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झारखंड पुनरुत्थान अभियान की बैठक में पड़ाह राजा की हत्या की निंदा

झारखंड पुनरुत्थान अभियान की बैठक में पड़ाह राजा की हत्या की निंदा

चाईबासा : गैर-राजनीतिक सामाजिक संगठन झारखंड पुनरुत्थान अभियान की एक आवश्यक बैठक केंद्रीय अध्यक्ष सन्नी सिंकु की अध्यक्षता में उनके जिंतुगाड़ा स्थित आवास पर आयोजित की गई। बैठक में खूंटी जिले के एदेल संगा पड़ाह के राजा सोमा मुंडा की अज्ञात अपराधियों द्वारा की गई हत्या की कड़ी निंदा की गई।

इस अवसर पर रैयत संघर्ष समन्वय समिति, जगन्नाथपुर के अध्यक्ष सुमंत ज्योति सिंकु ने कहा कि पड़ाह राजा सोमा मुंडा की हत्या पारंपरिक सामाजिक स्वशासन व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की कि अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

बैठक में झारखंड पुनरुत्थान अभियान के जिला उपाध्यक्ष विकास केराई, जगन्नाथपुर प्रखंड अध्यक्ष विश्वनाथ बोबोंगा, संस्थापक सदस्य विनीत लागुरी तथा स्टूडेंट्स विंग के केंद्रीय अध्यक्ष अरिल सिंकु ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की।

पश्चिमी सिंहभूम में हाथी का आतंक, 16 लोगों की मौत

पश्चिमी सिंहभूम में हाथी का आतंक, 16 लोगों की मौत

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा, टोंटो, गोइलकेरा, नोवामुंडी, हाटगम्हरिया, मझगांव और कुमारडुंगी प्रखंडों में बीते एक सप्ताह से एक नर हाथी द्वारा लगातार जनहानि की घटनाएं सामने आ रही हैं। अब तक हाथी के हमले में 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिससे पूरे इलाके में भय और दहशत का माहौल है।

फिलहाल हाथी की मौजूदगी हाटगम्हरिया क्षेत्र में बताई जा रही है और उसके मझगांव व कुमारडुंगी की ओर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

इस गंभीर स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता एवं चाईबासा नगर आईटी सेल संयोजक दुवारिका शर्मा ने झारखंड सरकार और वन विभाग से मामले को आपात स्थिति मानते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित इलाकों में हाई अलर्ट घोषित कर 24×7 निगरानी, ड्रोन व ट्रैकिंग सिस्टम के उपयोग तथा प्रशिक्षित ट्रेंक्विलाइजेशन टीम की तैनाती की मांग की।

उन्होंने मृतकों के परिजनों को तुरंत सम्मानजनक मुआवजा, घायलों को निशुल्क इलाज और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए स्थायी अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

दुवारिका शर्मा ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात में घर से बाहर न निकलें, सुबह अंधेरे में शौच के लिए बाहर न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

पश्चिम सिंहभूम में हाथी हमलों पर वन विभाग सतर्क, सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम

पश्चिम सिंहभूम में हाथी हमलों पर वन विभाग सतर्क, सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम

चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले में लगातार हो रहे हाथियों के हमलों को देखते हुए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जिलेवासियों की सुरक्षा के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं। विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी के निर्देश पर चाईबासा और कोल्हान डिवीजन में व्यापक निगरानी और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।

जानकारी के अनुसार आरसीसीएफ जमशेदपुर, सीएफ चाईबासा सहित सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी जिला मुख्यालय में कैंप कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। गठित टीमों के माध्यम से प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है। लोगों को सतर्क करने के लिए सार्वजनिक घोषणाएं की जा रही हैं, साथ ही टॉर्च और पटाखों का वितरण भी किया गया है।

हाथियों की गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की तैनाती की गई है। 4 जनवरी से बंगाल से आई विशेषज्ञों की टीम हाथियों को मानव बस्तियों से दूर रखने और नुकसान को कम करने का कार्य कर रही है।

समस्या उत्पन्न कर रहे हाथी को बेहोश कर अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए 6 जनवरी 2026 को वंतारा से औपचारिक बातचीत शुरू की गई। वहीं 7 जनवरी 2026 को वाइल्डलाइफ SOS और मोबाइल वेटरनरी यूनिट, क्योंझर (ओडिशा) से चर्चा के बाद MVU क्योंझर (WTI) की टीम चाईबासा पहुंची।

इसके अलावा CCF वाइल्डलाइफ की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जो मौके पर कैंप कर आवश्यक कार्रवाई करेगी। प्रभावित क्षेत्रों में थर्मल ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। नियमानुसार पीड़ितों को अनुग्रह राशि और मुआवजा देने की प्रक्रिया जारी है।

