चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों तक गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुदड़ी प्रखंड के ऊसंडी गांव निवासी 28 वर्षीय बसंती लोंगा का अनुभव आयुष चिकित्सा के प्रति बढ़ते विश्वास और सकारात्मक स्वास्थ्य परिणाम की प्रेरक मिसाल के रूप में सामने आया है।
बसंती लोंगा पिछले करीब पांच वर्षों से पेट एवं आंतों से संबंधित दर्द की समस्या से परेशान थीं। उन्होंने कई स्थानों पर उपचार कराया, लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिल सकी। लंबे समय से जारी दर्द के कारण उन्हें दैनिक जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

इसी दौरान बसंती को आयुष चिकित्सा के माध्यम से उपचार प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. कविता मैथी से संपर्क कर अपनी स्वास्थ्य समस्या के संबंध में चिकित्सकीय परामर्श लिया। परामर्श के बाद उन्होंने आयुष उपचार के तहत दो बार औषधि का सेवन किया। उपचार के बाद बसंती ने पेट के दर्द में काफी राहत महसूस की और अब पहले की तुलना में स्वयं को बेहतर महसूस कर रही हैं।
लाभुक ने साझा किया अपना अनुभव
बसंती लोंगा ने बताया, “मैं लगभग पांच वर्षों से पेट के दर्द की समस्या से परेशान थी। कई जगह इलाज कराने के बाद भी मुझे अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही थी। आयुष उपचार लेने के बाद मेरे पेट के दर्द में काफी राहत मिली है। अब मैं पहले की तुलना में काफी बेहतर महसूस कर रही हूं। इससे आयुष चिकित्सा के प्रति मेरा विश्वास और मजबूत हुआ है।”

चिकित्सकीय परामर्श के साथ उपचार पर जोर
आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. कविता मैथी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक करना और समय पर उचित चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धति समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर आधारित है और उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ इसका लाभ लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में स्वयं से दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। नियमित उपचार, संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह का पालन स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वस्थ समाज के निर्माण में आयुष चिकित्सा की महत्वपूर्ण भूमिका : उपायुक्त
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य जिले के ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा, “आयुष चिकित्सा हमारी समृद्ध चिकित्सा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिले में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। बसंती लोंगा का अनुभव इस बात का सकारात्मक उदाहरण है कि उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन एवं नियमित उपचार से स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव संभव है।”

उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आयुष चिकित्सा पद्धति को भी ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रभावी हिस्सा बनाते हुए अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

