स्वास्थ्य

बैंक ऑफ इंडिया ने 25 टीबी मरीजों को लिया गोद, पोषण सहयोग के रूप में बांटे फूड बास्केट

बैंक ऑफ इंडिया ने 25 टीबी मरीजों को लिया गोद, पोषण सहयोग के रूप में बांटे फूड बास्केट

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले को टीबी-मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा उपायुक्त श्री मनीष कुमार की पहल पर संचालित “प्रोजेक्ट जागृति–बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम” के तहत लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में टीबी-मुक्त भारत अभियान के तहत बैंक ऑफ इंडिया, पश्चिमी सिंहभूम ने सामाजिक उत्तरदायित्व एवं जनभागीदारी का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए 25 टीबी मरीजों को निक्षय मित्र के रूप में गोद लिया है।

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बैंक ऑफ इंडिया के एलडीएम श्री विष्णु के नेतृत्व में गोद लिए गए 25 टीबी मरीजों के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चक्रधरपुर में पोषण सहयोग के रूप में फूड बास्केट का वितरण किया गया। निक्षय मित्र पहल के तहत टीबी मरीजों को उपचार की अवधि में आवश्यक पोषण सहायता उपलब्ध कराने और उनके शीघ्र स्वस्थ होने में सहयोग देने का प्रयास किया जा रहा है।

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कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं बैंक प्रतिनिधियों ने बताया कि टीबी से पूर्णतः स्वस्थ होने के लिए चिकित्सकों द्वारा निर्धारित दवाइयों का नियमित एवं पूरी अवधि तक सेवन करने के साथ-साथ पौष्टिक एवं संतुलित आहार भी महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से निक्षय मित्रों के माध्यम से मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराकर उनके उपचार को प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

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इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों एवं बैंक प्रतिनिधियों ने टीबी मरीजों और उनके परिजनों से नियमित चिकित्सकीय परामर्श लेने, निर्धारित दवाइयों का नियमित एवं पूर्ण अवधि तक सेवन करने तथा पौष्टिक एवं संतुलित आहार लेने की अपील की। साथ ही समाज में टीबी को लेकर व्याप्त भ्रांतियों एवं भेदभाव को दूर कर मरीजों को सहयोग और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

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कार्यक्रम में एमओआईसी, सीएचसी चक्रधरपुर, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद चक्रधरपुर, बैंक ऑफ इंडिया के चाईबासा, चक्रधरपुर एवं कराईकेला शाखाओं के शाखा प्रबंधक, स्वास्थ्य कर्मी, टीबी मरीज एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन की ओर से टीबी-मुक्त भारत और टीबी-मुक्त पश्चिमी सिंहभूम के लक्ष्य को साकार करने के लिए सक्षम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, औद्योगिक एवं व्यावसायिक संस्थानों, बैंकों, स्वयंसेवी संगठनों तथा सामाजिक संस्थाओं से निक्षय मित्र के रूप में आगे आने की अपील की गई है।

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जिला प्रशासन ने कहा कि निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को पोषण सहयोग उपलब्ध कराना उनके उपचार में महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। सामूहिक प्रयासों से टीबी मरीजों को स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर करने के साथ टीबी-मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में मजबूत कदम उठाया जा सकता है।

H1N1 संक्रमण की संभावित स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, डीसी ने दिए तैयारियां मजबूत करने के निर्देश

H1N1 संक्रमण की संभावित स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, डीसी ने दिए तैयारियां मजबूत करने के निर्देश

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में मौसमी इन्फ्लुएंजा एवं H1N1 (स्वाइन फ्लू) संक्रमण की संभावित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक, सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, एमपीडब्ल्यू सहित स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा पदाधिकारी एवं कर्मी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

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बैठक में H1N1 सहित अन्य संक्रामक रोगों की रोकथाम, संदिग्ध मामलों की समय पर पहचान, संक्रमण नियंत्रण, उपचार व्यवस्था और स्वास्थ्य संस्थानों की तैयारियों की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग को जिले में संक्रमण की संभावित स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क एवं तैयार रहने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध मामले या संक्रमण की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा सभी स्तरों पर बेहतर समन्वय के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत रखा जाए।
अस्पतालों में विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने का निर्देश
उपायुक्त ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को H1N1 अथवा अन्य संक्रामक रोगों के संभावित मरीजों के उपचार के लिए सामान्य वार्ड से अलग विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने का निर्देश दिया। इन वार्डों में आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं, चिकित्सा उपकरण एवं अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रखने को कहा गया।

