चांडिल | चांडिल बांध से प्रभावित एवं विस्थापित परिवारों के लंबित अधिकार, पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन एवं विस्थापित मुक्ति वाहिनी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को चांडिल में एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना दिया गया।
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धरना के दौरान विस्थापितों ने प्रशासन एवं संबंधित विभागों को 15 सूत्री मांग-पत्र सौंपा। इसमें पुनर्वास आयोग के गठन, पुनर्वास स्थलों के भूखंडों का पट्टा एवं सीमांकन, आंशिक रूप से प्रभावित गांवों का पुनः सर्वेक्षण, लंबित मुआवजे के भुगतान तथा सभी 116 प्रभावित गांवों में समान प्रावधान लागू करने की मांग प्रमुख रही।
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इसके अलावा मत्स्य पालन एवं नौकायन में स्थानीय विस्थापितों को प्राथमिकता देने तथा पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी की मांग की गई। संगठनों ने पुनर्वास एवं भू-अर्जन कार्यालयों में कथित दलाल प्रथा पर रोक लगाने, सोलर परियोजना शुरू करने से पहले ग्रामसभा आयोजित करने, प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने और विभिन्न भर्तियों में विस्थापितों को प्राथमिकता देने की मांग भी रखी।
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विस्थापित संगठनों ने लंबित अधिकारों के निपटारे तक प्रभावित भूमि पर जल भंडारण नहीं करने तथा जलाशय एवं पुनर्वास से संबंधित कार्यों की मासिक प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।
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संयुक्त मंच ने प्रशासन को तीन माह का समय देते हुए मांगों पर ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई की मांग की। संगठनों ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में संतोषजनक पहल नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरना, भूख हड़ताल, जनसभा, रैली, मशाल जुलूस, विधानसभा घेराव और मुख्यमंत्री आवास घेराव सहित चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा।
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संयुक्त मंच ने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ नहीं, बल्कि विस्थापितों के अधिकार, सम्मान, न्याय और स्थायी पुनर्वास के लिए है। संगठनों ने सरकार से वर्षों से लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान करते हुए विस्थापित परिवारों को उनका न्यायोचित अधिकार दिलाने की मांग की।
चाईबासा | चाईबासा में कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ किए गए प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पश्चिमी सिंहभूम जिला भाजपा अध्यक्ष गीता बालमुचू ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया के संचालन की जिम्मेदारी निभाने वाली संवैधानिक संस्था है।
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गीता बालमुचू ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसी प्रक्रियाएं निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव जीतने पर लोकतंत्र को मजबूत बताती है, जबकि चुनावी हार के बाद निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। उन्होंने इसे कांग्रेस का दोहरा रवैया बताया।
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भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि कांग्रेस को मतदाता सूची या चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस आपत्ति है, तो उसे निर्धारित संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से प्रमाण के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल प्रदर्शन के माध्यम से संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
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उन्होंने कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें और अपात्र नामों की पहचान की जा सके। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की व्यवस्था भी की गई है।
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गीता बालमुचू ने कांग्रेस से अपनी राजनीतिक रणनीति और जनसंपर्क को लेकर आत्ममंथन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि EVM से लेकर निर्वाचन आयोग तक लगातार आरोप लगाने के बजाय कांग्रेस को जनता के बीच अपने कार्यों और नीतियों का हिसाब देना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, न्यायपालिका और निर्वाचन व्यवस्था के प्रति अविश्वास का वातावरण बनाने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता। कांग्रेस को आंदोलन और आरोपों की राजनीति के बजाय रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए।
चाईबासा | मतदाता सूची की शुचिता, प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर सोमवार को चाईबासा में कांग्रेस ने मार्च निकाला। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सह विधायक सोनाराम सिंकु के नेतृत्व में दोपहर 12 बजे कांग्रेस भवन से मार्च शुरू हुआ, जो शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए पुराने उपायुक्त कार्यालय पहुंचा।
