जामताड़ा | जामताड़ा सदर अस्पताल में कथित चिकित्सीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। सरकारबांध निवासी रीना कुमारी नामक प्रसूता और उसके नवजात शिशु की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उपलब्ध कराई जाने वाली आवश्यक दवाइयों के बजाय उन्हें बाहर की निजी मेडिकल दुकानों से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया गया। उनका कहना है कि समय पर समुचित इलाज और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिसके कारण प्रसूता और नवजात की मौत हो गई।
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घटना के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी, संसाधनों का अभाव और जवाबदेही की कमी के कारण मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।
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परिजनों और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी या अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
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साथ ही सरकारी अस्पतालों में सभी आवश्यक दवाइयों, उपकरणों और चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मझगांव | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने गुरुवार को मझगांव विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी हो महासभा द्वारा आयोजित आंदोलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में आदिवासी समाज के लोगों के साथ कथित मारपीट और उत्पीड़न की घटनाओं को गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
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भाजपा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पीड़ित ग्रामीणों ने गीता कोड़ा को बताया कि 11 जुलाई की रात मझगांव बाजार में डीजल भरवाने के दौरान कुछ युवकों के साथ दूसरे समुदाय के लोगों ने कथित रूप से गाली-गलौज और मारपीट की। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई तथा बाद में उनका पीछा कर दोबारा हमला किया गया।
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विज्ञप्ति में कहा गया है कि 13 जुलाई को उन्हीं युवकों के साथ फिर मारपीट की गई, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की सहायता से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार कराया गया।
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भाजपा के अनुसार, 14 जुलाई को एसआईआर पाठशाला के समीप 40 से 50 लोगों की भीड़ गांव पहुंची और महिलाओं व ग्रामीणों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार तथा गाली-गलौज की। पार्टी का दावा है कि इस घटना के बाद गांव में भय और तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया तथा कई ग्रामीण घायल हुए।
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आंदोलन को संबोधित करते हुए गीता कोड़ा ने कहा कि लगातार तीन दिनों तक आदिवासी समाज के लोगों के साथ इस प्रकार की घटनाएं अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय हैं। उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती और झारखंड की सामाजिक सौहार्द की परंपरा को बिगाड़ने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सभी आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित करने, पीड़ित परिवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। भाजपा ने अपने बयान में कहा कि पार्टी पीड़ित आदिवासी परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें न्याय मिलने तक हरसंभव सहयोग करती रहेगी।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन के मार्गदर्शन एवं जिले में संचालित आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत आमजन को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी क्रम में गोइलकेरा प्रखंड निवासी दीपक कुमार की स्वास्थ्य लाभ की कहानी आयुष चिकित्सा पद्धति की प्रभावशीलता का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।
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दीपक कुमार पिछले चार से पांच वर्षों से रक्तस्रावी बवासीर (ब्लीडिंग पाइल्स) की समस्या से पीड़ित थे। उन्हें प्रत्येक आठ से दस दिनों के अंतराल पर शौच के दौरान रक्तस्राव होता था, जिससे वे शारीरिक रूप से कमजोर महसूस करने लगे थे। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर उपचार कराया और लंबे समय तक दवाइयों का सेवन भी किया, लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिल सकी। इसके बाद 16 जुलाई 2025 को उन्होंने आयुष विभाग के माध्यम से आयुष चिकित्सक डॉ. कविता मैथी से संपर्क किया।
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चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक औषधियां दी गईं तथा आवश्यक परामर्श और जीवनशैली से जुड़े सुझाव भी दिए गए। नियमित उपचार और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से कुछ ही समय में रक्तस्राव की समस्या पूरी तरह नियंत्रित हो गई और उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार होने लगा। वर्तमान में वे सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं तथा स्वयं को पहले की तुलना में अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं।
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दीपक कुमार ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्षों से चली आ रही बीमारी के कारण वे मानसिक और शारीरिक रूप से काफी परेशान थे। कई स्थानों पर इलाज कराने के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिला, लेकिन आयुष चिकित्सक के उपचार और नियमित परामर्श से उन्हें उल्लेखनीय राहत मिली। उन्होंने जिला प्रशासन एवं आयुष विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब वे बिना किसी परेशानी के अपना दैनिक जीवन सामान्य रूप से जी पा रहे हैं।
