जमशेदपुर | शहर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र अंतर्गत भुइयांडीह ह्यूम पाइप चौक के पास गुरुवार देर रात एल्युमिनियम शीट से लदा एक टाटा प्राइमा ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे के बाद ट्रक में लदी एल्युमिनियम शीट सड़क पर दूर-दूर तक बिखर गई, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
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घटना की सूचना मिलते ही सीतारामडेरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सड़क पर बिखरी एल्युमिनियम शीट को हटाने का अभियान शुरू कराया, ताकि यातायात को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।
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गनीमत रही कि इस दुर्घटना में किसी के घायल होने या किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा, जिसके कारण ट्रक पलट गया। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
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फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और दुर्घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। समय पर शुरू किए गए राहत एवं बचाव कार्य के कारण सड़क से मलबा हटाकर यातायात व्यवस्था को शीघ्र सामान्य कर दिया गया।
जमशेदपुर | स्टील उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में टाटा स्टील ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। कंपनी ने स्टील निर्माण प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले एलडी (LD) स्लैग से कृत्रिम रेत (एम-सैंड) तैयार कर पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन कंक्रीट विकसित किया है। यह नवाचार प्राकृतिक रेत पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ निर्माण (सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन) को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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कंपनी की विशेषज्ञ टीम ने लंबे समय तक शोध एवं परीक्षण के बाद एलडी स्लैग को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाली एम-सैंड तैयार की।
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इसी कृत्रिम रेत का उपयोग करते हुए एम-15, एम-20 और एम-25 ग्रेड के ग्रीन कंक्रीट का सफलतापूर्वक विकास किया गया, जो गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरा उतरा।
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विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो नदियों से होने वाले अत्यधिक रेत खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
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इस तकनीक का एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ यह है कि निर्माण कार्यों के दौरान कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। साथ ही, स्टील उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट का पुनः उपयोग होने से औद्योगिक कचरा प्रबंधन भी अधिक प्रभावी और टिकाऊ बन सकेगा।
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जमशेदपुर से शुरू हुई यह पहल भविष्य में देश के निर्माण क्षेत्र के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाया गया, तो यह पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगी।
सरायकेला | चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के भुइयांडीह स्थित एक औद्योगिक इकाई के बाहर सोमवार को मजदूरों और स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के मुख्य प्रवेश द्वार पर एकत्र होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की।
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ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री घनी आबादी वाले क्षेत्र के समीप संचालित हो रही है, जिससे आसपास के लोगों को वायु प्रदूषण समेत कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि उद्योग से निकलने वाले धुएं और अन्य प्रदूषक तत्वों का प्रतिकूल प्रभाव स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने तथा फैक्ट्री के संचालन की समीक्षा करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान हाल ही में हुई औद्योगिक दुर्घटना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, 16 जून को फैक्ट्री परिसर में हुए विस्फोट में कई मजदूर घायल हो गए थे, जिनमें कुछ की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद से मजदूरों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
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मजदूरों का आरोप है कि घायल कर्मियों के इलाज, वेतन भुगतान और मुआवजे के संबंध में अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने मांग की कि सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, उपचार का पूरा खर्च कंपनी वहन करे तथा प्रभावित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
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सोमवार सुबह शुरू हुए इस आंदोलन के कारण फैक्ट्री का कामकाज प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित रूप से सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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ग्रामीणों और मजदूरों ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा प्रबंधन और संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की भी मांग की।
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फिलहाल, प्रदर्शन स्थल पर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है।
