नई दिल्ली | पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। चुनावी माहौल समाप्त होते ही ईंधन के दामों में हुई वृद्धि पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
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विपक्ष का कहना है कि चुनाव के दौरान जनता को राहत मिलने की उम्मीद दिखाई जाती है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही महंगाई का बोझ सीधे आम लोगों पर डाल दिया जाता है। विपक्षी नेताओं ने इसे आम जनता के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है।
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हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
आम लोगों के बीच भी बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर चिंता और नाराजगी साफ दिखाई दे रही है, खासकर उन लोगों में जो रोजमर्रा के कामकाज और परिवहन के लिए पेट्रोल और डीजल पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है।
सरायकेला | सरायकेला की विश्वविख्यात छऊ कला के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जीवन को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने झारखंड सरकार के कला, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से शिष्टाचार मुलाकात कर विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
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इस दौरान उन्होंने विभागीय सचिव मुकेश कुमार तथा कला संस्कृति निदेशक आशिक अकरम से भी मुलाकात कर सरायकेला की सांस्कृतिक धरोहरों, कलाकारों की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला की छऊ नृत्य कला केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और देश की गौरवशाली पहचान है। उन्होंने कहा कि वर्षों से देश-विदेश में सम्मान प्राप्त करने वाली इस कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक पहल की आवश्यकता है।
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मुलाकात के दौरान उन्होंने राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के पुनर्जीवन एवं नियमित संचालन, छऊ नृत्य और वाद्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति, स्थानीय कलाकारों के लिए सम्मानजनक पेंशन एवं प्रोत्साहन सुविधा उपलब्ध कराने, सरायकेला में बहुउद्देशीय कला भवन निर्माण तथा युवा पीढ़ी को पारंपरिक कलाओं से जोड़ने के लिए नियमित प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार की मांग उठाई।
मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित छऊ कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और साधना से विश्व स्तर पर झारखंड का नाम रोशन किया है। ऐसे कलाकारों का सम्मान और उनका भविष्य सुरक्षित करना सरकार एवं समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक पारंपरिक छऊ मुखौटा और प्रसिद्ध सरायकेला लड्डू भेंट कर सम्मानित किया। मंत्री ने भी छऊ कला की महत्ता को स्वीकार करते हुए इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सकारात्मक पहल और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान नगर पंचायत क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अतिरिक्त विशेष फंड उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि ऐतिहासिक एवं जिला मुख्यालय होने के बावजूद सरायकेला आज भी कई आधारभूत समस्याओं से जूझ रहा है। पेयजल, सड़क, नाली, विद्युत व्यवस्था एवं शहरी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार से विशेष सहयोग की आवश्यकता है।
इसके साथ ही उन्होंने सरायकेला क्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों — श्री जगन्नाथ मंदिर, कुदरसाईं मंदिर एवं मिर्गी चिंगड़ा — के संरक्षण, सौंदर्यीकरण तथा पर्यटन मानचित्र में शामिल किए जाने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी गई।
अगर आप तुरंत लोन देने वाले मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की सोच रहे हैं, तो ज़रा ठहरिए। भारत सरकार के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि कई तथाकथित “क्विक लोन ऐप” संदिग्ध विदेशी नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। ये ऐप्स उपयोगकर्ताओं के डेटा, पैसे और निजी जानकारी के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, ऐसे ऐप्स अत्यधिक ब्याज दर, ब्लैकमेलिंग, कॉन्टैक्ट लिस्ट तक अनधिकृत पहुंच और ऑनलाइन ठगी जैसी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे केवल RBI-नियंत्रित संस्थानों से ही लोन लें और किसी भी संदिग्ध ऐप से दूर रहें।
