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चाईबासा: ड्रिप सिंचाई और स्ट्रॉबेरी खेती से संजुक्ता दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

चाईबासा: ड्रिप सिंचाई और स्ट्रॉबेरी खेती से संजुक्ता दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

चाईबासा | “जहाँ चाह, वहाँ राह” कहावत को साकार करते हुए चाईबासा की संजुक्ता दीदी ने मेहनत, लगन और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से सफलता की नई मिसाल कायम की है। Jharkhand State Livelihood Promotion Society (JSLPS) और कृषि विभाग के सहयोग से उन्होंने ड्रिप सिंचाई आधारित स्ट्रॉबेरी खेती अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
संजुक्ता दीदी प्रगति महिला समिति स्वयं सहायता समूह (SHG) की सक्रिय सदस्य हैं। पहले उनका परिवार पारंपरिक खेती पर निर्भर था, जिससे सीमित आय ही हो पाती थी। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कुछ नया करने का संकल्प लिया और आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया। इस सफर में उनके पति अभिमन्यु महतो ने भी हर कदम पर उनका सहयोग किया।

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वर्ष 2018 में JSLPS से जुड़ने के बाद संजुक्ता दीदी को आधुनिक खेती, ड्रिप सिंचाई तकनीक, फसल प्रबंधन और उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। नियमित मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता से प्रेरित होकर उन्होंने ड्रिप सिंचाई आधारित खेती के साथ स्ट्रॉबेरी उत्पादन की शुरुआत की।

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शुरुआती दौर उनके लिए आसान नहीं था। आधुनिक तकनीकों की सीमित जानकारी, सिंचाई प्रबंधन, आर्थिक संसाधनों की कमी और उत्पादों के विपणन जैसी कई चुनौतियाँ सामने थीं। हालांकि, निरंतर मेहनत, प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से उन्होंने इन चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।
आज उनकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ड्रिप सिंचाई तकनीक के उपयोग से पानी की बचत के साथ कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव हुआ है। स्ट्रॉबेरी जैसी उन्नत फसल से उन्हें अतिरिक्त लाभ मिला और अब वे वर्ष में तीन अलग-अलग फसलें सफलतापूर्वक उगा रही हैं। खेती के विस्तार के लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह से लगभग एक लाख रुपये का ऋण लेकर कृषि कार्य को और आगे बढ़ाया।

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आधुनिक खेती और पशुपालन के समन्वय से संजुक्ता दीदी ने अपने परिवार के लिए स्थायी आजीविका का निर्माण किया है। वर्ष 2024-25 में उन्होंने खेती और पशुपालन से दो लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की। कृषि के साथ उन्होंने डेयरी गतिविधियों को भी अपनाया है और वर्तमान में उनके पास लगभग 15 गायें हैं, जिनसे उन्हें नियमित अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
आज संजुक्ता दीदी अपने क्षेत्र में एक सफल महिला कृषक के रूप में पहचान बना चुकी हैं। उनकी सफलता ने गाँव और आसपास की महिलाओं को आधुनिक खेती, ड्रिप सिंचाई और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
संजुक्ता दीदी की कहानी यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और आत्मविश्वास के बल पर ग्रामीण महिलाएँ भी आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।

अर्जुन मुंडा के समर्थन में उतरी भाजपा, चाईबासा प्रशासन के रवैये पर उठाए सवाल

अर्जुन मुंडा के समर्थन में उतरी भाजपा, चाईबासा प्रशासन के रवैये पर उठाए सवाल

रांची | पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा चाईबासा में प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप लेता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अर्जुन मुंडा की नाराजगी सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी उनके समर्थन में उतर आई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे समेत कई नेताओं ने राज्य सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं।

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लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन: आदित्य साहू
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनजातीय समाज के सम्मानित नेता अर्जुन मुंडा के साथ चाईबासा परिसदन में जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह केवल एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं, प्रशासनिक मर्यादाओं और जनजातीय समाज के सम्मान का भी विषय है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन से जोड़ते हुए चिंता जताई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अधिकारियों को दें नसीहत: बाबूलाल मरांडी

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नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और लोकतंत्र की मर्यादाओं तथा सामाजिक सम्मान को कमजोर नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान केवल सरकारों से नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, आदिवासी परंपराओं, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक व्यवहार से बनती है।
मरांडी ने कहा कि यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ सार्वजनिक व्यक्तित्वों और समाज की भावनाओं के प्रति संवेदनहीन हो जाए, तो यह केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे लोकतांत्रिक संस्कार का अपमान बन जाता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह समझाया जाना चाहिए कि कुर्सी का अहंकार क्षणिक होता है, जबकि सम्मान और व्यवहार की छाप लंबे समय तक बनी रहती है।
2019 से यह सब झेल रहा हूं: निशिकांत दुबे
गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति गलत है, लेकिन वे स्वयं वर्ष 2019 से ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। दुबे ने दावा किया कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ 52 मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक संघर्ष से ही ऐसी प्रवृत्तियों का मुकाबला किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?

