चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में बेहतर सड़क संपर्क एवं सुदृढ़ आधारभूत संरचना के विकास को लेकर जिला प्रशासन द्वारा लगातार पहल की जा रही है। इसी क्रम में उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने लोकेसाई क्षेत्र में टोंटो-रेंगड़ाहातु पथ के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए किए जा रहे भू-अर्जन कार्यों का स्थल निरीक्षण किया।
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निरीक्षण के दौरान सहायक समाहर्ता सुश्री ईरा जोरवाल, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री जयप्रकाश नारायण, भू-अर्जन कार्यालय के अमीन, भवन प्रमंडल के अभियंता सहित संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
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उपायुक्त ने स्थल पर पहुंचकर सड़क चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए प्रस्तावित भू-अर्जन क्षेत्र की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने सीमांकन के माध्यम से चिन्हित भूमि के विभिन्न हिस्सों में अपनी उपस्थिति में मापी कार्य भी करवाया। इस दौरान उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं तकनीकी कर्मियों से भू-अर्जन की प्रक्रिया, चिन्हित भूमि तथा सड़क के प्रस्तावित विस्तार से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त की।
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उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने भू-अर्जन से संबंधित कार्यों को निर्धारित प्रक्रिया एवं मानकों के अनुरूप गति देने पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि भूमि के सीमांकन एवं मापी कार्य में पूर्ण स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि सड़क चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।
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टोंटो-रेंगड़ाहातु पथ का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण क्षेत्र में आवागमन को अधिक सुगम, सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सड़क के सुदृढ़ होने से स्थानीय ग्रामीणों सहित आमजनों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। साथ ही, क्षेत्र में आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
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जिला प्रशासन द्वारा आधारभूत संरचनाओं से जुड़े विकास कार्यों की नियमित निगरानी एवं स्थल निरीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित मानकों के अनुरूप और समयबद्ध तरीके से हो।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र के निबंधन के प्रति आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने तथा शत-प्रतिशत जन्म-मृत्यु निबंधन के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से सोमवार को समाहरणालय परिसर से तीन जागरूकता वाहनों को रवाना किया गया। जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने हरी झंडी दिखाकर वाहनों को रवाना किया। इस अवसर पर उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जन्म एवं मृत्यु का निबंधन प्रत्येक नागरिक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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जन्म प्रमाण पत्र व्यक्ति की पहचान के साथ-साथ विभिन्न सरकारी सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। वहीं, मृत्यु का निबंधन भी विभिन्न प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं का समय पर निबंधन कराने के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को जन्म-मृत्यु निबंधन की आवश्यकता, प्रक्रिया और इसके महत्व की जानकारी दी जाएगी।
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उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य जिले में होने वाली प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु की घटना का अनिवार्य रूप से निबंधन सुनिश्चित करना है। अभियान की सफलता के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों तक उनकी अपनी भाषा में जानकारी पहुंचाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जागरूकता वाहनों के माध्यम से ध्वनि विस्तारक यंत्र द्वारा हिंदी, उड़िया एवं स्थानीय हो भाषा में जन्म-मृत्यु निबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण संदेशों का प्रसारण किया जाएगा। ये वाहन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को निबंधन के महत्व एवं आवश्यक प्रक्रिया की जानकारी देंगे।
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जागरूकता अभियान के दौरान नागरिकों से जन्म एवं मृत्यु की प्रत्येक घटना का समय पर निबंधन कराने तथा प्रमाण पत्र प्राप्त करने की अपील की जाएगी। साथ ही, उन्हें बताया जाएगा कि जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र भविष्य में अनेक सरकारी एवं गैर-सरकारी कार्यों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में उपयोगी होते हैं। अभियान के माध्यम से विशेष रूप से उन क्षेत्रों एवं समुदायों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया जाएगा, जहां अभी भी जन्म-मृत्यु निबंधन को लेकर पर्याप्त जागरूकता का अभाव है।
