चाईबासा | एमएमडीआर संशोधन को लेकर झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी के बयान पर भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष चंद्रमोहन तिउ ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि झामुमो को एमएमडीआर संशोधन पर राजनीति करने से पहले पश्चिमी सिंहभूम की जनता और आदिवासी समाज को अपने आठ वर्षों के शासन का हिसाब देना चाहिए।
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चंद्रमोहन तिउ ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम की खदानों से पिछले वर्षों में रॉयल्टी, डीएमएफटी, जीएसटी, वैट और उत्पाद शुल्क समेत विभिन्न मदों में राज्य सरकार को करोड़ों-अरबों रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसके बावजूद जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कई गांवों में लोग लाल पानी पीने को मजबूर हैं। वहीं, कुपोषण, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं।
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उन्होंने झामुमो से सवाल किया कि पश्चिमी सिंहभूम की सभी अनुसूचित जनजाति आरक्षित विधानसभा सीटों से चुने गए विधायक और लोकसभा की आरक्षित सीट से निर्वाचित सांसद यदि सत्ताधारी गठबंधन के साथ हैं, तो आदिवासी समाज को उसका हक क्यों नहीं मिला? आठ वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद आदिवासियों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है?
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तिउ ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल आंदोलन करने के लिए छोड़ देना विकास नहीं है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वनभूमि अधिकार, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, विस्थापन और खनन से होने वाले लाभ में स्थानीय लोगों की वास्तविक भागीदारी कब सुनिश्चित की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि बालू और लघु खनिजों से भी सरकार को राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन पश्चिमी सिंहभूम की धरती पर उसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं देता। जिस जिले की खनिज संपदा राज्य के खजाने को भरती है, उसी जिले के लोग आज भी अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं।
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भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष ने झामुमो प्रवक्ता से कहा, “एमएमडीआर संशोधन को लेकर जनता को भ्रमित करने के बजाय झामुमो यह स्पष्ट करे कि आठ वर्षों में पश्चिमी सिंहभूम के आदिवासियों को उनका वास्तविक हक क्यों नहीं मिला और वह हक आखिर कब मिलेगा? सत्ता आपके पास है, सांसद-विधायक आपके साथ हैं, फिर भी आदिवासी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर क्यों हैं?”
सरायकेला | उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा ने शनिवार को गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों की सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था तथा अस्पताल की आधारभूत संरचना का जायजा लिया।
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निरीक्षण के क्रम में उप विकास आयुक्त ने महिला एवं पुरुष वार्ड, भंडार कक्ष, शल्य चिकित्सा कक्ष, प्रयोगशाला तथा निर्माणाधीन डायलिसिस केंद्र का निरीक्षण किया। महिला वार्ड में भर्ती गर्भवती महिलाओं से बातचीत कर उन्होंने उपचार, दवाओं और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को मरीजों को निर्धारित समय पर गुणवत्तापूर्ण भोजन, आवश्यक दवाएं और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
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निर्माणाधीन डायलिसिस केंद्र का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा पाया गया। उप विकास आयुक्त ने शेष निर्माण कार्य को एक सप्ताह के भीतर पूरा कर केंद्र को जल्द से जल्द चालू कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डायलिसिस केंद्र के शुरू होने से मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही आवश्यक उपचार की सुविधा मिल सकेगी।
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उन्होंने चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को निर्धारित ड्यूटी के अनुसार समय पर उपस्थित रहने तथा मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग की भवन मरम्मत एवं जीर्णोद्धार से संबंधित सूची के आधार पर विभिन्न स्थलों का भी जायजा लिया गया। चिह्नित कमियों के लिए आवश्यक प्राक्कलन तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य कराने का निर्देश दिया गया।
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इस अवसर पर प्रभारी जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. सुजीत मुर्मू सहित गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में शनिवार को उपायुक्त की अध्यक्षता में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में कोल्हान विश्वविद्यालय से पीएचडी, नेट एवं जेआरएफ की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कुल 36 अभ्यर्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। इनमें 8 जेआरएफ, 17 नेट क्वालिफाई तथा 11 पीएचडी डिग्री धारक अभ्यर्थी शामिल रहे। इस दौरान सभी सफल अभ्यर्थियों को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, डायरी एवं कलम प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अभ्यर्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