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उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने तथा गंभीर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए समयबद्ध रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही, सभी स्वास्थ्य संस्थानों को उपलब्ध संसाधनों एवं तैयारियों की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया गया।
संदिग्ध मामलों की त्वरित पहचान और रिपोर्टिंग पर जोर
बैठक में स्वास्थ्यकर्मियों को H1N1 संक्रमण की पहचान, संक्रमण नियंत्रण, संदिग्ध मामलों की रिपोर्टिंग, नमूना संग्रह, उपचार एवं रेफरल से संबंधित निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया। चिकित्सा पदाधिकारियों को संभावित अथवा संदिग्ध मामलों की सूचना मिलने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार तत्काल आवश्यक कार्रवाई और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
उपायुक्त ने कहा कि संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए सतर्कता, समय पर पहचान और त्वरित उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जिले में नियमित निगरानी व्यवस्था को मजबूत रखने तथा सभी स्तरों पर आवश्यक समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया।

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संक्रमण से बचाव के लिए आमजनों से सावधानी बरतने की अपील
जिला प्रशासन ने आमजनों से संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। लोगों को खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक को रूमाल अथवा टिश्यू से ढकने, हाथों को नियमित रूप से साबुन एवं साफ पानी से धोने तथा बीमार या फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों के अनावश्यक संपर्क से बचने की सलाह दी गई है।
बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी अथवा फ्लू से संबंधित गंभीर लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से परामर्श लेने की अपील की गई। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील लोगों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।
बच्चों की स्वास्थ्य जांच में तेजी लाने का निर्देश
बैठक में राष्ट्रीय बाल किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। सभी संबंधित चिकित्सा पदाधिकारियों को माइक्रो प्लान तैयार कर निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप स्वास्थ्य जांच में तेजी लाने और शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों को चिह्नित विद्यालयों एवं अन्य निर्धारित स्थलों पर जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करने, आवश्यकता के अनुसार उपचार एवं रेफरल सुविधा उपलब्ध कराने तथा अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने को कहा गया।

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कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। विद्यालयों में आयोजित स्वास्थ्य जांच के दौरान विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों का आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
इसके अलावा, चिन्हित बच्चों की स्वास्थ्य जांच, उपचार एवं आवश्यक सुविधाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा गया। संबंधित पदाधिकारियों को उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा कर जरूरतमंद बच्चों को समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

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उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिले में संक्रामक रोगों की रोकथाम के साथ-साथ बच्चों एवं किशोरों की स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य पदाधिकारियों एवं कर्मियों को अपने दायित्वों का गंभीरतापूर्वक निर्वहन करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और आमजनों तक समय पर चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि जिले में H1N1 सहित संभावित संक्रामक रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण, समय पर उपचार तथा बच्चों की स्वास्थ्य जांच से संबंधित कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष चिकित्सा बनी राहत का माध्यम, पांच वर्षों से पेट दर्द से परेशान बसंती को उपचार से मिली राहत

सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष चिकित्सा बनी राहत का माध्यम, पांच वर्षों से पेट दर्द से परेशान बसंती को उपचार से मिली राहत

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों तक गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुदड़ी प्रखंड के ऊसंडी गांव निवासी 28 वर्षीय बसंती लोंगा का अनुभव आयुष चिकित्सा के प्रति बढ़ते विश्वास और सकारात्मक स्वास्थ्य परिणाम की प्रेरक मिसाल के रूप में सामने आया है।
बसंती लोंगा पिछले करीब पांच वर्षों से पेट एवं आंतों से संबंधित दर्द की समस्या से परेशान थीं। उन्होंने कई स्थानों पर उपचार कराया, लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिल सकी। लंबे समय से जारी दर्द के कारण उन्हें दैनिक जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

