चाईबासा | एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामहरि ने मंझारी प्रखंड में 15वें वित्त आयोग, मनरेगा एवं अन्य विकास योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, अवैध वसूली, प्रशासनिक संरक्षण तथा विकास कार्यों की बदहाली को लेकर पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। उन्होंने मामले की अविलंब उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि विकास योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के बजाय उन्हें कथित तौर पर कमीशनखोरी का माध्यम बना दिया गया है। ग्रामीणों, लाभुक समितियों और कार्य निष्पादन समितियों से योजनाओं की स्वीकृति, मापी, प्राक्कलन तथा भुगतान के नाम पर अवैध वसूली किए जाने की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।

रामहरि ने सवाल उठाया कि यदि आरोप सही हैं, तो इतने लंबे समय से यह सब किसके संरक्षण में संचालित हो रहा था।
रामहरि ने कहा कि मंझारी प्रखंड में विकास योजनाओं की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं, कई कार्यों की गति रुकी हुई है और मनरेगा जैसी गरीबों की जीवनरेखा मानी जाने वाली योजना महीनों से प्रभावी रूप से ठप बताई जा रही है।

इसका सीधा असर मजदूरों, आदिवासियों, किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है। रोजगार के अभाव में लोग पलायन करने को मजबूर हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी कथित तौर पर मौन बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि गरीबों के अधिकार का पैसा यदि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय और प्रशासनिक विफलता का गंभीर उदाहरण है। जिन अधिकारियों पर विकास कार्यों की जिम्मेदारी है, यदि उन्हीं पर भ्रष्टाचार और संरक्षण के आरोप लग रहे हों, तो जनता का विश्वास पूरी व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है।

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रामहरि ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को उनके वर्तमान दायित्वों से अलग किया जाए। साथ ही मंझारी प्रखंड की सभी पंचायतों में 15वें वित्त आयोग, मनरेगा एवं अन्य विकास योजनाओं का विशेष ऑडिट और सामाजिक अंकेक्षण कराया जाए। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कथित भ्रष्टाचार और जनविरोधी कार्यशैली पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो इसका असर केवल विकास योजनाओं पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि ग्रामीणों का प्रशासन पर विश्वास भी कमजोर होगा।

उन्होंने कहा कि जनता के अधिकारों और गरीबों के रोजगार पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), राज्य सरकार एवं अन्य सक्षम संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष भी उठाया जाएगा।


























































