चाईबासा | पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा MMDR संशोधन कानून को झारखंड और राष्ट्रहित में बताते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) एवं कांग्रेस पर भ्रम फैलाने तथा अवैध खनन सिंडिकेट को संरक्षण देने के लगाए गए आरोपों पर झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
बुधराम लागुरी ने कहा कि रघुवर दास को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए कि MMDR संशोधन कानून के कौन-कौन से प्रावधान झारखंड के हित में हैं और इससे राज्य के खनिज राजस्व, वित्तीय अधिकारों तथा संवैधानिक अधिकारों को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिलेगा।
उन्होंने झारखंड की बकाया राशि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा जाना चाहिए। झामुमो का दावा है कि केंद्र सरकार पर झारखंड की करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की राशि बकाया है। बुधराम लागुरी ने कहा कि यदि रघुवर दास वास्तव में झारखंड के हित की चिंता करते हैं, तो उन्हें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर केंद्र सरकार से राज्य की बकाया राशि दिलाने की पहल करनी चाहिए।

कानून के प्रावधानों और आर्थिक प्रभाव पर हो सार्वजनिक बहस
बुधराम लागुरी ने कहा कि MMDR संशोधन से जुड़े प्रावधानों का राज्य के खनिज संसाधनों, राजस्व और अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर सार्वजनिक बहस जरूरी है। किसी कानून को केवल राजनीतिक दावे के आधार पर ‘झारखंड हित में ऐतिहासिक कदम’ बताना पर्याप्त नहीं है। जनता को कानून की धाराओं और उसके वास्तविक आर्थिक प्रभाव की जानकारी दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि राज्य की प्राकृतिक संपदा है। कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिजों से प्राप्त राजस्व का उपयोग गांवों, आदिवासी समाज, खनन प्रभावित परिवारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विकास में होना चाहिए।
अवैध खनन के आरोपों पर सार्वजनिक प्रमाण देने की मांग
रघुवर दास द्वारा अवैध खनन और कथित सिंडिकेट को लेकर लगाए गए आरोपों पर बुधराम लागुरी ने कहा कि यदि उनके पास अवैध खनन, अवैध वसूली अथवा किसी राजनीतिक संरक्षण से संबंधित ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए और संबंधित जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक मंच से लगाए गए आरोप अपने आप में प्रमाण नहीं होते। सरकार हो या विपक्ष, अवैध खनन और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई कानून, दस्तावेज और निष्पक्ष जांच के आधार पर होनी चाहिए।
खनन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर भी हो चर्चा
बुधराम लागुरी ने कहा कि यदि खनन और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर बहस हो रही है, तो पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल का भी सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन होना चाहिए। खनन प्रभावित क्षेत्रों, आदिवासी बहुल इलाकों, विस्थापन, पर्यावरण, रोजगार और स्थानीय विकास की स्थिति से जुड़े तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि झामुमो किसी भी प्रकार के अवैध खनन या भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करता। जहां भी अवैध गतिविधि की शिकायत हो, वहां निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
खनिज राजस्व और राज्य की वित्तीय क्षमता पर उठाए सवाल
बुधराम लागुरी ने कहा कि MMDR को लेकर मूल सवाल यह है कि झारखंड की खनिज संपदा से होने वाले आर्थिक लाभ में राज्य की हिस्सेदारी और वित्तीय क्षमता कितनी सुरक्षित रहेगी।
उन्होंने PRS Legislative Research के बजट विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड ने वर्ष 2026-27 के बजट में खनिज-युक्त भूमि उपकर से 14,656 करोड़ रुपये की प्राप्ति का अनुमान रखा है। ऐसे में खनिज राजस्व से जुड़े अधिकारों में किसी भी बदलाव का राज्य की वित्तीय योजना पर प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि रघुवर दास यदि झारखंड के हित की बात कर रहे हैं, तो उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि संशोधित कानून से राज्य को कितनी अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, खनन प्रभावित क्षेत्रों को कितना लाभ मिलेगा और राज्य के मौजूदा राजस्व अधिकारों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
“कानून की धाराओं के साथ खुली बहस करें”
बुधराम लागुरी ने कहा कि झामुमो का विरोध किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के खनिज एवं वित्तीय अधिकारों से जुड़े सवालों को सामने रखने के उद्देश्य से है। उन्होंने कहा कि 19 सितंबर को झामुमो ने राज्यभर में MMDR संशोधन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर राज्य के अधिकारों और खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच रखा।

उन्होंने रघुवर दास को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा, “कागज और कानून की धाराओं के साथ खुली बहस कीजिए। बताइए कि MMDR संशोधन की कौन-सी धारा झारखंड के हित में है और उससे राज्य को क्या मिलेगा। झारखंड की जनता तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपना मत बनाएगी।”
बुधराम लागुरी ने कहा कि झारखंड को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय पारदर्शी खनन व्यवस्था की आवश्यकता है। अवैध खनन पर कठोर कार्रवाई, वैध खनन में पारदर्शिता, खनन प्रभावित क्षेत्रों का विकास और खनिज राजस्व का जनहित में उपयोग राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जल, जंगल, जमीन और खनिज पर झारखंड की जनता के हितों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। केवल यह कह देने से कि कोई कानून ऐतिहासिक है, जनता के सवाल खत्म नहीं हो जाते। कानून की धाराओं और उसके प्रभाव पर तथ्य आधारित चर्चा जरूरी है।”

