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90 दिनों से लंबित म्यूटेशन मामलों का प्राथमिकता के आधार पर करें निष्पादन : उपायुक्त

90 दिनों से लंबित म्यूटेशन मामलों का प्राथमिकता के आधार पर करें निष्पादन : उपायुक्त

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में राजस्व शाखा एवं गैर-विभागीय राजस्व संग्रहण से संबंधित कार्यों की समीक्षा को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर उपायुक्त किस्टो कुमार बेसरा सहित संबंधित विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी, सभी अंचल अधिकारी, अंचल निरीक्षक एवं राजस्व कर्मचारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
बैठक के दौरान राजस्व शाखा के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यों की प्रगति की अंचलवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने म्यूटेशन के लंबित मामलों की स्थिति की जानकारी लेते हुए विशेष रूप से 30 दिन और 90 दिन से अधिक समय से लंबित मामलों की समीक्षा की। उन्होंने लंबित मामलों की संख्या, उनके निष्पादन की प्रगति तथा विलंब के कारणों की जानकारी संबंधित पदाधिकारियों से ली।

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उपायुक्त ने निर्देश दिया कि 90 दिनों से अधिक समय से लंबित सभी म्यूटेशन मामलों का प्राथमिकता के आधार पर तत्काल निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। वहीं, 30 दिनों से अधिक समय से लंबित अन्य मामलों के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करते हुए समयबद्ध कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कहा कि म्यूटेशन से संबंधित मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए तथा प्रत्येक स्तर पर इनके निष्पादन की नियमित समीक्षा की जाए।

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बैठक में शुओ म्यूटेशन एवं सक्सेशन म्यूटेशन से संबंधित मामलों की भी अंचलवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े मामलों का समय पर निष्पादन आम लोगों के हित से सीधे जुड़ा है। इसलिए प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उपायुक्त ने अपर उपायुक्त को म्यूटेशन सहित अन्य राजस्व मामलों के निष्पादन की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया। साथ ही अंचल स्तर पर लंबित मामलों की प्रगति की लगातार समीक्षा करते हुए आवश्यकतानुसार संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित करने को कहा।

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आपदा प्रभावित लोगों को समय पर उपलब्ध कराएं सहायता
बैठक में आपदा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न मामलों एवं लंबित प्रतिवेदनों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने अंचल कार्यालयों एवं भूमि सुधार उपसमाहर्ता कार्यालय स्तर पर लंबित अभिलेखों और आवश्यक प्रतिवेदनों की स्थिति की जानकारी ली।
उन्होंने निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन से संबंधित मामलों में आवश्यक अभिलेख एवं प्रतिवेदन यथाशीघ्र आपदा प्रबंधन शाखा को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि मामलों का समय पर निष्पादन हो सके। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित लोगों को सरकार द्वारा निर्धारित सहायता एवं लाभ उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसलिए संबंधित पदाधिकारी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करें तथा किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न होने दें।

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उपायुक्त ने आपदा से संबंधित मामलों में आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता, प्रतिवेदन तैयार करने तथा स्वीकृति एवं भुगतान से जुड़ी कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत समयबद्ध रूप से पूरा करने पर जोर दिया।
भूमि उपलब्धता एवं हस्तांतरण के मामलों की समीक्षा
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा भूमि उपलब्ध कराने के लिए भेजी गई अधियाचनाओं के आधार पर भूमि हस्तांतरण से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित अंचल अधिकारियों से लंबित अधियाचनाओं की स्थिति एवं अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली।
उन्होंने निर्देश दिया कि विभिन्न विभागों से प्राप्त भूमि संबंधी अधियाचनाओं का नियमानुसार शीघ्र निष्पादन किया जाए। भूमि की उपलब्धता, अभिलेखों की जांच एवं अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।
उपायुक्त ने कहा कि राजस्व शाखा से जुड़े कार्यों में अभिलेखों की शुद्धता एवं पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी स्तर पर निर्णय लेने से पहले संबंधित अभिलेखों एवं उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित परीक्षण किया जाए। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में अंचल कार्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा और कार्यालय स्तर पर संचालित विभिन्न कार्यों, लंबित मामलों एवं अभिलेखों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

