ओडिशा | ओडिशा के जाजपुर जिले के एक गांव में दहीबड़ा खाने के बाद 58 लोग बीमार हो गए, जिनमें 27 बच्चे भी शामिल हैं। सभी प्रभावितों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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प्राथमिक जानकारी के अनुसार, खाने में क्या गड़बड़ी थी, इसका अभी स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है और मामले की जांच जारी है।
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घटना की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तुरंत तीन जांच टीमों का गठन किया है। वहीं, संबंधित मंत्री ने भी अस्पताल पहुंचकर मरीजों का हालचाल जाना और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
रांची | झारखंड सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को बड़ी राहत देते हुए अनुग्रह राशि में चार गुना बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री Hemant Soren की अध्यक्षता में हुई झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। नई व्यवस्था के तहत अब सड़क हादसे में मृत व्यक्ति के आश्रितों को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी, जबकि पहले यह राशि 1 लाख रुपये थी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से प्रभावित परिवारों को आर्थिक रूप से बड़ी मदद मिलेगी।
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बैठक में अनुग्रह अनुदान की प्रक्रिया को भी सरल बनाने का फैसला किया गया। इसके तहत संबंधित जिले के उपायुक्त (डीसी) द्वारा घटना का सत्यापन किए जाने के बाद ही सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ने और दोहरे भुगतान की संभावना समाप्त होने की उम्मीद जताई गई है।
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इसके अलावा, ‘अदर डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोग्राम’ के अंतर्गत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार में कार्यरत क्षमता संवर्धन पदाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारियों की सेवा अवधि को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक बढ़ाने को मंजूरी दी गई। बैठक में ‘युवा आपदा मित्र योजना’ को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। Dumka, Godda, Pakur और Sahibganj जिलों में संचालित इस योजना के तहत स्वयंसेवकों का डेटाबेस तैयार कर उन्हें इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम से जोड़ने का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री ने योजना के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने तथा स्वयंसेवकों को भत्ता देने का प्रस्ताव लाने के निर्देश भी दिए। राज्य में डूबने से होने वाली मौतों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए ‘संप्रति-48’ योजना के तहत गोताखोरों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार का कहना है कि इन पहलों से आपदा प्रबंधन प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी तथा जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल सकेगी।
खरसावां | प्रखंड मुख्यालय में बुधवार को प्रखंड प्रशासन एवं “समस्त रक्तवीर खरसावां” के संयुक्त तत्वावधान में एक महा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 80 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया। रक्तदान करने वाले सभी रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रधान माझी, अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू, खरसावां थाना प्रभारी गौरव कुमार, प्रखंड प्रमुख मनेन्द्र जामुदा एवं जिला परिषद सदस्य काली चरण बानरा सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
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इस अवसर पर बीडीओ प्रधान माझी ने कहा कि विज्ञान ने भले ही काफी प्रगति कर ली हो, लेकिन रक्त का निर्माण आज भी मशीन से संभव नहीं है। रक्त केवल मानव शरीर से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान मानवीय संवेदना का सर्वोत्तम उदाहरण है, क्योंकि रक्त किसी जाति, धर्म या मजहब को नहीं देखता, बल्कि केवल जीवन बचाने का कार्य करता है। उन्होंने यह भी बताया कि नियमित रक्तदान से हार्ट अटैक की संभावना कम होती है, रक्त पतला रहता है और थक्के जमने का खतरा घटता है। साथ ही, इससे वजन भी नियंत्रित रहता है। उन्होंने लोगों से वर्ष में कम से कम दो बार रक्तदान करने की अपील की।
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अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू ने रक्तदान को एक अत्यंत सराहनीय एवं मानवहितकारी कार्य बताते हुए कहा कि इसके लिए खरसावां वासी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छता और सकारात्मक सोच के साथ समाज सेवा में आगे आने का आह्वान किया। शिविर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर रक्तदान किया और रक्तदाताओं के बीच प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
इन लोगों को किया गया सम्मानित सरायकेला-खरसावां मॉडल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बिनय कुमार सिंह को अब तक 81 बार रक्तदान एवं 79 बार कैंसर पीड़ितों के लिए प्लेटलेट्स डोनेट करने सहित कुल 160 बार रक्त एवं प्लेटलेट्स दान करने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा खरसावां के शिक्षाविद् एवं समाजसेवी आलोक दास (36 बार रक्तदान), प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रधान माझी (31 बार रक्तदान) तथा अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू (12 बार रक्तदान) को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उप प्रमुख ज्योत्सना मंडल, जिला परिषद सदस्य सावित्री बानरा, मुखिया सुनिता तापे, प्रभाकर मंडल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