साइबर अपराधियों ने खुद को बिजली विभाग का अधिकारी बताकर चाईबासा न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी आनंद वर्धन प्रसाद को ठगी का शिकार बना लिया। ठगों ने बिजली मीटर बदलने के बहाने फोन कर उन्हें बातचीत में उलझाए रखा और इसी दौरान उनके बैंक खातों से ₹1.44 लाख की अवैध निकासी कर ली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आनंद वर्धन प्रसाद के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के दो संयुक्त खाते एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े हुए हैं। इनमें एक खाता उनकी पत्नी के साथ तथा दूसरा उनके पुत्र के साथ संयुक्त रूप से संचालित है। साइबर अपराधियों ने गूगल पे (Google Pay) के माध्यम से तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन कर कुल ₹1,44,000 रुपये उनके खातों से निकाल लिए।
पीड़ित अधिवक्ता के अनुसार, फोन कॉल के दौरान उनके मोबाइल में अचानक कई एप्लिकेशन के सेटअप और अपडेट स्वतः शुरू हो गए। कुछ समय बाद बैंक से प्राप्त संदेशों के जरिए उन्हें खातों से राशि निकाले जाने की जानकारी मिली। लगातार ट्रांजैक्शन अलर्ट मिलने पर उन्हें साइबर ठगी का एहसास हुआ।
घटना के बाद उन्होंने मामले की शिकायत दर्ज कराने के लिए सदर थाना और साइबर सेल से संपर्क किया है। इस घटना के बाद उनके परिवार में चिंता और भय का माहौल है।
उल्लेखनीय है कि हाल के समय में फर्जी कॉल, मोबाइल हैकिंग, रिमोट एक्सेस ऐप और ऑनलाइन भुगतान माध्यमों के जरिए साइबर ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अज्ञात कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें, किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और मोबाइल में किसी भी ऐप को डाउनलोड या अनुमति देने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।
नई दिल्ली | पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। चुनावी माहौल समाप्त होते ही ईंधन के दामों में हुई वृद्धि पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
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विपक्ष का कहना है कि चुनाव के दौरान जनता को राहत मिलने की उम्मीद दिखाई जाती है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही महंगाई का बोझ सीधे आम लोगों पर डाल दिया जाता है। विपक्षी नेताओं ने इसे आम जनता के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है।
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हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
आम लोगों के बीच भी बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर चिंता और नाराजगी साफ दिखाई दे रही है, खासकर उन लोगों में जो रोजमर्रा के कामकाज और परिवहन के लिए पेट्रोल और डीजल पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है।
सरायकेला | सरायकेला की विश्वविख्यात छऊ कला के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जीवन को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने झारखंड सरकार के कला, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से शिष्टाचार मुलाकात कर विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
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इस दौरान उन्होंने विभागीय सचिव मुकेश कुमार तथा कला संस्कृति निदेशक आशिक अकरम से भी मुलाकात कर सरायकेला की सांस्कृतिक धरोहरों, कलाकारों की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला की छऊ नृत्य कला केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और देश की गौरवशाली पहचान है। उन्होंने कहा कि वर्षों से देश-विदेश में सम्मान प्राप्त करने वाली इस कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक पहल की आवश्यकता है।
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मुलाकात के दौरान उन्होंने राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के पुनर्जीवन एवं नियमित संचालन, छऊ नृत्य और वाद्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति, स्थानीय कलाकारों के लिए सम्मानजनक पेंशन एवं प्रोत्साहन सुविधा उपलब्ध कराने, सरायकेला में बहुउद्देशीय कला भवन निर्माण तथा युवा पीढ़ी को पारंपरिक कलाओं से जोड़ने के लिए नियमित प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार की मांग उठाई।
मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित छऊ कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और साधना से विश्व स्तर पर झारखंड का नाम रोशन किया है। ऐसे कलाकारों का सम्मान और उनका भविष्य सुरक्षित करना सरकार एवं समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक पारंपरिक छऊ मुखौटा और प्रसिद्ध सरायकेला लड्डू भेंट कर सम्मानित किया। मंत्री ने भी छऊ कला की महत्ता को स्वीकार करते हुए इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सकारात्मक पहल और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान नगर पंचायत क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अतिरिक्त विशेष फंड उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि ऐतिहासिक एवं जिला मुख्यालय होने के बावजूद सरायकेला आज भी कई आधारभूत समस्याओं से जूझ रहा है। पेयजल, सड़क, नाली, विद्युत व्यवस्था एवं शहरी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार से विशेष सहयोग की आवश्यकता है।
इसके साथ ही उन्होंने सरायकेला क्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों — श्री जगन्नाथ मंदिर, कुदरसाईं मंदिर एवं मिर्गी चिंगड़ा — के संरक्षण, सौंदर्यीकरण तथा पर्यटन मानचित्र में शामिल किए जाने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी गई।
