चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिले के निजी विद्यालयों के प्राचार्यों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार सहित विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्य एवं संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में आरटीई अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर नामांकन की अद्यतन स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि आरटीई के सभी प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए और पात्र बच्चों के नामांकन में किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो।

उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि आरटीई के तहत नामांकित बच्चों सहित विद्यालय में अध्ययनरत किसी भी छात्र-छात्रा के साथ भेदभाव, असमान व्यवहार अथवा उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी बच्चों को समान अवसर, सम्मान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्रत्येक विद्यालय की जिम्मेदारी है।

विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के सभी निजी विद्यालयों में वाहन सुरक्षा एवं अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से सभी सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं संरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

उपायुक्त ने प्राचार्यों से अपील की कि वे केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता विकसित करने में भी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने विद्यालयों में नियमित रूप से सड़क सुरक्षा, मलेरिया एवं डायरिया से बचाव, तंबाकू निषेध, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली जैसे विषयों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों की तर्ज पर निजी विद्यालयों में भी “प्रोजेक्ट परख” के अंतर्गत “बोलेगा सिंहभूम” और “आज क्या सीखे” कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाए। इन कार्यक्रमों से विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता, तार्किक सोच, संवाद कौशल और आत्मविश्वास का विकास होगा।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से उपायुक्त ने प्रत्येक निजी विद्यालय में हर माह “खेल महोत्सव” आयोजित करने का निर्देश दिया। साथ ही, प्रत्येक माह की 20 तारीख को विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों का सामूहिक “जन्मोत्सव” आयोजित कर उन्हें सम्मानित करने तथा सकारात्मक विद्यालयी वातावरण विकसित करने पर बल दिया।

सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत उपायुक्त ने निजी विद्यालय प्रबंधन से “निक्षय मित्र” बनकर जिले के टीबी मरीजों को गोद लेने और उनके पोषण एवं उपचार में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज के सक्षम संस्थानों की भागीदारी से ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त किया जा सकेगा।
बैठक में पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने सभी विद्यालयों को विद्यालय परिसर एवं उपलब्ध खाली स्थानों पर व्यापक पौधरोपण अभियान चलाने और लगाए गए पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार और जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार ने भी आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित उपस्थिति, सुरक्षा मानकों के अनुपालन तथा जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न नवाचार कार्यक्रमों में निजी विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।
बैठक के अंत में उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच समन्वय स्थापित कर शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सुरक्षा, सामाजिक संवेदनशीलता और समग्र व्यक्तित्व विकास को नई दिशा देना है। उन्होंने सभी विद्यालय प्रबंधन से प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए निर्देशों का गंभीरतापूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की।

