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सरायकेला-खरसावां में अफीम की खेती और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रशासन सख्त

सरायकेला-खरसावां में अफीम की खेती और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रशासन सख्त

सरायकेला | सरायकेला-खरसावां जिले में अफीम की खेती, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए प्रशासन ने निगरानी और कार्रवाई तेज करने का निर्णय लिया है। इसको लेकर समाहरणालय सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में मादक पदार्थ नियंत्रण समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में संबंधित अधिकारियों को नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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उपायुक्त ने पूर्व में अफीम की खेती के मामले सामने आए क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि संभावित क्षेत्रों की पहचान के लिए अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी संयुक्त रूप से कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही, अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को नियमित निगरानी करते हुए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया।

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उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि जिले में अफीम की खेती और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार को किसी भी स्थिति में बढ़ावा नहीं मिलने दिया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर त्वरित कार्रवाई और जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
अवैध शराब के खिलाफ नियमित छापेमारी के निर्देश
बैठक में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए नियमित जांच एवं छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश उत्पाद अधीक्षक को दिया गया। सड़क किनारे, हाट-बाजार, होटल एवं भोजनालयों में अवैध रूप से शराब बेचने या परोसने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया।

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पुलिस अधीक्षक मनोज सर्वांगीयारी ने सभी थाना प्रभारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त और निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने मादक पदार्थों से संबंधित सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने तथा अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

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इसके अलावा शराब के नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया। बैठक में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क की पहचान करने तथा सूचना मिलने पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया गया।
उपायुक्त ने कहा कि मादक पदार्थों और अवैध शराब के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी, सघन जांच, छापेमारी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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बैठक में उप विकास आयुक्त रीना हांसदा, परियोजना निदेशक उषा मुंडू, आदित्यपुर नगर आयुक्त एजाज अनवर, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय, सरायकेला एवं चांडिल के अनुमंडल पदाधिकारी व अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार, उत्पाद अधीक्षक, जिला परिवहन पदाधिकारी, सभी अंचल अधिकारी, थाना प्रभारी सहित समिति के अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

1.4 एकड़ जमीन से बदली रोयबारी पूर्ति की जिंदगी, आधुनिक खेती ने बनाया आत्मनिर्भर

1.4 एकड़ जमीन से बदली रोयबारी पूर्ति की जिंदगी, आधुनिक खेती ने बनाया आत्मनिर्भर

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा देने और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित सरकारी योजनाओं का असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। सदर चाईबासा प्रखंड के नरसन्डा पंचायत अंतर्गत बाईहातु गांव की महिला कृषक रोयबारी पूर्ति ने सीमित संसाधनों के बावजूद तकनीकी मार्गदर्शन और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अपनी मजबूत आजीविका का साधन बनाया है।

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रोयबारी पूर्ति के पास करीब 1.4 एकड़ भूमि है। पहले पारंपरिक तरीके से खेती करने और सीमित संसाधनों के कारण उन्हें अपेक्षाकृत कम उत्पादन मिलता था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें खेती के साथ मजदूरी पर भी निर्भर रहना पड़ता था। कृषि विभाग से प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग मिलने के बाद उन्होंने खेती के तरीके में बदलाव किया।

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तकनीकी मार्गदर्शन से बढ़ा उत्पादन

कृषि विशेषज्ञों और विभागीय कर्मियों के मार्गदर्शन में रोयबारी ने उन्नत कृषि तकनीक और बेहतर उत्पादन पद्धतियों को अपनाया। खेत में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने से उत्पादन में वृद्धि हुई। अब वह अपनी उपज को स्थानीय हाट-बाजारों में बेचकर सीधे आमदनी अर्जित कर रही हैं।

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रोयबारी के मुताबिक, कृषि विभाग से मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन ने उन्हें खेती को केवल पारंपरिक काम के बजाय आय का स्थायी और लाभकारी माध्यम बनाने का रास्ता दिखाया। खेती को व्यवस्थित तरीके से करने से परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है।

आसपास के किसानों के लिए बनीं प्रेरणा

रोयबारी पूर्ति की सफलता अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। वह अन्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और स्थानीय बाजारों में अपनी उपज बेचने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

उनका कहना है कि सीमित जमीन और संसाधनों के बावजूद यदि सही तकनीक, मेहनत और उचित मार्गदर्शन मिले तो खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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उपायुक्त ने बताया प्रेरणादायी उदाहरण

पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने रोयबारी पूर्ति की सफलता को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान जिले में किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं, तकनीकी प्रशिक्षण और विभागीय सहयोग के माध्यम से किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। रोयबारी जैसी सफलता की कहानियां यह साबित करती हैं कि उचित मार्गदर्शन, मेहनत और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

उपायुक्त ने कहा कि ऐसी सफल कृषक कहानियों को अन्य किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपनी आय और आजीविका को मजबूत कर सकें।

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“अब खेती से परिवार की स्थिति बेहतर हो रही है”

रोयबारी पूर्ति ने बताया कि पहले खेती से होने वाली आमदनी सीमित थी। कृषि विभाग से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने खेती के तरीके में बदलाव किया। अब खेत से बेहतर उत्पादन मिल रहा है और स्थानीय हाट-बाजार में उपज बेचने से पहले की तुलना में अधिक आमदनी हो रही है।

उन्होंने कहा कि सही तरीके से खेती करने पर इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने अन्य किसानों से भी सरकारी योजनाओं और कृषि विभाग की तकनीकी सहायता का लाभ उठाने की अपील की।

रोयबारी पूर्ति की कहानी महिला सशक्तीकरण, कृषि आधारित आजीविका और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है। जिला प्रशासन का मानना है कि ऐसे सफल किसानों की कहानियों को सामने लाने से अन्य ग्रामीणों को भी खेती को लाभकारी आजीविका के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

पश्चिमी सिंहभूम में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर प्रेस वार्ता, 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दर्ज होंगे दावा-आपत्ति

पश्चिमी सिंहभूम में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर प्रेस वार्ता, 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दर्ज होंगे दावा-आपत्ति

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 के सफल क्रियान्वयन तथा आम नागरिकों तक आवश्यक जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से गुरुवार को अपर उपायुक्त सह निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (एआरओ), मझगांव विधानसभा क्षेत्र की अध्यक्षता में प्रेस वार्ता आयोजित की गई।

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प्रेस वार्ता में बताया गया कि प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन 5 अगस्त 2026 को किया जा चुका है। इसके बाद 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक मतदाता सूची से संबंधित दावा एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। प्राप्त आवेदनों के सत्यापन एवं निष्पादन के उपरांत 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।

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अपर उपायुक्त सह एआरओ ने बताया कि 8-9 अगस्त तथा 22-23 अगस्त को जिले के सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में मतदाता सूची से संबंधित दावा एवं आपत्तियों के साथ प्रपत्र-6, प्रपत्र-7 एवं प्रपत्र-8 भी स्वीकार किए जाएंगे।

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इसके अतिरिक्त 25 अगस्त से 4 सितंबर तक होम-टू-रोल वेरिफिकेशन अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे।
उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को सभी पंचायत भवनों में ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बीएलओ एवं चुनाव पाठशाला के सदस्य मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान की जानकारी ग्रामीणों को देंगे तथा उन्हें जागरूक करेंगे।

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प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया गया कि जिन मतदाताओं का नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज है, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं, जिन पात्र नागरिकों का नाम अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं है, उन्हें प्रपत्र-6 के साथ आवश्यक घोषणा-पत्र एवं निर्धारित दस्तावेज जमा करने होंगे।

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अपर उपायुक्त ने सभी पात्र नागरिकों से निर्धारित तिथियों पर अपने संबंधित मतदान केंद्र अथवा विशेष शिविर में पहुंचकर मतदाता सूची में अपना नाम जांचने तथा आवश्यक संशोधन कराने की अपील की। उन्होंने किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए मतदाता हेल्पलाइन 1950 तथा ECINET App का उपयोग करने की सलाह दी।
प्रेस वार्ता में अनुमंडल पदाधिकारी चक्रधरपुर, सदर एवं जगन्नाथपुर, उप निर्वाचन पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

सांसद जोबा माझी ने लोकसभा में उठाया मनोहरपुर लौह अयस्क खदान का मुद्दा, लंबित स्वीकृतियां जल्द पूरी करने की मांग

सांसद जोबा माझी ने लोकसभा में उठाया मनोहरपुर लौह अयस्क खदान का मुद्दा, लंबित स्वीकृतियां जल्द पूरी करने की मांग

चक्रधरपुर | सिंहभूम की सांसद जोबा माझी ने लोकसभा में नियम 377 के तहत पश्चिमी सिंहभूम स्थित भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) की ऐतिहासिक मनोहरपुर लौह अयस्क खदान (चिड़िया) के पूर्ण संचालन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने खदान के विभिन्न पट्टों से संबंधित लंबित वैधानिक एवं वन स्वीकृतियों का शीघ्र निष्पादन करने की मांग करते हुए केंद्र सरकार का ध्यान इस महत्वपूर्ण परियोजना की ओर आकर्षित किया।

