स्वास्थ्य

सरायकेला पेयजल योजनाओं की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने दिए त्वरित मरम्मति और जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश

सरायकेला पेयजल योजनाओं की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने दिए त्वरित मरम्मति और जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश

सरायकेला | समाहरणालय सभागार में उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला जल एवं स्वच्छता समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित विभिन्न पेयजल आपूर्ति योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए खराब पड़े चापाकलों एवं जलमीनारों की शीघ्र मरम्मति सुनिश्चित करने तथा पेयजल संबंधी शिकायतों का समयबद्ध निष्पादन करने के निर्देश दिए गए।

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उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि छूटे हुए सभी गांवों एवं टोलों को नल-जल योजना से आच्छादित करते हुए प्रत्येक घर तक पेयजल कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि ड्राई क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन को किसी प्रकार की पेयजल समस्या का सामना न करना पड़े।
बैठक में जल जीवन मिशन (JJM), सिंगल विलेज स्कीम (SVS), मल्टी विलेज स्कीम (MVS) तथा 14वें एवं 15वें वित्त आयोग के तहत संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने वर्तमान में बंद अथवा खराब पड़ी पेयजल योजनाओं की शीघ्र मरम्मति कर उन्हें पुनः संचालित करने का निर्देश दिया।

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उन्होंने अधिकारियों को नियमित क्षेत्र भ्रमण कर योजनाओं की भौतिक स्थिति का निरीक्षण करने, जलापूर्ति बाधित होने की स्थिति में त्वरित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। साथ ही विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों का त्वरित संज्ञान लेकर निर्धारित समयसीमा के भीतर उनका निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा।

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बैठक में प्रभारी उप विकास आयुक्त सह निदेशक डीआरडीए अजय तिर्की, कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, सभी कनीय अभियंता, जिला समन्वयक, प्रखंड समन्वयक समेत अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

झींकपानी में सब्जी विक्रेता पर तीर से जानलेवा हमला, हालत गंभीर

झींकपानी में सब्जी विक्रेता पर तीर से जानलेवा हमला, हालत गंभीर

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी थाना क्षेत्र में तीर से जानलेवा हमला किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार बेटेया गांव निवासी 45 वर्षीय चोया बिरूली अपने गांव से सब्जी लेकर जोड़ापोखर हाट बेचने जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में घात लगाकर बैठे चिड़ियापहाड़ी गांव निवासी दोपे बिरूली ने उन पर तीर से हमला कर दिया।

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बताया जा रहा है कि आरोपी ने एक के बाद एक करीब 20 तीर चलाए, जिनमें से 3 तीर चोया बिरूली के शरीर में जा धंसे। तीर लगने से वे गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। राहगीरों ने घायल अवस्था में देखकर घटना की सूचना पुलिस को दी।

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सूचना मिलते ही झींकपानी थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घायल को इलाज के लिए सदर अस्पताल चाईबासा पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम शरीर में धंसे तीर को निकालने में जुटी हुई है। चिकित्सकों के अनुसार घायल की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।

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पुलिस मामले की जांच में जुट गई है तथा आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

प्रोजेक्ट जागृति के तहत जिले के छह प्रखंडों में रक्तदान शिविर आयोजित, 193 यूनिट रक्त संग्रहित

प्रोजेक्ट जागृति के तहत जिले के छह प्रखंडों में रक्तदान शिविर आयोजित, 193 यूनिट रक्त संग्रहित

चाईबासा | जिले में संचालित प्रोजेक्ट जागृति के तहत प्रत्येक माह की 08 एवं 24 तारीख को विभिन्न प्रखंडों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसी क्रम में आज जिले के छह प्रखंडों में व्यापक स्तर पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर रक्तदान किया।

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प्रखंड सदर चाईबासा स्थित एमटीसी सदर अस्पताल परिसर में आयोजित शिविर में कुल 109 लोगों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 34 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। वहीं, मंझगांव प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 50 लोगों ने पंजीकरण कराया और 30 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया।

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इसी प्रकार कुमारडुंगी प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 65 लोगों ने पंजीकरण कराया, जहां 50 यूनिट रक्त संग्रहित हुआ। जगन्नाथपुर प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 47 लोगों ने पंजीकरण कराया और 32 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया।
गोइलकेरा प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 135 लोगों ने पंजीकरण कराया, जहां 27 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। वहीं, बड़ाजामदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 28 लोगों ने पंजीकरण कराया और 20 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया।
इस प्रकार प्रोजेक्ट जागृति के तहत जिले के छह प्रखंडों में आयोजित रक्तदान शिविरों से कुल 193 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया।