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आयुष चिकित्सक डॉ. कविता मैथी ने कहा कि बवासीर जैसी समस्याओं की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर समय पर उपचार कराने से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि नियमित दवा, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने से रोगी शीघ्र स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या को छिपाने के बजाय निकटतम आयुष स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श अवश्य लें।
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पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य जिले के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धति जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और इससे अनेक मरीज लाभान्वित हो रहे हैं। उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की कि किसी भी बीमारी की स्थिति में स्वयं उपचार करने के बजाय सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों एवं आयुष केंद्रों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर समय पर उपचार कराएं।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा उपायुक्त श्री मनीष कुमार के नेतृत्व में संचालित “प्रोजेक्ट प्राण” के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायत सचिवालयों और विद्यालयों में माहवारी स्वच्छता हेतु सेनेटरी नैपकिन इंसिनरेटर (भस्मक) स्थापित किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित माहवारी प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से उपयोग किए गए सेनेटरी नैपकिन के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण स्वच्छता संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती थीं। इस आवश्यकता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पंचायत स्तर पर स्थायी समाधान विकसित करने का निर्णय लिया, जिसका सकारात्मक प्रभाव अब पूरे जिले में दिखाई देने लगा है। 15वें वित्त आयोग की मद से स्थानीय मुखिया एवं पंचायत सचिवों के समन्वित प्रयासों से जिले के 158 पंचायत सचिवालयों और 63 विद्यालयों, यानी कुल 221 स्थानों पर माहवारी स्वच्छता भस्मकों की स्थापना पूरी कर ली गई है। इन भस्मकों के माध्यम से उपयोग किए गए सेनेटरी नैपकिन का सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण सुनिश्चित होगा। इससे पंचायत सचिवालयों एवं विद्यालय परिसरों की स्वच्छता बेहतर होगी तथा खुले में अपशिष्ट फेंकने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
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जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि माहवारी स्वच्छता के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना, मिथकों एवं संकोच को दूर करना तथा महिलाओं एवं किशोरियों के लिए सम्मानजनक वातावरण तैयार करना भी है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक स्थापना स्थल पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहियाओं एवं छात्राओं को भस्मक के सुरक्षित उपयोग, रखरखाव तथा वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई।
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विद्यालयों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता, माहवारी के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों, संक्रमण से बचाव तथा स्वच्छता से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है और इसके प्रति किसी भी प्रकार की झिझक या सामाजिक संकोच रखने की आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों ने छात्राओं को स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर रहे और विद्यालयों में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।
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वहीं पंचायत सचिवालयों में स्थापित भस्मक ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा विभिन्न कार्यों से सचिवालय आने वाली महिलाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगे। इससे पंचायत सचिवालय महिलाओं के अनुकूल सार्वजनिक परिसरों के रूप में विकसित होंगे तथा ग्रामीण स्तर पर स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को भी बढ़ावा मिलेगा। उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि प्रोजेक्ट प्राण का उद्देश्य पंचायत सचिवालयों को केवल प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण विकास, जनकल्याण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि माहवारी स्वच्छता महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य, गरिमा और आत्मसम्मान से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। पंचायत सचिवालयों एवं विद्यालयों में भस्मकों की स्थापना से सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी तथा स्वच्छ और स्वस्थ पंचायतों के निर्माण की दिशा में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी।
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उपायुक्त ने सभी मुखिया, पंचायत सचिवों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहियाओं एवं स्वयं सहायता समूहों से भस्मकों के नियमित उपयोग, रखरखाव और जनजागरूकता गतिविधियों को निरंतर जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब समुदाय स्वयं इन सुविधाओं को अपनाएगा और इनके संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएगा, तभी इस पहल का वास्तविक उद्देश्य सफल हो सकेगा। जिला प्रशासन का मानना है कि महिलाओं और किशोरियों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक माहवारी प्रबंधन सुनिश्चित करना केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, गरिमा और महिला सशक्तिकरण का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसी सोच के साथ प्रोजेक्ट प्राण के अंतर्गत पंचायत सचिवालयों को आधुनिक, जनहितैषी और समावेशी सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। प्रशासन ने बताया कि भविष्य में भी इस परियोजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छता, स्वास्थ्य और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ऐसी नवाचारी पहलें लगातार जारी रहेंगी।