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गैर-विभागीय राजस्व संग्रहण की भी हुई समीक्षा
बैठक में गैर-विभागीय राजस्व संग्रहण की विभागवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने खनन, मत्स्य, विद्युत, नगर परिषद, उत्पाद एवं परिवहन कार्यालय सहित संबंधित विभागों द्वारा किए जा रहे राजस्व संग्रहण की स्थिति का क्रमबद्ध अवलोकन किया।
उन्होंने संबंधित विभागों से निर्धारित राजस्व संग्रहण लक्ष्य, अब तक की उपलब्धि एवं शेष लक्ष्य की जानकारी ली। विभागवार प्रगति की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा करने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि राजस्व संग्रहण सरकार के विकासात्मक एवं जनकल्याणकारी कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी संबंधित विभाग निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप राजस्व संग्रहण सुनिश्चित करें। राजस्व संग्रहण की नियमित समीक्षा एवं अनुश्रवण करते हुए जहां भी कमी दिखाई दे, वहां आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने लक्ष्य और वास्तविक उपलब्धि के बीच के अंतर को कम करने के लिए विभागीय स्तर पर ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया।

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बैठक के अंत में उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को राजस्व प्रशासन, आपदा प्रबंधन, भूमि संबंधी मामलों एवं गैर-विभागीय राजस्व संग्रहण से जुड़े कार्यों में बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी अपने दायित्वों का समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से निर्वहन करें, ताकि आम लोगों को राजस्व एवं प्रशासनिक सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके और जिले में राजस्व संग्रहण की स्थिति को और बेहतर बनाया जा सके।

206 स्कूलों में निर्वाचन साक्षरता क्लब के निबंधन की समीक्षा, 150 विद्यालयों में प्रक्रिया पूरी

206 स्कूलों में निर्वाचन साक्षरता क्लब के निबंधन की समीक्षा, 150 विद्यालयों में प्रक्रिया पूरी

चाईबासा | भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में पश्चिमी सिंहभूम जिले के उच्च विद्यालय एवं प्लस टू उच्च विद्यालयों में ईएलसी-2.0 के तहत निर्वाचन साक्षरता क्लब (ईएलसी) के निबंधन को लेकर जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप निर्वाचन पदाधिकारी बंधन लॉन्ग, शिक्षा विभाग के एपीओ, बीआरपी, सीआरपी, संबंधित विद्यालयों के प्राचार्य एवं शिक्षक तथा निर्वाचन शाखा के कर्मी शामिल हुए।

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बैठक में भारत निर्वाचन आयोग से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिले में ईएलसी-2.0 के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई। बताया गया कि जिले के कुल 206 उच्च विद्यालय एवं प्लस टू उच्च विद्यालयों में ईसीआई नेट के माध्यम से निर्वाचन साक्षरता क्लब का निबंधन किया जाना है। अब तक करीब 150 विद्यालयों में ईएलसी का निबंधन किया जा चुका है। शेष विद्यालयों में भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत शीघ्र निबंधन कराने पर जोर दिया गया।

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जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार ने जिला शिक्षा कार्यालय के पदाधिकारियों को संबंधित विद्यालयों के साथ समन्वय स्थापित कर जिले के सभी चिन्हित सरकारी एवं निजी उच्च विद्यालयों तथा प्लस टू उच्च विद्यालयों में निर्वाचन साक्षरता क्लब का निबंधन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर ईएलसी के माध्यम से विद्यार्थियों को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ना आवश्यक है, ताकि भविष्य के मतदाताओं में लोकतांत्रिक व्यवस्था और निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित हो सके।

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कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को किया जाएगा जागरूक
बैठक में बताया गया कि निबंधित निर्वाचन साक्षरता क्लब के माध्यम से कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए नियमित गतिविधियों एवं बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को मतदाता सूची में नाम जोड़ने, दर्ज प्रविष्टियों में सुधार कराने, पात्रता के आधार पर मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने तथा मतदान प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक जानकारी दी जाएगी।

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इसके अलावा विद्यार्थियों को निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों, मतदाताओं के अधिकार एवं जिम्मेदारियों तथा मतदान के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यालय स्तर से ही युवाओं में निर्वाचन संबंधी जागरूकता विकसित करना और उन्हें भविष्य में जिम्मेदार एवं जागरूक मतदाता के रूप में तैयार करना है।

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केवल निबंधन तक सीमित न रहे ईएलसी की गतिविधियां
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि निर्वाचन साक्षरता क्लब केवल निबंधन तक सीमित न रहें, बल्कि सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में इनके माध्यम से नियमित जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। विद्यार्थियों को मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया से लेकर मतदान के दिन अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तक की जानकारी सरल एवं व्यावहारिक तरीके से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

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जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों एवं विद्यालय प्रबंधन को ईएलसी की गतिविधियों को प्रभावी बनाने तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर निर्वाचन साक्षरता को मजबूत करने से युवा पीढ़ी में लोकतांत्रिक मूल्यों, मतदाता जागरूकता और जिम्मेदार नागरिकता की भावना को बढ़ावा मिलेगा।

पोल्ट्री व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनीं सरस्वती कुजूर, 35 हजार रुपये के निवेश से कमा रहीं 15-20 हजार रुपये मासिक

