 2004 से 1 सितंबर 2008 के बीच होनी चाहिए। वहीं, एससी-एसटी कर्मचारी वार्ड के लिए जन्मतिथि 1 सितंबर 2002 से 1 सितंबर 2008 के बीच निर्धारित की गई है।

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दो वर्ष का प्रशिक्षण, स्टाइपेंड भी मिलेगा
चयनित अभ्यर्थियों को एसएनटीआई में दो वर्ष का अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि के दौरान अभ्यर्थियों को स्टाइपेंड भी मिलेगा। ट्रेड एवं प्रशिक्षण अवधि का आवंटन इंटरव्यू में प्रदर्शन और मैट्रिक में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा।

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आंखों की रोशनी और कलर विजन की शर्त
अप्रेंटिसशिप के लिए अभ्यर्थी की दोनों आंखों की दृष्टि चश्मे के साथ 6/6 होनी चाहिए। चश्मे का पावर अधिकतम ±4.0 तक मान्य होगा। इसके अलावा अभ्यर्थी का कलर विजन सामान्य होना भी अनिवार्य है।

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अप्रेंटिसशिप के बाद नौकरी की गारंटी नहीं
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण का अर्थ रोजगार की गारंटी नहीं है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने और ऑल इंडिया ट्रेड टेस्ट (एआईटीटी) उत्तीर्ण कर नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद कंपनी में आवश्यकता होने पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है।

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ऐसे में पात्र अभ्यर्थियों के लिए 22 सितंबर 2026 आवेदन की अंतिम तिथि है। इच्छुक उम्मीदवार कंपनी की ओर से जारी अधिसूचना में दी गई पात्रता, जन्मतिथि, शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य निर्धारित शर्तों की जांच कर समय सीमा के भीतर आवेदन करें।

खरसावां में 73 किसानों को वैज्ञानिक तसर उत्पादन का प्रशिक्षण

खरसावां में 73 किसानों को वैज्ञानिक तसर उत्पादन का प्रशिक्षण

खरसावां | खरसावां पथ निरीक्षण भवन परिसर स्थित केंद्रीय रेशम बोर्ड के बुनियादी बीज संवर्धन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CSB-BSMTC) के पायलट प्रोजेक्ट सेंटर (PPC), खरसावां में राष्ट्रीय अभियान “मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0” के तहत रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान अंतर्गत जागरूकता सह किसान संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में खरसावां क्षेत्र के 73 रेशम किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों को वैज्ञानिक तरीके से तसर कीटपालन करने और उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई।

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कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित वैज्ञानिक तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुंचाना, तसर कोकून की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि करना तथा रेशम किसानों की आजीविका को मजबूत बनाना रहा। विशेषज्ञों ने किसानों को तसर कीटपालन, बीज उत्पादन, स्वच्छता, रोग नियंत्रण तथा कोकून के बेहतर विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।

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कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बीटीएसएसओ, बिलासपुर की निदेशक डॉ. जी. पुनितावती ने झारखंड में तसर रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि की रणनीति पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि सहायक उद्योग निदेशक (रेशम), चाईबासा रविशंकर प्रसाद ने किसानों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, प्रशासनिक प्राथमिकताओं तथा उपलब्ध वित्तीय सहायता की जानकारी दी।

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पीपीओ, हाटगमहरिया प्रदीप कुमार महतो ने वैज्ञानिक तरीके से तसर कीटपालन और उत्पादन बढ़ाने के उपाय बताए। पीपीओ, खरसावां नितिश कुमार ने किसान स्तर पर ग्रेनेज (बीज उत्पादन) प्रबंधन के महत्व को समझाया। वैज्ञानिक-बी प्रदीप गुलाबराव डुकरे ने कीटपालन क्षेत्र में स्वच्छता और नियमित कीटाणुशोधन को बेहद जरूरी बताते हुए रोग नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। वहीं रॉ मटेरियल बैंक के सहायक सचिव राममोहन प्रमाणिक ने कोकून के विपणन, मूल्य निर्धारण तथा किसानों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी साझा की।