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मार्च के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मतदाता अधिकारों की सुरक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को लेकर नारेबाजी की। मार्च कांग्रेस भवन से शुरू होकर शहीद पार्क चौक, टैगोर पार्क चौक, सदर थाना चौक, मुख्य मार्ग, पोस्ट ऑफिस चौक, घंटाघर चौक और कोर्ट मार्ग होते हुए पुराने उपायुक्त कार्यालय पहुंचा।
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मार्च के समापन के बाद कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में किए गए बदलावों की समीक्षा, मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा तथा निर्वाचन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष सह विधायक सोनाराम सिंकु ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारभूत कड़ी है। किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने, नया नाम जोड़ने अथवा किसी प्रविष्टि में संशोधन करने से पहले संबंधित नागरिक को पर्याप्त सूचना देने, आपत्ति दर्ज कराने और अपना पक्ष रखने का प्रभावी अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की।
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उन्होंने निर्वाचन आयोग की सूचना-प्रौद्योगिकी व्यवस्था, आंकड़ा प्रबंधन और केंद्रीकरण से जुड़ी प्रक्रियाओं के स्वतंत्र परीक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से संबंधित सार्वजनिक रूप से उठाए जा रहे आरोपों और सवालों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग की। कांग्रेस जिला प्रभारी धर्मेंद्र सोनकर ने कहा कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और स्वायत्तता का सम्मान करती है। निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग किसी संस्था को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से है।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि सार्वजनिक आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, महत्वपूर्ण निर्णयों की समीक्षा हो, विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों की समीक्षा की जाए, निर्वाचन आयोग की सूचना-प्रौद्योगिकी व्यवस्था का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाए तथा प्रत्येक मतदाता को प्रभावी सूचना, आपत्ति दर्ज कराने और सुनवाई का अधिकार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता का विश्वास सर्वोपरि है और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं जवाबदेही से ही मजबूत होती है।
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मार्च में पूर्व विधायक देवेंद्र नाथ चाम्पिया, प्रदेश सचिव मायाधर बेहरा, चंद्रशेखर दास, रईस रिजवी छब्बन, राम सिंह सावैयां, संयुक्त सचिव नितिमा बारी, अमित राय, जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय, ओबीसी प्रकोष्ठ अध्यक्ष रंजीत यादव, कामगार जिलाध्यक्ष हसलुद्दीन खान, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रीतम बांकिरा, आदिवासी कांग्रेस राष्ट्रीय समन्वयक दीनबंधु बोयपाई, युवा कांग्रेस प्रदेश महासचिव अविनाश कोड़ाह, यूथ इंटक जिलाध्यक्ष सुरेश सावैयां, सेवादल मुख्य संगठक लक्ष्मण हासदा, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष अनीश गोप, वरीय कांग्रेसी कैरा बिरुवा, इम्तियाज खान, बालेमा कोई, नूतन सिंकु, विपिन सिंकु, सूरज चाम्पिया, दानिश हुसैन, विजय तिग्गा, लियोनर्ड बोदरा, सुशील हेस्सा, प्रतीक कुमार, सन्नी रॉबर्ट एंथोनी, प्रखंड अध्यक्ष दिकु सावैयां, ललित दोराईबुरु, मंजीत प्रधान, सोनराम कोड़ाह, विजय सिंह सामड, सिकुर गोप, चंद्र भूषण बिरुवा, सकारी दोंगो, सुखलाल हेम्ब्रम, सुरेश चंद्र सावैयां, सीताराम गोप, मंडल अध्यक्ष सोमा पुरती, विनीत लागुरी, मकर ध्वज सरदार, दिनेश प्रधान, मथुरा लागुरी, रंजीत कोंगाड़ी, गोरा सिंह पुरती और रघुनाथ मुंडा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।
चाईबासा | मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर झामुमो ने सोमवार को चाईबासा में पुतला दहन कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इस दौरान झामुमो के जिला अध्यक्ष सोनाराम देवगम ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता किसी भी राजनीतिक सत्ता से ऊपर होनी चाहिए। मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
