स्वास्थ्य

आयुष विभाग के निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 64 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण, रोगों से बचाव को लेकर किया गया जागरूक

आयुष विभाग के निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 64 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण, रोगों से बचाव को लेकर किया गया जागरूक

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के तीन प्रखंडों में आयुष विभाग द्वारा आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। शिविरों के दौरान कुल 64 लाभुकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें निःशुल्क आयुष औषधियां वितरित की गईं।

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स्वास्थ्य शिविर हाटगम्हरिया प्रखंड के कालीमाटी, तांतनगर प्रखंड के केसिया तथा मनोहरपुर प्रखंड के टांगरैन गांव में आयोजित किए गए। इस दौरान गठिया, वात रोग, बुखार, सर्दी-खांसी, नस संबंधी समस्याएं, त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियां, उच्च रक्तचाप तथा मधुमेह सहित विभिन्न सामान्य एवं दीर्घकालिक रोगों की जांच कर मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया।

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शिविर में सामुदायिक आयुष स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. यशवंती, डॉ. अनीश एवं डॉ. राधिका ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उपचार किया तथा आवश्यकतानुसार निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराईं।

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इस अवसर पर चिकित्सकों ने ग्रामीणों को सर्पदंश एवं जहरीले कीड़े-मकोड़ों से बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने अपील की कि ऐसी स्थिति में झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वासों में समय व्यर्थ न गंवाएं, बल्कि मरीज को तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाकर उचित उपचार कराएं। साथ ही बाहर निकलते समय चप्पल या जूते पहनने, जमीन पर सोने के बजाय खटिया या पलंग का उपयोग करने तथा व्यक्तिगत सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी।

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चिकित्सकों ने मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव के प्रति भी लोगों को जागरूक किया। शिविर में आयोजित योग सत्र के माध्यम से ग्रामीणों को नियमित योगाभ्यास अपनाने, संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने, स्वच्छ पेयजल का उपयोग करने, घर एवं आसपास साफ-सफाई बनाए रखने तथा किसी भी स्वास्थ्य समस्या होने पर गांव की सहिया या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से तत्काल संपर्क करने की सलाह दी गई।

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सदर अस्पताल के ब्लड बैंक कर्मी पर फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी पाने का आरोप, डीसी से उच्चस्तरीय जांच की मांग

सदर अस्पताल के ब्लड बैंक कर्मी पर फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी पाने का आरोप, डीसी से उच्चस्तरीय जांच की मांग

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल का ब्लड बैंक एक बार फिर विवादों में आ गया है। यहां कार्यरत एक कर्मी पर कथित रूप से फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर अवैध तरीके से नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया गया है। मामले को लेकर स्थानीय युवक अनीष गोप ने जिला उपायुक्त (डीसी) को शिकायती पत्र सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

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मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला
उपायुक्त को सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में कार्यरत जयंत कुमार के पास ब्लड बैंक जैसे अत्यंत संवेदनशील विभाग में कार्य करने के लिए आवश्यक वैध तकनीकी प्रशिक्षण एवं प्रमाणपत्र नहीं हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि बिना आवश्यक योग्यता के ऐसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति मरीजों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

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स्थानीय युवाओं की अनदेखी का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जयंत कुमार मूल रूप से बिहार का निवासी है तथा उसके आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज बिहार के हैं। जबकि पश्चिमी सिंहभूम जिले में बड़ी संख्या में योग्य एवं तकनीकी रूप से प्रशिक्षित स्थानीय युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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इसके बावजूद बाहरी राज्य के व्यक्ति की कथित रूप से अनियमित तरीके से नियुक्ति किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अस्पताल प्रबंधन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

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डीसी से की गई ये प्रमुख मांगें
अनीष गोप ने उपायुक्त से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, संबंधित कर्मी के सभी शैक्षणिक एवं तकनीकी प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाए तथा जांच पूरी होने तक साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए उसे तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए। साथ ही, यदि नियुक्ति में अनियमितता पाई जाती है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।

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शिकायत सामने आने के बाद अब पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
इस दौरान जिला उपाध्यक्ष भुवनेश्वर तियू, जिला महासचिव सचिन बिरुवा, जिला महासचिव आयुष, उदय, आकाश गोप एवं आर्यन पूर्ति सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