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लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान सांसद जोबा माझी ने कहा कि मनोहरपुर लौह अयस्क खदान परिसर के अंतर्गत आने वाले धोबिल, मेकलोलेन, अजीताबुरु तथा सुकरी-लुटूरूबुरु क्षेत्रों में लौह अयस्क का विशाल भंडार उपलब्ध है। इसके बावजूद अधिकांश खनन पट्टों में आवश्यक वैधानिक और वन स्वीकृतियां लंबित होने के कारण अब तक पूर्ण स्तर पर खनन कार्य शुरू नहीं हो सका है।


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उन्होंने कहा कि यदि इस खदान का पूर्ण संचालन सुनिश्चित किया जाता है, तो देश में लौह अयस्क उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और इस्पात उद्योग को गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

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इससे एक ओर जहां विदेशों से लौह अयस्क के आयात पर निर्भरता कम होगी, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी सिंहभूम के स्थानीय एवं जनजातीय समुदायों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

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सांसद जोबा माझी ने केंद्र सरकार से ‘मैनेजमेंट प्लान फॉर सस्टेनेबल माइनिंग’ (एमपीएसएम) की शीघ्र समीक्षा करने तथा लंबित वन एवं अन्य वैधानिक स्वीकृतियों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने वर्ष 1980 से पूर्व प्रभावित क्षेत्रों में वैज्ञानिक तरीके से खनन की अनुमति देने तथा इस संबंध में एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने की भी मांग की, ताकि मनोहरपुर लौह अयस्क खदान के सभी पट्टों का जल्द से जल्द पूर्ण संचालन शुरू किया जा सके।

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मिशन वात्सल्य योजना की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने कर्मियों के सेवा नवीकरण के दिए निर्देश

मिशन वात्सल्य योजना की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने कर्मियों के सेवा नवीकरण के दिए निर्देश

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम के जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत संचालित संप्रेक्षण गृह के गृहपति एवं अन्य कर्मियों के कार्यों की समीक्षा तथा कार्य प्रगति को लेकर जिला चयन समिति की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई।

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बैठक के दौरान उपायुक्त ने संप्रेक्षण गृह में कार्यरत कर्मियों के विगत वित्तीय वर्ष के कार्यों एवं दायित्वों का वार्षिक मूल्यांकन किया। समीक्षा के क्रम में कर्मियों द्वारा किए गए कार्यों, बाल संरक्षण से संबंधित गतिविधियों तथा सेवा प्रदायगी की प्रगति का विस्तृत अवलोकन किया गया।

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समीक्षा के बाद उपायुक्त ने कर्मियों के पिछले वर्ष के कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए जिला चयन समिति को निर्देश दिया कि निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए संबंधित कर्मियों के सेवा नवीकरण (Service Renewal) की अनुशंसा सुनिश्चित की जाए।

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उपायुक्त ने कहा कि मिशन वात्सल्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बाल संरक्षण से जुड़े संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण, संवेदनशील एवं उत्तरदायी सेवाएं उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से योजना के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करते हुए बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

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बैठक में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा सहित जिला चयन समिति के अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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भुइयांडीह ह्यूम पाइप चौक के पास एल्युमिनियम शीट से लदा टाटा प्राइमा ट्रक पलटा, यातायात रहा प्रभावित

भुइयांडीह ह्यूम पाइप चौक के पास एल्युमिनियम शीट से लदा टाटा प्राइमा ट्रक पलटा, यातायात रहा प्रभावित

जमशेदपुर | शहर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र अंतर्गत भुइयांडीह ह्यूम पाइप चौक के पास गुरुवार देर रात एल्युमिनियम शीट से लदा एक टाटा प्राइमा ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे के बाद ट्रक में लदी एल्युमिनियम शीट सड़क पर दूर-दूर तक बिखर गई, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

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घटना की सूचना मिलते ही सीतारामडेरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सड़क पर बिखरी एल्युमिनियम शीट को हटाने का अभियान शुरू कराया, ताकि यातायात को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।

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गनीमत रही कि इस दुर्घटना में किसी के घायल होने या किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा, जिसके कारण ट्रक पलट गया। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

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फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और दुर्घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। समय पर शुरू किए गए राहत एवं बचाव कार्य के कारण सड़क से मलबा हटाकर यातायात व्यवस्था को शीघ्र सामान्य कर दिया गया।

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उपायुक्त ने FCI गोदाम पाताहातु का किया निरीक्षण, खाद्यान्न भंडारण व परिवहन व्यवस्था की समीक्षा