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पत्रकारों को संबोधित करते हुए सोनाराम देवगम ने कहा कि चुनाव आयोग का काम केवल चुनाव कराना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना भी है। यदि SIR की प्रक्रिया के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटता है या उसे अपने अस्तित्व और नागरिक अधिकार को साबित करने के लिए अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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उन्होंने कहा कि Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले दस महीनों के दौरान चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने SIR से जुड़े निर्णयों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम-से-कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। वहीं, चुनाव आयोग ने इन खबरों के बाद कहा है कि SIR सहित सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
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देवगम ने कहा कि जब देश की चुनावी व्यवस्था पर जनता का विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी है, तब पारदर्शिता की कमी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर उठाए जा रहे सवालों का तथ्यात्मक और सार्वजनिक जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों को राजनीतिक शोर बताकर खारिज करने के बजाय चुनाव आयोग को बूथवार प्रक्रिया, मतदाताओं के नाम हटाने के आधार, आपत्तियों के निस्तारण और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। झामुमो ने मांग की कि SIR की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सत्यापन योग्य और नागरिकों के मताधिकार की संवैधानिक सुरक्षा के अनुरूप हो।
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देवगम ने कहा, “वोट किसी सरकार, पार्टी या आयोग की संपत्ति नहीं है। यह भारत के नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूची से बाहर होने का डर नहीं होना चाहिए। चुनाव आयोग को यह भरोसा अपने कार्यों से स्थापित करना होगा।” उन्होंने कहा कि झामुमो लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा के लिए हर संवैधानिक मंच पर सवाल उठाता रहेगा।
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उन्होंने बताया कि ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। देवगम ने उनके कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके इस्तीफे की मांग उठ रही है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को बिना टेंडर किसी प्रकार का कार्य या जिम्मेदारी दिए जाने से संबंधित आरोपों पर भी स्पष्टता की मांग की और मामले की निष्पक्ष जांच कर पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। देवगम ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है तथा जनता से जुड़े किसी भी निर्णय में नियम-कायदों और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन होना चाहिए।
चाईबासा | कोल्हान विश्वविद्यालय की बदहाल शैक्षणिक व्यवस्था के खिलाफ छात्र संघ के पदाधिकारियों ने जोरदार छात्र आंदोलन की चेतावनी दी है। सोमवार को प्रेस वार्ता कर छात्र प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर विद्यार्थियों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई, तो छात्र संगठन लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे।
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छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा आदिवासी बहुल अनुसूचित क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण उच्च शिक्षण संस्थान है। इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं नियमित उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। लेकिन वर्तमान समय में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है।
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उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष और आंदोलन के बाद स्थापित कोल्हान विश्वविद्यालय आज विद्यार्थियों के लिए केवल नामांकन और परीक्षा आयोजित करने का केंद्र बनकर रह गया है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं महाविद्यालयों में नियमित कक्षाओं का संचालन नहीं होना चिंताजनक है। वहीं, विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र भी लगभग एक वर्ष पीछे चल रहा है, जिससे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की समस्याओं के समाधान के लिए छात्र संगठनों की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन एवं जिला प्रशासन के साथ वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद बैठक निर्धारित नहीं की गई। उनका कहना है कि वार्ता से बचकर विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि 18 अप्रैल 2026 को विश्वविद्यालय की विभिन्न समस्याओं को लेकर छात्र आंदोलन किया गया था। आंदोलन के लगभग चार महीने बीत जाने के बावजूद कुलपति द्वारा छात्रों के साथ समस्याओं पर गंभीर एवं निर्णायक बैठक नहीं की गई है। इससे विद्यार्थियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