RBSK के ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम में 200 से अधिक बच्चों की हुई हृदय जांच, जरूरतमंदों का होगा निःशुल्क ऑपरेशन

RBSK के ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम में 200 से अधिक बच्चों की हुई हृदय जांच, जरूरतमंदों का होगा निःशुल्क ऑपरेशन

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला स्वास्थ्य समिति एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सदर अस्पताल, चाईबासा में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त मनीष कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी, सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के हृदय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण कुमार, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक तथा बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित थे।


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कार्यक्रम के दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए 200 से अधिक बच्चों की विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा हृदय संबंधी विस्तृत जांच की गई। जांच के बाद जिन बच्चों में जन्मजात अथवा अन्य गंभीर हृदय रोग की पुष्टि या आशंका पाई गई, उन्हें आगे की विशेषज्ञ चिकित्सा एवं आवश्यकता पड़ने पर निःशुल्क हृदय ऑपरेशन के लिए चिन्हित किया गया।

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यह सुविधा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम तथा अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के सहयोग से उपलब्ध कराई जाएगी।

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इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि स्वस्थ बचपन ही विकसित समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि आर्थिक अभाव के कारण कोई भी बच्चा बेहतर उपचार से वंचित न रहे। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि बच्चों में हृदय रोग या किसी अन्य गंभीर बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो वे तुरंत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों से संपर्क कर उपलब्ध निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाएं।

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सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्मजात हृदय रोग सहित अन्य गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर बच्चों को विशेषज्ञ संस्थानों में रेफर किया जाता है। उन्होंने कहा कि ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ पहल के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निःशुल्क हृदय ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

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एमजीएम अस्पताल के होमगार्ड जवानों को बड़ी राहत, पांच माह का लंबित वेतन जल्द होगा जारी

एमजीएम अस्पताल के होमगार्ड जवानों को बड़ी राहत, पांच माह का लंबित वेतन जल्द होगा जारी

जमशेदपुर | जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में कार्यरत होमगार्ड जवानों के लिए राहत भरी खबर है। अस्पताल में तैनात जवानों का पिछले पांच महीनों से लंबित वेतन अब जल्द जारी किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, बकाया वेतन के भुगतान के लिए आवश्यक राशि अस्पताल अधीक्षक के खाते में भेज दी गई है और भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होने वाली है।

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जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने बताया कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण होमगार्ड जवानों और उनके परिवारों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने लंबित वेतन के भुगतान के लिए आवश्यक राशि का आवंटन कर दिया है।

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विधायक ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि एक महिला होमगार्ड जवान ने फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया था। हालांकि, चिकित्सकों की तत्परता से उसकी जान बचा ली गई। घटना के बाद उन्होंने अस्पताल पहुंचकर होमगार्ड जवानों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं की जानकारी ली।

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सरयू राय के अनुसार, उन्होंने अस्पताल परिसर से ही राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से दूरभाष पर बातचीत कर लंबित वेतन शीघ्र जारी करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि यदि दो दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो वे सरकार के खिलाफ आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।

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विधायक ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि होमगार्ड जवानों का लंबित वेतन जल्द जारी कर दिया जाएगा। अब भुगतान के लिए राशि उपलब्ध कराए जाने के बाद सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे सैकड़ों होमगार्ड जवानों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

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सोनम वांगचुक प्रकरण पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

सोनम वांगचुक प्रकरण पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

चाईबासा | लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक से जुड़े घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। रविवार को कांग्रेस के जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने कहा कि जनहित, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों की बात करने वालों की आवाज दबाने का कोई भी प्रयास लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना पर सीधा प्रहार है।

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त्रिशानु राय ने कहा कि सोनम वांगचुक किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि लद्दाख के पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय लोगों के अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे व्यक्ति की आवाज को दबाने का प्रयास केंद्र सरकार की लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति असहिष्णुता को दर्शाता है।

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उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश में जो भी व्यक्ति जनता के अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक मूल्यों की बात करता है, उसे डराने और दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस प्रकार की राजनीति का पुरजोर विरोध करती है। लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है।

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कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार को दमन और टकराव की राजनीति छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों की भावनाओं, उनकी मांगों और पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जनता की आवाज को बलपूर्वक दबाने से समस्याओं का समाधान नहीं होता, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का विश्वास कमजोर पड़ता है।