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जिला प्रशासन ने आम नागरिकों, पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित हितधारकों से भी अपील की है कि वे जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं का समय पर निबंधन सुनिश्चित कराने में सहयोग करें। प्रशासन का मानना है कि व्यापक जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से जिले में जन्म-मृत्यु निबंधन की स्थिति को और बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान जिला सांख्यिकी पदाधिकारी श्री फ्रांसिस कुजूर सहित संबंधित विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
चाईबासा | मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम-2026 के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में नोटिस एवं सुनवाई चरण के अंतर्गत विभिन्न मतदान केंद्रों पर नोटिस प्राप्त मतदाताओं की सुनवाई की जा रही है। इसी क्रम में सोमवार को जिले के 61 मतदान केंद्रों पर संबंधित मतदाताओं की सुनवाई आयोजित की गई। इस दौरान निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत दावों एवं दस्तावेजों का सत्यापन किया गया।
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भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार वैसे मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है, जो मतदाता सूची की मैपिंग प्रक्रिया में ‘नो-मैपिंग’ श्रेणी में पाए गए हैं अथवा जिनकी मतदाता सूची में दर्ज प्रविष्टियों में किसी प्रकार की विसंगति पाई गई है। सुनवाई का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के दावों का नियमानुसार सत्यापन करते हुए मतदाता सूची की शुद्धता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
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सुनवाई के दौरान संबंधित मतदाताओं को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित 12 मान्य दस्तावेजों में से किसी एक दस्तावेज के माध्यम से अपनी पात्रता प्रमाणित करने का अवसर दिया जा रहा है। प्रस्तुत दस्तावेजों के परीक्षण एवं आवश्यक सत्यापन के उपरांत पात्र मतदाताओं के नाम एवं विवरण को नियमानुसार मतदाता सूची में सुरक्षित एवं अद्यतन रखने की कार्रवाई की जा रही है।
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यह सुनवाई निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी, सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी तथा अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के स्तर पर संचालित की जा रही है। संबंधित पदाधिकारी मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं दावों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप परीक्षण कर रहे हैं।
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जिला निर्वाचन कार्यालय ने सभी नोटिस प्राप्त मतदाताओं से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि एवं स्थान पर उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें तथा मतदाता सूची में अपने नाम एवं विवरण की शुद्धता सुनिश्चित करें।
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प्रशासन का उद्देश्य विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी, त्रुटिरहित एवं विश्वसनीय बनाना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित प्रकोष्ठ में उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में स्पॉन्सरशिप योजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बाल कल्याण समिति, पश्चिमी सिंहभूम से प्राप्त नवचयनित स्पॉन्सरशिप लाभुक बच्चों के प्रस्तावों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
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बच्चों के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल 32 बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ प्रदान करने की मंजूरी दी गई। अनुमोदित लाभुकों में 19 बालक एवं 13 बालिकाएं शामिल हैं। योजना के तहत पात्र बच्चों को उनके बेहतर भरण-पोषण, शिक्षा एवं समुचित देखभाल के लिए ₹4,000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
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यह आर्थिक सहयोग बच्चों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ उनकी पढ़ाई-लिखाई को निरंतर जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। योजना का उद्देश्य जरूरतमंद एवं पात्र बच्चों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें परिवार के साथ सुरक्षित वातावरण में रहने, शिक्षा प्राप्त करने तथा बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है।
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बैठक के दौरान उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने स्पॉन्सरशिप योजना के तहत चयनित बच्चों को समय पर एवं नियमानुसार लाभ उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लाभुक बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजना का प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
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उपायुक्त ने कहा कि बच्चों को मिलने वाली सहायता राशि का समुचित उपयोग उनकी शिक्षा, पोषण एवं आवश्यक देखभाल के लिए हो, इसकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी बच्चे की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। पात्र बच्चों तक सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना आवश्यक है, ताकि उन्हें बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक सहयोग मिल सके।