अगर आप तुरंत लोन देने वाले मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की सोच रहे हैं, तो ज़रा ठहरिए। भारत सरकार के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि कई तथाकथित “क्विक लोन ऐप” संदिग्ध विदेशी नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। ये ऐप्स उपयोगकर्ताओं के डेटा, पैसे और निजी जानकारी के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, ऐसे ऐप्स अत्यधिक ब्याज दर, ब्लैकमेलिंग, कॉन्टैक्ट लिस्ट तक अनधिकृत पहुंच और ऑनलाइन ठगी जैसी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे केवल RBI-नियंत्रित संस्थानों से ही लोन लें और किसी भी संदिग्ध ऐप से दूर रहें।
गोइलकेरा | गोइलकेरा बाजार क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने बीते दो दिनों में दर्जनों लोगों के व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिए हैं। हैक किए गए अकाउंट्स से अपराधी पीड़ितों के कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद लोगों को एपीके (APK) फाइल्स भेज रहे हैं। ये फाइलें बैंक खाते की केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर भेजी जा रही हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जैसे ही कोई व्यक्ति इन फाइलों को खोलकर अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता है, उसका फोन भी हैक हो जाता है। इसके बाद मोबाइल में मौजूद पासवर्ड, बैंक डिटेल्स, ओटीपी, निजी फोटो–वीडियो तक साइबर अपराधियों की पहुंच बन जाती है।
एपीके फाइल्स क्यों हैं खतरनाक?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, एपीके फाइलें अक्सर मालवेयर से संक्रमित होती हैं। एक बार इंस्टॉल होने के बाद यह मालवेयर:
मोबाइल से संवेदनशील जानकारी चुरा सकता है
यूज़र की गतिविधियों पर नज़र रख सकता है
फोन को पूरी तरह लॉक कर सकता है
रिमोट एक्सेस ट्रोजन (RAT) के ज़रिए हमलावर को फोन का पूरा नियंत्रण दे सकता है
कई मामलों में अपराधी लोकप्रिय बैंकिंग या ऐप्स की नकली एपीके फाइल बनाकर लोगों को धोखे में डालते हैं, जिससे उन्हें असली ऐप समझकर इंस्टॉल कर लिया जाता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि:
व्हाट्सएप या किसी भी मैसेजिंग ऐप पर आई एपीके फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें
बैंक या सरकारी संस्था कभी भी व्हाट्सएप पर केवाईसी के लिए फाइल नहीं भेजती
केवल Google Play Store से ही ऐप इंस्टॉल करें
अनजान लिंक या फाइल पर क्लिक करने से पहले पुष्टि करें
खुद को कैसे बचाएं? (Solutions)
✔️ मोबाइल में भरोसेमंद Antivirus इंस्टॉल रखें ✔️ WhatsApp में Two-Step Verification ऑन करें ✔️ Unknown Sources से ऐप इंस्टॉल की अनुमति बंद रखें ✔️ किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पासवर्ड बदलें ✔️ बैंक खाते से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें
मोबाइल को हैकिंग और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाएँ – भरोसेमंद Antivirus अपनाएँ
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल सिर्फ़ कॉल करने का साधन नहीं रहा, बल्कि बैंक, पहचान और निजी जानकारी का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे में Virus, Fake Apps और Online Fraud आज का सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। साइबर अपराधी एपीके फाइल, फर्जी ऐप्स और लिंक के ज़रिए मोबाइल को हैक कर रहे हैं।
इन्हीं खतरों से बचाव के लिए मोबाइल में भरोसेमंद Antivirus होना बेहद ज़रूरी है।
🔐 Mobile Antivirus क्यों ज़रूरी है?
एक अच्छा Antivirus आपके मोबाइल को कई स्तरों पर सुरक्षित करता है:
✅ आपके बैंकिंग OTP और पासवर्ड की रक्षा ✅ फर्जी Apps और Malware से सुरक्षा ✅ कैमरा और माइक्रोफोन हैकिंग से बचाव ✅ बच्चों के लिए Safe Browsing सुविधा ✅ मोबाइल को बनाए तेज़, सुरक्षित और स्थिर
⚠️ अगर Antivirus नहीं है तो क्या खतरे हैं?
Antivirus न होने पर मोबाइल गंभीर जोखिम में रहता है:
❌ आपका पैसा चोरी हो सकता है ❌ आपका मोबाइल पूरी तरह हैक हो सकता है ❌ WhatsApp / Facebook अकाउंट हैक हो सकते हैं ❌ Photos, Videos और Contacts लीक हो सकते हैं ❌ Fake Loan Apps और Blackmail का शिकार बन सकते हैं
🛡️ अब समाधान मौजूद है
अब आपका मोबाइल रहेगा 100% सुरक्षित — Virus, Fake Apps और Online Fraud से पूरी सुरक्षा के साथ।
सरायकेला : पीएनबी रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आरसेटी), सरायकेला में आयोजित 30 दिवसीय मोबाइल मरम्मत प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन किया गया। समापन समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त 19 प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संस्थान के निदेशक उमा शंकर तांती ने सभी प्रशिक्षुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मोबाइल मरम्मत आज के समय में रोजगार का एक बेहतर साधन है। उन्होंने कहा कि शहर से लेकर गांव तक मोबाइल का व्यापक उपयोग हो रहा है, जिससे इस क्षेत्र में स्वरोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं। निदेशक ने प्रशिक्षुओं से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
इस अवसर पर संस्थान के संकाय सदस्य गोविंद राय, दिलीप आचार्य, इंद्रजीत कैबत, द्रौपदी महतो सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
भारत के दूरसंचार मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मोबाइल फोन निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे सरकार समर्थित साइबर सुरक्षा ऐप ‘Sanchar Saathi’ को अगले 90 दिनों के भीतर सभी नए स्मार्टफोनों में प्री-इंस्टॉल करें। यह ऐप न तो हटाया जा सकेगा और न ही डिसेबल होगा। यह आदेश रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार जारी किया गया है।
क्या है Sanchar Saathi?
