विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मांगीलाल रूंगटा विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सोमवार को मांगीलाल रूंगटा +2 उच्च विद्यालय, चाईबासा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूक करना, मानसिक तनाव एवं भावनात्मक समस्याओं को समझने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इस दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और संतुलित डिजिटल जीवनशैली के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने की जानकारी दी गई।

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कार्यक्रम में प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल, सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल पदाधिकारी डॉ. मीनू कुमार, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिव चरण हसदा, मनोचिकित्सक डॉ. दीपमाला, नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. भाग्यश्री कर, विद्यालय के प्राचार्य, जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यालय के कर्मी, एएनएम नर्सिंग स्कूल की छात्राएं एवं प्रशिक्षु, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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बच्चों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल ने कहा कि बच्चों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण है, मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही आवश्यक है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने से बच्चों की एकाग्रता बढ़ती है, सीखने की क्षमता में सुधार होता है और वे अपनी भावनाओं को समझने के साथ जीवन की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की भावनाओं, समस्याओं और दैनिक गतिविधियों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर सहयोग दिया जा सके।

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मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बचें विद्यार्थी

जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार ने विद्यार्थियों को मोबाइल पर वीडियो देखने, गेम खेलने और सोशल मीडिया के इस्तेमाल में अत्यधिक समय व्यतीत करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलकूद, पुस्तक-पठन, संगीत, चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी रुचि विकसित करनी चाहिए। नियमित दिनचर्या अपनाने तथा पढ़ाई, मनोरंजन और शारीरिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी उन्होंने जोर दिया।

मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज न करें, विशेषज्ञों की लें मदद

सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसे शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व देना आवश्यक है। बच्चों में मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी के संकेत दिखाई देने पर उन्हें डांटने अथवा उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी बात समझने और सहयोग देने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों और शिक्षकों को बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिसमें वे बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। जरूरत पड़ने पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील

जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल पदाधिकारी डॉ. मीनू कुमार ने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। तनाव से बचने, पर्याप्त नींद लेने, नियमित व्यायाम करने और परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

उन्होंने मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय उनके बारे में खुलकर बात करने तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सलाह दी।

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डिजिटल जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना जरूरी

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिव चरण हसदा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखना जरूरी है, उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखना भी आवश्यक है। वर्तमान डिजिटल युग में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। विशेषकर किशोरों और युवाओं में इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और अन्य छोटे वीडियो देखने का चलन बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मनोरंजन के लिए सीमित समय तक वीडियो देखना सामान्य है, लेकिन लगातार कई घंटों तक मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने से पढ़ाई, कामकाज और पारिवारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल करने से नींद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे अगले दिन की कार्यक्षमता और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है।

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सकारात्मक गतिविधियों से बेहतर होता है मानसिक स्वास्थ्य

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपनी भावनाओं को समझना, समस्याओं को साझा करना, सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेना मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

साथ ही, अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों के प्रति सजग रहने तथा उन्हें सहयोगपूर्ण और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की अपील की गई।

By maskal.news

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