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इसी दौरान बसंती को आयुष चिकित्सा के माध्यम से उपचार प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. कविता मैथी से संपर्क कर अपनी स्वास्थ्य समस्या के संबंध में चिकित्सकीय परामर्श लिया। परामर्श के बाद उन्होंने आयुष उपचार के तहत दो बार औषधि का सेवन किया। उपचार के बाद बसंती ने पेट के दर्द में काफी राहत महसूस की और अब पहले की तुलना में स्वयं को बेहतर महसूस कर रही हैं।
लाभुक ने साझा किया अपना अनुभव
बसंती लोंगा ने बताया, “मैं लगभग पांच वर्षों से पेट के दर्द की समस्या से परेशान थी। कई जगह इलाज कराने के बाद भी मुझे अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही थी। आयुष उपचार लेने के बाद मेरे पेट के दर्द में काफी राहत मिली है। अब मैं पहले की तुलना में काफी बेहतर महसूस कर रही हूं। इससे आयुष चिकित्सा के प्रति मेरा विश्वास और मजबूत हुआ है।”

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चिकित्सकीय परामर्श के साथ उपचार पर जोर
आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. कविता मैथी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक करना और समय पर उचित चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धति समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर आधारित है और उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ इसका लाभ लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

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उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में स्वयं से दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। नियमित उपचार, संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह का पालन स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वस्थ समाज के निर्माण में आयुष चिकित्सा की महत्वपूर्ण भूमिका : उपायुक्त
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य जिले के ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।

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उन्होंने कहा, “आयुष चिकित्सा हमारी समृद्ध चिकित्सा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिले में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। बसंती लोंगा का अनुभव इस बात का सकारात्मक उदाहरण है कि उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन एवं नियमित उपचार से स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव संभव है।”

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उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आयुष चिकित्सा पद्धति को भी ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रभावी हिस्सा बनाते हुए अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

सरायकेला में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक, डीसी ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

सरायकेला में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक, डीसी ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

सरायकेला | समाहरणालय सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों एवं स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त रीना हांसदा, सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पी.एम. बारा सहित सभी एमओआईसी, डीपीएमयू, बीपीएमयू एवं संबंधित चिकित्सा पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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बैठक में जिले के स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति, दवाओं एवं उपकरणों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाओं तथा विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने कहा कि जिले के प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान में आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।

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उपायुक्त ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को निर्धारित रोस्टर के अनुसार समय पर ड्यूटी करने तथा नियमित रूप से बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन भुगतान को बायोमेट्रिक उपस्थिति से जोड़ने और संस्थानों में उपस्थिति की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य रख-रखाव मद से प्राप्त राशि का आवश्यकता के आधार पर एवं नियमानुसार उपयोग करने का निर्देश दिया। स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाएं एवं उपकरण, स्वच्छता, रंग-रोगन, मरीजों के बैठने की व्यवस्था, पर्याप्त बेड, रोशनी, पंखे और साइनेज बोर्ड जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही अनावश्यक खरीदारी एवं सामग्री की डुप्लीकेसी रोकने के निर्देश दिए गए।

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दवाओं एवं उपकरणों के स्टॉक रजिस्टर को नियमित रूप से अद्यतन रखने तथा दवाओं का भौतिक सत्यापन करने को कहा गया। एक्सपायरी के करीब पहुंच रही दवाओं को आवश्यकता वाले स्वास्थ्य संस्थानों में नियमानुसार स्थानांतरित करने तथा एक्सपायर्ड दवाओं का उचित तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में आयुष्मान योजना के लंबित क्लेम, टेलीमेडिसिन, संस्थागत प्रसव तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने लंबित आयुष्मान क्लेम का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने तथा ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

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मलेरिया नियंत्रण की समीक्षा के दौरान संवेदनशील एवं पीवीटीजी बहुल क्षेत्रों में नियमित सर्वेक्षण, जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वहीं, टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत गम्हरिया, कुचाई, चांडिल एवं खरसावां प्रखंड के प्रभावित गांवों में विशेष शिविर लगाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान, सैंपल संग्रह एवं जांच में तेजी लाने को कहा गया।
उपायुक्त ने सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया एवं अन्य स्वास्थ्य जांचों को नियमित रूप से संचालित करने तथा चिन्हित मरीजों को समय पर उपचार एवं आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। डायरिया की रोकथाम, स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छता को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

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कुपोषित बच्चों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने एमटीसी केंद्रों में बेड ऑक्युपेंसी बढ़ाने तथा चिन्हित बच्चों को आवश्यकता के अनुसार भर्ती कराकर समुचित उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
बैठक के अंत में उपायुक्त ने सभी एमओआईसी को नियमित क्षेत्र भ्रमण एवं अनुश्रवण करते हुए स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपलब्ध संसाधनों का पारदर्शी एवं उपयोगिता आधारित सदुपयोग करते हुए आमजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।

