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पश्चिमी सिंहभूम में ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा, प्रशासन व ‘प्रदान’ के बीच समन्वय पर जोर

पश्चिमी सिंहभूम में ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा, प्रशासन व ‘प्रदान’ के बीच समन्वय पर जोर

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में बुधवार को जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में गैर-सरकारी संस्था प्रदान (PRADAN) के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशिक्षु आईएएस सुश्री ईरा जोरवाल, पीएमयू के सदस्य तथा प्रदान संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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बैठक के दौरान प्रदान संस्था के प्रतिनिधियों ने जिले में संचालित आजीविका संवर्धन से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। संस्था ने बताया कि वर्तमान में सदर चाईबासा, हाटगम्हरिया, टोंटो, चक्रधरपुर, सोनुआ एवं बंदगांव प्रखंडों में लिफ्ट सिंचाई, मछली पालन, हल्दी प्रसंस्करण, कृषि आधारित गतिविधियों तथा अन्य आजीविका कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदान संस्था और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (JSLPS) के बीच बेहतर समन्वय एवं तालमेल आवश्यक है।

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उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों, विशेषकर किसानों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को आजीविका आधारित योजनाओं से जोड़कर उन्हें योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों एवं कृषि संभावनाओं का बेहतर उपयोग करते हुए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रसार, मत्स्य पालन, हल्दी प्रसंस्करण तथा कृषि एवं वनोपज आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन और प्रभावी बाजारीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे ग्रामीणों की आय में स्थायी वृद्धि होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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बैठक में जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों एवं प्रदान संस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान आजीविका संवर्धन, लिफ्ट एवं टपक सिंचाई, मोबाइल सिंचाई व्यवस्था, मत्स्य पालन, हल्दी प्रोसेसिंग तथा कृषि एवं खाद्य उत्पादों के प्रभावी विपणन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अधिक से अधिक लाभुकों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार करने पर भी बल दिया गया।

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उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम को “सशक्त सिंहभूम” बनाने के लिए सभी विभागों, संस्थाओं एवं विकास सहयोगियों का सामूहिक प्रयास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिले का समग्र विकास तभी संभव है, जब ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और प्रत्येक ग्रामीण परिवार की आय में सतत वृद्धि होगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं संस्था के प्रतिनिधियों से समन्वित प्रयासों के माध्यम से ग्रामीण विकास एवं आजीविका संवर्धन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल करने का आह्वान किया।

आधुनिक केज कल्चर से बदली ग्रामीण की तस्वीर, मत्स्य पालन बना आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम

आधुनिक केज कल्चर से बदली ग्रामीण की तस्वीर, मत्स्य पालन बना आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग द्वारा संचालित आधुनिक मत्स्य पालन कार्यक्रम ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। सदर प्रखंड के छोटा जयपुर गांव निवासी रामसिंह मुन्दुईया इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन करने वाले रामसिंह ने आधुनिक केज कल्चर (Cage Culture) तकनीक अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि आसपास के ग्रामीणों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

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पहले रामसिंह पारंपरिक खेती और छोटे-मोटे कार्यों के सहारे अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान उन्हें मत्स्य विभाग की केज कल्चर आधारित योजना की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने इस तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया और आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

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योजना के तहत उन्हें 2.70 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज का चयन, संतुलित आहार प्रबंधन, जल गुणवत्ता बनाए रखने तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने संबंधी तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया। विभागीय विशेषज्ञों के सतत मार्गदर्शन में उन्होंने जलाशय में आधुनिक केज स्थापित कर पंगास एवं तिलापिया प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया।

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वर्तमान में रामसिंह प्रतिवर्ष लगभग 5 से 6 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें 3.5 से 4.5 लाख रुपये तक की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यकताओं तथा भविष्य की योजनाओं को अधिक आत्मविश्वास के साथ पूरा कर पा रहे हैं।
रामसिंह की सफलता का प्रभाव केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर गांव एवं आसपास के क्षेत्रों के अनेक किसान और युवा भी आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