हाथी हमलों में घायल लोगों का अस्पताल में इलाज कराया जा रहा है। PCCF वाइल्डलाइफ स्वयं चाईबासा का दौरा कर रहे हैं, जबकि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII), देहरादून से भी विशेषज्ञों को बुलाया गया है।

वन विभाग ने आम लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

लोक भवन में राज्यपाल से मिला रूढ़िजन्य आदिवासी समन्वय समिति का शिष्टमंडल

लोक भवन में राज्यपाल से मिला रूढ़िजन्य आदिवासी समन्वय समिति का शिष्टमंडल

रांची : रूढ़िजन्य आदिवासी समन्वय समिति का एक शिष्टमंडल बुधवार को लोक भवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मिला। अखिल भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी निशा उरांव के नेतृत्व में शिष्टमंडल में विभिन्न जनजातियों के लगभग 40 प्रधान शामिल थे। शिष्टमंडल ने पेसा नियमावली–2025 के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए इसके संशोधन के लिए राज्यपाल से पहल करने का आग्रह किया और इस संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा।

ज्ञापन में ग्राम सभा के गठन की प्रक्रिया पर आपत्ति व्यक्त की गई है। समिति का कहना है कि वर्तमान नियमावली में पारंपरिक ग्राम सभा का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन ग्राम सभा की सीमाओं की मान्यता और प्रकाशन की पूरी जिम्मेदारी जिला उपायुक्त को सौंप दी गई है। जबकि वर्ष 2023 में विधि विभाग द्वारा स्वीकृत और प्रकाशित नियमावली में ग्राम सभा का गठन परंपराओं और रूढ़ियों के अनुसार किए जाने का प्रावधान था।

शिष्टमंडल ने यह भी कहा कि नई नियमावली में “रूढ़ि” शब्द को हटा दिया गया है, जबकि पेसा कानून का मुख्य उद्देश्य ग्राम सभा के गठन में रूढ़ियों और परंपराओं को उचित स्थान देना है। पेसा की धारा 4(घ) के तहत प्रत्येक ग्राम सभा को अपनी परंपरा, रूढ़ि और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण का अधिकार प्राप्त है, लेकिन वर्तमान नियमावली में ग्राम सभा के गठन की जिम्मेदारी प्रशासन, विशेष रूप से उपायुक्त को दे दी गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में आदिवासी समाज में ग्राम सभा का गठन और बहुस्तरीय व्यवस्था सदियों से रूढ़ियों के आधार पर होती रही है, जिसमें सामाजिक और धार्मिक दोनों परंपराएं शामिल हैं। समिति ने यह भी दावा किया कि धर्मांतरण के बाद रूढ़ियों में बदलाव आता है और धर्मांतरित आदिवासी पारंपरिक कस्टमरी लॉ का पालन नहीं करते। ऐसे में उनके द्वारा पारंपरिक पदों पर बने रहना पेसा की मूल भावना के विपरीत है।

शिष्टमंडल ने आरोप लगाया कि वर्तमान पेसा नियमावली कानून की मूल भावना के साथ खिलवाड़ करती है और इसे संशोधित किए जाने की आवश्यकता है। इस पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि वे इस विषय से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार कर समुचित कार्रवाई करेंगे।

नोवामुंडी में हाथी हमले से छह की मौत, विधायक सोना राम सिंकू ने जताई संवेदना

नोवामुंडी में हाथी हमले से छह की मौत, विधायक सोना राम सिंकू ने जताई संवेदना

नोवामुंडी : नोवामुंडी प्रखंड की जेटेया पंचायत अंतर्गत ग्राम बावड़िया मुंडा टोला में 6 जनवरी 2026 की रात करीब 9 बजे जंगली हाथी के हमले में एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत कुल पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान सनातन मेरेल (50), झलक मोनी कुई (45), दयमंती मेरेल (8) और मुंगडू मेरेल (5) के रूप में हुई है।

वहीं, दूसरी घटना में बड़ापसिया टोला, डुगुड़ वसा निवासी मंगल बोबोंगा (26) की भी जंगली हाथी के हमले में मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक सोना राम सिंकू ने उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम को अवगत कराया। साथ ही अंचल अधिकारी नोवामुंडी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और वन विभाग के रेंजर से संपर्क कर पीड़ित परिवारों को शीघ्र मुआवजा और हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

विधायक सोना राम सिंकू ने घटना को अत्यंत हृदयविदारक बताया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सिंगबोंगा दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति दें।