उपायुक्त ने FCI गोदाम पाताहातु का किया निरीक्षण, खाद्यान्न भंडारण व परिवहन व्यवस्था की समीक्षा

चाईबासा | जिला उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने बुधवार को एफसीआई (FCI) गोदाम, पाताहातु का निरीक्षण कर गोदाम के संचालन, खाद्यान्न भंडारण, रखरखाव एवं परिवहन व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने गोदाम में उपलब्ध खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण, गुणवत्ता तथा संचालन संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने गोदाम में उपलब्ध गेहूं, चावल सहित अन्य खाद्यान्न के स्टॉक की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अनाज के बोरों का निरीक्षण कर उनके सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से भंडारण की व्यवस्था का अवलोकन किया तथा अधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप खाद्यान्न का भंडारण सुनिश्चित करने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए।

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उपायुक्त ने खाद्यान्न के परिवहन तंत्र की भी समीक्षा की। उन्होंने खाद्यान्न के आवागमन, लोडिंग-अनलोडिंग की प्रक्रिया तथा समयबद्ध आपूर्ति व्यवस्था की जानकारी ली। साथ ही गोदाम परिसर में स्थापित धर्मकांटा (वेट ब्रिज) का निरीक्षण कर उसकी कार्यप्रणाली, माप-तौल की शुद्धता एवं नियमित संचालन की भी जांच की।

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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए खाद्यान्न का भंडारण एवं परिवहन पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए, ताकि लाभुकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके।

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उन्होंने गोदाम परिसर की स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था तथा अभिलेखों के नियमित संधारण पर भी विशेष बल देते हुए कहा कि खाद्यान्न प्रबंधन से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं का प्रभावी एवं व्यवस्थित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

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झारखंड में टाटा स्टील का ₹10,000 करोड़ निवेश, 2028 तक 2,000 रोजगार सृजन का लक्ष्य

झारखंड में टाटा स्टील का ₹10,000 करोड़ निवेश, 2028 तक 2,000 रोजगार सृजन का लक्ष्य

रांची | झारखंड के औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में टाटा स्टील ने बड़ा निवेश करने की योजना बनाई है। कंपनी वर्ष 2028 तक राज्य में लगभग ₹10,000 करोड़ का निवेश करेगी। इस निवेश का उद्देश्य स्टील उत्पादन क्षमता का विस्तार, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। कंपनी के अनुसार, इस परियोजना से करीब 2,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

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ग्रीन स्टील तकनीक पर रहेगा विशेष जोर
प्रस्तावित निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा आधुनिक और कम-कार्बन उत्सर्जन वाली स्टील निर्माण तकनीकों के विकास पर खर्च किया जाएगा। कंपनी लगभग ₹7,000 करोड़ की लागत से HIsarna और EASyMelt (Easy Melting) जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने की तैयारी कर रही है। इन तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्टील उत्पादन को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े प्रोजेक्ट
निवेश योजना के तहत टाटा स्टील अपने टिनप्लेट डिवीजन के विस्तार पर ₹2,600 करोड़ खर्च करेगी। इसके अलावा ₹1,500 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक कॉम्बी मिल (Combi Mill) परियोजना विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कंपनी की कुल स्टील उत्पादन क्षमता 2.73 करोड़ टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 4 करोड़ टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य है।

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स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
कंपनी का कहना है कि प्रस्तावित परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 2,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा परिवहन, इंजीनियरिंग, निर्माण, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा।

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जमशेदपुर की औद्योगिक पहचान होगी और मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रीन स्टील तकनीक और आधुनिक उत्पादन इकाइयों के विकास से जमशेदपुर देश के प्रमुख पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक शहरों में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है। इससे भविष्य में नए निवेश और सहायक उद्योगों के आने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

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झारखंड की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
यदि यह निवेश योजना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी होती है, तो झारखंड को औद्योगिक निवेश, आधुनिक तकनीक, रोजगार सृजन और उत्पादन क्षमता विस्तार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ मिलने की संभावना है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और देश के औद्योगिक मानचित्र पर झारखंड की भूमिका और अधिक प्रभावशाली हो सकती है।

25 लाख के इनामी शीर्ष नक्सली की पत्नी ने किया आत्मसमर्पण, संगठन में शोषण और हिंसा का लगाया आरोप

25 लाख के इनामी शीर्ष नक्सली की पत्नी ने किया आत्मसमर्पण, संगठन में शोषण और हिंसा का लगाया आरोप

