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सरायकेला में प्लस टू विद्यालय की मांग तेज, नगर पंचायत अध्यक्ष ने शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने को सौंपा मांग पत्र

सरायकेला में प्लस टू विद्यालय की मांग तेज, नगर पंचायत अध्यक्ष ने शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने को सौंपा मांग पत्र

सरायकेला | सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और विद्यार्थियों को बेहतर उच्च माध्यमिक शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), सरायकेला-खरसावां को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा है। इस पहल का उद्देश्य सरायकेला नगर पंचायत तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों छात्र-छात्राओं को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

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अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला जैसे ऐतिहासिक और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में आज भी झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) से संबद्ध प्लस टू विद्यालय का अभाव चिंता का विषय है। इसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता है, जिससे समय की बर्बादी, अतिरिक्त आर्थिक बोझ और सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं आगे की पढ़ाई बीच में छोड़ने को विवश हो जाते हैं।

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मांग पत्र में उन्होंने बालक मध्य विद्यालय, राजबांध और राजकीय कन्या विद्यालय, पुराना बस स्टैंड को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड कर JAC बोर्ड से संबद्ध प्लस टू विद्यालय के रूप में विकसित करने की मांग की है। साथ ही विज्ञान, कला और वाणिज्य संकायों के लिए पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
नगर पंचायत अध्यक्ष ने सरायकेला शहर के लगभग 13 विद्यालयों की आधारभूत संरचना का विस्तृत सर्वे कराने की भी मांग की है। इसमें भवनों की मरम्मत, रंग-रोगन, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, खेलकूद संसाधनों और शिक्षकों की उपलब्धता का आकलन शामिल है। उन्होंने विद्यालय परिसरों में चारदीवारी निर्माण, जर्जर भवनों को हटाने तथा सुरक्षित और आधुनिक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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मनोज कुमार चौधरी ने कहा, “आज शिक्षा ही समाज और राष्ट्र निर्माण का सबसे मजबूत आधार है। यदि हमारे बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए भटकना पड़े, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। हमारी प्राथमिकता है कि सरायकेला का कोई भी विद्यार्थी केवल संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से समझौता न करे।”
उन्होंने कहा कि यह केवल नए विद्यालय खोलने की मांग नहीं, बल्कि सरायकेला के उज्ज्वल भविष्य, युवाओं के सशक्तिकरण और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास है। इस संबंध में मुख्यमंत्री, शिक्षा विभाग, उपायुक्त और झारखंड अधिविद्य परिषद को भी मांग पत्र की प्रतिलिपि भेजी गई है, ताकि छात्रहित में शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मंडलीय कारा सरायकेला में जेल अदालत, चिकित्सा जांच एवं विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

मंडलीय कारा सरायकेला में जेल अदालत, चिकित्सा जांच एवं विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

सरायकेला | झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सरायकेला-खरसावां रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन एवं सचिव तौसिफ मेराज के पर्यवेक्षण में रविवार को मंडलीय कारा सरायकेला में जेल अदालत सह चिकित्सा जांच शिविर एवं विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग)-सह-न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी अनामिका किस्कू, मंडलीय कारा सरायकेला के अधीक्षक सत्येन्द्र कुमार, मुख्य विधिक सहायता रक्षा परामर्शी दिलीप शॉ, उप मुख्य विधिक सहायता रक्षा परामर्शी सुनीत कर्मकार, सहायक विधिक सहायता रक्षा परामर्शी अम्बिका चरण पाणी एवं विजय कुमार महतो, जेलर सोनू कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार मंडलीय कारा के मुलाकाती क्षेत्र में स्थापित हेल्प डेस्क का शुभारंभ रहा। इस हेल्प डेस्क के माध्यम से आगंतुकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए पारा विधिक स्वयंसेवक मोहन कुमार हांसदा एवं तारामणि बांदिया को प्रतिनियुक्त किया गया है।

