सरायकेला-खरसावां | जिला पंचायती राज पदाधिकारी सह कुकड़ू प्रखंड के वरीय पदाधिकारी सुरेन्द्र उरांव ने शनिवार को कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत विभिन्न विकास योजनाओं एवं सरकारी संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, अबुआ आवास योजना, पीडीएस दुकान, उप स्वास्थ्य केंद्र तिरूलडीह तथा पंचायत भवन का जायजा लिया।
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निरीक्षण के क्रम में उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को गुणवत्तापूर्ण तथा समयबद्ध तरीके से कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही आम लोगों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं सुगम तरीके से उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।
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उप स्वास्थ्य केंद्र तिरूलडीह के निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं, साफ-सफाई एवं आवश्यक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया गया। वहीं पीडीएस दुकान के निरीक्षण के दौरान लाभुकों को निर्धारित मात्रा में एवं तय समय पर खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया गया।
चाईबासा | कांग्रेस भवन, चाईबासा में शुक्रवार को जिला अध्यक्ष रंजन बोयपाई की अध्यक्षता में स्वागत एवं अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी में पश्चिम सिंहभूम जिले के स्थानीय नेताओं को विभिन्न पदों पर मनोनीत किए जाने पर उनका सम्मान किया गया।
इस अवसर पर प्रदेश सचिव राम सिंह सावैयां, मायाधर बेहरा तथा संयुक्त सचिव नितिमा बारी का स्वागत किया गया। साथ ही प्रदेश कांग्रेस कमिटी में जगन्नाथपुर विधायक सह सत्तारूढ़ दल के उप मुख्य सचेतक सोनाराम सिंकु को राजनीतिक मामलों की समिति का सदस्य, पूर्व विधायक देवेन्द्र नाथ चांपिया को समन्वय समिति का सदस्य, सुनित शर्मा को महासचिव, चंद्रशेखर दास को सचिव, सौरभ अग्रवाल एवं विवेक विशाल प्रधान को संयुक्त सचिव बनाए जाने पर शुभकामनाएं एवं बधाई दी गई।
समारोह में मुख्य रूप से उपस्थित कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व सांसद डॉ. प्रदीप कुमार बलमुचू ने प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक विस्तार और नई नियुक्तियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्थानीय नेताओं को प्रदेश कमिटी में जिम्मेदारी सौंपा जाना झारखंड में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रभारी के. राजू एवं प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में संगठन को सशक्त बनाने की दिशा में सार्थक पहल की जा रही है। प्रदेश स्तर पर किए गए इन बदलावों से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि नवनियुक्त पदाधिकारी जमीनी स्तर से जुड़े होने के कारण संगठन को और अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाएंगे।
जिला अध्यक्ष रंजन बोयपाई ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व के सतत मार्गदर्शन में पश्चिम सिंहभूम जिले में कांग्रेस संगठन को नई मजबूती मिलेगी और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने कहा कि नई कमिटी में सभी वर्गों, जातियों और समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है, जो कांग्रेस की समावेशी सोच को दर्शाता है। उन्होंने इस पहल के लिए प्रदेश नेतृत्व को बधाई देते हुए कहा कि इससे झारखंड में कांग्रेस और अधिक सशक्त होकर उभरेगी।
कार्यक्रम में प्रखंड अध्यक्ष दिकु सावैयां सहित विजय तिग्गा, जानवी कुदादा, राखी सालुजा, सुनीता लकड़ा, मंजु बिरुवा, लक्ष्मी बेसरा, शिवकर बोयपाई, समीर सुंडी, सुरसेन टोपनो, मेवालाल होनहागा, आशीष बेहरा, जगदीश सुंडी, महाबीर प्रसाद, सूरज सुंडी, शिव शंकर सावैयां, ठाकुर बानरा, मथुरा चांपिया, प्रधान सिंकु, प्रताप पुरती, सनातन बिरुवा, बोंज बानरा, गोपाल बोदरा, सुशील दास समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।
सरायकेला | झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने शुक्रवार शाम सरायकेला के गराज चौक में NEET (UG) 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और भारी अनियमितताओं के विरोध में केंद्र सरकार एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का नेतृत्व झामुमो जिलाध्यक्ष डॉ. शुभेन्दु महतो ने किया।
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प्रदर्शन में झामुमो के केंद्रीय, जिला, नगर, प्रखंड एवं पंचायत स्तर के पदाधिकारी, छात्र मोर्चा के सदस्य, विभिन्न वर्ग संगठनों के कार्यकर्ता, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, युवा एवं आम नागरिक शामिल हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्रों के भविष्य के साथ कथित खिलवाड़ पर आक्रोश जताया। सभा को संबोधित करते हुए डॉ. शुभेन्दु महतो ने कहा कि देश की महत्वपूर्ण परीक्षा NEET में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की लापरवाही और संबंधित विभाग की विफलता के कारण लाखों छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है।
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उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, बल्कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और देश के भविष्य पर भी नकारात्मक असर डालती हैं। डॉ. महतो ने आरोप लगाया कि वर्तमान केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है और केवल जुमलेबाजी के सहारे देश चलाना चाहती है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि मामले में संलिप्त सभी लोगों के खिलाफ निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की जाए तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें। झामुमो नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मामले में जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई और भविष्य में परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की गई, तो पार्टी सड़क से लेकर सदन तक व्यापक आंदोलन करेगी।