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समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में युवाओं की सफलता पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। शिक्षा केवल व्यक्तिगत उन्नति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और क्षेत्र के समग्र विकास का सशक्त आधार है। उन्होंने अभ्यर्थियों से अपनी ज्ञान एवं शोध क्षमता का उपयोग समाजहित में करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक योगदान देने का आह्वान किया।
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उपायुक्त ने कहा कि सम्मानित अभ्यर्थियों की उपलब्धियां जिले के अन्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति प्रेरित करेंगी। उन्होंने सफल अभ्यर्थियों से अपने अनुभव अन्य विद्यार्थियों के साथ साझा करने और शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करने में सहयोग करने की अपील की।
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मौके पर उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने भी सभी सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम, निरंतर अध्ययन और दृढ़ संकल्प के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। पीएचडी, नेट एवं जेआरएफ जैसी प्रतिष्ठित शैक्षणिक उपलब्धियां अभ्यर्थियों के ज्ञान, समर्पण और निरंतर प्रयास का परिणाम हैं।
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उन्होंने सभी अभ्यर्थियों से भविष्य में भी इसी उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ते हुए जिले एवं राज्य का नाम रोशन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में युवाओं की बढ़ती भागीदारी समाज के लिए सकारात्मक संकेत है। ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को शिक्षा के प्रसार और नई पीढ़ी को मार्गदर्शन देने के लिए भी आगे आना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकें।
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कार्यक्रम में सहायक समाहर्ता सुश्री ईरा जोरवाल, स्थापना उपसमाहर्ता कुमार हर्ष, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार, कोल्हान विश्वविद्यालय से डॉ. मीनाक्षी मुंडा, डॉ. सुनीता कुमारी एवं श्री कंचन कच्छप सहित पीएचडी, नेट एवं जेआरएफ उत्तीर्ण अभ्यर्थी उपस्थित रहे।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के सीएम उत्कृष्ट प्लस टू जिला हाई स्कूल के सभागार में शिक्षक दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार शामिल हुए। इस अवसर पर सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों के पारंपरिक रीति-रिवाज से आत्मीय स्वागत के साथ हुई। इसके बाद उपायुक्त मनीष कुमार एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। छात्र-छात्राओं ने गीत, संगीत एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षक दिवस के महत्व और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।
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समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि शिक्षक केवल वह व्यक्ति नहीं है, जो विद्यालय में हमें पाठ पढ़ाता है, बल्कि जीवन में जिस किसी व्यक्ति से हमें सीख, अनुभव, मार्गदर्शन या प्रेरणा मिलती है, वह भी किसी न किसी रूप में हमारे लिए शिक्षक के समान है। उन्होंने कहा कि जीवन निरंतर सीखने की प्रक्रिया है और प्रत्येक अनुभव हमें कुछ नया सिखाता है।
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उपायुक्त ने कहा कि शिक्षक समाज का ऐसा महत्वपूर्ण वर्ग है, जो निरंतर ज्ञान, संस्कार, मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करता है। शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को निखारने के साथ-साथ उनमें भविष्य के प्रति विश्वास और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं। वे अपने ज्ञान और अनुभव को समाज के साथ साझा करते हैं और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए समाज का दायित्व है कि वह शिक्षकों के योगदान को समझे और उन्हें उचित सम्मान प्रदान करे।
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उन्होंने कहा कि आज हम सभी जिस मुकाम पर हैं, उसमें हमारे माता-पिता, गुरुजनों और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उन सभी गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने हमारे जीवन को दिशा दी है। इस अवसर पर उपायुक्त ने भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन का जीवन शिक्षा, ज्ञान और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, विचार और व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त आधार माना।