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रक्तदान शिविर में जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, कर्मचारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सभी ने स्वैच्छिक रूप से रक्तदान कर लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक और प्रेरित करने का संदेश दिया।

आदित्यपुर  सात महीनों से पोषाहार राशि नहीं मिलने से संकट में आंगनबाड़ी केंद्र, सेविकाओं ने की जल्द भुगतान की मांग

आदित्यपुर  सात महीनों से पोषाहार राशि नहीं मिलने से संकट में आंगनबाड़ी केंद्र, सेविकाओं ने की जल्द भुगतान की मांग

आदित्यपुर | गम्हरिया प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविकाएं पिछले सात महीनों से पोषाहार राशि नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक और प्रशासनिक संकट का सामना कर रही हैं। राशि आवंटन में लगातार हो रही देरी का असर केंद्र और राज्य सरकार की बाल विकास योजनाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सेविकाओं ने जिला प्रशासन से अविलंब बकाया राशि का भुगतान कराने की मांग की है।

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सेविकाओं का कहना है कि पोषाहार राशि नहीं मिलने के कारण कई आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के बीच नियमित रूप से पोषाहार वितरण नहीं हो पा रहा है। इससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गम्हरिया प्रखंड में सैकड़ों आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में बच्चे प्रतिदिन आते हैं, लेकिन पोषाहार वितरण बाधित होने के कारण अब केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति भी घटने लगी है।
आंगनबाड़ी सेविका अनुराधा ने बताया कि पिछले सात महीनों से जिले में पोषाहार राशि का आवंटन नहीं हुआ है, जबकि पड़ोसी जिलों में नियमित रूप से भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिना फंड के केंद्रों का संचालन करना और बच्चों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराना लगभग असंभव हो गया है।

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सेविकाओं ने आरोप लगाया कि पोषाहार राशि के साथ-साथ उनके मानदेय का भुगतान भी समय पर नहीं किया जा रहा है। लगातार हो रही अनियमितता के कारण उनके सामने परिवार चलाने का संकट उत्पन्न हो गया है। स्थिति यह है कि अब दुकानदार भी उधार पर राशन और अन्य आवश्यक सामग्री देने से इनकार करने लगे हैं।

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सेविकाओं का कहना है कि वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रही हैं, लेकिन बिना संसाधन और समय पर मानदेय के व्यवस्था संभालना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
आंगनबाड़ी सेविकाओं ने जिला प्रशासन से पोषाहार राशि एवं बकाया मानदेय का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सुचारु रूप से जारी रह सके।

चाईबासा में महिला ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, पुलिस जांच में जुटी

चाईबासा में महिला ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, पुलिस जांच में जुटी

चाईबासा | मुफस्सिल थाना क्षेत्र के दुम्बीसाई गांव में एक महिला द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। मृतका की पहचान चाईबासा सिविल कोर्ट के सेवानिवृत्त सहायक क्लर्क चक्रधर बारी की 35 वर्षीय पुत्री शबनम बारी के रूप में हुई है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार रात खाना खाने के बाद शबनम अपने कमरे में सोने चली गई थी। गुरुवार सुबह जब परिवार के सदस्य उसके कमरे में पहुंचे, तो उन्होंने शबनम को फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया। परिजनों ने तुरंत उसे नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

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घटना की सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।

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परिजनों के अनुसार, शबनम पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान चल रही थी। आशंका जताई जा रही है कि इसी कारण उसने यह कदम उठाया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आत्महत्या के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर वींगतोपांग-झींकपानी का निरीक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने का निर्देश

आयुष्मान आरोग्य मंदिर वींगतोपांग-झींकपानी का निरीक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने का निर्देश

चाईबासा | आयुष्मान आरोग्य मंदिर, वींगतोपांग-झींकपानी में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं का जायजा लेने हेतु निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान ओपीडी, लेबर रूम, परिवार नियोजन कक्ष, जांच सुविधाएं, योगा गतिविधियां, उपलब्ध जांच यंत्रों तथा दवाइयों की उपलब्धता समेत विभिन्न व्यवस्थाओं का अवलोकन किया गया।

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इस दौरान संबंधित अधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा निर्धारित सभी स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने का निर्देश दिया गया।

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साथ ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और आवश्यक संसाधनों की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

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राजनगर सीएचसी में जच्चा-बच्चा मौत मामले में बड़ा खुलासा, जांच रिपोर्ट में चिकित्सकीय लापरवाही उजागर