सरायकेला | सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र स्थित बास्कोनगर से तीन नाबालिग लड़कियों के रहस्यमय परिस्थितियों में लापता होने का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों में चिंता का माहौल है, जबकि पुलिस उनकी तलाश के लिए लगातार छापेमारी और तकनीकी जांच कर रही है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, 13 जुलाई 2026 को बास्कोनगर की चार सहेलियां घूमने के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा स्थित रूंगटा गार्डन गई थीं। इनमें से एक लड़की 14 जुलाई की दोपहर अपने घर लौट आई, जबकि अन्य तीन सहेलियां अब तक घर नहीं पहुंची हैं।
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लापता लड़कियों की पहचान शांति सामड (14 वर्ष), अनुष्का गगराई (15 वर्ष) और सिमरन जोजो (14 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों आदित्यपुर के बास्कोनगर की निवासी हैं। परिजनों ने अपने स्तर पर काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर आदित्यपुर थाना में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी कुमार ने बताया कि घर लौटी लड़की से पूछताछ के आधार पर पुलिस की एक टीम चाईबासा पहुंचकर विभिन्न स्थानों पर खोजबीन कर रही है। इसके अलावा तकनीकी साक्ष्यों और अन्य संभावित पहलुओं के आधार पर भी मामले की गहन जांच की जा रही है।
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पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी को तीनों लापता लड़कियों के संबंध में कोई भी जानकारी मिले, तो तत्काल आदित्यपुर थाना या डायल 112 पर सूचना दें, ताकि उन्हें शीघ्र एवं सुरक्षित बरामद किया जा सके।
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पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर संभावित पहलू की जांच की जा रही है और तीनों नाबालिग लड़कियों की सुरक्षित बरामदगी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
रांची | मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की सभी प्रमुख सड़क परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि तय समय में कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित अभियंताओं, अधिकारियों और कार्यदायी एजेंसियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। बुधवार को झारखंड मंत्रालय में पथ निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में चल रही सड़क, फ्लाईओवर, पुल एवं पुलिया परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने परियोजनाओं में हो रही अनावश्यक देरी पर नाराजगी जताते हुए गुणवत्ता के साथ समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
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मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से न्यासराय आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) का कार्य अगले दो माह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय में निर्माण पूरा नहीं हुआ तो संबंधित अभियंताओं और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी परियोजनाओं की नियमित जियो-टैगिंग करने तथा उनका डेटाबेस तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि कार्यों की प्रभावी निगरानी की जा सके।
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उन्होंने राज्य की जर्जर, गड्ढायुक्त और दुर्घटना-प्रवण सड़कों की शीघ्र मरम्मत के निर्देश देते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही सड़कों के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के कार्यों में भी तेजी लाने को कहा। मुख्यमंत्री ने राज्य में लंबित फ्लाईओवर, पुल और पुलिया निर्माण कार्यों को भी निर्धारित समय में पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई परियोजनाओं के साथ-साथ अधूरी परियोजनाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
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रांची रिंग रोड पर सोलर साइकिल ट्रैक के निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क किनारे पर्याप्त स्थान चिह्नित कर ट्रैक विकसित किया जाए तथा सोलर ऊर्जा के माध्यम से प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
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बैठक में मुख्य सचिव अलका तिवारी, पथ निर्माण विभाग के सचिव सुनील कुमार तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं अभियंता उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएं और लापरवाही या अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। जिले में अब तक लगभग 1,600 मलेरिया मरीजों की पहचान की जा चुकी है। गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान तेज कर दिया है। जानकारी के अनुसार, संक्रमण का सबसे अधिक असर सारंडा और आसपास के वन क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर रैपिड टेस्ट किट से जांच कर रही हैं तथा संक्रमित मरीजों को तत्काल दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और मच्छरदानी वितरण का कार्य भी जारी है। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से जिले में अब तक मलेरिया से किसी की मृत्यु नहीं हुई है। विशेष रूप से आवासीय विद्यालयों के लगभग 100 छात्र मलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने विद्यालयों में जांच और उपचार की व्यवस्था बढ़ा दी है।
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कोल्हान और गोड्डा संभाग के सात प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित सारंडा वन क्षेत्र का विस्तार मुख्य रूप से मनोहरपुर, नोवामुंडी, गोइलकेरा और आनंदपुर प्रखंडों में होने के कारण ये क्षेत्र संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्वास्थ्य विभाग के मिशन निदेशक पहुंचे सरायकेला, चार डेंजर जोन प्रखंडों पर विशेष नजर सरायकेला: पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया से हुई हालिया मौतों के बाद राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा बुधवार को सरायकेला-खरसावां पहुंचे।
