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चाईबासा: रसोईया एवं संयोजिकाओं की कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन, पोषण वाटिका और स्वच्छता पर दिया गया जोर

चाईबासा: रसोईया एवं संयोजिकाओं की कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन, पोषण वाटिका और स्वच्छता पर दिया गया जोर

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत टाटा कॉलेज, चाईबासा परिसर स्थित बहुउद्देशीय सभागार में जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में रसोईया एवं संयोजिकाओं के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार एवं जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार भी उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं पौष्टिक मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराना, उनके पोषण स्तर में सुधार लाना तथा विद्यालय आधारित स्वास्थ्य एवं स्वच्छता गतिविधियों को सुदृढ़ करना था। कार्यशाला में मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता मानक, पोषण प्रबंधन, विद्यालयों में पोषण वाटिका निर्माण, स्वास्थ्य जागरूकता एवं विभिन्न जनकल्याणकारी अभियानों से संबंधित विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास में शिक्षा और पोषण दोनों की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक स्वस्थ एवं पोषित बच्चा ही बेहतर तरीके से शिक्षा ग्रहण कर सकता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास का भी महत्वपूर्ण मंच है।
उपायुक्त ने कहा कि रसोईया एवं संयोजिकाएं बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य निर्माण से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यालयों में तैयार होने वाले मध्यान्ह भोजन में पौष्टिकता, गुणवत्ता एवं स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि भोजन तैयार करने के दौरान निर्धारित मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा खाद्य सामग्री के चयन से लेकर भोजन परोसने तक की पूरी प्रक्रिया में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए।

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उन्होंने कहा कि भोजन केवल बच्चों की भूख मिटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास से भी सीधे जुड़ा हुआ है।
कार्यशाला के दौरान उपायुक्त ने विद्यालयों में पोषण वाटिका विकसित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यालय परिसर में पोषण वाटिका तैयार की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर हरी सब्जियां, फल एवं अन्य पोषक खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि पोषण वाटिका बच्चों में पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी। विद्यालय परिसरों में उपलब्ध भूमि का उपयोग करते हुए मौसमी सब्जियां, फलदार एवं औषधीय पौधे लगाने के निर्देश भी दिए गए।

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उपायुक्त ने कहा कि विद्यालयों में कार्यरत रसोईया एवं संयोजिकाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है, ताकि वे खाद्य सुरक्षा, पोषण संतुलन, स्वच्छता मानकों तथा सुरक्षित खाद्य प्रबंधन से संबंधित अद्यतन जानकारी प्राप्त कर सकें। कार्यशाला में प्रतिभागियों को संतुलित भोजन तैयार करने, बच्चों की पोषण आवश्यकताओं को समझने, स्वच्छ रसोई संचालन, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन परोसने से संबंधित व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
रसोईघरों की आधारभूत व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी विद्यालयों के रसोईघर स्वच्छ, यथासंभव धुआं एवं प्रदूषण मुक्त तथा पर्याप्त प्रकाश एवं वेंटिलेशन युक्त हों। सुरक्षित एवं स्वास्थ्यकर वातावरण में भोजन तैयार किए जाने को सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण एवं आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए।

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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उपायुक्त ने विद्यालयों में पौधारोपण अभियान संचालित करने का निर्देश देते हुए कहा कि सभी विद्यालय निर्धारित तिथि पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित करें तथा बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक दायित्व है।
कार्यशाला के दौरान मलेरिया जागरूकता माह, “चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो” अभियान तथा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता एवं सामाजिक जागरूकता से संबंधित विषयों पर शपथ ग्रहण कर समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर प्रत्येक माह की 20 तारीख को विद्यालयों में आयोजित होने वाले तिथि भोजन कार्यक्रम के सफल संचालन में उत्कृष्ट योगदान देने वाली लगभग 36 रसोईया एवं संयोजिकाओं को प्रशस्ति पत्र एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के एपीओ, बीआरपी, सीआरपी सहित लगभग 1500 रसोईया एवं संयोजिकाओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।