घटना के बाद क्षेत्र में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की आवाजाही पर ठोस और स्थायी समाधान की मांग की है।

नोवामुंडी में हाथी हमले के पीड़ितों से मिले पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, शीघ्र मुआवजे और सुरक्षा उपायों की मांग

नोवामुंडी में हाथी हमले के पीड़ितों से मिले पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, शीघ्र मुआवजे और सुरक्षा उपायों की मांग

नोवामुंडी : पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत जेटेया पंचायत में जंगली हाथी के हमले से हुई दर्दनाक घटना के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा बुधवार को प्रभावित क्षेत्र पहुंचे। उन्होंने जेटेया गांव के बावड़िया मुंडा टोला में हाथी हमले में एक ही परिवार के चार सदस्यों तथा बड़ापसिया टोला, डुगुड़ वसा में मंगल बोबोंगा की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने हरसंभव सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद वन विभाग के रेंजर से बातचीत कर मृतकों के परिजनों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की तथा प्रशासन से राहत कार्यों में तेजी और संवेदनशीलता बरतने को कहा।
मधु कोड़ा ने क्षेत्र में बढ़ते हाथी आतंक को गंभीर बताते हुए लोगों की सुरक्षा के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस मौके पर नोवामुंडी मंडल अध्यक्ष चंद्र मोहन गोप, मीडिया प्रभारी विनित कुमार गोप, निखिलेश बोबोंगा, सुखराम कोड़ा, पीतांबर बोबोंगा, लक्ष्मण गोप सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

नशामुक्त भारत की ओर: सेराइकेला-खरसावां में जागरूकता अभियान

नशामुक्त भारत की ओर: सेराइकेला-खरसावां में जागरूकता अभियान

सेराइकेला-खरसावां : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA), रांची के दिशा-निर्देशों के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), सेराइकेला-खरसावां द्वारा जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में नशामुक्ति जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान NALSA की DAWN (Drug Awareness and Wellness Navigation) योजना–2025 के अंतर्गत आयोजित किया गया।
अभियान के दौरान पैरालीगल वॉलंटियर्स ने झुग्गी-झोपड़ियों एवं ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी। युवाओं एवं अभिभावकों के साथ बैठकें आयोजित कर नशे से दूर रहने, बच्चों पर निगरानी रखने और आपसी संवाद बढ़ाने पर जोर दिया गया। साथ ही, नशे की लत से बचाव, परामर्श एवं पुनर्वास केंद्रों से संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई।
इस अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं आशा बहुओं का सक्रिय सहयोग रहा। लोगों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबरों का भी प्रचार-प्रसार किया गया।
अभियान के दौरान आयोजित ग्राम सभाओं और सामुदायिक बैठकों में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं एवं युवा शामिल हुए। सभी ने नशे के खिलाफ जागरूक रहने और समाज को स्वस्थ बनाने का संकल्प लिया।
यह जागरूकता अभियान नशामुक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।

सरायकेला नगर पंचायत के समक्ष भाजपा का एकदिवसीय धरना प्रदर्शन

सरायकेला नगर पंचायत के समक्ष भाजपा का एकदिवसीय धरना प्रदर्शन

सरायकेला : भाजपा संगठन के प्रदेशव्यापी कार्यक्रम के तहत बुधवार को सरायकेला नगर पंचायत के समक्ष राज्य सरकार द्वारा निकाय चुनाव में हो रही देरी के विरोध में एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। इस दौरान भाजपा नेताओं ने निकाय चुनाव की तिथि शीघ्र घोषित करने, चुनाव दलीय आधार पर कराने तथा ईवीएम के माध्यम से मतदान कराने की मांग की।

धरना को संबोधित करते हुए भाजपा जिला उपाध्यक्ष राजा सिंहदेव ने कहा कि वर्ष 2018 में रघुवर सरकार के कार्यकाल में निकाय चुनाव दलीय आधार पर और ईवीएम के माध्यम से संपन्न कराए गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि ईवीएम से चुनी गई वर्तमान सरकार अब ईवीएम से चुनाव कराने से क्यों पीछे हट रही है। भाजपा की स्पष्ट मांग है कि निकाय चुनाव ईवीएम से ही कराए जाएं।

सोना राम बोदरा ने बताया कि इस संबंध में महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें सरकार से शीघ्र चुनाव तिथि घोषित करने, दलीय आधार पर चुनाव कराने और ईवीएम के माध्यम से निष्पक्ष मतदान कराने की मांग की जाएगी।