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छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से वार्ता और समाधान का रास्ता अपनाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अपेक्षित पहल नहीं हुई। ऐसी स्थिति में अब जोरदार छात्र आंदोलन ही छात्रों के पास बचा एकमात्र लोकतांत्रिक विकल्प है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित आंदोलन का उद्देश्य विश्वविद्यालय को बंद करना या विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित करना नहीं है। बल्कि आंदोलन के माध्यम से नियमित कक्षाओं का संचालन, समय पर शैक्षणिक सत्र पूरा करना, बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों की समस्याओं का स्थायी समाधान कराना है।
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छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं जिला प्रशासन से मांग की कि विद्यार्थियों के साथ तत्काल बैठक आयोजित कर उनकी समस्याओं पर ठोस एवं समयबद्ध निर्णय लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो छात्र संगठन लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध एवं जोरदार आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय एवं प्रशासन की होगी। प्रेस वार्ता में पीजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष सनातन पिंगुआ, टाटा कॉलेज के पूर्व सचिव पीपुन बारीक, विकास तमसोय, आशीष गागराई, सौरिश पिंगुआ, कृष्णा हेम्ब्रम, समित कालिंदी, अभिषेक कुंकल, बैजू हेम्ब्रम, अर्जुन गोप सहित अन्य छात्र उपस्थित थे।
सरायकेला | झारखंड विधानसभा की प्राक्कलन समिति ने रविवार को सरायकेला-खरसावां जिले में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं एवं विभागीय कार्यों की समीक्षा की। सरायकेला परिसदन सभागार में समिति के सभापति हेमलाल मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में समिति के सदस्य नागेंद्र महतो, मथुरा प्रसाद महतो एवं सोमेश सोरेन तथा खरसावां विधायक दशरथ गागराई उपस्थित रहे। उपायुक्त नितिश कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक मनोज सर्वांगीयारी ने समिति के सदस्यों का स्वागत किया।
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बैठक के दौरान समिति ने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली और लंबित योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। अधिकारियों को योजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ कार्यों की नियमित निगरानी एवं स्थल निरीक्षण करने को कहा गया। कार्यपालक अभियंताओं को संवेदकों के साथ नियमित बैठक कर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया।
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समिति ने राज्य संपोषित योजनाओं के तहत निर्धारित समय-सीमा से विलंबित कार्यों को दिसंबर तक पूरा करने का निर्देश दिया। समय पर कार्य पूरा नहीं करने वाले संवेदकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने तथा भविष्य की योजनाओं में उन्हें कार्य आवंटित नहीं करने की प्रक्रिया अपनाने को कहा गया।
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खनन प्रभावित क्षेत्रों में नियमानुसार विकास कार्य कराने तथा अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान सदर अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एवं अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों और आवश्यक कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। समिति ने लोगों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
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पर्यटन स्थलों की समीक्षा करते हुए समिति ने पर्यटकों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास पर जोर दिया। वहीं, स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में स्वच्छता, खेल-खेल में शिक्षा तथा बच्चों में अच्छे व्यवहार की आदत विकसित करने की दिशा में पहल करने का निर्देश दिया गया।
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बैठक में समिति ने सभी विभागों को निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने तथा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक सुनिश्चित रूप से पहुंचाने का निर्देश दिया। अंत में अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार ने समिति द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने तथा इसकी जानकारी समिति को उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
आनंदपुर | पश्चिमी सिंहभूम के जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार ने आनंदपुर प्रखंड क्षेत्र के भ्रमण के दौरान प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय में संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड समन्वयक (आवास एवं पंचायत), प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक-विकसित भारत, जनसेवक, कंप्यूटर ऑपरेटर, मानकी-मुंडा प्रतिनिधि सहित अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान उपायुक्त ने प्रखंड में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मियों को योजनाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से पहुंचाने का निर्देश दिया।
