चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय के सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डेंगू संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण तथा आगामी 11 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल सहित सिविल सर्जन, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, चिकित्सा पदाधिकारी एवं क्षेत्रीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

डेंगू की रोकथाम के लिए स्वच्छता पर जोर
बैठक में उपायुक्त ने डेंगू के संभावित संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए जिले में सघन निगरानी, मच्छर नियंत्रण, स्रोत नियंत्रण, जांच एवं उपचार के साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डेंगू की रोकथाम में आम नागरिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समय रहते समाप्त कर डेंगू के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने का निर्देश देते हुए कहा कि डेंगू फैलाने वाला मच्छर ठहरे हुए साफ पानी में भी पनप सकता है। इसलिए घर, कार्यालय, विद्यालय एवं आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा नहीं होने देना जरूरी है।

उन्होंने कूलर, गमले, पानी की टंकी, बाल्टी, ड्रम, पुराने टायर, टूटे बर्तन, नारियल के खोल सहित ऐसे सभी पात्रों की नियमित सफाई और उनमें जमा पानी की निकासी सुनिश्चित करने को कहा। पानी की टंकियों एवं अन्य जलपात्रों को ढककर रखने तथा सप्ताह में कम से कम एक बार पानी खाली कर पात्रों की अच्छी तरह सफाई करने की अपील की गई।
मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील
उपायुक्त ने जिलेवासियों से पूरी बांह के कपड़े पहनने, मच्छरदानी का उपयोग करने तथा मच्छरों से बचाव के सुरक्षित उपाय अपनाने की अपील की। साथ ही जलजमाव वाले स्थानों की तत्काल सूचना संबंधित स्वास्थ्य एवं स्थानीय निकाय के कर्मियों को देने को कहा।

क्षेत्रीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को घर-घर संपर्क कर लोगों को डेंगू के लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी देने तथा संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया।
डेंगू के लक्षणों को लेकर रहें सतर्क
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डेंगू संक्रमण में सामान्यतः तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, अत्यधिक कमजोरी तथा त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण सामने आने पर लापरवाही न बरतते हुए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की गई।

तेज बुखार के साथ लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, नाक या मसूड़ों से रक्तस्राव, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी अथवा असामान्य रक्तस्राव जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा लेने की सलाह दी गई।
उपायुक्त ने चिकित्सा पदाधिकारियों को संदिग्ध डेंगू मरीजों की समय पर जांच, आवश्यक उपचार एवं निगरानी सुनिश्चित करने तथा जिले में संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डेंगू की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सामूहिक प्रयास से ही इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
11 सितंबर को छह स्थानों पर होगा रक्तदान शिविर
बैठक के दूसरे चरण में 11 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले स्वैच्छिक रक्तदान शिविर की तैयारियों की समीक्षा की गई। जिले में एक साथ छह स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे।

रक्तदान शिविर के आयोजन स्थल:
सदर अस्पताल, चाईबासा
अनुमंडल अस्पताल, चक्रधरपुर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बंदगांव
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गोईलकेरा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, झींकपानी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तांतनगर
उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को शिविर स्थलों पर रक्तदाताओं के पंजीकरण, चिकित्सकीय जांच, रक्त संग्रह, आवश्यक चिकित्सा उपकरण एवं अन्य सभी व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि रक्तदान एक महत्वपूर्ण मानवीय सेवा है। आपात स्थिति, दुर्घटना, प्रसव, गंभीर बीमारी एवं अन्य चिकित्सा आवश्यकताओं के दौरान रक्त की उपलब्धता मरीज के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है। उन्होंने स्वस्थ एवं पात्र नागरिकों, युवाओं, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न संस्थाओं से 11 सितंबर को अपने नजदीकी निर्धारित केंद्र पर पहुंचकर स्वैच्छिक रक्तदान में भाग लेने की अपील की।
उपायुक्त ने कहा कि डेंगू की रोकथाम के लिए स्वच्छता और सतर्कता तथा रक्तदान के लिए जनभागीदारी, दोनों ही स्वस्थ एवं सुरक्षित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जिलेवासियों से स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन के प्रयासों में सक्रिय सहयोग करने की अपील की।

