चाईबासा | ‘प्रोजेक्ट जागृति–बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम’ के तहत शनिवार को सदर अस्पताल, चाईबासा परिसर में टीबी मरीजों के पोषण एवं उपचार में सहयोग के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त श्री मनीष कुमार की उपस्थिति में जिले के कुल 120 टीबी मरीजों के बीच पोषक आहार का वितरण किया गया।

इस दौरान 73 पुराने टीबी मरीजों को चौथी बार पोषक आहार उपलब्ध कराया गया, जबकि 40 नए टीबी मरीजों को पहली बार पोषक आहार दिया गया। वहीं, 07 टीबी मरीजों को दूसरी बार पोषक आहार उपलब्ध कराया गया। इस पहल का उद्देश्य टीबी मरीजों को नियमित उपचार के साथ पर्याप्त पोषण एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराकर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहायता करना है।

उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि टीबी के उपचार में दवाओं के साथ उचित पोषण और नियमित देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘प्रोजेक्ट जागृति’ के माध्यम से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक जन-केंद्रित बनाने तथा जरूरतमंद मरीजों को उपचार के साथ पोषण एवं सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि टीबी से उबरने के लिए मरीजों का नियमित रूप से दवा लेना और संतुलित एवं पौष्टिक आहार ग्रहण करना आवश्यक है। उन्होंने निक्षय मित्रों से आगे आकर टीबी मरीजों को गोद लेने तथा उपचार की अवधि में उन्हें पोषण संबंधी सहयोग प्रदान करने की अपील की।

निक्षय मित्रों ने बढ़ाया सहयोग का हाथ
कार्यक्रम के दौरान चाईबासा में निक्षय मित्रों द्वारा टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें पोषण सहयोग प्रदान किया गया। इस क्रम में फूड सेफ्टी ऑफिसर श्री धनेश्वर प्रसाद हेंब्रम ने 02 टीबी मरीजों, वरीय चिकित्सा पर्यवेक्षक श्री अवनीश कुमार सिन्हा ने 02 टीबी मरीजों, एक्स-रे टेक्निशियन सुश्री खुशबू प्रधान ने 01 टीबी मरीज तथा एपीआरओ श्री सचिन कुमार ने 01 टीबी मरीज को गोद लिया।

निक्षय मित्रों द्वारा गोद लिए गए टीबी मरीजों के बीच फूड बास्केट का वितरण किया गया। इस पहल के माध्यम से मरीजों को उपचार अवधि के दौरान नियमित पोषण संबंधी सहयोग उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य टीबी मरीजों को नियमित उपचार के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें आवश्यक पोषण एवं सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराना है। ‘प्रोजेक्ट जागृति–बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम’ के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मरीजों की समय पर जांच, नियमित उपचार, पोषण सहयोग एवं जागरूकता के माध्यम से जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