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उपायुक्त ने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे अपने शिक्षकों से प्राप्त ज्ञान और मार्गदर्शन का सदुपयोग करें। जीवन में सफलता केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक अच्छा, जिम्मेदार और संवेदनशील इंसान बनना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने, निरंतर सीखने, अनुशासन एवं संस्कार को जीवन का हिस्सा बनाने तथा अपने शिक्षकों का सदैव सम्मान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव केवल विद्यार्थी के जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके माध्यम से पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। इसलिए शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव हैं।
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कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके समर्पण, धैर्य एवं निरंतर प्रयासों का सम्मान किया जाना चाहिए। समारोह में छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अतिथियों एवं शिक्षकों ने सराहना की। कार्यक्रम का समापन शिक्षक समुदाय के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने प्रशासनिक एवं विकासात्मक कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उपायुक्त की अध्यक्षता में शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के विभिन्न प्रशासनिक एवं विकासात्मक कार्यों की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, अपर उपायुक्त किस्टो कुमार बेसरा सहित जिले के सभी अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी शामिल हुए।
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बैठक की शुरुआत जिले के विभिन्न अंचलों में रिक्त मानकी एवं मुंडा पदों पर नियुक्ति से संबंधित कार्रवाई की समीक्षा से हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिन अंचलों से अब तक मानकी-मुंडा नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव आवश्यक दस्तावेजों के साथ कोल्हान अधीक्षक कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराया गया है, वहां प्रस्ताव शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में अब तक ग्राम सभा आयोजित नहीं हुई है, वहां नियमानुसार जल्द से जल्द ग्राम सभा आयोजित कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाए। साथ ही नियुक्ति से संबंधित सभी वांछित दस्तावेज एवं प्रतिवेदन समय पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।
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बैठक में मानकी एवं मुंडा के मानदेय भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने पात्र मानकी-मुंडा के लंबित मानदेय का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया। आपदा पीड़ितों को शीघ्र मिले राहत एवं मुआवजा उपायुक्त ने जिला अंतर्गत आपदा प्रबंधन से जुड़े मामलों की भी अंचलवार समीक्षा की। हाल के दिनों में अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त मकानों, वज्रपात से हुई पशु क्षति सहित अन्य आपदा संबंधी मामलों की जानकारी ली गई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को सरकार द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप राहत एवं मुआवजा राशि का भुगतान जल्द सुनिश्चित किया जाए। सभी अंचल अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज एवं सत्यापित प्रतिवेदन बिना विलंब जिला आपदा प्रबंधन शाखा को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया, ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता मिल सके।
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उपायुक्त ने कहा कि अतिवृष्टि अथवा हाथी उत्पात के कारण जिन लोगों के आवास पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी पात्रता के अनुसार बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। 90 दिनों से अधिक लंबित दाखिल-खारिज मामलों का शीघ्र निष्पादन बैठक में जिले के सभी अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने विशेष रूप से 90 दिनों से अधिक समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर उनका तत्काल निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राजस्व एवं भूमि संबंधी मामलों के समयबद्ध निष्पादन से आम नागरिकों को सीधे लाभ मिलता है। इसलिए सभी अंचल अधिकारी लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें और अनावश्यक रूप से लंबित प्रकरणों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करें।
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15वें वित्त आयोग की राशि का जनहित में अधिकतम उपयोग बैठक में 15वें वित्त आयोग मद से संचालित एवं प्रस्तावित विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। पंचायत भवनों के सुदृढ़ीकरण, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों में हैंडवॉश यूनिट निर्माण, पेवर ब्लॉक निर्माण सहित अन्य जनोपयोगी कार्यों की प्रगति की जानकारी ली गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि उपलब्ध राशि का अधिकतम एवं गुणवत्तापूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। पंचायत सचिवालयों, विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सुविधाजनक और जनोपयोगी बनाने की दिशा में कार्य किए जाएं तथा सभी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। जीपीडीपी में शत-प्रतिशत प्रविष्टि सुनिश्चित करने का निर्देश उपायुक्त ने ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के तहत पोर्टल पर प्रविष्टियों की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जीपीडीपी के अंतर्गत सभी आवश्यक प्रविष्टियां शत-प्रतिशत पोर्टल पर सुनिश्चित की जाएं।