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दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट कर चाईबासा में प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने लिखा था कि वर्तमान में वे न विधायक हैं, न सांसद और न ही मंत्री, लेकिन पूर्व में झारखंड के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इसके बावजूद उनके चाईबासा प्रवास के दौरान प्रशासन द्वारा शिष्टाचार और सामान्य सौजन्यता जैसी आवश्यक औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया।
अर्जुन मुंडा ने इसे प्रशासनिक अनुभव की कमी, प्रशासनिक अकड़ अथवा सरकार की लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उदासीनता से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले की परंपरा के अनुसार जिले में आने वाले वरिष्ठ सार्वजनिक नेताओं से प्रशासन विकास, जनसरोकार और स्थानीय गतिविधियों पर चर्चा करता था, जिससे प्रशासनिक कार्यसंस्कृति और जिले की गरिमा मजबूत होती थी। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम सिंहभूम एक ऐतिहासिक और जनजातीय बहुल जिला है, ऐसे में इस तरह का व्यवहार चिंता का विषय है।

चक्रधरपुर में P-4 तसर प्रजनन केंद्र का निरीक्षण, एसडीओ ने किसानों तक लाभ पहुंचाने पर दिया जोर

चक्रधरपुर में P-4 तसर प्रजनन केंद्र का निरीक्षण, एसडीओ ने किसानों तक लाभ पहुंचाने पर दिया जोर

चक्रधरपुर | अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) पोड़ाहाट, चक्रधरपुर ने शुक्रवार को DMFT PMU टीम के साथ केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा संचालित P-4 तसर प्रजनन केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र की कार्यप्रणाली, तसर उत्पादन प्रक्रिया तथा किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई।

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निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि यह केंद्र बंदगांव क्षेत्र के लगभग 300 रेशम किसानों से जुड़ा हुआ है। किसानों से कोकून क्रय कर उन्हें केंद्र में वैज्ञानिक एवं स्वच्छ वातावरण में विश्राम अवस्था (रेस्टिंग स्टेज) में सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद मॉथ द्वारा अंडे दिए जाने पर अनुसंधान एवं परीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर रोगमुक्त अंडा समूह (DFL) तैयार किया जाता है, जिसे किसानों को तसर कीट पालन के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

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अधिकारियों को यह भी जानकारी दी गई कि केंद्र में वर्ष में दो बार प्रजनन सत्र (ब्रीडिंग सीजन) आयोजित किए जाते हैं। वर्तमान में विश्राम अवस्था की प्रक्रिया जारी है, जिसके मध्य जून तक पूर्ण होने की संभावना है। इसके उपरांत कीट एवं रोग जांच सहित अन्य आवश्यक परीक्षण पूरे कर पंजीकृत किसानों के बीच DFL का वितरण किया जाएगा।
निरीक्षण के क्रम में बताया गया कि उद्योग विभाग के सहयोग से सिल्क किसानों, रेशम दूतों तथा अन्य हितधारकों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। संस्थान का मुख्य उद्देश्य तसर बीजों की आनुवंशिक शुद्धता बनाए रखना और किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं रोगमुक्त अंडे उपलब्ध कराना है।

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निरीक्षण के अंत में एसडीओ ने केंद्र प्रबंधन को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक किसानों को इस पहल से जोड़ा जाए तथा व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि क्षेत्र के सभी रेशम उत्पादक किसानों को इसका लाभ मिल सके और तसर उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।

पश्चिम सिंहभूम के सामुदायिक पुस्तकालय प्रतिनिधियों ने उपायुक्त से की मुलाकात, शिक्षा व सामाजिक जागरूकता पर हुई चर्चा

पश्चिम सिंहभूम के सामुदायिक पुस्तकालय प्रतिनिधियों ने उपायुक्त से की मुलाकात, शिक्षा व सामाजिक जागरूकता पर हुई चर्चा

चाईबासा | पश्चिम सिंहभूम जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित लगभग 24 निशुल्क सामुदायिक ग्रामीण एवं मोहल्ला पुस्तकालयों के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को जिला उपायुक्त से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उपायुक्त ने पुस्तकालयों के संचालन, उनकी गतिविधियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार को लेकर विस्तृत चर्चा की।