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स्पॉन्सरशिप योजना के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को आर्थिक सहयोग प्रदान कर उनके भरण-पोषण, शिक्षा एवं समग्र विकास को मजबूत आधार देने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के तहत मिलने वाली मासिक सहायता बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास में भी सहायक सिद्ध होगी।
चक्रधरपुर | नकटी बुरु डैम परिसर में स्वैच्छिक सामाजिक संस्था देशाउलि फाउंडेशन की छमाही बैठक ‘दुनुब’ आयोजित की गई। बैठक में देशाउलि-जयरा सहित अन्य पवित्र स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा सामुदायिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
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बैठक में कोल्हान के विभिन्न क्षेत्रों से आए सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, ग्रामीण मुण्डा-मानकी, दियुरी, देयोंवां, महिला समिति एवं बोट संचालक समिति के सदस्यों सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। बैठक के दौरान कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न देशाउलि स्थलों का सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण कराने तथा उनके संरक्षण के लिए देशाउलि स्थल प्रबंधन समितियों के गठन का निर्णय लिया गया। साथ ही दियुरी समुदाय की सामाजिक एवं पारिवारिक स्थिति को मजबूत करने, देशाउलि स्थलों को सामुदायिक भूमि के रूप में कानूनी संरक्षण दिलाने की दिशा में पहल करने तथा ग्रामसभा एवं पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
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पवित्र स्थलों एवं पर्यटन क्षेत्रों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए नियमित स्वच्छता अभियान चलाने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर स्थानीय रोजगार एवं सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई।
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पर्यावरणविद् एवं शिक्षाविद् तथा अयुब स्कूल के संस्थापक प्रधान बिरुवा ने कहा कि देशाउलि स्थलों के संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर छोटे-छोटे लेकिन सार्थक प्रयास करने होंगे। वहीं फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य बिरसिंह बानरा ने युवाओं को संगठन से जोड़कर संयुक्त सामाजिक एवं पर्यावरणीय कार्यक्रमों को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया।
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देशाउलि फाउंडेशन के संस्थापक साधु हो’ ने कहा कि देशाउलि-जयरा केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे समाज की सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक विरासत और सामुदायिक एकजुटता के प्रतीक भी हैं। उन्होंने कहा कि इन पवित्र स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना फाउंडेशन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन द्वारा झारखंड के अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और असम में भी अपने सामाजिक एवं पर्यावरणीय कार्यों तथा योजनाओं का विस्तार करने की दिशा में पहल की जाएगी।
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बैठक का संचालन निर्मल सिंकु ने किया। इस अवसर पर दिपक तुबिड, निक्कु कुदादा, बिरसिंह बानरा, रबिन्द्र गिलुवा, बजाय बानरा, पंकज बंकिरा, निर्मला कांडेयंग, विजय सिंह सुंबरूई सहित कोल्हान रक्षा संघ के मानसिंह हेंब्रम, डिबर जोंको, रविंद्र मंडल, मंगल सिंह लगुरी, जयंती बिरुवा, पूनम देवगम, सुमित्रा जोंको, बिरसिंह गागराई, दियुरी गागराई एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
चाईबासा | चाईबासा स्थित उपायुक्त कार्यालय में सोमवार को समाजसेवी दुवारिका शर्मा एवं समीर पाल ने संयुक्त रूप से एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से चाईबासा एवं पश्चिमी सिंहभूम जिले में बीमार, घायल, बेसहारा तथा सड़क दुर्घटनाओं में घायल गौवंशीय पशुओं के समुचित उपचार, रेस्क्यू और संरक्षण के लिए एक स्थायी गौशाला एवं गौ रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की मांग की गई।
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ज्ञापन में बताया गया कि चाईबासा एवं आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गौवंशीय पशु बेसहारा अवस्था में सड़कों पर घूमते रहते हैं। इनमें से कई पशु बीमार अथवा घायल हो जाते हैं, जबकि कई सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। समय पर उपचार और सुरक्षित आश्रय की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण इन बेजुबान पशुओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में उचित देखभाल के अभाव में उनकी मृत्यु तक हो जाती है।
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ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि तस्करी से मुक्त कराए गए अथवा प्रशासन द्वारा जब्त किए गए गौवंशीय पशुओं को सुरक्षित रूप से रखने के लिए भी जिले में पर्याप्त एवं स्थायी व्यवस्था की आवश्यकता है।