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इस अवसर पर डीएलएसए सचिव तौसिफ मेराज ने बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता, विधिक सहायता रक्षा परामर्शी प्रणाली-2022 तथा हाल ही में प्रारम्भ की गई स्पृह योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मुलाकाती क्षेत्र में स्थापित हेल्प डेस्क की उपयोगिता और इससे मिलने वाले लाभों से भी बंदियों एवं हितधारकों को अवगत कराया।

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इसी क्रम में चिकित्सा पदाधिकारी अभिमन्यु महतो के नेतृत्व में चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बंदियों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। यह चिकित्सा शिविर मासिक जेल अदालत के साथ आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पदाधिकारियों ने महिला वार्ड का निरीक्षण भी किया तथा महिला बंदियों से उनके मामलों और विधिक समस्याओं को लेकर संवाद स्थापित कर आवश्यक जानकारी प्राप्त की।
यह आयोजन बंदियों को विधिक सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं तथा न्यायिक प्रक्रियाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

सासाराम रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन में लगी आग, एक बोगी जलकर खाक

सासाराम रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन में लगी आग, एक बोगी जलकर खाक

सासाराम | पंडित दीनदयाल उपाध्याय–गया रेलखंड के सासाराम रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह एक पैसेंजर ट्रेन में अचानक आग लगने से अफरातफरी मच गई। सासाराम से आरा होते हुए पटना जाने वाली पैसेंजर ट्रेन की एक बोगी में आग लगने के बाद प्लेटफॉर्म और ट्रेन में मौजूद यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया। घटना सोमवार सुबह करीब 6 बजे की बताई जा रही है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है।
एक बोगी पूरी तरह जलकर खाक

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आग इतनी तेजी से फैली कि ट्रेन की एक बोगी पूरी तरह जलकर खाक हो गई। बाद में सुरक्षा के मद्देनजर जली हुई बोगी को ट्रेन से अलग कर दिया गया। सूचना मिलने के बाद रेलवे प्रशासन और अग्निशमन टीम मौके पर पहुंची तथा कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
आरपीएफ निरीक्षक संजीव कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए रेल प्रशासन द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है।

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व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों में नाराजगी देखी गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने रेलवे प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय पर पानी और कार्यशील अग्निशमन यंत्र उपलब्ध होते, तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।

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लोगों का आरोप है कि ट्रेन में रिफिलिंग के लिए बिछाई गई पाइपलाइन में पानी नहीं था और रेलवे के अग्निशमन सिलेंडर भी खाली या अनुपयोगी थे। उनका कहना है कि शुरुआती स्तर पर आग बुझाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण आग तेजी से फैल गई और एक बोगी पूरी तरह जल गई।
फिलहाल रेल प्रशासन मामले की जांच में जुटा है और आग लगने के कारणों के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।

नदी में डूबने से तीन वर्षीय बच्ची की मौत, झाड़-फूंक में समय गंवाने से नहीं बच सकी जान

नदी में डूबने से तीन वर्षीय बच्ची की मौत, झाड़-फूंक में समय गंवाने से नहीं बच सकी जान

चाईबासा/मंझारी | पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी थाना क्षेत्र अंतर्गत तांतनगर ओपी के छोटा तेंताडा गांव में शनिवार को नदी में डूबने से तीन वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। मृत बच्ची की पहचान संगीता सिरका के रूप में हुई है। इस दर्दनाक घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में आपात स्थिति के दौरान अंधविश्वास और समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की गंभीर समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
खेलते-खेलते नदी में उतरी बच्ची, गहरे पानी में डूबी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संगीता गांव के अन्य बच्चों के साथ खेलते-खेलते नदी किनारे पहुंच गई थी। उस समय कुछ बच्चे नदी में नहा रहे थे। उन्हें देखकर वह भी पानी में उतर गई। खेल के दौरान वह अनजाने में गहरे पानी की ओर चली गई और डूबने लगी।

