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सरायकेला छऊ कार्यशाला का शुभारंभ

सरायकेला छऊ कार्यशाला का शुभारंभ

सरायकेला : सरायकेला छऊ नृत्य के संरक्षण एवं विकास के लिए निरंतर कार्यरत संस्था आचार्य छऊ नृत्य विचित्रा में एक विशेष कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। उद्घाटन पद्मश्री गुरु शशधर आचार्य, सीआरपीएफ 134 बटालियन के द्वितीय कमांडेंट दीपेंद्र कुमार, सहायक कमांडेंट, सरायकेला के पूर्व क्रिकेटर एवं समाजसेवी जलेश कवि तथा सरायकेला विधायक के प्रतिनिधि सनद आचार्य ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

संस्था के सह निदेशक रंजीत कुमार आचार्य ने बताया कि मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल से 25 कलाकार सरायकेला छऊ की विशेष शिक्षा प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचे हैं। इन कलाकारों के लिए आठ दिवसीय आवासीय एवं भ्रमणशील कार्यशाला आयोजित की गई है, जो 15 जनवरी तक चलेगी। कार्यशाला में सरायकेला छऊ नृत्य का नाट्य कला में प्रयोग, क्षेत्रीय संगीत, मुखौटा परिचय, शारीरिक अंग संचालन एवं नृत्य चलन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पद्मश्री गुरु शशधर आचार्य के नेतृत्व में चल रही इस कार्यशाला में नत्थू महतो (संगीत), गुरु शशधर आचार्य (आंगिक अभिनय), गुरु दिलीप कुमार आचार्य (मुखौटा निर्माण) तथा गुरु सुकांत आचार्य (वाद्य यंत्र) प्रशिक्षण दे रहे हैं। मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय के 25 सदस्यीय दल में तरुण पांडे और हेमराज तिवारी भी शामिल हैं।

कार्यशाला के समापन के बाद नाटक चित्रांगदा का मंचन किया जाएगा, जिसमें सरायकेला छऊ नृत्य का प्रयोग होगा। उद्घाटन समारोह में सतीश मोदक द्वारा हंस नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई।

सरायकेला में रोजगार मेला आयोजित, 188 अभ्यर्थी शॉर्टलिस्ट

सरायकेला में रोजगार मेला आयोजित, 188 अभ्यर्थी शॉर्टलिस्ट

सरायकेला : नियोजनालय सह मॉडल कैरियर सेंटर, सरायकेला-खरसावां के तत्वावधान में शुक्रवार को जिला नियोजनालय, सरायकेला परिसर में रोजगार मेला आयोजित किया गया।
जिला नियोजन पदाधिकारी आलोक कुमार तोपनो ने बताया कि रोजगार मेला में रामकृष्ण फोर्जिंग्स लिमिटेड, श्याम स्टील लिमिटेड, रामकृष्ण कास्टिंग सॉल्यूशन लिमिटेड, बीएन ट्रैक्टर्स, मित्तल मोटर्स, यूनिक सॉल्यूशन, संजीव रमन सिक्योरिटी, टैलेंटनेक्सा सर्विसेज लिमिटेड, युवा शक्ति फाउंडेशन, प्रधान कंस्ट्रक्शन सहित कुल 15 संस्थानों ने भाग लिया। इन संस्थानों द्वारा रोबोट इंजीनियर, टर्निंग ऑपरेटर, फिटर, एचएमसी/वीएमसी ऑपरेटर, मेंटेनेंस व क्वालिटी इंजीनियर, सेल्समैन, टेलीकॉलर, ऑटोमोबाइल मैकेनिक, वेल्डर, सेफ्टी सुपरवाइजर, लाइन इंस्पेक्टर, क्रेन ऑपरेटर, ट्रेनी, स्टोर कीपर, सिक्योरिटी गार्ड, ड्राइवर सहित विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए सरायकेला-खरसावां एवं जमशेदपुर में कुल 188 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया।
उन्होंने बताया कि जिला नियोजनालय सह मॉडल कैरियर सेंटर के माध्यम से नियमित रूप से रोजगार शिविर एवं रोजगार मेला आयोजित किया जाता है। उन्होंने जिले के रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं से अपील की कि वे भविष्य में भी इन आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें। भर्ती की पूरी प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क है।
रोजगार मेला में जिला नियोजन पदाधिकारी आलोक कुमार तोपनो, वाईपी रवि प्रकाश सिंह, नियोजनालय कर्मी सुरेंद्र रजक, सुजीत सरदार सहित अन्य कर्मी एवं विभिन्न संस्थानों के एचआर मैनेजर उपस्थित रहे।

पाँचमोहली में दिशोम सोहराय के दौरान चंपाई सोरेन का हमला, पेसा नियमावली को बताया आदिवासी विरोधी

