चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में विद्यालयों के जर्जर भवनों के सुरक्षित एवं नियमानुसार निस्तारण को लेकर टाटा कॉलेज, चाईबासा स्थित बहुउद्देशीय सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता उपायुक्त मनीष कुमार ने की। इस अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार सहित जिले के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं सक्रिय सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यशाला में विद्यालयों से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर जिले के 254 विद्यालयों में जर्जर भवनों की पहचान किए जाने की जानकारी दी गई। संबंधित विद्यालयों में जर्जर भवनों की वर्तमान स्थिति, उनके सुरक्षित निस्तारण तथा इसके लिए अपनाई जाने वाली आवश्यक प्रक्रिया के संबंध में प्रधानाध्यापकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।

इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जर्जर भवनों को चिह्नित कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।

उन्होंने कहा कि जर्जर भवनों को तोड़ने के बाद निकलने वाली सामग्री एवं अपशिष्ट के नियमानुसार निस्तारण से प्राप्त राशि का उपयोग विद्यालय की आवश्यकता के अनुरूप निर्माण कार्य एवं आधारभूत सुविधाओं के विकास में किया जा सकता है। उन्होंने सभी विद्यालय प्रबंधन समितियों को इस प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरतते हुए पारदर्शिता एवं नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उपायुक्त ने कहा कि “शिक्षा केवल मनुष्य के वर्तमान को नहीं, बल्कि उसके भविष्य को भी संवारती है।” जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि पश्चिमी सिंहभूम जिले के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो, ताकि वे सशक्त बनकर जीवन में आगे बढ़ सकें। उन्होंने प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों से विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जिले के विद्यार्थियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि उन्हें उचित मार्गदर्शन, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और निरंतर प्रोत्साहन मिले। उपायुक्त ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं में पश्चिमी सिंहभूम के विद्यार्थियों से उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त करने की अपेक्षा जताई। इसके लिए विद्यालय स्तर पर नियमित अनुश्रवण, कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान और परीक्षा की बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला के अंत में उपस्थित पदाधिकारियों, प्रधानाध्यापकों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों ने नशामुक्ति की शपथ ली। उपायुक्त ने सभी से अपील की कि वे अपने आसपास किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ के उत्पादन, बिक्री अथवा सेवन को बढ़ावा न मिलने दें। उन्होंने कहा कि बच्चों एवं युवाओं को नशे की गिरफ्त से दूर रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यालय इस दिशा में जागरूकता का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

