चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति (DLEPC) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, कृषि एवं वन आधारित उत्पादों तथा स्थानीय उत्पादों को मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र द्वारा जिले में निर्यात प्रोत्साहन के लिए हेवी इंजीनियरिंग उत्पादों के चयन से संबंधित जानकारी दी गई। चर्चा के दौरान बताया गया कि पश्चिमी सिंहभूम खनिज संपदा से समृद्ध जिला है, जहां विशेष रूप से लौह अयस्क एवं चूना पत्थर की पर्याप्त उपलब्धता है। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण, सिल्क तथा अन्य स्थानीय उत्पादों को निर्यात के लिए प्रोत्साहित कर जिले की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी जा सकती है।

लघु वन उत्पादों के संग्रहण और प्रसंस्करण पर जोर
बैठक में चैंबर प्रतिनिधियों ने जिले में उपलब्ध लघु वन उत्पादों, जैसे नीम, बेर, जामुन एवं विभिन्न जंगली फलों की प्रचुर उपलब्धता की जानकारी दी। इन उत्पादों के व्यवस्थित संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित कर इन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के प्रतिनिधि श्री देव कुमार ने बताया कि जिले के लिए जिला निर्यात कार्ययोजना पूर्व में तैयार की जा चुकी है। बैठक में सहायक निदेशक, डीजीएफटी द्वारा निर्धारित प्रारूप के अनुरूप कार्ययोजना में आवश्यक सुधार कर इसे पुनः समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया, जिस पर समिति के सदस्यों ने सहमति जताई।

स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम में प्राकृतिक एवं स्थानीय संसाधनों की व्यापक उपलब्धता है। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय उत्पादों की पहचान कर उनका मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग और बेहतर बाजार संपर्क सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय उत्पादकों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों एवं उद्यमियों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए जिले की निर्यात क्षमता को विकसित करने तथा स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल करने का निर्देश दिया।

20 मिनी कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की पहल
बैठक में उपायुक्त ने जिले में कृषि एवं बागवानी उत्पादों के संरक्षण और भंडारण की बेहतर व्यवस्था के लिए 20 मिनी कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की दिशा में पहल करने का निर्देश दिया। इसके माध्यम से किसानों को अपने उत्पादों के सुरक्षित भंडारण के साथ उचित बाजार और बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा जिले में निर्यात की संभावनाओं को देखते हुए मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन को भी प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने आगामी बैठक से पूर्व एपीडा के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर खाद्य प्रसंस्करण एवं कृषि आधारित उत्पादों को निर्यात के लिए प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श करने को कहा।

जेएसएलपीएस सहित विभिन्न विभागों के समन्वय से बनेगी रणनीति
उपायुक्त ने आगामी जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति की बैठकों में झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन समिति (JSLPS) को शामिल करने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीण आजीविका गतिविधियों से जुड़े उत्पादों को भी निर्यात की संभावनाओं से जोड़ना है।
उन्होंने अंतर-विभागीय बैठकें आयोजित कर जिले की निर्यात क्षमता विकसित करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया। बैठक में ‘एक जिला, एक उत्पाद’ के तहत चिरौंजी, महुआ, जामुन, केला, शरीफा, ड्रैगन फ्रूट एवं आम जैसे उत्पादों को शामिल करने की दिशा में आवश्यक पहल करने का निर्देश दिया गया।

उपायुक्त ने कहा कि स्थानीय संसाधनों और उत्पादों को बाजार से जोड़कर न केवल जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है, बल्कि किसानों, उत्पादकों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों की आय बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।
बैठक में संबंधित विभागों के पदाधिकारी, डीजीएफटी के प्रतिनिधि, चैंबर प्रतिनिधि सहित जिला स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