पाँचमोहली में दिशोम सोहराय के दौरान चंपाई सोरेन का हमला, पेसा नियमावली को बताया आदिवासी विरोधी

जामताड़ा : जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड अंतर्गत पाँचमोहली गांव में आयोजित दिशोम सोहराय कार्यक्रम में शामिल हुए चंपाई सोरेन ने पेसा नियमावली को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली के नाम पर राज्य सरकार ने आदिवासियों को ठगने का काम किया है।
चंपाई सोरेन ने कहा कि पेसा अधिनियम 1996 राज्यों को यह निर्देश देता है कि वे आदिवासियों की रूढ़िजन्य विधि, सामाजिक-धार्मिक परंपराओं और संसाधनों की पारंपरिक प्रबंधन व्यवस्था के अनुरूप नियमावली बनाएं, लेकिन झारखंड सरकार ने इन महत्वपूर्ण विषयों को नियमावली से हटा दिया है।
उन्होंने कहा कि पेसा का मूल उद्देश्य आदिवासी समाज की परंपरागत स्वशासन व्यवस्था को संवैधानिक संरक्षण देना है, लेकिन वर्तमान सरकार उन लोगों को लाभ पहुंचाना चाहती है, जिन्होंने पहले ही आदिवासी परंपराओं को छोड़ दिया है।
चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि पहले टीएसी और अब पेसा के माध्यम से राज्यपाल के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं और अधिकांश अधिकार उपायुक्त को दिए जा रहे हैं, जिससे सरकार पूरी व्यवस्था पर नियंत्रण रखना चाहती है। उन्होंने इसे पेसा की मूल भावना के खिलाफ बताया। साथ ही कहा कि नियमावली में ग्राम सभाओं के अधिकारों में की गई कटौती अक्षम्य है।
उन्होंने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय बनी नियमावली में आदिवासियों की रूढ़िजन्य परंपराओं और धार्मिक प्रथाओं को शामिल किया गया था। साथ ही सीएनटी-एसपीटी अधिनियम के उल्लंघन के मामलों में ग्राम सभा को जमीन वापस कराने का अधिकार दिया गया था और अनुसूचित क्षेत्र की जमीन के हस्तांतरण से पहले उपायुक्त को ग्राम सभा की मंजूरी लेने का प्रावधान था।
चंपाई सोरेन ने कहा कि महागठबंधन सरकार पेसा को कमजोर कर आदिवासियों के अस्तित्व को खतरे में डाल रही है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठ और धर्मांतरण जैसी समस्याओं से पहले ही जूझ रहे आदिवासी समाज को पेसा से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन नई नियमावली ने उन उम्मीदों को तोड़ दिया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आदिवासी विरोधी रवैये के खिलाफ गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए एक बार फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

पश्चिम सिंहभूम में हाथी आतंक बेकाबू, ग्रामीणों में दहशत विभागीय दावों के विपरीत जमीनी हकीकत भयावह

पश्चिम सिंहभूम में हाथी आतंक बेकाबू, ग्रामीणों में दहशत विभागीय दावों के विपरीत जमीनी हकीकत भयावह

चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले के सुदूर जंगल और पहाड़ी इलाकों में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। जंगल से सटे गांवों में हाथियों की नियमित आवाजाही, फसलों की भारी तबाही, घरों को नुकसान और जानमाल के खतरे ने आम लोगों को दहशत में जीने को मजबूर कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ग्रामीण रात में घर से बाहर निकलने से डर रहे हैं, बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे अधिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
प्रभावित इलाकों से लगातार सूचनाएं मिल रही हैं कि सिंगल हाथी गांवों और खेतों में घुसकर फसलें नष्ट कर रहे हैं, कई स्थानों पर आवागमन बाधित हो गया है और किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। जंगल-पहाड़ से सटे गांवों में जनजीवन लगभग ठप होता जा रहा है।
वन विभाग द्वारा हाथी नियंत्रण को लेकर दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी बेकाबू हैं। न तो प्रभावी अलर्ट सिस्टम काम कर रहा है और न ही पर्याप्त गश्ती दल दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित परिवारों को समय पर मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था न मिलने से आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
       इस संबंध में गोप, गौड़ आरक्षण आंदोलन समिति के केंद्रीय अध्यक्ष धी रामहरि पेरियार ने अपील करते हुए कहा कि पश्चिम सिंहभूम में हाथियों का बढ़ता आतंक अब केवल वन्यजीव समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय संकट बन चुका है। ग्रामीण भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं, जबकि प्रशासन और विभागीय दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कागजी योजनाओं से नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी कार्रवाई से ही लोगों की जान बचाई जा सकती है।
     रामहरि ने जनता से अपील की कि वे अत्यंत सतर्क रहें, हाथियों को किसी भी स्थिति में उकसाएं नहीं, उनके रास्ते में न जाएं और रात के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों की विशेष सुरक्षा सुनिश्चित करें तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन या वन विभाग को सूचना दें। उन्होंने जोर देकर कहा, आपका जीवन बेहद कीमती है।
साथ ही उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से मांग की कि हाथी प्रभावित गांवों में 24×7 निगरानी व्यवस्था लागू की जाए, त्वरित चेतावनी (अलर्ट) सिस्टम को प्रभावी बनाया जाए, हाथियों के सुरक्षित कॉरिडोर चिन्हित कर अतिक्रमण हटाया जाए, अतिरिक्त गश्ती दल तैनात किए जाएं और पीड़ित परिवारों को शीघ्र एवं पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
    अंत में रामहरि ने कहा कि मानव जीवन सर्वोपरि है। जब तक ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती और जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक इस मुद्दे पर आवाज उठती रहेगी और प्रशासन को इसकी पूरी जवाबदेही लेनी