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माइक्रोस्कोप से पेब्रिन रोग की पहचान का प्रशिक्षण
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण किसानों के लिए आयोजित हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण रहा। वैज्ञानिक-बी प्रदीप गुलाबराव डुकरे ने माइक्रोस्कोप के माध्यम से पेब्रिन रोग की पहचान करने की प्रक्रिया किसानों को प्रत्यक्ष रूप से समझाई। इस दौरान किसानों को रोग की समय पर पहचान, नियंत्रण तथा रोगमुक्त बीज के उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया।

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कार्यक्रम के समापन से पहले आयोजित किसान संवाद में किसानों ने तसर उत्पादन से जुड़ी अपनी क्षेत्रीय समस्याएं और सवाल विशेषज्ञों के समक्ष रखे। अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं का समाधान बताते हुए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने और आधुनिक पद्धतियों के माध्यम से तसर उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।

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अंत में रेशम कीटपालन के दौरान धूप और बारिश से बचाव के लिए किसानों के बीच छतरियों का वितरण किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक तसर उत्पादन की तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी आय और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।

पश्चिमी सिंहभूम के स्थानीय उत्पादों को मिलेगा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार, निर्यात बढ़ाने पर जोर

पश्चिमी सिंहभूम के स्थानीय उत्पादों को मिलेगा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार, निर्यात बढ़ाने पर जोर

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति (DLEPC) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, कृषि एवं वन आधारित उत्पादों तथा स्थानीय उत्पादों को मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

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बैठक में महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र द्वारा जिले में निर्यात प्रोत्साहन के लिए हेवी इंजीनियरिंग उत्पादों के चयन से संबंधित जानकारी दी गई। चर्चा के दौरान बताया गया कि पश्चिमी सिंहभूम खनिज संपदा से समृद्ध जिला है, जहां विशेष रूप से लौह अयस्क एवं चूना पत्थर की पर्याप्त उपलब्धता है। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण, सिल्क तथा अन्य स्थानीय उत्पादों को निर्यात के लिए प्रोत्साहित कर जिले की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी जा सकती है।

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लघु वन उत्पादों के संग्रहण और प्रसंस्करण पर जोर
बैठक में चैंबर प्रतिनिधियों ने जिले में उपलब्ध लघु वन उत्पादों, जैसे नीम, बेर, जामुन एवं विभिन्न जंगली फलों की प्रचुर उपलब्धता की जानकारी दी। इन उत्पादों के व्यवस्थित संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित कर इन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के प्रतिनिधि श्री देव कुमार ने बताया कि जिले के लिए जिला निर्यात कार्ययोजना पूर्व में तैयार की जा चुकी है। बैठक में सहायक निदेशक, डीजीएफटी द्वारा निर्धारित प्रारूप के अनुरूप कार्ययोजना में आवश्यक सुधार कर इसे पुनः समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया, जिस पर समिति के सदस्यों ने सहमति जताई।

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स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम में प्राकृतिक एवं स्थानीय संसाधनों की व्यापक उपलब्धता है। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय उत्पादों की पहचान कर उनका मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग और बेहतर बाजार संपर्क सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय उत्पादकों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों एवं उद्यमियों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए जिले की निर्यात क्षमता को विकसित करने तथा स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल करने का निर्देश दिया।

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20 मिनी कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की पहल
बैठक में उपायुक्त ने जिले में कृषि एवं बागवानी उत्पादों के संरक्षण और भंडारण की बेहतर व्यवस्था के लिए 20 मिनी कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की दिशा में पहल करने का निर्देश दिया। इसके माध्यम से किसानों को अपने उत्पादों के सुरक्षित भंडारण के साथ उचित बाजार और बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा जिले में निर्यात की संभावनाओं को देखते हुए मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन को भी प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने आगामी बैठक से पूर्व एपीडा के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर खाद्य प्रसंस्करण एवं कृषि आधारित उत्पादों को निर्यात के लिए प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श करने को कहा।

