नई दिल्ली/चाईबासा | जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित “जनजातीय गरिमा उत्सव-2026” के अंतर्गत संचालित “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले अभियान” के सफल क्रियान्वयन के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिले को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन-सह-सम्मान समारोह में जिले को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पांच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।

18 से 25 मई 2026 तक संचालित इस अभियान के सफल संचालन के आधार पर पश्चिमी सिंहभूम झारखंड का एकमात्र जिला रहा, जिसे देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान प्राप्त हुआ। समारोह में जिले का प्रतिनिधित्व समेकित जनजाति विकास अभिकरण (आईटीडीए) के परियोजना निदेशक ने किया तथा जिले में संचालित विभिन्न गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण भी किया।
जनजातीय बहुल एवं दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पश्चिमी सिंहभूम जिले में जिला प्रशासन ने जन-केंद्रित और समावेशी विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करते हुए अभियान को सफल बनाया। अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ एवं वंचित जनजातीय परिवारों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करना था।

अभियान के दौरान जिले के सभी 18 प्रखंडों के 927 गांवों में कुल 855 शिविर आयोजित किए गए, जिनसे 2.23 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए। इस अवधि में कुल 21,845 सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इनमें स्वास्थ्य जांच शिविर, आधार कार्ड सेवाएं, जाति एवं आय प्रमाण-पत्र, पेंशन नामांकन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, मनरेगा लाभ तथा सिकल सेल जांच जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल थीं।
इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, पोषण अभियान, सुकन्या समृद्धि योजना तथा वनघन योजना के तहत भी बड़ी संख्या में लाभार्थियों को सेवाएं प्रदान की गईं।
अभियान के तहत जनसुनवाई एवं डोरस्टेप सेवा के माध्यम से 8,068 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 7,042 शिकायतों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया। जिला प्रशासन ने रक्तदान अभियान के माध्यम से 680 यूनिट से अधिक रक्त संग्रह किया। इसके साथ ही टीबी मरीजों को गोद लेने, फूड बास्केट वितरण, पंचायत भवनों के सुदृढ़ीकरण, वृक्षारोपण तथा स्वास्थ्य एवं पोषण जागरूकता कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।

महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए “सखी दिवस” तथा विद्यालयों में सामाजिक समावेशन एवं सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए “तिथि भोज-सह-जनमोत्सव” जैसी अभिनव पहलें भी संचालित की गईं। अभियान में पारंपरिक मानकी-मुंडा व्यवस्था की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे जनजातीय क्षेत्रों में सहभागी एवं संवेदनशील शासन व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिली।
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार के नेतृत्व में आईटीडीए तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से यह अभियान जनभागीदारी आधारित विकास एवं सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।