पोल्ट्री व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनीं सरस्वती कुजूर, 35 हजार रुपये के निवेश से कमा रहीं 15-20 हजार रुपये मासिक

आनंदपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के आनंदपुर प्रखंड के बदिया गांव की सरस्वती कुजूर ग्रामीण महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं। कभी पति की अनियमित आय और हड़िया बिक्री पर निर्भर परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने वाली सरस्वती आज पोल्ट्री और पिगरी व्यवसाय के माध्यम से नियमित आमदनी अर्जित कर रही हैं।

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परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था। इसी दौरान सरस्वती झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, वित्तीय सहयोग, आजीविका संबंधी प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। इस सहयोग ने उन्हें पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़कर अपना व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास दिया।

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35 हजार रुपये के निवेश से शुरू किया पोल्ट्री व्यवसाय
सरस्वती ने करीब 35 हजार रुपये के प्रारंभिक निवेश से लगभग 200 चूजों के साथ पोल्ट्री पालन शुरू किया। शुरुआत में चूजों की देखभाल, आहार, टीकाकरण, बीमारी से बचाव और बाजार में बिक्री जैसी कई चुनौतियां सामने आईं। जेएसएलपीएस और स्वयं सहायता समूह से मिले प्रशिक्षण के माध्यम से उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से पोल्ट्री पालन करना सीखा और व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।

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पोल्ट्री व्यवसाय से होने वाली आमदनी ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में उन्होंने घर के स्तर पर सुअर पालन भी शुरू किया। इस तरह उन्होंने परिवार के लिए आय के एक से अधिक साधन विकसित किए।
नियमित आमदनी से मजबूत हो रही परिवार की आर्थिक स्थिति
वर्तमान में सरस्वती पोल्ट्री व्यवसाय से करीब 500 रुपये प्रतिदिन की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनकी अनुमानित मासिक आय 15 से 20 हजार रुपये तक पहुंच गई है। नियमित आमदनी से अब वह परिवार की दैनिक जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

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सरस्वती की सफलता बताती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया व्यवसाय भी उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत के माध्यम से स्थायी आजीविका का साधन बन सकता है। उनकी सफलता गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
उपायुक्त ने सरस्वती की सफलता को बताया प्रेरणादायक
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने सरस्वती कुजूर की सफलता को ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का प्रेरणादायक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और आजीविका के अवसरों से जोड़ने का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

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उपायुक्त ने कहा कि सरस्वती की सफलता दर्शाती है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं छोटे उद्यमों को सफल व्यवसाय में बदल सकती हैं। महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता से न केवल परिवार की आय मजबूत होती है, बल्कि पूरे समुदाय में भी सकारात्मक बदलाव आता है।
उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं से उपलब्ध प्रशिक्षण और आजीविका योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

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हड़िया बिक्री और परिवार की अनियमित आय से शुरू हुआ सरस्वती कुजूर का सफर आज पोल्ट्री और पिगरी उद्यम के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। करीब 35 हजार रुपये के निवेश से शुरू हुआ उनका पोल्ट्री व्यवसाय और 15 से 20 हजार रुपये तक की मासिक आय यह दर्शाती है कि अवसर, प्रशिक्षण और मेहनत के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं।

MMDR संशोधन कानून पर रघुवर दास के बयान पर झामुमो का पलटवार, बुधराम लागुरी ने मांगा खुली बहस का मौका

MMDR संशोधन कानून पर रघुवर दास के बयान पर झामुमो का पलटवार, बुधराम लागुरी ने मांगा खुली बहस का मौका

चाईबासा | पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा MMDR संशोधन कानून को झारखंड और राष्ट्रहित में बताते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) एवं कांग्रेस पर भ्रम फैलाने तथा अवैध खनन सिंडिकेट को संरक्षण देने के लगाए गए आरोपों पर झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
बुधराम लागुरी ने कहा कि रघुवर दास को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए कि MMDR संशोधन कानून के कौन-कौन से प्रावधान झारखंड के हित में हैं और इससे राज्य के खनिज राजस्व, वित्तीय अधिकारों तथा संवैधानिक अधिकारों को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिलेगा।
उन्होंने झारखंड की बकाया राशि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा जाना चाहिए। झामुमो का दावा है कि केंद्र सरकार पर झारखंड की करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की राशि बकाया है। बुधराम लागुरी ने कहा कि यदि रघुवर दास वास्तव में झारखंड के हित की चिंता करते हैं, तो उन्हें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर केंद्र सरकार से राज्य की बकाया राशि दिलाने की पहल करनी चाहिए।