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उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि पात्र लाभुकों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि रामसिंह मुन्दुईया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और प्रशासनिक सहयोग के समन्वय से ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं। उन्होंने जिले के युवाओं एवं किसानों से विभागीय योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

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जिला मत्स्य पदाधिकारी श्री नवीन कुमार ने कहा कि आधुनिक केज कल्चर पद्धति कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली प्रभावी तकनीक है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक इच्छुक मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण, तकनीकी परामर्श और विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए, ताकि जिले में मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ ग्रामीणों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो सके। उन्होंने बताया कि विभाग लाभुकों को प्रत्येक चरण में आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रहा है।
अपने अनुभव साझा करते हुए लाभुक रामसिंह मुन्दुईया ने कहा, “पहले सीमित आय के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था, लेकिन मत्स्य विभाग से मिले प्रशिक्षण और सहयोग ने मेरी जिंदगी बदल दी। आज मैं सम्मानजनक आय अर्जित कर रहा हूं और भविष्य को लेकर आश्वस्त हूं। मैं सभी ग्रामीण भाइयों-बहनों से अपील करता हूं कि वे सरकारी योजनाओं पर विश्वास करें, प्रशिक्षण प्राप्त करें और आधुनिक मत्स्य पालन अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं।”

वैज्ञानिक धान खेती से बदली महिला किसान की तस्वीर, आय और उत्पादन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि

वैज्ञानिक धान खेती से बदली महिला किसान की तस्वीर, आय और उत्पादन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि

चाईबासा |  पश्चिमी सिंहभूम जिले में कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के तहत किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के प्रयास सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के किसान कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर रहे हैं। इसका प्रेरक उदाहरण सदर प्रखंड की तुईबीर पंचायत के पम्पड़ा गांव की महिला किसान श्रीमती बेलमती देवगम हैं, जिन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से धान की खेती कर न केवल अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।

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बेलमती देवगम एक साधारण कृषक परिवार से हैं। चार सदस्यीय परिवार की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। उनके पास कुल चार एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें दो एकड़ सिंचित और दो एकड़ असिंचित भूमि शामिल है। पहले वे परंपरागत तरीके से लगभग तीन एकड़ में धान तथा शेष भूमि पर मौसमी सब्जियों की खेती करती थीं। सीमित उत्पादन और बढ़ती लागत के कारण खेती से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था।

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इसी दौरान गांव के किसान मित्र के माध्यम से उन्हें कृषि विभाग के प्रखंड स्तरीय खरीफ प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी मिली। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग लिया, जहां कृषि विशेषज्ञों ने धान उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों, बीज उपचार, नर्सरी प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, खरपतवार नियंत्रण, जल संरक्षण तथा पौधों की उचित दूरी पर रोपाई सहित आधुनिक कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रमाणित धान बीज भी उपलब्ध कराया गया।

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प्रशिक्षण से प्रेरित होकर बेलमती देवगम ने पहली बार वैज्ञानिक पद्धति से धान की खेती की। उन्होंने 25×25 सेंटीमीटर की दूरी पर एक-एक पौधे की रोपाई की, खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर कोनो वीडर का उपयोग किया तथा कृषि विभाग के सभी तकनीकी सुझावों का पालन किया। इसका परिणाम यह हुआ कि पौधों की वृद्धि बेहतर हुई, अधिक संख्या में कल्ले निकले और धान की गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

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वैज्ञानिक खेती अपनाने से उन्हें पहले की तुलना में लगभग दोगुना उत्पादन प्राप्त हुआ। इससे परिवार के लिए वर्षभर पर्याप्त धान उपलब्ध होने के साथ अतिरिक्त उपज बेचकर अच्छी आय भी हुई। बढ़ी हुई आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा बच्चों की शिक्षा, पोषण और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना आसान हो गया। आज बेलमती आत्मविश्वास के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ आसपास के किसानों को भी वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं।
बेलमती देवगम ने बताया कि कृषि विभाग से मिले प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी खेती करने की सोच बदल दी है। अब वे प्रत्येक मौसम में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती करना चाहती हैं और विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेने का संकल्प लिया है।
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक लाभकारी बनाने तथा वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। बेलमती देवगम की सफलता इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है।