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उपायुक्त ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तकालय समाज को जागरूक और शिक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पुस्तकालयों के बेहतर संचालन हेतु आवश्यक सहयोग और मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।

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मौके पर उपायुक्त ने संचालन समितियों से पुस्तकालय परिसरों में वृक्षारोपण करने, बच्चों के लिए करियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित करने तथा समय-समय पर बुक फेयर आयोजित करने का आग्रह किया। उन्होंने स्थानीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री और पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
इसके अलावा उन्होंने प्रत्येक माह की 20 तारीख को पुस्तकालय से जुड़े बच्चों का सामूहिक जन्मोत्सव मनाने की पहल करने की बात कही। साथ ही जिले में आयोजित रक्तदान शिविरों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया।
उपायुक्त ने कहा कि “एक बेहतर पुस्तकालय, एक बेहतर समाज की नींव है।”

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आपातकालीन स्थिति में पुलिस, अग्निशमन एवं चिकित्सा सेवाओं के लिए 112 डायल करें।
टीम पीआरडी, पश्चिम सिंहभूम, चाईबासा

चाईबासा में बाल-संवेदनशील पुलिसिंग पर कार्यशाला आयोजित, CWPO को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

चाईबासा में बाल-संवेदनशील पुलिसिंग पर कार्यशाला आयोजित, CWPO को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

चाईबासा | पश्चिम सिंहभूम पुलिस विभाग द्वारा यूनिसेफ एवं सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (CCR), NUSRL के तकनीकी सहयोग से पुलिस लाइन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में “बाल-संवेदनशील पुलिसिंग: मामले का दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाएं” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष किशोर पुलिस इकाइयों (SJPU) को सशक्त बनाना तथा बाल संरक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाना था।

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कार्यशाला में रांची जिले के विभिन्न थानों से आए 39 बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों (CWPO) ने भाग लिया। इस दौरान पश्चिम सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) एवं पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत मामलों के उचित दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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पुलिस लाइन के मेजर मंसूर गोप ने बताया कि यूनिसेफ और CCR, NUSRL के सहयोग से सभी बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों के लिए सात चरणों में संवेदनशीलता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का पांचवां चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत CCR, NUSRL के अनिरुद्ध सरकार के स्वागत भाषण एवं प्रशिक्षण-पूर्व मूल्यांकन सत्र के साथ हुई। तकनीकी सत्र में यूनिसेफ से जुड़े बाल संरक्षण अधिकारी गौरव कुमार ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 और झारखंड किशोर न्याय नियम 2017 के अंतर्गत बाल-संवेदनशील पुलिसिंग के सिद्धांतों पर विस्तार से जानकारी दी।

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उन्होंने गरिमा, गोपनीयता, भेदभाव-रहित दृष्टिकोण और बाल हित सर्वोपरि रखने जैसे विषयों के साथ-साथ बाल भिक्षावृत्ति, मादक पदार्थों की तस्करी और बाल अपराध से जुड़े मामलों की पहचान एवं कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी चर्चा की।
कार्यशाला के दौरान बाल विवाह, लैंगिक शोषण तथा विधि से संघर्षरत बच्चों (CCL) से संबंधित मामलों पर केस स्टडी आधारित अभ्यास कराया गया। वहीं, बाल कल्याण समिति के सदस्य मोहम्मद समीम ने प्रतिभागियों की क्षमता आकलन और भविष्य की रणनीतियों पर समूह चर्चा का संचालन किया। कार्यक्रम में पालक देखभाल (Foster Care) एवं आफ्टर केयर योजनाओं की भी जानकारी साझा की गई।
इसके अतिरिक्त, पीसीआई इंडिया के सलाहकार हिमांशु जेना ने बाल विवाह उन्मूलन सहित विभिन्न बाल संरक्षण मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

चाईबासा सदर अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा नेता ने उठाए सवाल

चाईबासा सदर अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा नेता ने उठाए सवाल

चाईबासा | भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने चाईबासा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले का एकमात्र सदर अस्पताल खुद बदहाल स्थिति में है, जिसके कारण मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

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पवन शंकर पांडे ने कहा कि अस्पताल में बड़े-बड़े भवन तो बना दिए गए हैं, लेकिन चिकित्सकों की भारी कमी बनी हुई है। कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद अब भी रिक्त हैं, जिससे मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में जनरेटर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बिजली कटौती के दौरान मरीजों को भीषण गर्मी झेलनी पड़ती है। बिजली चले जाने पर वार्डों में पंखे बंद हो जाते हैं और कई बार ऑपरेशन तक टॉर्च की रोशनी में करने की नौबत आ जाती है।