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समाजसेवी दुवारिका शर्मा एवं समीर पाल ने उपायुक्त से जनहित एवं पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए चाईबासा अथवा आसपास के किसी उपयुक्त क्षेत्र में लगभग एक एकड़ भूमि गौशाला एवं गौ रेस्क्यू सेंटर की स्थापना के लिए उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि भूमि उपलब्ध कराई जाती है तो समाजसेवियों एवं गौसेवकों के सहयोग से एक व्यवस्थित केंद्र स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। इस केंद्र के माध्यम से बीमार एवं घायल गौवंशीय पशुओं का रेस्क्यू, उपचार, भोजन, पानी, देखभाल और सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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दुवारिका शर्मा ने कहा कि बेजुबान पशुओं की सेवा एवं सुरक्षा हम सभी की सामाजिक जिम्मेदारी है। सड़क किनारे बीमार और घायल अवस्था में पड़े गौवंशीय पशुओं को समय पर उपचार एवं सहायता के साथ सुरक्षित आश्रय मिलना अत्यंत आवश्यक है। वहीं समीर पाल ने कहा कि एक स्थायी गौशाला एवं गौ रेस्क्यू सेंटर की स्थापना से न केवल बेसहारा एवं घायल गौवंशीय पशुओं को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, बल्कि सड़कों पर घूमने वाले पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने में भी सहायता मिलेगी।
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दोनों समाजसेवियों ने जिला प्रशासन से जनहित एवं पशु कल्याण से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर सकारात्मक विचार करते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों तक गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुदड़ी प्रखंड के ऊसंडी गांव निवासी 28 वर्षीय बसंती लोंगा का अनुभव आयुष चिकित्सा के प्रति बढ़ते विश्वास और सकारात्मक स्वास्थ्य परिणाम की प्रेरक मिसाल के रूप में सामने आया है। बसंती लोंगा पिछले करीब पांच वर्षों से पेट एवं आंतों से संबंधित दर्द की समस्या से परेशान थीं। उन्होंने कई स्थानों पर उपचार कराया, लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिल सकी। लंबे समय से जारी दर्द के कारण उन्हें दैनिक जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
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इसी दौरान बसंती को आयुष चिकित्सा के माध्यम से उपचार प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. कविता मैथी से संपर्क कर अपनी स्वास्थ्य समस्या के संबंध में चिकित्सकीय परामर्श लिया। परामर्श के बाद उन्होंने आयुष उपचार के तहत दो बार औषधि का सेवन किया। उपचार के बाद बसंती ने पेट के दर्द में काफी राहत महसूस की और अब पहले की तुलना में स्वयं को बेहतर महसूस कर रही हैं। लाभुक ने साझा किया अपना अनुभव बसंती लोंगा ने बताया, “मैं लगभग पांच वर्षों से पेट के दर्द की समस्या से परेशान थी। कई जगह इलाज कराने के बाद भी मुझे अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही थी। आयुष उपचार लेने के बाद मेरे पेट के दर्द में काफी राहत मिली है। अब मैं पहले की तुलना में काफी बेहतर महसूस कर रही हूं। इससे आयुष चिकित्सा के प्रति मेरा विश्वास और मजबूत हुआ है।”
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चिकित्सकीय परामर्श के साथ उपचार पर जोर आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. कविता मैथी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक करना और समय पर उचित चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धति समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर आधारित है और उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ इसका लाभ लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
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उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में स्वयं से दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। नियमित उपचार, संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह का पालन स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वस्थ समाज के निर्माण में आयुष चिकित्सा की महत्वपूर्ण भूमिका : उपायुक्त पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य जिले के ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।
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उन्होंने कहा, “आयुष चिकित्सा हमारी समृद्ध चिकित्सा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिले में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। बसंती लोंगा का अनुभव इस बात का सकारात्मक उदाहरण है कि उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन एवं नियमित उपचार से स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव संभव है।”
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उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आयुष चिकित्सा पद्धति को भी ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रभावी हिस्सा बनाते हुए अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के वन क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को आजीविका और आय का मजबूत आधार बनाने की दिशा में सहकारिता विभाग की पहल सकारात्मक परिणाम दे रही है। जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति लिमिटेड, चाईबासा से जुड़े किसानों ने वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाकर लाह उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस पहल ने पारंपरिक वन उत्पाद आधारित आजीविका को संगठित, वैज्ञानिक और बाजारोन्मुख स्वरूप प्रदान करते हुए किसानों को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण से बदली उत्पादन की तस्वीर जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति लिमिटेड, चाईबासा से जुड़े 50 किसानों को लाह उत्पादन का विशेष वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया। सहकारिता विभाग के सहयोग से रांची स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कीट विज्ञान अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा चक्रधरपुर के सभागार कक्ष में यह प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
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प्रशिक्षण के दौरान किसानों को लाह उत्पादक एवं पोषक वृक्षों के वैज्ञानिक चयन, लाह कीट पालन, रख-रखाव, उत्पादन प्रक्रिया तथा लाह की कटाई से संबंधित महत्वपूर्ण व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के उपरांत प्रत्येक किसान को 5 किलोग्राम लाह बीज के साथ आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। उत्पादन में लगभग पांच गुना वृद्धि, बिक्री मूल्य भी बढ़ा वैज्ञानिक प्रशिक्षण का सीधा और सकारात्मक प्रभाव किसानों के उत्पादन पर देखने को मिला। प्रशिक्षण प्राप्त सभी 50 किसानों ने वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया, जिसके परिणामस्वरूप लाह उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उत्पादन लगभग पांच गुना तक बढ़ गया। इस सफलता से किसानों में लाह उत्पादन के प्रति रुचि और विश्वास बढ़ा है तथा वन आधारित आजीविका को एक मजबूत आधार मिला है। समिति के अध्यक्ष श्री जगदीश सुंडी एवं अन्य सदस्यों के अनुसार, प्रशिक्षण से पहले किसान लगभग 450 से 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से लाह बेचते थे, जबकि वर्तमान में लाह लगभग 900 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है। इससे किसानों की आय में स्पष्ट वृद्धि हुई है।
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समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, ग्राम करकट्टा, पंचायत नरसंडा, प्रखंड चाईबासा निवासी समिति अध्यक्ष श्री जगदीश सुंडी ने वर्ष 2026 में अब तक लगभग 10 लाख रुपये मूल्य की लाह की बिक्री की है। लाभुक की सफलता बनी अन्य किसानों के लिए प्रेरणा समिति के सदस्य श्री प्रेमगान सुंडी, ग्राम लातर गजरा, पोस्ट बड़ालागिया ने बताया कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के बाद लाह उत्पादन उनके लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। उन्होंने पिछले छह महीनों में लगभग 1.20 लाख रुपये मूल्य की लाह की बिक्री की है। उन्होंने बताया कि पहले लाह उत्पादन पारंपरिक तरीके से किया जाता था। प्रशिक्षण के बाद उन्हें लाह कीट पालन, पोषक वृक्षों की देखभाल और वैज्ञानिक तरीके से लाह की कटाई की जानकारी मिली। इसका परिणाम उत्पादन में वृद्धि और बेहतर आर्थिक प्रतिफल के रूप में सामने आया है।
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श्री प्रेमगान सुंडी ने कहा कि अब वे लाह उत्पादन को अपने परिवार की आय मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य में आजीविका का एक स्थायी आधार बनाने के रूप में देख रहे हैं। सहकारिता से संगठित उत्पादन और बेहतर बाजार की राह जिला सहकारिता पदाधिकारी श्रीमती अमिता कुमारी ने कहा कि जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति लिमिटेड के माध्यम से किसानों को एकजुट कर उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और उत्पादन से जुड़ी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना सहकारिता विभाग की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि लाह जैसे पारंपरिक वन उत्पाद को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है। किसानों द्वारा प्राप्त परिणाम यह दर्शाते हैं कि प्रशिक्षण, सामूहिक प्रयास और बेहतर विपणन व्यवस्था के माध्यम से वन उत्पादक परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
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उन्होंने बताया कि विभाग का उद्देश्य किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें संगठित उत्पादन, मूल्यवर्धन और बेहतर बाजार से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल लाह उत्पादन में वृद्धि से किसानों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी तकनीकी क्षमता में वृद्धि हुई है तथा उन्हें सामूहिक रूप से उत्पादन एवं विपणन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। इस प्रकार जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और वन आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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उपायुक्त का संदेश—“सहकारिता से समृद्धि” पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि, “सहकारिता केवल किसानों को एक मंच पर संगठित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि स्थानीय संसाधनों को आर्थिक समृद्धि में बदलने का एक प्रभावी साधन है। पश्चिमी सिंहभूम जैसे वन बहुल जिले में लाह सहित अन्य वन उत्पादों से जुड़े परिवारों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बेहतर बाजार उपलब्ध कराकर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है।” उन्होंने कहा कि जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति की सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक और सहकारिता की सामूहिक शक्ति से जोड़ा जाता है, तो आजीविका के नए अवसर सृजित होते हैं। उपायुक्त ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि जिले के वन उत्पादक किसान संगठित होकर अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करें और ‘सहकारिता से समृद्धि’ के संकल्प के साथ आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनें।” जोहार वन उत्पादक सहयोग समिति की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि उचित प्रशिक्षण, वैज्ञानिक तकनीक और सहकारिता के सामूहिक प्रयास से पारंपरिक वन उत्पादों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बनाया जा सकता है। 50 किसानों को दिए गए प्रशिक्षण के बाद लाह उत्पादन में लगभग पांच गुना वृद्धि और बिक्री मूल्य में उल्लेखनीय सुधार ने पश्चिमी सिंहभूम में वन आधारित आजीविका को एक नई दिशा दी है।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन (एनसीओआरडी) समिति एवं जिला माइनिंग टास्क फोर्स की संयुक्त समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी अनुमंडल पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए, जबकि सामान्य शाखा उपसमाहर्ता, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, थाना प्रभारी सहित विभिन्न संबंधित विभागों के पदाधिकारी भौतिक रूप से उपस्थित रहे।
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बैठक में उपायुक्त ने मादक पदार्थों की अवैध खेती एवं कारोबार के साथ-साथ अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध प्रभावी, सतत एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन एवं पुलिस के साथ-साथ संबंधित विभागों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता भी आवश्यक है। चिन्हित क्षेत्रों में अभी से शुरू होगा सर्च अभियान, ड्रोन से होगी निगरानी एनसीओआरडी के तहत जिले में पूर्व में अफीम की खेती के लिए चिन्हित क्षेत्रों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संभावित क्षेत्रों में अभी से सर्च अभियान प्रारंभ करने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित अनुमंडल एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी करने तथा किसी भी प्रकार की अवैध खेती की सूचना मिलने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
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उपायुक्त ने चिन्हित क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखने का भी निर्देश दिया, ताकि दुर्गम एवं विस्तृत क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती को शुरुआती स्तर पर ही रोकने के लिए प्रशासनिक एवं पुलिस तंत्र को लगातार सक्रिय रहना होगा। पंचायत एवं अनुमंडल स्तर पर जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से चलेगा जागरूकता अभियान उपायुक्त ने निर्देश दिया कि अफीम की खेती के लिए चिन्हित क्षेत्रों में अनुमंडल एवं पंचायत स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से बैठकें आयोजित की जाएं। इन बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों को मादक पदार्थों की खेती एवं सेवन के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें अवैध गतिविधियों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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बैठक में कृषि, उद्यान, वन एवं पशुपालन विभाग सहित विभिन्न संबंधित विभागों के स्थानीय कर्मियों की सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि चिन्हित क्षेत्रों के लोगों को कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़कर वैकल्पिक एवं टिकाऊ आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे अवैध खेती के स्थान पर लाभकारी एवं वैध रोजगार से जुड़ सकें। दवा दुकानों की नियमित जांच और कोटपा अधिनियम के तहत लगातार छापेमारी के निर्देश उपायुक्त ने ड्रग इंस्पेक्टर को जिले में संचालित सभी दवा दुकानों की नियमित जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने दवाओं की बिक्री एवं भंडारण से संबंधित नियमों के अनुपालन की जांच करते हुए अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
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इसके अलावा जिले के सभी क्षेत्रों में कोटपा अधिनियम के तहत नियमित जांच एवं छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। सार्वजनिक स्थलों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में तंबाकू उत्पादों से संबंधित नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। खनन कार्यालय ने अब तक ₹18.44 करोड़ से अधिक राजस्व किया संग्रहित, अगस्त में 10 वाहन जब्त जिला माइनिंग टास्क फोर्स की समीक्षा के दौरान जिला खनन कार्यालय द्वारा किए गए राजस्व संग्रहण एवं अवैध खनन के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि जिला खनन कार्यालय द्वारा अब तक ₹18,44,82,520 का राजस्व संग्रहण किया गया है। वहीं अगस्त माह में अब तक अवैध खनिज सामग्री का परिवहन करते हुए 10 वाहनों को जब्त किया गया है तथा कार्रवाई के क्रम में ₹5,70,000 का जुर्माना वसूला गया है। उपायुक्त ने अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध जांच और छापेमारी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। दो बालू घाटों की नीलामी पूर्ण, शेष की प्रक्रिया जारी बैठक में जिले में बालू घाटों की नीलामी की स्थिति की भी समीक्षा की गई। संबंधित पदाधिकारी ने बताया कि जिले में दो बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, जबकि शेष बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया जारी है। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को नियमानुसार शेष प्रक्रिया को आगे बढ़ाने तथा बालू के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी निगरानी रखने का निर्देश दिया। चालू क्रशरों की नियमित जांच के साथ बंद खदानों पर भी कड़ी निगरानी उपायुक्त ने जिले में संचालित सभी पत्थर क्रशरों की नियमित जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि क्रशर संचालन के दौरान निर्धारित नियमों एवं शर्तों का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा किसी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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उन्होंने विशेष रूप से ऐसे खदानों एवं क्रशरों की भी नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया, जिनकी लीज समाप्त हो चुकी है अथवा जो वर्तमान में बंद हैं। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में बंद अथवा लीज समाप्त खदानों से अवैध खनन एवं खनिज सामग्री का परिवहन नहीं होना चाहिए। ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मंझगांव, जगन्नाथपुर और मनोहरपुर सहित संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी उपायुक्त ने जिले के सभी क्षेत्रों में अवैध खनन, अवैध परिवहन एवं खनिजों के अवैध भंडारण के विरुद्ध प्रभावी छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया। विशेष रूप से मंझगांव, जगन्नाथपुर, मनोहरपुर, तांतनगर, आनंदपुर एवं गोईलकेरा सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी एवं जांच अभियान चलाने पर जोर दिया गया। उन्होंने संबंधित अनुमंडल एवं अंचल प्रशासन, पुलिस तथा खनन विभाग को आपसी समन्वय स्थापित कर क्षेत्रवार निगरानी एवं कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी : उपायुक्त उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि जिले में मादक पदार्थों की अवैध खेती एवं कारोबार तथा अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन, पुलिस, खनन, वन, कृषि, उद्यान, पशुपालन, स्वास्थ्य एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को नियमित क्षेत्र भ्रमण करने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने, लगातार निगरानी रखने तथा प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि अवैध खनन एवं मादक पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सरकारी योजनाओं एवं वैकल्पिक आजीविका से जोड़कर सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। बैठक में संबंधित विभागों द्वारा अब तक की गई कार्रवाई एवं प्रगति की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों को अपने-अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन करते हुए जिले में अवैध गतिविधियों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य करने का निर्देश दिया।
गोईलकेरा | आगामी ओत् गुरु कोल लको बोदरा जयंती समारोह–2026 की तैयारियों को लेकर रविवार को कार्यक्रम स्थल लको बोदरा चौक, कायदा में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आदिवासी ‘हो’ समाज महासभा, गोईलकेरा प्रखंड के अध्यक्ष पातोर जोंको ने की। बैठक में गुरु कोल लको बोदरा जयंती समारोह को भव्य एवं सफल बनाने के साथ-साथ गुरु कोल लको बोदरा की प्रतिमा के छत निर्माण कार्य के शुभारंभ को लेकर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि समारोह की तैयारियों को और अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने के लिए 1 सितंबर 2026 को गोईलकेरा ग्राम पंचायत सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में पूर्व में चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम को सौंपे गए ज्ञापन के संबंध में पुनः स्मरण पत्र देने तथा आवश्यक पहल के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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इसी क्रम में जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर जिले के प्रत्येक गांव में ‘हो’ भाषा की ब्हारङ्ग क्षिति लिपि में मौजा की पहचान से संबंधित साइन बोर्ड स्थापित कराने की मांग पर भी चर्चा की गई। प्रस्तावित साइन बोर्ड में संबंधित मौजा का नाम, मौजा के मुंडा का नाम तथा पीड़ एवं इलाका मानकी का नाम अंकित करने का प्रस्ताव रखा गया।
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बैठक में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि यह पहल पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, स्थानीय पहचान तथा ‘हो’ भाषा और ब्हारङ्ग क्षिति लिपि के संरक्षण एवं सार्वजनिक पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
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सदस्यों ने कहा कि गुरु कोल लको बोदरा की जयंती केवल उनके स्मरण का अवसर नहीं है, बल्कि अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति और सामाजिक पहचान के संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लेने का भी अवसर है। समारोह को सफल बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता और सहयोग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
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बैठक में मुख्य रूप से आदिवासी ‘हो’ समाज महासभा, मनोहरपुर प्रखंड अध्यक्ष मनोज चाम्पिया, सचिव नीमा लुगुन, गोईलकेरा प्रखंड कोषाध्यक्ष रमेश सुरिन, मलकेन्द्र अंगरिया, लक्ष्मण पुरती, जमदार चाम्पिया, मरकस हसा, रामचन्द्र कायदा, सोमवारी बाहन्दा (मुखिया), महेंद्र जमुदा, प्रेमसिंह सुरिन, दांसर कुदादा, बामिया सुरिन, सुमेर हेम्ब्रोम, रमेश बोदरा, बलराम सुरिन, बुधलाल सुरिन और अनुकरण चेरोवा सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।