गोइलकेरा | गोइलकेरा बाजार क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने बीते दो दिनों में दर्जनों लोगों के व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिए हैं। हैक किए गए अकाउंट्स से अपराधी पीड़ितों के कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद लोगों को एपीके (APK) फाइल्स भेज रहे हैं। ये फाइलें बैंक खाते की केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर भेजी जा रही हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जैसे ही कोई व्यक्ति इन फाइलों को खोलकर अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता है, उसका फोन भी हैक हो जाता है। इसके बाद मोबाइल में मौजूद पासवर्ड, बैंक डिटेल्स, ओटीपी, निजी फोटो–वीडियो तक साइबर अपराधियों की पहुंच बन जाती है।
एपीके फाइल्स क्यों हैं खतरनाक?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, एपीके फाइलें अक्सर मालवेयर से संक्रमित होती हैं। एक बार इंस्टॉल होने के बाद यह मालवेयर:
मोबाइल से संवेदनशील जानकारी चुरा सकता है
यूज़र की गतिविधियों पर नज़र रख सकता है
फोन को पूरी तरह लॉक कर सकता है
रिमोट एक्सेस ट्रोजन (RAT) के ज़रिए हमलावर को फोन का पूरा नियंत्रण दे सकता है
कई मामलों में अपराधी लोकप्रिय बैंकिंग या ऐप्स की नकली एपीके फाइल बनाकर लोगों को धोखे में डालते हैं, जिससे उन्हें असली ऐप समझकर इंस्टॉल कर लिया जाता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि:
व्हाट्सएप या किसी भी मैसेजिंग ऐप पर आई एपीके फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें
बैंक या सरकारी संस्था कभी भी व्हाट्सएप पर केवाईसी के लिए फाइल नहीं भेजती
केवल Google Play Store से ही ऐप इंस्टॉल करें
अनजान लिंक या फाइल पर क्लिक करने से पहले पुष्टि करें
खुद को कैसे बचाएं? (Solutions)
✔️ मोबाइल में भरोसेमंद Antivirus इंस्टॉल रखें ✔️ WhatsApp में Two-Step Verification ऑन करें ✔️ Unknown Sources से ऐप इंस्टॉल की अनुमति बंद रखें ✔️ किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पासवर्ड बदलें ✔️ बैंक खाते से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें
मोबाइल को हैकिंग और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाएँ – भरोसेमंद Antivirus अपनाएँ
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल सिर्फ़ कॉल करने का साधन नहीं रहा, बल्कि बैंक, पहचान और निजी जानकारी का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे में Virus, Fake Apps और Online Fraud आज का सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। साइबर अपराधी एपीके फाइल, फर्जी ऐप्स और लिंक के ज़रिए मोबाइल को हैक कर रहे हैं।
इन्हीं खतरों से बचाव के लिए मोबाइल में भरोसेमंद Antivirus होना बेहद ज़रूरी है।
🔐 Mobile Antivirus क्यों ज़रूरी है?
एक अच्छा Antivirus आपके मोबाइल को कई स्तरों पर सुरक्षित करता है:
✅ आपके बैंकिंग OTP और पासवर्ड की रक्षा ✅ फर्जी Apps और Malware से सुरक्षा ✅ कैमरा और माइक्रोफोन हैकिंग से बचाव ✅ बच्चों के लिए Safe Browsing सुविधा ✅ मोबाइल को बनाए तेज़, सुरक्षित और स्थिर
⚠️ अगर Antivirus नहीं है तो क्या खतरे हैं?
Antivirus न होने पर मोबाइल गंभीर जोखिम में रहता है:
❌ आपका पैसा चोरी हो सकता है ❌ आपका मोबाइल पूरी तरह हैक हो सकता है ❌ WhatsApp / Facebook अकाउंट हैक हो सकते हैं ❌ Photos, Videos और Contacts लीक हो सकते हैं ❌ Fake Loan Apps और Blackmail का शिकार बन सकते हैं
🛡️ अब समाधान मौजूद है
अब आपका मोबाइल रहेगा 100% सुरक्षित — Virus, Fake Apps और Online Fraud से पूरी सुरक्षा के साथ।
सरायकेला : पीएनबी रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आरसेटी), सरायकेला में आयोजित 30 दिवसीय मोबाइल मरम्मत प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन किया गया। समापन समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त 19 प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संस्थान के निदेशक उमा शंकर तांती ने सभी प्रशिक्षुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मोबाइल मरम्मत आज के समय में रोजगार का एक बेहतर साधन है। उन्होंने कहा कि शहर से लेकर गांव तक मोबाइल का व्यापक उपयोग हो रहा है, जिससे इस क्षेत्र में स्वरोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं। निदेशक ने प्रशिक्षुओं से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
इस अवसर पर संस्थान के संकाय सदस्य गोविंद राय, दिलीप आचार्य, इंद्रजीत कैबत, द्रौपदी महतो सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
भारत के दूरसंचार मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मोबाइल फोन निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे सरकार समर्थित साइबर सुरक्षा ऐप ‘Sanchar Saathi’ को अगले 90 दिनों के भीतर सभी नए स्मार्टफोनों में प्री-इंस्टॉल करें। यह ऐप न तो हटाया जा सकेगा और न ही डिसेबल होगा। यह आदेश रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार जारी किया गया है।
क्या है Sanchar Saathi?