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जेएसएलपीएस सहित विभिन्न विभागों के समन्वय से बनेगी रणनीति
उपायुक्त ने आगामी जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति की बैठकों में झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन समिति (JSLPS) को शामिल करने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीण आजीविका गतिविधियों से जुड़े उत्पादों को भी निर्यात की संभावनाओं से जोड़ना है।
उन्होंने अंतर-विभागीय बैठकें आयोजित कर जिले की निर्यात क्षमता विकसित करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया। बैठक में ‘एक जिला, एक उत्पाद’ के तहत चिरौंजी, महुआ, जामुन, केला, शरीफा, ड्रैगन फ्रूट एवं आम जैसे उत्पादों को शामिल करने की दिशा में आवश्यक पहल करने का निर्देश दिया गया।

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उपायुक्त ने कहा कि स्थानीय संसाधनों और उत्पादों को बाजार से जोड़कर न केवल जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है, बल्कि किसानों, उत्पादकों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों की आय बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।
बैठक में संबंधित विभागों के पदाधिकारी, डीजीएफटी के प्रतिनिधि, चैंबर प्रतिनिधि सहित जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

जर्जर विद्यालय भवनों के सुरक्षित निस्तारण को लेकर कार्यशाला, बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता: उपायुक्त

जर्जर विद्यालय भवनों के सुरक्षित निस्तारण को लेकर कार्यशाला, बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता: उपायुक्त

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में विद्यालयों के जर्जर भवनों के सुरक्षित एवं नियमानुसार निस्तारण को लेकर टाटा कॉलेज, चाईबासा स्थित बहुउद्देशीय सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता उपायुक्त मनीष कुमार ने की। इस अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार सहित जिले के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं सक्रिय सदस्य उपस्थित रहे।

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कार्यशाला में विद्यालयों से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर जिले के 254 विद्यालयों में जर्जर भवनों की पहचान किए जाने की जानकारी दी गई। संबंधित विद्यालयों में जर्जर भवनों की वर्तमान स्थिति, उनके सुरक्षित निस्तारण तथा इसके लिए अपनाई जाने वाली आवश्यक प्रक्रिया के संबंध में प्रधानाध्यापकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।

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इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जर्जर भवनों को चिह्नित कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।

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उन्होंने कहा कि जर्जर भवनों को तोड़ने के बाद निकलने वाली सामग्री एवं अपशिष्ट के नियमानुसार निस्तारण से प्राप्त राशि का उपयोग विद्यालय की आवश्यकता के अनुरूप निर्माण कार्य एवं आधारभूत सुविधाओं के विकास में किया जा सकता है। उन्होंने सभी विद्यालय प्रबंधन समितियों को इस प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरतते हुए पारदर्शिता एवं नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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उपायुक्त ने कहा कि “शिक्षा केवल मनुष्य के वर्तमान को नहीं, बल्कि उसके भविष्य को भी संवारती है।” जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि पश्चिमी सिंहभूम जिले के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो, ताकि वे सशक्त बनकर जीवन में आगे बढ़ सकें। उन्होंने प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों से विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।

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उन्होंने कहा कि जिले के विद्यार्थियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि उन्हें उचित मार्गदर्शन, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और निरंतर प्रोत्साहन मिले। उपायुक्त ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं में पश्चिमी सिंहभूम के विद्यार्थियों से उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त करने की अपेक्षा जताई। इसके लिए विद्यालय स्तर पर नियमित अनुश्रवण, कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान और परीक्षा की बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

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कार्यशाला के अंत में उपस्थित पदाधिकारियों, प्रधानाध्यापकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों ने नशामुक्ति की शपथ ली। उपायुक्त ने सभी से अपील की कि वे अपने आसपास किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ के उत्पादन, बिक्री अथवा सेवन को बढ़ावा न मिलने दें। उन्होंने कहा कि बच्चों एवं युवाओं को नशे की गिरफ्त से दूर रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यालय इस दिशा में जागरूकता का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।