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आसपास मौजूद बच्चों ने शोर मचाया, जिसके बाद उसकी भाभी तत्काल मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद उसे पानी से बाहर निकाला। बाहर निकालने तक बच्ची अचेत हो चुकी थी।
अस्पताल ले जाने में हुई देरी, झाड़-फूंक का लिया सहारा
घटना के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन झाड़-फूंक के सहारे उसे ठीक करने की कोशिश में जुट गए। ग्रामीणों के अनुसार, काफी देर तक ओझा-गुनी के माध्यम से बच्ची को होश में लाने का प्रयास किया जाता रहा।

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जब उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तब देर शाम उसे सदर अस्पताल चाईबासा लाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
समय पर इलाज से बच सकती थी जान
चिकित्सकों का कहना है कि डूबने की घटनाओं में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर प्राथमिक उपचार और तत्काल अस्पताल पहुंचाने से कई मामलों में जान बचाई जा सकती है।

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इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य जागरूकता की कमी और अंधविश्वास के कारण उपचार में होने वाली देरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा यूडी केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

बंदगांव : “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” के तहत ‘जन भागीदारी अभियान – सबसे दूर, सबसे पहले’ का शुभारंभ

बंदगांव : “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” के तहत ‘जन भागीदारी अभियान – सबसे दूर, सबसे पहले’ का शुभारंभ

बंदगांव | “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” के अंतर्गत सोमवार को बंदगांव पंचायत भवन में “जन भागीदारी अभियान – सबसे दूर, सबसे पहले” कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह विशेष अभियान 18 मई से 25 मई तक संचालित किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।अभियान के तहत विभिन्न जनहितकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इनमें ओरिएंटेशन कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान, ग्राम स्तरीय स्वास्थ्य जांच शिविर, ट्रांजेक्ट वॉक तथा आदि सेवा केंद्रों के माध्यम से जनसुनवाई प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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जिला प्रशासन की ओर से इस दौरान स्वच्छता जागरूकता अभियान, सिकल सेल एनीमिया जांच, प्रोजेक्ट परख के तहत विद्यालयों में तिथि भोजन कार्यक्रम, राजस्व शिविर, भू-अर्जन मामलों के निष्पादन के लिए विशेष शिविर, पंचायत ज्ञान केंद्र का उद्घाटन तथा पंचायत दिवस जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा प्रोजेक्ट जागृति के अंतर्गत रक्तदान शिविर एवं सखी संवाद कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
अभियान के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही अधिक से अधिक लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विशेष पहल की जाएगी।

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इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों को अभियान की रूपरेखा तथा विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने और जनभागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।

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कार्यक्रम में अनुमंडल पदाधिकारी, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर, प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचल पदाधिकारी बंदगांव, जिला परिषद सदस्य, बंदगांव एवं सावनिया पंचायत के मुखिया, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) बंदगांव, प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण, एसडीपीओ ने परखी सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सुविधाएं

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण, एसडीपीओ ने परखी सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सुविधाएं

चक्रधरपुर | चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात उस समय हलचल बढ़ गई, जब एसडीपीओ डॉ. सैयद मुस्तफा हासमी अचानक स्टेशन पहुंचे और यात्री सुविधाओं तथा सुरक्षा व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों और आम लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा यात्रा संबंधी जानकारी प्राप्त की।

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निरीक्षण के क्रम में एसडीपीओ जीआरपी थाना भी पहुंचे, जहां उन्होंने थाना प्रभारी सोहेल खान से स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था, संदिग्ध गतिविधियों और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्टेशन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाए रखने के निर्देश दिए।

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इस दौरान एसडीपीओ ने ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों से बातचीत कर उनकी यात्रा, गंतव्य और स्टेशन पर उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। देर रात हुए इस औचक निरीक्षण से स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों और आम लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ा।