चाईबासा में निश्चय मित्रों ने टीबी मरीजों को लिया गोद, फूड बास्केट का किया वितरण

चाईबासा में निश्चय मित्रों ने टीबी मरीजों को लिया गोद, फूड बास्केट का किया वितरण

चाईबासा | ‘प्रोजेक्ट जागृति–बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम’ के तहत शनिवार को सदर अस्पताल, चाईबासा परिसर में टीबी मरीजों के पोषण एवं उपचार में सहयोग के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त श्री मनीष कुमार की उपस्थिति में जिले के कुल 120 टीबी मरीजों के बीच पोषक आहार का वितरण किया गया।

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इस दौरान 73 पुराने टीबी मरीजों को चौथी बार पोषक आहार उपलब्ध कराया गया, जबकि 40 नए टीबी मरीजों को पहली बार पोषक आहार दिया गया। वहीं, 07 टीबी मरीजों को दूसरी बार पोषक आहार उपलब्ध कराया गया। इस पहल का उद्देश्य टीबी मरीजों को नियमित उपचार के साथ पर्याप्त पोषण एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराकर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहायता करना है।

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उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि टीबी के उपचार में दवाओं के साथ उचित पोषण और नियमित देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘प्रोजेक्ट जागृति’ के माध्यम से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक जन-केंद्रित बनाने तथा जरूरतमंद मरीजों को उपचार के साथ पोषण एवं सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि टीबी से उबरने के लिए मरीजों का नियमित रूप से दवा लेना और संतुलित एवं पौष्टिक आहार ग्रहण करना आवश्यक है। उन्होंने निक्षय मित्रों से आगे आकर टीबी मरीजों को गोद लेने तथा उपचार की अवधि में उन्हें पोषण संबंधी सहयोग प्रदान करने की अपील की।

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निक्षय मित्रों ने बढ़ाया सहयोग का हाथ
कार्यक्रम के दौरान चाईबासा में निक्षय मित्रों द्वारा टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें पोषण सहयोग प्रदान किया गया। इस क्रम में फूड सेफ्टी ऑफिसर श्री धनेश्वर प्रसाद हेंब्रम ने 02 टीबी मरीजों, वरीय चिकित्सा पर्यवेक्षक श्री अवनीश कुमार सिन्हा ने 02 टीबी मरीजों, एक्स-रे टेक्निशियन सुश्री खुशबू प्रधान ने 01 टीबी मरीज तथा एपीआरओ श्री सचिन कुमार ने 01 टीबी मरीज को गोद लिया।

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निक्षय मित्रों द्वारा गोद लिए गए टीबी मरीजों के बीच फूड बास्केट का वितरण किया गया। इस पहल के माध्यम से मरीजों को उपचार अवधि के दौरान नियमित पोषण संबंधी सहयोग उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य टीबी मरीजों को नियमित उपचार के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें आवश्यक पोषण एवं सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराना है। ‘प्रोजेक्ट जागृति–बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम’ के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मरीजों की समय पर जांच, नियमित उपचार, पोषण सहयोग एवं जागरूकता के माध्यम से जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

प्रोजेक्ट जागृति के तहत सदर अस्पताल चाईबासा में रक्तदान शिविर आयोजित

प्रोजेक्ट जागृति के तहत सदर अस्पताल चाईबासा में रक्तदान शिविर आयोजित

चाईबासा | ‘प्रोजेक्ट जागृति–बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम’ के तहत सदर अस्पताल चाईबासा स्थित कुपोषण उपचार केंद्र में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ जरूरतमंद मरीजों के लिए सुरक्षित एवं पर्याप्त रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जनभागीदारी को बढ़ावा देना था।

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शिविर में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने स्वयं रक्तदान कर लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

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उपायुक्त ने कहा, “रक्तदान एक ऐसा पुनीत कार्य है, जिसके माध्यम से हम बिना किसी भेदभाव के किसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने में अपना योगदान दे सकते हैं। मैं जिले के सभी स्वस्थ एवं पात्र नागरिकों से अपील करता हूं कि वे स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।”

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उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान दुर्घटना पीड़ित, प्रसूता, गंभीर रूप से बीमार मरीज अथवा अन्य जरूरतमंद व्यक्ति के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है। नियमित एवं स्वैच्छिक रक्तदान से जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहयोग मिलता है।
उपायुक्त ने रक्तदान करने वाले सभी रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उनका यह योगदान समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि ‘प्रोजेक्ट जागृति’ के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ जनभागीदारी एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

