राजनीति

चाईबासा सदर अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा नेता ने उठाए सवाल

चाईबासा सदर अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा नेता ने उठाए सवाल

चाईबासा | भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने चाईबासा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले का एकमात्र सदर अस्पताल खुद बदहाल स्थिति में है, जिसके कारण मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

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पवन शंकर पांडे ने कहा कि अस्पताल में बड़े-बड़े भवन तो बना दिए गए हैं, लेकिन चिकित्सकों की भारी कमी बनी हुई है। कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद अब भी रिक्त हैं, जिससे मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में जनरेटर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बिजली कटौती के दौरान मरीजों को भीषण गर्मी झेलनी पड़ती है। बिजली चले जाने पर वार्डों में पंखे बंद हो जाते हैं और कई बार ऑपरेशन तक टॉर्च की रोशनी में करने की नौबत आ जाती है।

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उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन समेत कई आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। इसके कारण मरीजों को जांच और इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। पांडे ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम एक आदिवासी बहुल एवं पिछड़ा जिला है, जहां अधिकांश लोगों के पास निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।

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भाजपा नेता ने ब्लड बैंक की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से मरीजों को रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार अब तक ब्लड बैंक को लाइसेंस नहीं मिलने के कारण लोगों को रक्त के लिए जमशेदपुर जाना पड़ता है, जिससे मरीजों एवं उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग चाईबासा सदर अस्पताल की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। विभिन्न प्रखंडों एवं अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को सदर अस्पताल रेफर किया जाता है, लेकिन वहां से भी कई मरीजों को एमजीएम अस्पताल भेज दिया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अंत में पवन शंकर पांडे ने राज्य सरकार से मांग की कि चाईबासा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द सुदृढ़ किया जाए, ताकि जिले के लोगों को इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।

दिशा बैठक में विकास योजनाओं की समीक्षा, लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण

दिशा बैठक में विकास योजनाओं की समीक्षा, लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय सभागार में सिंहभूम सांसद जोबा माझी की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। बैठक का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अतिथियों का पारंपरिक रूप से शॉल ओढ़ाकर तथा पौधा एवं वेजिटेबल बास्केट भेंट कर स्वागत किया गया।
बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति, लंबित कार्यों, बुनियादी सुविधाओं तथा जनसमस्याओं की विस्तार से समीक्षा की गई। सांसद जोबा माझी ने कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए सभी कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।

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समीक्षा के दौरान कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। कल्याण विभाग को सामुदायिक वन पट्टा वितरण, एकलव्य विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए। वहीं, वन विभाग को एलीफेंट अलर्ट सिस्टम एवं हाईमास्ट लाइट लगाने की दिशा में कार्य तेज करने को कहा गया।

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बैठक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत सड़कों की मरम्मत, पेयजल संकट को देखते हुए चापाकलों की मरम्मत, जलमीनारों के संचालन तथा बंद पड़ी ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को पुनः चालू करने पर भी जोर दिया गया। चक्रधरपुर एवं जगन्नाथपुर में जर्जर पानी टंकियों के सुरक्षित निस्तारण के निर्देश भी दिए गए।
इसके अलावा पंचायत स्तर पर योजनाओं की मॉनिटरिंग, जिला परिषद की निर्माणाधीन योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने, नवोदय विद्यालय नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने, तांतनगर में फार्मेसिस्ट कॉलेज संचालन तथा नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य निरीक्षण को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में मोबाइल कनेक्टिविटी, भूमिहीन परिवारों को आवास हेतु भूमि उपलब्ध कराने, पशुपालन योजनाओं के लाभुकों को प्रशिक्षण देने तथा बिजली व्यवस्था को सुचारू रखने पर भी चर्चा हुई।
उपायुक्त मनीष कुमार ने बताया कि आपदा से संबंधित लंबित मुआवजा मामलों में कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि आंधी-तूफान एवं बारिश से प्रभावित लोगों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने तथा सभी स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश से निपटने के लिए एंटीवेनम उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिले में जैक बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार हुआ है तथा ब्लड बैंक लाइसेंस एवं होमगार्ड प्रशिक्षण को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

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बैठक में मिशन वात्सल्य योजना के तहत एकल अभिभावक वाले बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने की अपील की गई। योजना के तहत बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह चार हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।
लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण
बैठक के दौरान विभिन्न योजनाओं के लाभुकों के बीच आवास योजना के डमी चेक, प्रेशर कुकर, साइकिल, सामुदायिक वन पट्टा, खेल किट, स्कूल बैग, किताबें, मत्स्य विपणन किट, ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरण, एचपीवी वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र सहित अन्य सामग्री वितरित की गई। साथ ही जैक बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
जागरूकता रथों को दिखाई गई हरी झंडी
बैठक के उपरांत अतिथियों ने पोषण, जनगणना, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, टीबी मुक्त भारत, एचपीवी वैक्सीनेशन, रक्तदान, पेयजल एवं स्वच्छता तथा जेएसएलपीएस के प्रोजेक्ट बदलाव से संबंधित जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। समाहरणालय परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण भी किया गया।
बैठक में कालीचरण मुंडा, निरल पुरती, सुखराम उरांव, सोनाराम सिंकु, जगत माझी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

चक्रधरपुर पुलिस ने सात युवतियों को किया रेस्क्यू, मानव तस्करी के खतरे से बचाकर सुरक्षित घर भेजा

चक्रधरपुर पुलिस ने सात युवतियों को किया रेस्क्यू, मानव तस्करी के खतरे से बचाकर सुरक्षित घर भेजा

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड की सात युवतियों को चक्रधरपुर पुलिस ने समय रहते रेस्क्यू कर सुरक्षित उनके घर पहुंचाया। बताया गया कि सभी युवतियां रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेश जाने के लिए निकली थीं।
जानकारी के अनुसार, रेलवे स्टेशन परिसर में चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार की नजर इन युवतियों पर पड़ी। संदेह होने पर उन्होंने सभी से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान युवतियों ने बताया कि वे मजदूरी एवं रोजगार की तलाश में बाहर जाने की तैयारी में थीं।

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इसके बाद थाना प्रभारी ने युवतियों को बाहर काम करने के दौरान संभावित जोखिमों, मानव तस्करी तथा अन्य प्रकार के शोषण से जुड़े खतरों के प्रति जागरूक किया। पुलिस की पहल पर सभी युवतियों को टाटा मैजिक वाहन से सुरक्षित उनके घर वापस भेज दिया गया।

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थाना प्रभारी की इस मानवीय एवं संवेदनशील पहल की क्षेत्र में सराहना की जा रही है।
गौरतलब है कि पश्चिमी सिंहभूम समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवक-युवतियां रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं। ऐसे मामलों में कई बार नाबालिग बच्चियों और युवतियों के मानव तस्करी तथा शोषण का शिकार होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा समय रहते की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई, अरविंद केजरीवाल समेत कई AAP नेताओं पर आपराधिक अवमानना मामला शुरू

दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई, अरविंद केजरीवाल समेत कई AAP नेताओं पर आपराधिक अवमानना मामला शुरू

दिल्ली | दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर बड़ा कानूनी और राजनीतिक मोड़ सामने आया है। एक्साइज पॉलिसी केस से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की है।

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अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका के खिलाफ सुनियोजित तरीके से माहौल बनाने और जनता के बीच अदालत की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने का प्रयास किया गया। इस मामले में Manish Sisodia, Sanjay Singh, Saurabh Bharadwaj और Vinay Mishra के नाम भी शामिल हैं।

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कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि न्यायिक फैसलों की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन न्यायपालिका की छवि खराब करने या अदालत की निष्पक्षता पर अविश्वास पैदा करने वाला अभियान गंभीर मामला माना जाएगा।

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इस घटनाक्रम के बाद राजनीति के साथ-साथ न्यायपालिका की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं को लेकर नई बहस छिड़ गई है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और अदालत की टिप्पणियों पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- “कार्यपालिका ही सब कुछ कंट्रोल कर रही है”

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- “कार्यपालिका ही सब कुछ कंट्रोल कर रही है”

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गुरुवार को अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कार्यपालिका का अत्यधिक नियंत्रण दिखाई देता है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हो सकता है। अदालत ने सवाल उठाया कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने वाली संस्था के चयन में किसी स्वतंत्र सदस्य को शामिल क्यों नहीं किया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक के चयन में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) चयन समिति का हिस्सा होते हैं, लेकिन चुनाव आयोग के प्रमुख की नियुक्ति में उन्हें शामिल नहीं किया जाता।
जस्टिस दत्ता ने कहा,
“CBI निदेशक की नियुक्ति में CJI शामिल होते हैं। इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने या कानून के शासन से जोड़कर देखा जा सकता है। लेकिन लोकतंत्र को बनाए रखने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसा क्यों नहीं होना चाहिए?”

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उन्होंने आगे कहा कि अदालत यह नहीं कह रही कि चयन समिति में CJI को ही शामिल किया जाए, लेकिन किसी स्वतंत्र सदस्य की मौजूदगी आवश्यक होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि तीसरा सदस्य मंत्रालय से ही क्यों होना चाहिए।
जस्टिस दत्ता ने कहा,
“आज प्रधानमंत्री एक सदस्य चुनते हैं और विपक्ष के नेता (LoP) दूसरे सदस्य को चुनते हैं। यदि दोनों के बीच मतभेद हो, तो क्या तीसरा सदस्य विपक्ष के नेता के पक्ष में जाएगा?”
इस पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वह इस विषय पर कोई अटकल नहीं लगाना चाहते और व्यावहारिक रूप से स्थिति अलग भी हो सकती है। इस पर जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“तो इसका मतलब है कि कार्यपालिका ही सब कुछ कंट्रोल कर रही है।”

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पीठ ने यह भी कहा कि इस प्रकार की नियुक्तियों में निर्णय व्यवहारिक रूप से 2:1 के बहुमत से होगा, क्योंकि कैबिनेट मंत्री के प्रधानमंत्री के रुख से अलग राय रखने की संभावना बेहद कम होती है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने यह भी सवाल उठाया कि कार्यपालिका को “वीटो” जैसी स्थिति क्यों दी गई है। उन्होंने कहा कि संसद के पास कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन कानूनों की अंतिम व्याख्या करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास ही रहेगा।
उन्होंने कहा,
“पहली नजर में हमें इस बात से परेशानी हो रही है कि कार्यपालिका को वीटो का अधिकार क्यों दिया गया है। संसद कानून बना सकती है, लेकिन कानूनों की अंतिम व्याख्या सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।”

चाईबासा में NSUI का विरोध प्रदर्शन, NEET-2026 पेपर लीक मामले में पीएम व शिक्षा मंत्री का पुतला दहन

चाईबासा में NSUI का विरोध प्रदर्शन, NEET-2026 पेपर लीक मामले में पीएम व शिक्षा मंत्री का पुतला दहन

चाईबासा | नीट-2026 परीक्षा पेपर लीक प्रकरण को लेकर कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने बुधवार को प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता कांग्रेस भवन, चाईबासा में एकत्रित हुए और जमकर नारेबाजी की। इसके बाद विरोध स्वरूप दोनों नेताओं के पुतलों को आग के हवाले किया गया।

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एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष अनीष गोप ने कहा कि नीट-2026 परीक्षा में हुए पेपर लीक ने देशभर के लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि हजारों परिवारों ने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए कोचिंग और पढ़ाई पर भारी खर्च किया था, लेकिन परीक्षा निरस्त होने से छात्रों में भारी निराशा और आक्रोश है।


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कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने कहा कि नीट-2026 परीक्षा निरस्त होने से लाखों विद्यार्थियों की मेहनत पर कुठाराघात हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार द्वारा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को सौंपी गई है, जो सीधे केंद्रीय शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत है। उन्होंने कहा कि एजेंसी की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में रही है और कई परीक्षाएं पेपर लीक एवं नकल के कारण रद्द हो चुकी हैं, जिसकी सीधी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की बनती है।


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उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार विवादों के बावजूद केंद्र सरकार ने न तो एनटीए के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की है और न ही एजेंसी की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। इसके विपरीत, इसकी कमियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।
विरोध प्रदर्शन में एनएसयूआई जिला महासचिव सचिन बिरुवा, सदस्य संजु कुंकल, रुपसिंह बिरुवा, अरुण हेम्ब्रम, पूर्व नगर अध्यक्ष अजय कुमार, मो. अरसलाम, संजय साव, सुशील दास समेत अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

एनटीए को दोबारा परीक्षा की जिम्मेदारी सौंपने के फैसले का एआईडीएसओ ने किया विरोध

एनटीए को दोबारा परीक्षा की जिम्मेदारी सौंपने के फैसले का एआईडीएसओ ने किया विरोध

चाईबासा | राजस्थान में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के बाद केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को पुनः परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी सौंपे जाने के फैसले का एआईडीएसओ (AIDSO) ने कड़ा विरोध किया है। संगठन के पश्चिमी सिंहभूम जिला सचिव सत्येन महतो ने प्रेस वार्ता कर इस निर्णय को निंदनीय बताया।

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उन्होंने कहा कि एनटीए जैसी “भ्रष्ट संस्था” को दोबारा परीक्षा आयोजित करने की अनुमति देना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह तीसरी बार है जब इस संस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं, फिर भी सरकार उसी एजेंसी को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दे रही है। उन्होंने एनटीए को भंग करने और इसके खिलाफ जिलेभर में मजबूत छात्र आंदोलन खड़ा करने की अपील की।
जिला उपाध्यक्ष जतिन दास ने कहा कि इस वर्ष करीब 23 लाख अभ्यर्थियों ने नीट परीक्षा की तैयारी की थी, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों छात्रों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिले के भी सैकड़ों छात्र मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं। इस मुद्दे पर जिले से लेकर देशभर में छात्रों को एकजुट होकर विरोध दर्ज कराना चाहिए।

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वहीं, जिला अध्यक्ष सगुन हाँसदा ने झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए क्लस्टर कॉलेज व्यवस्था का भी विरोध किया। उन्होंने बताया कि इसके खिलाफ कोल्हान प्रमंडल के विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा आगामी 15 मई को कोल्हान विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष विशाल प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिले के छात्र पहले से ही छात्रवृत्ति में देरी, सत्र विलंब और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकार इन मूल समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे फैसले लागू कर रही है।

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एआईडीएसओ ने सभी छात्रों, अभिभावकों और बुद्धिजीवियों से 15 मई को कोल्हान विश्वविद्यालय के समक्ष आयोजित प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील की।

बाल संवाद कार्यक्रम में उपायुक्त ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित, शिक्षा में उत्कृष्टता पर दिया जोर

बाल संवाद कार्यक्रम में उपायुक्त ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित, शिक्षा में उत्कृष्टता पर दिया जोर

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में बाल संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राजलक्ष्मी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी टोनी प्रेमराज टोप्पो मौजूद रहे। इस दौरान जिले के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं कार्यक्रम से जुड़े।

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कार्यक्रम की शुरुआत में उपायुक्त मनीष कुमार ने सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया तथा जैक बोर्ड द्वारा जारी 10वीं एवं 12वीं परीक्षा परिणाम में जिले के बेहतर प्रदर्शन पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का पहला लक्ष्य पश्चिमी सिंहभूम को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है, ताकि यहां के छात्र-छात्राएं स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन करें।