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जिला कृषि पदाधिकारी अमरजीत हुजूर ने कहा कि विभाग का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक एवं उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ना है। इसके लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण शिविर, कृषक गोष्ठी और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक धान खेती की तकनीक अपनाने से कम बीज, कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है।
जिला प्रशासन ने किसानों से कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी मार्गदर्शन का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि वैज्ञानिक खेती अपनाकर न केवल उत्पादन और आय में वृद्धि की जा सकती है, बल्कि खेती को टिकाऊ, लाभकारी और आत्मनिर्भर आजीविका का सशक्त माध्यम भी बनाया जा सकता है।

सरायकेला-खरसावां में झारखंड आंदोलनकारियों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी, कफन ओढ़कर जताया विरोध

सरायकेला-खरसावां में झारखंड आंदोलनकारियों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी, कफन ओढ़कर जताया विरोध

सरायकेला-खरसावां | झारखंड आंदोलनकारियों का अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को चौथे दिन भी जारी रहा। धरना पर बैठे आंदोलनकारियों ने कफन ओढ़कर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार व प्रशासन के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की।

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आंदोलनकारी धनपति सरदार ने कहा कि कफन ओढ़कर विरोध करना कोई सामान्य प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह उनकी मांगों के प्रति अंतिम प्रतिबद्धता और गहरे असंतोष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी अब ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं, जहां उन्हें अपने जीवन की भी परवाह नहीं रह गई है।

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धनपति सरदार ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन झारखंड आंदोलनकारियों की समस्याओं तथा मांगों के साथ लगातार उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के साथ हो रहे इस व्यवहार को सहने से बेहतर वे मौत को गले लगाना समझते हैं। यह उनका आक्रोश और पीड़ा की चरम स्थिति है।

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उन्होंने कहा कि चिन्हित झारखंड आंदोलनकारियों का यह कदम शासन-प्रशासन की नीतियों के प्रति उनके गहरे अविश्वास को दर्शाता है। आंदोलनकारियों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर उन्हें उचित सम्मान, अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

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आंदोलनकारियों ने कहा कि सरायकेला-खरसावां क्षेत्र झारखंड आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां के आंदोलनकारियों ने अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया और बलिदान दिए। कफन ओढ़कर प्रदर्शन के माध्यम से वे सत्ता को यह याद दिलाना चाहते हैं कि झारखंड राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान की नींव पर खड़ा है।

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धरना में राजेश मुंदरी, योगेश्वर बेसरा, तारापाड़ा महतो, जन्मजय मंडल, शीला मालती टुडू, बिजली, शमशान सिंह मुंडा, भगत बेसरा, लखन मुड़िया, दीपक प्रधान, दादीकुई, विजय, वीरेंद्र, लखन, लाभों महतो, बया सरदार, सोनाराम सोरेन, गोपाल, कृष्ण, सिलाई, पंचा सरदार और हरिचरण पांडेया सहित अन्य आंदोलनकारी शामिल रहे।

चाईबासा में अवैध चुलाई शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, तीन भट्ठियां ध्वस्त

चाईबासा में अवैध चुलाई शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, तीन भट्ठियां ध्वस्त

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में अवैध चुलाई शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ उत्पाद विभाग का विशेष अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में गुरुवार को उत्पाद विभाग की टीम ने मुफ्फसिल और झींकपानी थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर तीन अवैध चुलाई शराब भट्ठियों को ध्वस्त कर दिया।

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अभियान के दौरान मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के करकट्टा गांव में संचालित एक अवैध शराब भट्ठी को पूरी तरह नष्ट किया गया। वहीं, झींकपानी थाना क्षेत्र के गुड़ा गांव में चल रही दो अन्य अवैध शराब भट्ठियों पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें ध्वस्त कर दिया गया।