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कानून के प्रावधानों और आर्थिक प्रभाव पर हो सार्वजनिक बहस
बुधराम लागुरी ने कहा कि MMDR संशोधन से जुड़े प्रावधानों का राज्य के खनिज संसाधनों, राजस्व और अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर सार्वजनिक बहस जरूरी है। किसी कानून को केवल राजनीतिक दावे के आधार पर ‘झारखंड हित में ऐतिहासिक कदम’ बताना पर्याप्त नहीं है। जनता को कानून की धाराओं और उसके वास्तविक आर्थिक प्रभाव की जानकारी दी जानी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि राज्य की प्राकृतिक संपदा है। कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिजों से प्राप्त राजस्व का उपयोग गांवों, आदिवासी समाज, खनन प्रभावित परिवारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विकास में होना चाहिए।
अवैध खनन के आरोपों पर सार्वजनिक प्रमाण देने की मांग
रघुवर दास द्वारा अवैध खनन और कथित सिंडिकेट को लेकर लगाए गए आरोपों पर बुधराम लागुरी ने कहा कि यदि उनके पास अवैध खनन, अवैध वसूली अथवा किसी राजनीतिक संरक्षण से संबंधित ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए और संबंधित जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक मंच से लगाए गए आरोप अपने आप में प्रमाण नहीं होते। सरकार हो या विपक्ष, अवैध खनन और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई कानून, दस्तावेज और निष्पक्ष जांच के आधार पर होनी चाहिए।
खनन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर भी हो चर्चा
बुधराम लागुरी ने कहा कि यदि खनन और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर बहस हो रही है, तो पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल का भी सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन होना चाहिए। खनन प्रभावित क्षेत्रों, आदिवासी बहुल इलाकों, विस्थापन, पर्यावरण, रोजगार और स्थानीय विकास की स्थिति से जुड़े तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि झामुमो किसी भी प्रकार के अवैध खनन या भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करता। जहां भी अवैध गतिविधि की शिकायत हो, वहां निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
खनिज राजस्व और राज्य की वित्तीय क्षमता पर उठाए सवाल
बुधराम लागुरी ने कहा कि MMDR को लेकर मूल सवाल यह है कि झारखंड की खनिज संपदा से होने वाले आर्थिक लाभ में राज्य की हिस्सेदारी और वित्तीय क्षमता कितनी सुरक्षित रहेगी।
उन्होंने PRS Legislative Research के बजट विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड ने वर्ष 2026-27 के बजट में खनिज-युक्त भूमि उपकर से 14,656 करोड़ रुपये की प्राप्ति का अनुमान रखा है। ऐसे में खनिज राजस्व से जुड़े अधिकारों में किसी भी बदलाव का राज्य की वित्तीय योजना पर प्रभाव पड़ सकता है।

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उन्होंने कहा कि रघुवर दास यदि झारखंड के हित की बात कर रहे हैं, तो उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि संशोधित कानून से राज्य को कितनी अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, खनन प्रभावित क्षेत्रों को कितना लाभ मिलेगा और राज्य के मौजूदा राजस्व अधिकारों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
“कानून की धाराओं के साथ खुली बहस करें”
बुधराम लागुरी ने कहा कि झामुमो का विरोध किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के खनिज एवं वित्तीय अधिकारों से जुड़े सवालों को सामने रखने के उद्देश्य से है। उन्होंने कहा कि 19 सितंबर को झामुमो ने राज्यभर में MMDR संशोधन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर राज्य के अधिकारों और खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच रखा।

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उन्होंने रघुवर दास को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा, “कागज और कानून की धाराओं के साथ खुली बहस कीजिए। बताइए कि MMDR संशोधन की कौन-सी धारा झारखंड के हित में है और उससे राज्य को क्या मिलेगा। झारखंड की जनता तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपना मत बनाएगी।”
बुधराम लागुरी ने कहा कि झारखंड को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय पारदर्शी खनन व्यवस्था की आवश्यकता है। अवैध खनन पर कठोर कार्रवाई, वैध खनन में पारदर्शिता, खनन प्रभावित क्षेत्रों का विकास और खनिज राजस्व का जनहित में उपयोग राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जल, जंगल, जमीन और खनिज पर झारखंड की जनता के हितों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। केवल यह कह देने से कि कोई कानून ऐतिहासिक है, जनता के सवाल खत्म नहीं हो जाते। कानून की धाराओं और उसके प्रभाव पर तथ्य आधारित चर्चा जरूरी है।”

स्पॉन्सरशिप योजना से पात्र बच्चों को जोड़ने के लिए जिलास्तरीय शिविर-सह-कार्यशाला आयोजित

