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चाईबासा: ड्रिप सिंचाई और स्ट्रॉबेरी खेती से संजुक्ता दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

चाईबासा: ड्रिप सिंचाई और स्ट्रॉबेरी खेती से संजुक्ता दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

चाईबासा | “जहाँ चाह, वहाँ राह” कहावत को साकार करते हुए चाईबासा की संजुक्ता दीदी ने मेहनत, लगन और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से सफलता की नई मिसाल कायम की है। Jharkhand State Livelihood Promotion Society (JSLPS) और कृषि विभाग के सहयोग से उन्होंने ड्रिप सिंचाई आधारित स्ट्रॉबेरी खेती अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
संजुक्ता दीदी प्रगति महिला समिति स्वयं सहायता समूह (SHG) की सक्रिय सदस्य हैं। पहले उनका परिवार पारंपरिक खेती पर निर्भर था, जिससे सीमित आय ही हो पाती थी। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कुछ नया करने का संकल्प लिया और आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया। इस सफर में उनके पति अभिमन्यु महतो ने भी हर कदम पर उनका सहयोग किया।

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वर्ष 2018 में JSLPS से जुड़ने के बाद संजुक्ता दीदी को आधुनिक खेती, ड्रिप सिंचाई तकनीक, फसल प्रबंधन और उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। नियमित मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता से प्रेरित होकर उन्होंने ड्रिप सिंचाई आधारित खेती के साथ स्ट्रॉबेरी उत्पादन की शुरुआत की।

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शुरुआती दौर उनके लिए आसान नहीं था। आधुनिक तकनीकों की सीमित जानकारी, सिंचाई प्रबंधन, आर्थिक संसाधनों की कमी और उत्पादों के विपणन जैसी कई चुनौतियाँ सामने थीं। हालांकि, निरंतर मेहनत, प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से उन्होंने इन चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।
आज उनकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ड्रिप सिंचाई तकनीक के उपयोग से पानी की बचत के साथ कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव हुआ है। स्ट्रॉबेरी जैसी उन्नत फसल से उन्हें अतिरिक्त लाभ मिला और अब वे वर्ष में तीन अलग-अलग फसलें सफलतापूर्वक उगा रही हैं। खेती के विस्तार के लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह से लगभग एक लाख रुपये का ऋण लेकर कृषि कार्य को और आगे बढ़ाया।

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आधुनिक खेती और पशुपालन के समन्वय से संजुक्ता दीदी ने अपने परिवार के लिए स्थायी आजीविका का निर्माण किया है। वर्ष 2024-25 में उन्होंने खेती और पशुपालन से दो लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की। कृषि के साथ उन्होंने डेयरी गतिविधियों को भी अपनाया है और वर्तमान में उनके पास लगभग 15 गायें हैं, जिनसे उन्हें नियमित अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
आज संजुक्ता दीदी अपने क्षेत्र में एक सफल महिला कृषक के रूप में पहचान बना चुकी हैं। उनकी सफलता ने गाँव और आसपास की महिलाओं को आधुनिक खेती, ड्रिप सिंचाई और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
संजुक्ता दीदी की कहानी यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और आत्मविश्वास के बल पर ग्रामीण महिलाएँ भी आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।