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छापेमारी के दौरान करीब 40 लीटर अवैध चुलाई शराब और शराब निर्माण के लिए रखा गया लगभग 1,200 किलोग्राम जावा-महुआ बरामद किया गया। उत्पाद विभाग की टीम ने बरामद जावा-महुआ को नियमानुसार मौके पर ही नष्ट कर दिया।

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इस मामले में अवैध शराब भट्ठियों के संचालन से जुड़े तीन आरोपियों के खिलाफ झारखंड उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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इसके अतिरिक्त, उत्पाद विभाग ने जिले में लाइसेंसी शराब दुकानों के नियमित निरीक्षण अभियान के तहत टुंगरी स्थित कंपोजिट शराब दुकान और मेडिकल क्षेत्र, चाईबासा स्थित कंपोजिट शराब दुकान का भी औचक निरीक्षण किया।

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निरीक्षण के दौरान दुकान संचालकों को अनुज्ञप्ति की शर्तों के अनुरूप दुकान संचालन, निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर ही शराब बिक्री तथा सभी वैधानिक नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

रायगढ़ में मूसलाधार बारिश के बीच पातालगंगा नदी में बहे करीब 3,000 एलपीजी सिलेंडर

रायगढ़ में मूसलाधार बारिश के बीच पातालगंगा नदी में बहे करीब 3,000 एलपीजी सिलेंडर

रायगढ़ | महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पातालगंगा नदी में करीब 3,000 एलपीजी गैस सिलेंडर बहते दिखाई दिए हैं। नदी में बहते सिलेंडरों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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जानकारी के अनुसार, पनवेल तालुका के चावणे स्थित एचपीसीएल के पातालगंगा एलपीजी बॉटलिंग प्लांट परिसर में भारी बारिश के कारण जलभराव हो गया। इसके बाद बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर बहकर पातालगंगा नदी में पहुंच गए। बताया जा रहा है कि बहने वाले सिलेंडरों में कुछ भरे हुए हैं, जबकि कुछ खाली हैं।

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घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। रायगढ़ के जिलाधिकारी किशन जावले ने नागरिकों से अपील की है कि नदी या उसके किनारे बहकर आए किसी भी गैस सिलेंडर के पास न जाएं। उन्होंने लोगों से सिलेंडर उठाने, घर ले जाने, छूने, खोलने या इस्तेमाल करने की कोशिश न करने की भी अपील की है।

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जिलाधिकारी ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बहकर आए सिलेंडरों में गैस भरी हुई है या नहीं और उनकी स्थिति कितनी सुरक्षित है। ऐसे में किसी भी सिलेंडर के साथ छेड़छाड़ करना बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है।

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प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि पातालगंगा नदी या आसपास के क्षेत्रों में कहीं भी गैस सिलेंडर दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को दें। लोगों को सिलेंडरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

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लगातार बारिश के बीच पातालगंगा नदी में बहते हजारों गैस सिलेंडरों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और राहत व बचाव की कार्रवाई जारी है।

जिला परिषद परिसर के विकास को लेकर उपायुक्त ने किया निरीक्षण, मास्टर प्लान के तहत होगा आधुनिकीकरण

जिला परिषद परिसर के विकास को लेकर उपायुक्त ने किया निरीक्षण, मास्टर प्लान के तहत होगा आधुनिकीकरण

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने गुरुवार को उप विकास आयुक्त श्री उत्कर्ष कुमार एवं जिला पंचायती राज पदाधिकारी श्रीमती सविता टोपनो की उपस्थिति में चाईबासा स्थित जिला परिषद कार्यालय परिसर और परिसर में संचालित दुकानों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान जिला अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता सहित संबंधित कर्मी उपस्थित थे।

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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने जिला परिषद कार्यालय भवन, परिसर की आधारभूत संरचनाओं, दुकानों की वर्तमान स्थिति, आवागमन व्यवस्था, उपयोगिता तथा रखरखाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं का गहन अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित अभियंताओं से भवनों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं, मरम्मत की आवश्यकता और भविष्य की विकास योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