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उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए योजना निर्माण और पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि महत्वपूर्ण है। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेविका-सहायिका नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों में सेविका एवं सहायिका की नियुक्ति से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने और लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों का सुचारू संचालन हो सके। नए मतदाताओं से फॉर्म-6 प्राप्त करने पर विशेष जोर बैठक के अंत में उपायुक्त ने जिले में संचालित मतदाता सूची विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 की समीक्षा की। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को नए एवं पात्र मतदाताओं से फॉर्म-6 प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रहे। इसके लिए संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी सक्रियता के साथ कार्य करें और पात्र नए मतदाताओं को फॉर्म-6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम पंजीकरण की प्रक्रिया से जोड़ें। अंत में उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों को बैठक में दिए गए निर्देशों का प्राथमिकता के आधार पर अनुपालन सुनिश्चित करने तथा संबंधित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा करने को कहा।
चाईबासा | पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा द्वारा MMDR एक्ट को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस पर गांव-गांव में भ्रम फैलाने का आरोप लगाए जाने के बाद झामुमो ने पलटवार किया है। झामुमो के जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने कहा कि भाजपा नेताओं को पहले कानून के प्रावधानों और झारखंड पर उसके संभावित प्रभावों को समझना चाहिए, इसके बाद ही जनता के बीच बयान देना चाहिए।
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बुधराम लागुरी ने आरोप लगाया कि झामुमो-कांग्रेस नहीं, बल्कि केंद्र की भाजपा सरकार MMDR संशोधन के माध्यम से राज्यों के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, जहां लौह अयस्क, कोयला सहित विभिन्न खनिजों का बड़े पैमाने पर दोहन होता है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि खनिज संपदा का उचित लाभ राज्य और स्थानीय जनता को मिले।
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उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का यह कहना कि केंद्र सरकार झारखंड का पैसा नहीं रोक रही है, मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सवाल केवल यह नहीं है कि वर्तमान में राज्य को कितना राजस्व मिल रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भविष्य में राज्य को अपने प्राकृतिक संसाधनों से राजस्व जुटाने और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधन तैयार करने का अधिकार कितना रहेगा।
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बुधराम लागुरी ने भाजपा से सवाल किया कि MMDR संशोधन का राज्यों के खनिज राजस्व, स्थानीय रोजगार और स्थानीय हितों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे स्पष्ट रूप से जनता के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासी-मूलवासी समाज ने अपनी जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की भारी कीमत चुकाई है। इसलिए खनिज नीति बनाते समय राज्य के अधिकार, स्थानीय रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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झामुमो जिला प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी जनता के बीच भ्रम नहीं फैला रही है, बल्कि केंद्र सरकार के फैसलों की वास्तविकता गांव-गांव तक पहुंचा रही है। उन्होंने भाजपा नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें लगता है कि MMDR संशोधन झारखंड के हित में है, तो वे खुले मंच पर इसके प्रावधानों और इससे झारखंड को होने वाले लाभ को जनता के सामने स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता अब केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि तथ्य, अधिकार और अपने प्राकृतिक संसाधनों में न्यायपूर्ण हिस्सेदारी चाहती है। भाजपा नेताओं को जनता को गुमराह करने के बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए कि झारखंड की खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व में राज्य और यहां की जनता के हितों की पूरी सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी।
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बुधराम लागुरी ने कहा, “झारखंड की खनिज संपदा पर झारखंड का अधिकार और जनता का हित सर्वोपरि है। इस अधिकार से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ का झामुमो लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर विरोध करेगा।”