पेयजल संकट के विरोध में 48 घंटे का उपवास, चापाकल व जलमीनार मरम्मत की मांग

पेयजल संकट के विरोध में 48 घंटे का उपवास, चापाकल व जलमीनार मरम्मत की मांग

चाईबासा : आदिवासी किसान मजदूर पार्टी (AKMP) के शाह जिला परिषद सदस्य मान सिंह तिरिया के नेतृत्व में पेयजल समस्या को लेकर सुबह 10 बजे से 48 घंटे का उपवास शुरू किया गया। क्षेत्र के ग्रामीण गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में लगभग 50 प्रतिशत चापाकल खराब पड़े हैं, लेकिन मरम्मत की मांग के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि डीएमएफटी फंड का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस फंड से पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है, लेकिन जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ठेकेदार मिलकर इस राशि को पीसीसी पथ निर्माण जैसे कार्यों में खर्च कर रहे हैं और कमीशनखोरी में लिप्त हैं, जबकि ग्रामीणों की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पूर्व में पेयजल और बिजली की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पर जिला प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज कर दिया गया, जिससे गरीबों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उपवास पर बैठे लोगों ने कहा कि पानी जीवन का सबसे बहुमूल्य संसाधन है और वे केवल पेयजल की मांग कर रहे हैं, किसी की जमीन नहीं।
इस मुद्दे को जिला परिषद की सामान्य बैठक में चापाकल एवं जलमीनार की मरम्मत को लेकर उठाए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उपवास के माध्यम से मांग की गई कि सभी खराब पड़े चापाकल और जलमीनारों की मरम्मत अविलंब कराई जाए।

बुजुर्गों को साक्षर बनाने के लिए दुःखू टोला में विशेष जागरूकता अभियान शुरू

बुजुर्गों को साक्षर बनाने के लिए दुःखू टोला में विशेष जागरूकता अभियान शुरू

जमशेदपुर : सारजोम युवा फाउंडेशन के अध्यक्ष सागर हेंब्रम ने दुःखू टोला गांव में बुजुर्ग महिला एवं पुरुषों को शिक्षित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य बुजुर्गों को साक्षर बनाना, उन्हें अपने हस्ताक्षर करने तथा डिजिटल माध्यमों की जानकारी देना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

अभियान के तहत बुजुर्गों को अक्षर ज्ञान और अंकों की पढ़ाई कराई जाएगी। यह कार्यक्रम प्रत्येक रविवार को आयोजित किया जाएगा। शिक्षण कार्य की जिम्मेदारी स्वयं सागर हेंब्रम ने संभाली है।

सरायकेला नगर पंचायत के सफाई कर्मियों की हड़ताल समाप्त

सरायकेला नगर पंचायत के सफाई कर्मियों की हड़ताल समाप्त

सरायकेला : सरायकेला नगर पंचायत के सफाई कर्मी पिछले कुछ महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण गुरुवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। हड़ताल की सूचना नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी को दी गई, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे और सफाई कर्मियों से बातचीत की।

मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि मकर संक्रांति और टुसु पर्व जैसे बड़े त्योहारों के समय शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होना चिंताजनक है, लेकिन समय पर वेतन न देना मजदूरों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हक और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने नगर पंचायत के प्रशासक से फोन पर संपर्क कर दो दिनों के भीतर बकाया वेतन भुगतान की मांग की। प्रशासक ने आश्वासन दिया कि डेढ़ माह का बकाया वेतन दो दिनों के भीतर कर्मचारियों के खातों में जमा कर दिया जाएगा।