स्पॉन्सरशिप योजना से पात्र बच्चों को जोड़ने के लिए जिलास्तरीय शिविर-सह-कार्यशाला आयोजित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार के मार्गदर्शन में परिवार आधारित देखभाल कार्यक्रम के तहत स्पॉन्सरशिप योजना को लेकर जिलास्तरीय एकदिवसीय शिविर-सह-कार्यशाला का आयोजन टाटा कॉलेज स्थित ऑडिटोरियम सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने की। शिविर में जिले के विभिन्न प्रखंडों से करीब 533 छात्र-छात्राओं के अलावा 500 से अधिक अभिभावकों एवं शिक्षकों ने भाग लिया।

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कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पात्र बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़कर उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनकी शिक्षा बाधित न हो। योजना के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि एकल अभिभावक अथवा अभिभावक विहीन तथा आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे पढ़ाई छोड़ने या पलायन करने के लिए मजबूर न हों।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने कहा कि बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण के तहत जिले में स्पॉन्सरशिप कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। योजना की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि पात्र बच्चों को समय पर इसका लाभ मिल सके। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों एवं जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

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सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल ने कहा कि बच्चों को संरक्षण एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी के साथ-साथ समाज की नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने अभिभावकों एवं जनप्रतिनिधियों से बाल संरक्षण के विभिन्न आयामों के प्रति जागरूक होने तथा जरूरतमंद बच्चों के हित में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।


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मौके पर जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार ने शिक्षकों को योजना से संबंधित आवश्यक दस्तावेज तैयार कर जिला स्तर पर जमा करने का निर्देश दिया। उपनिदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग, खुशेंद्र सोनकेशरी ने मिशन वात्सल्य के उद्देश्यों एवं बाल संरक्षण से संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी। वहीं, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पुनीता तिवारी ने जिले में संचालित स्पॉन्सरशिप एवं फॉस्टर केयर योजना की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।

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शिविर के दौरान बच्चों एवं अभिभावकों को बाल अधिकार एवं संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से रंगोली, सेल्फी प्वाइंट और गुब्बारा उड़ान जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। इसके अलावा स्पॉन्सरशिप कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं पात्र बच्चों तक योजना की जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

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कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सर्पदंश से बचाव एवं आवश्यक सावधानियों के प्रति भी जागरूक किया गया। इस अवसर पर सर्पदंश से बचाव एवं जागरूकता को लेकर प्रतिभागियों को शपथ दिलाई गई।

पश्चिमी सिंहभूम के सभी प्रखंड मुख्यालयों में झामुमो का धरना, MMDR संशोधन कानून वापस लेने की मांग

पश्चिमी सिंहभूम के सभी प्रखंड मुख्यालयों में झामुमो का धरना, MMDR संशोधन कानून वापस लेने की मांग

चाईबासा | खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन कानून-2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से शनिवार को राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले के सभी प्रखंड मुख्यालयों में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। धरना-प्रदर्शन में पार्टी के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं व आम लोगों ने हिस्सा लिया।

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धरना को संबोधित करते हुए झामुमो पश्चिमी सिंहभूम जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम ने कहा कि यदि खनिज सेस का पैसा रुकता है, तो मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन योजनाओं, 200 यूनिट मुफ्त बिजली और अन्य राज्य संपोषित योजनाओं पर संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है।

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उन्होंने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन कानून-2026 को राज्यों और राज्यवासियों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए कहा कि कानून वापस लिए जाने तक झामुमो का संघर्ष जारी रहेगा।
धरना-प्रदर्शन के बाद संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में संशोधित कानून को शिथिल करने तथा 25 जुलाई 2024 को सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा Mineral Area Development Authority v. Steel Authority of India Ltd. मामले में राज्यों के खनिज अधिकारों एवं खनिज-युक्त भूमि पर कराधान संबंधी शक्तियों को लेकर दिए गए निर्णय को अक्षरशः लागू करने की मांग की गई।

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जिले के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए। सदर प्रखंड में भू-राजस्व एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा, जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम, जिला संगठन सचिव मानाराम कुदादा, जिला कोषाध्यक्ष सुभाष बनर्जी, केंद्रीय सदस्य मोनिका बोयपाई, चाईबासा नगर परिषद अध्यक्ष नितिन प्रकाश, सदर प्रखंड अध्यक्ष सतीश सुंडी, चाईबासा नगर अध्यक्ष राहुल तिवारी और प्रखंड प्रमुख मंजु देवगम सहित अन्य मौजूद रहे।

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तांतनगर में विधायक निरल पुरती, जिला संयुक्त सचिव विश्वनाथ बाड़ा, प्रखंड अध्यक्ष जवाहर बोयपाई और प्रमुख चांदमनी सिरका शामिल हुए। सोनुवा और गोइलकेरा में विधायक जगत माझी, जिला सचिव राहुल आदित्य, जिला संगठन सचिव विनय प्रधान, सोनुवा प्रखंड अध्यक्ष सागर महतो तथा गोइलकेरा प्रखंड अध्यक्ष गणेश बोदरा समेत अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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चक्रधरपुर में विधायक सुखराम उरांव, नगर परिषद अध्यक्ष सन्नी उरांव, प्रखंड सचिव ताराकांत सिजुई और नगर अध्यक्ष वसीम अकरम सहित अन्य ने धरना में हिस्सा लिया। बंदगांव में जिला उपाध्यक्ष प्रेम मुंडरी, केंद्रीय सदस्य मिथुन गागराई, प्रखंड अध्यक्ष लखन हेम्बरोम और सचिव सुनील लागुरी मौजूद रहे।
इसी तरह मंझारी, कुमारडुंगी, मझगांव, जगन्नाथपुर, नोवामुंडी, मनोहरपुर, आनंदपुर, गुदड़ी, खूंटपानी, झींकपानी, हाटगम्हरिया और टोंटो प्रखंड मुख्यालयों में भी झामुमो कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। संबंधित प्रखंडों के जिला एवं प्रखंड पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल हुए।

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झामुमो जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम ने कहा कि पार्टी की ओर से केंद्र सरकार के इस संशोधन के खिलाफ आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

लाको बोदरा जयंती पर साहित्य संगोष्ठी आयोजित, विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए गीत, कविता और सांस्कृतिक कार्यक्रम

लाको बोदरा जयंती पर साहित्य संगोष्ठी आयोजित, विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए गीत, कविता और सांस्कृतिक कार्यक्रम

चाईबासा | कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के हो विभाग की ओर से शनिवार को विश्वविद्यालय सभागार में महान हो भाषा एवं साहित्यकार ओत गुरु लाको बोदरा की जयंती सह साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लाको बोदरा के भाषा, साहित्य एवं सांस्कृतिक योगदान को स्मरण करना तथा युवा पीढ़ी को उनके कार्यों और विचारों से परिचित कराना था।

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कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं लाको बोदरा के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। विभाग की ओर से डॉ. बसंत चाकी ने अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र एवं पौधा भेंट कर किया।
समारोह में हो साहित्यकार एवं समाजसेवी सोनू हेस्सा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि आदिवासी हो समाज महासभा के उपाध्यक्ष नरेश देवगम विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में मानविकी संकाय के संकायाध्यक्ष सह जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार पीयूष, ओड़िया विभागाध्यक्ष डॉ. विधु भूषण भुईया, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. निवारण महथा, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज कैवर्त, गणित विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता, वनस्पति विभागाध्यक्ष डॉ. दारा सिंह सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

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विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए गीत, कविता और सांस्कृतिक कार्यक्रम
साहित्य संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों ने लाको बोदरा के जीवन, भाषा एवं साहित्यिक योगदान पर अपने विचार और भाषण प्रस्तुत किए। इसके बाद हो गीत, संगीत, कविता तथा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से हो समाज की समृद्ध भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं की झलक देखने को मिली।
मुख्य अतिथि सोनू हेस्सा ने विद्यार्थियों को गीत, कविता एवं कहानी के माध्यम से साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने साहित्य सृजन के महत्व पर विशेष जोर दिया।

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विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार पीयूष ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए अपनी कला एवं संस्कृति से जुड़े रहना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्हें अपनी पढ़ाई पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि नरेश देवगम ने हो भाषा के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने लाको बोदरा को ‘ओत गुरु’ की उपाधि दिए जाने से जुड़ी जानकारी साझा की तथा हो व्याकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

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डॉ. बसंत चाकी ने कहा कि लाको बोदरा का जीवन हो समाज के उत्थान तथा भाषा-संस्कृति के विकास के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में वैज्ञानिक सोच और तकनीक के माध्यम से समाज के विकास की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

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डॉ. सुभाष चंद्र महतो ने लाको बोदरा के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हो भाषा और उसकी पहचान को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। वहीं दानगी सोरेन ने कहा कि लाको बोदरा जयंती केवल उनके स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य से जोड़ने का माध्यम भी है।

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कार्यक्रम के अंत में डॉ. बसंत चाकी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह में शिक्षण सहायक मादे कोड़ा, गोरंगो मुर्मू, बाल किशोर महतो, पूर्व शिक्षण सहायक गोनो अल्डा, रामदेव बोयपाई, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन अतिथियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करने के बाद सामूहिक राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

