डीएलएसए ने बाल संरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की, बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर दिए अहम निर्देश

सरायकेला | जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), सरायकेला-खरसावां में मंगलवार को बालकों हेतु विधिक सेवा इकाई तथा मानसिक बीमारी से ग्रसित बालकों हेतु विधिक सेवा इकाई की कार्यप्रणाली की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य दोनों इकाइयों की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए जिले में बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संवेदनशील एवं सुदृढ़ बनाना था।

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बैठक में बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, जिला बाल संरक्षण इकाई, पारा विधिक स्वयंसेवकों तथा बाल संरक्षण एवं विधिक सेवाओं से जुड़े संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान जरूरतमंद बच्चों को समय पर निःशुल्क विधिक सहायता, संरक्षण, बचाव, पुनर्वास एवं परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया।

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समीक्षा बैठक में हाल के दिनों में लापता एवं रेस्क्यू किए गए बच्चों की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। ऐसे मामलों में त्वरित हस्तक्षेप, प्रभावी पुनर्वास तथा सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि बच्चों की सुरक्षा एवं उनके अधिकारों की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बैठक के दौरान वत्सल्य बालिका गृह की सुरक्षा व्यवस्था की भी विस्तार से समीक्षा की गई। पूर्व में संस्थान से बाहर चली गई दो बालिकाओं के सुरक्षित बरामद होने का उल्लेख करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने का निर्णय लिया गया।

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पारा विधिक स्वयंसेवकों को निर्देशित किया गया कि वे बाल देखरेख संस्थानों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की उपेक्षा, शोषण, दुर्व्यवहार, बच्चों के लापता होने अथवा अन्य संवेदनशील मामलों की सूचना तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं। इसके अलावा मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक सहयोग की आवश्यकता वाले बच्चों को समय पर उचित चिकित्सा, काउंसलिंग एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया गया।

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बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बच्चों के अधिकारों, सम्मान, सुरक्षा एवं समग्र कल्याण की रक्षा के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि दोनों विधिक सेवा इकाइयों की नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि संस्थागत देखभाल, पुनर्वास तथा बाल संरक्षण व्यवस्था की प्रभावी निगरानी एवं मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके।


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By maskal.news

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