विरोध-प्रदर्शन में सरायकेला नगर पंचायत चेयरमैन मनोज चौधरी, वाइस चेयरमैन अविनाश कवि, झामुमो नगर अध्यक्ष शम्भू आचार्य, जिला उपाध्यक्ष भोला मोहन्ति, केंद्रीय सदस्य सुधीर महतो एवं विशु हेमब्रम, जिला संगठन सचिव जगदीश महतो, युवा नेता सन्नी सिंह सहित बड़ी संख्या में झामुमो नेता, कार्यकर्ता, छात्र एवं युवा उपस्थित रहे।
नई दिल्ली | पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। चुनावी माहौल समाप्त होते ही ईंधन के दामों में हुई वृद्धि पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
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विपक्ष का कहना है कि चुनाव के दौरान जनता को राहत मिलने की उम्मीद दिखाई जाती है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही महंगाई का बोझ सीधे आम लोगों पर डाल दिया जाता है। विपक्षी नेताओं ने इसे आम जनता के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है।
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हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
आम लोगों के बीच भी बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर चिंता और नाराजगी साफ दिखाई दे रही है, खासकर उन लोगों में जो रोजमर्रा के कामकाज और परिवहन के लिए पेट्रोल और डीजल पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है।
चाईबासा | भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने चाईबासा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले का एकमात्र सदर अस्पताल खुद बदहाल स्थिति में है, जिसके कारण मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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पवन शंकर पांडे ने कहा कि अस्पताल में बड़े-बड़े भवन तो बना दिए गए हैं, लेकिन चिकित्सकों की भारी कमी बनी हुई है। कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद अब भी रिक्त हैं, जिससे मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में जनरेटर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बिजली कटौती के दौरान मरीजों को भीषण गर्मी झेलनी पड़ती है। बिजली चले जाने पर वार्डों में पंखे बंद हो जाते हैं और कई बार ऑपरेशन तक टॉर्च की रोशनी में करने की नौबत आ जाती है।
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उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन समेत कई आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। इसके कारण मरीजों को जांच और इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। पांडे ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम एक आदिवासी बहुल एवं पिछड़ा जिला है, जहां अधिकांश लोगों के पास निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
भाजपा नेता ने ब्लड बैंक की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से मरीजों को रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार अब तक ब्लड बैंक को लाइसेंस नहीं मिलने के कारण लोगों को रक्त के लिए जमशेदपुर जाना पड़ता है, जिससे मरीजों एवं उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग चाईबासा सदर अस्पताल की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। विभिन्न प्रखंडों एवं अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को सदर अस्पताल रेफर किया जाता है, लेकिन वहां से भी कई मरीजों को एमजीएम अस्पताल भेज दिया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अंत में पवन शंकर पांडे ने राज्य सरकार से मांग की कि चाईबासा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द सुदृढ़ किया जाए, ताकि जिले के लोगों को इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय सभागार में सिंहभूम सांसद जोबा माझी की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। बैठक का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अतिथियों का पारंपरिक रूप से शॉल ओढ़ाकर तथा पौधा एवं वेजिटेबल बास्केट भेंट कर स्वागत किया गया। बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति, लंबित कार्यों, बुनियादी सुविधाओं तथा जनसमस्याओं की विस्तार से समीक्षा की गई। सांसद जोबा माझी ने कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए सभी कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।
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समीक्षा के दौरान कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। कल्याण विभाग को सामुदायिक वन पट्टा वितरण, एकलव्य विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए। वहीं, वन विभाग को एलीफेंट अलर्ट सिस्टम एवं हाईमास्ट लाइट लगाने की दिशा में कार्य तेज करने को कहा गया।
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बैठक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत सड़कों की मरम्मत, पेयजल संकट को देखते हुए चापाकलों की मरम्मत, जलमीनारों के संचालन तथा बंद पड़ी ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को पुनः चालू करने पर भी जोर दिया गया। चक्रधरपुर एवं जगन्नाथपुर में जर्जर पानी टंकियों के सुरक्षित निस्तारण के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा पंचायत स्तर पर योजनाओं की मॉनिटरिंग, जिला परिषद की निर्माणाधीन योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने, नवोदय विद्यालय नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने, तांतनगर में फार्मेसिस्ट कॉलेज संचालन तथा नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य निरीक्षण को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में मोबाइल कनेक्टिविटी, भूमिहीन परिवारों को आवास हेतु भूमि उपलब्ध कराने, पशुपालन योजनाओं के लाभुकों को प्रशिक्षण देने तथा बिजली व्यवस्था को सुचारू रखने पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त मनीष कुमार ने बताया कि आपदा से संबंधित लंबित मुआवजा मामलों में कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि आंधी-तूफान एवं बारिश से प्रभावित लोगों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने तथा सभी स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश से निपटने के लिए एंटीवेनम उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिले में जैक बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार हुआ है तथा ब्लड बैंक लाइसेंस एवं होमगार्ड प्रशिक्षण को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