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राशन वितरण में विलंब पर सख्त निर्देश स्थानीय महिला द्वारा राशन वितरण में विलंब से संबंधित प्राप्त आवेदन के आलोक में उपायुक्त ने संबंधित जन वितरण प्रणाली दुकानदार को दो दिनों के भीतर लंबित राशन का वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रखंड के सभी राशन दुकानदारों को निर्धारित तिथि पर शत-प्रतिशत राशन वितरण सुनिश्चित करने तथा किसी भी लाभुक को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं करने की हिदायत दी। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि खाद्यान्न जैसी मूलभूत सुविधा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पात्र लाभुकों को समय पर उनका हक मिलना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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आवास योजनाओं का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश बैठक में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर आवास योजना के तहत स्वीकृत एवं निर्मित आवासों का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने संबंधित कर्मियों को स्थल पर जाकर यह जांच करने को कहा कि वास्तविक लाभुकों को निर्धारित मानकों के अनुरूप आवास का लाभ मिल रहा है या नहीं। इसके अलावा मतदाता सूची विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2026 के तहत चल रहे कार्यों में तेजी लाने, पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने, त्रुटियों का निराकरण करने तथा आवश्यक प्रपत्रों की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।
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जर्जर विद्यालय भवनों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश उपायुक्त ने प्रखंड क्षेत्र में स्थित जर्जर एवं अनुपयोगी विद्यालय भवनों का चिन्हांकन कर उनके निस्तारीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसरों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी जर्जर संरचना से सुरक्षा संबंधी जोखिम उत्पन्न नहीं होना चाहिए। साथ ही मुंडा नियुक्ति की प्रक्रिया को भी प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने तथा संबंधित कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं करने का निर्देश दिया गया।
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प्रखंड कार्यालय परिसर को स्वच्छ एवं जनोपयोगी बनाने पर जोर उपायुक्त ने प्रखंड कार्यालय परिसर में दीदी कैफे का संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इससे कार्यालय आने वाले आमजनों एवं कर्मियों को सुविधा मिलेगी और स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों को आजीविका का अवसर भी प्राप्त होगा। उन्होंने कार्यालय परिसर में पर्याप्त संख्या में पौधे एवं गमले लगाने तथा परिसर को स्वच्छ, हरा-भरा एवं आकर्षक बनाने का निर्देश दिया। इसके अलावा क्षेत्र के प्रमुख चौक-चौराहों पर आवश्यकतानुसार हाई मास्ट लाइट लगाने के संबंध में भी उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
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स्वच्छता एवं पोषण अभियानों को प्रभावी बनाने के निर्देश बैठक में स्वच्छता ही सेवा अभियान एवं राष्ट्रीय पोषण माह के तहत संचालित गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को दोनों अभियानों के उद्देश्यों के अनुरूप जमीनी स्तर पर प्रभावी गतिविधियां संचालित करने, आमजनों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता, पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का निर्देश दिया।
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उन्होंने सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन गंभीरता, संवेदनशीलता एवं समयबद्धता के साथ करने को कहा, ताकि सरकार की योजनाओं एवं प्रशासनिक सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जा सके। बैठक के उपरांत उपस्थित पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा प्रखंड कार्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया गया।
आनंदपुर | पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने आनंदपुर प्रखंड क्षेत्र के भ्रमण के दौरान पंचायत सचिवालय, आनंदपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ‘प्रोजेक्ट प्राण’ के तहत पंचायत सचिवालय के सुदृढ़ीकरण एवं जनोपयोगी सुविधाओं के विकास से संबंधित कार्यों का जायजा लिया तथा उपलब्ध संसाधनों और सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने पंचायत सचिवालय परिसर में निर्मित हैंडवॉश यूनिट, पेवर ब्लॉक, महिला एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय, ज्ञान केंद्र, हेल्प डेस्क एवं प्रज्ञा केंद्र सहित विभिन्न सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की सुविधा के लिए बनाए गए मंईया कक्ष तथा बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी ली। साथ ही स्थानीय मुखिया, पंचायत सचिव एवं पंचायत सहायक के लिए निर्धारित कक्षों की व्यवस्था और कार्यप्रणाली के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
