रांची | झारखंड के सरकारी स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षकों को अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। यह प्रावधान झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 की नई नियमावली में किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के निर्देश के अनुसार, सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 1 सितंबर 2025 से पांच साल या उससे कम शेष है, उन्हें परीक्षा से छूट दी जाएगी। इससे अधिक सेवा अवधि वाले शिक्षकों को परीक्षा देनी होगी। नियमावली के तहत सेवारत सहायक शिक्षक और सहायक अध्यापक भी इसमें शामिल हो सकेंगे। जो शिक्षक परीक्षा में शामिल नहीं होंगे, उनके लिए अलग से टीईटी आयोजित किया जा सकता है।

जेटेट के लिए ऑनलाइन आवेदन 21 अप्रैल से शुरू होगा। इस बीच शिक्षक संघों ने नियमावली का विरोध शुरू कर दिया है, जिससे आंदोलन तेज होने की संभावना है। संघों का कहना है कि भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को हटाना गलत है और सरकार को इन्हें फिर से शामिल करना चाहिए।
जानकारी के अनुसार, राज्य के पलामू प्रमंडल के लातेहार, डाल्टनगंज और गढ़वा में भोजपुरी बोली जाती है। वहीं बोकारो, धनबाद और रांची में भी बड़ी संख्या में भोजपुरी भाषी लोग रहते हैं। मगही भाषा लातेहार, डाल्टनगंज, गढ़वा और चतरा में प्रचलित है। इसके अलावा साहिबगंज, गोड्डा, देवघर, पाकुड़, दुमका सहित कोडरमा, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो में अंगिका बोली जाती है।
वहीं डीएलएड और बीएड कर चुके युवाओं से आंदोलन में शामिल होकर अपनी मांगों को मजबूत करने की अपील की गई है।