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन-हुनर से पहचान’ के तहत मंडल कारा, चाईबासा में बंदियों के कौशल विकास और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से व्यवसायिक बागवानी प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया गया। उपायुक्त मनीष कुमार ने दीप प्रज्वलित कर छह दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक सुनील कुमार सहित बैंक ऑफ इंडिया-आरसेटी के प्रशिक्षक मौजूद रहे।
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40 बंदियों को फल-सब्जी उत्पादन और जैविक खाद का प्रशिक्षण प्रशिक्षण शिविर 4 से 9 सितंबर 2026 तक संचालित होगा। इसमें मंडल कारा के 40 बंदियों को फल एवं सब्जी उत्पादन तथा जैविक खाद निर्माण से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को रोजगारपरक कौशल से जोड़कर भविष्य में स्वरोजगार और सम्मानजनक आजीविका के लिए तैयार करना है।
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मंडल कारा में प्रोजेक्ट परिवर्तन का तीसरा प्रशिक्षण शिविर जिला प्रशासन के अनुसार, ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन-हुनर से पहचान’ के तहत मंडल कारा में यह तीसरा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। इसके माध्यम से बंदियों को विभिन्न रोजगारपरक गतिविधियों और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि सजा पूरी करने के बाद वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें। व्यवसायिक बागवानी प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फल एवं सब्जी उत्पादन के साथ जैविक खाद तैयार करने की तकनीक और इसके व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। इससे उन्हें भविष्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर तलाशने में मदद मिलेगी।
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उपायुक्त ने बंदियों को नई शुरुआत के लिए किया प्रेरित प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन’ का उद्देश्य बंदियों को ऐसे उपयोगी और रोजगारपरक कौशल से जोड़ना है, जिससे वे कारा से बाहर निकलने के बाद सम्मानपूर्वक अपना जीवनयापन कर सकें। उन्होंने बंदियों से जीवन में हुई गलतियों से सीख लेने और भविष्य में उन्हें दोहराने से बचने की अपील की। उपायुक्त ने प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा यहां प्राप्त ज्ञान और कौशल का बेहतर उपयोग कर अपने भविष्य को नई दिशा देने के लिए भी प्रेरित किया। सिलाई एवं कपड़ा निर्माण केंद्र का किया अवलोकन प्रशिक्षण सत्र में शामिल होने के बाद उपायुक्त ने मंडल कारा परिसर में संचालित सिलाई केंद्र एवं कपड़ा निर्माण केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां संचालित गतिविधियों की जानकारी ली और बंदियों को दिए जा रहे कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था का जायजा लिया।
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सीसीटीवी कंट्रोल रूम का किया निरीक्षण मंडल कारा के भ्रमण के दौरान उपायुक्त ने सीसीटीवी कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कारा परिसर की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी लेते हुए संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कौशल विकास के जरिए पुनर्वास पर जोर ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन-हुनर से पहचान’ के माध्यम से जिला प्रशासन बंदियों के कौशल विकास और सकारात्मक पुनर्वास की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। व्यवसायिक बागवानी प्रशिक्षण शिविर इसी पहल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य बंदियों को उपयोगी हुनर प्रदान कर उन्हें भविष्य में रोजगार या स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है, ताकि वे सजा पूरी करने के बाद समाज में सम्मानजनक और सकारात्मक जीवन की नई शुरुआत कर सकें।
चाईबासा | कोल्हान में सक्रिय युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले “राष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन” में आदिवासी हो’ समुदाय का प्रतिनिधित्व करेगा। सम्मेलन का आयोजन 6 सितंबर को नई दिल्ली के मावलंकर हॉल में किया जाएगा। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आदिवासी अधिकारों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे।
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प्रतिनिधिमंडल में युवा सामाजिक कार्यकर्ता बिरसिंह बानरा, निर्मल सिंकु, लक्ष्मी पुरती, हीरामनी देवगम, सुशीला बोदरा, सुषमा बिरुली और बृजमोहन डिग्गी शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार, 4 सितंबर को रांची से ट्रेन के माध्यम से दिल्ली के लिए रवाना हुआ।
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सम्मेलन में “आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच” के बैनर तले आदिवासी समुदायों से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से वनाधिकार एवं विस्थापन, आदिवासियों का बहिष्करण एवं भेदभाव, आदिवासी छात्रों के शिक्षा के अधिकार एवं रोजगार तथा आदिवासी पहचान, संस्कृति, भाषा और आस्थाओं की रक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। सम्मेलन में झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और बिहार समेत विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
