चांडिल | चांडिल बांध से प्रभावित एवं विस्थापित परिवारों के लंबित अधिकार, पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन एवं विस्थापित मुक्ति वाहिनी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को चांडिल में एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना दिया गया।

धरना के दौरान विस्थापितों ने प्रशासन एवं संबंधित विभागों को 15 सूत्री मांग-पत्र सौंपा। इसमें पुनर्वास आयोग के गठन, पुनर्वास स्थलों के भूखंडों का पट्टा एवं सीमांकन, आंशिक रूप से प्रभावित गांवों का पुनः सर्वेक्षण, लंबित मुआवजे के भुगतान तथा सभी 116 प्रभावित गांवों में समान प्रावधान लागू करने की मांग प्रमुख रही।

इसके अलावा मत्स्य पालन एवं नौकायन में स्थानीय विस्थापितों को प्राथमिकता देने तथा पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी की मांग की गई। संगठनों ने पुनर्वास एवं भू-अर्जन कार्यालयों में कथित दलाल प्रथा पर रोक लगाने, सोलर परियोजना शुरू करने से पहले ग्रामसभा आयोजित करने, प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने और विभिन्न भर्तियों में विस्थापितों को प्राथमिकता देने की मांग भी रखी।

विस्थापित संगठनों ने लंबित अधिकारों के निपटारे तक प्रभावित भूमि पर जल भंडारण नहीं करने तथा जलाशय एवं पुनर्वास से संबंधित कार्यों की मासिक प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।

संयुक्त मंच ने प्रशासन को तीन माह का समय देते हुए मांगों पर ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई की मांग की। संगठनों ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में संतोषजनक पहल नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरना, भूख हड़ताल, जनसभा, रैली, मशाल जुलूस, विधानसभा घेराव और मुख्यमंत्री आवास घेराव सहित चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा।

संयुक्त मंच ने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ नहीं, बल्कि विस्थापितों के अधिकार, सम्मान, न्याय और स्थायी पुनर्वास के लिए है। संगठनों ने सरकार से वर्षों से लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान करते हुए विस्थापित परिवारों को उनका न्यायोचित अधिकार दिलाने की मांग की।