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गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में रोजगार दिलाने के नाम पर बाल मजदूरों और युवतियों की दूसरे राज्यों में तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। हालांकि चक्रधरपुर पुलिस की सक्रियता के कारण अब तक दर्जनों नाबालिग बच्चियों को रेस्क्यू कर उन्हें सीडब्ल्यूसी, चाईबासा के सुपुर्द किया जा चुका है।
वहीं, हाल ही में गुरुवार रात थाना प्रभारी अवधेश कुमार ने सात युवतियों को दूसरे प्रदेशों में संभावित शोषण और प्रताड़ना की आशंका से अवगत कराते हुए समझाया-बुझाया तथा सुरक्षित उनके घर वापस भेजा था। पुलिस की इस सतर्कता और सक्रियता को मानव तस्करी रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

चाईबासा: ड्रिप सिंचाई और स्ट्रॉबेरी खेती से संजुक्ता दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

चाईबासा: ड्रिप सिंचाई और स्ट्रॉबेरी खेती से संजुक्ता दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

चाईबासा | “जहाँ चाह, वहाँ राह” कहावत को साकार करते हुए चाईबासा की संजुक्ता दीदी ने मेहनत, लगन और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से सफलता की नई मिसाल कायम की है। Jharkhand State Livelihood Promotion Society (JSLPS) और कृषि विभाग के सहयोग से उन्होंने ड्रिप सिंचाई आधारित स्ट्रॉबेरी खेती अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
संजुक्ता दीदी प्रगति महिला समिति स्वयं सहायता समूह (SHG) की सक्रिय सदस्य हैं। पहले उनका परिवार पारंपरिक खेती पर निर्भर था, जिससे सीमित आय ही हो पाती थी। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कुछ नया करने का संकल्प लिया और आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया। इस सफर में उनके पति अभिमन्यु महतो ने भी हर कदम पर उनका सहयोग किया।

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वर्ष 2018 में JSLPS से जुड़ने के बाद संजुक्ता दीदी को आधुनिक खेती, ड्रिप सिंचाई तकनीक, फसल प्रबंधन और उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। नियमित मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता से प्रेरित होकर उन्होंने ड्रिप सिंचाई आधारित खेती के साथ स्ट्रॉबेरी उत्पादन की शुरुआत की।

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शुरुआती दौर उनके लिए आसान नहीं था। आधुनिक तकनीकों की सीमित जानकारी, सिंचाई प्रबंधन, आर्थिक संसाधनों की कमी और उत्पादों के विपणन जैसी कई चुनौतियाँ सामने थीं। हालांकि, निरंतर मेहनत, प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से उन्होंने इन चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।
आज उनकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ड्रिप सिंचाई तकनीक के उपयोग से पानी की बचत के साथ कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव हुआ है। स्ट्रॉबेरी जैसी उन्नत फसल से उन्हें अतिरिक्त लाभ मिला और अब वे वर्ष में तीन अलग-अलग फसलें सफलतापूर्वक उगा रही हैं। खेती के विस्तार के लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह से लगभग एक लाख रुपये का ऋण लेकर कृषि कार्य को और आगे बढ़ाया।

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आधुनिक खेती और पशुपालन के समन्वय से संजुक्ता दीदी ने अपने परिवार के लिए स्थायी आजीविका का निर्माण किया है। वर्ष 2024-25 में उन्होंने खेती और पशुपालन से दो लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की। कृषि के साथ उन्होंने डेयरी गतिविधियों को भी अपनाया है और वर्तमान में उनके पास लगभग 15 गायें हैं, जिनसे उन्हें नियमित अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
आज संजुक्ता दीदी अपने क्षेत्र में एक सफल महिला कृषक के रूप में पहचान बना चुकी हैं। उनकी सफलता ने गाँव और आसपास की महिलाओं को आधुनिक खेती, ड्रिप सिंचाई और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
संजुक्ता दीदी की कहानी यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और आत्मविश्वास के बल पर ग्रामीण महिलाएँ भी आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।

