चाईबासा | बढ़ती गर्मी और लू (हीट वेव) के खतरे को देखते हुए झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। विभाग द्वारा जारी जन-जागरूकता संदेश में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी और गर्म हवाओं के संपर्क में आने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के एवं सूती कपड़े पहनने तथा धूप में निकलने से बचने की सलाह दी गई है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लू लगने पर शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी, बेहोशी तथा अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इससे बचाव के लिए नियमित रूप से पानी, नींबू-पानी, छाछ, लस्सी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है।
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विभाग ने लोगों को घर से बाहर निकलते समय सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढकने, धूप का चश्मा पहनने तथा दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी है। साथ ही, घर और कार्यस्थल पर पर्याप्त वेंटिलेशन एवं ठंडे वातावरण की व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
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गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए ओआरएस (ORS) घोल के उपयोग की जानकारी भी साझा की गई है। विभाग ने बताया कि एक लीटर स्वच्छ पानी में ओआरएस का पूरा पैकेट मिलाकर घोल तैयार किया जा सकता है, जिसका उपयोग 24 घंटे के भीतर कर लेना चाहिए।
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स्वास्थ्य संबंधी किसी भी जानकारी, सलाह या शिकायत के लिए राज्य हेल्पलाइन नंबर 104 (टोल फ्री) पर संपर्क करने की अपील की गई है।
चाईबासा | एक ओर सोने और हीरों का ढेर है, तो दूसरी ओर लहलहाता हुआ हरा-भरा पेड़। दुनिया जिसे ‘दौलत’ कहती है, वह बंजर भूमि पर पड़ी चमकती वस्तुएँ हो सकती हैं, लेकिन आदिवासी समाज की दृष्टि में वास्तविक धन वह वृक्ष है, जिसकी जड़ों में संस्कृति और जिसकी शाखाओं में भविष्य सुरक्षित है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रकृति संरक्षण और आदिवासी जीवन-दर्शन पर केंद्रित यह संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गया है। आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार और आस्था का केंद्र मानता आया है।
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प्रकृति ही हमारी सबसे बड़ी पूँजी आदिवासियत का मूल भाव प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन जीना है। आदिवासी समुदाय के लिए पेड़ केवल लकड़ी का स्रोत नहीं, बल्कि देवतुल्य संरक्षक और सांस्कृतिक विरासत हैं। आज जब विकास की अंधी दौड़ में कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं, तब स्वच्छ हवा, शीतल छाया और प्राकृतिक संतुलन का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। सोना और हीरे भले ही आर्थिक समृद्धि के प्रतीक हों, लेकिन वे न तो ऑक्सीजन प्रदान कर सकते हैं और न ही भीषण गर्मी में छाया दे सकते हैं। इसी संदर्भ में एक प्रसिद्ध कथन याद आता है— “जब आखिरी पेड़ काट दिया जाएगा, आखिरी नदी प्रदूषित हो जाएगी और आखिरी मछली पकड़ ली जाएगी, तब इंसान को समझ आएगा कि वह पैसों को खा नहीं सकता।”
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इस वर्ष की थीम: प्रकृति से प्रेरित, भविष्य के लिए समर्पित इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम “Inspired by Nature. For Climate. For Our Future” (प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।) रखी गई है। इसके साथ ही दुनिया भर में #NowForClimate अभियान चलाया जा रहा है। यह थीम आदिवासी जीवन-दर्शन से पूरी तरह मेल खाती है। आदिवासी समाज सदैव प्रकृति को अपना गुरु मानता रहा है। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का समाधान प्रकृति के संरक्षण में ही निहित है। जंगल कार्बन अवशोषित करते हैं, नदियाँ जीवन देती हैं और पर्वत प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते वैश्विक तापमान और चरम मौसमीय घटनाओं के दौर में टिकाऊ जीवनशैली अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जल, जंगल और जमीन से जुड़ा अस्तित्व आदिवासी समाज का भूमि से रिश्ता केवल स्वामित्व का नहीं, बल्कि श्रद्धा और जिम्मेदारी का है। समुदाय यह भलीभांति समझता है कि जंगलों का अस्तित्व ही मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। वृक्ष ऑक्सीजन, फल, औषधियाँ और प्राकृतिक संतुलन प्रदान करते हैं, जो जीवन के लिए अनिवार्य हैं।