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उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन समेत कई आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। इसके कारण मरीजों को जांच और इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। पांडे ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम एक आदिवासी बहुल एवं पिछड़ा जिला है, जहां अधिकांश लोगों के पास निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।

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भाजपा नेता ने ब्लड बैंक की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से मरीजों को रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार अब तक ब्लड बैंक को लाइसेंस नहीं मिलने के कारण लोगों को रक्त के लिए जमशेदपुर जाना पड़ता है, जिससे मरीजों एवं उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग चाईबासा सदर अस्पताल की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। विभिन्न प्रखंडों एवं अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को सदर अस्पताल रेफर किया जाता है, लेकिन वहां से भी कई मरीजों को एमजीएम अस्पताल भेज दिया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अंत में पवन शंकर पांडे ने राज्य सरकार से मांग की कि चाईबासा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द सुदृढ़ किया जाए, ताकि जिले के लोगों को इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।

चक्रधरपुर-सोनुआ मुख्य मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, तीन युवकों की मौत

चक्रधरपुर-सोनुआ मुख्य मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, तीन युवकों की मौत

चक्रधरपुर | चक्रधरपुर-सोनुआ मुख्य मार्ग पर कॉन्सेप्ट पब्लिक स्कूल के समीप शुक्रवार को हुए भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार तीन युवकों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, तेज रफ्तार बाइक और एक बस के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई, जिससे बाइक सवार तीनों युवकों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

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हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने तत्काल घटना की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

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पुलिस के अनुसार, दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। वहीं, मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। हादसे के बाद कुछ समय तक सड़क पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य करा दिया गया।

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जिला उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

जिला उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

चक्रधरपुर | जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत लाभुकों को उपलब्ध कराए जा रहे टूलकिट वितरण की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के अंतर्गत संचालित गतिविधियों एवं लाभुकों की वर्तमान स्थिति की भी विस्तार से जानकारी ली गई।

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बैठक के दौरान उपायुक्त ने DRP पोर्टल पर लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया। वहीं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत लंबित ऋण मामलों के निष्पादन में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया गया।

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समीक्षा बैठक में चिरोंजी उत्पादन इकाई की स्थापना से संबंधित कार्यों की प्रगति पर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने इलेक्ट्रिक चाक एवं पेडल मशीन प्राप्त लाभुकों की स्थिति की जानकारी लेते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं लाभुकों तक योजनाओं का समुचित लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

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उपायुक्त ने जिले के प्रत्येक प्रखंड में स्थानीय उत्पादों की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य करने को कहा। इसके अलावा कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) गतिविधियों के तहत जेल में बंद कैदियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना पर भी चर्चा की गई, ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया जा सके।
बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी चक्रधरपुर, जिला उद्योग पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

सोनुवा के देवां गांव में बिरसाईत समाज का 38वां धर्म दिवस शुरू, सांसद जोबा माझी ने किया बिरसा आबा की प्रतिमा का अनावरण

सोनुवा के देवां गांव में बिरसाईत समाज का 38वां धर्म दिवस शुरू, सांसद जोबा माझी ने किया बिरसा आबा की प्रतिमा का अनावरण

सोनुवा | गुदड़ी प्रखंड के सुदूरवर्ती देवां गांव में बिरसाईत समाज का तीन दिवसीय 38वां धर्म दिवस शुक्रवार को सामूहिक प्रार्थना के साथ शुरू हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंहभूम सांसद जोबा माझी शामिल हुईं। इस अवसर पर सांसद के हाथों भगवान बिरसा मुंडा के तीसरे अवतार माने जाने वाले बिरसा आबा (रान्दो बरजो) की प्रतिमा का अनावरण किया गया।

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कार्यक्रम में बताया गया कि बिरसा आबा ने क्षेत्र में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव को बढ़ावा देने का कार्य किया था। बिरसाईत समाज के लोग भगवान बिरसा मुंडा और बिरसा आबा द्वारा बताए गए सादगीपूर्ण जीवन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक एकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेते हैं।
इस मौके पर धर्म संचालक बिरसा मुंडा एवं धर्म दादा रामाय मुंडा ने बिरसा आबा के जीवन और उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही बिरसाईत समाज एवं क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं की ओर सांसद का ध्यान आकर्षित करते हुए उनके समाधान की मांग की गई।

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समारोह को संबोधित करते हुए सांसद जोबा माझी ने कहा कि बिरसाईत समाज अहिंसा, प्रेम और सद्भाव का संदेश देता है। यह समाज नशापान और अंधविश्वास से दूर रहकर प्रकृति पूजा एवं नैतिक जीवन जीने की सीख देता है। उन्होंने बिरसाईत समाज की समस्याओं के शीघ्र समाधान तथा क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने का आश्वासन दिया। साथ ही समाज के लोगों से एकजुट होकर समाज की बेहतरी के लिए कार्य करने की अपील की।