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सम्मेलन का शुभारंभ स्वागत भाषण के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी करेंगे। वहीं, सम्मेलन का उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन लोकुर करेंगे। इसके बाद मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व सांसद डॉ. पुलिन बिहारी बास्के विषय प्रवेश पर संबोधित करेंगे।
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इसके बाद सम्मेलन में आदिवासी अधिकारों से जुड़े चार प्रमुख मुद्दों पर अलग-अलग रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इन रिपोर्टों पर प्रतिनिधियों के बीच विस्तृत चर्चा के बाद आगामी संघर्ष एवं आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। सम्मेलन का समापन वक्तव्य मंच की उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद बृंदा करात देंगी। 7 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन राष्ट्रीय सम्मेलन के अगले दिन 7 सितंबर को खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इस प्रदर्शन के माध्यम से आदिवासी समुदायों के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।
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कोल्हान से दिल्ली रवाना हुए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राष्ट्रीय मंच के माध्यम से आदिवासी समुदायों की समस्याओं, अधिकारों और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक अस्तित्व से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास किया जाएगा।
चाईबासा | ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ करने और ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर खुटपानी प्रखंड सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रखंड की विभिन्न पंचायतों के मुखिया, पंचायत सचिव, विकसित भारत जी-राम-जी के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, पंचायती राज के प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक, स्वच्छ भारत मिशन के जिला एवं प्रखंड समन्वयक, मास्टर जलसहिया सहित संबंधित कर्मियों ने भाग लिया।
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कार्यशाला में यूनिसेफ के सहयोगी दल आईडीएफ के रिसोर्स पर्सन घनश्याम शाह ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण और उचित निस्तारण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
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चार प्रकार के कचरे को अलग-अलग करने पर जोर कार्यशाला के दौरान गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाले कचरे को स्रोत स्तर पर ही अलग-अलग करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। बताया गया कि कचरे का उचित पृथक्करण होने से पुनर्चक्रण और प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलेगा तथा पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
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इस दौरान पंचायती राज, विकसित भारत जी-राम-जी और स्वच्छ भारत मिशन के बीच बेहतर समन्वय एवं अभिसरण के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग, विभागीय समन्वय और जनभागीदारी बढ़ाने पर बल दिया गया।
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कार्यशाला में पंचायत प्रतिनिधियों एवं संबंधित कर्मियों से अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में लोगों को ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के प्रति जागरूक करने तथा स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण और वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
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कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को और सुदृढ़ करना, ठोस कचरे के वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन को बढ़ावा देना तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।
गुआ | पश्चिमी सिंहभूम जिले के ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण गुआ शहीद दिवस के अवसर पर आगामी 8 सितंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने तेज कर दी हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आगमन का प्रस्तावित कार्यक्रम है। इसे लेकर पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार और पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने संयुक्त रूप से गुआ क्षेत्र का दौरा कर कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने गुआ शहीद स्थल, गुआ फुटबॉल मैदान, प्रस्तावित मुख्य कार्यक्रम स्थल, वाहन पार्किंग स्थल तथा आगमन-प्रस्थान मार्गों का जायजा लिया। इस दौरान कार्यक्रम की रूपरेखा, संभावित भीड़, मुख्यमंत्री एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों के आगमन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई।
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शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने गुआ शहीद स्थल का निरीक्षण कर श्रद्धांजलि कार्यक्रम से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की। शहीद स्थल की साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण, श्रद्धांजलि अर्पित करने की व्यवस्था, प्रवेश एवं निकास मार्ग सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने कहा कि गुआ शहीद दिवस जिले के इतिहास, जनभावनाओं और शहीदों के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे में सभी तैयारियां पूरी गरिमा और श्रद्धा के साथ सुनिश्चित की जाएं तथा किसी भी स्तर पर कमी न रहे। फुटबॉल मैदान में मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा इसके बाद उपायुक्त और एसपी ने गुआ फुटबॉल मैदान का निरीक्षण किया। यहां प्रस्तावित मुख्य कार्यक्रम को लेकर मंच निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था, विशिष्ट अतिथियों के बैठने की व्यवस्था, आमजन के लिए बैठने की सुविधा, प्रवेश एवं निकास मार्ग और बैरिकेडिंग आदि की समीक्षा की गई।
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अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल की क्षमता और संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पूरा करने का निर्देश दिया। मंच, दर्शक दीर्घा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आवश्यक तकनीकी सुविधाएं, ध्वनि व्यवस्था तथा कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए सभी तैयारियां पहले से पूरी करने को कहा गया। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष जोर पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को व्यापक सुरक्षा योजना तैयार करने का निर्देश दिया। कार्यक्रम स्थल, शहीद स्थल, मुख्य मार्गों, प्रवेश एवं निकास द्वार तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा बल की तैनाती और निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया।
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बड़ी संख्या में लोगों के आगमन की संभावना को देखते हुए भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री और अन्य विशिष्ट अतिथियों के आगमन एवं प्रस्थान के दौरान प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। पार्किंग और आमजन की सुविधा की व्यवस्था निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित पार्किंग स्थलों का भी जायजा लिया गया। विभिन्न श्रेणी के वाहनों के लिए आवश्यकतानुसार अलग-अलग पार्किंग व्यवस्था करने तथा कार्यक्रम स्थल तक वाहनों और आमजन की आवाजाही को सुगम बनाए रखने के निर्देश दिए गए। मुख्य मार्गों पर यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए आवश्यकतानुसार वैकल्पिक मार्ग और मार्ग नियंत्रण की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। पार्किंग स्थलों से कार्यक्रम स्थल तक लोगों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पैदल मार्ग, संकेतक और दिशा-सूचक लगाने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। पेयजल, स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था के निर्देश कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए कार्यक्रम स्थल और आसपास के प्रमुख स्थानों पर स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
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स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिक उपचार, चिकित्सा दल की प्रतिनियुक्ति और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी करने को कहा गया। वहीं, शहीद स्थल, फुटबॉल मैदान, प्रमुख मार्गों, पार्किंग स्थलों और आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों में व्यापक साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश उपायुक्त मनीष कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए अपनी जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण करें और तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करें। उन्होंने प्रत्येक व्यवस्था की पूर्व समीक्षा कर संभावित कमियों को समय रहते दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुआ शहीद दिवस पश्चिमी सिंहभूम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण अवसर है। यह शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करने और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन है। इसलिए सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ तैयारियों को अंतिम रूप दें।
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एसपी अमित रेनू ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाएगी। उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों को जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर सुरक्षा योजना के अनुरूप सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा 8 सितंबर को प्रस्तावित गुआ शहीद दिवस कार्यक्रम को गरिमापूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं की आगामी दिनों में लगातार समीक्षा की जाएगी। निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल, जगन्नाथपुर अनुमंडल पदाधिकारी अरुण उरांव, नजारत उप समाहर्ता देवेंद्र कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी गौतम कुमार, गोपनीय प्रभारी कुमार हर्ष, नोआमुंडी प्रखंड विकास पदाधिकारी पप्पू रजक सहित विभिन्न कार्यकारी विभागों के कार्यपालक अभियंता एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।