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उपायुक्त ने कहा कि जिला परिषद कार्यालय एवं परिसर में स्थित दुकानों को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और जनोपयोगी स्वरूप देने के उद्देश्य से एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस मास्टर प्लान के अनुरूप कार्यालय भवन, दुकानों तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं का चरणबद्ध पुनर्निर्माण एवं आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य परिसर का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना तथा आम नागरिकों और दुकानदारों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

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उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित मास्टर प्लान में भवनों की संरचनात्मक मजबूती, समुचित पार्किंग व्यवस्था, बेहतर जल निकासी, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल सुविधा, हरित क्षेत्र के विकास और अन्य नागरिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही दुकानों के नियोजित एवं व्यवस्थित विकास को सुनिश्चित करते हुए परिसर को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप देने के लिए आवश्यक कार्रवाई शीघ्र शुरू की जाए।

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निरीक्षण के दौरान जिला परिषद कार्यालय परिसर के समग्र विकास, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। जिला प्रशासन का प्रयास है कि जिला परिषद परिसर को सुव्यवस्थित, आधुनिक और नागरिक सुविधाओं से युक्त परिसर के रूप में विकसित किया जाए, जिससे आम जनता एवं संबंधित हितधारकों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।

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भाजपा मंगलहाट गम्हरिया मंडल की मासिक बैठक आयोजित, SIR अभियान में सहयोग का आह्वान

भाजपा मंगलहाट गम्हरिया मंडल की मासिक बैठक आयोजित, SIR अभियान में सहयोग का आह्वान

चक्रधरपुर | चक्रधरपुर में भारतीय जनता पार्टी के मंगलहाट गम्हरिया मंडल की मासिक बैठक मंडल अध्यक्ष बृजमोहन चातोंबा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में मंडल प्रभारी चंद्र मोहन तियू तथा पूर्व जिला महामंत्री प्रताप कटियार महतो मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंडल अध्यक्ष बृजमोहन चातोंबा ने हाल के दिनों में मंडल स्तर पर आयोजित विभिन्न पार्टी कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कार्यक्रमों को सफल बनाने में कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना की।


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पूर्व जिला महामंत्री प्रताप कटियार महतो ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ता अपने-अपने बूथों पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ समन्वय स्थापित कर मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में सहयोग करें।

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उन्होंने कहा कि फॉर्म वितरण से लेकर फॉर्म जमा कराने तक कार्यकर्ता हर स्तर पर मतदाताओं की सहायता करें, ताकि कोई भी वैध मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी अवैध व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क कर आवश्यक सहयोग लिया जा सकता है।

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मंडल प्रभारी चंद्र मोहन तियू ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने पार्टी द्वारा दिए गए कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन किया है और वे इसके लिए बधाई के पात्र हैं। उन्होंने पंचायत स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित कर स्थानीय समस्याओं की जानकारी लेने, केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने तथा लाभार्थियों से संपर्क स्थापित करने पर जोर दिया।
उन्होंने संगठन विस्तार के लिए नए लोगों को पार्टी से जोड़ने और पार्टी की नीतियों एवं सिद्धांतों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का भी आह्वान किया।

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बैठक के बाद सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत स्वर्गीय राधे सुम्बरूई की स्मृति में पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन गीता बिरूवा ने किया।
बैठक में पूर्व मंडल अध्यक्ष अभिजीत गागराई, शत्रुघ्न हेंब्रम, दिलीप गुप्ता, खुशबू हेम्ब्रम, सुमन गागराई बिरुवा, सितांशु बेहरा, धनसिंह पिंगुवा, सुनीता सिंकु, मंगल हेम्ब्रम, कृष्णा गागराई, हरिकृष्णा प्रधान, गीता बिरूवा, रवींद्र दास, मुक्तमनी सिंकु, प्रदीप नायक, विनोद नायक और विजय पिंगुवा सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