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त्रिशानु राय ने कहा कि कांग्रेस संविधान, लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष करने वाले प्रत्येक नागरिक के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को दबाने का हर प्रयास लोकतांत्रिक भारत की मूल भावना के विरुद्ध है और कांग्रेस इसका हर स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी।

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सोनम वांगचुक के समर्थन में आए जयराम महतो, केंद्र सरकार से जल्द वार्ता की अपील

सोनम वांगचुक के समर्थन में आए जयराम महतो, केंद्र सरकार से जल्द वार्ता की अपील

रांची/नई दिल्ली | लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के केंद्रीय अध्यक्ष एवं डुमरी विधायक जयराम महतो ने केंद्र सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए उनसे शीघ्र सकारात्मक बातचीत करने और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

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जयराम महतो ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज़ सुनना सरकार की जिम्मेदारी होती है। उनका कहना है कि लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक की मांगों का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवाद लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और सरकार को इस दिशा में संवेदनशील पहल करनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि देश के युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को सकारात्मक और संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए।

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शांतिपूर्ण आंदोलनों का सम्मान लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करता है तथा इससे जनता का सरकार पर विश्वास भी बना रहता है।

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जयराम महतो ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार जल्द ही आंदोलनकारियों के साथ वार्ता की पहल करेगी, ताकि सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए सम्मानजनक और सर्वमान्य समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि देशहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संवाद का मार्ग सबसे प्रभावी और उचित माध्यम है।

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सदर अस्पताल में प्रसूता व नवजात की मौत, परिजनों ने चिकित्सीय लापरवाही का लगाया आरोप

सदर अस्पताल में प्रसूता व नवजात की मौत, परिजनों ने चिकित्सीय लापरवाही का लगाया आरोप

जामताड़ा | जामताड़ा सदर अस्पताल में कथित चिकित्सीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। सरकारबांध निवासी रीना कुमारी नामक प्रसूता और उसके नवजात शिशु की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उपलब्ध कराई जाने वाली आवश्यक दवाइयों के बजाय उन्हें बाहर की निजी मेडिकल दुकानों से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया गया। उनका कहना है कि समय पर समुचित इलाज और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिसके कारण प्रसूता और नवजात की मौत हो गई।

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घटना के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी, संसाधनों का अभाव और जवाबदेही की कमी के कारण मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।

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परिजनों और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी या अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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साथ ही सरकारी अस्पतालों में सभी आवश्यक दवाइयों, उपकरणों और चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गोइलकेरा में आयुष उपचार से रक्तस्रावी बवासीर से मिली राहत, लाभुक ने साझा किया अनुभव

गोइलकेरा में आयुष उपचार से रक्तस्रावी बवासीर से मिली राहत, लाभुक ने साझा किया अनुभव

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन के मार्गदर्शन एवं जिले में संचालित आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत आमजन को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी क्रम में गोइलकेरा प्रखंड निवासी दीपक कुमार की स्वास्थ्य लाभ की कहानी आयुष चिकित्सा पद्धति की प्रभावशीलता का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।

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दीपक कुमार पिछले चार से पांच वर्षों से रक्तस्रावी बवासीर (ब्लीडिंग पाइल्स) की समस्या से पीड़ित थे। उन्हें प्रत्येक आठ से दस दिनों के अंतराल पर शौच के दौरान रक्तस्राव होता था, जिससे वे शारीरिक रूप से कमजोर महसूस करने लगे थे। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर उपचार कराया और लंबे समय तक दवाइयों का सेवन भी किया, लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिल सकी।
इसके बाद 16 जुलाई 2025 को उन्होंने आयुष विभाग के माध्यम से आयुष चिकित्सक डॉ. कविता मैथी से संपर्क किया।

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चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक औषधियां दी गईं तथा आवश्यक परामर्श और जीवनशैली से जुड़े सुझाव भी दिए गए। नियमित उपचार और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से कुछ ही समय में रक्तस्राव की समस्या पूरी तरह नियंत्रित हो गई और उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार होने लगा। वर्तमान में वे सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं तथा स्वयं को पहले की तुलना में अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं।

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दीपक कुमार ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्षों से चली आ रही बीमारी के कारण वे मानसिक और शारीरिक रूप से काफी परेशान थे। कई स्थानों पर इलाज कराने के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिला, लेकिन आयुष चिकित्सक के उपचार और नियमित परामर्श से उन्हें उल्लेखनीय राहत मिली। उन्होंने जिला प्रशासन एवं आयुष विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब वे बिना किसी परेशानी के अपना दैनिक जीवन सामान्य रूप से जी पा रहे हैं।