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शिविर में उत्साहपूर्वक रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया गया। उपायुक्त ने रक्तदाताओं से संवाद कर उनके अनुभवों की जानकारी ली तथा उन्हें इस पुनीत कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

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जिला प्रशासन ने जिले के सभी स्वस्थ एवं पात्र नागरिकों से स्वैच्छिक रक्तदान को सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाने की अपील की। साथ ही, लोगों से दूसरों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया गया, ताकि आवश्यकता के समय किसी भी मरीज को रक्त की कमी के कारण कठिनाई का सामना न करना पड़े।

जन्म एवं मृत्यु निबंधन के लंबित मामलों के निष्पादन को लेकर DLCC की बैठक

जन्म एवं मृत्यु निबंधन के लंबित मामलों के निष्पादन को लेकर DLCC की बैठक

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समिति (DLCC) की बैठक समाहरणालय सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जिले में जन्म एवं मृत्यु निबंधन की अद्यतन स्थिति तथा लंबित मामलों की समीक्षा की गई।

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बैठक के दौरान उपायुक्त ने जिला सांख्यिकी पदाधिकारी एवं जिला पंचायती राज पदाधिकारी से जन्म एवं मृत्यु निबंधन की वर्तमान स्थिति तथा लंबित मामलों की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को जन्म एवं मृत्यु निबंधन से संबंधित बैकलॉग को शीघ्र समाप्त करने का निर्देश दिया।

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उपायुक्त ने कहा कि जन्म एवं मृत्यु का समयबद्ध निबंधन नागरिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने का निर्देश दिया।

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बैठक में निर्णय लिया गया कि जन्म एवं मृत्यु निबंधन से संबंधित लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन एवं आमजनों की सुविधा के लिए 01 सितंबर 2026 से 10 सितंबर 2026 तक पंचायत एवं विद्यालय स्तर पर विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को विशेष कैंपों का सफल आयोजन सुनिश्चित करने तथा अधिक से अधिक पात्र मामलों का निष्पादन करने का निर्देश दिया।

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बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी तथा कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद चाईबासा एवं चक्रधरपुर सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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22 अगस्त को रक्तदान शिविर, उपायुक्त ने व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने का किया आह्वान

22 अगस्त को रक्तदान शिविर, उपायुक्त ने व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने का किया आह्वान

पश्चिमी सिंहभूम | आगामी 22 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर की तैयारियों एवं व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पश्चिमी सिंहभूम जिला उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न विभागों, संस्थानों एवं सामाजिक समूहों के पदाधिकारी, कर्मी एवं प्रतिनिधि शामिल हुए।

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बैठक में उपायुक्त ने कहा कि रक्तदान एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व है। प्रत्येक रक्तदाता किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों से अपने-अपने स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए अधिक से अधिक पात्र एवं इच्छुक लोगों को 22 अगस्त को आयोजित रक्तदान शिविर में भाग लेने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

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उपायुक्त ने समाहरणालय, अंचल, प्रखंड एवं अनुमंडल स्तर पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर, सहायक, वरीय सहायक, सहायक प्रशासनिक पदाधिकारी एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ-साथ शिक्षकों एवं डीएमएफटी अनुशिक्षकों से भी अभियान में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने प्रज्ञा केंद्रों के वीएलई, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, जेएसएलपीएस की दीदियों, पीडीएस डीलरों, पंचायत सेवकों, बीपीओ, रोजगार सेवकों, मुखिया एवं जनसेवा से जुड़े कर्मियों से अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करने की अपील की।

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इसी क्रम में कल्याण, कृषि, खेल एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों, सभी कार्यपालक अभियंताओं एवं उनकी टीम, खेल प्रशिक्षकों एवं खिलाड़ियों, जलसहिया तथा बैंकर्स सहित विभिन्न समूहों को भी रक्तदान अभियान से जोड़ने पर जोर दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि विभिन्न विभागों एवं सामाजिक समूहों की सामूहिक भागीदारी से रक्तदान को जनअभियान का स्वरूप दिया जा सकता है।
टीबी उन्मूलन के लिए निक्षय मित्र बनने की अपील
बैठक में पश्चिमी सिंहभूम जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में भी विशेष चर्चा की गई। उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों, कर्मियों तथा समाज के सक्षम एवं इच्छुक लोगों से निक्षय मित्र के रूप में आगे आने और टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार एवं पोषण संबंधी आवश्यकताओं में सहयोग करने का आह्वान किया।