मोटर दुर्घटना पीड़ितों को न्याय एवं मुआवजा दिलाने पर जिला स्तरीय कार्यशाला

मोटर दुर्घटना पीड़ितों को न्याय एवं मुआवजा दिलाने पर जिला स्तरीय कार्यशाला

सरायकेला | मोटर वाहन दुर्घटनाओं से प्रभावित पीड़ितों एवं उनके आश्रितों को न्याय, विधिक सहायता और कानून के तहत उपलब्ध मुआवजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला-खरसावां के लोक अदालत सभागार में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) विषय पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।

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यह कार्यशाला झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देश तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित हुई। इसमें न्यायपालिका, अधिवक्ता, पुलिस, चिकित्सक, नर्स, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि, यातायात विभाग एवं पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने भाग लिया।

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कार्यशाला में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय दीपक मलिक ने मोटर दुर्घटना दावा मामलों में दायित्व निर्धारण, साक्ष्यों के मूल्यांकन और मुआवजा निर्धारण से जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तौसीफ मेराज ने संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा सरला वर्मा बनाम दिल्ली परिवहन निगम मामले में प्रतिपादित सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।

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उप मुख्य विधिक सहायता अधिवक्ता सुनीत कर्मकार ने दावा प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और दुर्घटना पीड़ितों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने के तरीकों पर चर्चा की। जिला बार एसोसिएशन के सचिव देबाशीष ज्योतिषी ने भी विधिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने तथा विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

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कार्यशाला के दौरान पुलिस एवं यातायात विभाग के प्रतिनिधियों ने दुर्घटना की जांच, सड़क सुरक्षा तथा आवश्यक दस्तावेजीकरण से संबंधित जानकारी साझा की। चिकित्सकों एवं नर्सों ने दुर्घटना के बाद समय पर उपचार तथा चिकित्सकीय अभिलेखों के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, दुर्घटना पीड़ितों तक विधिक सहायता पहुंचाने में पैरा लीगल वॉलंटियर्स की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामाशंकर सिंह ने कहा कि दुर्घटना मामलों में प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका, अधिवक्ता, पुलिस, चिकित्सा, यातायात, बीमा एवं विधिक सेवा संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से बदलते कानूनी प्रावधानों और न्यायिक निर्णयों से लगातार अद्यतन रहने का आह्वान किया।

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कार्यशाला में कहा गया कि दुर्घटना पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया दुर्घटना के तुरंत बाद शुरू हो जाती है। इसके लिए उचित पुलिस दस्तावेजीकरण, समय पर चिकित्सा उपचार, साक्ष्यों का संरक्षण, कानूनी मार्गदर्शन तथा बीमा संबंधी सहायता महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अंत में पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था, प्रभावी कानूनी जागरूकता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

सोनुवा में खान एवं खनिज संशोधन विधेयक-2026 के विरोध में झामुमो का धरना

सोनुवा में खान एवं खनिज संशोधन विधेयक-2026 के विरोध में झामुमो का धरना

सोनुवा | पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शनिवार को खान एवं खनिज संशोधन विधेयक-2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से सोनुवा प्रखंड मुख्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में मनोहरपुर विधायक जगत माझी मुख्य रूप से शामिल हुए। धरना-प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

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धरना-प्रदर्शन से पहले झामुमो के कार्यकर्ता वन विश्रामागार परिसर में एकत्र हुए। यहां से कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए प्रखंड कार्यालय पहुंचे। प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित धरना के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खान एवं खनिज संशोधन विधेयक-2026 के प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक जगत माझी ने कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों के संवैधानिक अधिकारों और संघीय व्यवस्था में हस्तक्षेप बंद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन झारखंड की पहचान के साथ-साथ यहां के लोगों के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। झामुमो लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है।

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विधायक ने कहा कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया तो पार्टी सड़क और रेल चक्का जाम जैसे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकती है। उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य के लोगों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

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जगत माझी ने आरोप लगाया कि विधेयक के जरिए राज्यों के अधिकारों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने से राज्य के गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर असर पड़ सकता है तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है।
उन्होंने झामुमो कार्यकर्ताओं और आम लोगों से जल, जंगल और जमीन समेत प्राकृतिक संसाधनों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।

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सैकड़ों कार्यकर्ता हुए शामिल
धरना-प्रदर्शन में झामुमो पर्यवेक्षक विनय प्रधान, प्रखंड अध्यक्ष सागर महतो, हेमचंद्र महतो, हरिनारायण दास, चंद्रमोहन चातर, संजय जामुदा, अजय दास, हीरालाल लोहार, जोटो सुरीन, किशोर दास और जानकी हेम्ब्रम समेत सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने विधेयक वापस लेने की मांग को लेकर नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया।