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उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में मलेरिया की स्थिति, जांच और उपचार व्यवस्था की समीक्षा की। इसके बाद सदर अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। कुचाई, सरायकेला, राजनगर और खरसावां डेंजर जोन घोषित बैठक के दौरान जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. सुजाता मुर्मू ने बताया कि कुचाई, सरायकेला, राजनगर और खरसावां प्रखंडों को डेंजर जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। मानसून के दौरान इन क्षेत्रों में मलेरिया के सबसे अधिक मामले सामने आते हैं।
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मिशन निदेशक ने इन चारों प्रखंडों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानकी-मुंडा सहित स्थानीय पारंपरिक जनप्रतिनिधियों के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग बुखार होने पर झोलाछाप डॉक्टरों के बजाय सरकारी अस्पताल पहुंचकर जांच और इलाज कराएं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया जांच किट और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा जरूरत पड़ने पर अन्य प्रखंडों से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिनियुक्ति (मैनपावर शिफ्टिंग) करने का आश्वासन दिया। बैठक के बाद मिशन निदेशक ने सदर अस्पताल, सरायकेला का निरीक्षण किया। उन्होंने माइक्रोस्कोप से मलेरिया जांच की प्रक्रिया का अवलोकन किया और इंडोर वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा उपचार व्यवस्था की जानकारी ली।
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फील्ड वर्कर्स को हर महीने 100 ब्लड सैंपल जांच का लक्ष्य मिशन निदेशक ने निर्देश दिया कि प्रत्येक फील्ड लेवल स्वास्थ्यकर्मी हर महीने कम से कम 100 ब्लड सैंपल की जांच सुनिश्चित करें। उन्होंने चेतावनी दी कि लक्ष्य से कम जांच करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ वेतन रोकने सहित विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अगले तीन महीनों तक विशेष “मिशन मोड” में अभियान चलाया जाएगा और सभी स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित निगरानी होगी। साथ ही निर्देश दिया गया कि अस्पताल में बुखार की शिकायत लेकर आने वाले प्रत्येक मरीज की मलेरिया जांच अनिवार्य रूप से की जाए।
चाईबासा | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिमी सिंहभूम की जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ आदिवासी महिला नेत्री गीता बालमुचू को भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ओडिशा मिनरल्स डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (OMDC) का स्वतंत्र निदेशक (इंडिपेंडेंट डायरेक्टर) नियुक्त किए जाने पर भाजपा ने प्रसन्नता व्यक्त की है। पार्टी ने इसे आदिवासी समाज के सम्मान और गौरव का प्रतीक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रकट किया है।
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जिला मीडिया प्रभारी जितेंद्र नाथ ओझा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह नियुक्ति केवल गीता बालमुचू का व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि झारखंड, कोल्हान, पश्चिमी सिंहभूम और पूरे आदिवासी समाज के लिए गौरव का विषय है। भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आदिवासी समाज को देश के महत्वपूर्ण नीति-निर्माण और निर्णय लेने वाले मंचों पर सम्मानजनक प्रतिनिधित्व प्रदान कर रही है।
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प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गीता बालमुचू लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़ी हुई हैं। वे चाईबासा नगर परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं तथा वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में चाईबासा विधानसभा सीट से भाजपा की प्रत्याशी भी थीं। संगठन में उन्होंने विभिन्न दायित्वों का निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया है।
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भाजपा ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जैसे राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण जिले में उन्हें जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपा जाना उनके नेतृत्व कौशल और संगठनात्मक क्षमता पर पार्टी के विश्वास का प्रमाण था। अब OMDC के निदेशक मंडल में स्वतंत्र निदेशक के रूप में उनकी नियुक्ति उनके सार्वजनिक जीवन में योगदान और कार्यकुशलता को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता है।
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पार्टी के अनुसार, OMDC के बोर्ड में रहते हुए गीता बालमुचू खनन क्षेत्र से जुड़े नीतिगत निर्णयों, पारदर्शिता, जनहित, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व तथा सामाजिक दायित्वों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। साथ ही, खनिज संपदा से समृद्ध आदिवासी क्षेत्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त प्रतिनिधित्व भी मिलेगा।
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भाजपा ने विश्वास व्यक्त किया कि गीता बालमुचू अपने अनुभव, ईमानदारी और समर्पण के बल पर इस नई जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगी तथा झारखंड और आदिवासी समाज का गौरव बढ़ाएंगी।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में बुधवार को जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में गैर-सरकारी संस्था प्रदान (PRADAN) के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशिक्षु आईएएस सुश्री ईरा जोरवाल, पीएमयू के सदस्य तथा प्रदान संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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बैठक के दौरान प्रदान संस्था के प्रतिनिधियों ने जिले में संचालित आजीविका संवर्धन से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। संस्था ने बताया कि वर्तमान में सदर चाईबासा, हाटगम्हरिया, टोंटो, चक्रधरपुर, सोनुआ एवं बंदगांव प्रखंडों में लिफ्ट सिंचाई, मछली पालन, हल्दी प्रसंस्करण, कृषि आधारित गतिविधियों तथा अन्य आजीविका कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदान संस्था और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (JSLPS) के बीच बेहतर समन्वय एवं तालमेल आवश्यक है।