जलवायु संकट के दौर में आदिवासियत की प्रासंगिकता आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे समय में आदिवासी संस्कृति का प्रकृति-केंद्रित जीवन-दर्शन एक महत्वपूर्ण समाधान प्रस्तुत करता है। यह समाज हमेशा आवश्यकता भर ही प्रकृति से लेने और उसके संरक्षण को प्राथमिकता देने की सीख देता रहा है। आदिवासी मान्यता के अनुसार, सोना-चांदी और हीरे जीवन की वास्तविक जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते। कठिन परिस्थितियों में जीवन बचाने का आधार हरियाली, जल स्रोत और स्वच्छ वातावरण ही होते हैं। यही कारण है कि पर्यावरण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि मनुष्य प्रकृति का मालिक नहीं, बल्कि उसका अभिन्न हिस्सा है। आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली की विरासत पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए समाज के बुद्धिजीवियों का कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास नहीं जो प्रकृति और मानव जीवन के बीच की दूरी बढ़ा दे। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण समय की मांग है। आदिवासी समाज का मानना है कि वास्तविक विरासत सोना-चांदी नहीं, बल्कि वे पेड़ हैं जिन्हें हम अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़कर जाते हैं। “पेड़ लगाइए, जीवन बचाइए। क्योंकि प्रकृति है, तभी हम हैं।”
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने जिलेवासियों से माहवारी स्वच्छता एवं इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को समाप्त करने के उद्देश्य से संचालित ‘चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो’ महाअभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।
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उपायुक्त ने अपने संदेश में कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य माहवारी से जुड़े मिथकों, गलत धारणाओं और सामाजिक संकोच को दूर करते हुए किशोरियों एवं महिलाओं के बीच स्वास्थ्य तथा स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में माहवारी को लेकर अनेक भ्रांतियां और झिझक मौजूद हैं, जिन्हें सामूहिक प्रयासों के माध्यम से समाप्त करना आवश्यक है।
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उन्होंने जिलेवासियों से ‘रेड डॉट चैलेंज’ से जुड़ने और अपने-अपने स्तर पर जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उपायुक्त ने कहा कि इस विषय पर जितनी खुलकर चर्चा होगी, उतनी ही तेजी से इससे जुड़ी वर्जनाएं और सामाजिक टैबू समाप्त होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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मनीष कुमार ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र की किशोरियों एवं महिलाओं को स्वास्थ्य, स्वच्छता और माहवारी प्रबंधन से संबंधित सही एवं वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग करे। उन्होंने नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों तथा युवाओं से इस महाअभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देकर सफल बनाने की अपील की।
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अंत में उपायुक्त ने कहा कि सभी लोग मिलकर चुप्पी तोड़ें और जिले की किशोरियों एवं महिलाओं को स्वस्थ, सुरक्षित एवं सशक्त बनाने की दिशा में सार्थक योगदान दें।
चिरिया । बंद पड़ी टुंगविल माइंस के पुनः संचालन की चर्चाओं के बीच स्थानीय ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं ने अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। बुधवार को चिरिया टुंगविल माइंस से प्रभावित छह गांवों—चिरिया, बिनुवा, अंकुवा, लोइडी, टिमरा और सोंगा—के ग्रामीणों की एक सामूहिक बैठक हाट परिसर में आयोजित की गई।
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प्रकाश सिद्धू की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पांच गांवों के पारंपरिक मुंडाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा शामिल हुए। बैठक के दौरान वक्ताओं ने सेल (SAIL) प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से जारी खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों की उपजाऊ कृषि भूमि और खलिहान प्रभावित हुए हैं। साथ ही क्षेत्र की नदियों का पानी भी प्रदूषित हुआ है, जिससे किसानों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि माइंस से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों के कारण खेतों का कटाव बढ़ा है और प्रभावित परिवारों को आज तक उचित मुआवजा नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से इस समस्या का सामना करने के बावजूद उनकी मांगों की अनदेखी की जाती रही है।
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बैठक में उपस्थित युवाओं ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि सेल प्रबंधन स्थानीय प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने के बजाय बाहरी लोगों को अवसर दे रहा है। इसे स्थानीय लोगों के साथ अन्याय बताते हुए युवाओं ने रोजगार में प्राथमिकता सुनिश्चित करने की मांग की।
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सेल प्रबंधन की कथित वादाखिलाफी के विरोध में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से 3 जून से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया। आंदोलन की प्रमुख मांगों में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता तथा क्षेत्रीय हितों की रक्षा शामिल है। बैठक में मुंडा विजय लागुरी, सोमा चेरवा, गांजो सुरीन, माडु चेरवा सहित कई ग्रामीण और युवा उपस्थित थे।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री एवं परिवहन पर रोक लगाने के लिए उत्पाद विभाग द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अधीक्षक उत्पाद, पश्चिमी सिंहभूम के निर्देश पर 3 जून 2026 को चक्रधरपुर एवं टोकलो थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