राजनगर सीएचसी में जच्चा-बच्चा मौत मामले में बड़ा खुलासा, जांच रिपोर्ट में चिकित्सकीय लापरवाही उजागर

सरायकेला | राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के दौरान महिला विनीता बांद्रा और उसके नवजात शिशु की मौत के मामले में जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। जांच में स्पष्ट हुआ है कि यह घटना केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा नहीं, बल्कि चिकित्सकीय लापरवाही और अव्यवस्था का परिणाम थी।
उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह के निर्देश पर गठित जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी है, जिसमें संबंधित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

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अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश, सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह तथा महिला चिकित्सक डॉ. प्रीति माझी की संयुक्त जांच में पाया गया कि प्रसव के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय सतर्कता नहीं बरती गई।
सिविल सर्जन के अनुसार, प्रसूता की मौत अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हेमरेज) के कारण हुई, जबकि नवजात की मौत गले में नाल के दो फंदे होने से हुई। रिपोर्ट में ड्यूटी रोस्टर के अनुसार तैनात चिकित्सक डॉ. रश्मि बाड़ा, डॉ. संजय झा तथा प्रसव के समय मौजूद डॉ. शिवलाल कुंकल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

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जांच में यह भी सामने आया कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया और समय रहते ऑपरेशन अथवा रेफर करने का निर्णय नहीं लिया गया। मरीज की स्थिति बिगड़ने के बावजूद नियमित निरीक्षण और फॉलोअप का अभाव बना रहा, जिससे उसकी हालत लगातार गंभीर होती गई।
सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि अस्पताल का जेनरेटर लंबे समय से खराब था और वैकल्पिक बिजली व्यवस्था भी काम नहीं कर रही थी। इसके कारण स्वास्थ्यकर्मियों को टॉर्च की रोशनी में प्रसव कराना पड़ा। इसके अलावा केस शीट, पार्टोग्राफ और अन्य आवश्यक दस्तावेज भी अधूरे पाए गए, जिसे जांच टीम ने चिकित्सा प्रबंधन की गंभीर लापरवाही माना है।

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इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जमशेदपुर: टाटा रेलवे स्टेशन पर हाईटेंशन तार की चपेट में आने से युवक गंभीर रूप से झुलसा

जमशेदपुर: टाटा रेलवे स्टेशन पर हाईटेंशन तार की चपेट में आने से युवक गंभीर रूप से झुलसा

जमशेदपुर | शहर के टाटा रेलवे स्टेशन पर बुधवार सुबह एक गंभीर हादसा हो गया। प्लेटफॉर्म संख्या-3 पर खड़ी एक मालगाड़ी पर चढ़ने के दौरान एक युवक हाईटेंशन ओवरहेड विद्युत तार की चपेट में आ गया। तार के संपर्क में आते ही जोरदार धमाका हुआ, जिससे युवक बुरी तरह झुलस गया। उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना सुबह लगभग 11:07 बजे की है। युवक अचानक प्लेटफॉर्म पर खड़ी मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया। इसी दौरान ऊपर से गुजर रहे हाई वोल्टेज तार के संपर्क में आते ही तेज धमाका हुआ। धमाके की आवाज से प्लेटफॉर्म पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों में दहशत फैल गई। युवक गंभीर रूप से झुलसकर नीचे गिर पड़ा।
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), रेल पुलिस और अन्य रेलवे कर्मी मौके पर पहुंचे। घायल युवक को तुरंत रेलवे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।

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इधर, घटना के बाद पुलिस और आरपीएफ मामले की जांच में जुट गई है। स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्म पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि युवक स्टेशन पर कैसे पहुंचा और किन परिस्थितियों में उसने मालगाड़ी पर चढ़ने की कोशिश की।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस उसकी पहचान करने और उसके परिजनों का पता लगाने में जुटी है।

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इस घटना ने एक बार फिर रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यस्त प्लेटफॉर्म पर इस तरह की घटना सुरक्षा प्रबंधन में संभावित चूक की ओर इशारा करती है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और आगे की कार्रवाई में जुटा हुआ है।

राजनगर सीएचसी में जच्चा-बच्चा की मौत पर सख्त एक्शन, जांच कमेटी गठित

राजनगर सीएचसी में जच्चा-बच्चा की मौत पर सख्त एक्शन, जांच कमेटी गठित

सरायकेला | जिले के राजनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में जच्चा एवं नवजात शिशु की मौत के मामले को उपायुक्त श्री नीतिश कुमार सिंह ने गंभीरता से लिया है। स्थानीय समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने के बाद उपायुक्त ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