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उपायुक्त ने पंचायत सचिवालय में जेएसएलपीएस के कार्यों के संचालन के लिए पृथक कक्ष की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इससे स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीण आजीविका से जुड़े कार्यों के संचालन में सुविधा होगी तथा ग्रामीण महिलाओं को आवश्यक सेवाएं एवं मार्गदर्शन पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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उन्होंने पंचायत सचिवालय परिसर एवं भवन की दीवारों पर पंचायत के सभी ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) संकेतकों से संबंधित जानकारी का आकर्षक एवं स्पष्ट चित्रांकन कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत में संचालित विकास कार्यों, उपलब्ध संसाधनों एवं विभिन्न विकास संकेतकों की जानकारी आम नागरिकों को सहज रूप से दिखाई देनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों में जागरूकता बढ़े और पंचायत की विकास प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो।
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निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने वर्षा जल संचयन की व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने पंचायत सचिवालय परिसर में वर्षा जल के संरक्षण एवं उसके समुचित उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा जल संरक्षण से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया। साथ ही परिसर की स्वच्छता, जल निकासी एवं उपलब्ध नागरिक सुविधाओं के नियमित रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा।
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उपायुक्त ने निर्देश दिया कि पंचायत सचिवालय में उपलब्ध सभी सुविधाओं का नियमित, प्रभावी एवं जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जाए। पंचायत सचिवालय को केवल कार्यालयीन कार्यों के संचालन का स्थान न रखते हुए ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, प्रमाण-पत्रों, डिजिटल सेवाओं, आजीविका गतिविधियों एवं अन्य जनकल्याणकारी सेवाओं से जोड़ने वाले समग्र जनसेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं पंचायत कर्मियों को निर्देशित किया कि पंचायत सचिवालय में आने वाले ग्रामीणों को आवश्यक जानकारी एवं सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही भवन एवं परिसर की सुंदरता, स्वच्छता तथा सभी सुविधाओं के बेहतर रख-रखाव को प्राथमिकता देने को कहा।
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उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि पंचायत सचिवालय ग्रामीण विकास की आधारभूत इकाई है और सरकार एवं ग्रामीणों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ‘प्रोजेक्ट प्राण’ का उद्देश्य पंचायत सचिवालयों को केवल आधारभूत सुविधाओं से सुसज्जित करना नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी जनसेवा केंद्र के रूप में विकसित करना है, जहां ग्रामीणों को आवश्यक जानकारी, सुविधाएं एवं सरकारी सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिवालय की प्रत्येक सुविधा का सदुपयोग हो, ग्रामीणों की भागीदारी बढ़े तथा पंचायत विकास की गतिविधियां पारदर्शी एवं जनकेंद्रित हों, इसी दिशा में निरंतर कार्य किया जाना चाहिए।
मनोहरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड क्षेत्र भ्रमण के दूसरे दिन उपायुक्त-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारी मनीष कुमार ने मतदाता सूची विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2026 के तहत संचालित नोटिस सुनवाई कार्यक्रम का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बरंगा पहुंचकर वहां चल रही सुनवाई प्रक्रिया का जायजा लिया और संबंधित पदाधिकारियों से पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली।
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उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बरंगा में मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 14, 15 और 16 से संबंधित नोटिस प्राप्त मतदाताओं की सुनवाई की जा रही थी। उपायुक्त ने मौके पर उपस्थित मतदाताओं से संवाद करते हुए नोटिस के संबंध में उनके द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे दस्तावेजों एवं अभिलेखों की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों से अब तक प्राप्त आवेदनों, प्रस्तुत दस्तावेजों और सुनवाई की प्रक्रिया के संबंध में भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
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उपायुक्त-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित प्रावधानों और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से संपादित किया जाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। इसलिए इसके शुद्धीकरण एवं अद्यतीकरण की प्रक्रिया में प्रत्येक पात्र नागरिक के हितों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