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उत्पाद विभाग की टीम ने चक्रधरपुर थाना क्षेत्र के चैनपुर गांव में अवैध रूप से शराब बिक्री की सूचना के आधार पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को अवैध चुलाई शराब बेचते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
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इसी तरह टोकलो थाना क्षेत्र के चीटपिल गांव में अवैध चुलाई शराब की बिक्री के लिए कुख्यात स्थल पर छापेमारी की गई। इस दौरान एक अन्य शराब विक्रेता को गिरफ्तार किया गया। दोनों अभियानों के दौरान कुल 17 लीटर अवैध चुलाई शराब बरामद की गई। गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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सके अतिरिक्त उपायुक्त के निर्देश पर अनुज्ञप्ति प्राप्त खुदरा शराब दुकानों (अनुज्ञप्ति संख्या 001_COM_WES_25-26 एवं 007_COM_WES_25-26) का औचक निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान एक दुकान में अनधिकृत व्यक्ति द्वारा मदिरा बिक्री किए जाने का मामला सामने आया। इस पर संबंधित अनुज्ञप्तिधारी के विरुद्ध अनियमितता दर्ज करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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उत्पाद विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा तथा कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चाईबासा | सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खूंटपानी के अंतर्गत ग्राम टेकरागुट्टू में मंगलवार, 3 जून 2026 को रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को कीट जनित रोगों, विशेषकर मलेरिया एवं फाइलेरिया से बचाव के लिए अपनाए जाने वाले व्यक्तिगत एवं सामुदायिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सरल एवं सहज भाषा में ग्रामीणों को इन रोगों के लक्षणों की पहचान, समय पर जांच तथा पूर्ण उपचार के महत्व के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि रोग की प्रारंभिक अवस्था में जांच और उपचार कराने से गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचा जा सकता है।
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चौपाल के दौरान मिशन उदय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की गईं। ग्रामीणों से अपील की गई कि वे अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा आयोजित स्वास्थ्य शिविरों में पहुंचकर आवश्यक स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं तथा सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाएं।
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कार्यक्रम में जिला वीबीडी पदाधिकारी, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी खूंटपानी, वीबीडी सलाहकार, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), एएनएम, एमपीडब्ल्यू, ग्राम की सहिया एवं ग्राम मुंडा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से स्वच्छता बनाए रखने, घर एवं आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई रखने तथा मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने की अपील की। साथ ही मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
कांड्रा | दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) तरुण हुरिया ने बुधवार को कांड्रा जंक्शन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्टेशन परिसर, यात्री सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था तथा साफ-सफाई की स्थिति का जायजा लिया। डीआरएम के आगमन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण अपनी विभिन्न मांगों को लेकर स्टेशन पहुंचे।
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निरीक्षण के बाद डीआरएम तरुण हुरिया ने कहा कि कांड्रा स्टेशन को चक्रधरपुर मंडल के सबसे सुंदर और आधुनिक स्टेशनों में शामिल करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि तीसरी एवं चौथी रेल लाइन के निर्माण का कार्य प्रगति पर है, जिससे स्टेशन का विस्तार होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उन्होंने कहा कि स्टेशन पर लिफ्ट, आधुनिक प्रतीक्षालय, ऑटो-टैक्सी स्टैंड तथा बेहतर बस कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके अलावा अंडरपास निर्माण से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए रेलवे स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।
