चाईबासा | कोल्हान में सक्रिय युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले “राष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन” में आदिवासी हो’ समुदाय का प्रतिनिधित्व करेगा। सम्मेलन का आयोजन 6 सितंबर को नई दिल्ली के मावलंकर हॉल में किया जाएगा। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आदिवासी अधिकारों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे।

प्रतिनिधिमंडल में युवा सामाजिक कार्यकर्ता बिरसिंह बानरा, निर्मल सिंकु, लक्ष्मी पुरती, हीरामनी देवगम, सुशीला बोदरा, सुषमा बिरुली और बृजमोहन डिग्गी शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार, 4 सितंबर को रांची से ट्रेन के माध्यम से दिल्ली के लिए रवाना हुआ।

सम्मेलन में “आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच” के बैनर तले आदिवासी समुदायों से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से वनाधिकार एवं विस्थापन, आदिवासियों का बहिष्करण एवं भेदभाव, आदिवासी छात्रों के शिक्षा के अधिकार एवं रोजगार तथा आदिवासी पहचान, संस्कृति, भाषा और आस्थाओं की रक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
सम्मेलन में झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और बिहार समेत विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

सम्मेलन का शुभारंभ स्वागत भाषण के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी करेंगे। वहीं, सम्मेलन का उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन लोकुर करेंगे। इसके बाद मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व सांसद डॉ. पुलिन बिहारी बास्के विषय प्रवेश पर संबोधित करेंगे।

इसके बाद सम्मेलन में आदिवासी अधिकारों से जुड़े चार प्रमुख मुद्दों पर अलग-अलग रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इन रिपोर्टों पर प्रतिनिधियों के बीच विस्तृत चर्चा के बाद आगामी संघर्ष एवं आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। सम्मेलन का समापन वक्तव्य मंच की उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद बृंदा करात देंगी।
7 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
राष्ट्रीय सम्मेलन के अगले दिन 7 सितंबर को खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इस प्रदर्शन के माध्यम से आदिवासी समुदायों के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।

कोल्हान से दिल्ली रवाना हुए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राष्ट्रीय मंच के माध्यम से आदिवासी समुदायों की समस्याओं, अधिकारों और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक अस्तित्व से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास किया जाएगा।