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उपायुक्त ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। अनुशासन और निरंतर मेहनत ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने छात्रों को नियमित अभ्यास जारी रखने तथा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने छात्र-छात्राओं को “तारा ताली” और “रेन ताली” जैसी गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने बताया कि “प्रोजेक्ट परख” के तहत विद्यालयों में नियमित टेस्ट आयोजित किए जाएंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों एवं उत्कृष्ट परिणाम देने वाले विद्यालयों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने हुनर को पहचानने और अनुशासन के साथ बेहतर परिणाम हासिल करने की अपील की। उपायुक्त ने कहा कि विद्यालयों में “बोलेगा सिंहभूम” कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारा जाएगा, जबकि “बात तो करनी होगी” कार्यक्रम के जरिए उनकी संवाद क्षमता का विकास किया जाएगा।

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इसके अलावा उन्होंने जानकारी दी कि प्रत्येक माह की 5 तारीख को सभी विद्यालयों में खेल महोत्सव आयोजित किया जाएगा, जिसमें खेल गतिविधियों के साथ अन्य रचनात्मक कार्यक्रम भी शामिल होंगे। वहीं, प्रत्येक माह की 20 तारीख को “तिथि भोज-सह-जन्मोत्सव” कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं का जन्मदिन मनाया जाएगा और उन्हें विशेष भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
उपायुक्त ने सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए घड़े में पेयजल तथा पक्षियों के लिए अलग से पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रत्येक माह की 8 एवं 24 तारीख को रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सहभागिता अपेक्षित रहेगी।

चक्रधरपुर की चर्चित चायना गली होगी अतिक्रमण मुक्त, बनेंगे सार्वजनिक बाथरूम

चक्रधरपुर की चर्चित चायना गली होगी अतिक्रमण मुक्त, बनेंगे सार्वजनिक बाथरूम

चक्रधरपुर | शहर की चर्चित चायना गली को जल्द अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा। नगर परिषद ने बाजार आने वाले लोगों, दुकानदारों और विशेष रूप से महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यहां छोटे-छोटे सार्वजनिक बाथरूम बनाने का निर्णय लिया है।

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चायना गली शहर का प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र माना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग बाजार और हाट के लिए पहुंचते हैं। लंबे समय से यहां शौचालय और बाथरूम की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय लोगों और व्यापारियों द्वारा लगातार इस सुविधा की मांग उठाई जा रही थी।
नगर परिषद के उपाध्यक्ष सह वार्ड संख्या-7 के पार्षद विजय कुमार साव ने बताया कि चायना गली से अतिक्रमण हटाकर खाली होने वाली जगह पर जनसुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसी योजना के तहत यहां छोटे-छोटे सार्वजनिक बाथरूम बनाए जाएंगे, ताकि बाजार आने वाले लोगों को राहत मिल सके।

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उन्होंने कहा कि नगर परिषद शहर में मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। आने वाले दिनों में बाजार क्षेत्र में अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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नगर परिषद की इस पहल का स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने स्वागत किया है। व्यापारियों का कहना है कि सार्वजनिक बाथरूम बनने से ग्राहकों को सुविधा मिलेगी और बाजार का माहौल भी बेहतर होगा। लोगों ने उम्मीद जताई कि अतिक्रमण हटाने और निर्माण कार्य की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्तमान में चायना गली के कुछ हिस्सों में अतिक्रमण होने के कारण आम लोगों और राहगीरों को आवागमन में परेशानी होती है। अतिक्रमण हटने के बाद यहां यातायात व्यवस्था और स्वच्छता में भी सुधार देखने को मिलेगा।

सोना-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 15% हुई, पीएम मोदी ने एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की

सोना-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 15% हुई, पीएम मोदी ने एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से अपील की है कि वे कम-से-कम एक वर्ष तक सोने की खरीदारी से बचें। इसी बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सोना, चांदी समेत अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में भारी बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें बुधवार रात से प्रभावी हो जाएंगी।

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केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला विदेशों से कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करने और देश के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व) पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।

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सरकार का मानना है कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी मुद्रा पर दबाव के बीच गैर-जरूरी आयात को सीमित करना जरूरी है। आयात शुल्क बढ़ने के बाद घरेलू बाजार में सोना और चांदी महंगे होने की संभावना जताई जा रही है।

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