अर्जुन मुंडा के समर्थन में उतरी भाजपा, चाईबासा प्रशासन के रवैये पर उठाए सवाल

अर्जुन मुंडा के समर्थन में उतरी भाजपा, चाईबासा प्रशासन के रवैये पर उठाए सवाल

रांची | पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा चाईबासा में प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप लेता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अर्जुन मुंडा की नाराजगी सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी उनके समर्थन में उतर आई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे समेत कई नेताओं ने राज्य सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं।

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लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन: आदित्य साहू
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनजातीय समाज के सम्मानित नेता अर्जुन मुंडा के साथ चाईबासा परिसदन में जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह केवल एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं, प्रशासनिक मर्यादाओं और जनजातीय समाज के सम्मान का भी विषय है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन से जोड़ते हुए चिंता जताई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अधिकारियों को दें नसीहत: बाबूलाल मरांडी

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नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और लोकतंत्र की मर्यादाओं तथा सामाजिक सम्मान को कमजोर नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान केवल सरकारों से नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, आदिवासी परंपराओं, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक व्यवहार से बनती है।
मरांडी ने कहा कि यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ सार्वजनिक व्यक्तित्वों और समाज की भावनाओं के प्रति संवेदनहीन हो जाए, तो यह केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे लोकतांत्रिक संस्कार का अपमान बन जाता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह समझाया जाना चाहिए कि कुर्सी का अहंकार क्षणिक होता है, जबकि सम्मान और व्यवहार की छाप लंबे समय तक बनी रहती है।
2019 से यह सब झेल रहा हूं: निशिकांत दुबे
गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति गलत है, लेकिन वे स्वयं वर्ष 2019 से ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। दुबे ने दावा किया कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ 52 मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक संघर्ष से ही ऐसी प्रवृत्तियों का मुकाबला किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?

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दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट कर चाईबासा में प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने लिखा था कि वर्तमान में वे न विधायक हैं, न सांसद और न ही मंत्री, लेकिन पूर्व में झारखंड के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इसके बावजूद उनके चाईबासा प्रवास के दौरान प्रशासन द्वारा शिष्टाचार और सामान्य सौजन्यता जैसी आवश्यक औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया।
अर्जुन मुंडा ने इसे प्रशासनिक अनुभव की कमी, प्रशासनिक अकड़ अथवा सरकार की लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उदासीनता से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले की परंपरा के अनुसार जिले में आने वाले वरिष्ठ सार्वजनिक नेताओं से प्रशासन विकास, जनसरोकार और स्थानीय गतिविधियों पर चर्चा करता था, जिससे प्रशासनिक कार्यसंस्कृति और जिले की गरिमा मजबूत होती थी। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम सिंहभूम एक ऐतिहासिक और जनजातीय बहुल जिला है, ऐसे में इस तरह का व्यवहार चिंता का विषय है।

चक्रधरपुर में P-4 तसर प्रजनन केंद्र का निरीक्षण, एसडीओ ने किसानों तक लाभ पहुंचाने पर दिया जोर

चक्रधरपुर में P-4 तसर प्रजनन केंद्र का निरीक्षण, एसडीओ ने किसानों तक लाभ पहुंचाने पर दिया जोर

चक्रधरपुर | अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) पोड़ाहाट, चक्रधरपुर ने शुक्रवार को DMFT PMU टीम के साथ केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा संचालित P-4 तसर प्रजनन केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र की कार्यप्रणाली, तसर उत्पादन प्रक्रिया तथा किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई।

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निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि यह केंद्र बंदगांव क्षेत्र के लगभग 300 रेशम किसानों से जुड़ा हुआ है। किसानों से कोकून क्रय कर उन्हें केंद्र में वैज्ञानिक एवं स्वच्छ वातावरण में विश्राम अवस्था (रेस्टिंग स्टेज) में सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद मॉथ द्वारा अंडे दिए जाने पर अनुसंधान एवं परीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर रोगमुक्त अंडा समूह (DFL) तैयार किया जाता है, जिसे किसानों को तसर कीट पालन के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