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उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों, विशेषकर किसानों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को आजीविका आधारित योजनाओं से जोड़कर उन्हें योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों एवं कृषि संभावनाओं का बेहतर उपयोग करते हुए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रसार, मत्स्य पालन, हल्दी प्रसंस्करण तथा कृषि एवं वनोपज आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन और प्रभावी बाजारीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे ग्रामीणों की आय में स्थायी वृद्धि होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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बैठक में जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों एवं प्रदान संस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान आजीविका संवर्धन, लिफ्ट एवं टपक सिंचाई, मोबाइल सिंचाई व्यवस्था, मत्स्य पालन, हल्दी प्रोसेसिंग तथा कृषि एवं खाद्य उत्पादों के प्रभावी विपणन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अधिक से अधिक लाभुकों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार करने पर भी बल दिया गया।
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उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम को “सशक्त सिंहभूम” बनाने के लिए सभी विभागों, संस्थाओं एवं विकास सहयोगियों का सामूहिक प्रयास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिले का समग्र विकास तभी संभव है, जब ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और प्रत्येक ग्रामीण परिवार की आय में सतत वृद्धि होगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं संस्था के प्रतिनिधियों से समन्वित प्रयासों के माध्यम से ग्रामीण विकास एवं आजीविका संवर्धन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल करने का आह्वान किया।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न सुदूर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष विभाग द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। शिविरों के माध्यम से कुल 377 मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की गई तथा उनकी आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक दवाओं का वितरण किया गया। विभाग की इस पहल से जिले के अत्यंत पिछड़े एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके घर के समीप ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।
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शिविरों के दौरान आधुनिक एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय के साथ मरीजों के रक्तचाप, मधुमेह, हीमोग्लोबिन, मलेरिया एवं सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों की जांच की गई। इसके अलावा शरीर दर्द, पेट संबंधी रोग, महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं, बच्चों एवं बुजुर्गों से जुड़ी बीमारियों तथा त्वचा रोगों का परीक्षण कर आवश्यक चिकित्सीय परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया गया।
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आयुष विभाग के चिकित्सकों की टीम ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिविरों में डॉ. प्रदीप, डॉ. सुशील, डॉ. राधिका, डॉ. सूर्या भूषण, डॉ. धर्मराज, डॉ. सुष्मिता, डॉ. आशिक, डॉ. टिम्मा रानी, डॉ. मैनुद्दीन, डॉ. अनीश, डॉ. यशवंती एवं डॉ. कविता सहित अन्य चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक परामर्श एवं उपचार प्रदान किया।
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ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन मंझारी प्रखंड के दोकाट्टा, गोइलकेरा के कुईड़ा एवं गोइलकेरा बाजार, मनोहरपुर के मौलडीहा, खूंटपानी के गोटाई एवं केंदुसाई, सदर प्रखंड के दलियामार्चा, नोआमुंडी के खास जामदा, चक्रधरपुर के लक्ष्मीपोसी, तांतनगर के कोकचो, हटगम्हरिया के कालीमाटी तथा गुदड़ी प्रखंड के डुरा गांव में किया गया। शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुषों एवं बच्चों ने स्वास्थ्य जांच कराकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।
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उपचार के साथ-साथ शिविरों में स्वास्थ्य जागरूकता पर भी विशेष बल दिया गया। चिकित्सकों ने ग्रामीणों को मलेरिया, डेंगू एवं चिकनगुनिया जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी। साथ ही स्वच्छता बनाए रखने, शुद्ध पेयजल का उपयोग करने तथा तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए जागरूक किया गया। ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने तथा किसी भी प्रकार के बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल गांव की सहिया अथवा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी गई।
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शिविर के समापन पर ग्रामीणों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया। योग प्रशिक्षकों एवं चिकित्सकों ने नियमित योगाभ्यास, संतुलित एवं पौष्टिक आहार तथा स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ एवं निरोग जीवन के लिए इन आदतों को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने का संदेश दिया।