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इस दौरान स्थानीय लोगों ने कोरोना काल से बंद टाटा-छपरा एक्सप्रेस सहित कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के कांड्रा स्टेशन पर पुनः ठहराव की मांग उठाई। कांग्रेस के जिला महासचिव सह कार्यालय प्रभारी प्रकाश कुमार राजू ने कहा कि लंबे समय से आंदोलन और ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव अब तक बहाल नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने धनबाद-स्वर्णरेखा एक्सप्रेस, टाटा-दानापुर एक्सप्रेस, टाटा-जम्मू तवी एक्सप्रेस, जलियांवाला बाग एक्सप्रेस, रांची-हावड़ा इंटरसिटी एक्सप्रेस तथा हटिया-हावड़ा एक्सप्रेस के कांड्रा स्टेशन पर ठहराव की भी मांग रखी। इस पर डीआरएम ने बताया कि अतिरिक्त ट्रेनों के ठहराव संबंधी प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा जा चुका है। इस विषय पर अंतिम निर्णय रेलवे बोर्ड स्तर पर लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यात्रियों की सुविधा और रेलवे के राजस्व को ध्यान में रखते हुए कांड्रा स्टेशन के विकास एवं ट्रेन ठहराव के मुद्दे पर सकारात्मक प्रयास जारी हैं।
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निरीक्षण के दौरान सीनियर डीसीएम आदित्य कुमार चौधरी, स्टेशन मास्टर विवेक कुमार, आरपीएफ प्रभारी अश्मित वर्मा सहित रेलवे के कई अधिकारी उपस्थित थे। स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि कांड्रा स्टेशन के विकास कार्यों के साथ-साथ लंबित ट्रेन ठहराव की मांगों पर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
नई दिल्ली/चाईबासा | जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित “जनजातीय गरिमा उत्सव-2026” के अंतर्गत संचालित “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले अभियान” के सफल क्रियान्वयन के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिले को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन-सह-सम्मान समारोह में जिले को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पांच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।
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18 से 25 मई 2026 तक संचालित इस अभियान के सफल संचालन के आधार पर पश्चिमी सिंहभूम झारखंड का एकमात्र जिला रहा, जिसे देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान प्राप्त हुआ। समारोह में जिले का प्रतिनिधित्व समेकित जनजाति विकास अभिकरण (आईटीडीए) के परियोजना निदेशक ने किया तथा जिले में संचालित विभिन्न गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण भी किया। जनजातीय बहुल एवं दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पश्चिमी सिंहभूम जिले में जिला प्रशासन ने जन-केंद्रित और समावेशी विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करते हुए अभियान को सफल बनाया। अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ एवं वंचित जनजातीय परिवारों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करना था।
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अभियान के दौरान जिले के सभी 18 प्रखंडों के 927 गांवों में कुल 855 शिविर आयोजित किए गए, जिनसे 2.23 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए। इस अवधि में कुल 21,845 सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इनमें स्वास्थ्य जांच शिविर, आधार कार्ड सेवाएं, जाति एवं आय प्रमाण-पत्र, पेंशन नामांकन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, मनरेगा लाभ तथा सिकल सेल जांच जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल थीं। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, पोषण अभियान, सुकन्या समृद्धि योजना तथा वनघन योजना के तहत भी बड़ी संख्या में लाभार्थियों को सेवाएं प्रदान की गईं। अभियान के तहत जनसुनवाई एवं डोरस्टेप सेवा के माध्यम से 8,068 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 7,042 शिकायतों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया। जिला प्रशासन ने रक्तदान अभियान के माध्यम से 680 यूनिट से अधिक रक्त संग्रह किया। इसके साथ ही टीबी मरीजों को गोद लेने, फूड बास्केट वितरण, पंचायत भवनों के सुदृढ़ीकरण, वृक्षारोपण तथा स्वास्थ्य एवं पोषण जागरूकता कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।
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महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए “सखी दिवस” तथा विद्यालयों में सामाजिक समावेशन एवं सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए “तिथि भोज-सह-जनमोत्सव” जैसी अभिनव पहलें भी संचालित की गईं। अभियान में पारंपरिक मानकी-मुंडा व्यवस्था की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे जनजातीय क्षेत्रों में सहभागी एवं संवेदनशील शासन व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिली। पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार के नेतृत्व में आईटीडीए तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से यह अभियान जनभागीदारी आधारित विकास एवं सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।