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टोंटो में MMDR संशोधन के खिलाफ झामुमो का धरना, बुधराम लागुरी ने उठाए राज्य के अधिकारों के सवाल

टोंटो में MMDR संशोधन के खिलाफ झामुमो का धरना, बुधराम लागुरी ने उठाए राज्य के अधिकारों के सवाल

चाईबासा | खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम (MMDR) संशोधन 2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से टोंटो प्रखंड कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खनिज संपदा से जुड़े राज्य के अधिकारों, स्थानीय समुदायों के हितों और पर्यावरणीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया। कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी, टोंटो को ज्ञापन सौंपकर MMDR संशोधन अधिनियम 2026 को रद्द करने की मांग की गई।

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धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए झामुमो जिला प्रवक्ता सह पर्यवेक्षक बुधराम लागुरी ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी कानून के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से जुड़े राज्य के अधिकारों तथा स्थानीय जनता के हितों की आवाज है।
उन्होंने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज संपदा वाले राज्यों में शामिल है। राज्य के कोयला, लौह अयस्क समेत अन्य खनिजों ने देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके बावजूद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिन क्षेत्रों से खनिज निकाले जाते हैं, वहां रहने वाले लोगों और राज्य को उसका उचित लाभ कितना मिल रहा है।

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बुधराम लागुरी ने कहा कि झामुमो विकास और उद्योग के विरोध में नहीं है। पार्टी चाहती है कि खनिज संसाधनों का उपयोग हो, उद्योग स्थापित हों, रोजगार के अवसर बढ़ें और विकास को गति मिले। लेकिन इसके साथ राज्य के राजस्व हित, स्थानीय समुदायों के अधिकार, पर्यावरणीय सुरक्षा तथा विस्थापित और प्रभावित परिवारों के हित भी सुरक्षित रहने चाहिए।

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उन्होंने कहा कि MMDR संशोधन 2026 को लेकर झारखंड की मुख्य चिंता खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व और राज्य की वित्तीय क्षमता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर है। यह विषय केवल किसी सरकार या राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि झारखंड के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि जब झारखंड की धरती से खनिज निकाला जाता है और खनन के कारण गांवों की जमीन, पर्यावरण तथा स्थानीय जीवन प्रभावित होता है, तो निर्णय प्रक्रिया में राज्य की आवाज और प्रभावित जनता के हितों को पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए।

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बुधराम लागुरी ने झामुमो की मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि खनिज संपदा से जुड़े मामलों में झारखंड के राजस्व हितों की रक्षा हो, स्थानीय समुदायों के अधिकार सुरक्षित किए जाएं, विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों को न्याय मिले, पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा खनिज नीति तैयार करते समय राज्यों और प्रभावित क्षेत्रों की आवाज को उचित स्थान दिया जाए।

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उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के संघीय ढांचे में राज्यों के अधिकारों और हितों की रक्षा से जुड़ा सवाल है। झारखंड की धरती केवल खनिज का भंडार नहीं, बल्कि पूर्वजों की विरासत, गांवों की पहचान और आने वाली पीढ़ियों की संपत्ति है।
उन्होंने कहा कि झामुमो लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी बात जनता तक पहुंचाएगा। पार्टी गांव-गांव जाकर लोगों को कानून के प्रावधानों और उसके संभावित प्रभावों की जानकारी देगी तथा झारखंड के हितों की आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से MMDR संशोधन से जुड़े राज्य के राजस्व, संघीय अधिकारों और स्थानीय समुदायों के हितों पर गंभीरता से विचार करने तथा झारखंड समेत अन्य खनिज संपदा वाले राज्यों के साथ सार्थक संवाद करने का आग्रह किया।

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धरना-प्रदर्शन के दौरान झामुमो कार्यकर्ताओं ने खनिज संपदा से जुड़े राज्य के अधिकारों और स्थानीय हितों की रक्षा की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। इस अवसर पर झामुमो टोंटो प्रखंड अध्यक्ष मंगल तुबीद, सचिव राजनारायण तुबीद, मुन्ना सुंडी, सोना सुलेमान हसदा (मुंडा), दिनेश तुम्बलिया, दोफेदार हेस्सा, देवेंद्र बारी, संजय दास, फुलेन्द्र महतो, राजीव हसदा, प्रदीप लागुरी, प्रकाश लागुरी, लखन लागुरी, रामराई दोराइबुरु, मुनेश्वर बोयपाई, आशीष लागुरी, महती हसदा, दामूर सिंह हेस्सा, राजेन बारी, दीपक नायक और हेमवती हेमब्रम समेत बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता एवं आम जनता मौजूद रहे।
मंच का संचालन झामुमो नेता तुराम बिरुली ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन दोफेदार हेस्सा ने किया।