गिरिडीह | झारखंड के गिरिडीह जिले में नक्सल विरोधी अभियान के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। 25 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली की पत्नी ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए गिरिडीह पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के बाद उसने संगठन के भीतर शोषण, भय और हिंसा के माहौल का आरोप लगाते हुए कहा कि इन परिस्थितियों के कारण उसका संगठन से पूरी तरह मोहभंग हो गया।

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाली महिला लंबे समय से प्रतिबंधित नक्सली संगठन से जुड़ी हुई थी और विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही थी। पूछताछ के दौरान उसने संगठन की कार्यप्रणाली, जंगलों में संचालित गतिविधियों तथा नक्सली नेटवर्क से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की हैं।

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महिला ने बताया कि संगठन में महिलाओं के साथ भेदभाव, मानसिक एवं शारीरिक शोषण जैसी घटनाएं आम थीं। लगातार हिंसा और निर्दोष लोगों की जान जाने की घटनाओं से वह मानसिक रूप से व्यथित हो गई थी। इसी कारण उसने संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

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गिरिडीह पुलिस ने बताया कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत महिला को नियमानुसार सभी आवश्यक सुविधाएं और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पुलिस का मानना है कि इस आत्मसमर्पण से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे अभियान को और मजबूती मिलेगी तथा अन्य उग्रवादियों को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

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पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति, विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखें। साथ ही, नक्सली संगठन से जुड़े लोगों से राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सामान्य जीवन की ओर लौटने का आग्रह किया गया है।

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चाईबासा ट्रेजरी घोटाला: राष्ट्रीय फुटबॉलर गोराचंद मांडी जांच के दायरे में

चाईबासा ट्रेजरी घोटाला: राष्ट्रीय फुटबॉलर गोराचंद मांडी जांच के दायरे में

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा ट्रेजरी से सरकारी खजाने से 26 लाख रुपये से अधिक की कथित अवैध निकासी के मामले में जांच के दौरान एक नया खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के दौरान राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर गोराचंद मांडी का नाम भी जांच के दायरे में लिया है।

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सीआईडी जांच के अनुसार, यह कथित घोटाला चाईबासा स्थित पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के डीडीओ (DDO) कोड के दुरुपयोग के माध्यम से अंजाम दिया गया। मामले के मुख्य आरोपी देव नारायण मुर्मू, जो एसपी कार्यालय के लेखा शाखा में पदस्थापित एक आरक्षी हैं, पर सरकारी अभिलेखों और कंप्यूटर डेटा में कथित हेरफेर कर फर्जी निकासी करने का आरोप है।
जांच में आरोप है कि देव नारायण मुर्मू ने सरकारी राशि को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर कुल ₹26,21,717 का गबन किया।

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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि देव नारायण मुर्मू के बैंक खाते से ₹1.67 लाख गोराचंद मांडी के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह लेनदेन वित्तीय जांच का हिस्सा है और इसी आधार पर गोराचंद मांडी का नाम जांच के दायरे में आया है। हालांकि, सिर्फ नाम सामने आने से उनके खिलाफ किसी आपराधिक जिम्मेदारी या दोष सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

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जांच में चिन्हित बैंक खाते
जांच एजेंसियों ने वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई बैंक खातों की पहचान की है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
एसबीआई पोटका शाखा (पूर्वी सिंहभूम)
एसबीआई डंगराटोली शाखा (रांची)
एसबीआई चाईबासा शाखा (पश्चिमी सिंहभूम)
एसबीआई बहलदा शाखा (मयूरभंज, ओडिशा)
इन खातों में हुए लेनदेन और संबंधित खाताधारकों की भूमिका की जांच जारी है।

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कौन हैं गोराचंद मांडी?
ओडिशा के मयूरभंज जिले के निवासी गोराचंद मांडी राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर हैं। उन्होंने झारखंड की ओर से संतोष ट्रॉफी में प्रतिनिधित्व किया है और जमशेदपुर फुटबॉल लीग में भी खेल चुके हैं। वे पहले टाटा स्टील और टाटा मोटर्स की टीमों से भी जुड़े रहे हैं। स्थानीय फुटबॉल जगत में वे अपने विशिष्ट हेयर स्टाइल के लिए भी जाने जाते हैं।

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फिलहाल, चाईबासा ट्रेजरी घोटाले की जांच जारी है। जांच एजेंसियां इस मामले से जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। अब तक गोराचंद मांडी के खिलाफ किसी भी प्रकार की आपराधिक संलिप्तता सिद्ध नहीं हुई है और न ही जांच एजेंसियों ने उनके विरुद्ध कोई अंतिम निष्कर्ष जारी किया है।