रांची | झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक गतिविधियों के बीच प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू बुधवार रात करीब आठ बजे दिल्ली से रांची पहुंचे। राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर उनका यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में के. राजू ने राज्यसभा की एक सीट कांग्रेस को दिए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी का पक्ष और तर्क मुख्यमंत्री के समक्ष रखा था। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए दो से तीन दिनों का समय मांगा था।
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इसके बाद के. राजू दिल्ली लौट गए और मुख्यमंत्री के विचारों से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अवगत कराया। अब माना जा रहा है कि वह पार्टी नेतृत्व का संदेश लेकर एक बार फिर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर सकते हैं और राज्यसभा की एक सीट कांग्रेस को देने की मांग दोहराएंगे। साथ ही गठबंधन धर्म के पालन का मुद्दा भी उठा सकते हैं। हालांकि, फिलहाल मुख्यमंत्री के साथ उनकी मुलाकात का कोई आधिकारिक कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। रांची प्रवास के दौरान के. राजू पार्टी के विभिन्न संगठनों और समितियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे।
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प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, 4 जून को सुबह 10 बजे से वे पुराना विधानसभा सभागार में आयोजित को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक में शामिल होंगे। इसके बाद दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक जिला प्रभारियों के साथ बैठक करेंगे। 5 जून को वे पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी तथा पार्टी के फ्रंटल संगठनों के साथ बैठक करेंगे। वहीं, 6 जून का उनका कार्यक्रम अभी निर्धारित नहीं किया गया है।
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पार्टी सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही राजनीतिक कवायद और सीट बंटवारे के मुद्दे पर अंतिम निर्णय होने तक के. राजू के रांची में ही रुकने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित है।
मझगांव | मझगांव प्रखंड में संचालित जलमीनार (जलापूर्ति) योजना की बदहाल स्थिति को लेकर पूर्व मंत्री एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुमार गागराई ने बुधवार को योजना स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि जलमीनार से लंबे समय से जलापूर्ति बंद है, जिसके कारण क्षेत्र के ग्रामीणों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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निरीक्षण के दौरान गागराई ने जलमीनार परिसर का जायजा लेकर योजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने देखा कि जलापूर्ति व्यवस्था ठप होने से ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो गई है तथा लोगों को पानी के लिए दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। मौके पर उपस्थित ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं से पूर्व मंत्री को अवगत कराया। ग्रामीणों ने बताया कि जलापूर्ति योजना पिछले कई महीनों से बंद पड़ी है। इस संबंध में कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। ग्रामीणों ने योजना की शीघ्र मरम्मत कर नियमित जलापूर्ति बहाल करने की मांग की।
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निरीक्षण के बाद बड़कुमार गागराई ने कहा कि स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जलापूर्ति योजना जनवरी माह से बंद है, लेकिन इसके बावजूद सरकार और संबंधित विभाग ने समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास योजनाओं की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई महत्वपूर्ण योजनाएं बदहाल स्थिति में हैं। अधिकारियों की लापरवाही के कारण अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। गागराई ने यह भी आरोप लगाया कि ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली योजनाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी क्षेत्र की समस्याओं के प्रति उदासीन रहने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जनता पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए परेशान है, जबकि जिम्मेदार लोग समस्या के समाधान के प्रति गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
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पूर्व मंत्री ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से अविलंब मरम्मत कार्य शुरू कर जलापूर्ति व्यवस्था को पुनः चालू करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो जनहित में आंदोलन शुरू किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि बड़कुमार गागराई के हस्तक्षेप के बाद विभाग सक्रिय होगा और बंद पड़ी जलमीनार योजना की मरम्मत कर नियमित जलापूर्ति बहाल की जाएगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को पेयजल संकट से राहत मिल सकेगी।