Sanchar Saathi एक सरकारी साइबर सुरक्षा प्लेटफ़ॉर्म है, जो वेब, Android और iOS पर उपलब्ध है। यह नागरिकों को टेलीकॉम फ्रॉड से बचाने और मोबाइल से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में मदद करता है। इसके मुख्य फीचर्स हैं—
संदिग्ध कॉल, SMS और वेबसाइट लिंक की रिपोर्टिंग
चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक या ट्रैक करना
अपने नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चलते हैं, यह जांचना
अंतरराष्ट्रीय कॉल्स जिनके नंबर +91 से शुरू होते हैं, उनकी रिपोर्टिंग (ताकि विदेशी अवैध कॉल सेटअप को पकड़ा जा सके)
सरकार के अनुसार, इस तरह की कॉल आमतौर पर इंटरनेट के जरिए विदेशी लोकेशन से भेजी जाती हैं, ताकि वे भारतीय नंबर जैसी दिखाई दें, और यह फ्रॉड व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं।
ऐप के अब तक के प्रभाव
कुल इंस्टॉलेशन: 1.14 करोड़ से अधिक
सबसे अधिक उपयोग: आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र
लॉन्च: मई 2023
अब तक ब्लॉक किए गए खोए/चोरी हुए मोबाइल: 42 लाख से अधिक
ट्रेस किए गए: 26 लाख
सफल रिकवरी: 7,23,638 डिवाइस
कौन-कौन से परमिशन लेता है ऐप?
Google Play Store में सूचीबद्ध ऐप निम्न परमिशन का उपयोग करता है—
SMS (पढ़ना/भेजना)
कॉल लॉग व फोन स्टेटस
फोटो/फाइल्स को पढ़ना और संशोधित करना
कैमरा
स्टोरेज
डिवाइस ID व कॉल जानकारी
नेटवर्क कनेक्शन की मॉनिटरिंग
स्टार्टअप पर रन करना, वाइब्रेशन नियंत्रित करना
निर्माताओं को क्या करना होगा?
28 नवंबर 2025 को जारी निर्देश के अनुसार—
नई डिवाइस में ऐप प्री-लोड करना होगा
सप्लाई चेन में मौजूद फोन में OTA अपडेट के जरिए ऐप भेजना होगा
ऐप को पहली बार डिवाइस सेटअप करते समय आसानी से दिखना चाहिए
इसके फीचर्स को डिसेबल या लिमिट नहीं किया जा सकेगा
सरकार का कहना है कि यह कदम नकली IMEI, स्पूफिंग, चोरी की डिवाइस की बिक्री और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जरूरी है।
रूस के MAX ऐप जैसा कदम?
भारत का यह निर्देश रूस की नीति से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा है। रूस ने 1 सितंबर 2025 से सभी स्मार्ट डिवाइस पर घरेलू मैसेंजर ऐप MAX को अनिवार्य किया था। आलोचकों ने इसे निगरानी का माध्यम बताया, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया।
रूस ने Telegram और WhatsApp पर भी सख़्ती बढ़ाई है और कई क्षेत्रों में इनकी 40% तक पहुँच सीमित है। Roskomnadzor का दावा है कि इन ऐप्स का उपयोग आतंकवाद, धोखाधड़ी और अपराध गतिविधियों में बढ़ रहा है।
भारत में इस कदम पर क्या सवाल उठेंगे?