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तीन दिवसीय धर्म दिवस कार्यक्रम में गुदड़ी प्रखंड के विभिन्न गांवों के अलावा बंदगांव एवं खूंटी जिले से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

कार्यक्रम में धर्म दादा सुखराम मुंडा, राजेंद्र मुंडा, धर्म संचालक बिरसा मुंडा, गुदड़ी थाना प्रभारी सुदर्शन मिंज, धर्म दादा चिलगी मुंडाइन, मंगरा मुंडा, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष सुनील बुढ़, आकाश भेंगरा, विश्वनाथ पान, दिनेश मुंडा, रंदाय लांग, बुधु मुंडा, कैरी मुंडाइन, सोमवारी मुंडाइन, मंगरा आबा समेत बड़ी संख्या में बिरसाईत समाज के लोग उपस्थित थे।

कोल्हान विश्वविद्यालय में NSS की दो दिवसीय बैठक संपन्न, युवा सहभागिता और समाज सेवा को मजबूत बनाने पर जोर

कोल्हान विश्वविद्यालय में NSS की दो दिवसीय बैठक संपन्न, युवा सहभागिता और समाज सेवा को मजबूत बनाने पर जोर

चाईबासा | कोल्हान विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) से संबंधित दो दिवसीय बैठकों का सफलतापूर्वक समापन हुआ। पहले दिन कार्यक्रम पदाधिकारियों की वार्षिक बैठक तथा दूसरे दिन 6वीं NSS सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। दोनों बैठकों में NSS गतिविधियों को सशक्त बनाने, युवाओं की सहभागिता बढ़ाने तथा समाज सेवा से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
पहले दिन आयोजित वार्षिक बैठक में NSS क्षेत्रीय निदेशक, पटना विनय कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों से लगभग 40 कार्यक्रम पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता एवं कुलसचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण उपस्थित रहे।

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स्वागत भाषण में कुलसचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए NSS गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम पदाधिकारी अपने-अपने महाविद्यालयों में NSS गतिविधियों को और अधिक सक्रियता के साथ संचालित करें।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने कहा कि NSS के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक कार्य एवं सामाजिक जिम्मेदारियों को समाज से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कार्यक्रम पदाधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक NSS इकाई एक गांव को गोद लेकर वहां निरंतर विकास एवं जागरूकता संबंधी कार्य करे। उन्होंने NSS के मूलमंत्र “Not Me But You” को आत्मसात करने का आह्वान भी किया। कुलपति ने आयोजन के सफल संचालन के लिए कार्यक्रम संयोजक सह NSS समन्वयक डॉ. मीनाक्षी मुंडा की सराहना की।

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वहीं, NSS क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार ने अपने प्रस्तुतीकरण में झारखंड के NSS विंग को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय को वार्षिक बैठक आयोजित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि राज्य में विभिन्न चुनौतियों के बावजूद NSS युवाओं को समाज सेवा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
बैठक में Treasury Single Account (TSA) मोड के कार्यान्वयन, स्वयंसेवकों के आंकड़ों, वार्षिक कार्ययोजना, विशेष शिविरों तथा कार्यक्रम पदाधिकारियों के प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
दूसरे दिन आयोजित 6वीं NSS सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता डॉ. संजय कुमार सिंह ने की। बैठक में कोल्हान प्रमंडल के आयुक्त रवि रंजन कुमार विक्रम के सचिव अजय कुमार, NSS क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार, विश्वविद्यालय एवं विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य तथा समिति सदस्य उपस्थित रहे।

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बैठक में NSS की गतिविधियों, युवा सहभागिता, सामाजिक जागरूकता अभियान, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास एवं विशेष शिविरों से संबंधित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। साथ ही आगामी सत्र की कार्ययोजना एवं NSS को अधिक समाजोन्मुख बनाने के लिए विभिन्न सुझावों पर चर्चा हुई।
इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं गैर-सरकारी संस्थाओं जैसे आदिवासी मित्र मंडल, PRADAN, ग्रामीण बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण तथा प्लान इंटरनेशनल से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम संयोजक सह NSS समन्वयक डॉ. मीनाक्षी मुंडा ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों एवं सदस्यों का स्वागत करते हुए युवाओं को समाज सेवा से जोड़ने में NSS की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे पीजी भूविज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. जया जैक्लिन तिर्की ने प्रस्तुत किया।