सरायकेला | मोटर वाहन दुर्घटनाओं से प्रभावित पीड़ितों एवं उनके आश्रितों को न्याय, विधिक सहायता और कानून के तहत उपलब्ध मुआवजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सरायकेला-खरसावां के लोक अदालत सभागार में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) विषय पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।

यह कार्यशाला झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देश तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित हुई। इसमें न्यायपालिका, अधिवक्ता, पुलिस, चिकित्सक, नर्स, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि, यातायात विभाग एवं पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने भाग लिया।

कार्यशाला में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय दीपक मलिक ने मोटर दुर्घटना दावा मामलों में दायित्व निर्धारण, साक्ष्यों के मूल्यांकन और मुआवजा निर्धारण से जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तौसीफ मेराज ने संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा सरला वर्मा बनाम दिल्ली परिवहन निगम मामले में प्रतिपादित सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।

उप मुख्य विधिक सहायता अधिवक्ता सुनीत कर्मकार ने दावा प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और दुर्घटना पीड़ितों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने के तरीकों पर चर्चा की। जिला बार एसोसिएशन के सचिव देबाशीष ज्योतिषी ने भी विधिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने तथा विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यशाला के दौरान पुलिस एवं यातायात विभाग के प्रतिनिधियों ने दुर्घटना की जांच, सड़क सुरक्षा तथा आवश्यक दस्तावेजीकरण से संबंधित जानकारी साझा की। चिकित्सकों एवं नर्सों ने दुर्घटना के बाद समय पर उपचार तथा चिकित्सकीय अभिलेखों के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, दुर्घटना पीड़ितों तक विधिक सहायता पहुंचाने में पैरा लीगल वॉलंटियर्स की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामाशंकर सिंह ने कहा कि दुर्घटना मामलों में प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका, अधिवक्ता, पुलिस, चिकित्सा, यातायात, बीमा एवं विधिक सेवा संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से बदलते कानूनी प्रावधानों और न्यायिक निर्णयों से लगातार अद्यतन रहने का आह्वान किया।

कार्यशाला में कहा गया कि दुर्घटना पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया दुर्घटना के तुरंत बाद शुरू हो जाती है। इसके लिए उचित पुलिस दस्तावेजीकरण, समय पर चिकित्सा उपचार, साक्ष्यों का संरक्षण, कानूनी मार्गदर्शन तथा बीमा संबंधी सहायता महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अंत में पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था, प्रभावी कानूनी जागरूकता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