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि—
अनइंस्टॉल न होने वाले सरकारी ऐप व्यक्तिगत गोपनीयता पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
व्यापक परमिशन के कारण नागरिकों में डेटा सुरक्षा की चिंता बढ़ सकती है।
लेकिन सरकार इसे टेलीकॉम सुरक्षा को मजबूत करने और फ्रॉड रोकने के लिए जरूरी बता रही है।
मनोहपुर : झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 14 नवंबर 2025 (शुक्रवार) को 33/11 केवी मनोहपुर विद्युत उपकेंद्र से जुड़े कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।
यह कटौती 11 केवी के दो ब्रेकरों के अधिष्ठापन और मरम्मती कार्य के कारण की जाएगी। इस दौरान सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद रहेगी।
प्रभावित क्षेत्र: मनोहपुर, मनोहपुर बाजार, छोटानागरा, जराइकेला, पोटका और पोसीता।
विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि आवश्यक कार्य समय से पहले पूरा कर लें। यह कार्य विद्युत प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और सुरक्षित बनाने के लिए किया जा रहा है।
भारत में साइबर अपराधों का एक नया और खतरनाक रूप सामने आया है — Digital Arrest. इस नए प्रकार के फ्रॉड में साइबर अपराधी खुद को पुलिस, CBI, ED या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उन्हें घंटों तक वीडियो कॉल पर “वर्चुअली गिरफ्तार” कर लेते हैं।
🔍 क्या है Digital Arrest?
Digital Arrest एक ऐसा साइबर स्कैम है जिसमें आरोपियों द्वारा पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि उन पर कोई गंभीर अपराध का आरोप है — जैसे
ड्रग्स ट्रैफिकिंग
मनी लॉन्ड्रिंग
कस्टम पार्सल में अवैध सामान
बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन
इसके बाद आरोपी पीड़ित को कहते हैं कि “आप अभी पुलिस स्टेशन मत आइए… आप Digital Arrest में हैं।” इसके बाद पीड़ित से
कैमरा ऑन रखने,
कमरे में अकेले रहने,
कॉल कट न करने जेसे निर्देश दिए जाते हैं।
🎭 कैसे होती है ठगी?
अपराधी सरकारी अधिकारी की वर्दी पहनकर या पृष्ठभूमि में fake ऑफिस सेटअप दिखाकर वीडियो कॉल करते हैं। इसके बाद:
डराकर “Verification” या “Bail Amount” के नाम पर पैसे मांगते हैं
अकाउंट Freeze की धमकी देते हैं
पीड़ित से Online Transfer, UPI पेमेंट या Wallet पेमेंट करवाते हैं
कई मामलों में पीड़ित से उनकी स्क्रीन शेयर करवाकर बैंक खाते खाली कर दिए जाते हैं
📈 क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे केस?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले एक साल में Digital Arrest के मामले तेज़ी से बढ़े हैं।
ज्यादा लोग ऑनलाइन हैं
सरकारी नोटिस का डर
‘Virtual Officer’ का भरोसा
साइबर अपराधियों के पास विदेशी कॉलिंग सिस्टम और डीपफेक तकनीक
ये सभी कारण इस ठगी को और खतरनाक बना रहे हैं।
⚠️ कोई भी सरकारी एजेंसी Digital Arrest नहीं करती!
यह बात जानना बहुत ज़रूरी है कि:
पुलिस, CBI, ED, RBI, या कोई भी सरकारी विभाग फोन या वीडियो कॉल पर किसी को Arrest नहीं कर सकता।
अगर आप पर कोई केस हो, तो पुलिस घर आकर नोटिस देगी या थाने बुलाएगी।
कोई भी सरकारी अधिकारी पैसे लेकर केस बंद नहीं कर सकता।
🛑 कैसे बचें Digital Arrest से?
✔ किसी भी Unknown Number से आने वाले वीडियो कॉल पर भरोसा न करें ✔ सरकारी अधिकारी बनकर पैसे मांगने पर कॉल तुरंत काट दें ✔ स्क्रीन शेयर कभी न करें ✔ कॉल रिकॉर्ड करें ✔ तुरंत 1930 पर शिकायत करें ✔ साइबर क्राइम पोर्टल — www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें
👮 सरकार और पुलिस की चेतावनी
भारत की विभिन्न राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने जनता को चेतावनी दी है कि यह बढ़ता हुआ फ्रॉड है और लोगों को
शांत रहकर
किसी भी कॉल पर भरोसा न करते हुए
तुरंत शिकायत करने की सलाह दी गई है।
Digital Arrest आज का सबसे तेज़ी से फैलता साइबर अपराध है। जागरूक रहना ही इसका एकमात्र समाधान है। अगर कोई भी व्यक्ति आपको वीडियो कॉल पर डराकर पैसे मांगता है, तो समझ लीजिए — ये 100% फ्रॉड है।