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वैज्ञानिक धान खेती से बदली महिला किसान की तस्वीर, आय और उत्पादन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि

वैज्ञानिक धान खेती से बदली महिला किसान की तस्वीर, आय और उत्पादन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि

चाईबासा |  पश्चिमी सिंहभूम जिले में कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के तहत किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के प्रयास सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के किसान कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर रहे हैं। इसका प्रेरक उदाहरण सदर प्रखंड की तुईबीर पंचायत के पम्पड़ा गांव की महिला किसान श्रीमती बेलमती देवगम हैं, जिन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से धान की खेती कर न केवल अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।

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बेलमती देवगम एक साधारण कृषक परिवार से हैं। चार सदस्यीय परिवार की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। उनके पास कुल चार एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें दो एकड़ सिंचित और दो एकड़ असिंचित भूमि शामिल है। पहले वे परंपरागत तरीके से लगभग तीन एकड़ में धान तथा शेष भूमि पर मौसमी सब्जियों की खेती करती थीं। सीमित उत्पादन और बढ़ती लागत के कारण खेती से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था।

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इसी दौरान गांव के किसान मित्र के माध्यम से उन्हें कृषि विभाग के प्रखंड स्तरीय खरीफ प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी मिली। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग लिया, जहां कृषि विशेषज्ञों ने धान उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों, बीज उपचार, नर्सरी प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, खरपतवार नियंत्रण, जल संरक्षण तथा पौधों की उचित दूरी पर रोपाई सहित आधुनिक कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रमाणित धान बीज भी उपलब्ध कराया गया।

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प्रशिक्षण से प्रेरित होकर बेलमती देवगम ने पहली बार वैज्ञानिक पद्धति से धान की खेती की। उन्होंने 25×25 सेंटीमीटर की दूरी पर एक-एक पौधे की रोपाई की, खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर कोनो वीडर का उपयोग किया तथा कृषि विभाग के सभी तकनीकी सुझावों का पालन किया। इसका परिणाम यह हुआ कि पौधों की वृद्धि बेहतर हुई, अधिक संख्या में कल्ले निकले और धान की गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

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वैज्ञानिक खेती अपनाने से उन्हें पहले की तुलना में लगभग दोगुना उत्पादन प्राप्त हुआ। इससे परिवार के लिए वर्षभर पर्याप्त धान उपलब्ध होने के साथ अतिरिक्त उपज बेचकर अच्छी आय भी हुई। बढ़ी हुई आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा बच्चों की शिक्षा, पोषण और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना आसान हो गया। आज बेलमती आत्मविश्वास के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ आसपास के किसानों को भी वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं।
बेलमती देवगम ने बताया कि कृषि विभाग से मिले प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी खेती करने की सोच बदल दी है। अब वे प्रत्येक मौसम में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती करना चाहती हैं और विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेने का संकल्प लिया है।
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक लाभकारी बनाने तथा वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। बेलमती देवगम की सफलता इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है।

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जिला कृषि पदाधिकारी अमरजीत हुजूर ने कहा कि विभाग का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक एवं उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ना है। इसके लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण शिविर, कृषक गोष्ठी और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक धान खेती की तकनीक अपनाने से कम बीज, कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है।
जिला प्रशासन ने किसानों से कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी मार्गदर्शन का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि वैज्ञानिक खेती अपनाकर न केवल उत्पादन और आय में वृद्धि की जा सकती है, बल्कि खेती को टिकाऊ, लाभकारी और आत्मनिर्भर आजीविका का सशक्त माध्यम भी बनाया जा सकता है।