Sanchar Saathi एक सरकारी साइबर सुरक्षा प्लेटफ़ॉर्म है, जो वेब, Android और iOS पर उपलब्ध है। यह नागरिकों को टेलीकॉम फ्रॉड से बचाने और मोबाइल से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में मदद करता है। इसके मुख्य फीचर्स हैं—
संदिग्ध कॉल, SMS और वेबसाइट लिंक की रिपोर्टिंग
चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक या ट्रैक करना
अपने नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चलते हैं, यह जांचना
अंतरराष्ट्रीय कॉल्स जिनके नंबर +91 से शुरू होते हैं, उनकी रिपोर्टिंग (ताकि विदेशी अवैध कॉल सेटअप को पकड़ा जा सके)
सरकार के अनुसार, इस तरह की कॉल आमतौर पर इंटरनेट के जरिए विदेशी लोकेशन से भेजी जाती हैं, ताकि वे भारतीय नंबर जैसी दिखाई दें, और यह फ्रॉड व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं।
ऐप के अब तक के प्रभाव
कुल इंस्टॉलेशन: 1.14 करोड़ से अधिक
सबसे अधिक उपयोग: आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र
लॉन्च: मई 2023
अब तक ब्लॉक किए गए खोए/चोरी हुए मोबाइल: 42 लाख से अधिक
ट्रेस किए गए: 26 लाख
सफल रिकवरी: 7,23,638 डिवाइस
कौन-कौन से परमिशन लेता है ऐप?
Google Play Store में सूचीबद्ध ऐप निम्न परमिशन का उपयोग करता है—
SMS (पढ़ना/भेजना)
कॉल लॉग व फोन स्टेटस
फोटो/फाइल्स को पढ़ना और संशोधित करना
कैमरा
स्टोरेज
डिवाइस ID व कॉल जानकारी
नेटवर्क कनेक्शन की मॉनिटरिंग
स्टार्टअप पर रन करना, वाइब्रेशन नियंत्रित करना
निर्माताओं को क्या करना होगा?
28 नवंबर 2025 को जारी निर्देश के अनुसार—
नई डिवाइस में ऐप प्री-लोड करना होगा
सप्लाई चेन में मौजूद फोन में OTA अपडेट के जरिए ऐप भेजना होगा
ऐप को पहली बार डिवाइस सेटअप करते समय आसानी से दिखना चाहिए
इसके फीचर्स को डिसेबल या लिमिट नहीं किया जा सकेगा
सरकार का कहना है कि यह कदम नकली IMEI, स्पूफिंग, चोरी की डिवाइस की बिक्री और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जरूरी है।
रूस के MAX ऐप जैसा कदम?
भारत का यह निर्देश रूस की नीति से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा है। रूस ने 1 सितंबर 2025 से सभी स्मार्ट डिवाइस पर घरेलू मैसेंजर ऐप MAX को अनिवार्य किया था। आलोचकों ने इसे निगरानी का माध्यम बताया, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया।
रूस ने Telegram और WhatsApp पर भी सख़्ती बढ़ाई है और कई क्षेत्रों में इनकी 40% तक पहुँच सीमित है। Roskomnadzor का दावा है कि इन ऐप्स का उपयोग आतंकवाद, धोखाधड़ी और अपराध गतिविधियों में बढ़ रहा है।
भारत में इस कदम पर क्या सवाल उठेंगे?
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि—
अनइंस्टॉल न होने वाले सरकारी ऐप व्यक्तिगत गोपनीयता पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
व्यापक परमिशन के कारण नागरिकों में डेटा सुरक्षा की चिंता बढ़ सकती है।
लेकिन सरकार इसे टेलीकॉम सुरक्षा को मजबूत करने और फ्रॉड रोकने के लिए जरूरी बता रही है।