चाईबासा | जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित आयुष सेवाओं, विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
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समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने आयुष केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं, चिकित्सकों की उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता तथा मरीजों को दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आयुष पद्धति के माध्यम से आमजन को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
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उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि रोस्टर के अनुसार जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रूप से आयुष शिविर (कैम्प) आयोजित किए जाएं, ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को भी इन सेवाओं का लाभ मिल सके।
बैठक में आयुष योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जन-जागरूकता बढ़ाने और गांवों तक सेवाओं की पहुंच को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। प्रशासन का उद्देश्य आयुष सेवाओं को सशक्त बनाकर आम जनता तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है।
जमशेदपुर | शहर में बढ़ती गर्मी के साथ मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। इसी क्रम में बागबेड़ा स्थित घाघीडीह बस्ती में चिकन पॉक्स (चेचक) के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। संक्रमण की पुष्टि होते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार को मामले की जानकारी मिलते ही सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के निर्देश पर जिला सर्विलांस टीम प्रभावित क्षेत्र में पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद संक्रमण के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से पूरे इलाके में डोर-टू-डोर सर्वे अभियान चलाया गया।
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जिला महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. असद के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने घाघीडीह बस्ती में सघन जांच अभियान संचालित किया। सर्वे के दौरान तीन लोगों में चिकन पॉक्स की पुष्टि हुई है, जबकि दो अन्य संदिग्ध मरीजों के नमूने लेकर जांच के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज की प्रयोगशाला भेजे गए हैं। टीम में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ सहिया और एएनएम भी शामिल हैं, जो लगातार क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गर्मी के मौसम में वैरिकेला-जोस्टर वायरस अधिक सक्रिय हो जाता है। बढ़ते तापमान और कमजोर होती रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण यह संक्रमण तेजी से फैल सकता है, विशेषकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में। अधिकारियों ने बताया कि समय पर पहचान और आवश्यक सावधानियों से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
इस बीच स्वास्थ्य टीम ने स्थानीय लोगों को जागरूक करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। लोगों को संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखने, घर और आसपास साफ-सफाई रखने तथा बुखार, शरीर पर लाल दाने या खुजली जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल पर ध्यान देने को कहा गया है, क्योंकि वे इस संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी व्यापक स्तर पर जांच एवं जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
नोवामुंडी | नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत रुतागुटू स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मलेरिया के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस पहल के तहत प्रखंड के विभिन्न गांवों में जागरूकता अभियान चलाने के लिए कुल 16 वॉलिंटियर का चयन किया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया से बचाव, उसके लक्षणों की पहचान तथा समय पर उपचार की जानकारी लोगों तक पहुंचाना है,
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ताकि इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। इसी क्रम में गुंडीजोड़ा गांव से पप्पु गौड़ का चयन वॉलिंटियर के रूप में किया गया है।
सरायकेला | पीएनबी ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, सरायकेला द्वारा आयोजित 12 दिवसीय फास्ट फूड स्टॉल प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 20 प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
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यह प्रशिक्षण सत्र वित्तीय वर्ष 2025-26 का अंतिम बैच था, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के निदेशक ने प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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समापन समारोह में संस्थान के संकाय सदस्य शैलेन्द्र गोप, गोबिंद राय, दिलीप आचार्य, इंद्रजीत कैबत एवं द्रौपदी महतो भी उपस्थित रहे। सभी ने प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।
