चाईबासा | एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष सह राँची लोस एवं ईचागढ़ विस सीट से चुनाव लड़ चुके पूर्व प्रत्याशी सह राजनीतिक कार्यकर्ता धी. रामहरि पेरियार ने देश में लागू विभिन्न नीतियों और उनसे उत्पन्न हालातों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज आम जनता लगातार ऐसे फैसलों का बोझ झेल रही है, जिनका सीधा असर उनके जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी जैसे फैसलों ने आम लोगों को अपने ही पैसे के लिए घंटों लाइनों में खड़ा रहने को मजबूर किया, जिससे भारी आर्थिक और मानसिक संकट उत्पन्न हुआ। इसके बाद कोरोना काल में लागू प्रतिबंधों और नीतियों ने जनता को लंबे समय तक घरों में सीमित कर दिया, जिसके प्रभाव आज भी समाज में देखे जा सकते हैं।

धी. रामहरि पेरियार ने आरोप लगाया कि वर्तमान में रसोई गैस जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी और महंगाई ने आम परिवारों की कमर तोड़ दी है। लोग लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं, और स्थिति ऐसी बन रही है कि आम आदमी के लिए सामान्य जीवन जीना भी कठिन होता जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन मुद्दों पर सरकार के साथ-साथ विपक्ष भी अपेक्षित भूमिका नहीं निभा रहा है। जनता के सवालों को मजबूती से उठाने के बजाय चुप्पी साध ली गई है, जो लोकतंत्र के लिए घातक संकेत है।
धी. रामहरि पेरियार ने स्पष्ट शब्दों में कहा जब सरकार और व्यवस्था जनता की समस्याओं का समाधान करने में विफल हो जाए, तब जनता को खुद जागना पड़ता है। अधिकार मांगने से नहीं, लड़ने से मिलते हैं, लेकिन यह संघर्ष संवैधानिक और शांतिपूर्ण होना चाहिए।
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों, सवाल पूछें और एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन के लिए तैयार रहें।जनता से अपील अब समय आ गया है कि जनता खामोश दर्शक नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली ताकत बने।