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आयुष चिकित्सक डॉ. कविता मैथी ने कहा कि बवासीर जैसी समस्याओं की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर समय पर उपचार कराने से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि नियमित दवा, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने से रोगी शीघ्र स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या को छिपाने के बजाय निकटतम आयुष स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श अवश्य लें।

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पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य जिले के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धति जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और इससे अनेक मरीज लाभान्वित हो रहे हैं। उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की कि किसी भी बीमारी की स्थिति में स्वयं उपचार करने के बजाय सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों एवं आयुष केंद्रों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर समय पर उपचार कराएं।

प्रोजेक्ट प्राण के तहत पश्चिमी सिंहभूम के 221 पंचायत सचिवालयों और विद्यालयों में लगे माहवारी स्वच्छता भस्मक

प्रोजेक्ट प्राण के तहत पश्चिमी सिंहभूम के 221 पंचायत सचिवालयों और विद्यालयों में लगे माहवारी स्वच्छता भस्मक

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा उपायुक्त श्री मनीष कुमार के नेतृत्व में संचालित “प्रोजेक्ट प्राण” के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायत सचिवालयों और विद्यालयों में माहवारी स्वच्छता हेतु सेनेटरी नैपकिन इंसिनरेटर (भस्मक) स्थापित किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित माहवारी प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से उपयोग किए गए सेनेटरी नैपकिन के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण स्वच्छता संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती थीं। इस आवश्यकता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पंचायत स्तर पर स्थायी समाधान विकसित करने का निर्णय लिया, जिसका सकारात्मक प्रभाव अब पूरे जिले में दिखाई देने लगा है।
15वें वित्त आयोग की मद से स्थानीय मुखिया एवं पंचायत सचिवों के समन्वित प्रयासों से जिले के 158 पंचायत सचिवालयों और 63 विद्यालयों, यानी कुल 221 स्थानों पर माहवारी स्वच्छता भस्मकों की स्थापना पूरी कर ली गई है। इन भस्मकों के माध्यम से उपयोग किए गए सेनेटरी नैपकिन का सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण सुनिश्चित होगा। इससे पंचायत सचिवालयों एवं विद्यालय परिसरों की स्वच्छता बेहतर होगी तथा खुले में अपशिष्ट फेंकने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

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जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि माहवारी स्वच्छता के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना, मिथकों एवं संकोच को दूर करना तथा महिलाओं एवं किशोरियों के लिए सम्मानजनक वातावरण तैयार करना भी है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक स्थापना स्थल पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहियाओं एवं छात्राओं को भस्मक के सुरक्षित उपयोग, रखरखाव तथा वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई।

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विद्यालयों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता, माहवारी के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों, संक्रमण से बचाव तथा स्वच्छता से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है और इसके प्रति किसी भी प्रकार की झिझक या सामाजिक संकोच रखने की आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों ने छात्राओं को स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर रहे और विद्यालयों में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।

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वहीं पंचायत सचिवालयों में स्थापित भस्मक ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा विभिन्न कार्यों से सचिवालय आने वाली महिलाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगे। इससे पंचायत सचिवालय महिलाओं के अनुकूल सार्वजनिक परिसरों के रूप में विकसित होंगे तथा ग्रामीण स्तर पर स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि प्रोजेक्ट प्राण का उद्देश्य पंचायत सचिवालयों को केवल प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण विकास, जनकल्याण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि माहवारी स्वच्छता महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य, गरिमा और आत्मसम्मान से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। पंचायत सचिवालयों एवं विद्यालयों में भस्मकों की स्थापना से सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी तथा स्वच्छ और स्वस्थ पंचायतों के निर्माण की दिशा में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी।