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गठित समिति में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) सरायकेला श्री अभिनव प्रकाश, सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह तथा सदर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति मांझी को शामिल किया गया है। समिति को निर्देश दिया गया है कि वह जच्चा-बच्चा की मौत के कारणों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा करे।
इसी क्रम में रविवार को उपायुक्त श्री नीतिश कुमार सिंह की उपस्थिति में जिला स्तरीय समिति ने सीएचसी, राजनगर पहुंचकर मामले की जांच की। इस दौरान अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं, चिकित्सा उपकरणों, जनरेटर, सोलर लाइट, इनवर्टर सहित वैकल्पिक विद्युत व्यवस्था एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता और कार्यक्षमता की समीक्षा की गई।

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जांच के दौरान चिकित्सकों एवं नर्सिंग कर्मियों से विस्तृत पूछताछ की गई। अस्पताल कर्मियों के अनुसार, प्रसूता की मौत अत्यधिक रक्तस्राव एवं रक्तचाप में अचानक गिरावट के कारण हुई। उन्होंने बताया कि आवश्यक उपचार एवं दवाइयों के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया, लेकिन सुधार नहीं हो सका, जिसके बाद प्रसूता एवं नवजात शिशु की मृत्यु हो गई।
उपायुक्त ने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक, नर्स, एएनएम एवं अन्य कर्मियों से सख्ती से पूछताछ करते हुए यह भी सवाल किया कि विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में मोबाइल टॉर्च के सहारे प्रसव क्यों कराया गया और वैकल्पिक व्यवस्था समय पर क्यों सुनिश्चित नहीं की गई।

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उपायुक्त ने समिति को सीसीटीवी फुटेज की जांच करने तथा सभी तथ्यों का गहन परीक्षण कर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही दोषी पाए जाने वाले चिकित्सकों एवं कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा करने को कहा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिलेवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी राजनगर, अंचल अधिकारी राजनगर, एमओआईसी राजनगर सहित अन्य चिकित्सा एवं पुलिस पदाधिकारी उपस्थित थे।

राजनगर सीएचसी में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, लापरवाही के आरोप में प्रशासन सख्त, जांच शुरू

राजनगर सीएचसी में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत, लापरवाही के आरोप में प्रशासन सख्त, जांच शुरू

राजनगर (सरायकेला-खरसावां) | सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), राजनगर में विगत गुरुवार की रात प्रसव के दौरान कथित लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।

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उपायुक्त नितीश कुमार सिंह के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने रविवार को अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), सरायकेला अभिनव प्रकाश के नेतृत्व में राजनगर सीएचसी पहुंचकर प्रारंभिक जांच की। इस दौरान घटना की पूरी परिस्थितियों की बारीकी से पड़ताल की गई। ड्यूटी पर तैनात नर्सों और जनरेटर ऑपरेटर से एसडीओ ने गहन पूछताछ की। घटना के समय ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. शिवशंकर कुंकल मौके पर उपस्थित नहीं थे। एसडीओ ने उन्हें तथा प्रसव में शामिल नर्सिंग स्टाफ को तलब कर अलग से पूछताछ करने की बात कही है।

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प्रशासन की प्रारंभिक जांच का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद अस्पताल में उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्थाओं—जैसे सोलर सिस्टम और जनरेटर—का उपयोग क्यों नहीं किया गया। एसडीओ अभिनव प्रकाश ने सोलर सिस्टम, इन्वर्टर और जनरेटर की स्थिति का विस्तृत निरीक्षण किया और संबंधित कर्मियों से जवाब-तलब किया।
पूछताछ के दौरान पूर्व चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अर्जुन सोरेन ने बताया कि घटना की रात सोलर बैटरी चार्ज नहीं थी और सोलर सिस्टम के उपयोग के कारण पिछले छह महीनों से जनरेटर (डीजी) का उपयोग नहीं हुआ था, जिससे उसकी स्थिति ठीक नहीं रही।

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इस पर एसडीओ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जनरेटर के रखरखाव और ईंधन पर हुए खर्च की भी विस्तृत जांच के निर्देश दिए।
एसडीओ ने स्पष्ट किया कि उपायुक्त के निर्देश पर जांच कमेटी का गठन किया गया है और प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद जनरेटर नहीं चलाया गया, जो गंभीर लापरवाही का संकेत है। आगे भी विस्तृत जांच की जाएगी और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर व नर्सों से पूछताछ के बाद जांच रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी जाएगी। दोषी पाए जाने वाले सभी कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।