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अधिकारियों को यह भी जानकारी दी गई कि केंद्र में वर्ष में दो बार प्रजनन सत्र (ब्रीडिंग सीजन) आयोजित किए जाते हैं। वर्तमान में विश्राम अवस्था की प्रक्रिया जारी है, जिसके मध्य जून तक पूर्ण होने की संभावना है। इसके उपरांत कीट एवं रोग जांच सहित अन्य आवश्यक परीक्षण पूरे कर पंजीकृत किसानों के बीच DFL का वितरण किया जाएगा।
निरीक्षण के क्रम में बताया गया कि उद्योग विभाग के सहयोग से सिल्क किसानों, रेशम दूतों तथा अन्य हितधारकों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। संस्थान का मुख्य उद्देश्य तसर बीजों की आनुवंशिक शुद्धता बनाए रखना और किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं रोगमुक्त अंडे उपलब्ध कराना है।

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निरीक्षण के अंत में एसडीओ ने केंद्र प्रबंधन को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक किसानों को इस पहल से जोड़ा जाए तथा व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि क्षेत्र के सभी रेशम उत्पादक किसानों को इसका लाभ मिल सके और तसर उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।

सुपर अल-नीनो का खतरा बढ़ा, वैज्ञानिकों ने 1877 जैसी वैश्विक तबाही की जताई आशंका

सुपर अल-नीनो का खतरा बढ़ा, वैज्ञानिकों ने 1877 जैसी वैश्विक तबाही की जताई आशंका

नई दिल्ली | वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि “सुपर अल-नीनो” अब केवल इतिहास की एक भयावह घटना नहीं रह गया है, बल्कि वर्ष 2026 में इसके दोबारा गंभीर रूप लेने की आशंका बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ता तापमान दुनिया को एक बड़े जलवायु संकट की ओर धकेल सकता है।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 1877-78 में आए अब तक के सबसे शक्तिशाली अल-नीनो ने वैश्विक स्तर पर भारी तबाही मचाई थी। उस दौरान दुनिया के कई हिस्सों में भीषण सूखा, फसलों की बर्बादी, अकाल और बीमारियों का लंबा दौर देखने को मिला था। अब 2026 में फिर वैसी ही परिस्थितियां बनने के संकेत मिल रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रशांत महासागर की सतह और गहराई दोनों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कुछ जलवायु पूर्वानुमानों में यह आशंका जताई गई है कि मौजूदा स्थिति 1877-78 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार खतरा इसलिए अधिक है, क्योंकि आज पृथ्वी पहले से ही ग्लोबल वार्मिंग के कारण ज्यादा गर्म हो चुकी है। ऐसे में सूखा, बाढ़, गर्मी की लहर और खाद्य संकट जैसी आपदाओं की तीव्रता बढ़ सकती है।

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इतिहास के अनुसार, 1876 से 1878 के बीच आए सुपर अल-नीनो ने भारत, चीन, ब्राजील और अफ्रीका के बड़े हिस्सों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। कई क्षेत्रों में मानसून पूरी तरह विफल हो गया था, जिससे फसलें सूख गईं, पशुधन नष्ट हो गया और करोड़ों लोग भुखमरी का शिकार हुए। विभिन्न अनुमानों के मुताबिक उस समय दुनिया की कुल आबादी का लगभग 2 से 3 प्रतिशत प्रभावित हुआ था और करीब 3 से 6 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। कई विशेषज्ञ यह आंकड़ा लगभग 5 करोड़ तक बताते हैं।

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जलवायु वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा तापमान वृद्धि का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले महीनों में दुनिया को गंभीर पर्यावरणीय और मानवीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।