सरायकेला | झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देशानुसार सरायकेला-खरसावां जिला आयुष समिति के सौजन्य से राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत जिले के विभिन्न प्रखंडों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को आयुष चिकित्सा पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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इसी क्रम में सोमवार को सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय, सरायकेला के प्रांगण में नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। इस अवसर पर जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पूनम कुमारी ने कहा कि क्रॉनिक बीमारियों को जड़ से खत्म करने की जो क्षमता आयुर्वेद में है, वह अन्य चिकित्सा पद्धतियों में कम देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि तत्काल राहत के लिए अंग्रेजी दवाओं का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेद, योग, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।
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उन्होंने उपस्थित शिक्षक एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं में राष्ट्र निर्माण की अपार शक्ति निहित होती है। युवा राष्ट्र के कर्णधार हैं और वे इस संदेश को घर-घर तक पहुंचाकर अधिक से अधिक लोगों को आयुष पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
जिला आयुष समिति द्वारा विभिन्न प्रखंडों में चलाए जा रहे स्वास्थ्य जांच शिविरों की जानकारी देते हुए लोगों से इसका लाभ उठाने की अपील भी की गई। सरायकेला प्रखंड के बड़बिल, कीता एवं मुकुंदपुर सहित अन्य गांवों में भी नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आयुष चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही खान-पान में सावधानी बरतने तथा दैनिक दिनचर्या में नियमित योग और व्यायाम को शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
सरायकेला: सरायकेला नगर पंचायत के नव-निर्वाचित अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी जन समस्याओं के समाधान को लेकर लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। एक कुशल व्यवसायी होने के साथ-साथ लंबे समय से समाज सेवा में सक्रिय रहे मनोज चौधरी अध्यक्ष चुने जाने के बाद जनहित के कार्यों को लेकर नए उत्साह और जुनून के साथ 24×7 लोगों की सेवा में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में सोमवार सुबह करीब सात बजे वे नगर पंचायत क्षेत्र के देहुरीडीह निवासी हृदय रोग से पीड़ित अभिमन्यु नायक का हाल-चाल जानने उनके घर पहुंचे। उन्होंने सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. नकुल चौधरी से बातचीत कर अभिमन्यु नायक के बेहतर इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में समुचित समन्वय स्थापित कराया।
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इस दौरान उन्होंने बस्ती के लोगों से नशा की लत से दूर रहने की अपील की और कहा कि समाज को इस समस्या से बाहर निकालने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। मनोज चौधरी ने बाल श्रम और छोटे बच्चों को पैसों के लालच में देर रात तालाब में जाकर कमल फूल और अन्य फूल तोड़ने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। उन्होंने ऐसे बच्चों के परिजनों को फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों को इस प्रकार के असुरक्षित कार्यों से रोकें और उनका स्कूल में दाखिला सुनिश्चित करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी प्रकार की परेशानी हो तो वे उनसे संपर्क करें, हर संभव सहायता की जाएगी।
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उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि अपने स्वार्थ के लिए बच्चों को पैसे या अन्य प्रलोभन देकर उनके भविष्य से खिलवाड़ न करें। बच्चों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बस्तीवासियों से बातचीत के दौरान यह जानकारी मिली कि बैसाखी नामक महिला के निधन के बाद उसके तीन बच्चे अनाथ हो गए हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मनोज चौधरी ने मौके पर ही बाल संरक्षण पदाधिकारी संतोष ठाकुर को बुलाया और माता-पिता के निधन से अनाथ हुए बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने तथा आवश्यक लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मनोज चौधरी की त्वरित समस्या समाधान की इस कार्यशैली की इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है।
कोल्हान (पश्चिम सिंहभूम): पश्चिम सिंहभूम जिले के जराईकेला थाना क्षेत्र अंतर्गत राजकीय बुनियादी विद्यालय, जराईकेला में सुरक्षा बलों की F/134 बटालियन द्वारा जनकल्याण एवं ग्रामीणों के साथ विश्वास निर्माण के उद्देश्य से सिविक एक्शन कार्यक्रम (Civic Action Programme) का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मकरंडा गांव के टोला परोडीह क्षेत्र में बटालियन के कमांडेंट त्रिलोक नाथ सिंह के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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कार्यक्रम के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुंदन कुमार सिंह ने ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा उन्हें आवश्यक दवाइयों का निःशुल्क वितरण किया। इस दौरान ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए विभिन्न बीमारियों से बचाव के उपायों की भी जानकारी दी गई।
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इसके साथ ही विद्यालय के बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताते हुए पढ़ाई के प्रति सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। जवानों और अधिकारियों ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण साधन है।
इस कार्यक्रम में डॉक्टर के.के. सिंह, बी.बी. भक्ता, इंस्पेक्टर सतेंद्र, विद्यालय के शिक्षक चंद्रो महतो, ग्राम मुंडा ममता भूमिज, सुफल बेक, अनीता बेक सहित दर्जनों ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे जनकल्याण और सुरक्षा बलों व ग्रामीणों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।