रांची में युवक की संदिग्ध मौत के बाद तनाव, परिजनों ने फाइनेंस कंपनी पर मानसिक प्रताड़ना का लगाया आरोप

रांची में युवक की संदिग्ध मौत के बाद तनाव, परिजनों ने फाइनेंस कंपनी पर मानसिक प्रताड़ना का लगाया आरोप

रांची | राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। मृतक की पहचान सूरज नायक के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उनका शव स्मार्ट सिटी क्षेत्र में फांसी के फंदे से लटका हुआ मिला।

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घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने धुर्वा स्थित सेक्टर-3 मार्केट के पास विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

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परिजनों का आरोप है कि सूरज नायक पर एक फाइनेंस कंपनी की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा था। उनका कहना है कि कंपनी के कर्मचारी और अधिकारी ऋण की किस्तों की वसूली को लेकर बार-बार उनके घर पहुंचते थे तथा गाली-गलौज, धमकी और मानसिक प्रताड़ना करते थे।

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परिजनों ने विशेष रूप से बजाज फाइनेंस के कुछ कर्मचारियों और एक मैनेजर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक संबंधित फाइनेंस कंपनी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। सूचना मिलने पर धुर्वा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया।

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पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम एवं अन्य कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, युवक की मौत के कारणों की हर पहलू से जांच की जा रही है। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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समाचार लिखे जाने तक पुलिस की ओर से मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। मामले के वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

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पश्चिमी सिंहभूम में आहार दिवस आयोजित, सभी पीडीएस दुकानों पर जुलाई माह के खाद्यान्न का वितरण

पश्चिमी सिंहभूम में आहार दिवस आयोजित, सभी पीडीएस दुकानों पर जुलाई माह के खाद्यान्न का वितरण

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सोमवार को जिले की सभी जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानों पर आहार दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और ग्रीन राशन कार्ड योजना के तहत जुलाई माह का खाद्यान्न पात्र लाभुकों के बीच वितरित किया गया।

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राशन वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी, सुचारु और समयबद्ध ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से जिले के सभी प्रखंडों में व्यापक निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की गई। आहार दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन ने जिले के सभी 18 प्रखंडों के लिए वरीय पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की।

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प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों ने अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों में जन वितरण प्रणाली दुकानों का निरीक्षण कर राशन वितरण व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान खाद्यान्न की उपलब्धता, स्टॉक पंजी, वितरण पंजी, इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (ई-पॉस) मशीन के माध्यम से हो रहे वितरण, लाभुकों की उपस्थिति तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप वितरण प्रक्रिया की जांच की गई।

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निरीक्षण के क्रम में अधिकारियों ने राशन प्राप्त करने आए लाभुकों से भी संवाद किया। उनसे वितरण व्यवस्था, खाद्यान्न की गुणवत्ता, निर्धारित मात्रा और किसी प्रकार की समस्या के संबंध में जानकारी ली गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि सभी पात्र कार्डधारियों को बिना किसी भेदभाव और अनावश्यक विलंब के निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं नियमसम्मत रहे।

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जिला प्रशासन ने सभी जन वितरण प्रणाली दुकानदारों को निर्देश दिया है कि राशन वितरण के दौरान सरकार द्वारा निर्धारित सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाए। साथ ही प्रत्येक लाभुक का प्रमाणीकरण कर उसे निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए और वितरण से संबंधित सभी अभिलेखों का नियमित संधारण सुनिश्चित किया जाए।

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जिला प्रशासन का उद्देश्य आहार दिवस के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, ताकि खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक समय पर और सुगमता से पहुंच सके।

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निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने वितरण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों एवं जन वितरण प्रणाली दुकानदारों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
जिला प्रशासन ने सभी पात्र राशन कार्डधारियों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि के अनुसार अपने निकटतम जन वितरण प्रणाली दुकान से जुलाई माह का खाद्यान्न प्राप्त करें।

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किसी भी प्रकार की अनियमितता या समस्या सामने आने पर इसकी सूचना संबंधित प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी अथवा जिला आपूर्ति कार्यालय को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।