कार्यक्रम को हरेकृष्ण प्रधान, मीनाक्षी पटनायक, देवाशीष राय, सानंद आचार्य, माइकल महतो और बद्रीनाथ दोरोगा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बद्रीनाथ दोरोगा ने की, संचालन सुमित चौधरी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मुरलीधर प्रधान ने दिया।

धरना प्रदर्शन में जिला मंत्री सूर्या देवी, कबीता दास, रीता दुबे, राजकुमार सिंह, मंडल महामंत्री सुमित चौधरी, मंडल अध्यक्ष मनोज महतो, मुरलीधर प्रधान, बीजु दत्ता, गणेश महांती, पिंकी मोदक, तुषार दुबे, चिरंजीवी महापात्र, परशुराम कबी, आजम्बर मुखी सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

चाईबासा में बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान के तहत अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला आयोजित

चाईबासा में बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान के तहत अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला आयोजित

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा के कोल्हान विश्वविद्यालय सभागार में समाज कल्याण निदेशालय, झारखंड के तत्वावधान में “सुरक्षित एवं सशक्त महिला–सशक्त झारखंड” के उद्देश्य से बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान के तहत अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन राजस्व एवं भूमि सुधार तथा परिवहन विभाग के मंत्री दीपक बिरुवा ने किया। इस अवसर पर जिला उपायुक्त चंदन कुमार, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सिविल सर्जन डॉ. भारती गोरती मिंज, अपर उपायुक्त प्रवीण केरकेट्टा, सदर अनुमंडल पदाधिकारी संदीप अनुराग, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्वेता भारती सहित जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, पुलिस अधिकारी, मानकी-मुंडा, जनप्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से की गई तथा अतिथियों का स्वागत पौधा, अंग वस्त्र और मोमेंटो देकर किया गया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा कि बाल विवाह और डायन प्रथा समाज की गंभीर कुरीतियां हैं, जो महिलाओं और बालिकाओं के विकास, शिक्षा और सुरक्षा में बाधा बनती हैं। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह कानूनन अपराध है। मंत्री ने उपस्थित लोगों से बाल विवाह एवं डायन प्रथा के खिलाफ सभी स्तरों पर जागरूकता फैलाने की अपील की और शपथ दिलाई।

जिला उपायुक्त चंदन कुमार ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार मंईया सम्मान योजना, सावित्रीबाई फूले किशोरी समृद्धि योजना और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी योजनाएं चला रही है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य बाल विवाह और डायन प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से समाप्त करना है। साथ ही उन्होंने महिला हेल्पलाइन 181 और इमरजेंसी सेवा 112 की जानकारी दी।

उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने कहा कि यदि बेटियों को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण मिले तो वे हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, जिसका उदाहरण हाल के दिनों में खेल जगत में सफल महिला टीमें हैं।

सरायकेला-खरसावां में नशामुक्ति जागरूकता अभियान आयोजित

सरायकेला-खरसावां में नशामुक्ति जागरूकता अभियान आयोजित

सरायकेला : नालसा, नई दिल्ली एवं झालसा, रांची के दिशा-निर्देशों के अनुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डीएलएसए सरायकेला-खरसावां रमाशंकर सिंह के मार्गदर्शन और डीएलएसए सचिव (प्रभारी) अनामिका किस्कु के पर्यवेक्षण में बुधवार को जिले के विभिन्न ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में नशामुक्ति जागरूकता अभियान चलाया गया।

यह अभियान नालसा की महत्वाकांक्षी डान (Drug Awareness and Wellness Navigation) योजना, 2025 के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य भारत को नशामुक्त बनाना है।

अभियान के दौरान पैरालीगल वॉलंटियर्स ने झुग्गी-झोपड़ियों और ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर लोगों से संवाद किया तथा नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। युवाओं और माता-पिता के साथ बैठकों का आयोजन कर नशे से दूर रहने, बच्चों पर निगरानी रखने और आपसी संवाद बढ़ाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों द्वारा नशे की लत से बचाव के उपाय बताए गए और जरूरतमंदों को परामर्श उपलब्ध कराया गया।

इसके साथ ही नशे से पीड़ित व्यक्तियों के लिए उपलब्ध पुनर्वास केंद्रों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। अभियान को प्रभावी बनाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं आशा बहुओं की सक्रिय भागीदारी रही। लोगों की सहायता के लिए विभिन्न हेल्पलाइन नंबर भी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए गए।

अभियान के तहत ग्राम सभाओं, मोहल्ला बैठकों और सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, किशोर और युवा शामिल हुए। सभी ने नशे के खिलाफ संकल्प लिया और समाज को स्वस्थ व सुरक्षित बनाने की प्रतिबद्धता जताई।