चाईबासा/सोनुवा | किसी भी सरकारी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाती है, जब उसका लाभ किसी व्यक्ति के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाए। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुवा प्रखंड अंतर्गत बांसकाटा गांव निवासी युधिष्ठिर भुमिज ने मत्स्य विभाग की ब्लू रिवोल्यूशन योजना के तहत केज कल्चर तकनीक अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र में आधुनिक और वैज्ञानिक मत्स्य पालन के लिए प्रेरक उदाहरण बन गई है।

युधिष्ठिर भुमिज का परिवार पहले मजदूरी और पारंपरिक तरीके से मछली पकड़कर आजीविका चलाता था। सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान जलाशय समिति के माध्यम से उन्हें मत्स्य विभाग की केज कल्चर योजना की जानकारी मिली। उन्होंने इस योजना को अपने जीवन में बदलाव के अवसर के रूप में अपनाया।

मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युधिष्ठिर भुमिज ने जलाशय में वैज्ञानिक पद्धति से केज स्थापित कर मछली पालन शुरू किया। विभाग की ओर से अनुदान, तकनीकी सहयोग और निरंतर मार्गदर्शन मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीकों को अपनाते हुए पंगास और तिलापिया जैसी व्यावसायिक प्रजातियों का उत्पादन शुरू किया।

वर्तमान में युधिष्ठिर भुमिज प्रतिवर्ष लगभग छह टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उन्हें सालाना चार से पांच लाख रुपये तक की आय हो रही है। इस उपलब्धि से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब वे बच्चों की शिक्षा, परिवार की आवश्यकताओं और भविष्य की योजनाओं को अधिक आत्मविश्वास के साथ पूरा कर पा रहे हैं।

उनकी सफलता से आसपास के ग्रामीण और युवा भी आधुनिक मत्स्य पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। युधिष्ठिर भुमिज आज केवल एक सफल मत्स्य पालक ही नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता के प्रेरक उदाहरण बन चुके हैं। उन्होंने साबित किया है कि आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और मेहनत के समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।
युधिष्ठिर भुमिज ने बताया कि मत्स्य विभाग की योजना और अधिकारियों के मार्गदर्शन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है। उन्होंने कहा, “पहले भविष्य को लेकर चिंता रहती थी, लेकिन आज मैं आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार के बेहतर जीवन की व्यवस्था कर पा रहा हूं। मैं चाहता हूं कि जिले के अन्य युवा भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनें और आधुनिक मत्स्य पालन को अपनाएं।”

जिला मत्स्य पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि मत्स्य विभाग आधुनिक एवं वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि केज कल्चर तकनीक कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक आय का प्रभावी माध्यम है। विभाग द्वारा लाभुकों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने युधिष्ठिर भुमिज की सफलता को योजना की प्रभावशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे और वे आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कहा कि युधिष्ठिर भुमिज की उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही योजना, तकनीकी सहयोग और लाभुक की मेहनत मिलकर ग्रामीण विकास की नई तस्वीर तैयार कर सकते हैं।

जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग का मानना है कि ऐसे सफल लाभुकों की कहानियां जिले के अन्य ग्रामीणों और युवाओं को नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी। पश्चिमी सिंहभूम में आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों के विस्तार के माध्यम से ग्रामीणों की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