बैठक में मिशन वात्सल्य योजना के तहत एकल अभिभावक वाले बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने की अपील की गई। योजना के तहत बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह चार हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण बैठक के दौरान विभिन्न योजनाओं के लाभुकों के बीच आवास योजना के डमी चेक, प्रेशर कुकर, साइकिल, सामुदायिक वन पट्टा, खेल किट, स्कूल बैग, किताबें, मत्स्य विपणन किट, ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरण, एचपीवी वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र सहित अन्य सामग्री वितरित की गई। साथ ही जैक बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। जागरूकता रथों को दिखाई गई हरी झंडी बैठक के उपरांत अतिथियों ने पोषण, जनगणना, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, टीबी मुक्त भारत, एचपीवी वैक्सीनेशन, रक्तदान, पेयजल एवं स्वच्छता तथा जेएसएलपीएस के प्रोजेक्ट बदलाव से संबंधित जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। समाहरणालय परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण भी किया गया। बैठक में कालीचरण मुंडा, निरल पुरती, सुखराम उरांव, सोनाराम सिंकु, जगत माझी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड की सात युवतियों को चक्रधरपुर पुलिस ने समय रहते रेस्क्यू कर सुरक्षित उनके घर पहुंचाया। बताया गया कि सभी युवतियां रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेश जाने के लिए निकली थीं। जानकारी के अनुसार, रेलवे स्टेशन परिसर में चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार की नजर इन युवतियों पर पड़ी। संदेह होने पर उन्होंने सभी से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान युवतियों ने बताया कि वे मजदूरी एवं रोजगार की तलाश में बाहर जाने की तैयारी में थीं।
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इसके बाद थाना प्रभारी ने युवतियों को बाहर काम करने के दौरान संभावित जोखिमों, मानव तस्करी तथा अन्य प्रकार के शोषण से जुड़े खतरों के प्रति जागरूक किया। पुलिस की पहल पर सभी युवतियों को टाटा मैजिक वाहन से सुरक्षित उनके घर वापस भेज दिया गया।
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थाना प्रभारी की इस मानवीय एवं संवेदनशील पहल की क्षेत्र में सराहना की जा रही है। गौरतलब है कि पश्चिमी सिंहभूम समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवक-युवतियां रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं। ऐसे मामलों में कई बार नाबालिग बच्चियों और युवतियों के मानव तस्करी तथा शोषण का शिकार होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा समय रहते की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दिल्ली | दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर बड़ा कानूनी और राजनीतिक मोड़ सामने आया है। एक्साइज पॉलिसी केस से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की है।
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अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका के खिलाफ सुनियोजित तरीके से माहौल बनाने और जनता के बीच अदालत की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने का प्रयास किया गया। इस मामले में Manish Sisodia, Sanjay Singh, Saurabh Bharadwaj और Vinay Mishra के नाम भी शामिल हैं।
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कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि न्यायिक फैसलों की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन न्यायपालिका की छवि खराब करने या अदालत की निष्पक्षता पर अविश्वास पैदा करने वाला अभियान गंभीर मामला माना जाएगा।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीति के साथ-साथ न्यायपालिका की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं को लेकर नई बहस छिड़ गई है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और अदालत की टिप्पणियों पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी।
नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गुरुवार को अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कार्यपालिका का अत्यधिक नियंत्रण दिखाई देता है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हो सकता है। अदालत ने सवाल उठाया कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने वाली संस्था के चयन में किसी स्वतंत्र सदस्य को शामिल क्यों नहीं किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक के चयन में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) चयन समिति का हिस्सा होते हैं, लेकिन चुनाव आयोग के प्रमुख की नियुक्ति में उन्हें शामिल नहीं किया जाता। जस्टिस दत्ता ने कहा, “CBI निदेशक की नियुक्ति में CJI शामिल होते हैं। इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने या कानून के शासन से जोड़कर देखा जा सकता है। लेकिन लोकतंत्र को बनाए रखने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसा क्यों नहीं होना चाहिए?”
