चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा देने और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित सरकारी योजनाओं का असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। सदर चाईबासा प्रखंड के नरसन्डा पंचायत अंतर्गत बाईहातु गांव की महिला कृषक रोयबारी पूर्ति ने सीमित संसाधनों के बावजूद तकनीकी मार्गदर्शन और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अपनी मजबूत आजीविका का साधन बनाया है।

रोयबारी पूर्ति के पास करीब 1.4 एकड़ भूमि है। पहले पारंपरिक तरीके से खेती करने और सीमित संसाधनों के कारण उन्हें अपेक्षाकृत कम उत्पादन मिलता था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें खेती के साथ मजदूरी पर भी निर्भर रहना पड़ता था। कृषि विभाग से प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग मिलने के बाद उन्होंने खेती के तरीके में बदलाव किया।

तकनीकी मार्गदर्शन से बढ़ा उत्पादन
कृषि विशेषज्ञों और विभागीय कर्मियों के मार्गदर्शन में रोयबारी ने उन्नत कृषि तकनीक और बेहतर उत्पादन पद्धतियों को अपनाया। खेत में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने से उत्पादन में वृद्धि हुई। अब वह अपनी उपज को स्थानीय हाट-बाजारों में बेचकर सीधे आमदनी अर्जित कर रही हैं।

रोयबारी के मुताबिक, कृषि विभाग से मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन ने उन्हें खेती को केवल पारंपरिक काम के बजाय आय का स्थायी और लाभकारी माध्यम बनाने का रास्ता दिखाया। खेती को व्यवस्थित तरीके से करने से परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है।
आसपास के किसानों के लिए बनीं प्रेरणा
रोयबारी पूर्ति की सफलता अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। वह अन्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और स्थानीय बाजारों में अपनी उपज बेचने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
उनका कहना है कि सीमित जमीन और संसाधनों के बावजूद यदि सही तकनीक, मेहनत और उचित मार्गदर्शन मिले तो खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

उपायुक्त ने बताया प्रेरणादायी उदाहरण
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने रोयबारी पूर्ति की सफलता को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान जिले में किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं, तकनीकी प्रशिक्षण और विभागीय सहयोग के माध्यम से किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। रोयबारी जैसी सफलता की कहानियां यह साबित करती हैं कि उचित मार्गदर्शन, मेहनत और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
उपायुक्त ने कहा कि ऐसी सफल कृषक कहानियों को अन्य किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपनी आय और आजीविका को मजबूत कर सकें।

“अब खेती से परिवार की स्थिति बेहतर हो रही है”
रोयबारी पूर्ति ने बताया कि पहले खेती से होने वाली आमदनी सीमित थी। कृषि विभाग से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने खेती के तरीके में बदलाव किया। अब खेत से बेहतर उत्पादन मिल रहा है और स्थानीय हाट-बाजार में उपज बेचने से पहले की तुलना में अधिक आमदनी हो रही है।
उन्होंने कहा कि सही तरीके से खेती करने पर इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने अन्य किसानों से भी सरकारी योजनाओं और कृषि विभाग की तकनीकी सहायता का लाभ उठाने की अपील की।
रोयबारी पूर्ति की कहानी महिला सशक्तीकरण, कृषि आधारित आजीविका और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है। जिला प्रशासन का मानना है कि ऐसे सफल किसानों की कहानियों को सामने लाने से अन्य ग्रामीणों को भी खेती को लाभकारी आजीविका के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