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उपायुक्त ने सभी मुखिया, पंचायत सचिवों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहियाओं एवं स्वयं सहायता समूहों से भस्मकों के नियमित उपयोग, रखरखाव और जनजागरूकता गतिविधियों को निरंतर जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब समुदाय स्वयं इन सुविधाओं को अपनाएगा और इनके संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएगा, तभी इस पहल का वास्तविक उद्देश्य सफल हो सकेगा।
जिला प्रशासन का मानना है कि महिलाओं और किशोरियों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक माहवारी प्रबंधन सुनिश्चित करना केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, गरिमा और महिला सशक्तिकरण का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसी सोच के साथ प्रोजेक्ट प्राण के अंतर्गत पंचायत सचिवालयों को आधुनिक, जनहितैषी और समावेशी सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। प्रशासन ने बताया कि भविष्य में भी इस परियोजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छता, स्वास्थ्य और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ऐसी नवाचारी पहलें लगातार जारी रहेंगी।

पश्चिमी सिंहभूम में मलेरिया का बढ़ता प्रकोप, 100 आवासीय छात्र संक्रमित; सारंडा सबसे अधिक प्रभावित

पश्चिमी सिंहभूम में मलेरिया का बढ़ता प्रकोप, 100 आवासीय छात्र संक्रमित; सारंडा सबसे अधिक प्रभावित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। जिले में अब तक लगभग 1,600 मलेरिया मरीजों की पहचान की जा चुकी है। गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान तेज कर दिया है। जानकारी के अनुसार, संक्रमण का सबसे अधिक असर सारंडा और आसपास के वन क्षेत्रों में देखा जा रहा है।

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स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर रैपिड टेस्ट किट से जांच कर रही हैं तथा संक्रमित मरीजों को तत्काल दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और मच्छरदानी वितरण का कार्य भी जारी है। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से जिले में अब तक मलेरिया से किसी की मृत्यु नहीं हुई है।
विशेष रूप से आवासीय विद्यालयों के लगभग 100 छात्र मलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने विद्यालयों में जांच और उपचार की व्यवस्था बढ़ा दी है।

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कोल्हान और गोड्डा संभाग के सात प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित
सारंडा वन क्षेत्र का विस्तार मुख्य रूप से मनोहरपुर, नोवामुंडी, गोइलकेरा और आनंदपुर प्रखंडों में होने के कारण ये क्षेत्र संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मिशन निदेशक पहुंचे सरायकेला, चार डेंजर जोन प्रखंडों पर विशेष नजर
सरायकेला: पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया से हुई हालिया मौतों के बाद राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा बुधवार को सरायकेला-खरसावां पहुंचे।

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उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में मलेरिया की स्थिति, जांच और उपचार व्यवस्था की समीक्षा की। इसके बाद सदर अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया।
कुचाई, सरायकेला, राजनगर और खरसावां डेंजर जोन घोषित
बैठक के दौरान जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. सुजाता मुर्मू ने बताया कि कुचाई, सरायकेला, राजनगर और खरसावां प्रखंडों को डेंजर जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। मानसून के दौरान इन क्षेत्रों में मलेरिया के सबसे अधिक मामले सामने आते हैं।

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मिशन निदेशक ने इन चारों प्रखंडों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानकी-मुंडा सहित स्थानीय पारंपरिक जनप्रतिनिधियों के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग बुखार होने पर झोलाछाप डॉक्टरों के बजाय सरकारी अस्पताल पहुंचकर जांच और इलाज कराएं।
उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया जांच किट और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा जरूरत पड़ने पर अन्य प्रखंडों से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिनियुक्ति (मैनपावर शिफ्टिंग) करने का आश्वासन दिया।
बैठक के बाद मिशन निदेशक ने सदर अस्पताल, सरायकेला का निरीक्षण किया। उन्होंने माइक्रोस्कोप से मलेरिया जांच की प्रक्रिया का अवलोकन किया और इंडोर वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा उपचार व्यवस्था की जानकारी ली।

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फील्ड वर्कर्स को हर महीने 100 ब्लड सैंपल जांच का लक्ष्य
मिशन निदेशक ने निर्देश दिया कि प्रत्येक फील्ड लेवल स्वास्थ्यकर्मी हर महीने कम से कम 100 ब्लड सैंपल की जांच सुनिश्चित करें।
उन्होंने चेतावनी दी कि लक्ष्य से कम जांच करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ वेतन रोकने सहित विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अगले तीन महीनों तक विशेष “मिशन मोड” में अभियान चलाया जाएगा और सभी स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित निगरानी होगी।
साथ ही निर्देश दिया गया कि अस्पताल में बुखार की शिकायत लेकर आने वाले प्रत्येक मरीज की मलेरिया जांच अनिवार्य रूप से की जाए।