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उन्होंने आगे कहा कि अदालत यह नहीं कह रही कि चयन समिति में CJI को ही शामिल किया जाए, लेकिन किसी स्वतंत्र सदस्य की मौजूदगी आवश्यक होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि तीसरा सदस्य मंत्रालय से ही क्यों होना चाहिए। जस्टिस दत्ता ने कहा, “आज प्रधानमंत्री एक सदस्य चुनते हैं और विपक्ष के नेता (LoP) दूसरे सदस्य को चुनते हैं। यदि दोनों के बीच मतभेद हो, तो क्या तीसरा सदस्य विपक्ष के नेता के पक्ष में जाएगा?” इस पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वह इस विषय पर कोई अटकल नहीं लगाना चाहते और व्यावहारिक रूप से स्थिति अलग भी हो सकती है। इस पर जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा, “तो इसका मतलब है कि कार्यपालिका ही सब कुछ कंट्रोल कर रही है।”
पीठ ने यह भी कहा कि इस प्रकार की नियुक्तियों में निर्णय व्यवहारिक रूप से 2:1 के बहुमत से होगा, क्योंकि कैबिनेट मंत्री के प्रधानमंत्री के रुख से अलग राय रखने की संभावना बेहद कम होती है। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने यह भी सवाल उठाया कि कार्यपालिका को “वीटो” जैसी स्थिति क्यों दी गई है। उन्होंने कहा कि संसद के पास कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन कानूनों की अंतिम व्याख्या करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास ही रहेगा। उन्होंने कहा, “पहली नजर में हमें इस बात से परेशानी हो रही है कि कार्यपालिका को वीटो का अधिकार क्यों दिया गया है। संसद कानून बना सकती है, लेकिन कानूनों की अंतिम व्याख्या सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।”
चाईबासा | नीट-2026 परीक्षा पेपर लीक प्रकरण को लेकर कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने बुधवार को प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता कांग्रेस भवन, चाईबासा में एकत्रित हुए और जमकर नारेबाजी की। इसके बाद विरोध स्वरूप दोनों नेताओं के पुतलों को आग के हवाले किया गया।
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एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष अनीष गोप ने कहा कि नीट-2026 परीक्षा में हुए पेपर लीक ने देशभर के लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि हजारों परिवारों ने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए कोचिंग और पढ़ाई पर भारी खर्च किया था, लेकिन परीक्षा निरस्त होने से छात्रों में भारी निराशा और आक्रोश है।
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कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने कहा कि नीट-2026 परीक्षा निरस्त होने से लाखों विद्यार्थियों की मेहनत पर कुठाराघात हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार द्वारा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को सौंपी गई है, जो सीधे केंद्रीय शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत है। उन्होंने कहा कि एजेंसी की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में रही है और कई परीक्षाएं पेपर लीक एवं नकल के कारण रद्द हो चुकी हैं, जिसकी सीधी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की बनती है।
उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार विवादों के बावजूद केंद्र सरकार ने न तो एनटीए के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की है और न ही एजेंसी की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। इसके विपरीत, इसकी कमियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन में एनएसयूआई जिला महासचिव सचिन बिरुवा, सदस्य संजु कुंकल, रुपसिंह बिरुवा, अरुण हेम्ब्रम, पूर्व नगर अध्यक्ष अजय कुमार, मो. अरसलाम, संजय साव, सुशील दास समेत अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।