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उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को भावनात्मक, सामाजिक एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे उनके उपचार की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उपायुक्त ने कहा कि रक्तदान और टीबी उन्मूलन दोनों ही मानवीय संवेदनशीलता एवं सामुदायिक सहभागिता से जुड़े महत्वपूर्ण अभियान हैं। जिले के पदाधिकारी, कर्मी, जनप्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, युवा, खिलाड़ी, बैंकर्स एवं आम नागरिक इन अभियानों से जुड़कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं।

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जिला प्रशासन ने जिलेवासियों से अपील की है कि 22 अगस्त को आयोजित रक्तदान शिविर में पात्र एवं स्वस्थ व्यक्ति स्वैच्छिक रक्तदान कर जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा में सहभागी बनें। साथ ही, सक्षम नागरिक निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को सहयोग प्रदान करें। सामूहिक प्रयासों से पश्चिमी सिंहभूम को स्वस्थ, जागरूक एवं टीबी मुक्त जिला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया जा सकता है।

विश्व आदिवासी दिवस पर पश्चिमी सिंहभूम में वृहद रक्तदान अभियान, 509 यूनिट रक्त संग्रह

विश्व आदिवासी दिवस पर पश्चिमी सिंहभूम में वृहद रक्तदान अभियान, 509 यूनिट रक्त संग्रह

चाईबासा | विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शनिवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले में ‘प्रोजेक्ट जागृति–बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम’ के तहत वृहद रक्तदान अभियान चलाया गया। जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित रक्तदान शिविरों में कुल 509 यूनिट रक्त संग्रह किया गया।

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रक्तदान शिविरों का आयोजन सदर अस्पताल चाईबासा स्थित कुपोषण उपचार केंद्र, अनुमंडल अस्पताल चक्रधरपुर, नोआमुंडी, गुआ क्लब तथा कुमारडुंगी, मझगांव, मंझारी और जगन्नाथपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में किया गया। इन शिविरों में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने उत्साहपूर्वक स्वैच्छिक रक्तदान किया।

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इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से रक्तदाताओं को उनके सामाजिक योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र, टी-शर्ट सहित अन्य सामग्री देकर सम्मानित किया गया। प्रशासन ने लोगों से नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करने तथा अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करने की अपील की।

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विभिन्न विभागों के पदाधिकारी-कर्मियों ने भी किया रक्तदान
रक्तदान अभियान में जिले के विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के पदाधिकारी और कर्मियों के अलावा कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, शिक्षक-शिक्षिकाएं, जेएसएलपीएस की दीदियां, जल सहिया, जन वितरण प्रणाली के डीलर सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।

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जिला प्रशासन ने कहा कि एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद मरीज के लिए जीवन की उम्मीद बन सकता है। ‘प्रोजेक्ट जागृति’ के माध्यम से जिले में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नियमित रक्तदान की संस्कृति को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

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प्रशासन ने सभी रक्तदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए स्वस्थ एवं पात्र नागरिकों से आगे आकर नियमित रूप से रक्तदान करने की अपील की।

आकाशीय बिजली गिरने से युवक की मौत, गांव में पसरा मातम

आकाशीय बिजली गिरने से युवक की मौत, गांव में पसरा मातम

सरायकेला | सरायकेला-खरसावां जिले में शुक्रवार दोपहर बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक युवक की मौत हो गई। घटना सरायकेला थाना क्षेत्र के टेन्टोपोसी पंचायत अंतर्गत दुबराजपुर गांव के बेचीडीह टोला में हुई। मृतक की पहचान अनिल महतो के रूप में हुई है। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है।

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जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को करीब 3:30 बजे अनिल महतो अपने घर में बैठे हुए थे। इसी दौरान तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी, जिसकी चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गए। परिजन आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए सरायकेला सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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घटना की सूचना मिलने के बाद सरायकेला थाना पुलिस सदर अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर रही है।

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इधर, जिले में लगातार हो रही बारिश और वज्रपात की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। प्रशासन ने लोगों को खुले मैदान, खेतों तथा पेड़ों के नीचे जाने से बचने और वज्रपात के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी है।

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