वेतन भुगतान का आश्वासन मिलने के बाद सफाई कर्मियों ने मनोज कुमार चौधरी का धन्यवाद किया और हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। इस मौके पर श्री चौधरी ने कहा कि सकारात्मक माहौल में समस्याओं का समाधान करना ही उनका उद्देश्य है और वे इसके लिए लगातार प्रयास करते रहेंगे।

सरायकेला–खरसावाँ: सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान आयोजित

सरायकेला–खरसावाँ: सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान आयोजित

सरायकेला : राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के आठवें दिन गुरुवार को जिला परिवहन पदाधिकारी गिरिजा शंकर महतो के नेतृत्व में सरायकेला प्रखंड के पठानमारा पंचायत में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।
अभियान के दौरान आम लोगों को गुड सेमेरिटन (Good Samaritan) नीति की जानकारी दी गई। बताया गया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता करने वाले नागरिकों को कानून के तहत सुरक्षा और संरक्षण मिलता है। लोगों से अपील की गई कि दुर्घटना की स्थिति में बिना डर पीड़ितों की तत्काल मदद करें।
इस अवसर पर सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए संजय होनहागा (पूर्व मुखिया, पठानमारा), रामराय गोडसोरा (ग्राम प्रधान, पठानमारा), शत्रुघन तीयू (ग्राम प्रधान, कोपे) और नेहरू पूर्ति (ग्राम प्रधान, बड़ा टंगरानी) को सड़क सुरक्षा दूत के रूप में नामित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। साथ ही हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग, गति सीमा के पालन तथा नशे की हालत में वाहन न चलाने के प्रति जागरूक किया गया। इस मौके पर जिला सड़क सुरक्षा टीम के सदस्य भी मौजूद थे।

खूंटी में पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में झारखंड में आक्रोश, चाईबासा में कैंडल मार्च

खूंटी में पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में झारखंड में आक्रोश, चाईबासा में कैंडल मार्च

चाईबासा : खूंटी जिले में सामाजिक एवं पारंपरिक नेतृत्वकर्ता तथा जल–जंगल–जमीन के संरक्षक पड़हा राजा सोमा मुंडा की अज्ञात अपराधियों द्वारा गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद पूरे झारखंड में शोक और आक्रोश का माहौल है। इस घटना के विरोध में राज्य के विभिन्न जिलों में सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किए तथा अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी और उन्हें फांसी की सजा देने की मांग की।

इसी क्रम में चाईबासा के तंबू चौक पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। कैंडल मार्च के दौरान लोगों ने दिवंगत सोमा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

वक्ताओं ने कहा कि पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की परंपरा, सम्मान और सामाजिक व्यवस्था पर हमला है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने तथा उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।

कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन से न्याय सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

— साधु हो
देशाउली फाउंडेशन

जल-जंगल-जमीन के संघर्षकर्ता पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या, झारखंड में आक्रोश

जल-जंगल-जमीन के संघर्षकर्ता पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या, झारखंड में आक्रोश

जगन्नाथपुर : झारखंड में ग्रामसभा को सशक्त बनाने हेतु पेशा अधिनियम 1996 के प्रभावी नियमावली की मांग और स्थानीय अड़की क्षेत्र अंतर्गत सोना खान के विरोध में जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रहे पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या ने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है। इसे राज्य के आदिवासी आंदोलन के लिए एक गंभीर चुनौती माना जा रहा है। इससे पूर्व भी भूमि माफियाओं के विरोध में आवाज उठाने वाले सुभाष मुंडा की हत्या हो चुकी है।
झारखंड आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया है कि ‘आबुआ दिशूम, आबुआ राज’ का दावा करने वाली सरकार के कार्यकाल में जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की लगातार हत्याएं हो रही हैं। संगठन ने संथाल परगना में सूर्यनारायण हांसदा की हत्या पर भी राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। मोर्चा का कहना है कि सरकार जल, जंगल और जमीन माफियाओं के दबाव में काम कर रही है।
संयुक्त मोर्चा ने सोमा मुंडा की निर्मम हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर कठोरतम सजा दिलाने की मांग की है। साथ ही मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा एवं एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई है। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि सोना खान किसी बड़े उद्योगपति को न देकर ग्रामसभा के माध्यम से संचालित किया जाना चाहिए।
इस हत्याकांड के विरोध में नोवामुंडी चौक पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य सलाहकार सह पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा सहित अशोक पान, अंबिका दास, फिरोज अहमद, राजेंद्र बालमुचू, साहू पुरती, राकेश राऊत, गौतम मिंज, कृष्णा सिंकु, लक्ष्मण बालमुचू, ज्योति तिरिया, हरीश बालमुचू, अंजलि लोंगा, सुमन बारजो एवं गीता बारजो उपस्थित थे।