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उन्होंने सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए जा रहे दस्तावेजों की विधिवत जांच, अभिलेखों के संधारण तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुपालन पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित कर्मियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि नोटिस प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का समुचित अवसर मिले।
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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने निर्वाचन कर्मियों से संवाद कर सुनवाई कार्यक्रम के संचालन में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों की भी जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा निर्धारित समय-सीमा के अनुपालन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
चाईबासा | झारखंड सरकार के नीतिगत निर्णयों और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए ग्रामीण संवेदक संघ, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा ने जिले के तीन प्रमुख तकनीकी प्रमंडलों द्वारा पुरानी दरों के आधार पर ई-निविदाएं आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई है। संघ के अध्यक्ष सुनील सिरका ने सोमवार को पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त को मांग पत्र सौंपकर संबंधित निविदाओं की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने तथा उन्हें रद्द या स्थगित करने की मांग की।
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संघ द्वारा सौंपे गए मांग पत्र के अनुसार, झारखंड सरकार ने 31 अगस्त 2026 से पूरे राज्य में संशोधित अनुसूचित दर (Revised SOR) लागू करने का निर्णय लिया है। संघ का आरोप है कि इसके बावजूद चाईबासा के तीन प्रमुख तकनीकी विभागों ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के DMFT मद समेत अन्य मदों से संबंधित कार्यों के प्राक्कलन संशोधित दर के आधार पर तैयार नहीं किए। इसके बाद पुरानी दरों के आधार पर ही ई-निविदाएं आमंत्रित कर दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित कर दी गईं।
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संघ ने मुख्य रूप से तीन तकनीकी प्रमंडलों की निविदाओं पर सवाल उठाया है। इनमें NREP, चाईबासा की ई-निविदा सूचना संख्या EE/NREP/CHAIBASA/03/2026-27 (DMFT मद), लघु सिंचाई प्रमंडल, चाईबासा की ई-निविदा आमंत्रण सूचना संख्या WRD/MID/CBSA/DMFT/F2-12/2026-27 तथा ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, चाईबासा की ई-निविदा सूचना संख्या RDD/SD/CHAIBASA/06/2026-27 और RDD/SD/CHAIBASA/07/2026-27 शामिल हैं।
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संघ अध्यक्ष सुनील सिरका ने कहा कि वर्तमान समय में निर्माण सामग्री और अन्य संसाधनों की बाजार कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में सरकार द्वारा संशोधित अनुसूचित दर लागू किए जाने के बावजूद पुरानी दरों पर महत्वपूर्ण योजनाओं की निविदा निकालना संवेदकों के लिए आर्थिक रूप से नुकसानदेह है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय संवेदकों को वित्तीय नुकसान होने के साथ-साथ विकास कार्यों की गुणवत्ता और समय पर कार्य पूरा होने पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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संघ ने बताया कि इस मामले को लेकर 15 सितंबर 2026 को भी झारखंड के मुख्यमंत्री और चाईबासा उपायुक्त को लिखित ज्ञापन सौंपा गया था। इसमें DMFT मद से होने वाले कार्यों के प्राक्कलनों को संशोधित अनुसूचित दर के अनुरूप पुनरीक्षित कराने की मांग की गई थी। संघ की प्रमुख मांगें
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DMFT मद से संबंधित विवादित ई-निविदाओं की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। संबंधित निविदाओं को रद्द या स्थगित किया जाए। NREP, चाईबासा, लघु सिंचाई प्रमंडल, चाईबासा तथा ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, चाईबासा के कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया जाए कि सभी प्राक्कलनों को Revised SOR के आधार पर पुनरीक्षित किया जाए। संशोधित प्राक्कलन तैयार होने के बाद ही नई ई-निविदाएं आमंत्रित की जाएं।
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मांग पत्र की प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित तीनों तकनीकी प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं को भी भेजी गई है। अब संघ की मांग पर जिला प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर नजर रहेगी। — सुनील सिरका अध्यक्ष, ग्रामीण संवेदक संघ पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा