चक्रधरपुर | दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल अंतर्गत वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (रेल पथ) कार्यालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार 29 मई 2026 को बैधमारा एवं गोलमुंडा रेलवे फाटक पर मशीन टैम्पिंग कार्य किया जाएगा। इस दौरान दोनों रेलवे फाटकों पर सड़क यातायात प्रभावित रहेगा।
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रेलवे विभाग की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि एलसी नंबर-179 (बैधमारा गेट-डाउन लाइन) तथा एलसी नंबर-180 (गोलमुंडा गेट-डाउन लाइन) पर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक मशीन टैम्पिंग का कार्य किया जाएगा। कार्य के दौरान दोनों लेवल क्रॉसिंग अस्थायी रूप से बंद रहेंगे, जिससे आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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रेल प्रशासन ने संबंधित थाना प्रभारी, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों को पत्र भेजकर आवश्यक सहयोग एवं सूचना के व्यापक प्रसार का अनुरोध किया है। साथ ही किसी भी अप्रिय स्थिति से बचाव के लिए संबंधित फाटकों पर आवश्यक स्टाफ एवं प्रतिनिधियों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
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रेलवे विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि निर्धारित समय के दौरान वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और यात्रा के दौरान सावधानी बरतें।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी स्थित एसोसिएटेड सीमेंट कंपनी (एसीसी), जो अब अडानी एसीसी के नाम से जानी जाती है, के बंद होने की खबर से पूरे जिले में हलचल मच गई है। हालांकि कंपनी की ओर से अब तक प्लांट बंद किए जाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार 5 मई 2026 से प्लांट में उत्पादन कार्य बंद है।
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जानकारी के मुताबिक, कंपनी द्वारा धीरे-धीरे प्लांट के उपकरण और अन्य सामग्री को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा रहा है। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी ने चाईबासा से अपना संचालन समेटने का निर्णय ले लिया है।
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देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों में शामिल अडानी समूह द्वारा यह कदम क्यों उठाया गया, इसके पीछे की वास्तविक वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। कंपनी से जुड़े अधिकारी या प्रबंधन ही इस पर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
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इधर, प्लांट बंद होने की खबर से झींकपानी क्षेत्र के ग्रामीणों तथा कंपनी में स्थायी और ठेका मजदूर के रूप में कार्यरत लोगों में गहरी निराशा देखी जा रही है। लोगों को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर की चिंता सताने लगी है। क्षेत्र में इस विषय को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
गोइलकेरा | गोइलकेरा बाजार क्षेत्र में पिछले करीब दो महीनों से पाइपलाइन आधारित जलापूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे लगभग 250 घरों के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण जलापूर्ति योजना बदहाल स्थिति में पहुंच गई है और स्थानीय लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गोइलकेरा बाजार क्षेत्र के मेन रोड, बंगाली टोला, बिरसा टोली, टीचर्स कॉलोनी और क्रिस्तान टोली सहित कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए वर्ष 2010 में ग्रामीण जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की इस योजना का संचालन स्थानीय स्तर पर गठित समिति द्वारा किया जाता है। जलापूर्ति के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में डीप बोरिंग और पंप हाउस बनाया गया है, जबकि प्रखंड कार्यालय परिसर में ओवरहेड टैंक स्थापित है। इस योजना पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे।
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हालांकि, करीब डेढ़ दशक से यह योजना लगातार समस्याओं से जूझ रही है। समिति की निष्क्रियता, कुछ उपभोक्ताओं की मनमानी और विभागीय उदासीनता के कारण योजना का संचालन प्रभावित होता रहा है। दो महीने पहले पंप हाउस में लगा 12.5 एचपी मोटर जल जाने के बाद से जलापूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है। गर्मी के मौसम में पानी की आपूर्ति ठप रहने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलापूर्ति योजना शुरू होने के बाद से पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत और सोलर जलमीनारों के रखरखाव पर भी ध्यान देना कम कर दिया है, जिससे वैकल्पिक पेयजल स्रोत भी प्रभावित हुए हैं।
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पाइपलाइन लीकेज और निर्माण त्रुटियां बनी बड़ी समस्या योजना के तहत बाजार क्षेत्र में घरों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन नियमित रखरखाव के अभाव में कई स्थानों पर पाइपलाइन में लीकेज हो गया है। इसके कारण जलापूर्ति बार-बार प्रभावित होती रही है। बताया जा रहा है कि इंदिरा चौक के पास पाइपलाइन में लीकेज के कारण करीब एक वर्ष से मेन रोड और स्टेशन रोड क्षेत्र में पानी की आपूर्ति बाधित थी। इसके अलावा निर्माण कार्य में तकनीकी त्रुटियों की भी शिकायतें सामने आई हैं। पंप हाउस और ओवरहेड टैंक के बीच अधिक दूरी तथा पाइपलाइन बिछाने के दौरान स्थानीय विरोध के कारण बदले गए लेआउट को भी मौजूदा समस्याओं का कारण माना जा रहा है।
उपभोक्ताओं द्वारा शुल्क नहीं जमा करने से बढ़ी परेशानी जलापूर्ति संचालन समिति के पदाधिकारी महेंद्र गंजू ने बताया कि योजना के संचालन और रखरखाव के लिए समिति को स्वयं फंड की व्यवस्था करनी पड़ती है। इसके लिए विभाग द्वारा निर्धारित 100 रुपये प्रतिमाह उपभोक्ता शुल्क लिया जाता है। हालांकि, अधिकांश उपभोक्ता समय पर शुल्क जमा नहीं करते, जिससे मरम्मत और रखरखाव के लिए आवश्यक राशि जुटाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त फंड नहीं होने के कारण मोटर मरम्मत और अन्य तकनीकी समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है, जिसका सीधा असर जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ रहा है।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत सदर अस्पताल चाईबासा में एक 15 वर्षीय बच्ची मोती कंडेयांग, निवासी ग्राम बासाकुटी, प्रखंड खुंटपानी, ने जिंदगी और मौत की जंग जीत ली। जानकारी के अनुसार, 21 तारीख की रात लगभग 12 बजे बच्ची को जहरीले “चिती सांप” (साइलेंट किलर) ने काट लिया था। घटना के बाद परिजन तुरंत बच्ची को सदर अस्पताल चाईबासा लेकर पहुंचे, जहां उसकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई थी।
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अस्पताल में बच्ची को आईसीयू में भर्ती कर डॉक्टरों और नर्सों की निगरानी में इलाज शुरू किया गया। लगातार सात दिनों तक चले उपचार और चिकित्सकों के अथक प्रयास के बाद बच्ची की जान बचाई जा सकी। वर्तमान में बच्ची की हालत स्थिर और स्वस्थ बताई जा रही है।
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परिजनों ने इलाज में सहयोग और सहायता के लिए खुंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा का आभार व्यक्त किया। वहीं प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि सांप काटने जैसी स्थिति में झाड़-फूंक, ओझा-गुनी के चक्कर में न पड़ें और तुरंत जिला अस्पताल पहुंचें। उन्होंने कहा कि समय पर सही इलाज ही जिंदगी बचाने का सबसे बड़ा माध्यम है।
चाईबासा | दिल्ली के लाल किला मैदान में 24 मई को आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के संबोधन पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। पश्चिम सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने बैठक कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। साथ ही सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन करने को लेकर भी चर्चा की गई।
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जिला कांग्रेस अध्यक्ष रंजन बोयपाई ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने अपने पूरे संबोधन के दौरान एक बार भी “आदिवासी” शब्द का प्रयोग नहीं किया और लगातार “वनवासी” शब्द का इस्तेमाल करते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की अपनी अलग संस्कृति, सभ्यता और परंपरा है, जिसे समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।
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जिला कांग्रेस प्रवक्ता त्रिशानु राय ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है, जिसे किसी अन्य शब्द से परिभाषित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि “वनवासी” शब्द आदिवासी अस्मिता और सम्मान को कमजोर करने का प्रयास है।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सन्नी सिंकु ने कहा कि आखिर अमित शाह को आदिवासियों से क्या नाराजगी है, यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि “हम आदिवासी हैं, वनवासी नहीं”, यह बात भाजपा और अमित शाह को समझनी चाहिए।
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बैठक में उपस्थित कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में मांग की कि अमित शाह और भाजपा पूरे आदिवासी समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
मौके पर जम्बी कुदादा, सकारी दोंगो, सुनीता लकड़ा, विजय तिग्गा, राखी सालुजा, अशरफुल होदा, विनीत लागुरी, अमृत माझी, मो. इमरान, राजू कोड़ा, शैली शैलेन्द्र सिंकु, मो. फिरोज अहमद, विकास केराई, मो. जहाँगीर आलम, हरिचरण कुम्हार सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।
चाईबासा | देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथि बुधवार को कांग्रेस भवन, चाईबासा में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नेहरू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर उनके योगदान को याद किया।
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कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू केवल भारत के पहले प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माता भी थे। उन्होंने ऐसे समय में देश का नेतृत्व किया, जब आजादी के बाद भारत कई चुनौतियों से जूझ रहा था और सामाजिक ताना-बाना बिखरा हुआ था।
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उन्होंने कहा कि नेहरू ने देश को एकजुटता के सूत्र में बांधते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य किया। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक, सशक्त और प्रगतिशील भारत के निर्माण तक उनके योगदान को राष्ट्र सदैव कृतज्ञता के साथ स्मरण करता रहेगा। त्रिशानु राय ने कहा कि पंडित नेहरू की दूरदर्शिता, उनके विचार और राष्ट्र के प्रति समर्पित जीवन आज भी सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत के विकास तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस अवसर पर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया।
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कार्यक्रम में कांग्रेस के डॉ. क्रांति प्रकाश, जय किशन सालबुनियां, राजेन्द्र कच्छप, परशुराम पान, संतोष सिन्हा, विनोद खण्डार्डत सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
चक्रधरपुर | शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर माने जाने वाले रानी तालाब के कायाकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। वर्षों से उपेक्षा का सामना कर रहे इस ऐतिहासिक तालाब के सौंदर्यीकरण, पर्यावरण संरक्षण और आधारभूत विकास कार्यों के लिए नगर परिषद चक्रधरपुर द्वारा ₹13 करोड़ 48 लाख से अधिक की योजनाओं का टेंडर जारी किया गया है। इससे शहरवासियों में उत्साह का माहौल है। नगर परिषद द्वारा जारी ई-टेंडर के तहत रानी तालाब से जुड़ी कुल पांच प्रमुख विकास योजनाओं पर कार्य कराया जाएगा। इन योजनाओं का उद्देश्य तालाब के संरक्षण के साथ-साथ शहर की स्वच्छता, जल निकासी व्यवस्था और सौंदर्य को बेहतर बनाना है।
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इन पांच योजनाओं पर होगा कार्य 1. रानी तालाब का सौंदर्यीकरण ‘Beautification of Rani Talab’ योजना के तहत तालाब के चारों ओर सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाएगा। लागत: ₹9,64,97,945 समय सीमा: 638 दिन 2. सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण तालाब में गिरने वाले गंदे पानी की सफाई के लिए STP का निर्माण, संचालन और रखरखाव किया जाएगा। लागत: ₹1,81,84,100 समय सीमा: 270 दिन 3. संजय नदी तक ड्रेनेज चैनल निर्माण (भाग-1) RCC कलवर्ट और ड्रेनेज चैनल का निर्माण 0.0 किमी से 0.130 किमी तक कराया जाएगा। लागत: ₹77,84,366 समय सीमा: 180 दिन 4. ड्रेनेज चैनल विस्तार (भाग-2) ड्रेनेज चैनल का विस्तार 0.130 किमी से 0.332 किमी तक किया जाएगा। लागत: ₹87,11,137 समय सीमा: 180 दिन 5. मिनी हाई मास्ट लाइट की स्थापना नगर परिषद क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर मिनी हाई मास्ट लाइट लगाई जाएगी, जिससे शहर की रोशनी व्यवस्था मजबूत होगी। लागत: ₹35,36,950 समय सीमा: 120 दिन
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टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जा रही है। विभागीय प्रावधानों के अनुसार ई-टेंडर और ईएमडी की प्रक्रिया के जरिए कार्यों का चयन किया जाएगा।
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स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शहरवासियों का मानना है कि रानी तालाब के पुनर्विकास से न केवल इसकी ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि यह क्षेत्र पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी नई पहचान बना सकेगा। वर्षों से लंबित इस परियोजना के आगे बढ़ने से शहर में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है।
गिरिडीह | झारखंड के सुदूरवर्ती इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत मधुबन थाना क्षेत्र के दालुवाडीह गांव में सड़क नहीं होने के कारण गर्भवती महिला को खटिया एंबुलेंस के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ा। इस घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ गई है।
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प्रसव पीड़ा के बीच खटिया बनी एंबुलेंस जानकारी के अनुसार, दालुवाडीह निवासी गर्भवती सुनीता सोरेन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर एंबुलेंस बुलाने का प्रयास किया, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने का हवाला देते हुए एंबुलेंस गांव आने में असमर्थता जताई गई। महिला दर्द से तड़प रही थी, ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों ने मजबूरी में सुनीता सोरेन को खटिया पर लिटाया और उबड़-खाबड़ रास्तों से करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां किसी तरह वाहन की व्यवस्था कर उन्हें अस्पताल भेजा गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव तक सड़क बनी होती तो एंबुलेंस सीधे घर पहुंच सकती थी और महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाती। उन्होंने बताया कि पिपराडीह तक सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके आगे आज तक सड़क निर्माण नहीं हो पाया है।
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सड़क नहीं होने से कई गांव प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की कमी से कुरुवारांड, दालुवाडीह, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा समेत कई गांव प्रभावित हैं। बारिश के मौसम में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों में आक्रोश, जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। ग्रामीण बुधन सोरेन, सुशील मुर्मू, सानो मरांडी, गोपाल मुर्मू, सोमरा मुर्मू, पतिराम मरांडी और बाबूलाल हांसदा समेत कई लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान विधायक, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देते। उनका आरोप है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई मरीजों को खटिया पर ढोकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा है, लेकिन अब तक सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई।
‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ की चेतावनी सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार की चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं कराया गया, तो वे चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने एक स्वर में नारा दिया— “रोड नहीं तो वोट नहीं।” खटिया एंबुलेंस के सहारे गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने की यह तस्वीर अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
पोटका | आजादी के 78 वर्षों और झारखंड राज्य गठन के 26 वर्षों बाद पहली बार पोटका विधानसभा के विधायक संजीव सरदार ने सुदूरवर्ती मिठाईझरना गांव में पूरे प्रशासनिक महकमे के साथ बैठक आयोजित कर ग्रामीणों की समस्याओं को नजदीक से सुन कर और उनके समाधान की दिशा में ठोस पहल की गई।
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घने जंगलों के बीच आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में पेयजल विभाग, आवास विभाग, बिजली विभाग, खाद्य आपूर्ति विभाग तथा वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान ग्रामीणों ने वर्षों से लंबित अपनी समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। अधिकारियों ने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। बैठक के दौरान राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी “मुख्यमंत्री उज्ज्वल बिजली योजना” के तहत पहली बार इस क्षेत्र में बिजली पहुंचाने के लिए आधारशिला रखी गई। इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि बिजली पहुंचने से शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिलेगी।
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अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि एक महीने के भीतर गांव के सभी ग्रामीणों का आधार कार्ड पंजीकरण, जाति एवं आवासीय प्रमाण पत्र, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, वन पट्टा वितरण, राशन कार्ड सहित पेयजल और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
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बैठक में यह भी दोहराया गया कि पोटका विधानसभा क्षेत्र का कोई भी गांव विकास की मुख्यधारा से अछूता नहीं रहेगा और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
सोनुवा | गुदड़ी प्रखंड के लिगिर गांव में मंगलवार को मानकी मनोहर बरजो एवं झारखंड आंदोलनकारी नरेश बरजो के दुलसुनुम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सिंहभूम की सांसद जोबा माझी और मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक जगत माझी शामिल हुए। इस दौरान दोनों जनप्रतिनिधियों ने विधि-विधान के साथ दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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कार्यक्रम के दौरान सांसद और विधायक ने ग्रामीणों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना। ग्रामीणों ने वनाधिकार पट्टा वितरण में हो रही परेशानियों से अवगत कराते हुए शीघ्र समाधान की मांग की। इसके अलावा क्षेत्र की अन्य मूलभूत समस्याओं को भी जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखा गया। सांसद और विधायक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि क्षेत्र की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा।
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सांसद जोबा माझी ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले यहां एक पत्ता तोड़ना भी अपराध माना जाता था, लेकिन आज वन ग्रामों में रहने वाले लोगों को वन पट्टा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सड़क, पुल और पुलिया निर्माण जैसे विकास कार्य भी तेजी से किए जा रहे हैं। मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या पर उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और टेलीकॉम कंपनियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है और जल्द ही इसका समाधान होगा।
सांसद ने कहा कि देवेंद्र माझी, नरेश बरजो और मनोहर बरजो के सपनों को साकार करने के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा।
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विधायक जगत माझी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि सारंडा-पोड़ाहाट क्षेत्र के लोग उनके परिवार की तरह हैं और क्षेत्र का विकास उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में वर्तमान समय में विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। हालांकि वन विभाग की प्रक्रियाओं और अड़चनों के कारण कई विकास योजनाओं में विलंब होता है।
उन्होंने कहा कि शहीद देवेंद्र माझी ने क्षेत्र के लोगों को हक-अधिकार दिलाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया और लोगों को एकजुट किया। विधायक ने कहा कि यदि वनाधिकार पट्टा वितरण में देरी हो रही है तो लोगों को फिर से एकजुटता दिखाने की आवश्यकता है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे एक तिथि निर्धारित करें, ताकि उपायुक्त सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को गांव लाकर समस्याओं का समाधान किया जा सके।
इससे पूर्व ग्रामीणों ने सांसद और विधायक का पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ स्वागत किया। कार्यक्रम में मानकी बिरसा बरजो, गुदड़ी झामुमो प्रखंड अध्यक्ष सुनील बुढ़, रोलेन बरजो, फ्रांसिस जेवियर केसरा, गोसनर बरजो, रंजीत सुरीन, प्रेमचंद लोमगा, जॉन बरजो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।